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	<title>श्री पारसनाथ भगवान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>श्री पारसनाथ भगवान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>अरिहंत विहार मंदिर में गुरु उपकार भवन का लोकार्पण : मुक्तागिरी सिद्धक्षेत्र में होने जा रहा तीन दिवसीय निर्ग्रंथ मुनि दीक्षा महोत्सव  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 13:57:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अरिहंत विहार वह स्थल है, जिसके मूलनायक श्री पारसनाथ भगवान की प्राण प्रतिष्ठा आचार्य विद्यासागरजी महाराज ने की थी। यह उद्गार मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर में गुरु उपकार भवन के लोकार्पण समारोह में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, यह राजीव सिंघई की खबर&#8230;  विदिशा। अरिहंत विहार वह स्थल है, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अरिहंत विहार वह स्थल है, जिसके मूलनायक श्री पारसनाथ भगवान की प्राण प्रतिष्ठा आचार्य विद्यासागरजी महाराज ने की थी। यह उद्गार मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर में गुरु उपकार भवन के लोकार्पण समारोह में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह राजीव सिंघई की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> विदिशा।</strong> अरिहंत विहार वह स्थल है, जिसके मूलनायक श्री पारसनाथ भगवान की प्राण प्रतिष्ठा आचार्य विद्यासागरजी महाराज ने की थी। यह उद्गार मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर में गुरु उपकार भवन के लोकार्पण समारोह में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि स्वयं आचार्य श्री ने इस मंदिर की नींव रखी तथा वेदी प्रतिष्ठा कलश के आरोहण में वह स्वयं पधारे और संपूर्ण अरिहंत विहार को गुरुदेव ने अपनी परम रज से पवित्र किया। मुनि श्री ने कहा कि आज आप लोगों ने गुरु उपकार भवन का लोकार्पण किया और हम सभी उसके साक्षी बने। मुनि श्री ने कहा कि यह कार्य आचार्य श्री के द्वितीय समाधि दिवस पर ही संपादित होना था, उसी अनुसार उसका निमित्त बना। राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया आचार्य श्री विद्यासागरजी का द्वितीय समाधि दिवस के अवसर पर 17 से 18 फरवरी की मध्यरात्रि में छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ पहाड़ी के चंद्रगिरि पर आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ने अपनी अंतिम सांस ली थी।</p>
<p><strong>मंगलवार को आचार्य गुरुदेव की प्रतिमा का पदार्पण</strong></p>
<p>गुरुदेव के उन उपकारों को याद करते हुए तीन दिवसीय गुरु अर्चना महोत्सव 16 से 18 फरवरी तक अरिहंत विहार मंदिर परिसर में रखा गया है, जिसके प्रथम दिवस भगवान जिनेंद्र देव का अभिषेक एवं नित्य नियम पूजन उपरांत आचार्य गुरुदेव की संगीतमय पूजन किया गया। गुरुदेव के उपकारों को याद किया गया। गुरु उपकार भवन का लोकार्पण एवं वेदी शुद्धि का कार्यक्रम मंत्रोच्चारण के साथ मुनिसंध के सानिध्य में किया गया। कार्यक्रम के दूसरे दिवस मंगलवार को आचार्य गुरुदेव की प्रतिमा का पदार्पण होगा तथा उनके चरण कमल को विराजमान कर शुद्धि की जाएगी एवं मुनिसंघ की देशना होगी। इसी क्रम में 18 फरवरी को गुरुदेव की प्रतिमा को मूल वेदी पर विराजमान कर साथ में उपकरण एवं चरण कमल की स्थापना कर संगीतमय पूजन तथा मुनिसंघ की देशना होगी।</p>
<p><strong>पहली बार बीस से अधिक निर्ग्रंथ मुनि दीक्षा </strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया श्री सकल दिगंबी जैन समाज की ओर से 19 फरवरी को सिद्धक्षेत्र ‘मुक्तागिरी में आचार्य गुरुदेव श्री समयसागर महाराज आचार्य बनने के बाद पहली बार बीस से अधिक निर्ग्रंथ मुनि दीक्षा प्रदान कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिये बड़ी संख्या में धर्म श्रद्धालु 18 फरवरी को बस एवं चार पहिया गाड़ियों के माध्यम से बैतूल जिले में स्थापित मुक्तागिरी सिद्धक्षेत्र पर पहुंचेंगे तथा क्षेत्र और गुरुदेव के दर्शन और उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।</p>
<p><strong>नाम पंजीकरण करा लें</strong></p>
<p>उल्लेखनीय है कि निर्ग्रंथ मुनि दीक्षा में विदिशा नगर के गौरव ऐलक श्री कैवल्य सागरजी महाराज तथा ऐलक श्री गरिष्ठ सागर जी महाराज का तथा संभवसागरजी महाराज, संघस्थ ऐलक गौरव सागरजी महाराज सहित कई अन्य मुनि, ऐलक एवं क्षुल्लक दीक्षा होंगी। विदिशा नगर से जो भी महानुभाव इस कार्यक्रम में भाग लेना चाहते हैं, वह अपने नाम सकल दिगंबर जैन समाज समिति के पदाधिकारियों से संपर्क कर रजिस्टर करा लें।</p>
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		<title>संघ का 55 वर्षों के बाद वर्षायोग और श्री पारसनाथ भगवान की पंचकल्याण प्रतिष्ठा हुई : आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने कहा- मिथ्यात्व छोड़ें, सम्यक दर्शन प्राप्त करे संयम धारण करें </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Nov 2025 09:47:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर का सौभाग्य है कि सन 1970 में दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी का वर्षायोग हुआ और सन 1971 में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्य संघ सान्निध्य में हुई। जिसमें भी हम मुनि अवस्था में शामिल थे। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के मोक्ष कल्याणक अवसर पर धर्मसभा में प्रकट [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर का सौभाग्य है कि सन 1970 में दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी का वर्षायोग हुआ और सन 1971 में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्य संघ सान्निध्य में हुई। जिसमें भी हम मुनि अवस्था में शामिल थे। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के मोक्ष कल्याणक अवसर पर धर्मसभा में प्रकट की। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> टोंक।</strong> नगर का सौभाग्य है कि सन 1970 में दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी का वर्षायोग हुआ और सन 1971 में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्य संघ सान्निध्य में हुई। जिसमें भी हम मुनि अवस्था में शामिल थे। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के मोक्ष कल्याणक अवसर पर धर्मसभा में प्रकट की। उन्होंने बताया कि 2025 में संघ का 55 वर्षों के बाद वर्षायोग यहां हुआ और श्री पारसनाथ भगवान की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा हुई है। पंच कल्याणक प्रतिष्ठा विगत 36 वर्षों में छोटे से छोटे ग्राम गंभीरा में भी हुई और बड़े से बड़े महानगर कोलकाता आदि में भी हुई है और पंचकल्याणक प्रतिष्ठा से आपने क्या प्राप्त किया है, यह चिंतन का विषय है? आपकी ही तरह श्री पारसनाथ भगवान भी संसारी प्राणी थे। जिन्होंने मनुष्य भव में सम्यक दृष्टि होकर तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंध कर भगवान बने हैं। उन्होंने विजय जन्मों में अनेक उपसर्गों को समता भाव और क्षमा से सहन किया। समता से शक्ति मिलती हैं। क्षमा से आत्मा को शक्ति मिलती हैं।</p>
<p><strong>णमोकार मंत्र ही जिनवाणी,समयसार है</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ ने संयम धारण कर कर्मों को नष्ट कर सिद्धालय विराजित हुए। संसार में दुःख अधिक है, सुख कम है, इसलिए संयम वैराग्य धारण करना चाहिए। राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने बताया कि णमोकार मंत्र वह कार हैं, जिससे संसार भ्रमण से छुटकारा मिलता है। मंत्र में इतनी शक्ति है कि वह दुःखों से छुटकारा दिला सकती है। णमोकार मंत्र ही जिनवाणी,समयसार है। पारसनाथ भगवान भी बाल ब्रह्मचारी तीर्थंकर थे। उन्होंने आत्मा को परमात्मा बनाने का पुरुषार्थ कर केवल ज्ञान प्राप्त कर सिद्ध अवस्था प्राप्त की है। आचार्य श्री ने एक सूत्र बताया कि जीवन में मिथ्यात्व छोड़कर सम्यक दर्शन प्राप्त करें। संयम रत्नत्रय धर्म धारण कर उन्नति का पुरुषार्थ कर मनुष्य जन्म सार्थक करना चाहिए। सभी को चमत्कारी श्री पार्श्वनाथ श्यामबाबा से प्रतिदिन देव दर्शन, अभिषेक, पूजन का संकल्प लेना चाहिए।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-94262" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0003.jpg" alt="" width="1536" height="1291" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0003.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0003-300x252.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0003-1024x861.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0003-768x646.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0003-990x832.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0003-1320x1109.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1536px) 100vw, 1536px" />आचार्य श्री का आदिनाथ जिनालय नसिया अमीरगंज विहार हुआ</strong></p>
<p>देव गुरु हमारे आराध्य हैं। आर्यिका श्री वत्सल मति जी ने स्वयं संयम जीवन में क्रम से प्रतिदिन त्याग कर उत्कृष्ट समाधि प्राप्त की। नगर में 4 साधुओं की समाधि हुई है। इन सब भी समाधि स्थल का निर्माण होना चाहिए। बुधवार को प्रातः श्री जी के अभिषेक पूजन के बाद प्रतिष्ठाचार्य श्री हंसमुख जी ने बताया कि अरिहंत भगवान 4 कर्मों के बाद शेष 4 कर्म किस प्रकार श्रेणी बार क्षय कर सिद्धालय विराजित होते हैं। भगवान के मोक्ष जाने के बाद अग्निकुमार देव नख और केश अग्नि संस्कार करते हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ससंघ के सान्निध्य में रथ में श्री जी को विराजित कर नूतन मंदिर में नूतन बेदी पर पुण्यशाली परिवारों द्वारा विराजित कर नूतन शिखर पर स्वर्ण कलशारोहण कर ध्वज दंड लगाए गए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का संघ सहित दोपहर को श्री आदिनाथ जिनालय नसिया अमीर गंज विहार हुआ।</p>
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		<title>अर्थ और काम पुरुषार्थ धर्म नीति अंधकार करे: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कर्मों के प्रतिफल के संबंध में विस्तार से बताया  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Oct 2025 12:19:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी आदर्श नगर श्री पारसनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान संघ सानिध्य में हो रहे हैं। प्रातःकाल श्री पारसनाथ भगवान के पंचामृत अभिषेक विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों ने किया। टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230; टोंक। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी आदर्श नगर श्री पारसनाथ जिनालय में संघ सहित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी आदर्श नगर श्री पारसनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान संघ सानिध्य में हो रहे हैं। प्रातःकाल श्री पारसनाथ भगवान के पंचामृत अभिषेक विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों ने किया। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी आदर्श नगर श्री पारसनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान संघ सानिध्य में हो रहे हैं। प्रातःकाल श्री पारसनाथ भगवान के पंचामृत अभिषेक विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों ने किया। धर्मसभा में आचार्य श्री ने बताया कि संसारी प्राणी को दुःख और सुख मिलते हैं। तीर्थंकर भगवान ने भी सुख और दुख भोगे हैं। किए गए कार्यों के आधार पर ही सुख-दुःख और शुभ और अशुभ फल मिलते हैं। कर्म सभी के उदय में आते हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने चार प्रकार के ध्यान, चार प्रकार के पुरुषार्थ, दर्शन विधि पर सरल भाषा में उपदेश दिया। गुरु भक्त राजेश पंचोलिया, समाज प्रवक्ता गजराज लोकेश, संजय संघी के अनुसार श्री पारसनाथ भगवान की पूर्व पर्याय मरुभूति और कमठकी पूर्व पर्याय के 10 भवों का वर्णन किया गया। कमठ ने मरुभूति पर उपसर्ग बैर कारण किया। जिसे मरुभूति के जीव ने क्षमा भाव सहित सहन किया। आर्त ध्यान कारण त्रियंच पर्याय मिलती हैं। मरूभूति हाथी के जीव ने मुनिराज के उपदेश से अणुव्रत धारण कर निर्दाेष पालन में अन्य जीवांे ने भी सहायता की। आचार्य श्री ने चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष पुरुषार्थ की विवेचना में बताया कि अर्थ और काम पुरुषार्थ धर्म नीति पूर्वक करना चाहिए। तभी सुख, शांति और पुण्य मिलता है। बिना धर्म पुरुषार्थ के मोक्ष प्राप्त नहीं होता हैं।</p>
<p><strong>सहस्त्रनाम विधान 28 को </strong></p>
<p>भगवान के दर्शन भक्ति उत्साह से ठीक उसी प्रकार करना चाहिए। जैसे आसमान में मेघो की गर्जना वर्षा से मयूर प्रसन्न होकर नृत्य करता है। धार्मिक कार्य भगवान के दर्शन अभिषेक पूजन करने का अवसर पुण्य और सौभाग्य से मिलता है। शास्त्रों में बताया हैं कि मंदिर श्री जी के दर्शन की इच्छा होने से मंदिर में भगवान के विकल्प रहित दर्शन करने तक अनेकों उपवासों का पुण्य शुभ फल मिलता है। तप उपवासों से कर्मों की निर्जरा होती है। शाम को श्री जी और आचार्य श्री की आरती के बाद मुनि श्री हितेंद्रसागर जी द्वारा छहढाला की कक्षा ली जाती हैं। आचार्य श्री के सानिध्य मे आदर्श नगर में सहस्त्रनाम विधान 28 अक्टूबर दोपहर 1 बजे से होगा। आज सलूंबर नगर के सैकड़ों भक्तों ने आचार्य श्री के दर्शन किए।</p>
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