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	<title>श्री आदिनाथ भगवान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>श्री आदिनाथ भगवान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जीवन का निर्माण देव के उपदेश से होता है : पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भक्तिपूर्वक हुए कार्यक्रम </title>
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		<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 18:46:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को श्री आदिनाथ जयंती के तहत श्री आदिनाथ भगवान का नित्य अभिषेक एवं शांति धारा पुण्यार्जक परिवार ने की। सभी इंद्रों ने भी अभिषेक और शांतिधारा में भाग लिया। धामनोद से पढ़िए, यह खबर&#8230; धामनोद। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को श्री आदिनाथ जयंती के तहत पश्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को श्री आदिनाथ जयंती के तहत श्री आदिनाथ भगवान का नित्य अभिषेक एवं शांति धारा पुण्यार्जक परिवार ने की। सभी इंद्रों ने भी अभिषेक और शांतिधारा में भाग लिया। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को श्री आदिनाथ जयंती के तहत पश्री आदिनाथ भगवान का नित्य अभिषेक एवं शांति धारा पुण्यार्जक परिवार ने की। सभी इंद्रों ने भी अभिषेक और शांतिधारा में भाग लिया। प्रतिदिन अभिषेक करने और देखने से कर्मों की निर्जरा होती है। जिनालय से सकारात्मक ऊर्जा ,जीवन में सुख शांति और पुण्य का आश्रव प्राप्ति होती है। श्री भगवान ऋषभदेव के जन्म के पूर्व भोग भूमि थी। कल्पवृक्ष थे। उनसे प्राणी जो भी इच्छा कामना करते थे वह वस्तु मिल जाती थी। देवलोक में कंठ से अमृत झरता था। इस कारण उन्हें भूख प्यास का अनुभव नहीं होता था। आदिनाथ भगवान के जन्म के बाद उन्होंने जीवन यापन करने के लिए प्रजा को असि ,मसि, कृषि, शिल्प ,कला और वाणिज्य का उपदेश दिया। पुत्रियों ब्राह्मी और सुंदरी के माध्यम से अंक और लिपि का ज्ञान दिया। धर्म में बताया कि जीवन का निर्माण देव के उपदेश से, संयमित,अनुशासित जीवन संस्कार से निर्मित होता है। इसी से जीवन से निर्वाण अर्थात सिद्धालय की प्राप्ति होगी।</p>
<p><strong>जनजागरण के लिए निकाली वाहन रैली</strong></p>
<p>गुरुवार को जैन समाज धामनोद और मुनिसेवा समिति के सहयोग से धर्म प्रभावना को लेकर दो पहिया वाहन रैली निकाली गई। जो सुंदरेल फाटे से ढोल धमाकों के साथ गुलझरा तक गई। वहां से नगर के महेश्वर फाटा के श्रीराम चौराहा पर धर्म सभा में तब्दील हो गई। जहां समाज सचिव दीपक प्रधान, मुनिसेवा समिति सचिव संजय जैन और प्रणीति जैन ने प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ जी के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्री आदिनाथ प्रभुजी ने सृष्टि का बदलाव किया और विश्व को असी मसी, कृषि और अंक कृषि का ज्ञान दिया। जैन समाज अध्यक्ष महेश जैन ने कहा कि जन जागरण रैली निकालकर जन-जन को जानकारी भी देना थी कि श्री आदिनाथ भगवान विश्व धर्म के निर्माता हैं। विश्व का कल्याणक किया है। इस अवसर पर नीलेश जैन ने भी कहा कि धर्म की प्रभावना करना था जैन समुदाय के समाजजनों ने अपने अपने दोपहिया वाहन से ध्वज लेकर नगर भ्रमण किया।</p>
<p><strong>बालक श्री आदिकुमार को पालने मव झुलाया</strong></p>
<p>इस अवसर पर मंदिर जी में श्री आदिनाथ प्रभु को बालक श्री आदिकुमार के रूप में सजावट कर वेशभूषा पहनाकर पलने में प्रथम बार झुलाने के पुण्यार्जक पारस महेंद्र जैन बने। आज स्वर्ण कलश करने के लाभार्थी बने विभा सुनील जैन, प्रशांत जैन, शांतिधारा के लाभार्थी सुरेश जैन परिवार शोभा, सुशील जैन, एकता विजय जैन थे। मंदिर में भव्य सजावट की गई थी। अब रोजाना बीस दिन तक महिलाओं द्वारा भक्ति व विनती के कार्यक्रम संध्या को होगे। संचालन दीपक प्रधान ने किया। आभार प्रशासनिक सचिव लोकेंद्र जैन ने माना। यह जानकारी सुनील जैन, अजय जैन और मीडिया प्रभारी यश जैन ने दी।</p>
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		<title>टीएमयू के 120 श्रावक-श्राविकाएं माताजी के दर्शनार्थ अयोध्या रवाना : श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान में इन स्टूडेंट्स ने लिया था भाग  </title>
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		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 03:44:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के 120 श्रावक-श्राविकाएं और फैकल्टीज़ गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी के दर्शनार्थ शुक्रवार सुबह कैंपस से अयोध्या रवाना हुए। ये सभी श्रावक-श्राविकाएं और फैकल्टीज़ श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान में शामिल रहे। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230; मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के 120 श्रावक-श्राविकाएं और फैकल्टीज़ गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के 120 श्रावक-श्राविकाएं और फैकल्टीज़ गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी के दर्शनार्थ शुक्रवार सुबह कैंपस से अयोध्या रवाना हुए। ये सभी श्रावक-श्राविकाएं और फैकल्टीज़ श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान में शामिल रहे। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद।</strong> तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के 120 श्रावक-श्राविकाएं और फैकल्टीज़ गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी के दर्शनार्थ शुक्रवार सुबह कैंपस से अयोध्या रवाना हुए। ये सभी श्रावक-श्राविकाएं और फैकल्टीज़ श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान में शामिल रहे थे। टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन ने संकल्प लिया था कि महामंडल विधान में शामिल होने वाले इन स्टूडेंट्स को माताजी के मंगल आशीर्वाद के लिए अयोध्या भेजेंगे। उल्लेखनीय है कि अयोध्या श्री आदिनाथ भगवान, श्री अजीतनाथ भगवान, श्री अभिनंदन नाथ भगवान, श्री सुमतिनाथ भगवान, श्री अनंतनाथ भगवान की जन्म स्थली भी है। यह दल इन पांचों तीर्थंकरों की जन्मस्थली का दर्शन भी करेगा। साथ ही यह दल सरयू तट पर आरती में भी शामिल होगा। इन श्रावक-श्राविकाओं के अलावा अयोध्या जाने वालों में टिमिट के निदेशक प्रो. विपिन जैन, प्रो. आरके जैन, डॉ. शैफाली जैन, अहिंसा जैन, डॉ. अर्चना जैन आदि भी शामिल हैं। ये 120 स्टूडेंट्स एक दर्जन से अधिक कोर्सेंज़ के हैं।</p>
<p><strong>पांचों तीर्थंकरों की जन्मस्थली के दर्शन करेंगे</strong></p>
<p>टिमिट के निदेशक प्रो. विपिन जैन ने बताया कि अयोध्या पहुंचकर श्रावक-श्राविकाओं के साथ फैकल्टीज़ और स्टाफ का यह दल सर्वप्रथम गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी को श्रीफल भेंट करके मंगल आशीर्वाद लेगा। इसके बाद वे पांचों तीर्थंकरों की जन्मस्थली के साथ श्रीराम लला के दर्शन भी करेंगे। ये श्रावक-श्राविकाएं बीसीए, बीटेक, बीबीए, बीलिब, एमबीए, एमबीए कॉर्पोंरेट, बीटेक एआई, बीपीटी, बीएससी फॉरेंसिक साइंस, बीएफए, ऑप्टोमेट्री, बीकॉम, बीबीए आईबी के छात्र हैं। इस दल में चिराग जैन, सर्वज्ञ चौधरी, प्रयास झांझरी, पारस जैन, निकिता जैन, आदित्य जैन, श्रीश जैन, आराध्य जैन, धार्मिक जैन, आरजू जैन, वैभव जैन भी शामिल हैं। यह दल रविवार की रात को टीएमयू कैंपस लौट आएगा।</p>
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		<title>श्री आदिनाथ भगवान के मंदिर में प्रतिष्ठा महोत्सव 12 अप्रैल को: आचार्य श्री जिनमणि प्रभ सूरीश्वर जी मसा. की निश्रा होगी प्राप्त  </title>
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		<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 09:32:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मंदिर की प्रतिष्ठा महोत्सव आचार्य श्री जिनमणि प्रभ सूरीश्वर जी मसा का नगर में प्रवेश 12 अप्रैल को होगा। मंदिर निर्माण अंतिम चरण में, श्रद्धालुओं में उत्साह है। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। शहर के बाज़ार नं. 3 में स्थित श्री आदिनाथ जैन मंदिर का जीर्णाेद्धार तेजी से चल रहा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मंदिर की प्रतिष्ठा महोत्सव आचार्य श्री जिनमणि प्रभ सूरीश्वर जी मसा का नगर में प्रवेश 12 अप्रैल को होगा। मंदिर निर्माण अंतिम चरण में, श्रद्धालुओं में उत्साह है। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> शहर के बाज़ार नं. 3 में स्थित श्री आदिनाथ जैन मंदिर का जीर्णाेद्धार तेजी से चल रहा है। इस मंदिर की भव्यता और सुंदरता दिन प्रतिदिन बढ़ती दिखाई दे रही है, जो जैन समाज के लोगों के साथ शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से रामगंजमंडी आने वाले हर व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। लोगों के बीच यह चर्चा का विषय है कि इतने कम समय में इतना भव्य एवं शिखर बंध मंदिर बन रहा है। श्री आदिनाथ जैन श्वेताम्बर श्री संघ अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि अब मंदिर के कार्य को और गति देनी होगी। मंदिर की प्रतिष्ठा जिनके पावन निश्रा में हो रही है, उन आचार्य श्री जिनमणि प्रभ सूरीश्वर जी मसा का नगर में प्रवेश 12 अप्रैल को होगा। इसी बीच होली और ईद के त्योहार आने से बाहर से आए कारीगर अपने-अपने गांव जाएंगे।</p>
<p><strong>मंदिर की प्रतिष्ठा में साध्वियों का सानिध्य</strong></p>
<p>प्रतिष्ठा महोत्सव में छत्तीसगढ़ रत्न गुरुवर्या मनोहर श्रीजी मसा की सुशिष्याएं लयस्मिता श्री जी, अमीवर्षा श्री जी, भव्योदया श्री जी, गुणोदया श्री जी एवं जिन वर्षा श्री जी का पावन सानिध्य प्राप्त होगा। श्री आदिनाथ जैन श्वेताम्बर श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख, ट्रस्टी सुभाष बापना, ट्रस्टी सुरेंद्र बापना एवं श्रीसंघ ट्रस्ट के सदस्य सुरेंद्र रांका ने मध्यप्रदेश के नरसिंहगढ़ जाकर साध्वी मंडल से विनती की। पारख ने बताया कि लयस्मिता श्री जी ने सन् 1984 में रामगंजमंडी में चातुर्मास किया था। उनकी दीक्षा सन् 1979 में छत्तीसगढ़ में हुई और बड़ी दीक्षा पालीताना में जिन कीर्ति सागर सूरीश्वर जी ने करवाई। अपने 40 वर्ष के संयम जीवन में उन्होंने नागौर, फलोदी, लोहावट, खीचन, नवसारी, झुंझुनू, नागपुर, चंद्रपुर, रतलाम, जावरा और नरसिंहगढ़ में चातुर्मास किए हैं। उनका प्रथम चातुर्मास धमतरी में हुआ था। इस वर्ष का चातुर्मास ग्वालियर में था।</p>
<p><strong>साध्वी मंडल की स्वीकृति </strong></p>
<p>चातुर्मास पूर्ण करके साध्वी मंडल शिवपुरी, गुना, अशोक नगर, ब्यावरा होती हुई रविवार को नरसिंहगढ़ पहुंचीं। रामगंजमंडी प्रतिष्ठा महोत्सव में पधारने की विनती पर साध्वी लयस्मिता जी ने तुरंत स्वीकृति देते हुए कहा कि शिखर पर चढ़ती और लहराती ध्वजा और परमात्मा को विराजमान होता देखना परम सौभाग्यशाली लोगों को मिलता है। अगर जहां प्रतिष्ठा हो रही है उसके नजदीक है तो अवश्य जाना चाहिए।</p>
<p><strong>भानपुरा पीठाचार्य शंकराचार्य का आशीर्वाद भी मिलेगा</strong></p>
<p>प्रतिष्ठा महोत्सव में श्रीसंघ ट्रस्ट अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि संघ की विनती पर ज्योतिर्मठ अवांतर भानपुरा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्रीज्ञानानंद जी तीर्थ का प्रतिष्ठा महोत्सव में 14 अप्रैल को परमात्मा के वरघोड़े (जुलूस) और प्रवचन में रामगंजमंडी के लोगों को आशीर्वाद प्राप्त होगा।</p>
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		<title>ध्वजारोहण घटयात्रा से हुआ पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा- गर्भ के संस्कार ज्ञान से जीवन का निर्माण होकर निर्वाण होता हैं  </title>
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		<pubDate>Thu, 19 Feb 2026 17:13:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री आदिनाथ भगवान से 6 भगवान् श्री पदम् प्रभ सबने धर्म का प्रवर्तन किया। एक संयोग है कि श्री महावीर जी और श्री पदम प्रभ अतिशय क्षेत्र हैं। दोनों क्षेत्रों में भूगर्भ से प्रतिमाएं निकली हैं। दोनों स्थानों पर पंडित हँसमुख के साथ चैबीसी का पंच कल्याणक हमारे द्वारा हुआ। यह मंगल धर्म देशना आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री आदिनाथ भगवान से 6 भगवान् श्री पदम् प्रभ सबने धर्म का प्रवर्तन किया। एक संयोग है कि श्री महावीर जी और श्री पदम प्रभ अतिशय क्षेत्र हैं। दोनों क्षेत्रों में भूगर्भ से प्रतिमाएं निकली हैं। दोनों स्थानों पर पंडित हँसमुख के साथ चैबीसी का पंच कल्याणक हमारे द्वारा हुआ। यह मंगल धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में प्रारंभ पंच कल्याणक के प्रथम गर्भ कल्याणक पर धर्मसभा में प्रगट की। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा जयपुर।</strong> प्रतिमा चाहे पाषाण,या रत्न रन की हो, उसमें भगवान के गुणों का संस्कार का आरोपण किए जाते हैं। प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान के समय भोग भूमि थी। बाद में कर्म भूमि प्रारंभ हुई। श्री आदिनाथ भगवान से 6 भगवान् श्री पदम् प्रभ सबने धर्म का प्रवर्तन किया। एक संयोग है कि श्री महावीर जी और श्री पदम प्रभ अतिशय क्षेत्र हैं। दोनों क्षेत्रों में भूगर्भ से प्रतिमाएं निकली हैं। दोनों स्थानों पर पंडित हँसमुख के साथ चैबीसी का पंच कल्याणक हमारे द्वारा हुआ। यह मंगल धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में प्रारंभ पंच कल्याणक के प्रथम गर्भ कल्याणक पर धर्मसभा में प्रगट की। आचार्य श्री ने आगे कहा कि माता जब संस्कारित होगी तभी वह बच्चों को संस्कारित कर सकती है। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी ने गर्भस्थ शिशु को रात्रि भोजन त्याग के उदाहरण से बताया कि माता के गर्भ में दिए धार्मिक ज्ञान संस्कार से ही तीर्थंकर,मुनि, महापुरुष और लौकिक एडवोकेट, डाॅक्टर, सीए इंजीनियर बनते हंै।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100297" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0032-200x300.jpg" alt="" width="200" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0032-200x300.jpg 200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0032-683x1024.jpg 683w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0032-768x1152.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0032-1024x1536.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0032-990x1485.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0032.jpg 1066w" sizes="(max-width: 200px) 100vw, 200px" /></p>
<p><strong>पाषाण को परमात्मा बनाने की क्रियाएं की जाएगी</strong></p>
<p>आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने बताया कि तीर्थंकर कुल, जैन धर्म, उच्च मनुष्य गति में माता के विचार, भाव खानपान अच्छा होना चाहिए। गर्भपात कराने के दुष्परिणाम होते हैं। प्राचीन पदमप्रभ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा बाड़ा मंदिर में नूतन चैबीसी का पंच कल्याणक, विश्वशांति महायज्ञ एवं पदम वल्लभ नूतन शिखर पर कलश एवं ध्वज आरोहण कार्यक्रम प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी परंपरा के आचार्य श्री धर्मसागर जी से सन 1969 में दीक्षित 76 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित अनेक साधुओं के पावन सानिध्य में 5 दिवसीय पंच कल्याणक महा महोत्सव बुधवार से शताधिक महिलाओं की कलश घटयात्रा, ध्वजारोहण, भूमि शुद्धि, मंडप उद्घाटन मंगल श्री जी विराजमान मंगल कलश स्थापना, अभिषेक पूजन समस्त आचार्य आर्यिका संघ के मंचासीन होने पर प्रारंभ हुआ। एडवोकेट सुधीर, हेमंत सोगानी, सुरेश सबलावत ने बताया कि आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य पंडित हसमुख जैन धरियावद के निर्देशन में पांच दिवसीय आयोजन में भगवान के पांच कल्याणकों के माध्यम से पाषाण को परमात्मा बनाने की क्रियाएं की जाएगी। बुधवार को प्रातः विशाल घटयात्रा अहिंसा सर्कल से निकाली गई। जिसमें जिनेंद्र प्रभु को प्रतिमा के साथ अश्व, हाथी, बैंड,108 मंगल कलश के साथ हजारों श्रावकगण नगर के मुख्य मार्गो से होकर प्रतिष्ठा स्थल मैदान में बने अयोध्या नगरी नाभिराय पांडाल में पहुंचे।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100298" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0031-200x300.jpg" alt="" width="200" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0031-200x300.jpg 200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0031-683x1024.jpg 683w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0031-768x1152.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0031-1024x1536.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0031-990x1485.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0031.jpg 1066w" sizes="(max-width: 200px) 100vw, 200px" /></p>
<p><strong>इन सौभाग्यशालियों ने लिया धर्मलाभ </strong></p>
<p>ध्वजारोहणकर्ता पुष्पा, विवेक आशा काला जयपुर परिवार ने ध्वजारोहण किया। पांडाल उदघाटन सुधांशु ऋतु कासलीवाल परिवार ने किया। मंगलाचरण कीर्ति दीदी ने किया। चित्र अनावरण दीप प्रवज्जलन कमल,नरेश चांदवाड परिवार, मंगल कलश स्थापना शकुंतला, अशोक परिवार ने किया। हेमंत सोगानी ने स्वागत उद्बोधन में मंदिर का प्राचीन इतिहास बताया। प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख शास्त्री, मनोज शास्त्री, पंडित भागचंद, पंडित विशाल का सम्मान किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी नेमिचंद्र छाबड़ा नलवाड़ी परिवार ने भेंट की। इस परिवार को संपूर्ण पंच कल्याणक की पूजन सामग्री प्रदान करने का सौभाग्य भी मिला हैं। मंदिर कमेटी ने सभी पुण्यार्जक दान दाता परिवारों का सम्मान किया। संचालन राकेश सेठी ने किया। तत्पश्चात भगवान के माता-पिता, सौधर्म कुबेर, यज्ञनायक सहित मुख्य इंद्र-इंद्राणी, प्रतिंद्र एवं मुख्य पात्रों द्वारा यागमंडल विधान पूजा की गई। दोपहर में गर्भ कल्याणक संस्कार, गोद भराई, रात्रि में आरती के बाद महिला मंडल के मंगलाचरण के बाद अष्टकुमारी द्वारा माता की सेवा आदि कार्यक्रम हुए। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।</p>
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		<title>ध्वजारोहण घटयात्रा से हुआ पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा- गर्भ के संस्कार ज्ञान से जीवन का निर्माण होकर निर्वाण होता हैं  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Feb 2026 11:00:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री आदिनाथ भगवान से 6 भगवान् श्री पदम् प्रभ सबने धर्म का प्रवर्तन किया। एक संयोग है कि श्री महावीर जी और श्री पदम प्रभ अतिशय क्षेत्र हैं। दोनों क्षेत्रों में भूगर्भ से प्रतिमाएं निकली हैं। दोनों स्थानों पर पंडित हँसमुख के साथ चैबीसी का पंच कल्याणक हमारे द्वारा हुआ। यह मंगल धर्म देशना आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री आदिनाथ भगवान से 6 भगवान् श्री पदम् प्रभ सबने धर्म का प्रवर्तन किया। एक संयोग है कि श्री महावीर जी और श्री पदम प्रभ अतिशय क्षेत्र हैं। दोनों क्षेत्रों में भूगर्भ से प्रतिमाएं निकली हैं। दोनों स्थानों पर पंडित हँसमुख के साथ चैबीसी का पंच कल्याणक हमारे द्वारा हुआ। यह मंगल धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में प्रारंभ पंच कल्याणक के प्रथम गर्भ कल्याणक पर धर्मसभा में प्रगट की। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा जयपुर।</strong> प्रतिमा चाहे पाषाण,या रत्न रन की हो, उसमें भगवान के गुणों का संस्कार का आरोपण किए जाते हैं। प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान के समय भोग भूमि थी। बाद में कर्म भूमि प्रारंभ हुई। श्री आदिनाथ भगवान से 6 भगवान् श्री पदम् प्रभ सबने धर्म का प्रवर्तन किया। एक संयोग है कि श्री महावीर जी और श्री पदम प्रभ अतिशय क्षेत्र हैं। दोनों क्षेत्रों में भूगर्भ से प्रतिमाएं निकली हैं। दोनों स्थानों पर पंडित हँसमुख के साथ चैबीसी का पंच कल्याणक हमारे द्वारा हुआ। यह मंगल धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में प्रारंभ पंच कल्याणक के प्रथम गर्भ कल्याणक पर धर्मसभा में प्रगट की। आचार्य श्री ने आगे कहा कि माता जब संस्कारित होगी तभी वह बच्चों को संस्कारित कर सकती है। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी ने गर्भस्थ शिशु को रात्रि भोजन त्याग के उदाहरण से बताया कि माता के गर्भ में दिए धार्मिक ज्ञान संस्कार से ही तीर्थंकर,मुनि, महापुरुष और लौकिक एडवोकेट, डाॅक्टर, सीए इंजीनियर बनते हंै।</p>
<p><strong>पाषाण को परमात्मा बनाने की क्रियाएं की जाएगी</strong></p>
<p>आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने बताया कि तीर्थंकर कुल, जैन धर्म, उच्च मनुष्य गति में माता के विचार, भाव खानपान अच्छा होना चाहिए। गर्भपात कराने के दुष्परिणाम होते हैं। प्राचीन पदमप्रभ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा बाड़ा मंदिर में नूतन चैबीसी का पंच कल्याणक, विश्वशांति महायज्ञ एवं पदम वल्लभ नूतन शिखर पर कलश एवं ध्वज आरोहण कार्यक्रम प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी परंपरा के आचार्य श्री धर्मसागर जी से सन 1969 में दीक्षित 76 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित अनेक साधुओं के पावन सानिध्य में 5 दिवसीय पंच कल्याणक महा महोत्सव बुधवार से शताधिक महिलाओं की कलश घटयात्रा, ध्वजारोहण, भूमि शुद्धि, मंडप उद्घाटन मंगल श्री जी विराजमान मंगल कलश स्थापना, अभिषेक पूजन समस्त आचार्य आर्यिका संघ के मंचासीन होने पर प्रारंभ हुआ। एडवोकेट सुधीर, हेमंत सोगानी, सुरेश सबलावत ने बताया कि आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य पंडित हसमुख जैन धरियावद के निर्देशन में पांच दिवसीय आयोजन में भगवान के पांच कल्याणकों के माध्यम से पाषाण को परमात्मा बनाने की क्रियाएं की जाएगी। बुधवार को प्रातः विशाल घटयात्रा अहिंसा सर्कल से निकाली गई। जिसमें जिनेंद्र प्रभु को प्रतिमा के साथ अश्व, हाथी, बैंड,108 मंगल कलश के साथ हजारों श्रावकगण नगर के मुख्य मार्गो से होकर प्रतिष्ठा स्थल मैदान में बने अयोध्या नगरी नाभिराय पांडाल में पहुंचे।</p>
<p><strong>इन सौभाग्यशालियों ने लिया धर्मलाभ </strong></p>
<p>ध्वजारोहणकर्ता पुष्पा, विवेक आशा काला जयपुर परिवार ने ध्वजारोहण किया। पांडाल उदघाटन सुधांशु ऋतु कासलीवाल परिवार ने किया। मंगलाचरण कीर्ति दीदी ने किया। चित्र अनावरण दीप प्रवज्जलन कमल,नरेश चांदवाड परिवार, मंगल कलश स्थापना शकुंतला, अशोक परिवार ने किया। हेमंत सोगानी ने स्वागत उद्बोधन में मंदिर का प्राचीन इतिहास बताया। प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख शास्त्री, मनोज शास्त्री, पंडित भागचंद, पंडित विशाल का सम्मान किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी नेमिचंद्र छाबड़ा नलवाड़ी परिवार ने भेंट की। इस परिवार को संपूर्ण पंच कल्याणक की पूजन सामग्री प्रदान करने का सौभाग्य भी मिला हैं। मंदिर कमेटी ने सभी पुण्यार्जक दान दाता परिवारों का सम्मान किया। संचालन राकेश सेठी ने किया। तत्पश्चात भगवान के माता-पिता, सौधर्म कुबेर, यज्ञनायक सहित मुख्य इंद्र-इंद्राणी, प्रतिंद्र एवं मुख्य पात्रों द्वारा यागमंडल विधान पूजा की गई। दोपहर में गर्भ कल्याणक संस्कार, गोद भराई, रात्रि में आरती के बाद महिला मंडल के मंगलाचरण के बाद अष्टकुमारी द्वारा माता की सेवा आदि कार्यक्रम हुए। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।</p>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने किया शिवाड़ की ओर विहार : आचार्यश्री और 32 साधुओं को टोंक से श्रद्धालुओं ने दी अश्रुपूरित नेत्रों से विदाई </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhaman_sagar_ji_visited_shivad/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 11:37:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमानसागर जी का अनेक ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान के बाद टोंक नगर से शिवाड़ की ओर 32 साधु सहित शनिवार को विहार किया। प्रातः श्री आदिनाथ जिनालय में आचार्य संघ सान्निध्य में भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; टोंक। उड़ गया पंछी रे ,हरी-भरी डाल से, रोको ना [&#8230;]]]></description>
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<p><strong><em>आचार्य श्री वर्धमानसागर जी का अनेक ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान के बाद टोंक नगर से शिवाड़ की ओर 32 साधु सहित शनिवार को विहार किया। प्रातः श्री आदिनाथ जिनालय में आचार्य संघ सान्निध्य में भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></em></strong></p>
<hr />
<p><strong><em>टोंक।</em></strong> उड़ गया पंछी रे ,हरी-भरी डाल से, रोको ना रोको कोई गुरु को विहार से बैंड डीजे पर भजन गीत की पक्तियां सभी के नेत्रों को सजल कर रही थी। अनेक युवाओं महिलाओं के नेत्रों से आंसू बह रहे थे। प्रसंग था हजारों समाजजनों द्वारा अश्रुपूरित नेत्रों से राजस्थान के राजकीय अतिथि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का चातुर्मास के बाद विदाई का। रमता जोगी, बहता पानी रोकने से भी नहीं रुकता है। वर्ष 2025 के वर्षायोग के बाद आचार्य श्री वर्धमानसागर जी का अनेक ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान के बाद टोंक नगर से शिवाड़ की ओर 32 साधु सहित शनिवार को विहार किया। प्रातः श्री आदिनाथ जिनालय में आचार्य संघ सान्निध्य में भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। नगर से मंगल विहार के पूर्व आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म देशना में बताया कि टोंक जिले में चातुर्मास किया था। अब टोंक में चातुर्मास संपन्न कर टोंक जिले में विहार करेंगे। संघ की भक्ति और श्रद्धा निरंतर बनी रहना चाहिए। 55 वर्ष पूर्व दीक्षागुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी द्वारा दिए गए संस्कारों में वृद्धि हुई है। कमेटी और समाज एक दूसरे के पूरक हैं। श्री आदिनाथ भगवान से लेकर महावीर स्वामी 24 तीर्थंकरों ने धर्म देशना दी है। छोटे-छोटे नियम व्रत से संयम वैराग्य का बड़ा वृक्ष बनता है छोटे नियम से बड़ा परमात्म पद मिलता है। मनुष्य जीवन कीमती है बार-बार नहीं मिलता है। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी का मुख्य सूत्र था। डरो मत, संयम धारण करो। इसलिए देव शास्त्र गुरु की भक्ति आराधना मिथ्यात्व को छोड़कर सम्यक दर्शन प्राप्त कर जीवन को सफल बनाना चाहिए।</p>
<p><strong>ज्ञान रूपी अमृत जिनवाणी का स्वाध्याय रूपी पान करना चाहिए</strong></p>
<p>पवन कंटान अनुसार आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने व्रत संयम, वैराग्य का महत्व बताकर सभी को नियम धारण करने की प्रेरणा दी। मुनिश्री ने प्रवचन में बताया कि में संयम को अंगीकार करना चाहिए। अंजुली में ज्ञान रूपी अमृत जिनवाणी का स्वाध्याय रूपी पान करना चाहिए। जीवन का कल्याण नियम धर्म में वृद्धि होने से होता है। गुरु से व्रत नियम लेना चाहिए। लक्ष्मी धन का उपयोग दो प्रकार से होता है। दान और भोग भोग से धन मिट्टी हो जाता है और दान देने से पुण्य मिलता है। 15 को लगभग 5 किमी विहार कर आहार चर्या सुनील बंसल के निर्माणाधीन भवन पर हुई। दोपहर को 3.3 किमी विहार कर रात्रि विश्राम बनास नदी के पास पॉलिटेक्निक कॉलेज में होगा।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा आपकी भक्ति से हमारा चातुर्मास होना भी अतिशय : टोंक में नित्य पूजन, अभिषेक, प्रभु भक्ति, आराधना सहित साधनाओं का यहां दौर जारी  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/in_tonk_the_cycle_of_daily_worship_abhishek_devotion_to_god_worship_and_meditation_continues_here/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Aug 2025 09:28:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज नगर में विराजित हैं। यहां उनका पावन वर्षायोग जारी है। नित्य पूजन, अभिषेक, प्रभु भक्ति, आराधना सहित साधनाओं का यहां दौर जारी है। आचार्यश्री की मंगल देशना भी नित्य हो रही है। जिसका लाभ धर्मानुरागी श्रावक-श्राविकाएं उठा रहे हैं। टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;  टोंक। आचार्यश्री वर्धमानसागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज नगर में विराजित हैं। यहां उनका पावन वर्षायोग जारी है। नित्य पूजन, अभिषेक, प्रभु भक्ति, आराधना सहित साधनाओं का यहां दौर जारी है। आचार्यश्री की मंगल देशना भी नित्य हो रही है। जिसका लाभ धर्मानुरागी श्रावक-श्राविकाएं उठा रहे हैं। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> टोंक।</strong> आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज नगर में विराजित हैं। यहां उनका पावन वर्षायोग जारी है। नित्य पूजन, अभिषेक, प्रभु भक्ति, आराधना सहित साधनाओं का यहां दौर जारी है। आचार्यश्री की मंगल देशना भी नित्य हो रही है। जिसका लाभ धर्मानुरागी श्रावक-श्राविकाएं उठा रहे हैं। सोमवार को आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने कहा कि प्रभु की भक्ति से आवागमन का रोग भी दूर होता है। सोलह कारण भावना पर्व में आप धर्मसभा में दर्शन विशुद्धि, विनय संपन्नता, शील, अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोग, संवेग शक्तितस्त्याग, शक्तितस्तप आदि भावनाओं की विवेचना श्रवण कर रहे हैं। भगवान के अतिशय में बहुत शक्ति होती है। उन्होंने कहा कि असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। यह हमने 57 वर्ष के संयम काल में स्वयं महसूस किया है। टोंक नगर के अतिशयकारी श्री आदिनाथ भगवान का अतिशय था कि हमारे कदम जल्द ही जल्द टोंक नगर पहुंचे जबकि, हमें भी यह नहीं लग रहा था कि हम चातुर्मास के पहले पहुंच सकते हैं। टोंक नगर के अतिशय युक्त श्री आदिनाथ भगवान के समक्ष यहां के श्रावक-श्राविकाओं की भक्ति से हमारा चातुर्मास यह होना भी अतिशय है। इस क्षेत्र के अतिशय क्षेत्र घोषित होने की मंगल भावना की। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रकट की है।</p>
<p><strong>प्रभु की भक्ति से कष्ट पीड़ा रोग दूर होते हैं</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे कहा कि ऐसा ही वाकया अतिशय क्षेत्र महावीर जी में भी हुआ। जब हम चातुर्मास स्थापना के अंतिम दिवस पर ही पहुंचे थे। श्री महावीर जी अतिशय क्षेत्र के श्री महावीर स्वामी के समक्ष हमारे माता-पिता ने 12 संतानों के अल्पायु में निधन के बाद हमारी लंबी आयु के लिए उल्टा स्वस्तिक बनाकर केश मुंडन की भावना की थी। सन 1969 में हमारी मुनि दीक्षा आचार्य श्री धर्मसागर जी द्वारा महावीर जी में हुई। वहीं केशलोच हुए और सीधा स्वस्तिक हमारे मस्तक पर दीक्षा गुरु ने बनाया। 24 वर्षों के बाद हमारे सानिध्य में महामस्तकाभिषेक होना, दो पंच कल्याणक, 24 फीट के खड्गासन प्रतिमा और नूतन 24 चौबीसी 3 माह में तैयार होना साक्षात अतिशय है। प्रभु की भक्ति से कष्ट पीड़ा रोग दूर होकर सुख और मनोकामना पूर्ण होती है।</p>
<p><strong>अहंकार मायाचारी के बदले विनय गुण होना चाहिए</strong></p>
<p>आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री देशनामति माताजी ने सुख और शांति कैसे प्राप्त होती है। इसकी विवेचना की। पुरुषार्थ करने से पुण्य मिलता है उपवास करने से प्रभु से निकटता होती है। अहंकार मायाचारी के बदले विनय गुण होना चाहिए। आज की धर्मसभा में श्रीजी और पूर्वाचार्यों के चित्र के समक्ष दीप प्रवज्लन कर आचार्यश्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य महावीर जी कमेटी और स्थानीय समाज को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>इनका सम्मान किया गया </strong></p>
<p>अतिशय क्षेत्र महावीर जी कमेटी के अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी के अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल, सुभाष जैन, मंत्री एसके जैन, उमरावमल सांघी, पीके जैन, सुरेश सबलावत का सम्मान चातुर्मास कमेटी ने किया। 55 वर्षों के बाद टोंक नगर को आचार्य श्री के केशलोचन देखने का सौभाग्य मिला।</p>
<p><strong>सोलह कारण पर्व में अनेकों की व्रत साधना जारी </strong></p>
<p>इसके पूर्व प्रातः श्रीजी का पंचामृत अभिषेक आचार्य श्री सानिध्य में हुआ। आचार्य श्री के आहार का सौभाग्य किशनगढ़ के पारस पांड्या परिवार को प्राप्त हुआ। सोलह कारण पर्व में अनेकों की व्रत साधना चल रही है। दोपहर को संघ के अनेक साधुओं द्वारा धार्मिक विषयों पर शिक्षा दी जाती है। शाम को श्रीजी की आरती के बाद आचार्य श्री की आरती उत्साह और भक्ति से की जाती है।</p>
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		<title>देव शास्त्र गुरु के दर्शन विधि और विनय पूर्वक करें:  आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने संयम और दीक्षा का महत्व समझाया </title>
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		<pubDate>Tue, 15 Jul 2025 13:18:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्मसभा के पूर्व श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। पूर्वाचार्यों के चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन का सौभाग्य शांतिधारा परिवार बड़ा तख्ता टोंक, पाद प्रक्षालन का सौभाग्य स्वर्गीय शंकरलाल मोहनी बाई एवं समस्त बाकलीवाल परिवार पांडिचेरी एवं विशेष अष्ट मंगल द्रव्य से पूजन करने का सौभाग्य शांतिधारा परिवार बड़ा तख्ता, टोंक को प्राप्त हुआ। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>धर्मसभा के पूर्व श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। पूर्वाचार्यों के चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन का सौभाग्य शांतिधारा परिवार बड़ा तख्ता टोंक, पाद प्रक्षालन का सौभाग्य स्वर्गीय शंकरलाल मोहनी बाई एवं समस्त बाकलीवाल परिवार पांडिचेरी एवं विशेष अष्ट मंगल द्रव्य से पूजन करने का सौभाग्य शांतिधारा परिवार बड़ा तख्ता, टोंक को प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">टोंक से विकास जैन की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> सभी को देव ,शास्त्र ,गुरु के दर्शन विनय और विधिपूर्वक करना चाहिए, भगवान के समक्ष पांच पुंज,गुरु के समक्ष तीन पुंज और जिनवाणी के समक्ष चार पुंज चढ़ाए जाते हैं। आप अपने अच्छे कार्यों से भगवान भी बन सकते हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने आदिनाथ जिनालय नसिया टोंक में आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति और धर्म की राह अपनाने से भगवान बन सकते हैं जीवन की दिशा परिवर्तित बदलने से दशा बदलती है। आप आचार्य ,उपाध्याय ,साधु परमेष्ठी के जीवन को देखकर ,अपना कर सुख प्राप्त कर सकते हैं। संतों का दर्शन, समागम, अवलंबन जरूरी है। भगवान बनने के लिए संयम और दीक्षा लेना जरूरी है साधु बनने से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। गुर भक्त राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री ने कहा कि आप जहां निवास करते हैं वह निवास स्थाई नहीं है हर पर्याय ,गति में आपके मकान रूपी शरीर बदलते रहते हैं किंतु संसारी प्राणियों को वर्तमान में ही क्षणिक भौतिक सुख अच्छा लगता है। मरने पर परिजन संपदा, सामग्री साथ नहीं जाती धार्मिक धर्म कार्यों से किए गए कार्यों कर्मों अनुसार पुण्य और पाप साथ जाते हैं।</p>
<p><strong>सम्यक दर्शन, ज्ञान और चारित्र के प्रतीक 3 पुंज </strong><br />
इसके लिए आचार्य श्री ने सूत्र दिया कि सभी को भगवान सहित शास्त्र और गुरुओं के दर्शन विधि और विनय पूर्वक करना चाहिए। भगवान के समक्ष 5 पुंज, गुरुओं आचार्य साधु परमेष्ठि समक्ष सम्यक दर्शन, ज्ञान और चारित्र के प्रतीक 3 पुंज और जिनवाणी के समक्ष चार अनुयोग चढ़ाए जाना चाहिए। आपके द्वारा किए जा रहे कार्यों से अगली पर्याय गति नियत होती है आचार्य श्री के उपदेश के पूर्व निवाई गौरव आर्यिकाश्री पूर्णिमा मति माताजी ने धर्म उपदेश ने बताया कि जैन होना,जैन दिखना और जैन बनना में अंतर है जैन सिद्धांतों जिनेन्द्र भगवान की वाणी का पालन करना चाहिए अनछने पानी की एक बूंद में असंख्यात जीव जैन धर्म अनुसार ओर वैज्ञानिक अनुसार एक अनछने बूंद में 36450 जीव होते है।सभी को आचार्य श्री समक्ष छोटे नियम व्रत लेना चाहिए।</p>
<p><strong>शांतिधारा और अभिषेक का किया पुण्यार्जन </strong><br />
प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया धर्मसभा के पूर्व श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। पूर्वाचार्यों के चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन का सौभाग्य शांतिधारा परिवार बड़ा तख्ता टोंक, पाद प्रक्षालन का सौभाग्य स्वर्गीय शंकरलाल मोहनी बाई एवं समस्त बाकलीवाल परिवार पांडिचेरी एवं विशेष अष्ट मंगल द्रव्य से पूजन करने का सौभाग्य शांतिधारा परिवार बड़ा तख्ता, टोंक को प्राप्त हुआ। इस मौके पर सुनील सर्राफ एवं विनोद सर्राफ के मीठे-मीठे मधुर भजनों पर भक्तिमय आराधना की तथा मिट्ठूलाल दाखिया ने जिनवाणी स्तुति की। प्रतिदिन निवाई, जयपुर, कोटा, इंदौर, पांडिचेरी आदि से गुरु भक्त पधारकर धर्म लाभ ले रहे हैं।</p>
<p><strong>यह समाजजन रहे मौजूद </strong><br />
इस मौके पर कमल सर्राफ, नीटू छामुनिया, ओम ककोड़, ज्ञानचंद संघी, उमेश संघी, अम्मू छामुनिया, अंशुल आरटी, अंकित बगड़ी, मुकेश दतवास, सुमित दाखिया, अनिल कंटान, पंकज फूलेता, लोकेश कल्ली, विकास अत्तार, नरेंद्र दाखिया, नरेंद्र अतार, मनीष अतार, सोनू पासरोटियां, पुनीत जागीरदार, गोलू माधोपुरिया, प्रदीप बगड़ी आदि समाज के लोग रहे।</p>
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		<title>श्रावक श्रद्धावान, क्रियावान, विवेकवान हो : आदिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई </title>
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		<pubDate>Mon, 14 Jul 2025 12:29:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्म सभा के पूर्व श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। इसके बाद पूर्वाचार्यों के चित्र अनावरण दीप प्रवज्जलन, आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन और विशेष अष्ट मंगल द्रव्य से पूजन करने का सौभाग्य गुरु भक्त राजेश पंचोलिया इंदौर और चंदनबाला बालिका मंडल एवं पदाधिकारियों को प्राप्त हुआ। टोंक से विकास जैन की पढ़िए, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धर्म सभा के पूर्व श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। इसके बाद पूर्वाचार्यों के चित्र अनावरण दीप प्रवज्जलन, आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन और विशेष अष्ट मंगल द्रव्य से पूजन करने का सौभाग्य गुरु भक्त राजेश पंचोलिया इंदौर और चंदनबाला बालिका मंडल एवं पदाधिकारियों को प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">टोंक से विकास जैन की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> जो श्रद्धावन ज्ञानवान क्रियावान होता है। वह श्रावक होता है। श्रावक में पहला अक्षर होता है श्रा श्रद्धावान है। दूसरा शब्द है व जो ज्ञान का आचरण करता है और तीसरा शब्द है क जो क्रियावान हो अर्थात जो श्रद्धावान ज्ञानवान क्रियावान होता है। वह श्रावक होता है। प्रत्येक श्रावक को अपने भीतर इन तीनों को देखने की आवश्यकता होती है। तभी श्रावक बन सकता है क्योंकि, श्रावक धर्म का परिपालन करते हुए अपने जीवन का उत्थान तो करता ही है लेकिन, उसके ऊपर सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। वह साधु संतों को आहारदान देकर और आहारदान के साथ-साथ अपने जीवन में वैयावृत्य भी बहुत बड़ा कार्य होता है। गुरु भक्त राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने कहा कि उमा स्वामी आचार्य ने कहा कि तप से कर्मों की निर्जरा होती है श्रावक शास्त्र के अनुरूप अपने जीवन को बनाने का प्रयत्न करता है, उसे तो उसका जीवन सार्थक होता है और उसके जीवन में निर्वाह होता है तो मोक्ष की और बढ़ने में सहायक होता है।</p>
<p>आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री शुभमति माताजी ने प्रवचन में बताया कि मनुष्य को वैभव, अच्छी संतान पुण्य से मिलती है। पुण्य से सब कार्य सफल होते हैं। देव गुरु की भक्ति सम्मान करने से आपका भी सम्मान होता है। एक कथा के माध्यम से बताया कि भाग्यहीन के हाथ का स्वर्ण कोयला बन जाता है।</p>
<p><strong>इन्होंने लिया पूजन, अभिषेक और शांतिधारा का लाभ </strong></p>
<p>प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया कि धर्म सभा के पूर्व श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। इसके बाद पूर्वाचार्यों के चित्र अनावरण दीप प्रवज्जलन, आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन और विशेष अष्ट मंगल द्रव्य से पूजन करने का सौभाग्य गुरु भक्त राजेश पंचोलिया इंदौर और चंदनबाला बालिका मंडल एवं पदाधिकारियों को प्राप्त हुआ। इस मौके पर सुनील सर्राफ एवं विनोद सर्राफ के मीठे-मीठे मधुर भजनों पर भक्तिमय आराधना की मंगलाचरण रचना टोरडी अंजना मंडावर के द्वारा की गई। प्रवचन के पूर्व कोलकाता चिरंजीलाल बगड़ा संपादक दिशाबोध का विशेष सम्मान किया गया। प्रतिदिन निवाई, जयपुर, भीलवाड़ा, कोटा, इंदौर, कलकत्ता आदि से गुरु भक्त पधारकर धर्म लाभ ले रहे हैं।</p>
<p><strong>यह रहे मौजूद </strong></p>
<p>इस मौके पर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष भागचंद फूलेता, धर्मचंद दाखिया, मंत्री राजेश सर्राफ, धर्मेंद्र पासरोटिया, कमल आंडरा, कमल सर्राफ, मिट्ठू लाल दाखिया, नीटू छामुनिया, ओम ककोड़, सुनील सर्राफ, नरेंद्र दाखिया, मनीष शिवाड़िया, महावीर पासरोटियां, महावीर दाखिया, ज्ञानचंद दाखिया, पंकज फूलेता, लोकेश कल्ली, आदि समाज के लोग उपस्थित रहे।</p>
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		<title>सम्मान धर्म धारण करने से मिलता है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्रद्धालुओं को दिया उपदेश  </title>
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		<pubDate>Mon, 14 Jul 2025 06:02:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। पूर्वाचार्यों के चित्र अनावरण दीप प्रवज्लन एवं पाद प्रक्षालन पदमपुरा पदयात्रा संघ के सदस्यों ने किया।आचार्य श्री का संगीतमय पूजन पदमपुरा पदयात्रा संघ के सदस्यों ने किया। टोंक से पढ़िए, विकास जैन की यह खबर&#8230; टोंक। वर्तमान भौतिक युग में व्यसन, फैशन, दूषित खानपान ,रहन-सहन ,वेशभूषा का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। पूर्वाचार्यों के चित्र अनावरण दीप प्रवज्लन एवं पाद प्रक्षालन पदमपुरा पदयात्रा संघ के सदस्यों ने किया।आचार्य श्री का संगीतमय पूजन पदमपुरा पदयात्रा संघ के सदस्यों ने किया। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, विकास जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> वर्तमान भौतिक युग में व्यसन, फैशन, दूषित खानपान ,रहन-सहन ,वेशभूषा का देव शास्त्र और गुरु के समक्ष ध्यान रखना जरुरी है। प्रतिदिन देव दर्शन करना, पानी छानकर पीना और रात्रि भोजन नहीं करना यह जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांत हैं। भगवान की वाणी का उल्लंघन करने से पुण्य नहीं मिलता है ,आप दुखी रहते हैं। जीवन की सार्थकता तभी होगी जब आपका खानपान रहन-सहन ,वेशभूषा और भगवान के प्रति विनय होना चाहिए सम्मान धर्म धारण करने से मिलता हैं ,धर्म आपको सम्मानित कराता है। तीर्थ स्वयं बनते हैं बनाएं नहीं जाते हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने टोंक नगर में आयोजित धर्म सभा में महती उपस्थिति में प्रकट की।</p>
<p><strong>शास्त्रों की वाणी मानने वाले परम भक्त होते हैं</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने एक श्लोक की विवेचना कर बताया कि प्रतिदिन आप कैसे चलते हैं ,कैसी चेष्टा करते हैं ,कैसे बैठते हैं ,कैसे सोते हैं ,कैसे बोलते हैं जिससे इन कार्यों से आपका पाप का बंध आश्रव नहीं हो, इसका कभी किसी ने चिंतन नहीं किया। बहुत ही कठिनाई से अर्जित पुण्य से तीर्थंकरों का जैन मनुष्य भव मिला है। जिसमें तीर्थंकरों द्वारा प्रतिपादित धर्म की वाणी गुरुजनों से सुनने को मिल रही है। शास्त्रों की वाणी मानने वाले परम भक्त होते हैं आपके द्वारा किए जाने वाले कार्यों से पुण्य और पाप मिलता हैं धर्म और सुख किसी दुकान पर नहीं मिलता है। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री प्रभव सागर जी ने प्रवचन में बताया कि भगवान के दर्शन अभिषेक पूजन जैसे द्रव्यों और जिस भाव से करते है उस अनुसार फल पुण्य या पाप सुख या दुःख अर्जित होता हैं।</p>
<p><strong>संगीतमय पूजन किया अभिषेक हुआ</strong></p>
<p>प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया कि धर्म सभा के पूर्व श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। तत्पश्चात पूर्वाचार्यों के चित्र अनावरण दीप प्रवज्लन एवं पाद प्रक्षालन पदमपुरा पदयात्रा संघ के सदस्यों के द्वारा किया गया एवं आचार्य श्री की संगीतमय पूजन पदमपुरा पदयात्रा संघ के सदस्यों द्वारा किया गया। सेजल नेहल प्रांजल</p>
<p>मिट्ठू लाल जी विनोद जी तोषित जी दाखिया परिवार ने ताड़ पत्रों को सुरक्षित करने के लिए 1 लाख रुपए की राशि 10 वर्षों तक 10 लाख रुपए देने की घोषणा की । आचार्य श्री जब से संघ सहित विराजित हैं प्रतिदिन बूंदी, देई, नैनवा, बांसी, बनेठा, बोली, भीलवाड़ा ,कोटा और अन्य स्थान से 500-600 भक्त पधारकर धर्म लाभ ले रहे हैं। शाम को समस्त पुरुष महिलाओं,युवा युवतियों और विभिन्न धार्मिक संगठनों को मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने उपयोगी मार्गदर्शन दिया।आचार्य संघ के आगमन से नगर धर्ममय हो गया हैं ।</p>
<p><strong>यह समाजजन रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस मौके पर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष भागचंद फूलेता, धर्मचंद दाखिया, मंत्री राजेश सर्राफ, धर्मेंद्र पासरोटिया, कमल आंडरा, कमल सर्राफ, सुरेश (पप्पू), मिट्ठू लाल दाखिया, नीटू छामुनिया,ओम ककोड़, मनीष शिवाड़िया, टोनी आंडरा, कमलेश कल्ली, पंकज फूलेता,लालचंद फूलेता, लोकेश कल्ली, आदि समाज के लोग रहे।</p>
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