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	<title>श्रमण डॉ पुष्पेन्द्र &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>श्रमण डॉ पुष्पेन्द्र &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>राजस्थान सरकार का फैसला: संवत्सरी पर्व को बंद रहेंगे पशुवध गृह व मांस की दुकानें </title>
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		<pubDate>Sat, 07 Sep 2024 08:22:56 +0000</pubDate>
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<p><strong>राजस्थान सरकार ने राज्य में स्थित पशुवध गृह व मांस &#8211; मछली की दुकानें बंद रखने के संबंध में आदेश जारी किया है। इसके तहत सितम्बर में दो दिन ये दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र व समग्र जैन युवा परिषद के अध्यक्ष जिनेंद्र जैन ने 24 अगस्त को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लिखे पत्र में उनसे यह माँंग की थी <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान सरकार ने राज्य में स्थित पशुवध गृह व मांस &#8211; मछली की दुकानें बंद रखने के संबंध में आदेश जारी किया है। इसके तहत सितम्बर में दो दिन ये दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र व समग्र जैन युवा परिषद के अध्यक्ष जिनेंद्र जैन ने 24 अगस्त को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लिखे पत्र में उनसे यह माँंग की थी जिस पर स्वायत्त शासन विभाग (राज.) जयपुर के निदेशक एवं संयुक्त सचिव सुरेश कुमार ओला ने दिनांक 5 सितम्बर को आदेश जारी किया। जारी आदेशानुसार राज्य के सभी नगर निकायों- संबंधित अधिकारियों को 8 सितंबर को संवत्सरी पर्व और 17 सितंबर अनंत चतुर्दशी पर राज्य में पशुवध गृह और मांस &#8211; मछली की दुकानें बंद रखवाने का आदेश दिया गया है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि जैन धर्म के अनुसार भाद्र मास में पर्युषण पर्व को अति पवित्र माना जाता है। इस दौरान जैन धर्मावलंबियों द्वारा विशेष पूजा आराधना, व्रत, उपवास, संयम साधना व धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। तब मूक पशुओं का वध कर उनके मांस का विक्रय करने से जैन समाज की निर्मल भावनाएं आहत होती हैं। पर्युषण जैन सम्प्रदाय का सबसे महत्वपूर्ण महापर्व है। जियो और जीने दो यह मूल मंत्र है। जैन धर्म में अहिंसा को बहुत ही सूक्ष्म रूप में प्रतिरूपित किया है। श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र ने सकल जैन समाज की और से संवेदनशील मुख्यमंत्री का इस ऐतिहासिक निर्णय पर आभार व्यक्त किया व अहिंसा प्रेमियों से आह्वान किया कि राज्य में इस आदेश की पालना सुनिश्चित करवाएं।</p>
<p><strong>आदेशों की हो सख्ती से पालना &#8211; सरकार</strong></p>
<p>वहीं आदेश जारी करते हुए राजस्थान के यूडीएच विभाग ने कहा है कि सभी नगर निकाय अपने इलाके में निर्देशों की सख्ती से पालना करवाए. इसके अलावा कहा गया है कि अगर कहीं आदेशों का उल्लंघन किया जाता है तो उसके खिलाफ नियम के मुताबिक उचित कार्रवाई की जाएगी. मालूम हो कि राजस्थान में काफी संख्या में जैन समुदाय के लोग रहते हैं ऐसे में सरकार ने उनके पर्व को देखते हुए आदेश जारी किए हैं।</p>
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		<title>पर्युषण महापर्व एक सितम्बर से प्रारम्भ : आत्मा की शुद्धि के लिए करेंगे तप व जप </title>
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		<pubDate>Thu, 29 Aug 2024 08:51:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के पर्युषण पर्व मनुष्य को उत्तम गुण अपनाने की प्रेरणा हैं। इन दिनों जैन धर्मावलंबी व्रत, तप, साधना कर आत्मा की शुद्धि का प्रयास करते हैं और स्वयं के पापों की आलोचन करते हुए भविष्य में उनसे बचने की प्रतिज्ञा करते हैं। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य आत्मा को शुद्ध बनाने के लिए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के पर्युषण पर्व मनुष्य को उत्तम गुण अपनाने की प्रेरणा हैं। इन दिनों जैन धर्मावलंबी व्रत, तप, साधना कर आत्मा की शुद्धि का प्रयास करते हैं और स्वयं के पापों की आलोचन करते हुए भविष्य में उनसे बचने की प्रतिज्ञा करते हैं। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य आत्मा को शुद्ध बनाने के लिए आवश्यक उपक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना होता है। <span style="color: #ff0000">श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र का विशेष आलेख&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p>जैन धर्म के पर्युषण पर्व मनुष्य को उत्तम गुण अपनाने की प्रेरणा हैं। इन दिनों जैन धर्मावलंबी व्रत, तप, साधना कर आत्मा की शुद्धि का प्रयास करते हैं और स्वयं के पापों की आलोचन करते हुए भविष्य में उनसे बचने की प्रतिज्ञा करते हैं। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य आत्मा को शुद्ध बनाने के लिए आवश्यक उपक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना होता है। जैन धर्म में सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है पर्युषण महापर्व। श्वेतांबर व दिगंबर समुदाय के धर्मावलंबी भाद्रपद मास में “पर्युषण महापर्व” की साधना &#8211; आराधना करते है। श्वेतांबर समुदाय के आठ दिवस को “पर्युषण” के नाम से जाना जाता है जो कि दिनांक 1 सितम्बर से प्रारम्भ होंगें तथा 8 सितम्बर को “संवत्सरी महापर्व” (क्षमापर्व) के दिवस के साथ पूर्ण होंगे। वहीं दिगम्बर समुदाय के दस दिवसों को “दस लक्षण पर्व” के नाम से जाना गया हो जो कि 8 सितंबर से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी 17 सितंबर को समाप्त होंगे।</p>
<p>चातुर्मास प्रारम्भ के उनपचास(49) या पचासवें (50) दिवस पर संवत्सरी पर्व की साधना की जाती है। इसी क्रम में देश के विविध अंचलों चातुर्मासरत श्रमण &#8211; श्रमणियों के पावन सान्निध्य में जैन धर्मावलम्बि तप &#8211; त्याग &#8211; साधना &#8211; आराधना पूर्वक इस महापर्व को मनाएगें। इन दिवसों में जैन अनुयायियों के मुख्यतया पांच प्रमुख अंग हैं स्वाध्याय, उपवास, प्रतिक्रमण, क्षमायाचना और दान। पर्युषण पर्व के दौरान प्रतिदिन जैन स्थानकों में स्वाध्याय के रूप में निरंतर धार्मिक प्रवचन होंगे। जो कि प्रातःकाल होगें। इसमें सर्वप्रथम जैन आगम सूत्र “अन्तकृत दशांग सूत्र” का प्रतिदिन मूल व भावार्थ के साथ वाचन पश्चात् स्वाध्याय के विशिष्ट गुणों, सेवा, संयम, साधना, ध्यान, सद् व्यवहार पर प्रवचन होंगे। प्रतिदिन सुबह व सांयकाल प्रतिक्रमण होंगे जो आत्मशुद्धि के लिए नितांत आवश्यक हैं। आठवें दिवस संवत्सरी महापर्व पर विस्तृत स्व आलोचना का पाठ होगा जिसमें जीवन भर के अंदर होने वाली पाप प्रवृत्तियों का उल्लेख करते हुए आत्मालोचना कर “मिच्छामि दुक्कड़म्” किया जाएगा।</p>
<p><strong>सादा भोजन व सादगी पूर्ण जीवन व्यतीत करेंगे &#8211;</strong></p>
<p>पर्युषण महापर्व के दौरान जैन धर्मावलम्बि सादे भोजन पर जोर देते है है जो कि बिना हरी सब्जियों के बनाया जाएगा। इसका मुख्य कारण यह है कि स्वाद आसक्ति का त्याग जैन धर्म में प्रमुख तौर पर बताया गया है उसी के अनुरूप जैन अनुयायी इसका पालन करते है। सूर्यास्त होने के बाद भोजन भी नहीं करेंगे। अधिक से अधिक सादगी &#8211; त्याग पूर्वक जीवन यापन करेगें।</p>
<p><strong>पर्युषण का अर्थ आत्मचिंतन और नवीनीकरण का उत्सव &#8211;</strong></p>
<p>श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र ने बताया कि पर्युषण पर्व जिसे क्षमा पर्व के नाम से भी जाना जाता है, पर्युषण का अर्थ दो शब्दों परि (स्वयं को याद करना) और वासन (स्थान) से लिया गया है. इसका मतलब है कि इस उत्सव के दौरान सभी जैन एक साथ आते हैं और अपने मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए एक साथ उपवास और ध्यान करते हैं. जैन धर्म में अहिंसा एवं आत्मा की शुद्धि को सर्वोपरि स्थान दिया गया है. मान्यता है कि प्रत्येक समय हमारे द्वारा किये गये अच्छे या बुरे कार्यों से कर्म बंध होता है, जिनका फल हमें भोगना पड़ता है. शुभ कर्म जीवन व आत्मा को उच्च स्थान तक ले जाते हें, वही अशुभ कर्मों से हमारी आत्मा मलिन होती है. जिसको पवित्र व स्वच्छ करने के लिए पर्युषण पर्व की आराधना की जाती है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि श्वेतांबर जैन समुदाय में पर्युषण पर्व का आरंभ भादौ के कृष्ण पक्ष से ही होता है जो भादौ के शुक्ल पक्ष पर संवत्सरी से पूर्ण होता है। यह इस बात का संकेत है कि कृष्ण पक्ष यानी अंधेरे को दूर करते हुए शुक्ल पक्ष यानी उजाले को प्राप्त कर लो। हमारी आत्मा में भी कषायों अर्थात क्रोध &#8211; मान &#8211; माया &#8211; लोभ का अंधेरा छाया हुआ है। इसे पर्युषण के पवित्र प्रकाश से दूर किया जा सकता है।</p>
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		<title>सम्प्रदाय विशेष तक सीमित नहीं जैन धर्म - दिनेश मुनि सम्प्रदाय विशेष तक सीमित नहीं जैन धर्म &#8211; दिनेश मुनि </title>
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		<pubDate>Fri, 12 Apr 2024 14:31:05 +0000</pubDate>
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<p><strong>श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि ने कहा कि आज देश में सम्प्रदायवाद बढ़ रहा है।जैन धर्म किसी सम्प्रदाय तक सीमित नहीं है।आतंकवाद बढ़ रहा है। समाज-परिवार में संस्कारों का पतन हो रहा है। इन्हीं समस्याओं के प्रति सजग करने और लोगों के विचारों में बदलाव लाने के लिए जैन साधु-संत क्षेत्रों में जाकर प्रवचनों के माध्यम से अध्यात्म का ज्ञान फैला रहे हैं।<span style="color: #ff0000">पढ़िए विशेष रिपोर्ट …… </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर l</strong> श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि ने कहा कि आज देश में सम्प्रदायवाद बढ़ रहा है। आतंकवाद बढ़ रहा है। समाज-परिवार में संस्कारों का पतन हो रहा है। इन्हीं समस्याओं के प्रति सजग करने और लोगों के विचारों में बदलाव लाने के लिए जैन साधु-संत क्षेत्रों में जाकर प्रवचनों के माध्यम से अध्यात्म का ज्ञान फैला रहे हैं।उक्त विचार श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि ने सिविल लाइन्स स्थित फतेहचंद स्मृति जैन स्थानक में श्रद्धालुओं से धर्म चर्चा करते हुए व्यक्त किए।</p>
<p><strong>जीवन मूल्य बनें रहें</strong></p>
<p>उन्होंने बताया कि हमारा वर्तमान समय बड़ी ही तेजी से बदल रहा है। बीते कल में और आज में कितना परिवर्तन आ गया है यह जब सब जानते ही हैं और होते हुए परिवर्तन को भी देख ही रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बदलाव में इतना ध्यान रखें कि हमारे जीवन मूल्य बनें रहें। हमारी मानसिक शांति कायम रहे, हमारी वैचारिक पद्धति स्वस्थ रहे,हमारी परम्पराएं स्पष्ट और लोकहितकारी हों,हमारी जीवन पद्धति निर्दोष बनें। डॉ द्वीपेन्द्र मुनि, श्रमण डॉ पुष्पेन्द्र ने भी अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर आयोजना,आयोजना (जन शक्ति और गजेटियर्स) एवं सांख्यिकी विभाग के शासन सचिव नवीन जैन ने अपने द्वारा लिखी पुस्तक वैक्सीन 50 मुनिवरों को भेंट की। सलाहकार दिनेश मुनि ने भी शासन सचिव आयोजना विभाग एवं महामहिम राज्यपाल के निजी सचिव एवं महामहिम राज्यपाल आसाम की धर्मपत्नि को हमारे गणधर व हमारे श्रावक दोनों साहित्यों को भेंट किया।इस अवसर पर आयोजना एवं सांख्यिकी विभाग के शासन सचिव नवीन जैन,महामहिम राज्यपाल आसाम की धर्मपत्नि अनिता जी कटारिया,महामहिम राज्यपाल के विशिष्ट सहायक ज्ञान चन्द जैन, राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के संरक्षक अशोक बांठिया, अध्यक्ष जिनेन्द्र जैन,गौरव जैन,रेणु जैन,रौनक बाफना आदि उपस्थित रहे।</p>
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