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	<title>श्री दिगंबर जैन मंदिर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>श्री दिगंबर जैन मंदिर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य श्री विद्यासागर जी का द्वितीय समाधि दिवस मनाया&#039;: आचार्य छत्तीसी विधान कर आचार्यश्री के उपकारों पर प्रकाश डाला </title>
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		<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 13:54:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जन-जन के हृदय सम्राट, प्राणी मात्र के प्रति दया के भाव सदैव रखने वाले, आचार्य श्री विद्यासागर जी के द्वितीय समाधि स्मृति दिवस पर श्री दिगंबर जैन मंदिर गायत्री नगर महारानी फार्म में मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में बुधवार को प्रातः 8 बजे से नित्य प्रतिदिन अभिषेक शांतिधारा पूजा के बाद आचार्य छत्तीसी विधान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जन-जन के हृदय सम्राट, प्राणी मात्र के प्रति दया के भाव सदैव रखने वाले, आचार्य श्री विद्यासागर जी के द्वितीय समाधि स्मृति दिवस पर श्री दिगंबर जैन मंदिर गायत्री नगर महारानी फार्म में मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में बुधवार को प्रातः 8 बजे से नित्य प्रतिदिन अभिषेक शांतिधारा पूजा के बाद आचार्य छत्तीसी विधान का आयोजन विधानाचार्य अजीत शास्त्री के निर्देशन में किया गया। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;   </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर</strong>। जन-जन के हृदय सम्राट, प्राणी मात्र के प्रति दया के भाव सदैव रखने वाले, आचार्य श्री विद्यासागर जी के द्वितीय समाधि स्मृति दिवस पर श्री दिगंबर जैन मंदिर गायत्री नगर महारानी फार्म में मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में बुधवार को प्रातः 8 बजे से नित्य प्रतिदिन अभिषेक शांतिधारा पूजा के बाद आचार्य छत्तीसी विधान का आयोजन विधानाचार्य अजीत शास्त्री के निर्देशन में किया गया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने बताया कि विधान में सौधर्म इंद्र बनकर वीरेंद्र सुनंदा अजमेरा ने विधान पूजा करवाई। इस अवसर पर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष कैलाश छाबड़ा, उपाध्यक्ष अरुण शाह, मंत्री राजेश बोहरा, वरिष्ठ एडवोकेट विमल कुमार जैन, वरिष्ठ समाज सेवी अनिल गदिया, अशोक जैन विधानसभा वाले, अशोक जैन कासलीवाल एचपीसीएल वाले, बसंत बाकलीवाल, संतोष बाकलीवाल, सुनील जैन तिजारा वाले, कमल मालपुरा वाले आदि महिला-पुरुषों उपस्थित होकर विधान पूजा की। विधानाचार्य पंडित अजीत शास्त्री ने आचार्य श्री के उपकारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूज्य आचार्य श्री जन-जन के परम आराध्य आचार्य थे, उन्होने जनजन के लिए अनेकों उपकार किए। सभी का आभार मंदिर प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष अरुण शाह ने माना।</p>
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		<title>सत्पुरुष गुणों एवं दोषों में से गुणों को ही ग्रहण करते हैं : रामकथा के आठवें दिन मुनिश्री जयकीर्ति ने सुनाए कई प्रभावी प्रसंग  </title>
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		<pubDate>Fri, 28 Nov 2025 14:10:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री जय कीर्ति जी ससंघ रामपुरा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। मुनिश्री यहां पद्म पुराण पर आधारित रामकथा का संगीतमय वाचन कर रहे हैं। कथा 30 नवंबर तक चलेगी। कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230; कोटा। मुनिश्री जय कीर्ति जी ससंघ रामपुरा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री जय कीर्ति जी ससंघ रामपुरा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। मुनिश्री यहां पद्म पुराण पर आधारित रामकथा का संगीतमय वाचन कर रहे हैं। कथा 30 नवंबर तक चलेगी। <span style="color: #ff0000">कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> मुनिश्री जय कीर्ति जी ससंघ रामपुरा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। मुनिश्री यहां पद्म पुराण पर आधारित रामकथा का संगीतमय वाचन कर रहे हैं। कथा 30 नवंबर तक चलेगी। कई जन्मों का पुण्य उदय जब जीवन में आता है तब जाकर ऐसा स्वर्णिम सुअवसर मिल पाता है। अकलंक संस्थान के अध्यक्ष पीयूष बज और सचिव अनिमेष जैन ने बताया कि आज मां जिनवाणी को मंदिर से पालकी में विराजमान करके मुनिश्री के कर कमलों में भेंट करने का सौभाग्य मैना जैन प्रतीक, विनीता, अनाया, तनीषा, वेद परिवार जन को मिला। राजा श्रेणिक बनने का अवसर पीयूष बज, कविता बज, प्रशस्त रिम्पी बज, विजय पाड़ा को मिला। उन्होंने प्रथम प्रश्न पूछा। महेश गंगवाल गुलाबबाड़ी’ ने बताया कि सकल दिगंबर जैन समाज समिति के अध्यक्ष विमल गोधा, नांता, विनोद टोरड़ी, जेके जैन, नरेश वेद, श्री दिगंबर जैन महासमिति कोटा संभाग की अध्यक्ष मधु शाह, आशा श्रीमाल, आशा सेठी, कविता बज, साधना मुवासा, इंदौर से पधारे किशोरकुमार, राजकुमार, चिन्मय जैन, देहरादून के पोमिल जैन आदि समाज श्रेष्ठी उपस्थित हुए।</p>
<p><strong>प्रभु का वह जिनबिम्ब कलुषता को नष्ट करने वाला था</strong></p>
<p>मुनिश्री जयकीर्ति जी ने धर्मसभा में कहा कि जिस प्रकार हंस दूध एवं जल से दूध ही ग्रहण करता है। उसी प्रकार सत्पुरुष गुणों एवं दोषों में से गुणों को ही ग्रहण करते हैं,। जिस प्रकार कौआ हाथियों के गंड स्थल में से मोतियों को छोड़कर मांस को ही ग्रहण करता है, उसी प्रकार दुर्जन गुणों को छोड़कर दोषों को ही ग्रहण करता है। जिस प्रकार उल्लू सूर्य को काला-काला ही देखता है, उसी प्रकार दुर्जन सबको दोषयुक्त ही देखता है। सरोवर के उपर की जाली कूड़ा-करकट रोक लेती है। राम-लक्ष्मण-सीता सहित सभी ने विभीषण के भवन में प्रवेश किया। जिसमें पाप को नष्ट करने वाले जिनालय मे पद्मरागमणि से निर्मित तेजवंत पद्म प्रभु भगवान का जिन बिम्ब था। सभी उस अनुगम प्रतिमा के दर्शन एवं स्तुति करते हैं, प्रभु का वह जिनबिम्ब कलुषता को नष्ट करने वाला था। ,राम लंका का राज्य संचालन विभीषण को ही सौंप देते हैं। राम आदि को लंका में सुखपूर्वक रहते हुए छः वर्ष व्यतीत हो जाते हैं।</p>
<p><strong>पुण्य कर्म से प्राणियों के अचिंतित कार्य सुंदरता को प्राप्त होते हैं</strong></p>
<p>इधर कौशल्या के दुःख निवारण के उद्देश्य से नारद राम की खोज करते हुए लंका में आए एवं माता की व्यथा सुनाते हैं।राम कहते हैं कि मां की सेवा पुण्यात्मा ही कर सकते हैं। सोलह दिनों में विभीषण हजारों विद्याधर कारीगर कुमारों द्वारा अयोध्या में अनेक जिनालय, नए-नए भवन, सरोवर, वापिकाओं, उद्यानों का निर्माण करवा देता है। वहां रत्नों की वर्षा करा देते हैं, सभी घर धन धान्य से भर दिए जाते हैं, पूरी अयोध्या की अदभुत सजावट कर दी जाती है। उस अयोध्या की सुंदरता का वर्णन सौ वर्षों में भी नहीं किया जा सकता है। पूर्वभव में किए हुए पुण्य कर्म से प्राणियों के समस्त अचिन्तित कार्य सुन्दरता को प्राप्त होते हैं। इसलिए पुण्य कार्य करते रहो जिससे संताप न भोगना पड़े।</p>
<p><strong>वे भोग उपभोग छोडने का निश्चय करते</strong></p>
<p>राम लक्षमण-सीता सहित सभी विद्याधर अयोध्या में पहुंचे। वहां माताओं एवं पुत्रों का सुखद मिलन व संवाद होता है। समस्त सुख सुविधाओं एवं अनुकूलता में रहते हुए भी भरत वैराग्य से परिपूर्ण है। वे धर्मफल का विचार करते हैं कि मैं कब इस राज्य से मुक्त होऊंगा। धर्म ही परम शरण है मैं इसकी उपासना कब करूँगा। वे भोग उपभोग छोडने का निश्चय करते। इधर त्रिलोक मंडन हाथी अयोध्या में उत्पात मचा देता है। किसी के रोकने पर भी वह नहीं रुकता है किंतु भरत के समीप आते ही वह शांत हो जाता है। उसे पूर्वभवों का स्मरण हो जाता है तभी अयोध्या नगरी में देशभूषण कुभूषण केवली भगवान का आगमन होता है। चारों भाई अपने परिजन पुरजनसह केवली भगवान् के दर्शनार्थ जाते हैं। वहा सभी धर्माेपदेश सुनते हैं।</p>
<p><strong>अपने सारे कार्य आत्म- हितकारी विचार पूर्वक ही करना</strong></p>
<p>वैरागी भरत एक हजार राजाओं के साथ जिनदीक्षा लेते हैं, कैकयी तीन सौं रानियों के साथ आर्यिका बन जाती है। हाथी अणुव्रत ग्रहण करता है। राजमहल में आने पर राम का राज्याभिषेक होता है, भामण्डल आदि के लिए राज्य विभाजन किया राजा है, शत्रुधन राज्य हेतु मथुरा का चयन करता है, मथुरा के राजा मधु एवं शत्रुध्न के मध्य भीषण युद्ध होता है, घायल मधु मन में विचारता है कि अब में विष्य-भोग- राज्य हेतु संसार में फंसने वाला कोई कार्य नहीं करूंगा। आज तक मैंने निराकुलता को नहीं पाया है। मैंने मोह में फंसकर धर्म में बुद्धि नहीं लगाई। समाधि मरणकर वे सानत स्वर्ग में देव बनते है, मित्र मधु की मृत्यु से क्षुभित चमरेन्द्र मथुरा में भयंकर महामारी फैलता है, सप्तऋषियों के तप के प्रभाव से महामारी दूर हो जाती है।कदाचित् मूर्ख की तो सेवा की जा सकती है किन्तु कृतघ्न को दूर से ही छोड देना चाहिए।</p>
<p><strong>ीता को सिंहनाद अटवी में छोडने का आदेश दे दिया</strong></p>
<p>जो मुनि को देखकर आसन नहीं छोड़ता,सम्मान नहीं करता है वह घोर मिथ्यादृष्टि, दीर्घ &#8211; संसारी होता है।जो सप्तऋषयों के आश्यर्यकारी प्रभाव को कहता व सुनता है वह शीघ्र ही चारों प्रकार मंगल को प्राप्त होता है, जो साधु समागम में तत्पर रहते हैं वे अपने सम्पूर्ण मनोरथ सिद्ध करते हैं।राम द्वारा पृथ्वी के समस्त जिनालयों को सझाने हेतु आज्ञा दी जाती है, महेन्दोदय उद्यान में प्रति दिन पुजनादि सम्पन्न ही ही रहे थे कि एक दिन उद्यान में स्थित राम के समीप प्रजा सीता के अपवाद की सूचना लेकर आयी। लक्ष्मण द्वारा राम को बार-बार सीता को नहीं त्यागने हेतु निवेदन करने पर भी राम नहीं माने एवं कृतान्त वक्त्र सेनापति को बुलाकर सीता को सिंहनाद अटवी में छोडने का आदेश दे दिया।</p>
<p><strong>सम्यग्दर्शन स्थिर सुख देना वाला है </strong></p>
<p>सेनापति सीता को दुःखी मन से वन में छोडकर राम द्वारा परित्याग करने की सुचना देता है,सीता सेना पति को राम के लिए संदेश देती है कि राम मेरे त्याग से विषाद मत करना, धैर्यपूर्वक न्याय &#8211; वत्सल हो प्रजा का पालन करना, जिस सम्यक्त्व के द्वारा भव्य जीव संसार से तिर जाते है उसकी भलीकार आरधना करना, साम्राज्य की अपेक्षा वह सम्यक्त्व ही श्रेष्ठ है क्योंकि साम्राज्य तो नष्ट हो जाता है परन्तु, सम्यग्दर्शन स्थिर सुख देना वाला है अभव्यों द्वारा की गई घृणा के कारण सम्यग्दर्शन मत छोड़ना वह दुर्लभ रत्न है वह अत्यन्त बड़ा अमृत फल है, संसार में बोलने से कौन किसको रोक सकता है अपने सारे कार्य आत्म- हितकारी विचार पूर्वक ही करना, मेरी उचित या अनुचित प्रवृत्ति को क्षमा कर देना&#8230;आदि प्रसंगों का अद्भुत विस्तृत वर्णन संगीतमय एवं कलापूर्ण शैली में गुरुदेव केमुखारविन्द से हुआ।</p>
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		<title>जीवन क्रियाशील बनाने के लिए रामचंद्र जी का चरित्र अवश्य ही सुनना चाहिए: मुनिश्री जयकीर्ति जी की रामकथा में उमड़े श्रावक-श्राविकाएं  </title>
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		<pubDate>Thu, 27 Nov 2025 14:44:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विशिष्ट रामकथाकार अनुष्ठान विशेषज्ञ मुनिश्री जयकीर्ति जी रामपुरा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। मुनिश्री के मुख से 30 नवंबर तक अकलंक स्कूल परिसर में भव्य रामकथा संगीत की सुमधुर धुनों के साथ चल रही है। कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230; कोटा। विशिष्ट रामकथाकार अनुष्ठान विशेषज्ञ मुनिश्री जयकीर्ति जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विशिष्ट रामकथाकार अनुष्ठान विशेषज्ञ मुनिश्री जयकीर्ति जी रामपुरा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। मुनिश्री के मुख से 30 नवंबर तक अकलंक स्कूल परिसर में भव्य रामकथा संगीत की सुमधुर धुनों के साथ चल रही है। <span style="color: #ff0000">कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> विशिष्ट रामकथाकार अनुष्ठान विशेषज्ञ मुनिश्री जयकीर्ति जी रामपुरा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। मुनिश्री के मुख से 30 नवंबर तक अकलंक स्कूल परिसर में भव्य रामकथा संगीत की सुमधुर धुनों के साथ चल रही है। श्रद्धालु भाव विभोर हो झूम उठते हैं। गुरुवार को रामकथा का सातवां दिन था। अकलंक संस्थान के अध्यक्ष पीयूष बज, सचिव अनिमेष जैन बताया कि मां जिनवाणी को पालकी में विराजमान कर गुरुदेव के कर कमलों में देने का सौभाग्य राजेश शर्मीला, भावी विपुल दिनेश पाटनी परिवार को मिला। महेश जैन गंगवाल ने बताया कि राजा श्रेणिक बनने का अवसर दिनेश कुमार नीलू, चिराग स्वेता, पराग श्रुति, रक्ष, नेहा, ऐरा, स्वर्ण मड़ि़या, कनवास वाले को मिला। मुनिश्री जय कीर्ति जी ने धर्मसभा में कहा कि जो मनुष्य कल्याणकारी वचनों को कहता अथवा सुनता है। वास्तव में वहीं मनुष्य है अन्य तो शिल्पकार द्वारा बनाए हुए मनुष्याकार पुतलों के समान है अर्थात जीवन में जीवंतता लाने के लिए एवं जीवन को क्रियाशील बनाने के लिए यह रामचंद्र जी का चरित्र निश्चित ही अवश्य ही सुनना चाहिए। अमृत समान आरोग्य प्रदायी सुगंधित जल को लाने के लिए हनुमान भामंडल एवं अंगद को भेजा जाता है। वे भरतादि के साथ द्रोणमेघ राजा से लक्षमण के जीवन रक्षार्थ विशल्या की याचना करने पर राजा मना करता है किन्तु कैकयी द्वारा समझाने पर वह कन्या को भेजता है, युद्ध भूमि में विशल्या का बहुमान, कन्या के समीप आते ही लक्ष्मण सचेत हो जाते हैं, संपूर्ण सेना के पास अमृतसम जल भेजा जाता है। जिससे समी स्वस्थ हो जाते हैं।</p>
<p><strong>रावण की दृढ़ता देख मणिभद्र-पूर्णभद्र देव उपद्रव दूर करते हैं</strong></p>
<p>राम द्वारा लक्ष्मण को विशल्या का संपूर्ण वृत्तांत वर्णन, लक्ष्मण का विशल्या के साथ वैभवपूर्ण विवाहोत्सव, रावण को नीति शास्त्र अनुसार मृगांक आदि मंत्रियों द्वारा सीता को लौटाने के लिए संबोधन, अष्टाह्निक पर्व में युद्ध विराम करके रावण अपने हजार स्वर्णखंभांे युक्त श्री शांतिनाथ जिनालय में दिव्य द्रव्यों से पूजन आदि करता है एवं बहुरुपिणी विद्या सिद्धि हेतु अचलासन में जाप में स्थित हो जाता है। इधर, रावण की विद्या सिद्धि की सूचना सुनकर धर्मयुक्त श्री राम के मना करने पर विद्याधर कुमार लंका में जाकर अनेक तोड फोड एवं उपद्रव करते हैं। रावण की दृढ़ता देख मणिभद्र-पूर्णभद्र देव उपद्रव दूर करते हैं, लक्ष्मण द्वारा निवेदन करने पर दोनों देव धर्म एवं नीति की रक्षार्थ मात्र रावण को विचलित करने का अनुमति देते हैं। कुमारों द्वारा अनेकानेक प्रकार से विचलित करने पर भी अटल रावण ने बहुरुपिणी विद्या सिद्ध कर ही ली। रावण द्वारा भय एवं स्नेह से सीता को आकर्षित करने के अनेक प्रयास किए गए। किंतु रामनिष्ठ सीता अटल रही।</p>
<p><strong> विद्वानों का बैर केवल मरण पर्यंत ही होता है</strong></p>
<p>राम के प्रति सीता का अदूट प्रेम देखकर रावण को अपनी गलती का एहसास हुआ फिर भी मोही रावण ने सीता की पाने अपनी विनाशकारी हठ नहीं छोडी एवं अनेक अपशकुनों को अनदेखा करके युद्ध भूमि में पहुंचा। रावण एवं लक्ष्मण का दस दिन तक बिना हार-जीत के युद्ध चलता है, अंत में क्रोधित हो रावण लक्ष्मण पर चक्ररत्न चला देता लेकिन, चक्र तीन परिक्रमा कर लक्ष्मण के हाथ में आ जाता है। लक्ष्मण कहता है &#8211; हे! रावण अब भी सीता को लौटाकर अपने राज्य का उपभोग करो किन्तु रावण अपने दुराग्रह को नहीं छोड़ता है। लक्ष्मण का चक्ररत्न रावण के वक्षस्थल को भेद देता है,</p>
<p>त्रिखंडाधिपति रावण जैसे पर्वत दूटकर गिरता है वैसे भूमि पर गिर जाता है। रावण की मृत्यु से विभिषण एवं मंदोदरी आदि समस्त रानियां का करुण विलाप सुनकर राम सबको सांत्वना देते हुए कहते है कि विद्वानों का बैर केवल मरण पर्यंत ही होता है। अतः हमारा कोई बैर नहीं है। राम लक्ष्मण सहित सभी पद्म सरोवर जाकर रावण का दाह संस्कार करते हैं, इंद्रजीत, मेघवाहन, कुंभकर्ण को भी दाह संस्कार में लाया जाता है वे तीनों विचार करते हैं। महामोह महादुःख देनेवाला है। राज्य एवं भोगों की आशा में कैसे जीवन का अंत हो जाता है।</p>
<p><strong>देवों द्वारा केवल ज्ञान का महोत्सव मनाया जाता है </strong></p>
<p>संसार में धर्म ही सार है अतः सुखदायी निर्ग्रंथ पद ही हमारे लिये श्रेय है। इधर, दिन के अंतिम प्रहर में 56 हजार मुनियों के साथ अनंतवीर्य मुनिराज आकाश मार्ग सें लंका में प्रवेश करते है, रात्रि के अंतिम प्रहर में अनंत वीर्य मुनिराज को केवल ज्ञान की प्राप्ति होती है, देवों द्वारा केवल ज्ञान का महोत्सव मनाया जाता है। इंद्रजीत मेघवाहन कुंभकरण जिन दीक्षा धारण करते हैं एवं मंदोदरी चंद्रनखा सहित 48 रानियां आर्यिका दीक्षा ग्रहण करती है। इधर राम, लक्ष्मण, विभीषण आदि लंका में प्रवेश करते हैं, उन्नत प्रीति युक्त राम सीता का मिलन एवं संवाद, राम सीता का देवताओं द्वारा प्रशंसा एवं बहुमान..आदि कथानकों का अत्यन्त नवरसयुक्त मनमोहक शैली से श्रीरामभक्तों को गुरुदेव ने मंत्रमुग्ध कर दिया। संपूर्ण सभा आनंद में सराबोर हो गई।</p>
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		<title>भगवान पारसनाथ जी का प्रथम अभिषेक और विश्व शांतिधारा किया: उत्तम संयम धर्म और धूप दशमी का त्योहार मनाया  </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Sep 2025 11:33:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को दशलक्षण पर्व का छठा दिन उत्तम संयम धर्म एवं धूप दशमी के रूप में मनाया गया। पंडित अभिषेक शास्त्री और डॉ. निर्मला दीदी ने प्रवचन में कहा कि मन, वचन, काय को काबू में रखना ही संयम धर्म है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; श्री दिगंबर जैन मंदिर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को दशलक्षण पर्व का छठा दिन उत्तम संयम धर्म एवं धूप दशमी के रूप में मनाया गया। पंडित अभिषेक शास्त्री और डॉ. निर्मला दीदी ने प्रवचन में कहा कि मन, वचन, काय को काबू में रखना ही संयम धर्म है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>श्री दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को दशलक्षण पर्व का छठा दिन उत्तम संयम धर्म एवं धूप दशमी के रूप में मनाया गया। पंडित अभिषेक शास्त्री और डॉ. निर्मला दीदी ने प्रवचन में कहा कि मन, वचन, काय को काबू में रखना ही संयम धर्म है। संयम ही मोक्ष मार्ग की सीढ़ी है। संयम को अपने जीवन में उतारकर भविष्य को प्रकाशमय किया जा सकता है। मन बहुत चंचल है और वह हमेशा गलत राह में भटकता रहता है। इस पर संयम से कंट्रोल किया जा सकता है। हमें अपने जीवन के प्रतिदिन के खानपान बोलचाल रहन सहन में संयम रखना चाहिए। तभी जीवन महान बन सकता है। प्रातः मूलवेदी 1008 पारसनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक और विश्व शांतिधारा मुन्ना-रीता जैन, दिलीप आरती जैन बाकलीवाल परिवार को मिला। भगवान का मंगल विहार और प्रथम अभिषेक का सौभाग्य कमल राजीव जैन छाबड़ा परिवार को मिला। भगवान महावीर प्रभु की शांतिधारा सुरेंद-सौरभ सरिता जैन काला दूसरी ओर से नवीन सम्यक जैन गंगवाल के परिवार ने किया। आदिनाथ भगवान के समक्ष 1008 शांतिनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक और शांतिधारा, इंदु, अनूप-सार्थक जैन सेठी परिवार ने किया। नया मंदिर में श्रीजी पर प्रथम अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य शांतिलाल-राजेश देवी जैन छाबड़ा के परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p>दोपहर में जैन समाज के सभी भक्तजनों ने धूप दशमी का पर्व मनाया और अपने खराब कर्मों को नाश करने के लिए दोनों मंदिरों में अग्नि में धूप खेने डालने का काम किया। महिलाओं ने लाल और पीले साड़ी में धूप दशमी की पूजा की और धूप विसर्जन किया। सह मंत्री राज् जैन छाबड़ा, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र जैन काला और समाज के पदाधिकारी के मार्गदर्शन में सभी पूजा विधान के कार्य किया जा रहे हैं। संध्या में महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। महिला समाज बालिका समाज और जैन युवक समिति की ओर से किया जाएगा। यह जानकारी समाज के मीडिया प्रभारी राजकुमार जैन अजमेरा और नवीन जैन ने दी।</p>
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		<title>दशलक्षण धर्म के प्रथम दिन अभिषेक शांतिधारा और विविध विधान हुए : समाजजनों ने श्री जी की भक्ति में दिन बीता, सांस्कृतिक कार्यक्रम ने मन मोहा </title>
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		<pubDate>Fri, 29 Aug 2025 09:08:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगम्बर जैन समाज के पर्वाधिराज पर्युषण में दशलक्षण धर्म के प्रथम दिन श्री दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम क्षमा धर्म पर दिपांक भैय्याजी के निर्देशन में दिनभर विविध अनुष्ठान हुए। डडुका से पढ़िए, यह खबर&#8230; डडुका। दिगम्बर जैन समाज के पर्वाधिराज पर्युषण में दशलक्षण धर्म के प्रथम दिन श्री दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम क्षमा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगम्बर जैन समाज के पर्वाधिराज पर्युषण में दशलक्षण धर्म के प्रथम दिन श्री दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम क्षमा धर्म पर दिपांक भैय्याजी के निर्देशन में दिनभर विविध अनुष्ठान हुए। <span style="color: #ff0000">डडुका से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डडुका।</strong> दिगम्बर जैन समाज के पर्वाधिराज पर्युषण में दशलक्षण धर्म के प्रथम दिन श्री दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम क्षमा धर्म पर दिपांक भैय्याजी के निर्देशन में दिनभर विविध अनुष्ठान हुए। मीडिया प्रभारी राकेश शाह ने बताया कि प्रातः मूलनायक भगवान का अभिषेक और शांतिधारा तुभ्यम रॉकी गांधी परिवार ने की। आदिनाथ भगवान को विधान स्थल तक विहार का लाभ प्रदीप सेठ परिवार को मिला। यंत्रजी विराजमान धनपाल सेठ, चंवर ढूराना कदम राकेश शाह एवं चाहत दिनेश शाह, छत्र नमन अनिल कोठिया, विधान स्थल पर आदिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा धनपाल शांतिलाल शाह परिवार, विधान में मंडप पर मुख्य कलश स्थापना चेष्टा चिराग शाह, ईशान कलश पूनम नितेश शाह,आग्नेय कलश सीमा जिनेन्द्र गांधी, नेऋत्य कलश रजनी अनिल कोठिया, वायव्य कलश जयश्री कांतिलाल शाह, दीप प्रज्वलन एवं आचार्य श्री के चित्र का अनावरण सेठ धनपाल देवीलाल परिवार ने किया।</p>
<p><strong>आकर्षक झांकी का प्रदर्शन </strong></p>
<p>दोपहर में पूजन और विधान हुआ रात्रि में सांस्कृतिक प्रभारी वीरेंद्र जैन और रॉकी गांधी के निर्देशन और रोहिता शाह के संयोजन में धार्मिक प्रश्न मंच सीनियर और जूनियर वर्ग की प्रतियोगिता हुई। दिगंबर जैन पाठशाला के बच्चों ने पाठशाला प्रेरक अजीत कोठिया के निर्देशन में उत्तम क्षमा धर्म पर आकर्षक झांकी का प्रदर्शन किया।</p>
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		<title>भगवान नेमिनाथ निर्वाण महोत्सव भक्ति भाव से मनाया: अभिषेक, शांतिधारा और निर्वाण लाडू चढ़ाने का किया पुण्यार्जन </title>
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		<pubDate>Thu, 03 Jul 2025 14:06:46 +0000</pubDate>
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<p><strong>श्री दिगंबर जैन समाज के नेतृत्व में श्री दिगंबर जैन मंदिर में 22 वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव भक्ति भाव से मनाया गया। बुधवार को आचार्य श्री विवेक सागर जी के मंगल आशीर्वाद से नेमिनाथ भगवान की बड़ी प्रतिमा पर अभिषेक किया गया। भक्तों ने भगवान के समक्ष निर्वाण लाडू चढ़ाया। <span style="color: #ff0000">झुमरी तलैया से पढ़िए, जैन राज अजमेरा और नवीन जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>झुमरीतलैया।</strong> श्री दिगंबर जैन समाज के नेतृत्व में श्री दिगंबर जैन मंदिर में 22 वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव भक्ति भाव से मनाया गया। नेमिनाथ भगवान का निर्वाण गुजरात जूनागढ़ के गिरनार पर्वत से कई हजार वर्ष पूर्व आषाढ़ सुदी सप्तमी के दिन हुआ था, तब से जैन समाज के लोग पूरे विश्व में पूरी भक्ति भाव से भगवान का निर्वाण महोत्सव मनाते हैं और साथ ही गिरनार पर्वत पर 10 हज़ार सीढ़ी चढ़कर हज़ारों भक्त निर्वाण लड्डू चढ़ाने पहुंचे हैं। बुधवार को प्रातः आचार्य श्री विवेक सागर जी के मंगल आशीर्वाद से नेमिनाथ भगवान की बड़ी प्रतिमा पर अभिषेक किया गया। प्रथम अभिषेक पवन जैन खड़कपुर और शांतिधारा महावीर प्रसाद इंदु जैन सेठी परिवार ने किया। सुरेंद्र शैलेश जैन छाबड़ा परिवार को भगवान की शांतिधारा आचार्य मुख से विशेष मंत्रोच्चार के साथ सौभाग्य मिला। सुबोध आशा जैन गंगवाल के संगीतमय पूजन के साथ भगवान का निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य सुरेंद्र सरिता जैन काला, ललित-नीलम जैन सेठी, सुबोध आशा जैन गंगवाल, शशि रीता जैन सेठी, सुमित निशु जैन सेठी के परिवार को मिला। दूसरा कमल कुसुम जैन गंगवाल और नया मंदिर में प्रदीप-प्रेम जैन पांड्या को सौभाग्य प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>आचार्यश्री ने बताया भगवान नेमिनाथ तीर्थ का महत्व </strong></p>
<p>समाज के लोगों ने सभी कार्यक्रम में सहभागी बने। इस अवसर पर विशेष रूप से जैन समाज के उप मंत्री राज जैन छाबड़ा, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र जैन काला, सुनील जैन सेठी, महिला संगठन की अध्यक्ष नीलम जैन, मंत्राणी आशा जैन गंगवाल शामिल हुए। इस अवसर पर आचार्य श्री ने कहा कि आज के दिन गिरनार पर्वत से जैन धर्म के 22 वंे तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान का निर्वाण हुआ था। वहां आज भी जैन तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान के चरण स्थापित हैं। जिनके दर्शन कर लोग अपने जीवन को धन्य मान रहे हैं और पुण्य अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में गिरनार की यात्रा क्यों की? हम सभी निर्वाण कल्याणक तीर्थंकर भगवान का मनाते हैं। इस अवसर पर समाज के सभी वर्ग शामिल हुए।</p>
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		<title>विधि विधान से श्रीजी पांडूशिला हुए विराजित : वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव में रत्न चौबीसी भगवान और 52 जिनालयों की शोभायात्रा निकाली </title>
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		<pubDate>Thu, 08 May 2025 12:37:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मानसरोवर के श्री दिगंबर जैन मंदिर में वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव चल रहा है। इसमें विविध कार्यक्रम हो रहे हैं। अभिषेक और शांतिधारा के कार्यक्रम हुए। इस महोत्सव में बुधवार को यहां शोभायात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; जयपुर। नगर में मानसरोवर वरुण पथ स्थित श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मानसरोवर के श्री दिगंबर जैन मंदिर में वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव चल रहा है। इसमें विविध कार्यक्रम हो रहे हैं। अभिषेक और शांतिधारा के कार्यक्रम हुए। इस महोत्सव में बुधवार को यहां शोभायात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> नगर में मानसरोवर वरुण पथ स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इसमें विविध कार्यक्रम किए गए। अभिषेक और शांतिधारा के कार्यक्रम हुए। इस महोत्सव में बुधवार को यहां शोभायात्रा निकाली गई। प्रबंध समिति अध्यक्ष एमपी जैन ने बताया कि आचार्यश्री चैत्यसागर जी महाराज के आशीर्वाद से रत्न चौबीसी भगवान और नंदीश्वर दीप के 52 जिनालयों की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें 31 इंद्र-इंद्राणियों और जैन समाज मानसरोवर के श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा स्वर्ण पथ, नीलम पथ, पुखराज पथ और किरण पथ से होती हुई मंदिर पहुंची।</p>
<p>प्रचार संयोजक जिनेश कुमार जैन ने बताया कि मंदिर परिसर में 31 महिलाओं ने मंगल कलश लेकर श्रीजी की अगवानी की। इसके बाद सभी इंद्रों ने श्रीजी को विधिपूर्वक पांडूशिला पर विराजमान किया। इस अवसर पर राजेंद्र कासलीवाल परिवार ने प्रथम अभिषेक और शांतिधारा की पुण्यार्जना की। पदमचंद राजेशकुमार भरतपुर वाले इस पुण्यार्जन में सहभागी रहे।</p>
<p><strong>तीन छत्रों का किया लोकार्पण </strong></p>
<p>मंत्री ज्ञान बिलाला ने बताया कि वेदी में विराजमान मूलनायक भगवान महावीर के मस्तक पर तीन छत्रों का लोकार्पण सौधर्म इंद्र पूरणमल विमलचद अनोपड़ा परिवार ने किया। मंदिर का द्वार खोलने के पुण्यार्जक मंजू छाबड़ा राजावास परिवार रहे। संगठन मंत्री विनेश सोगानी और उपसंगठन मंत्री मुकेश कासलीवाल ने अतिथियों को तिलक लगाया। उपाध्याय राजेंद्र सोनी, कोषाध्यक्ष कैलाश सेठी ने साफा बंधाया। सतीश कासलीवाल ने बताया कि प्रतिष्ठाचार्य चीकू भैया के सानिध्य में श्रीजी को विराजमान किया गया।</p>
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		<title>टोंक के प्रकाश पटवारी जैन को हीरक, मुकेश कुमार जैन स्वर्ण एवं हेमलता जैन पाटनी रजत पदक सें सम्मानितः 26वां महामंत्र लेखकों का सम्मान समारोह संपन्न </title>
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		<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 07:44:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राणा, प्रताप, मीरा और पन्नाधाय के तप त्याग और साधना की पावन वसुंधरा राजस्थान प्रांत की गुलाबी नगरी श्री दिगंबर जैन मंदिर चंद्रप्रभु दुर्गापुर जयपुर में श्री णमोकार महामंत्र बैंक जंबूद्वीप हस्तिनापुर मेरठ उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित जयपुर में 26वां महामंत्र लेखकों का सम्मान समारोह णमोकार बैंक समिति जयपुर द्वारा किया गया। समिति के अध्यक्ष [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राणा, प्रताप, मीरा और पन्नाधाय के तप त्याग और साधना की पावन वसुंधरा राजस्थान प्रांत की गुलाबी नगरी श्री दिगंबर जैन मंदिर चंद्रप्रभु दुर्गापुर जयपुर में श्री णमोकार महामंत्र बैंक जंबूद्वीप हस्तिनापुर मेरठ उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित जयपुर में 26वां महामंत्र लेखकों का सम्मान समारोह णमोकार बैंक समिति जयपुर द्वारा किया गया। समिति के अध्यक्ष व पदाधिकारियों द्वारा अभिनंदन एवं पदक प्रदान दिये गये। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जयपुर से पारस जैन ‘पार्श्वमणि‘ की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> राणा, प्रताप, मीरा और पन्नाधाय के तप त्याग और साधना की पावन वसुंधरा राजस्थान प्रांत की गुलाबी नगरी श्री दिगंबर जैन मंदिर चंद्रप्रभु दुर्गापुर जयपुर में श्री णमोकार महामंत्र बैंक जंबूद्वीप हस्तिनापुर मेरठ उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित जयपुर में 26वां महामंत्र लेखकों का सम्मान समारोह णमोकार बैंक समिति जयपुर द्वारा टोंक (राजस्थान) के 1,25,000 सें अधिक णमोकार जाप्य लेखन पर हीरक पदक सें प्रकाश पटवारी जैन, त्रिलोकचन्द जैन, कांता देवी जैन जयपुरिया, मधुबाला जैन, मंजू जैन, 51,000 सें अधिक णमोकार जाप्य लेखन पर स्वर्ण पदक सें मुकेश कुमार जैन, राजीव कुमार जैन, ममता जैन एवं 25,000 सें अधिक जाप्य लेखन पर रजत पदक सें नगीना देवी जैन, संतरा देवी जैन, हेमलता जैन को समिति के अध्यक्ष रतनलाल कोठारी, मंत्री बाबूलाल उपाध्यक्ष हरकचंद जैन आदि द्वारा अभिनंदन एवं पदक प्रदान दिये गये। णमोकार महामंत्र जाप्य लेखन कार्य वर्ष 2015 सें अब तक हीरक, स्वर्ण एवं रजत पदक सम्मानित किये जा रहे हैं एवं अन्य को भी णमोकार लेखन हेतु प्रेरणा देते रहते हैं।</p>
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		<title>शरीर के प्रति ममत्व भाव नहीं रख,साधु शरीर के प्रति विरक्ति रखते हैं-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः श्रावक-श्राविकाओं के लिए संस्कार शिविर का आयोजन  </title>
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		<pubDate>Thu, 13 Feb 2025 11:25:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्मनगरी मुंगाणा में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी संघ सहित विराजित है। आचार्य संघ सानिध्य में प्रतिदिन प्रातःपंचामृत अभिषेक, शास्त्र प्रवचन, दोपहर को स्वाध्याय, शाम को श्रावक-श्राविकाओं के लिए संस्कार शिविर का आयोजन चल रहा है। जिसमें सैकड़ो धर्मावलंबी भाग ले रहे हैं। मोक्ष के अभिलाषी साधु शरीर के प्रति ममत्व को नहीं रखते हैं, उनके शरीर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धर्मनगरी मुंगाणा में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी संघ सहित विराजित है। आचार्य संघ सानिध्य में प्रतिदिन प्रातःपंचामृत अभिषेक, शास्त्र प्रवचन, दोपहर को स्वाध्याय, शाम को श्रावक-श्राविकाओं के लिए संस्कार शिविर का आयोजन चल रहा है। जिसमें सैकड़ो धर्मावलंबी भाग ले रहे हैं। मोक्ष के अभिलाषी साधु शरीर के प्रति ममत्व को नहीं रखते हैं, उनके शरीर के प्रति विरक्ति होती है। क्योंकि संसारी प्राणी के शरीर में रहने वाली आत्मा चैतन्य है और शरीर जड़, परद्रव्य है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मुंगाणा से राजेश पंचोलिया की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुंगाणा।</strong> अनेक साधुओं की जन्म एवं कर्मभूमि धर्मनगरी मुंगाणा में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी के सानिध्य में प्रतिदिन प्रातःपंचामृत अभिषेक, शास्त्र प्रवचन, दोपहर को स्वाध्याय, शाम को श्रावक-श्राविकाओं के लिए संस्कार शिविर का आयोजन चल रहा है। आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ने स्वाध्याय में मोक्ष मार्ग की विवेचना में बताया कि मोक्ष के अभिलाषी साधु शरीर के प्रति ममत्व को नहीं रखते हैं, उनके शरीर के प्रति विरक्ति होती है। क्योंकि संसारी प्राणी के शरीर में रहने वाली आत्मा चैतन्य है और शरीर जड़, परद्रव्य है। जो परिग्रह है जैसे मकान, स्त्री, धन, पुत्र, परिवार की भांति साधु शरीर का त्याग नहीं कर सकते किंतु व्रत, संयम, तप, जाप आदि से शरीर के प्रति ममत्व भाव नहीं रखते हैं।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-74446" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250213-WA0019-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1920" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250213-WA0019-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250213-WA0019-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250213-WA0019-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250213-WA0019-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250213-WA0019-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250213-WA0019-2048x1536.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250213-WA0019-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250213-WA0019-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250213-WA0019-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250213-WA0019-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250213-WA0019-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />आत्मा के स्वरूप को जान शुद्ध स्वरूप में तल्लीन</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी गज्जू भैया राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ने प्रवचन में आगे बताया कि प्रथमाचार्य श्री शांति सागरजी महाराज ने उनके नेत्रों में मोतियाबिंद होने यद्यपि शरीर पूर्णतया स्वस्थ था किंतु शरीर के प्रति ममत्व भाव हटाकर उन्होंने सल्लेखना धारण की। क्योंकि साधु भेद-विज्ञान की दृष्टि से आत्मा के स्वरूप को जानकर शुद्ध स्वरूप में तल्लीन होते हैं।</p>
<p><strong>आर्यिकाश्री द्वारा रात्रि पाठशाला </strong></p>
<p>करणमल मेदावत, अनिरुद्ध ने बताया कि शाम को बालक-बालिका की रात्रि पाठशाला आर्यिकाश्री महायशमति माताजी द्वारा ली जा रही है तथा मंदिर प्रांगण में मुनिश्री हितेंद्र सागरजी द्वारा श्रावक संस्कार शिविर में उपदेश दिया जा रहा है।</p>
<p><strong>पिछले जन्म के पुण्य से वर्तमान में सब कुछ मिला</strong></p>
<p>प्रातः कालीन प्रवचन में आर्यिकाश्री महायशमति माताजी ने प्रवचन में बताया कि पिछले जन्म के पुण्य से आपको वर्तमान में सब कुछ मिला है, पुण्य से भारत देश, मनुष्य जीवन, जैन कुल,सच्चे देव शास्त्र गुरु का सानिध्य, बिना पुरुषार्थ के पुण्य उदय से मिला है। वर्तमान में जो भी साधु देख रहे हैं वह सब प्रथमाचार्यश्री शांति सागरजी की देन है। धर्म संत समागम से प्रतिदिन देव दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, तप व्रत से प्राप्त होता है। संत समागम से जीवन में परिवर्तन आता है।</p>
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		<title>मंगलकारी द्रव्यों से पंचामृत अभिषेक करने से पुण्य की प्राप्ति होती हैं-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः मंत्रोच्चार शुद्ध करना चाहिए </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/one_attains_virtue_by_performing_panchamrit_abhishek_with_auspicious_substances_acharya_shri_vardhman_sagarji/</link>
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		<pubDate>Wed, 12 Feb 2025 09:17:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुंगाणा में संघ सहित विराजित आचार्यश्री वर्धमान सागरजी के सानिध्य में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। चमत्कारी श्री आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर भव्य पंचायत अभिषेक विभिन्न द्रव्यों से समाज अध्यक्ष ने परिवार सहित किया। भक्तिपूर्वक मंगलकारी द्रव्यों से पंचामृत अभिषेक करने से पुण्य की प्राप्ति होती है यह मंगल देशना आचार्यश्री ने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुंगाणा में संघ सहित विराजित आचार्यश्री वर्धमान सागरजी के सानिध्य में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। चमत्कारी श्री आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर भव्य पंचायत अभिषेक विभिन्न द्रव्यों से समाज अध्यक्ष ने परिवार सहित किया। भक्तिपूर्वक मंगलकारी द्रव्यों से पंचामृत अभिषेक करने से पुण्य की प्राप्ति होती है यह मंगल देशना आचार्यश्री ने अभिषेक के महत्व पर प्रतिपादित की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मुंगाणा से राजेश पंचोलिया की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुंगाणा।</strong> पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज मुंगाणा नगर में संघ सहित विराजित है। आचार्यश्री संघ सानिध्य में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। आचार्यश्री वर्धमान सागरजी सानिध्य में चमत्कारी श्री आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर भव्य पंचायत अभिषेक विभिन्न द्रव्यों से समाज अध्यक्ष करनमल मैदावत ने परिवार सहित किया। सुगंधित जल, शांति धारा का मंत्रोच्चार आचार्यश्री ने किया।</p>
<p><strong>पंचामृत अभिषेक करने से पुण्य की प्राप्ति </strong></p>
<p>भक्तिपूर्वक मंगलकारी द्रव्यों से पंचामृत अभिषेक करने से पुण्य की प्राप्ति होती है यह मंगल देशना आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ने अभिषेक के महत्व पर प्रतिपादित की। आचार्य संघ की आहारचर्या के बाद दोपहर को स्वाध्याय, शाम को श्रीजी की आरती आचार्यश्री की आरती के बाद संस्कार शिविर के माध्यम से मुनिश्री हितेंद्र सागरजी द्वारा सरल भाषा में श्रावक द्वारा की जाने वाली क्रियाओं बाबद उपदेश दिया जा रहा हैं ।</p>
<p><strong>मंत्रोच्चार शुद्ध करें </strong></p>
<p>मुनि हितेंद्र सागरजी ने संस्कार शिविर में भगवान के दर्शन की विधि, अभिषेक क्यों करना चाहिए, पंचामृत अभिषेक से क्या पुण्य की प्राप्ति होती है। मंत्रोच्चार शुद्ध करना चाहिए, दर्शन स्तुति ,चार कषाय जीव-अजीव के भेद आदि पर अपना उपदेश दिया।</p>
<p><strong>धरियावद प्रवेश के लिए निवेदन </strong></p>
<p>आचार्यश्री वर्धमान सागरजी को संघ सहित अपने नगर खूता, धरियावद प्रवेश हेतु सकल समाज द्वारा श्रीफल भेंटकर निवेदन किया गया।</p>
<p><strong>संस्कार देने का महत्व </strong></p>
<p>इसके पूर्व आचार्यश्री की शिष्या आर्यिका दर्शनामतिजी ने बालकों को संस्कार घर पर देने का महत्व बताया। गुरु डॉक्टर वैद्य होते है जो अपने अमृत उपदेश से संसार भ्रमण जन्म-मरण से छुटकारा पाने की राह बताते हैं।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-74372" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250212-WA0005-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1920" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250212-WA0005-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250212-WA0005-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250212-WA0005-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250212-WA0005-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250212-WA0005-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250212-WA0005-2048x1536.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250212-WA0005-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250212-WA0005-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250212-WA0005-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250212-WA0005-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250212-WA0005-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />समाजजन भक्तिभावपूर्वक भाग ले रहें</strong></p>
<p>प्रवचन में श्रीपाल पचौरी, बाबूलाल पचौरी, रमेश दोशी, धनपाल पचोरी, रमेश मैदावत, देवेन्द्र पचौरी, कांतिलाल जैकनावत सहित काफी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। प्रतिदिन होने वाले धार्मिक कार्यों में समाज द्वारा उत्साह भक्ति पूर्वक भाग लिया जा रहा हैं</p>
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