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	<title>श्री दिगम्बर जैन धर्मस्थल शीतलतीर्थ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>स्थापना दिवस के साथ योगी परिवार का वात्सल्य मिलन: जल एवं पंचामृत से अभिषेक कर शांतिधारा की  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Jun 2025 10:36:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रतलाम शहर से 13 किमी दूर स्थित श्री दिगम्बर जैन धर्मस्थल शीतल तीर्थ। आचार्य श्री योगीन्द्र सागर जी की पावन प्रेरणा से निर्मित एवं पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी एवं आचार्य श्री सुंदरसागर जी के पावन सानिध्य में प्रतिष्ठित 72 जिनमंदिरों से सुशोभित कैलाश पर्वत की कृत्रिम रचना, जो अपने निर्माण के प्रारंभ से ही [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रतलाम शहर से 13 किमी दूर स्थित श्री दिगम्बर जैन धर्मस्थल शीतल तीर्थ। आचार्य श्री योगीन्द्र सागर जी की पावन प्रेरणा से निर्मित एवं पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी एवं आचार्य श्री सुंदरसागर जी के पावन सानिध्य में प्रतिष्ठित 72 जिनमंदिरों से सुशोभित कैलाश पर्वत की कृत्रिम रचना, जो अपने निर्माण के प्रारंभ से ही अतिशय भूमि के रूप में जानी जाती है। इस वर्ष भी 14 जून को इस क्षेत्र का स्थापना दिवस भव्यता के साथ मनाया गया। <span style="color: #ff0000">रतलाम से पढ़िए, राकेश जैन चपलमन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रतलाम।</strong> जहां श्रद्धा और विश्वास की दृढ़ता हो वहां अतिशय स्वयं प्रकट हो जाते है और ऐसी ही अतिशय भूमि है मप्र के रतलाम शहर से 13 किमी दूर स्थित श्री दिगम्बर जैन धर्मस्थल शीतल तीर्थ। आचार्य श्री योगीन्द्र सागर जी की पावन प्रेरणा से निर्मित एवं पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी एवं आचार्य श्री सुंदरसागर जी के पावन सानिध्य में प्रतिष्ठित 72 जिनमंदिरों से सुशोभित कैलाश पर्वत की कृत्रिम रचना, जो अपने निर्माण के प्रारंभ से ही अतिशय भूमि के रूप में जानी जाती है। इस वर्ष भी 14 जून को इस क्षेत्र का स्थापना दिवस भव्यता के साथ मनाया गया। मुनि श्री सद्भाव सागर जी (ससंघ), आर्यिका 105 श्री विविक्तश्री माताजी (ससंघ), आर्यिका श्री विशाखाश्री माताजी (ससंघ) के पावन सानिध्य में तीर्थ स्थापना दिवस के साथ ही योगी परिवार का वात्सल्य मिलन भी आयोजित किया गया। क्षेत्र अधिष्ठात्री डॉ. सविता दीदी ने बताया कि प्रतिवर्ष 14 जून को क्षेत्र का स्थापना दिवस एवं 17 फरवरी को आचार्य श्री योगीन्द्र सागर जी महामुनिराज का जन्मावतरण दिवस भव्यता से मनाया जाता है। जिसमें सैकड़ों श्रावक श्राविकाओं सहित कई गुरुभक्त अपनी सहभागिता देते हैं। इस स्थापना दिवस क्रम में प्रातः काल प्रथम बार अतिशयकारी मूलनायक श्री आदिनाथ भगवान चांदखेड़ी वाले बाबा को कृत्रिम कैलाश पर्वत पर पधराकर जल एवं पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद शांतिधारा की गई।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-83134" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250616-WA0005.jpg" alt="" width="1600" height="1066" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250616-WA0005.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250616-WA0005-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250616-WA0005-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250616-WA0005-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250616-WA0005-1536x1023.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250616-WA0005-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250616-WA0005-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250616-WA0005-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250616-WA0005-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250616-WA0005-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250616-WA0005-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250616-WA0005-1320x879.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />सूर्य के ताप मो निश्तेज होते देखा </strong></p>
<p>11 फीट उतुंग पद्मासन श्री आदिनाथ भगवान पर जब जल एवं दूध की धारा की गई तो चारों ओर से भगवान के जयकारों से क्षेत्र गुंजायमान हो गया। इस समय साक्षात अतिशय प्रकट हुआ कि वर्तमान में गर्मी का प्रचंड ताप है और प्रातः काल से ही सूर्य में तेजी देखने को मिलती है किंतु इस अभिषेक क्रिया को प्रारंभ करने से लेकर शांतिधारा तक सूर्य ने विनम्रता दिखाई और ठंडी हवाओं के बीच सबने इस भक्ति आनंद में गोते लगाए। जैसे ही अभिषेक क्रिया पूर्ण हुई सूर्य में तेजी आ गई। यह वह अतिशय है जो क्षेत्र पर उपस्थित सभी श्रावकों ने देखा और दिन भर इसी विषय की चर्चा भी रही।</p>
<p><strong>सभा</strong> में इनकी रही उपस्थिति</p>
<p>प्रातः 9 बजे गुरु मंदिर में श्री ऋषि विधान का आयोजन हुआ एवं दोपहर में गुरु गुणानुवाद सभा का आयोजन हुआ। इसमें आमंत्रित विद्वानों में डॉ. अनुपम जैन, इंदौर एवं मुख्य अतिथि के रूप में नगरपालिका निगम बड़नगर चेयरमेन अभय टोंग्या, अशोक गोधा, पुखराज सेठी, डॉ. नेमीचंद जैन, महेंद्र गुड़वाला, संजय बिलाला की उपस्थिति रही।</p>
<p><strong>गुरु मुख से तपस्या और साधना की प्रभावना को जरूर सुना</strong></p>
<p>इस अवसर पर अपने उद्बोधन में आर्यिका विशाखा श्री माताजी ने कहा कि पूज्य गुरुदेव अपनी साधना स्व हित के लिए करते थे किंतु उसी साधना के प्रताप से आने वाले श्रावको के दुखो को भी दूर करते थे। इसकी मैं स्वयं प्रत्यक्ष प्रमाण हूं क्योंकि, मुझे गुरुदेव के उन्हीं चमत्कारो को देखने का सौभाग्य मिला। आर्यिका विविक्तश्री माताजी ने कहा कि हमने आचार्य योगीन्द्र सागर जी के कभी दर्शन नहीं किए किंतु गुरु मुख से इनकी तपस्या और साधना की प्रभावना को जरूर सुना है। जब उस वर्णन को सुनना ही मन को आनंद से भर देता है तो ऐसे गुरुओं के प्रत्यक्ष दर्शन किसी तीर्थ दर्शन से कम नहीं होंगे।</p>
<p><strong>शीतल तीर्थ की भूमि उर्जा और अतिशय से भरपूर</strong></p>
<p>मुनि श्री सद्भाव सागर जी ने कहा कि अब तक मैंने इस क्षेत्र के अतिशय के बारे में सुना था किंतु अब उस अतिशय को महसूस भी कर लिया है क्योंकि, जब मैं यहां आया तो रुग्णावस्था में था और जैसे ही इस भूमि के संपर्क में आया स्वयं को स्वस्थ एवं आनंदित महसूस कर रहा हूं। यह शीतल तीर्थ की भूमि उर्जा और अतिशय से भरपूर है। इसी अवसर पर डॉ. सविता दीदी ने क्षेत्र की भावी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए उपस्थिति श्रमण संघ को क्षेत्र पर ही प्रवास का निवेदन किया एवं आगंतुक सभी गुरुभक्तों का आभार प्रकट किया।</p>
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		<title>चीरहरण का जिम्मेदार कौन ? : महिलाओं के प्रति सोच को बदलने के लिए सार्थक सामूहिक प्रयास करने होंगे         </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Sep 2024 00:30:28 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>महिला पर जब भी विपत्ति आती है तो यही होता है, संस्कारों को बेड़ियां कहकर अथवा सशक्तीकरण की दुहाई देकर अथवा अपराधी और उसके साथियों को आचरण व्यवहार को परिभाषित करने में व्यर्थ का समय खर्च किया जाता है। पुरुष प्रधान समाज, महिला जागृति अभियान, महिला सशक्तीकरण इन विषयों पर चर्चा करने से समस्या का समाधान होना संभव नहीं है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्री दिगम्बर जैन धर्मस्थल शीतलतीर्थ की अधिष्ठात्री ब्र. डॉ. सविता जैन का आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सामान्यतः</strong> मानव स्वभाव में दो प्रकार की प्रवृतियां पाई जाती हैं- (1) दैवीय प्रवृत्ति (2) पैशाचिक प्रवृत्ति । जैसा कि नाम से ही प्रतिपादित दैवीय प्रवृत्ति जिसमें सदगुणों का समावेश हो इसके विपरीत पैशाचिक प्रवृत्ति जिसमें दुर्गणों की अधिकता हो। सदगुण व दुर्गण भी व्यक्ति अपने-अपने अवसर लाभ-हानि के अनुसार परिभाषित कर लेता हैं किन्तु एक स्वस्थ समाज के स्वस्थ व्यक्ति में होने वाले गुण ही सद्गुण और दुर्गुण को परिभाषित करते है। वर्तमान में समाज में इतनी अधिक विकृतियों व्याप्त हो गई है कि किसी भी समस्या के समाधान हेतु समस्या उत्पन्न होने के कारण को खोजने कि जगह दोषारोपण की प्रक्रिया प्रारंभ कर समस्या को जटिल बना दिया जाता है। दोषरोपण अपने-अपने हित साधने में मूल समस्या से ध्यान हस्तांतरित हो जाता है क्योंकि अधिक समय हो जाने से नवीन समस्या उत्पन्न हो जाती है और पुरानी समस्या बिना उपयुक्त समाधान के कहीं खो जाती है।</p>
<p>महिला पर जब भी विपत्ति आती है तो यही होता है, संस्कारों को बेड़ियां कहकर अथवा सशक्तीकरण की दुहाई देकर अथवा अपराधी और उसके साथियों को आचरण व्यवहार को परिभाषित करने में व्यर्थ का समय खर्च किया जाता है। पुरुष प्रधान समाज, महिला जागृति अभियान, महिला सशक्तीकरण इन विषयों पर चर्चा करने से समस्या का समाधान होना संभव नहीं है। अपराधी को 10-12 वर्षों पश्चात् दण्डित करना भी राजमार्ग नहीं है। समाज को इन पाशविक प्रवृत्तियों को कुकुरमुत्ते की की तरह पनपने वाली सोच को बदलने के लिए सार्थक सामूहिक प्रयास करने होंगे। मानवीय संवेदना और मूल्यों को पुनस्थापित करने का प्रयत्न करना होगा &#8220;वसुधैव कुटुम्बकम्&#8221; की भावना को पुनः अपने आस-पड़ोस, गली मोहल्ले कस्बे में व्याप्त करना तदनुकूल आचरण करने की प्रवृत्ति को स्थापित करना होगा। मानवीय मुल्यों के अभाव बाजारीकरण, पाश्चात्य सभ्यता के परिणाम स्वरुप महिलाओं ने आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त करने की होड़ में स्वयं को वह वस्तुओं के विज्ञापन करते-करते स्वयं ही एक वस्तु बन गई है।</p>
<p>समाज में बच्चों के जन्म से ही लिंग भेद के वातावरण के साथ बच्चों का पालन-पोषण किया जाता है जिसके हुए प्रभाव से महिलाओं को कमजोर एवं दोयमदर्जे का माना जाता है। इन सब दुष्प्रवृतियों को परिवर्तित करने के मानवीय मूल्यों (नैतिक मूल्यों) को प्रधानता प्रदान कर समाज में हमारे देश के सामाजिक एवं सांस्कृतिक गौरव को बढ़ाने वाले महापुरुषों का यशोगान की गाथाएं घर-घर बार-बार पहुंचा कर उनके गौरवमयी, उज्ज्वल चारित्र की गाथाएं घर-घर गुंजायमान होगी तो पैशाचिक प्रवृतियों का शमन संभव है यदि एक महिला का चीरहरण हुआ है तो वह पूरी भारतीय संस्कृति की अस्मिता का चीर हरण है। उसे तेरा स्थान मेरा स्थान तेरी गलती मेरी गलती आदि बाते कर टाला नहीं जा सकता है। ऐसी घटना किसी भी प्रकार से लाभदायक सिद्ध नहीं हो सकती अपितु इसके दूरगामी परिणाम अत्यन्त घातक होंगे। अन्ततः चीर हरण जैसी त्रासदी को रोकने के लिए सामूहिक उत्तरदायित्व लेकर सम्पूर्ण व्यवस्था बिना विलम्ब सुधार करने की प्रक्रिया में तेजी लानी होगी।</p>
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