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	<title>श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>एटा में दान तीर्थ अक्षय तृतीया महापर्व मनाया : शहर के कई मंदिरों में किया गन्ने के रस का वितरण  </title>
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		<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 15:29:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के प्रथम पारणा दिवस अक्षय तृतीया पर श्री दिगंबर जैन वीर मंडल द्वारा एटा के आठ मंदिरों में इक्षु रस (गन्ने के रस) का वितरण किया गया। एटा से पढ़िए, सोनल जैन की यह रिपोर्ट&#8230; एटा। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के प्रथम पारणा दिवस अक्षय तृतीया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के प्रथम पारणा दिवस अक्षय तृतीया पर श्री दिगंबर जैन वीर मंडल द्वारा एटा के आठ मंदिरों में इक्षु रस (गन्ने के रस) का वितरण किया गया। <span style="color: #ff0000">एटा से पढ़िए, सोनल जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>एटा।</strong> जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के प्रथम पारणा दिवस अक्षय तृतीया पर श्री दिगंबर जैन वीर मंडल द्वारा एटा के आठ मंदिरों में इक्षु रस (गन्ने के रस) का वितरण किया गया। पुरानी बस्ती स्थित श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, श्री नेमीनाथ जिनालय, नसिया जी मंदिर, जानकीदास चैत्यालय, महावीर मोरध्वज मंदिर, श्री शीतलनाथ मंदिर, श्री आदिनाथ चैत्यालय बांस मंडी एवं कासगंज रोड स्थित वीर विमल अहिंसा क्षेत्र में संस्था द्वारा जैन धर्म में दान की अक्षुण्ण परंपरा के निर्वहन के लिए भक्तों ने इक्षु रस का वितरण कर पुण्यार्जन किया। वीर मंडल के संरक्षक सुनील बांदा ने बताया कि यह महान पर्व तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के कठिन तप और युग के पहले दान की गौरव गाथा है। प्रयाग में दीक्षा के छः महीने अखंड उपवास के पश्चात जब मुनि श्री आहार के लिए निकले तो एक विकट स्थिति उत्पन्न हुई उस समय प्रजा नवधाभक्ति से अनभिज्ञ थी। इस अज्ञानता के कारण मुनि श्री का उपवास अंतराल बढ़कर एक वर्ष एक माह नौ दिन का हो गया। वीर मंडल के अध्यक्ष गौरव जैन ने बताया कि मुनि श्री विहार करते हुए हस्तिनापुर नगरी पहुंचे जहां के राजा श्रेयांश को अपने पूर्व भव के आहार दान विधि का स्मरण हुआ और उन्होंने वैशाख शुक्ल तृतीया को विधि विधान पूर्वक गन्ने के रस का प्रथम आहार मुनि श्री को प्रदान कर अक्षय पुण्य प्राप्त किया। इस लिए इस तिथि का नाम अक्षय तृतीया पड़ा ,और दान तीर्थ का प्रवर्तन हुआ,इस दिन जैन समाज द्वारा आहार दान के साथ ही यथा शक्ति औषधि दान, ज्ञान दान, अभयदान (जीवों की रक्षा) के विशेष उपक्रम चलाये जाते हैं।</p>
<p><strong>इन्होंने किया पुण्यार्जन </strong></p>
<p>इस अवसर पर योगेश जैन, शैलेंद्र जैन, अकलंक जैन, सुन्नेश जैन, राजू जैन, मनोज जैन, राहुल जैन, विपिन स्वामी, सतेन्द्र जैन,संजय जैन, प्रियांशु जैन, अतुल जैन,राज जैन, सक्षम जैन,राजकुमार जैन, अनमोल जैन,जौनी जैन, नैतिक जैन,आशु जैन,हर्ष जैन, नवनीत जैन, पंकज जैन,अन्नू जैन,अमित जैन, अनुराग जैन,दीपू जैन,पवन बल्ले, विक्की जैन, रश्मि जैन, राजकुमारी जैन,रानी जैन ,विनीता जैन,सपना जैन, अंजना जैन,उषा जैन,श्रुति जैन रुचि जैन,मधू जैन, उर्मिल जैन, एवं रितु जैन आदि ने उपस्थित रहकर पुण्यार्जन किया।</p>
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		<title>शांति प्रभावना शोभायात्रा से शुरू होगा शांतिसागर स्मारक प्रतिष्ठा महोत्सव : 20 जनवरी को शांतिसागर स्मारक बिम्ब प्रतिष्ठा महोत्सव में होंगे धार्मिक आयोजन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Jan 2026 15:03:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दो दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव में 20 जनवरी को प्रातः आचार्य श्री संघ निमंत्रण के साथ दिगंबर जैन बडा मंदिर से शांति प्रभावना शोभायात्रा आरंभ होगी। इसमें जैन ध्वज पताका लिए मुख्य ध्वजारोहण कर्ता सहित आठ बग्गियों में महोत्सव के सौभाग्यशाली पात्र होंगे। निवाई से पढ़िए, यह खबर&#8230; निवाई। दो दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव में 20 जनवरी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दो दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव में 20 जनवरी को प्रातः आचार्य श्री संघ निमंत्रण के साथ दिगंबर जैन बडा मंदिर से शांति प्रभावना शोभायात्रा आरंभ होगी। <span style="color: #ff0000">इसमें जैन ध्वज पताका लिए मुख्य ध्वजारोहण कर्ता सहित आठ बग्गियों में महोत्सव के सौभाग्यशाली पात्र होंगे। निवाई से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई। दो</strong> दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव में 20 जनवरी को प्रातः आचार्य श्री संघ निमंत्रण के साथ दिगंबर जैन बडा मंदिर से शांति प्रभावना शोभायात्रा आरंभ होगी। इसमें जैन ध्वज पताका लिए मुख्य ध्वजारोहण कर्ता सहित आठ बग्गियों में महोत्सव के सौभाग्यशाली पात्र होंगे। ऊंट, घोड़ियां, बैंडबाजा, डीजे, नगाडा, शहनाई, झांकियां सहित मुख्य गजरथ में प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का अष्टधातु से निर्मित बिम्ब विराजित होगा। जुलुस श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर से रवाना होकर मुख्य बाजारों से होता हुआ आयोजन स्थल जैन नसिया मंदिर पहुंचेगा। शोभायात्रा मार्ग में आचार्य शांतिसागर महाराज के जीवन चरित्र को जीवंत चित्रण करने वाले विभिन्न राज्यों के ऐतिहासिक प्रसंगों का नाटय अनुवादन किया जाएगा। सकल दिगंबर जैन समाज निवाई के तत्वावधान में बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के शांति मार्ग एवं श्रेष्ठतम आध्यात्मिक साधना को समर्पित इक्कीस फिट ऊंचा शांति सागर स्मारक के भव्य प्रतिष्ठा महोत्सव में शोभायात्रा के आयोजन स्थल पर पहुंचते ही ध्वज वंदन एवं मुख्य ध्वजारोहण किया जाएगा। महोत्सव का संचालन विश्वविख्यात प्रतिष्ठाचार्य पंडित धर्मचंद शास्त्री अष्टापद गुडगांव करेंगे। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के प्रमुख संगीतकार कैशव एंड पार्टी प्रस्तुति देंगे।</p>
<p><strong>होंगे विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम </strong></p>
<p>20 सदी के प्रथमाचार्य, जिन्होंने श्रमण संस्कृति को पुनःजीवंत कर देश मे जैन धर्म की ध्वज पताका फहराने मे महत्वपूर्ण योगदान दिया। ऐसे जैनाचार्य शांतिसागर महाराज के आचार्य पद प्रतिष्ठापना के शताब्दी वर्ष पूर्ण होने पर उन्हीं की अक्षुण्ण मूल पट्ट परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज के मंगलमय सान्निध्य में आयोजित हो रहे इस महोत्सव में आचार्य शांतिसागर महाराज के बिम्ब चरण एवं चारों पट्टाचार्य के चरण आकार शुद्धि, भूमिशुद्धि, चरण वंदन, प्रतिष्ठा, पंचामृत अभिषेक, आचार्य संघ मंगल प्रवचन, प्रथमाचार्य श्री का गुणानुवाद, विनयाजलि महाआरती, सांस्कृतिक नाटक, भजन संध्या सहित अनेक धार्मिक कार्यक्रम होंगे।</p>
<p><strong>आचार्य शांतिसागर जी सवा छह फिट ऊंची खडगासन प्रतिमा </strong></p>
<p>राजकीय अतिथि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के आर्शीवाद और पावन प्रेरणा से निर्मित इस स्मारक का भव्य निर्माण संपूर्ण देशभर में वर्ष भर तक मनाए जाने वाले ऐतिहासिक शताब्दी महोत्सव के तहत हुआ है। यह देशभर पहला अनूठा अनुपम स्मारक होगा। जहां प्रथमाचार्य के अक्षुण्ण पट्ट परंपरा के चारों पट्टाचार्याे के चरण कमल भी एक ही परिसर में स्थापित किए गए हैं। स्मारक में प्रतिष्ठित होने वाली अष्ट धातु से निर्मित आचार्य शांतिसागर जी सवा छह फिट ऊंची खडगासन प्रतिमा महाराष्ट्र में निर्मित हुई है। उल्लेखनीय है कि आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज ने प्रत्येक 12 वर्ष में होने वाले विश्व प्रसिद्ध भगवान् गोमटेश्वर बाहुबली के महामस्तकाभिषेक में लगातार तीन बार वर्ष 1993, 2006, 2018 में 400 से अधिक संतों की गौरवमयी उपस्थिति का नेतृत्व कर मंगल सानिध्य प्रदान किया था।</p>
<p><strong>गुरु एवं भक्तों के बीच सेतु का कार्य </strong></p>
<p>इसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री सहित विभिन्न राजनेताओं ने भी आचार्य का आर्शीवाद प्राप्त किया था। सबसे आखिरी में 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर्नाटक स्थित श्रवणबेलगोला में महोत्सव में शामिल हुए थे। आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी में 24 वर्ष बाद आयोजित हुए जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान् महावीर स्वामी के महामस्तकाभिषेक में भी अपना मंगल निर्देशन दिया था। आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज संघ से निवाई समाज का विशेष वात्सल्य रहा है। वर्ष 1969, 1979, 2000, 2015, 2022 के प्रवास के साथ ही निवाई का विशेष जुडाव रहा किन्तु वर्ष 2015 में देश में ऐतिहासिक ख्याति प्राप्त करने वाला आध्यात्मिक वर्षा योग अभी भी गुरु एवं भक्तों के बीच सेतु का कार्य कर रहा है।</p>
<p><strong>निवाई वासियों का देव शास्त्र गुरु की भक्ति में विशेष योगदान </strong></p>
<p>निवाई के श्रावक जन कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र सहित अनेक राज्यों में आहार चर्या, विहार चर्या से गुरु भक्ति का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। वर्तमान में आचार्य संघ टोक चातुर्मास के बाद शीतकालीन महाअर्चना के लिए नसिया मंदिर निवाई में विराजमान हैं और आचार्य संघ के सानिध्य में आगामी 20 और 21 जनवरी को शताब्दी महोत्सव के तहत ही इस अभूतपूर्व धवल स्मारक का लोकार्पण समारोह भी किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रथमाचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज की परंपरा के प्रथम पट्टाचार्य वीर सागरजी महाराज, द्वितीय पट्टाचार्य श्री शिवसागरजी महाराज एवं तृतीय पट्टाचार्य श्री धर्मसागरजी महाराज, आचार्य कल्प श्री श्रुतसागर जी के चरणरज भी निवाई की पुण्य धरा आ चुकी है। निवाई वासियों का देव शास्त्र गुरु की भक्ति में विशेष योगदान रहा है।</p>
<p><strong>समारोह की तैयारियां शुरू </strong></p>
<p>अब उन्ही की परंपरा के वर्तमान ध्वजवाहक पंचम पट्टाचार्य, राजस्थान के राजकीय अतिथि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज हैं। जिनके 33 पिच्छीधारी श्रमण संतों के सानिध्य में शताब्दी महोत्सव होने जा रहा है। इसमें देशभर से अनेक राजनेताओं, अधिकारियों सहित संपूर्ण भारत से भक्तजनांे एवं श्रावकों के आने की संभावना है। समारोह की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।</p>
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		<title>द्वादशवर्षीय परीक्षा के बाद मिलेंगी परीक्षार्थियों का उपाधियां : ललितपुर के 800 परीक्षार्थियों ने पाठ्यक्रम परीक्षा में लिया भाग  </title>
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		<pubDate>Sun, 13 Apr 2025 12:56:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर की ओर से 12 वर्षीय स्वाध्याय पाठ्यक्रम का आयोजन रविवार को किया गया। ललितपुर के भी 800 परीक्षार्थियों ने इस पाठ्यक्रम परीक्षा में भाग लिया। परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद सिद्धांत शास्त्री, सिद्धांत विशारद, सिद्धांत आचार्य की उपाधि दी जाएंगी। ललितपुर से राजीव सिंघई की पढ़िए यह खबर&#8230; ललितपुर। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर की ओर से 12 वर्षीय स्वाध्याय पाठ्यक्रम का आयोजन रविवार को किया गया। ललितपुर के भी 800 परीक्षार्थियों ने इस पाठ्यक्रम परीक्षा में भाग लिया। परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद सिद्धांत शास्त्री, सिद्धांत विशारद, सिद्धांत आचार्य की उपाधि दी जाएंगी। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से राजीव सिंघई की पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि पुंगव श्री सुधासागर महाराज की प्रेरणा से संचालित श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर की ओर से 12 वर्षीय स्वाध्याय पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसमें संपूर्ण देश और विदेश में लगभग बीस हजार से अधिक परीक्षार्थी जैन धर्म का स्वाध्याय कर रहे हैं। स्वाध्याय के साथ परीक्षा देकर प्रमाण पत्र भी प्राप्त कर रहे हैं। श्री दिगंबर जैन पंचायत समिति (रजि.) समिति के अध्यक्ष डॉ.अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, कोषाध्यक्ष सौरभ जैन सीए, संयोजक सनत जैन खजुरिया, प्रफुल्ल जैन, संजीव जैन के सहयोग से परीक्षा कराई गई। परीक्षा प्रभारी आलोक मोदी, राजेश शास्त्री के मार्गदर्शन में ललितपुर के भी 800 परीक्षार्थियों ने इस पाठ्यक्रम परीक्षा में भाग लिया। परीक्षा श्री अभिनंदनोदय तीर्थक्षेत्र, अटा मंदिर, बाहुबली नगर, श्री दिगंबर जैन बडा मंदिर में की गई। परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद सिद्धांत शास्त्री, सिद्धांत विशारद, सिद्धांत आचार्य की उपाधि प्रदान की जाएगी। परीक्षा प्रभारी ने बताया कि परीक्षा में अनुपस्थित अभ्यर्थियों की परीक्षा 27 अप्रैल को पुनः आयोजित की जाएगी।</p>
<p><strong>इनका सहयोग रहा सराहनीय </strong></p>
<p>परीक्षा को पूर्ण कराने में आलोक मोदी, मुकेश शास्त्री, राजेश शास्त्री, सत्येन्द्र जैन, दिलीप शास्त्री, जितेन्द्र जैन राजू, प्रवक्ता राहुल जैन, अपूर्व जैन, वंदित मोदी, अमित जैन, रीता जैन, पारस शास्त्री, अंकुर जैन, सचिन जैन, दीप्ति जैन, अमित जैन, राहुल जैन, सुरेंद्र जैन, शीलचंद्र शास्त्री, सचिन शास्त्री, दीपक जैन, प्राशु शास्त्री का विशेष सहयोग रहा।</p>
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		<title>तीन वर्षों में होगा निर्माण कार्य पूरा :            श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर का नव निर्माण के लिए भव्य शिलान्यास का कार्यक्रम हुआ सम्पन्न </title>
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		<pubDate>Thu, 26 Oct 2023 09:29:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सारांश 90 वर्ष प्राचीन श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर का नव निर्माण के लिए भव्य शिलान्यास का कार्यक्रम पूज्य जैन संत गुरुदेव मुनि श्री108 सुयश सागर जी महाराज के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। पुराने मंदिर का विसर्जन कर दिया गया। विश्व शांति महायज्ञ हवन पूजा के साथ ही सिद्ध चक्र महामंडल विधान को पूरी भक्ति [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>सारांश<br />
90 वर्ष प्राचीन श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर का नव निर्माण के लिए भव्य शिलान्यास का कार्यक्रम पूज्य जैन संत गुरुदेव मुनि श्री108 सुयश सागर जी महाराज के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। पुराने मंदिर का विसर्जन कर दिया गया। विश्व शांति महायज्ञ हवन पूजा के साथ ही सिद्ध चक्र महामंडल विधान को पूरी भक्ति के साथ संपन्न किया गया, तत्पश्चात शिलान्यास का कार्यक्रम हुआ। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</p>
<p>झुमरीतिलैया। 90 वर्ष प्राचीन श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर का नव निर्माण के लिए भव्य शिलान्यास का कार्यक्रम पूज्य जैन संत गुरुदेव मुनि श्री108 सुयश सागर जी महाराज के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। जैन समाज के मंत्री ललित सेठी ने बताया कि पुराने मंदिर की जीर्ण अवस्था को लेकर मंदिर निर्माण कमेटी एवं जैन समाज के पदाधिकारीगण ने निर्णय लिया कि समय और समाज की आवश्यकता को देखते हुए इसे आधुनिक साज- सज्जा के साथ भव्यता और दिव्यता प्रदान करते हुए नया निर्माण कराया जाए। पुराने मंदिर का विसर्जन कर दिया गया। विश्व शांति महायज्ञ हवन पूजा के साथ ही सिद्ध चक्र महामंडल विधान को पूरी भक्ति के साथ संपन्न किया गया, तत्पश्चात शिलान्यास का कार्यक्रम हुआ। इसमें 1000 से अधिक श्रद्धालु भक्त पुरुष, महिला, युवा बच्चों ने भाग लिया।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-50784" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/Shree-digamber-jain-1.jpg" alt="" width="600" height="686" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/Shree-digamber-jain-1.jpg 600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/Shree-digamber-jain-1-262x300.jpg 262w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" />सुयश सागर जी का रहा सानिध्य</strong></p>
<p>गुरुदेव आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य मुनि श्री 108 सुयश सागरजी महाराज ससंघ सानिध्य में अभूतपूर्व ऐतिहासिक सिद्ध चक्र विधान संपन्न हुआ और साथ- साथ मंदिर नव निर्माण शिलान्यास समारोह भी संपन्न हुआ। भूमि पूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम के पूर्व खनन क्रिया, वास्तु विधान, भूमि शुद्धि आदि मांगलिक कार्य समाज की उपस्थिति में पू गुरुदेव सुयश सागरजी महाराज ससंघ सानिध्य में और प्रतिष्ठाचार्य ब्र. संजय भैया, सरस, बैतूल के निर्देशन में शुरू हुए। प्रातः काल हवन आदि मांगलिक कार्य के बाद भगवान को पालकी पर बिठाकर नगर के मुख्य स्थान से शोभायात्रा निकाली गई और साथ- साथ मुख्य शिलान्यासकर्ता परिवार सुरेंद्र -सरिता सौरभ काला परिवार को सम्मान के साथ बग्गी में बिठाया गया और नगर परिक्रमा करने के बाद श्रीजी का शिलान्यास स्थल पर जलाभिषेक किया गया। श्रद्धालु बडी संख्या में उपस्थित थे और मंत्रोच्चारण के साथ शांति धारा की गई। सर्वप्रथम शिलान्यास स्थल पर शिलान्यास कर्ता परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों का भव्य प्रवेश हुआ।</p>
<p><strong>भूमि पूजन और शिलान्यास का सौभाग्य</strong></p>
<p>शिलान्यास स्थल की बहुत ही सुन्दर सजावट और तैयारी की गई। विधि-विधान पूर्वक पूजा अर्चना के बाद सर्व प्रथम शिलान्यास स्थल सुरेंद्र सरिता सौरभ काला, झुमरीतिलैया कोडरमा परिवार को आमंत्रित करते हुए रत्न शिला स्थापित करने का सौभाग्य मिला। परिवार और समाज के पूरे सदस्यों ने मिलकर भूमि पूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम को सफल बनाया। सभी को रजत स्वस्तिक, स्वर्ण शिला, रजत शिला उपलब्ध कराते हुए समाज के सभी परिवारों को पुण्य अर्जित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पूज्य गुरुदेव मुनिश्री सुयश सागरजी महाराज एवं समाज की विभिन्न इकाइयों के पदाधिकारीगण एवं सदस्यों ने विशेष रूप से सुरेंद्र सरिता सौरभ काला परिवार को बहुत बहुत बधाई दी।</p>
<p><strong>जिनालय निर्माण सौभाग्य की बात</strong></p>
<p>पूज्य गुरुदेव श्रमण मुनि सुयश सागर महाराज ने कहा कि कई जन्मों में संचित पुण्य कर्म के फलस्वरूप ऐसा सौभाग्य किसी व्यक्ति को मिल पाता है कि वह जिनालय निर्माण के शिलान्यास का सौभाग्य पा सके। भूमि पूजन में आठ दिशाओं मे आठ शीला रखने का सौभाग्य विमल संजय अजय बरजतया परिवार झुमरी तिलैया, पाना देवी गया परिवार, सुशीला देवी संदीप आशीष संजय सेठी परिवार झुमरी तिलैया, ललित दिलीप सृष्टि अजमेरा परिवार हजारीबाग, सुरेश प्रतिक पांड्या झुमरी तिलैया परिवार, विनीत छाबड़ा कोलकाता ध्वजा रोहन करता, विवेक सेठी प्रवीण पाटनी अभिषेक गंगवाल आदि परिवार को मिला। सुरेंद्र काला ने सभी पदाधिकारीगण, मंदिर निर्माण कमेटी चातुर्मास कमेटी के संयोजक नरेंद्र झाझरी, महिला समाज, युवक समिति, वर्षायोग समिति और सभी सहयोगियों विशेष रूप से सुरेश झांझरी, सुशील छाबड़ा, विवेक सेठी, प्रवीण पाटनी, अभिषेक गंगवाल,रिषभ काला का आभार जताया। पूज्य मुनिश्री 108 सुयश सागरजी महाराज,कोडरमा गौरव मुनि श्री 108 प्रांजल सागर जी मुनिराज,प पू क्षुल्लक 105 श्रुत सागर जी, क्षुल्लक 105 सोहम सागरजी महाराज का पूरे जैन समाज के श्रद्धालु भक्तों को आशीर्वाद मिला मंदिर निर्माण कमेटी के संयोजक सुरेश झांझरी सुशील छाबड़ा ने भी सभी दान दातार के प्रति आभार व्यक्त किया और बताया कि सभी के सहयोग से मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होगा, जिसे तीन वर्षों में पूरा कर लिया जाएगा। जैन समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन और राजकुमार अजमेरा ने बताया कि शिलान्यास स्थल पर 35 घंटे का विश्व शांति णमोकार महामंत्र का अखंड पाठ हुआ।</p>
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