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	<title>श्री पार्श्वनाथ बड़ा दिगंबर जैन मंदिर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>श्री पार्श्वनाथ बड़ा दिगंबर जैन मंदिर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सनावद में गुरु पूर्णिमा पर्व पर निकली रथ यात्रा : गुरु की महिमा को विस्तार से समझाया </title>
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		<pubDate>Thu, 10 Jul 2025 13:55:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आषाढ़ माह में अष्टानिका पर्व के समापन व गुरु पूर्णिमा पर नगर में विराजित युगल मुनिराज के सानिध्य में श्रीजी की रथयात्रा निकाली गई। गुरुवार को श्री पार्श्वनाथ बड़ा दिगंबर जैन मंदिर से श्रीजी को रथ में विराजमान कर शोभा यात्रा निकाली गई। सनावद से पढ़िए सन्मति जैन की , यह खबर&#8230; सनावद। आषाढ़ माह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आषाढ़ माह में अष्टानिका पर्व के समापन व गुरु पूर्णिमा पर नगर में विराजित युगल मुनिराज के सानिध्य में श्रीजी की रथयात्रा निकाली गई। गुरुवार को श्री पार्श्वनाथ बड़ा दिगंबर जैन मंदिर से श्रीजी को रथ में विराजमान कर शोभा यात्रा निकाली गई। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए सन्मति जैन की , यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> आषाढ़ माह में अष्टानिका पर्व के समापन व गुरु पूर्णिमा पर नगर में विराजित युगल मुनिराज के सानिध्य में श्रीजी की रथयात्रा निकाली गई। गुरुवार को श्री पार्श्वनाथ बड़ा दिगंबर जैन मंदिर से श्रीजी को रथ में विराजमान कर शोभा यात्रा निकाली गई। साथ बग्गी में गुरुदेव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, आचार्य श्री विराग सागर जी एवं आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के चित्र रखकर शोभायात्रा निकाली गई। जो नगर के प्रमुख मार्गो से होकर पुनः श्री पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर जी पहुंची। इस अवसर पर श्रीजी को रथ में विराजमान करने एवं रथ में स्वर्ण छड़ी के साथ सारथी बनने का सौभाग्य मंजुला हेमचंद भूच परिवार सनावद को प्राप्त हुआ। वहीं रजत मय छड़ी लेकर बैठने का सौभाग्य सुधीर कुमार जीरभार एवं कमलचंद जटाले परिवार को प्राप्त हुआ एवं चवर ढुराने का सौभाग्य हितार्थ मयंक धनोते को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>पंचामृत अभिषेक में उमड़े समाजजन</strong></p>
<p>शोभायात्रा के समापन के पश्चात बड़े मंदिर जी में श्री जी का पंचामृत अभिषेक आशीष झांझरी, कमलेश भूच, प्रशांत जैन,रिंकेश जैन, कमल केके,मनीष चौधरी राहुल स्वास्तिक द्वारा किया गया। इस पावन अवसर पर मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज द्वारा उच्चारित शांति धारा कराई गई। जिसका सौभाग्य सुनील कुमार जैन पांवणाजी परिवार एवं आशीष झांझरी परिवार एवं संकल्प अश्विनी शोभा चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ।अगली कड़ी में संत निलय में सभा का शुभारंभ त्रय आचार्यों के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन करके हुआ का दीप प्रज्वलन करने का सौभाग्य दाहोद, सिलवानी, भोपाल , मनासा, उज्जैन, बुरहानपुर, आष्टा, सीहोर से पधारे गुरु भक्तों द्वारा किया गया। मंगलाचरण निधि झांझरी,पूर्णिमा जैन द्वारा किया गया। युगल मुनिराज मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य ॐ साध्यम गुरु भक्त परिवार को प्राप्त हुआ। एवं युगल मुनिराज को शास्त्र भेंट करने सौभाग्य का ब्रह्मचारिणी सारिका दीदीके परिवारजन सुमन बहन पुत्र रजनीश जैन आरटीओ परिवार को प्राप्त हुआ। तत्पश्चात पूर्वाचार्यों को अर्घ्य समर्पित किया गया।</p>
<p><strong>जीवन में गुरु की प्राप्ति नहीं होती तब तक अज्ञान रहता है</strong></p>
<p>आचार्य रत्न श्री वर्धमान सागर जी महाराज की महा अर्घ्यों से संगीतमय पूजन प्रदीप पंचोलिया, कमल केके सुदेश जटाले के द्वारा कराई गई। इस अवसर पर अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य समाज की कार्यकारणी, मंडलों, युवा संग व अनेक संस्थाओं व समाजजनों एवं बाहर से पधारे से अतिथियों को प्राप्त हुआ। गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर मुनि श्री साध्य शहर जी महाराज ने अपनी देशना देते हुए कहा कि आज के दिन इस जगत को उस गुरु की प्राप्ति हुई थी, जो भविष्य में जगत गुरु बन गए। जीवन में गुरु की प्राप्ति नहीं होती तब तक अज्ञान अंधकार भरा रहता है और जिस दिन गुरु का साया सिर पर आ जाता है, जीव जगत गुरु बन जाता है । आज के दिन गौतम गणधर स्वामी को महावीर स्वामी भगवान जैसे गुरु की प्राप्ति थी । सब कुछ भूल जाना जो सब से आगे अपने गुरु को रखता है उसका नाम आसमान में चमकता है। गुरु हमेशा बनाना चाहिए। कोई भी गुरु ना मिले तो मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ को अपना गुरु बनाना। आज गुरु का दिन है। आज आप अपने गुरु से जों मांगोगे वो गुरु से मिलेगा।</p>
<p>देव गुरु बृहस्पति भी गुरु की महिमा गाने में समर्थवान नहीं है। इसी क्रम में मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज ने कहा कि आज पावन पर्व के दिन गुरु की महिमा गाने का सौभाग्य मिल रहा है।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा की &#8220;गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पांय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।&#8221; गुरु एक नहीं अनेक गुरु होते हैं। जिन माता-पिता ने आप को जन्म दिया वो भी गुरु हैं । जिन्होंने लौकिक शिक्षा का ज्ञान करवाया वो भी गुरु हैं । अगर कोई गुरु है वो वितरागी दिगंबर मुद्रा है, जो आत्मा को परमात्मा बनाने का रास्ता दिखाते हैं। जो आत्मा को संसार सागर से निकाले गुरु वो ही है।</p>
<p><strong>गुरुमंत्र की महिमा को समझाया</strong></p>
<p>हमारे दिगंबर मुनिराज ऐसे गुरु होते हैं जो शिष्यों के कल्याण की भावना भाते हैं।मुनिश्री ने अंत में कहा कि हमें शिक्षा लेना चाहिए कि जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं। युगल मुनिराज के द्वारा संध्या कालीन बेला में संत भवन में सभी समाजजनों गुरु मंत्र दिया एवं गुरुमंत्र की महिमा को विस्तृत रूप में समझाया। गुरपूर्णिमा के पावन अवसर पर मुनि श्री विश्व सूर्य सागर महाराज को आहार दान देने का सौभाग्य सलीत प्रफुल्ल जैन परिवार एवं साध्य शहर जी महाराज को आहारदान का सौभाग्य गौतम कुमार जैन परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रशांत चौधरी ने किया। आभार समाज अध्यक्ष मनोज जैन एवं मुनि सेवा समिति अध्यक्ष मुकेश जैन माना।</p>
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