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	<title>श्री शांतिनाथ भगवान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया श्री शांतिनाथ भगवान का जन्म-तप-मोक्ष कल्याणक : आगरा के जयपुर हाउस जैन मंदिर में हुआ महोत्सव </title>
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		<pubDate>Fri, 15 May 2026 11:09:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शुक्रवार को श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उल्लास एवं धार्मिक वातावरण के बीच भव्य रूप से संपन्न हुआ।प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति से भक्तिमय हो उठा। आगरा से पढिए, शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230; आगरा। श्री शांतिनाथ दिगंबर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शुक्रवार को श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उल्लास एवं धार्मिक वातावरण के बीच भव्य रूप से संपन्न हुआ।प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति से भक्तिमय हो उठा। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढिए, शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शुक्रवार को श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उल्लास एवं धार्मिक वातावरण के बीच भव्य रूप से संपन्न हुआ।प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति से भक्तिमय हो उठा। संपूर्ण जिनालय भगवान शांतिनाथ के जयघोष, मंगल ध्वनि एवं भक्ति गीतों से गुंजायमान रहा।कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 7 बजे भगवान शांतिनाथ के महामस्तकाभिषेक एवं मंगल शांतिधारा के साथ हुआ। महामस्तकाभिषेक का सौभाग्य दीपक जैन एवं श्रेयांस जैन को प्राप्त हुआ,जबकि शांतिधारा करने का पुण्य राकेश जैन पर्देवाले, अभिषेक जैन, राजीव कुमार, कुशाग्र बैनाडा, नरेंद्र जैन, नीरज जैन, देवांश जैन, कालीचरण विमल, मंजीत जैन एवं राहुल जैन को प्राप्त हुआ। महोत्सव का विशेष आकर्षण 116 किलो का भव्य निर्वाण लाडू रहा। जिसे राकेश जैन, सूर्यांश जैन, अभिषेक जैन, कियांश जैन, मनोज जैन, ऋषभ जैन, रिशांत जैन, अजित जैन, अंकुर बैनाडा एवं जलेसर परिवार द्वारा सामूहिक रूप से श्रद्धा भाव के साथ भगवान के चरणों में समर्पित किया गया।</p>
<p><strong>संगीतमय सामूहिक पूजन से भक्तिमय माहौल</strong></p>
<p>इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ के निर्वाण कल्याणक की जय-जयकार करते हुए धर्मलाभ प्राप्त किया।समस्त कार्यक्रम के मध्य पूज्य आचार्यश्री चैत्यसागर जी महाराज के मंगल प्रवचन सम्पन्न हुए।आचार्य श्री ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में धर्म,संयम एवं आत्म कल्याण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को जिनवाणी के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उनके प्रवचनों ने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक शांति एवं आत्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया।महोत्सव के अंतर्गत संगीतमय सामूहिक पूजन का आयोजन भी किया गया, जिसमें महिला मंडल,युवक-युवतियों एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।</p>
<p><strong>भक्तजन भक्ति रस में डूबे</strong></p>
<p>पूजन के दौरान प्रस्तुत भक्ति गीतों एवं स्तुतियों ने वातावरण को पूर्णतः धर्ममय बना दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ के चरणों में आराधना कर विश्व शांति, सुख- समृद्धि एवं मानव कल्याण की मंगल कामना की।सायंकाल आयोजित भव्य भजन संध्या ने पूरे महोत्सव में चार चांद लगा दिए। शाम 7 बजे से प्रारंभ हुई इस भक्तिमय संध्या में भजन गायकों द्वारा प्रस्तुत मधुर जैन भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। देर रात्रि 10 बजे तक चले इस कार्यक्रम में भक्तजन भक्ति रस में डूबे नजर आए तथा भगवान की आराधना में लीन होकर झूमते दिखाई दिए। मंदिर समिति द्वारा पूरे आयोजन को अत्यंत भव्य एवं आकर्षक स्वरूप प्रदान किया गया था। महोत्सव के सफल आयोजन पर श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति एवं समस्त समाजजनों ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों एवं धर्मप्रेमियों का आभार व्यक्त किया। इस आयोजन ने आगरा के धार्मिक वातावरण को भक्तिमय बना दिया तथा समाज में धर्म प्रभावना एवं आध्यात्मिक जागरूकता का सुंदर संदेश प्रसारित किया।</p>
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		<title>सकल दिगंबर जैन समाज ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का किया स्वागत : मुनि श्री निष्पक्ष सागर महाराज एवं मुनि श्री निष्प्रह सागर जी ने बिरला के कार्य की सराहना  </title>
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		<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 06:47:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री निष्पक्ष सागर महाराज एवं निष्प्रह सागरजी महाराज का मंगल आशीर्वाद लेने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पहुंचे। बिरला ने श्री शांतिनाथ भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। मुनि श्री निष्पक्ष सागर महाराज एवं निष्प्रह सागरजी महाराज का मंगल आशीर्वाद लेने लोकसभा अध्यक्ष ओम [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री निष्पक्ष सागर महाराज एवं निष्प्रह सागरजी महाराज का मंगल आशीर्वाद लेने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पहुंचे। बिरला ने श्री शांतिनाथ भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> मुनि श्री निष्पक्ष सागर महाराज एवं निष्प्रह सागरजी महाराज का मंगल आशीर्वाद लेने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पहुंचे। बिरला ने श्री शांतिनाथ भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने महाराज श्री के चरणों में नतमस्तक होते हुए श्रीफल समर्पित कर मंगल आशीर्वाद लिया। बिरला महाराज श्री के दर्शन कर भगवान के दिव्य स्वरूप को देख गदगद हुए। सभा परिसर में लोकसभा अध्यक्ष का सकल दिगंबर जैन समाज रामगंजमंडी की ओर से अभूतपूर्व स्वागत किया गया। इस क्रम में पूर्व पालिका अध्यक्ष अखिलेश मेडतवाल उनके साथ उपस्थित रहे।</p>
<p>महाराज श्री ने लोकसभा अध्यक्ष बिरला, राकेश मडिया, अखिलेश मेडतवाल की ओर से प्रतिमा के दिव्य स्वरूप के लिए जो सहयोग दिया, उसके लिए साधुवाद दिया।महाराज श्री ने उन्हें मुनि भक्त और धर्मात्मा पुरुष कहते हुए संबोधित किया और उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान किया और कहा कि ऐसे ही धर्म कार्य के लिए हमेशा खड़े रहना।</p>
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		<title>मुनि श्री के सानिध्य में मनाया निर्वाण महोत्सव: गुरु महोत्सव के साथ मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज का दीक्षा महोत्सव पर होगा गुणानुवाद  </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:48:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बुधवार प्रातः श्री दिगंबर जैन समाज के सानिध्य में जैन मंदिर में श्री शांतिनाथ भगवान का महमस्तिकाभिषेक और विशेष गुरु मुख से शांतिधारा कराई गई। इसके बाद कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। झुमरी तिलैया से पढ़िए, राज कुमार जैन अजमेरा और नवीन जैन की यह खबर&#8230; झुमरीतिलैया। बुधवार प्रातः श्री दिगंबर जैन समाज के सानिध्य में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बुधवार प्रातः श्री दिगंबर जैन समाज के सानिध्य में जैन मंदिर में श्री शांतिनाथ भगवान का महमस्तिकाभिषेक और विशेष गुरु मुख से शांतिधारा कराई गई। इसके बाद कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। <span style="color: #ff0000">झुमरी तिलैया से पढ़िए, राज कुमार जैन अजमेरा और नवीन जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>झुमरीतिलैया।</strong> बुधवार प्रातः श्री दिगंबर जैन समाज के सानिध्य में जैन मंदिर में श्री शांतिनाथ भगवान का महमस्तिकाभिषेक और विशेष गुरु मुख से शांतिधारा कराई गई। इसके बाद कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। जिसमें सर्व प्रथम सौधर्म इंद्र प्रदीप-मीरा जैन छाबड़ा के द्वारा ध्वजारोहण किया गया।मुनि श्री भाव सागर जी मुनिराज को कमंडल अर्पण करने का सौभाग्य प्रदीप-मीरा जैन छाबड़ा, संजय-बबीता जैन गंगवाल के परिवार को प्राप्त हुआ। समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञान सागर जी और उनके परम प्रभावक शिष्य समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर जी के चरण चिंह का प्राण प्रतिष्ठा नगर में प्रथम बार हुआ। मुनिद्वय ने 84 मंत्रों के साथ पूजा-पाठ आदि जाप के साथ प्रतिष्ठा करवाई। अष्ठ कुमारी ने भी पूजन किया। ये चरण चिन्ह पाटनी परिवार आरके मार्बल किशनगढ़ (राजस्थान) ने दिए जो देवघर जैन मंदिर में स्थापित होंगे।</p>
<p><strong>24 भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाना चाहिए</strong></p>
<p>मुनिश्री धर्म सागर जी मुनिराज और मुनि श्री भाव सागर जी मुनिराज ने इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मेरा भी सौभाग्य है कि 22 वर्ष में प्रथम बार महाकवि आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के चरण चिह्न की प्रतिष्ठा का अवसर प्राप्त हुआ। इस तिथि में दीक्षित सभी मुनिराज स्वस्थ रहें एवं जिन शासन की प्रभावना करते रहें। श्रीअभिनंदन नाथ भगवान का महोत्सव मनाया गया। यह भी सौभाग्य की बात है। 24 भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाना चाहिए। मोक्ष की प्रस्तावना, कर्मों की समीक्षा, समता का उद्घाटन है। शून्य से शिखर तक की यात्रा है। आत्म उत्थान का मुकाम है। निर्माण से निर्वाण तक की यात्रा है दीक्षा। जितने भी साधु इस तिथि में दीक्षित हुए वह हमेशा स्वस्थ रहें जिनशासन की प्रभावना करते रहे। उन सभी को हम यहीं से नमस्कार करते हैं। 84 करोड़ मंत्रों में सबसे बड़े महामंत्र में गुरु का नाम आता है, गुरु के माध्यम से हृदय का आंगन पवित्र हो जाता है। गुरु जी कहते थे गौशालाएं जीवित कारखाना है। विदेशी गुलामी का प्रतीक इंडिया नहीं हमें गौरव का प्रतीक भारत देश नाम चाहिए और हम सब को इंडिया नही भारत कहना है साथ ही हिन्दी भाषा मे बहुत जोर देते थे।</p>
<p><strong>मुनि श्री का दीक्षा महोत्सव तिथि अनुसार मनाया जाएगा</strong></p>
<p>आज गुरु नही है, मगर गुरु चरण ही हम सब के लिए पूज्य है इसलिये गुरु चरण की प्रतिष्ठा कर गुरु चरण विराजमान किया जा रहा है। इसके बाद गुरु पूजा सुबोध-आशा जैन गंगवाल के संगीतमय पूजन आचार्य छत्तीसी बिधान के द्वारा किया गया। जिसमें 36 अर्घ्य के साथ श्रीफल मंडप पर सभी भक्तों ने चढ़ाए और साथ ही निर्वाण लड्डू भी भक्तों द्वारा प्रभु चरणों मे समर्पित किए। इन सभी कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल समाज के उप मंत्री नरेंद्र जैन झांझरी, जय कुमार जैन गंगवाल, ललित जैन सेठी, महिला समाज की अध्यक्ष नीलम जैन सेठी, मंत्राणी आशा जैन गंगवाल शामिल हुए। आहार चर्या नया मंदिर की ओर से हुई। सभी कार्यक्रम स्थानीय पंडित अभिषेक शास्त्री ने करवाए। गुरुवार को गुरु पूजा और मुनि श्री का दीक्षा महोत्सव तिथि अनुसार मनाया जाएगा।</p>
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		<title>गुरु भक्त को पीड़ा से दूर करने के लिए धार्मिक अनुष्ठान की देते हैं प्रेरणा : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दी मंगल देशना </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Feb 2026 16:28:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शलाका पुरुषों में श्री शांतिनाथ भगवान कामदेव, चक्रवती और तीर्थंकर तीन पद के धारी हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दिगम्बर अतिशय क्षेत्र सहस्त्रकूट विज्ञा तीर्थ में प्रवेश के अवसर पर हुई धर्मसभा में प्रकट की। निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; निवाई/जयपुर। श्रीमद जैनधर्म श्री से बना है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>शलाका पुरुषों में श्री शांतिनाथ भगवान कामदेव, चक्रवती और तीर्थंकर तीन पद के धारी हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दिगम्बर अतिशय क्षेत्र सहस्त्रकूट विज्ञा तीर्थ में प्रवेश के अवसर पर हुई धर्मसभा में प्रकट की। <span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई/जयपुर।</strong> श्रीमद जैनधर्म श्री से बना है। श्री का आशय केवल ज्ञान रूपी लक्ष्मी से है। इस तीर्थ में आज आगमन हुआ और श्री शांतिनाथ भगवान के दर्शन कर मन हर्षित हुआ। शलाका पुरुषों में श्री शांतिनाथ भगवान कामदेव, चक्रवती और तीर्थंकर तीन पद के धारी हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दिगम्बर अतिशय क्षेत्र सहस्त्रकूट विज्ञा तीर्थ में प्रवेश के अवसर पर हुई धर्मसभा में प्रकट की। आचार्य श्री ने उपदेश में कहा कि जब श्रावक कष्ट में होता है, उसका मन अशांत होता है तब गुरु उन्हें श्री शांतिनाथ भगवान की पूजन और विधान करने की प्रेरणा उपदेश देते हैं। विज्ञाश्री माताजी की वाणी का प्रभाव है कि उन्होंने जंगल में तीर्थ का निर्माण कराया है,तीर्थ का निर्माण महत्वपूर्ण है, समाज साधु की प्रेरणा से तीर्थ का निर्माण और संचालन करते हैं। जिस क्षेत्र में समाज एक नहीं होती है उस कारण साधु वहां रुकते हैं।</p>
<p><strong>प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ द्वारा धर्म का प्रवर्तन हुआ</strong></p>
<p>1008 श्री शांतिनाथ भगवान के पूर्व प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ द्वारा धर्म का प्रवर्तन हुआ। श्री शांतिनाथ भगवान के पूर्व धर्म प्रवर्तन रुक गया और खंडित हुआ किंतु, 1008 श्री शांतिनाथ भगवान के समय से यह धर्म प्रवर्तन निरंतर चल रहा है। वर्तमान शासन श्री महावीर भगवान का है। संघ को पदमपुरा पंच कल्याणक के लिए समय पर पहुंचना है। एक संयोग है कि 24 फरवरी 1969 फाल्गुन शुक्ला अष्टमी को तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी आचार्य पद दिया गया और उसी दिन हमारी भी दीक्षा हुई।</p>
<p><strong>गुणानुवाद कार्यक्रम में शामिल होने की प्रेरणा</strong></p>
<p>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सभी को पदमपुरा पंच कल्याणक और 24 फरवरी को बूंदी जिले के आचार्य श्री धर्म सागर जी की गुणानुवाद कार्यक्रम में शामिल होने की प्रेरणा दी। धार्मिक कार्यक्रमों से पुण्य में वृद्धि होती हैं। आगामी चातुर्मास वर्ष 2026 के लिए किशनगढ़, निवाई, जयपुर,सीकर सहित अनेक नगरों ने प्रार्थना की हैं समय पर निर्णय लेंगे।</p>
<p><strong>रात्रि विश्राम विज्ञा श्री तीर्थ गुनसी में हुआ</strong></p>
<p>परमीत,पवन बोहरा, मोहित चांवरिया,हेमंत ने बताया कि आचार्य श्री के मंगल बिहार में पदमपुरा कमेटी, निवाई, टोंक और निकट के समाजजन चल रहे हैं। 3 फरवरी को ग्राम मुंडिया में आहार के बाद दोपहर को विहार कर रात्रि विश्राम विज्ञा श्री तीर्थ गुनसी में हुआ। 4 फरवरी को प्रातः 4 किमी विहार कर आहार चर्या शर्मा धर्मकांटा वेयर हाउस कोठून में होगी।</p>
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		<title>विश्व शांति की कामना के साथ श्री शांतिनाथ महामंडल विधान पूर्ण: धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल </title>
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		<pubDate>Sat, 04 Oct 2025 15:12:29 +0000</pubDate>
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<p><strong>जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी स्वर्गीय जगदीशचंद्र जैन वरेह वालों की स्मृति में श्री महावीर जिनालय, चुंगी नाका रोड पर श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने भगवान से विश्व शांति एवं जनकल्याण की प्रार्थना की। <span style="color: #ff0000">अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी स्वर्गीय जगदीशचंद्र जैन वरेह वालों की स्मृति में श्री महावीर जिनालय, चुंगी नाका रोड पर श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने भगवान से विश्व शांति एवं जनकल्याण की प्रार्थना की। प्रातःकाल मंदिर में मूल नायक भगवान श्री धर्मनाथ का अभिषेक कर विधान की शुरुआत हुई। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने विशेष अर्घ्यों के माध्यम से श्री शांतिनाथ भगवान के समक्ष श्रीफल चढ़ाकर विशेष आराधना की। महावीर प्रसाद जैन, दिनेश कुमार जैन, विमल कुमार जैन एवं सुनील जैन ने सभी धार्मिक क्रियाओं का संचालन किया। विधान के दौरान मधुर भजनों के गायन ने वातावरण को भक्ति और श्रद्धा से पूर्ण कर दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार और हवन के माध्यम से संपूर्ण विश्व में शांति की कामना की। आयोजन का विश्वशांति महायज्ञ एवं हवन विधि-विधान के साथ पूर्ण हुआ। हवन के दौरान श्रद्धालुओं ने आहुतियां देते हुए भगवान से जनकल्याण, समाज कल्याण और विश्व शांति की प्रार्थना की।</p>
<p><strong>श्री शांतिनाथ भगवान की आराधना से अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है</strong></p>
<p>आयोजक दिनेश जैन व परिजनों ने बताया कि श्री शांतिनाथ भगवान की आराधना से अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने यह भी साझा किया कि इस परंपरा की उत्पत्ति पुराणों में वर्णित है। बताया गया कि रामायण काल में भगवान मुनिसुव्रत नाथ के शासनकाल में मथुरा नगर में महामारी फैल गई थी और हजारों प्रजाजन हताहत होने लगे। उस समय मुनिराज ने भगवान श्री शांतिनाथ की पूजा-अर्चना करने का उपदेश दिया और इस अनुष्ठान के परिणामस्वरूप महामारी का शमन हुआ। तभी से जैन समाज में यह धार्मिक आयोजन निरंतर होता आ रहा है।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं ने इस कार्यक्रम को पुण्यदायक बताया</strong></p>
<p>कार्यक्रम के समापन पर वात्सल्य भोज का आयोजन किया गया, जिसमें सभी उपस्थित श्रद्धालु एक साथ भोजन कर आपसी स्नेह और मेल-जोल का अनुभव करते हुए लौटे। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण को सुदृढ़ किया, बल्कि समाज में एकता, भक्ति भाव और सहयोग की भावना को भी प्रबल किया। श्रद्धालुओं ने इस कार्यक्रम को अत्यंत प्रभावशाली और पुण्यदायक बताया। स्वर्गीय जगदीश चंद्र जैन की स्मृति में यह महामंडल विधान उनकी जीवन मूल्यों, समाज सेवा और भक्ति की प्रतिबद्धता को याद दिलाता है। इस आयोजन ने शहर में धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को भी जागृत किया और सभी को यह संदेश दिया कि भक्ति, एकता और सेवा के माध्यम से समाज में सद्भाव और शांति कायम की जा सकती है।</p>
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		<title>धर्म रूपी विश्व विद्यालय से ज्ञान मिलता है : आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने श्री शांतिनाथ भगवान और आचार्य श्री शांति सागर जी का संयोग बताया  </title>
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		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 13:20:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राग और द्वेष से कर्म बंध होते हैं। इससे सुख का नाश होता है। संसार में जन्म मरण का परिभ्रमण होता रहता है। हमें जो भौतिक पदार्थ पुरुषार्थ से मिले हैं। वह वास्तव में हमारे नहीं है नश्वर है। श्री शांतिसागर प्रवचन माला के तहत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कर्मबंध के बारे में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राग और द्वेष से कर्म बंध होते हैं। इससे सुख का नाश होता है। संसार में जन्म मरण का परिभ्रमण होता रहता है। हमें जो भौतिक पदार्थ पुरुषार्थ से मिले हैं। वह वास्तव में हमारे नहीं है नश्वर है। श्री शांतिसागर प्रवचन माला के तहत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कर्मबंध के बारे में बताया। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> राग और द्वेष से कर्म बंध होते हैं। इससे सुख का नाश होता है। संसार में जन्म मरण का परिभ्रमण होता रहता है। हमें जो भौतिक पदार्थ पुरुषार्थ से मिले हैं। वह वास्तव में हमारे नहीं है नश्वर है। घर जिसमें आप रहते हैं। यह भी जेल के समान है। घर में रहना भी बंधन है, इन परिवार ,परिग्रह, राग द्वेष के बंधन कारण आप पराधीन है। इससे उदासीन होकर वैराग्य लेना ही वास्तविक यथार्थ ज्ञान है। यह मंगल देशना श्री शांतिसागर प्रवचन माला के तहत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अतिशय क्षेत्र में धर्मसभा में प्रकट की। आचार्य श्री ने श्री शांतिनाथ भगवान और प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी का संयोग बताया कि श्री शांतिनाथ भगवान के समय से धर्म परिवर्तन निरंतर चल रहा है। उसी प्रकार 20वीं सदी में प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी ने श्रमण परंपरा को परावर्तन कर पुनर्जीवित किया। तब से श्रमण परंपरा भी निर्बाध जारी है।</p>
<p><strong>पुरुषार्थ करने पर मोक्ष की राह प्रशस्त होगी</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने उपदेश में आगे बताया कि प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव ने एक लाख वर्ष पूर्व की आयु शेष रहने पर 84 खंड के भवन राज पाठ वैभव को त्याग कर निमित्त से जैनेश्वरी दीक्षा धारण की। आप भी मन, शरीर और आत्मा रूपी तीन खंड के भवन में रहते हैं। आत्मा को सब भूल रहे हैं। आत्मा के स्वरूप का यथार्थ ज्ञान प्राप्त करने का पुरुषार्थ करने पर मोक्ष की राह प्रशस्त होगी। जिनशासन ज्ञान में है। धर्म रूपी विश्व विद्यालय से ज्ञान मिलता है। शासन ज्ञान से चलता है, ज्ञान से शांति मिलती है ज्ञान नियमित बनने का मार्ग देता है। संसारी भव्य प्राणियों के लिए धर्म ही मंगलमय और शरणभूत है।</p>
<p><strong>आर्यिका श्री देशना मति जी ने क्रोध और क्षमा की विवेचना की</strong></p>
<p>समाज प्रवक्ता पवन कंटान और विकास जागीरदार, कमल सराफ ने बताया कि आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री देशना मति जी ने क्रोध और क्षमा की विवेचना की। अपेक्षा की उपेक्षा होने से क्रोध आता है। पवन और अंजना सती की कहानी के माध्यम से बताया कि 22 वर्ष तक पति का वियोग सिर्फ इस कारण से हुआ कि उन्होंने जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा को 22 मिनट के लिए छुपा दिया था। उन कर्मों के बंधन ने उन्हें यह दुःख दिया। जिसे उन्होंने समता से शांति से सहन किया। क्रोध जब बैर का रूप लेता है तो एक भव नहीं अनेक जन्मों के भव बिगड़ जाते हैं। 2 अक्टूबर को होने वाली अवनीश भाई दीक्षार्थी के परिजनों द्वारा 30 सितंबर को धार्मिक भजन का कार्यक्रम किया गया। दीक्षार्थी परिवार की ओर से प्रभावना का वितरण किया गया। रात्रि में दीक्षार्थी का हल्दी और मेंहदी का कार्यक्रम हुआ।</p>
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		<title>पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्यधर्म हुए कार्यक्रम: धामनोद में समाज के श्रावक-श्राविका कर रहे हैं उपवास </title>
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		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 10:54:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर और प्राचीन मंदिर बिखरोन में पर्युषण महापर्व के अवसर पर दश लक्षण धर्म के पांचवे दिन जैन मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा की गई। मंदिर में प्रतिदिन भक्तों की संख्या में बढ़ती जा रही है। यहां सुबह भगवान के अभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं में अपार श्रद्धा देखी जा रही है। धामनोद से पढ़िए, यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर और प्राचीन मंदिर बिखरोन में पर्युषण महापर्व के अवसर पर दश लक्षण धर्म के पांचवे दिन जैन मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा की गई। मंदिर में प्रतिदिन भक्तों की संख्या में बढ़ती जा रही है। यहां सुबह भगवान के अभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं में अपार श्रद्धा देखी जा रही है। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> नगर और प्राचीन मंदिर बिखरोन में पर्युषण महापर्व के अवसर पर दश लक्षण धर्म के पांचवे दिन जैन मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा की गई। मंदिर में प्रतिदिन भक्तों की संख्या में बढ़ती जा रही है। यहां सुबह भगवान के अभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं में अपार श्रद्धा देखी जा रही है। अभिषेक और शांतिधारा नीचे दो बार हो रही है और ऊपर भी अस्थाई रूप से श्रावक-श्राविकाएं पूजन कर रहे हैं। यहां भी श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा विराजमान की है। यहां भी अभिषेक और शांतिधारा हो रही है। प्राचीन मंदिर में श्री पार्श्वनाथ की चतुर्थ काल की पार्श्वनाथ की प्रतिमा मूलनायक की है। वहां भी नित्य अभिषेक और शांतिधारा तथा दशलक्षण धर्म की पूजा श्रावक श्राविकाएं कर रहे हैं। सोमवार को मुनिसेवा समिति की टीम ने भी अभिषेक और शांतिधारा कर पूजन किया। नगर के श्री पार्श्वनाथ मंदिर में भी अभिषेक और शांतिधारा के अलावा महापूजन दशलक्षण धर्म पर हो रहा है। सोमवार को शांतिधारा के सहयोगी सोमा राजेंद्र जैन, डॉ. सुरेखा प्रकाश कियावत, अंतिम, धीरेंद्र जैन इंद्र बनकर पुण्य का लाभ लिया।</p>
<p><strong>धर्म की राजनीति करने वाले की हर चेहरे धुंधले हैं</strong></p>
<p>आचार्य विशुद्ध सागरजी के शिष्य पंडित यश जैन और पंडित अंशुल भैया के मुखारबिंद से सोमवार को उत्तम सत्य धर्म पर विशेष प्रवचन हुए। पंडित अंशु भैया ने कहा कि मिल तो सबसे लेता है लेकिन मिलता किसी में नहीं। धर्म कहता है कि माया से मुक्त होकर जिओ। चल कपट करने वाले जीव को भगवान बनने का सुख नहीं मिलता। वह सोचता है कि राम राम जपना पराया माल अपना। वक्त पड़े तो गधे को कहे काका। रघुपति राघव राजा राम जैसा मौका वैसा काम, गंगा गए तो गंगा दास जमुना गए तो जमुना दास ऐसी नीति कुटिल नीति वक्र नीति वालों के भीतर धर्म नहीं ठहर सकता है। आज दिल्ली की राजनीति से ज्यादा गंदी धर्म की राजनीति हो गई है। कुछ तथाकथित लोग धर्म और धर्म गुरुओं को लेकर धर्म में राजनीति का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिया है मूल तो ज्योति का है। ऐसे नकली धर्मात्माओं से बचाना अन्यथा बंदर के हाथ में चाकू जैसा हाल होगा। उन्होने कहा कि धर्म की राजनीति करने वाले की हर चेहरे धुंधले हैं। कहीं कुछ भी स्पष्ट नहीं है। सत्यता ही जीवन में समुद्र को भी पार कर सकता है वरना जीवन कभी भी पार नहीं हो सकेगा। सच्चा धर्म व सच्ची सत्यता से। सत्य धर्म भी चारित्र में प्राप्त होगा। अन्यथा 84 लाख योनि में जीव भटकता रहेगा।</p>
<p><strong>मुनिसेवा समिति के सहयोग से जुलूस निकाला जाएगा</strong></p>
<p>मंदिर में विशेष पूजन के सहयोगी बने समाज अध्यक्ष महेश जैन, सचिन जैनए शाम को सामूहिक भगवान की स्तुति और श्रीजी आरती की गई। शाम को विद्वानों के प्रवचन हुए और समाज की अंकिता सचिन जैन ने अहम योग भी कराया। इस दौरान दोनों मंदिरों की भव्य सजावट रोशनी से की गई। मंगलवार को धूप दशमी पर प्राचीन जैन मंदिर बिखरोन में दोपहर 3 बजे समाजजनों की उपस्थिति में भव्य जुलूस निकाला जाएगा और सामूहिक धूप मंदिर में चढ़ाई जाएगी। यह जानकारी राकेश जैन, अजय जैन, नीलेश जैन, धीरेंद्र जैन, मुकेश पंधानिया और वनय जैन ने दी। मुनिसेवा समिति के सहयोग से जुलूस निकाला जाएगा। सोमवार को प्रणीति शैलेंद्र जैन का पांचवां उपवास है।</p>
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		<title>बाहुबली और श्रीजी अभिषेक मंडल ने इंदौर में किया कलशाभिषेक, 90 से अधिक सदस्य हुए शामिल : 152वां और 60वां रविवारिया कलशाभिषेक शीतल नगर जैन मंदिर में भक्ति भाव से सम्पन्न </title>
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		<pubDate>Wed, 06 Aug 2025 12:42:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बाहुबली अभिषेक मंडल और श्रीजी ग्रुप द्वारा 152वां एवं 60वां रविवारिया कलशाभिषेक 3 अगस्त को शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, शीतल नगर इंदौर में भक्तिभाव से सम्पन्न हुआ। पढ़िए नरेन्द्र जैन सोरया की पूरी रिपोर्ट… बाहुबली अभिषेक मंडल इंदौर द्वारा 152वां रविवारिया कलश एवं श्रीजी अभिषेक मंडल द्वारा 60वां रविवारिया कलश का आयोजन 3 अगस्त रविवार [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बाहुबली अभिषेक मंडल और श्रीजी ग्रुप द्वारा 152वां एवं 60वां रविवारिया कलशाभिषेक 3 अगस्त को शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, शीतल नगर इंदौर में भक्तिभाव से सम्पन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए नरेन्द्र जैन सोरया की पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>बाहुबली अभिषेक मंडल इंदौर द्वारा 152वां रविवारिया कलश एवं श्रीजी अभिषेक मंडल द्वारा 60वां रविवारिया कलश का आयोजन 3 अगस्त रविवार को 1008 श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन जिनालय, शीतल नगर, उत्कर्ष विहार (साकेत), इंदौर में संपन्न हुआ। यह वही जिनालय है जहाँ से बाहुबली अभिषेक मंडल की शुरुआत हुई थी।</p>
<p>करीब 90 से अधिक श्रद्धालुओं ने मिलकर श्रीजी की प्रतिमा का कलशाभिषेक, शांतिधारा, पूजन आदि धार्मिक क्रियाएं भक्तिपूर्वक और आनंद के साथ सम्पन्न कीं। सभी सदस्यों ने एक साथ मिलकर आयोजन को भक्तिमय और प्रभावशाली रूप दिया।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-86978" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250806-WA0028.jpg" alt="" width="1200" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250806-WA0028.jpg 1200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250806-WA0028-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250806-WA0028-768x1024.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250806-WA0028-1152x1536.jpg 1152w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250806-WA0028-990x1320.jpg 990w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" />जिनालय की विशेषता और इतिहास साझा किया</strong></p>
<p>कार्यक्रम में मंदिर समिति के अध्यक्ष हैमचन्द्र मीना झांझरी ने जिनालय की विशेषता और इतिहास साझा किया। बाहुबली अभिषेक मंडल एवं श्रीजी अभिषेक मंडल के सदस्यों का भव्य स्वागत माला-दुपट्टा पहनाकर किया गया।</p>
<p>देवकुमार जैन, सन्नी रश्मि जैन व JMB परिवार द्वारा सभी सदस्यों के लिए स्वल्पाहार एवं उपहार की सुंदर व्यवस्था की गई। JMB परिवार के सनी जैन द्वारा गिफ्ट हैंपर भेंट किए गए। आयोजन की सफलता पर श्रीजी अभिषेक मंडल ने बाहुबली मंडल व शीतल नगर मंदिर ट्रस्ट का आभार जताया।</p>
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		<title>परिवहन नगर में भगवान शांतिनाथ की पालकी निकाली: 108 कलश से अभिषेक किए, शांतिधारा हुई </title>
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		<pubDate>Mon, 26 May 2025 11:25:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप, मोक्ष कल्याणक महोत्सव के मौके पर परिवहन नगर जैन मंदिर में श्री शांतिनाथ भगवान की पालकी (जुलूस) निकाली गई। यात्रा के बाद आर्यिका श्री संगममति माताजी के सानिध्य में 108 कलश से अभिषेक किए। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप, मोक्ष कल्याणक महोत्सव [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप, मोक्ष कल्याणक महोत्सव के मौके पर परिवहन नगर जैन मंदिर में श्री शांतिनाथ भगवान की पालकी (जुलूस) निकाली गई। यात्रा के बाद आर्यिका श्री संगममति माताजी के सानिध्य में 108 कलश से अभिषेक किए। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप, मोक्ष कल्याणक महोत्सव के अवसर पर परिवहन नगर जैन मंदिर में श्री शांतिनाथ भगवान की पालकी (जुलूस) निकाली गई। यात्रा के बाद आर्यिका श्री संगममति माताजी के सानिध्य में 108 कलश से अभिषेक किए एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य रेखा, राजेंद्र, प्रतीक, सलोनी, रीधान, मनोज सोनी के परिवार एवं प्रदीप, नीता, मुकेश, नूतन, दर्शन सृष्टि जैन परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-81672" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250526-WA0011.jpg" alt="" width="1280" height="963" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250526-WA0011.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250526-WA0011-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250526-WA0011-1024x770.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250526-WA0011-768x578.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250526-WA0011-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250526-WA0011-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250526-WA0011-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250526-WA0011-990x745.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />निर्माण लाडु चढ़ाने का सौभाग्य बसंतीबाई मौसम कुमार जैन सनावद, सुब्रिता, योगेंद्र, शोभित, सुहानी परिवार को प्राप्त हुआ। माताजी को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य दीपक, सुनैना, गौरांश जैन परिवार को प्राप्त हुआ।कार्यक्रम में सभी समाजजनों ने उत्साह से भगवान के जयकारों के साथ भक्ति करते हुए विधान करवाया। रात्रि में भगवान का पालना झुलाया एवं आरती की गई। संचालन श्रेष्ठी जैन ने किया आभार चंद्रन रावका ने किया। इस अवसर पर अध्यक्ष नवनीत जैन ने सभी को बधाई शुभकामनाएं दी।</p>
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