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	<title>श्री चंद्रप्रभु भगवान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>श्री चंद्रप्रभु भगवान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जिस मंदिर क्षेत्र में चमत्कार होता है वह मंदिर अतिशय क्षेत्र होता है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्राचीन मंदिर के रहस्यों से पर्दा उठाया  </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 13:55:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी सहित पूर्वाचार्यों के आशीर्वाद से हमने पहली बार किसी मंदिर का जीणोद्धार कर नूतन जिनालय बनाने की प्रेरणा दी। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के मोक्ष कल्याणक अवसर पर धर्मसभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि अब पीपल्दा गांव नगर हो गया। पीपल्दा से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांति सागर जी सहित पूर्वाचार्यों के आशीर्वाद से हमने पहली बार किसी मंदिर का जीणोद्धार कर नूतन जिनालय बनाने की प्रेरणा दी। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के मोक्ष कल्याणक अवसर पर धर्मसभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि अब पीपल्दा गांव नगर हो गया। <span style="color: #ff0000">पीपल्दा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पीपल्दा।</strong> पीपल्दा ग्राम अब श्री चंद्र प्रभु अतिशय मंदिर के नाम से भारत में विख्यात होगा। 972 वर्ष प्राचीन जिनालय में विगत 3 वर्षों पूर्व आए थे तब से अभी तक हमने भी अनेक अतिशय देखे और प्रभु की सकारात्मक उर्जा महसूस की। आचार्य श्री शांति सागर जी सहित पूर्वाचार्यों के आशीर्वाद से हमने पहली बार किसी मंदिर का जीणोद्धार कर नूतन जिनालय बनाने की प्रेरणा दी। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के मोक्ष कल्याणक अवसर पर धर्मसभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि अब पीपल्दा गांव नगर हो गया। प्राचीन जिनालय पहले रोड से 4 फीट नीचे था। वर्षा का पानी मंदिर में आता था। प्रभु के चमत्कार से बिना निकासी के जल निकल जाता था। श्री चंद्रप्रभु भगवान का पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव हुआ। इस दौरान इंदौर जैसे महानगर से भक्त यहां आकर सौधर्म इंद्र बने। कोलकाता, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश सहित अनेक राज्यों के श्रावकों ने तन-मन-धन से भक्ति की।</p>
<p><strong>आचार्यश्री ने कहा-अब यह अतिशय क्षेत्र है</strong></p>
<p>जन्म कल्याणक पर हेलिकाप्टर से पुष्प वर्षा, तप कल्याणक पर प्रसिद्ध भामाशाह का हेलिकाप्टर से आना, मंदिर बहुमंजिला शिखर वाला बनना, संत भवन बनाना,उसके लिए भूमिदान, निर्माण सामग्री का दान ऐसे अनेक चमत्कार अतिशय प्राचीन श्री चंद्रप्रभु द्वारा ही हुए हैं। इसलिए श्री चंद्रप्रभु जिनालय को हम अतिशय क्षेत्र घोषित करते हैं। आपकी ही तरह श्री चन्द्रप्रभु भगवान भी संसारी प्राणी थे। जिन्होंने मनुष्य भव में युवराज बनकर राज संचालन किया। विवाह भी किया। आकाश में बिजली की चमक देखकर वैराग्य का निमित्त मिला।</p>
<p><strong>रोज देवदर्शन और पूजन का संकल्प लें</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि दीक्षा का प्रसंग आपने देखा। तप साधना से चार धातिया कर्मों को नष्ट कर केवल ज्ञान प्राप्त कर विहार कर धर्म देशना समवशरण में देते हैं। सम्मेद शिखर में नियोग धारण कर ध्यान से शेष 4 अधातिया कर्मों को नष्ट कर सिद्ध अवस्था प्राप्त करते हैं। सभी को चमत्कारी अतिशयकारी चंद्रप्रभु श्री का प्रतिदिन देव दर्शन, अभिषेक, पूजन का संकल्प लेना चाहिए। देव गुरु हमारे आराध्य हैं। मंगलवार को सुबह श्रीजी के अभिषेक पूजन के बाद आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनिश्री हितेंद्र सागर जी ने बताया कि अरिहंत भगवान 4 कर्मों के बाद शेष 4 कर्म किस प्रकार श्रेणी बार क्षय कर सिद्धालय विराजित होते हैं। भगवान के मोक्ष जाने के बाद अग्निकुमार देव नख और केश के अग्नि संस्कार करते हैं।</p>
<p><strong>दानदाताओं और सहयोगियों का किया सम्मान </strong></p>
<p>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघ के सानिध्य में पंडाल से नूतन श्रीजी को प्रतिष्ठाचार्य मनोज शास्त्री के निर्देशन में रथ में विराजित कर नूतन मंदिर में नूतन वेदी पर मंत्रोच्चार पूर्वक पुण्यशाली परिवारों द्वारा विराजित किया गया। नूतन शिखर पर स्वर्ण कलशारोहण मनोज, संजीव गौरव सोगानी परिवार ने किया। ध्वजदंड आरती सनत निखिल विशाल जैन इंदौर पुण्यार्जक परिवार ने लगाए। मंदिर निर्माण समिति के प्रभारी लल्लूप्रसाद सिंघल, ओमप्रकाश, राजेंद्र, ओमप्रकाश बजाज ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान नूतन जिनालय नूतन प्रतिमा वेदी, शासन रक्षक देवी-देवताओं, मंदिर और संत भवन निर्माण में तन, मन और धन से सहयोग करने वाले सभी दान दाताओं और सहयोगियों का तिलक, माला, दुप्पटा, स्मृति चिन्ह से सम्मान कर कृतज्ञता ज्ञापित की गई।</p>
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		<title>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा से जीवन में संस्कारों का आरोपण करें : 29 को होगा जन्म कल्याणक हेलीकॉप्टर से होगी पुष्पवृष्टि </title>
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		<pubDate>Fri, 28 Nov 2025 12:19:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रीमद 1008 श्री चंद्रप्रभु भगवान का 5 दिवसीय पंच कल्याणक श्रीजी की रथ यात्रा से आरंभ हुआ। आचार्य संघ के सानिध्य में घटयात्रा निकाली गई। ध्वजारोहण, मंडप उदघाटन के साथ कलश स्थापना की गई। याग़ मंडल विधान से कार्यक्रम आरंभ हुआ। इस दौरान आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने केशलोचन किए। पीपल्दा से पढ़िए, राजेश [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रीमद 1008 श्री चंद्रप्रभु भगवान का 5 दिवसीय पंच कल्याणक श्रीजी की रथ यात्रा से आरंभ हुआ। आचार्य संघ के सानिध्य में घटयात्रा निकाली गई। ध्वजारोहण, मंडप उदघाटन के साथ कलश स्थापना की गई। याग़ मंडल विधान से कार्यक्रम आरंभ हुआ। इस दौरान आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने केशलोचन किए। <span style="color: #ff0000">पीपल्दा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पीपल्दा।</strong> श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक के प्रथम दिन श्री वर्धमान सागर जी के संघ सानिध्य में शुक्रवार से 2 दिसंबर तक चलने वाले 5 दिवसीय श्री चंद्रप्रभु भगवान का पंचकल्याणक का शुभारंभ श्रीजी की रथयात्रा के साथ हुआ। इसमें सौधर्मइंद्र समर पूर्वा कंठाली और ध्वजारोहण परिवार हाथी पर सवार रहे। शताधिक महिलाओं की विशाल घटयात्रा नवीन जिनालय से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुई चंद्रपुरी के वर्धमान सभागृह पहुंची। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में बताया कि चंद्रपुरी में चंद्रनाथ तीर्थंकर बालक ने जन्म लेकर, वैराग्य दीक्षा तप साधना से परमात्म पद को जानने का आदर्श कार्य कर परमात्मा बनने का पुरुषार्थ किया। नगर में मंदिर जिनालय बनने से नगर उन्नतिशील होता है।</p>
<p>भगवान के दर्शन, अभिषेक पूजन आदि क्रियाओं से जीवन मंगलमय होकर जीवन में उन्नति होती है। 15 माह तक देवता रत्नों की वृष्टि करते हैं। तीर्थंकर धर्म की वृष्टि उपदेश देशना से करते हैं। 3 वर्षों में नूतन मंदिर निर्मित हो गया। आचार्य श्री ने कहा कि देव शास्त्र गुरुओं के सेवा भावियों का सम्मान करना भारतीय संस्कृति है। पंच कल्याणक के संस्कार क्रिया से जीवन का निर्वाण का पुरुषार्थ कर जीवन का निर्माण करे।</p>
<p><strong>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा देखने के साथ सीखने का महोत्सव </strong></p>
<p>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के प्रवचन के पूर्व शिष्य मुनि श्री हितेंद्रसागर जी ने बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में पाषाण, रत्न ,धातु की प्रतिमा में प्रतिष्ठाचार्य के सहयोग से आचार्य मुनिराज मंत्रोच्चार से सूरीमंत्र से प्रतिमाओं में भगवान के गुणों का आरोपण कर प्रतिमाओं को पूजनीय, वंदनीय बनाया जाता है। मुनि श्री ने आगे प्रवचन में बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा देखने के साथ सीखने का महोत्सव है। किस प्रकार पाषाण को पूजनीय बनाया जाता है। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा से भगवान जैसा बनने का पुरुषार्थ करें। यह भाव जागृत करें कि हम भी किसी भव में तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंध करें। आज प्रातः आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने केश लोचन किए। आचार्य श्री का उपवास रहा। समाज अध्यक्ष बजरंगलाल एवं मनोज जैन सोगानी ने बताया कि आचार्य श्री प्रवचन के पूर्व ध्वजारोहण श्रेष्ठी सन्मति, कमलेश देवी, सुकुमाल, महिपाल, मोहित चवरिया परिवार ने, मंडप उद्घाटन राजेंद्र दिलीप अंकित अमित निवाई ने, मुख्य मंगल कलश स्थापना मनोज जैन सोगानी परिवार ने की।</p>
<p><strong>इन समाजजनों का किया गया सम्मान </strong></p>
<p>आचार्य श्री संघ के मंचासीन होने के बाद मंगलाचरण द्वारा श्रीजी और प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी सहित परंपरा के सभी आचार्यों के चित्र का अनावरण महावीर, शिखरचंद, सुरेश,अशोक परिवार निवाई तथा दीप प्रवज्जलन कैलाश चंद चोरू परिवार ने किया। श्री जी के अभिषेक के बाद आचार्य श्री सानिध्य में संघ के सेवाभावी बाल ब्रह्मचारी गज्जूभैया, पदम भैया, सोनू भैया, परमीत, पारस पाटनी, बाबूलाल शाह, लोकेश गजराज, फूलसिंह, सनत जैन का तिलक ,श्रीफल, माला पगड़ी से सम्मान किया गया। मंदिर के शिल्पकार, वास्तुविद प्रतिमाधारी इंजीनियर पारसमल उदयपुर का सम्मान किया गया। वात्सल्य वारिधी सोशल मीडिया के राष्ट्रीय प्रभारी राजेश पंचोलिया इंदौर का सभी प्लेटफॉर्म इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया पर त्वरित प्रसारण प्रचार-प्रसार के लिए सम्मान किया गया। आचार्य ओर प्रतिष्ठाचार्य निमंत्रण द्वारा प्रतिष्ठाचार्य पंडित मनोज शास्त्री सहित सभी विद्वानों का बहुमान किया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी पुण्यार्जक परिवारों द्वारा भेंट की गई।</p>
<p><strong>16 सपनों के नाटक का मंचन किया गया</strong></p>
<p>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा कार्यक्रम के अध्यक्ष मनोज सोगानी ने बताया कि दोपहर को सौधर्म इंद्र ,शचि इंद्राणी, माता पिता प्रमुख इंद्र, प्रति इंद्र सहित सभी का मंत्रोच्चार से सकलीकरण किया गया। याग़मंडल की पूजन प्रतिष्ठाचार्य मनोज शास्त्री के निर्देशन में हुई। शाम को श्री जी और आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की भव्य मंगल आरती पश्चात रात्रि में भगवान की माता को रात्रि में आए 16 सपनों का नाटकीय मंचन किया गया। 29 नवंबर को तीर्थंकर बालक का जन्म होगा। तीर्थंकर बालक का 1008 कलशों से अभिषेक होगा। सवाई माधोपुर सहित राजस्थान के अनेक नगरों से हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। सौधर्म इंद्र समर कंठाली द्वारा हेलीकाप्टर से पुष्पवृष्टि होगी।</p>
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		<title>फाल्गुन की अष्टा्ह्निका में सिद्धचक्र मंडल विधान: 14 मार्च को होगा विधान समापन, पूजन, अभिषेकादि हुए </title>
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		<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 15:18:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सीवीवी डायमंड सिटी के मध्य स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर पार्ले पॉइंट में विराजित श्री चंद्रप्रभु भगवान की अनुकंपा एवं आचार्यश्री देवनंदी जी के शिष्य मुनिश्री शुभमकीर्तिजी महाराज के आशीर्वाद एवं सानिध्य में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान जारी है। इसका समापन 14 मार्च को होगा। इंद्र प्रतिष्ठा ध्वजा रोहण, अभिषेक और शांतिधारा विधान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सीवीवी डायमंड सिटी के मध्य स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर पार्ले पॉइंट में विराजित श्री चंद्रप्रभु भगवान की अनुकंपा एवं आचार्यश्री देवनंदी जी के शिष्य मुनिश्री शुभमकीर्तिजी महाराज के आशीर्वाद एवं सानिध्य में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान जारी है। इसका समापन 14 मार्च को होगा। इंद्र प्रतिष्ठा ध्वजा रोहण, अभिषेक और शांतिधारा विधान पूजा करके किया गया। <span style="color: #ff0000">सूरत से पढ़िए दीपक प्रधान की खबर&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सूरत।</strong> सीवीवी डायमंड सिटी के मध्य स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर पार्ले पॉइंट में विराजित श्री चंद्रप्रभु भगवान की असीम अनुकंपा से एवं आचार्यश्री देवनंदी जी शिष्य मुनिश्री शुभमकीर्तिजी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं पावन सानिध्य में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान 6 से 14 मार्च तक चल रहा है। विधान का शुभारंभ देव आज्ञा, गुरु आज्ञा, सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा ध्वजा रोहण, अभिषेक और शांतिधारा विधान पूजा करके किया गया।</p>
<p>विधान में मुख्य सौधर्म इंद्र पुण्यार्जक निशा देवी अरुण, प्रतीक, श्रुति, वर्णिका, अनुज, शुभांशी, रियांशी, माईशा, रियांश, अयांश जैन दिल्ली वाले परिवार एवं शशि पवन, अनुभा विनय,रीना विकास, अंकिता विपुल, मिलन, तान्या, सौम्या, सम्यक, नमन, आशिका, मनन जैन (मेरठ वाले) वाले परिवार रहे और सकल दिगंबर जैन समाज के धर्मिष्ठ श्रावकों ने पूजा में बैठकर सिद्धचक्र पूजा-आराधना का सौभाग्य प्राप्त किया। विधान की विधि प्रतिष्ठाचार्य पं. सनतकुमार, पं.विनोदकुमार रजवास (मध्यप्रदेश), पं.रुपेश भाई(खंडवावाले), सूरत, पं.अनुज भाई के निर्देशन में हो रही है। विधान का समापन 14 मार्च को विश्व शांतियज्ञ अनुष्ठान एवं श्रीजी की रथयात्रा कर विधान पूर्ण संपन्न होगा। समाज में बहुत ही हर्ष व्याप्त है।</p>
<p><strong>सिद्ध भगवानों के समूह की आराधना है सिद्धचक्र</strong></p>
<p>विधान के तहत श्री शुभमकीर्ति जी ने प्रवचन के माध्यम से बताया कि सिद्ध भगवानों के समूह की आराधना करना सिद्धचक कहलाता है। दृष्टांत हैं कि एक राजा को इस बात का घमंड हो गया था कि सभी उसका दिया हुआ खाते हैं। एक दिन उसने अपनी दोनों पुत्रियों को बुलाया। जिसमें से एक पुत्री ने अपने भाग्य से खाने की बात कही। इस पर राजा नाराज हो गया और उसने पुत्री मैनासुंदरी का विवाह कोढ़ी से करा दिया। मुनिराज ने जिनालय में जाकर उसे सिद्धचक्र विधान करने के बारे में बताया। मैना सुंदरी ने सिद्धचक्र विधान करने पर उसके पति का कुष्ट दूर हो गया। कार्यक्रम में ट्रस्टी आशी शालू नोवा ग्रुप, अशोक विनायका, राजाभाई शाह, नरेश भाई दिल्ली, कमलेश गांधी ने समाज के सभी विज्ञजनों का आभार माना। साथ ही 10 अप्रैल को मनाए जाने वाले महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव की रूपरेखा बताई।</p>
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