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	<title>श्री सुधासागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>हर सौ साल में कोई न कोई तीर्थक्षेत्र बनना ही चाहिए : निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज  </title>
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		<pubDate>Mon, 11 Nov 2024 16:23:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वास्तविक रूप से देखा जाए तो सनातन धर्म, जैन धर्म ही है, हम सनातनी हैं हमारे धर्म के कोई संस्थापक नहीं है, न ऋषभदेव है न महावीर है, हमारे धर्म का कोई कर्ता धर्ता नहीं है। सनातन धर्म का प्रचार हम लोगों को करना चाहिए। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230; जब हम संगोष्ठी के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वास्तविक रूप से देखा जाए तो सनातन धर्म, जैन धर्म ही है, हम सनातनी हैं हमारे धर्म के कोई संस्थापक नहीं है, न ऋषभदेव है न महावीर है, हमारे धर्म का कोई कर्ता धर्ता नहीं है। सनातन धर्म का प्रचार हम लोगों को करना चाहिए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>जब हम संगोष्ठी के विभिन्न विषयों को देखते हैं तो जैनदर्शन एक ऐसा बहुआयामी सर्वोदय के रूप में प्रस्तुत होता है कि लोग संदेह में पड़ जाते हैं कि सत्य क्या है, जैनदर्शन सत्य किसे मानता है, जैन दर्शन में न राग का निषेध है, न वीतराग का निषेध है। जितना वीतराग को स्वीकार किया गया, उतना ही राग को। वीतराग का स्वरूप क्या होना चाहिए, यह तो जैनदर्शन में मुख्य पद पर अधिष्ठित है लेकिन विशेषता ये है कि वीतराग धर्म से जाना जाने वाला धर्म राग की विशेषता बताता है कि राग कैसा होना चाहिए।</p>
<p>नाच गान आदि ललित कालाओं का वर्णन ऋषभदेव ने किया, वो तो वीतराग मार्ग के संस्थापक थे, वह तो संसार को तारने के लिए तीर्थंकर बने थे, जैन दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता है कि वह किसी भी चीज का निषेध नहीं करता, पाप का भी निषेध नहीं करता यदि तुम्हें पापी बनना है, नरक में जाना है तो नरक जाने की भी विधि बताई। बस शर्त एक ही है तुम कौन हो, 72 कलाओं में चोर कला बता दी, धुत को कला में ले लिया। उनके जन्मदिन पर नीलांजना का नृत्य होना और उसमे मगन होना, ललित कथा की रुचि का प्रतीक है।</p>
<p><strong>राग भी संस्कारित होता है </strong></p>
<p>जैनदर्शन हर भूमिका का कथन करता है, तुम कौन हो, तुम्हारा प्रयोजन क्या है? तुम्हारी अर्थ क्रिया क्या है? इन पर विचार करते हैं तो जैनदर्शन में राग की क्रियाओं को भी व्यवस्थित किया गया। राग का समर्थन नहीं किया गया, राग को उत्श्रृंखल होने से बचाया। ललित कलाओं का अर्थ यह नहीं है कि राग में रंगायमान करना, उद्दंड, उत्श्रृंखल न हो, वो रावण जैसा न हो। राग की भी एक संस्कृति होती है, राग भी संस्कारित होता है। राग ऐसा करो जिसमें संस्कृति बने, संस्कार बनें। विवाह को संस्कृति में ले लिया जो राग है, संसार का बढ़ावा देने वाला है। नाचगान होना चाहिए, उन्होंने निषेध नहीं किया लेकिन नाचगान अश्लील नहीं होना चाहिए, ललित कला का इतना सुंदर वर्णन किया कि नीलांजना का कोई भी अंग प्रदर्शित नहीं होता, अर्धनग्न होकर नाच नहीं किया जाता। नीलांजना जितनी देर नाचती रही पूरे समय उसकी दृष्टि ऋषभदेव पर रही। उसकी दृष्टि में फुहड़ता, अश्लीलता नहीं थी, उसकी दृष्टि में एक संस्कार, एक कला थी।</p>
<p><strong>मंदिर निर्माण जैनियों का असाधारण प्रतीक है</strong></p>
<p>ऋषभदेव के शिल्प कला में मंदिर मानस्तंभ आदि आये, ये जैनदर्शन की ही देन है। दुनिया में किसी भी संप्रदाय में मंदिर का, प्रतिमाओं का उल्लेख नहीं है क्योंकि सब अद्वेतवादी है। मंदिर निर्माण जैनियों का असाधारण प्रतीक है, अकृत्रिम चैत्यालय उसका प्रतीक है और जब कर्मभूमि की रचना हुई तब सौधर्मेन्द्र ने पाँच चैत्यालयों की रचना की, एक मध्य में व चार दिशाओं में। ये अनादि अनन्त कलाएं है जो भोगभूमि के समय तिरोहित हो गयी, उनको उद्घाटित ऋषभदेव ने किया।</p>
<p>देवगढ़ में राजा ने कहा कि मैं तुम्हारी एक भी मूर्ति सुरक्षित नहीं रहने दूंगा, मेरा संकल्प है, इसलिए जैनियों आप लोग मूर्ति बनाना बन्द करो, मूर्ति की स्थापना बन्द करो। एक जैनी श्रावक ने कहा राजन आप राजा है, खण्डित करने का आपका संकल्प है, मैं आपको रोकने वाला नहीं हूँ लेकिन आप भी मुझे बनाने से नहीं रोक सकते। कहते हैं कि राजा खंडित करते-करते थक गया लेकिन बनाने वाला जीत गया, देवगढ़ इसका प्रतीक है। देवगढ़ के 50 किलोमीटर के अंदर आज भी मूर्तियाँ मिलती है, इसलिए जैनदर्शन का आसाधारण गुण है तीर्थक्षेत्र, मूर्ति विद्या।</p>
<p><strong>समवशरण में पहले मानस्तंभ में मूर्ति का दर्शन करना पड़ता है</strong></p>
<p>जब भगवान साक्षात पृथ्वी पर जीवित होते हैं, उनके सामने मूर्ति की कीमत होती है। समवशरण में पहले मानस्तंभ में मूर्ति का दर्शन करना पड़ता है, चैत्यवृक्ष में चैत्यों के ऊपर मूर्तियां होती है उनको नमस्कार करो। यानी जिनेन्द्र भगवान के सामने मूर्ति उतनी ही महत्वपूर्ण थी, जितनी आज अपने लिए है। इसका अर्थ है कि जिनेंद्र भगवान ने मूर्ति को स्वीकार किया। ऋषभदेव के पहले भी मूर्ति थी, इसका प्रतीक है समवशरण।</p>
<p>मात्र पुराने तीर्थ क्षेत्र को ही सुरक्षित नहीं करना है, नए तीर्थक्षेत्रों की परंपरा हर युग में हर शताब्दी में, सौ साल में कोई न कोई तीर्थ बनना ही चाहिए, जिससे यह पता चले कि तीर्थक्षेत्रों की परंपरा अक्षुण्ण बनी रही। पुरानी मंदिरों की पूजा हो या न हो, हर शताब्दी में नई शिल्प की स्थापना होना चाहिए, जिससे सन्तति आगे बढ़ती है। तीर्थक्षेत्रों में मंदिरों की सबसे बड़े ह्रास का कारण है वास्तु दोष। आज तक भारत में ऐसा कोई मंदिर नहीं मिला, जिसमें वास्तु दोष हो और वो उजड़ गया हो और ऐसा भी मंदिर नहीं मिला जिसमें वास्तु दोष है और वो सुरक्षित बना रहा हो। यदि वास्तु से निर्दोष मंदिर है तो वह कभी समाप्त नहीं होगा, मंदिर से एक दिन वह तीर्थ बन जाएगा और अपना अतिशय दिखायेगा।</p>
<p>वास्तविक रूप से देखा जाए तो सनातन धर्म, जैन धर्म ही है, हम सनातनी हैं हमारे धर्म के कोई संस्थापक नहीं है, न ऋषभदेव है न महावीर है, हमारे धर्म का कोई कर्ता धर्ता नहीं है। सनातन धर्म का प्रचार हम लोगों को करना चाहिए।</p>
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		<title>भगवान तेरे ऊपर तो विश्वास है लेकिन तू कुछ करेगा यह विश्वास मत करना : धर्म सभा में हुए प्रवचन &#8211; निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Fri, 08 Nov 2024 09:41:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि तुम जो आयु लेकर आए हो उतने दिन जिंदा रहोगे मत सोचना, तुम पुण्य कमाकर आए हो तो पुण्यात्मा ही बने रहोगे मत सोचना, तुम पापी बन कर आए हो तो पापी ही रहोगे यह भी मत सोचना, महान निकृष्ट से निकृष्ट पाप कर्म [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि तुम जो आयु लेकर आए हो उतने दिन जिंदा रहोगे मत सोचना, तुम पुण्य कमाकर आए हो तो पुण्यात्मा ही बने रहोगे मत सोचना, तुम पापी बन कर आए हो तो पापी ही रहोगे यह भी मत सोचना, महान निकृष्ट से निकृष्ट पाप कर्म उदय में आने वाला पापी जिंदगी को पुण्यमय बना लेता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की एक रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>कौन क्या कितना कर पाता है यह सब अनियत है। कभी-कभी हमारे द्वारा वह कार्य भी हो जाते हैं जिसको करने की हमें कल्पना भी नहीं थी कि मैं यह कार्य भी करने लायक हूँ और कभी-कभी हम वह कार्य भी नहीं कर पाते हैं जिसके करने की तैयारी हमने की थी, हम पूरे समर्थ भी थे, पुरुषार्थ भी किया लेकिन नहीं कर पाए। क्या नियत करूँ कि मैं यह कर पाऊंगा या नहीं इसलिए क्या कर सकते हो, यह सब अनियत के गवाक्षों से देखो। तुम क्या कर पाओगे, क्या होगा इसको कभी नियत मत मानना। करते समय यह निर्णय मत करना कि यह ही होगा, चलते समय मत सोचना कि हम वही पहुचेंगे, जहाँ हम पहुँचना चाहते हैं।</p>
<p><strong>सैकड़ों उदाहरण शास्त्रों में</strong></p>
<p>तुम जो आयु लेकर आए हो उतने दिन जिंदा रहोगे मत सोचना, तुम पुण्य कमाकर आए हो तो पुण्यात्मा ही बने रहोगे मत सोचना, तुम पापी बन कर आए हो तो पापी ही रहोगे यह भी मत सोचना, महान निकृष्ट से निकृष्ट पाप कर्म उदय में आने वाला पापी जिंदगी को पुण्यमय बना लेता है। ऐसे सैकड़ों उदाहरण शास्त्रों में हैं, जो जन्म-जन्म के पापी हैं, पाप करते हुए मरे हैं, पाप करते हुए आये हैं लेकिन उसके बाबजूद भी सातवें नरक का नारकी महान पाप करके चांडाल कुल में जन्म लिया लेकिन वो सबसे बड़ा पुण्यात्मा बन गया। बुरे कर्म के उदय आने पर घबराओ मत, बुरे कर्म के उदय आने पर तुम बुरे ही हो, ऐसा मत समझना। पाप कर्म का उदय है लेकिन तुम पापी हो ऐसा मत समझना। पाप कर्म के उदय में भी तुम श्रेष्ठ पुण्यात्मा बन सकते हो। कोई जन्म जन्म का पुण्यात्मा हो और पुण्यकर्म का उदय हो तो वह भी सबसे बड़ा पापी हो सकता है जैसे मारीच का जीव। कृत, कारित चीज ये काकताली न्याय है, होगा कि नहीं, हमें पता नहीं। नैगमनय हमारे हाथ में है, ऐसी महान शक्ति है जो सबकुछ नियत कर सकती है, इसलिए हम क्या कर पाएंगे, इस चक्कर में मत पड़ो, क्या होगा यह टेंशन मत पा लो।</p>
<p><strong>मंत्र पर विश्वास करना, मंत्र कुछ कर देगा, इस पर विश्वास मत करना</strong></p>
<p>आज तुम्हारा धर्म क्यों डगमगा रहा है क्योंकि तुमने हर वस्तु पर विश्वास कर लिया यह होगा ही, हमें विश्वास है कि हमने भगवान का अभिषेक किया है तो हमारा काम होगा। तुम उतनी ही तेजी से बुराई करोगे जितना तुम भगवान को पूज रहे हो क्योंकि तुम भगवान के प्रति आशान्वित हो गए हो। तुम्हारा भविष्य बहुत खतरे में है क्योंकि जो तुमने निर्णय किया है कि ऐसा होगा ही, वैसा होगा ये कोई नियम नहीं। भगवान भी किसी कृत को नियत नहीं कर सकते। भगवान तेरे ऊपर तो विश्वास है लेकिन तू कुछ करेगा यह विश्वास मत करना। मंत्र पर विश्वास करना मंत्र कुछ कर देगा, इस पर विश्वास मत करना।</p>
<p>कई बार मन में भाव आता है कि मैं जो प्राप्त करना चाहता हूँ, प्राप्त कर ही नहीं पा रहा हूँ तो मन खिन्न हो जाता है, अब आनंद देता हूँ मुनि बनते ही तुम्हें क्या हो रहा है क्या होगा यह विकल्प छोड़ दो, मुनि बनने से तुम कितने पापों से बच गए हो बस इतना सा थोड़ी देर के लिए ध्यान कर लो। क्या प्राप्त कर पाये, इसमें तो बहुत क्लेश होता है। प्रवचन सुनाने आए हो, कुछ मिला नहीं, कुछ समझ में आया नहीं, समय खराब हो गया आपको क्लेश हो गया, आप पूरे प्रवचन को किरकिरा कर दोगे। बताओ जिनवाणी से तुम्हारा समय खराब हो गया, इसी से हम निधत्त निकाचित कर्मों का बन्ध करते हैं। मुनि बनकर ये भाव आ जाये मुनि बनकर कुछ नही मिला, मुनि पद का इतना अपमान, हम मुनि बनना तो छोड़ो, मुनि के दर्शन तक को तरस जाएंगे।</p>
<p><strong>जिंदगी भर की पूजा का पुण्य ज्यादा है</strong></p>
<p>हम गुणों से प्रभावित होकर आते हैं और जो नहीं पाते हैं तो हम अनमोल को निर्मूल कर देते हैं। तुमने जिंदगी भर भगवान को माना हो और अंत में कह दो कि सब बेकार है, इस शब्द का पाप ज्यादा है या जिंदगी भर की पूजा का पुण्य ज्यादा है, वो एक क्षण का पाप निधत्त निकाचित होगा। यदि हमारे गुरु से, माता-पिता से, धर्म से, हमें कष्ट आता है तो उस कष्ट की चिंता मत करना क्योंकि धर्म है और लोभ मत आना नही तो निर्मूल कर दोंगे धर्म को। कुछ कर पाए या ना कर पाए लेकिन अनमोल को निर्मूल मत कर देना। जेल से भागों मत, जेल से छूटकर आओ।</p>
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		<title>धर्मसभा को संबोधित कर व्यक्त किए उदगार : पुण्य को ठुकराकर जो आता है उसकी कथा पुराण बन जाती है &#8211; मुनि श्री सुधासागर महाराज </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_story_of_the_one_who_rejects_virtue_becomes_a_myth_muni_shri_sudhasagar_maharaj/</link>
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		<pubDate>Sun, 09 Jul 2023 15:15:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि आज अमीरी बहुत बड़ी सजा है कि तुम चाहकर भी भगवान का नाम नहीं ले पा रहे। यह कर्मों की बहुत बड़ी कूटनीति कि तुम्हें मंदिर ले जाएगा पर दर्शन नहीं कर पाओगे। पढ़िए राजीव सिंघाई और शुभम जैन की यह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि आज अमीरी बहुत बड़ी सजा है कि तुम चाहकर भी भगवान का नाम नहीं ले पा रहे। यह कर्मों की बहुत बड़ी कूटनीति कि तुम्हें मंदिर ले जाएगा पर दर्शन नहीं कर पाओगे। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजीव सिंघाई और शुभम जैन की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती 108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि मुनि महाराज के पास गरीब अपना समय अमीर को दे देवे, एक दिन गरीब भी अमीर हो जाएगा। जानते हैं उन्होंने प्रवचन में और क्या कहा&#8230;</p>
<p>1.अमीर मंदिर-मुझसे क्या पाप हुआ है कि एक भगवान के महाराज के दर्शन की भी नहीं मिल रहे। बिना मंदिर के भोजन करना पड रहा। आज अमीरी बहुत बड़ी सजा है कि तुम चाहकर भी भगवान का नाम नहीं ले पा रहे। यह कर्मों की बहुत बड़ी कूटनीति कि तुम्हें मंदिर ले जाएगा पर दर्शन नहीं कर पाओगे।</p>
<p>2.जिंदगी सौभाग्य से मिली-जिंदगी से हताश नहीं होना है। हमारी जिंदगी दुखदायी क्यों हो गई, जिस जीवन को पाने के लिए देवता लोग तरसते है वो जीवन से हम बोर हो रहे हैं, परेशानी बन गयी। अच्छी जिंदगी दुखदायी बन गई है। पाप को नहीं, पुण्य को ठुकराकर जो आता है उसकी कथा पुराण बन जाती है। हम वैभव से उबरकर धर्म कर रहे हैं तो हमारी कथा पुराण बन जाती है। गरीबी से उबरकर यदि मंदिर धर्म कर रहे हैं तो धर्म की महिमा नहीं बढ़ती है। परेशानी में आकर भक्तामर, पूजन अभिषेक कर रहे हो। इसलिए मंदिर का अतिशय कम हो रहा है।</p>
<p>3. दुर्गति के लिए शक्ति-हमारी आंखों में बहुत ज्योति है फिर भी हमारे मंदिर के दर्शन करने के भाव नहीं हो रहे हैं। आंख है लेकिन भगवान-गुरु के दर्शन के भाव नहीं हो रहे हैं। ये कूटनीति है। रावण को मारना है, नाश कैसे हो। इसलिए रावण को सारी शक्तियां, वैभव, मायावी आदि रूप बदलने की शक्ति दी जिसके कारण वो कोई पाप करे, ये कूटनीति थी।</p>
<p>4.जैनियों के जैन मार्का की कीमत ऐसी है कि एयरपोर्ट, होटल सभी जगह केवल जैन के नाम से जैन भोजन मिलेगा।</p>
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		<title>धर्मसभा को संबोधित कर व्यक्त किए उदगार : जैनी सदा पापियों के लिए अपशुकन है &#8211; मुनि श्री सुधासागर महाराज </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/jaini_is_always_a_bad_omen_for_sinners_muni_shri_sudhasagar_maharaj/</link>
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		<pubDate>Sat, 08 Jul 2023 12:47:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि कर्म की अदालत में कोई लेन-देन नहीं करना। हर्ष पूर्वक सजा को ग्रहण करना प्रायश्चित है। पढ़िए शुभम जैन की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;. आगरा। जुलाई को हरीपर्वत स्थित श्री एम.डी जैन इंटर कॉलेज ग्राउंड में निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि कर्म की अदालत में कोई लेन-देन नहीं करना। हर्ष पूर्वक सजा को ग्रहण करना प्रायश्चित है।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए शुभम जैन की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> जुलाई को हरीपर्वत स्थित श्री एम.डी जैन इंटर कॉलेज ग्राउंड में निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे चारों तरफ जो चमचे हैं, उनकी चाटुकारता से अपने को बड़ा मानते हैं। पार्टी के टिकट पर अपने आपको जीता हुआ मत मानना।</p>
<p>विपक्ष की नजर में हम क्या हैं, विपक्षी पार्टी विरोधी को वोट दे, तब आप महान हैं। विरोधियों से प्रशंसा सुनना है। अपनों ने कभी अपने को बुरा कहा है। अपराधी किसी को पता नहीं फिर भी यह सजा लेव, सजा को अहोभाग्य मान कर अब स्वीकार कर लेते तब यह फांसी की सजा भी स्वीकार कर ले तो वह उनको सजा को माफ हो जाएगी, मरने के बाद कहां गये। मरने के बाद दुर्गति हुई या स्वर्ग में गए ये पता करने का तरीका है यदि मरने के बाद वह जहां रहता है, उसके पास जो मकान वाले कह दे कि मर गया अच्छा रहा तो उसका नरक निश्चित है यदि वही व्यक्ति कह दे कि अच्छा आदमी था तो आप देव बने हैं।</p>
<p>यदि पूरा मोहल्ला नगर, राज्य कह दे तो वह बड़ा देव व वैमानिक देव बनता है। जैनी सदा पापियों के लिए अपशुकन है। यदि कोई पापी पाप करने जा रहा है, तब यदि कोई त्यागीव्रती मुनि महाराजजी जैनी मिल गया तो समझ लेना आप अपने कार्य में सफल नहीं हो पाओगे। कभी भी अच्छे पाप कार्य में अच्छे व्यक्ति मंगलकारी नहीं, जैनी पाप कार्यों में अपशकुन है। उन्होंने कहा कि 29 अंक प्रमाण मनुष्यों में केवल 9 करोड़ मुनि बन पाते हैं, 700 करोड़ सम्यक दृष्टि हैं।</p>
<p>पुण्यशाली लोग बहुत कम हैं। कर्म की अदालत में कोई लेन-देन नहीं करना। हर्ष पूर्वक सजा को ग्रहण करना प्रायश्चित है। जब वह हर्ष पूर्वक किये हुए अपराध को स्वीकार करता है,किसी को भी अपराध को पता नहीं फिर भी वह अपनी सजा को स्वीकार करके पुलिस थाने में पहुंच जाता है। केवल स्वयं को अपराध का पता है फिर भी वह उसे स्वीकार करे, स्वयं का हमारे विरुद्ध यदि कोई गुनाह- अपराध के संबंध में उसके विरुद्ध कोई गवाह देना वाला भी नहीं मिले।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-47979" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-6.08.20-PM-2.jpeg" alt="" width="1066" height="1329" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-6.08.20-PM-2.jpeg 1066w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-6.08.20-PM-2-241x300.jpeg 241w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-6.08.20-PM-2-821x1024.jpeg 821w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-6.08.20-PM-2-768x957.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-6.08.20-PM-2-990x1234.jpeg 990w" sizes="(max-width: 1066px) 100vw, 1066px" /></p>
<p><strong>प्राप्त किया आशीर्वाद</strong></p>
<p>धर्मसभा का शुभारंभ भक्तों ने चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया। मंगलाचरण ख्याति जैन द्वारा किया। श्री दिगंबर जैन धर्म भावना समिति, आगरा दिगंबर जैन परिषद, श्री दिगंबर जैन शिक्षा समिति की ओर से मुनिश्री के चरणों में श्रीफल भेंटकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्मसभा का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल द्वारा किया गया।</p>
<p>इस अवसर पर प्रदीप जैन पीएनसी, नीरज जैन जिनवाणी चैनल, निर्मल मौठया, पन्नालाल बैनाड़ा, हीरालाल बैनाड़ा, मुख्य संयोजक मनोज जैन बाकलीवाल, राकेश सेठी, अनिल जैन, नरेश जैन, राकेश जैन बजाज, गौरव जैन चौधरी, राहुल जैन पश्चिमपुरी, अनंत जैन, दिलीप जैन, अंकेश जैन, समकित जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन, आशीष जैन मोनू, राहुल जैन, ऊषा मारसंस, बीना बैनाड़ा, ममता जैन सहित समस्त आगरा सकल जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>चातुर्मासिक प्रवचन में धर्मसभा को किया संबोधित :  महान बनना तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना &#8211; मुनि श्री सुधासागर जी महाराज </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Jul 2023 07:30:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि महान बनना है तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना। पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230; आगरा। हरीपर्वत स्थित श्री एम.डी जैन इंटर कॉलेज ग्राउंड में निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि महान बनना है तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> हरीपर्वत स्थित श्री एम.डी जैन इंटर कॉलेज ग्राउंड में निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सर्वनाश करने वाला दुश्मन ने आपकी प्रशंसा की, एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना, यदि दुश्मन पक्ष हमारा समर्थन कर रहा है तो वह हमारी प्रशंसा है। यदि विपक्ष ने मुझे चुना है तो मुझे निष्पक्ष रहना है। वह अपने बेटे को सजा देगा विपक्ष वाले बेटे को सजा से बचा लेगा, हर व्यक्ति को अपने निंद‌कों का विश्वास समर्थन जीतना है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-47896" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-11.35.03-AM-1.jpeg" alt="" width="1600" height="807" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-11.35.03-AM-1.jpeg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-11.35.03-AM-1-300x151.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-11.35.03-AM-1-1024x516.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-11.35.03-AM-1-768x387.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-11.35.03-AM-1-1536x775.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-11.35.03-AM-1-990x499.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-11.35.03-AM-1-1320x666.jpeg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
<p>तो वह सर्वश्रेष्ठ हैं। हमें अपनी जाति की इज्जत बचाने के लिए रात्रि भोजन मत करना,चाहे तो भूख से मर जाना लेकिन रात्रि में भोजन नहीं करना चाहे कमरे में बंद होकर भोजन कर लेना सारा विश्व जानता है कि जैनी कैसा होता है, वैसा हमको करना है। उन्होंने कहा कि अच्छा आदमी बनने को बहुत मेहनत करनी पड़ती है। अच्छा आदमी बनने के लिए भगवान को भी लगना पड़ता है।</p>
<p>गुरु को भी अच्छा आदमी बनाने के लिए लगाना पड़ता है। सब कुछ अच्छा होगा फिर कि आदमी अच्छा बन जाये कोई जरूरी नहीं। मारीच के जीव के उदाहरण से महाराज जी ने बताया, मारीच जैसे पुण्यात्मा जीव मिला फिर भी नहीं सुधर रहा है। सब कुछ अच्छा मिला भारत जैन धर्म, गुरु भगवान फिर भी हम सुधर नहीं जा रहे हैं।</p>
<p>किस्मत ह‌मारी अच्छी है। कर्म अच्छा है अच्छा इंसान होना मिला, जन्म किस्मत से, माता पिता किस्मत से मिले, हमें उनके प्रतिकूल नहीं चलना है। कर्म ने हमारी किस्मत में झांटकर हमें यहां जन्म दिया है। हमें अच्छे माता-पिता मिले, हमें किस्मत से जैन धर्म मिला। दुश्मन भी हमारे में गुण देखे।</p>
<p><strong>धार्मिक कार्यक्रम हुए</strong></p>
<p>धर्मसभा का शुभारंभ भक्तों ने चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया। मंगलाचरण क्षमा सागर मैत्री मंडल छीपीटोला द्वारा किया गया। श्री दिगंबर जैन धर्म भावना समिति, आगरा दिगंबर जैन परिषद श्री दिगंबर जैन शिक्षा समिति की ओर से मुनिश्री के चरणों में श्रीफल भेंटकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया गया। मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज का पाद प्रक्षालन केवलचंद जैन एवं राहुल जैन पश्चिमपुरी, ओमप्रकाश जैन एवं मोहित जैन कोलकाता द्वारा किया गया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-47898" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-11.35.02-AM.jpeg" alt="" width="1258" height="1066" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-11.35.02-AM.jpeg 1258w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-11.35.02-AM-300x254.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-11.35.02-AM-1024x868.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-11.35.02-AM-768x651.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Image-2023-07-08-at-11.35.02-AM-990x839.jpeg 990w" sizes="(max-width: 1258px) 100vw, 1258px" /></p>
<p>धर्मसभा का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल द्वारा किया। इस अवसर पर प्रदीप जैन पीएनसी, नीरज जैन जिनवाणी चैनल, निर्मल मौठया, पन्नालाल बैनाड़ा हीरालाल बैनाड़ा, मुख्य संयोजक मनोज जैन बाकलीवाल, चक्रेश जैन, राकेश सेठी,अनिल जैन, नरेश जैन, जगदीश प्रसाद जैन, अक्षय जैन, राकेश जैन पर्देवाले, अनंत जैन, अंकेश जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन, आशीष जैन मोनू सहित समस्त सकल जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>धर्मसभा को संबोधित कर व्यक्त किए उदगार : माता-पिता के प्रतिकूल न चलें- मुनि श्री सुधासागर महाराज </title>
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		<pubDate>Fri, 07 Jul 2023 16:04:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि महान बनना है तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना। जानते हैं उनके प्रवचनों को विस्तृत रूप से&#8230; आगरा। निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि महान बनना है तो एक बार दुश्मन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि महान बनना है तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना। <span style="color: #ff0000;">जानते हैं उनके प्रवचनों को विस्तृत रूप से&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि महान बनना है तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना। जानते हैं उन्होंने प्रवचन में क्या कहा&#8230;</p>
<p>1.दुश्मन सम्मान करे-सर्वनाश करने वाला दुश्मन ने आपकी प्रशंसा की, एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना, यदि दुश्मन पक्ष हमारा समर्थन कर रहा है तो वह हमारी प्रशंसा है। यदि विपक्ष ने मुझे चुना है तो मुझे निष्पक्ष रहना है। वह अपने बेटे को सजा देगा विपक्ष वाले बेटे को सजा से बचा लेगा, हर व्यक्ति को अपने निंद‌कों का विश्वास समर्थन जीतना है। तो वह सर्वश्रेष्ठ हैं</p>
<p>2.जाति की इज्जत-हमें अपनी जाति की इज्जत बचाने के लिए रात्रि भोजन मत करना,चाहे तो भूख से मर जाना लेकिन रात्रि में भोजन नहीं करना चाहे कमरे में बंद होकर भोजन कर लेना सारा विश्व जानता है कि जैनी कैसा होता है, वैसा हमको करना है।</p>
<p>3.सुधर नहीं पा रहे-अच्छा आदमी बनने को बहुत मेहनत करनी पड़ती है। अच्छा आदमी बनने के लिए भगवान को भी लगना पड़ता है। गुरु को भी अच्छा आदमी बनाने के लिए लगाना पड़ता है। सब कुछ अच्छा होगा फिर कि आदमी अच्छा बन जाये कोई जरूरी नहीं। मारीच के जीव के उदाहरण से महाराज जी ने बताया, मारीच जैसे पुण्यात्मा जीव मिला फिर भी नहीं सुधर रहा है। सब कुछ अच्छा मिला भारत जैन धर्म, गुरु भगवान फिर भी हम सुधर नहीं जा रहे हैं।</p>
<p>4.किस्मत-किस्मत ह‌मारी अच्छी है। कर्म अच्छा है अच्छा इंसान होना मिला, जन्म किस्मत से, माता पिता किस्मत से मिले, हमें उनके प्रतिकूल नहीं चलना है। कर्म ने हमारी किस्मत में झांटकर हमें यहां जन्म दिया है। हमें अच्छे माता-पिता मिले, हमें किस्मत से जैन धर्म मिला। दुश्मन भी हमारे में गुण देखे।</p>
<p>-संकलन ब्र. महावीर</p>
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		<title>पंडित रत्न लाल बैनाडा जी आगरा के जन्म दिवस पर विशेष : जैन धर्म और संस्कृति की महक फैलाई पूरे भारत में </title>
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		<pubDate>Fri, 07 Jul 2023 16:01:27 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[श्री सुधासागर जी महाराज]]></category>
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					<description><![CDATA[संपूर्ण भारतवर्ष में ज्ञान की धारा युवा विद्वानों से व्यवहृत है। इसका संपूर्ण श्रेय स्वर्गीय रतन लाल बैनाड़ा गुरु को जाता है, जिनका आज जन्म दिवस है। उनके कारण ही सन् 1996 के उस ऐतिहासिक चातुर्मास ने जैन दर्शन की आधारशिला पुनः स्थापित की जिसकी परम प्रेरणा स्वयं मुनि श्री सुधासागर जी महाराज हैं। पढ़िए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संपूर्ण भारतवर्ष में ज्ञान की धारा युवा विद्वानों से व्यवहृत है। इसका संपूर्ण श्रेय स्वर्गीय रतन लाल बैनाड़ा गुरु को जाता है, जिनका आज जन्म दिवस है। उनके कारण ही सन् 1996 के उस ऐतिहासिक चातुर्मास ने जैन दर्शन की आधारशिला पुनः स्थापित की जिसकी परम प्रेरणा स्वयं मुनि श्री सुधासागर जी महाराज हैं। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> संपूर्ण भारतवर्ष में ज्ञान की धारा युवा विद्वानों से व्यवहृत है। इसका संपूर्ण श्रेय स्वर्गीय रतन लाल बैनाड़ा गुरु को जाता है, जिनका आज जन्म दिवस है। उनके कारण ही सन् 1996 के उस ऐतिहासिक चातुर्मास ने जैन दर्शन की आधारशिला पुनः स्थापित की जिसकी परम प्रेरणा स्वयं मुनि श्री सुधासागर जी महाराज हैं। आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने जैन दर्शन के अध्ययन-अध्यापन की पुनः जागृति हेतु जयपुर एवं संपूर्ण भारत की समाज को आंदोलित करने वाला एक प्रवचन दिया और इस प्रवचन के फलस्वरूप जयपुर के जैन समाज ने इस महत्वपूर्ण कार्य को साकार करने हेतु आश्वासन के साथ अपनी धनसंपदा के स्रोत श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान की स्थापना कर सार्थक कर दिया।</p>
<p>पूज्य श्री के मन में एक विचार आया कि संस्था तो खड़ी हो सकती है किंतु संस्था में छात्रों के लिए अध्यापन कार्य कौन करेगा? चूंकि पूज्य सुधा सागर जी महाराज जयपुर आने से पूर्व आगरा नगर से होते हुए आए थे। अतः उनके मन में पंडित रतन लाल जी के प्रति, उनकी ज्ञान पिपासा और ज्ञान के अगाध भंडार को देखते हुए सर्वप्रथम उन्हें स्मरण करती है और यह संदेश आदरणीय बैनाड़ा जी के समक्ष पहुंचता है।</p>
<p><strong>जैनधर्म-दर्शन के अध्ययन अध्यापन के लिए समर्पित की भूमि</strong></p>
<p>उस आज्ञा का पालन करते हुए वे पूज्य श्री के दर्शन करने शीघ्र ही जयपुर पधारते हैं और ऐसे सुंदर एवं महत्वपूर्ण कार्य के लिए वे सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं। इसके साथ ही श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र मंदिर संघी जी की सांगानेर में स्थित 5 एकड़ की भूमि को जैनधर्म-दर्शन के अध्ययन अध्यापन हेतु समर्पित करने का भाव सांगानेर समाज ने व्यक्त किया और सांगानेर की उस भूमि पर भव्य संस्था का निर्माण श्री गणेश राणा जी की अध्यक्षता में प्रारंभ हुआ।निर्माणाधीन संस्था में प्रवेश ले चुके छात्रों के लिए तत्कालीन व्यवस्था श्री संघी जी मंदिर में हुई और यहां पर पंडित रतन लाल जी ने एवं महेश भैया आदि के सहयोग से जैन धर्म दर्शन को पढ़ाने का उत्तम कार्य प्रारंभ किया।</p>
<p><strong>रजत जयंती वर्ष का आयोजन </strong></p>
<p>आज इस संस्था को 25 वर्ष हो चुके हैं और इसी उपलक्ष्य में संपूर्ण भारतवर्ष में रजत जयंती वर्ष का आयोजन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत संपूर्ण भारत में शिक्षण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है और भी अन्य अनेक धर्म वृद्धि के कार्य सतत चल रहे हैं। आदरणीय बैनाड़ा जी की कक्षा को पढ़ने वाला प्रत्येक छात्र आज उनके वियोग में उन्हें स्मरण करता हुआ दुख का अनुभव कर रहा है किंतु अपने गुरु के प्रति एक आदर भाव भी मन में उत्पन्न होता है कि हमारा ऐसा सौभाग्य था कि हम इस सदी के श्रेष्ठतम गृहस्थ विद्वान से जिनवाणी को सुन सके और अब समय के साथ उसे गुनने की भी कोशिश कर रहे हैं। उनसे पढ़े हुए सभी छात्रों और समाज के लोगों के साथ उनके जीवन की अनेक सुनहरी यादें होंगी। आप सभी उन यादों को साझा करके उनके व्यक्तित्व से सभी को अवगत कराएं। आज़ इस पुण्य दिवस पर इंदौर दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी, मंत्री डॉ जैनेन्द्र जैन, फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश विनायका, सुशील पांड्या, हंसमुख गांधी, पंडित विपिन कुमार जैन शास्त्री आदि उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।</p>
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