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	<title>श्याम नगर जयपुर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>श्याम नगर जयपुर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जीवन में अनुशासन संस्कार से होती है सुख शांति : आचार्य श्री वर्धमान सागरजी ने श्यामनगर में दी मंगल देशना  </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:49:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्याम नगर जयपुर के आदिनाथ मंदिर में प्रवचन में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मैत्री, अनुशासन, संस्कार, जीवन शैली में बदलाव आदि बातों पर उपदेश में बताया कि सभी जीवों से मैत्री” छोटा हो या बड़ा, मनुष्य हो या तिर्यंच (पशु-पक्षी) देव हो या अन्य जीव सबके प्रति एक ही भावना-सभी सुखी रहें। जयपुर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्याम नगर जयपुर के आदिनाथ मंदिर में प्रवचन में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मैत्री, अनुशासन, संस्कार, जीवन शैली में बदलाव आदि बातों पर उपदेश में बताया कि सभी जीवों से मैत्री” छोटा हो या बड़ा, मनुष्य हो या तिर्यंच (पशु-पक्षी) देव हो या अन्य जीव सबके प्रति एक ही भावना-सभी सुखी रहें। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर</strong>। श्याम नगर जयपुर के आदिनाथ मंदिर में प्रवचन में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मैत्री, अनुशासन, संस्कार, जीवन शैली में बदलाव आदि बातों पर उपदेश में बताया कि सभी जीवों से मैत्री” छोटा हो या बड़ा, मनुष्य हो या तिर्यंच (पशु-पक्षी) देव हो या अन्य जीव सबके प्रति एक ही भावना-सभी सुखी रहें। मित्रता सीमित होती है (कुछ लोगों तक), उसमें शत्रुता भी हो सकती है लेकिन मैत्री सर्वव्यापी (सबके लिए) इसमें किसी के प्रति बैर नहीं होता। घर से ही शुरू होती है साधना हम बाहर तो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन घर में ही झगड़े होते हैंपति-पत्नी में मतभेद परिवार में टकराव जब घर में शांति नहीं तो बाहर की बातें व्यर्थ हैं।</p>
<p><strong>पहले सादगी थी मर्यादा थी</strong></p>
<p>सुरेश सबलावत ने बताया कि आचार्य श्री ने आगे कहा कि अनुशासन जीवन शास्त्र के अनुसार चलना चाहिए। जब जीवन में अनुशासन होगा तब ही सुख और शांति आएगी। बिना अनुशासन टकराव और अशांति निश्चित है। हमारी जीवन शैली भी बदल गई है। चूल्हा, गैस से श्रम कम होकर आराम होकर व्यायाम के अभाव में शरीर कमजोर (जैसे घुटनों की समस्या) हो रहा है। अपने घर का वातावरण कैसा है? शांति है या तनाव? संस्कार हैं या केवल सुविधा? पहले सादगी थी,मर्यादा थी ,आज टीवी, मोबाइल, सुविधाएँ लेकिन, इनका सही उपयोग ही लाभकारी है। बच्चों को कैसे संस्कारित करें। बच्चों को उपदेश से नहीं अपने आचरण से सिखाएं खुद मोबाइल छोड़ेंगे,बच्चे सीखेंगे, खुद संयम रखेंगे, बच्चे अपनाएंगे। भोजन करते समय ध्यान होना चाहिए तभी स्वाद और स्वास्थ्य दोनों मिलते हैं। जब आपका जीवन आदर्श बनेगा लोग अपने आप प्रेरित होंगे धर्म केवल बोलने की चीज नहीं जीने की चीज है।</p>
<p><strong>अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने के उद्देश्य से एकत्रित हुए हैं</strong></p>
<p>मैत्री भाव अपनाओ घर से शुरुआत करो बच्चों को आचरण से सिखाओ याद रखें। पहले स्वयं बनो, फिर संसार बदलेगा संघस्थ आर्यिका महायशमती माताजी ने प्रवचन में श्रावक, श्राविकाओं के कर्तव्य, आने वाली पीढ़ी के प्रति दायित्व, देव दर्शन धर्म के संस्कार आदि पर सरल भाषा में प्रभावी उपदेश में बताया कि आप सभी यहां अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने के उद्देश्य से एकत्रित हुए हैं। जब से आचार्य श्री का जयपुर महानगर में पदार्पण हुआ है, तब से निरंतर ज्ञान की गंगा प्रवाहित हो रही है और आप सभी उस ज्ञान में डुबकी लगाकर अपने जीवन को पावन बना रहे हैं। श्रावक-श्राविकाओं के मुख्य कर्तव्य हैं-देव पूजा, गुरु भक्ति (वैयावृत्य)। श्याम नगर में यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता होती है कि यहां जिनागम अनुसार अभिषेक, पूजन और आराधना की परंपरा निरंतर चल रही है। आने वाली पीढ़ी के लिएअब हमारा कर्तव्य है कि अपने बच्चों को धर्म से जोड़ें। उन्हें प्रतिदिन जिनेंद्र भगवान के दर्शन कराएं ।</p>
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		<title>सुख और दु:ख कर्मों के अधीन है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अक्षय तृतीया और दान दिवस का महत्व बताया </title>
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		<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 18:28:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म देशना देते हुए कहा कि अक्षय तृतीया पर आहार दान देने से प्राप्त पुण्य भी अक्षय होता है। आहार दान में चारों दान शामिल होते हैं। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म देशना देते हुए कहा कि अक्षय तृतीया पर आहार दान देने से प्राप्त पुण्य भी अक्षय होता है। आहार दान में चारों दान शामिल होते हैं। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित हैं। रविवार को उपदेश में बताया कि सुख और दु:ख कर्मों के अधीन हैं। मनुष्य जन्म तीर्थंकरों का जैन कुल है। जिसमें आपने धर्म प्राप्त किया। जन्म और मृत्यु आयु कर्म अनुसार होती हैं। आत्म हत्या गलत है। इस कारण अगले जन्म में आयु कम होती है। श्री ऋषभदेव महा मुनिराज ने 6 माह तक योग धारण कर उपवास किया। उसके बाद भ्रमण कर हस्तिनापुर में 6 माह के बाद अक्षय तृतीया पर राजा श्रेयांश ने पिछले जन्म के स्मृति जाति स्मरण होने पर नवधाभक्ति पूर्वकआहारदान दिया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्याम नगर प्रवचन में बताया कि प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने जब सन 1915 में क्षुल्लक दीक्षा धारण की तो श्रावकों को नवधा भक्ति का ज्ञान नहीं होने से कई दिनों तक उन्हें भी आहार नहीं मिला। आचार्य श्री शांतिसागर जी का दूध रस के अतिरिक्त अन्य पांच रसों का त्याग था। सुरेश सबलावत और राजेश सेठी के अनुसार आचार्य श्री ने आगे प्रवचन में बताया कि तीर्थंकर भगवान धर्मतीर्थ का प्रवर्तन करते हैं। उसी प्रकार राजा श्रेयांश ने प्रथम तीर्थंकर महा मुनिराज को दान देकर दान तीर्थ का प्रवर्तन किया। धर्म कार्य के पुण्य से भौतिक सुख समृद्धि सुख शांति प्राप्त होती है। धन की तीन गति होती है दान करो, उपभोग करो या नष्ट होता है। अक्षय तृतीया पर आहार दान का पुण्य भी अक्षय होता है जिनालय बनाना ,शास्त्र दान, शास्त्र छपवाना से भी ज्यादा महत्वपूर्ण आहार दान है क्योंकि इस आहार दान अभय दान, औषधि दान,शास्त्र दान सभी दान शामिल होते हैं। इसलिए दान का महत्व समझकर दान देकर मनुष्य जीवन को सार्थक करने का प्रयास करें।</p>
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		<title>भाव पूर्वक किए नमोस्तु से जीवन के दुःख होते हैं समाप्त : मुनि श्री हितेन्द्र सागर जी ने प्रवचन में बताया बच्चों में संस्कार जरूरी है </title>
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		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 12:54:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित श्याम नगर जयपुर में विराजित हैं। तीन दिवसीय स्वयंभू विधान का समापन शुक्रवार को हुआ। धर्मसभा में मुनि श्री हितेंद्रसागर जी ने पुण्य, संस्कार और नमोस्तु का महत्व बताया। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित श्याम नगर जयपुर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित श्याम नगर जयपुर में विराजित हैं। तीन दिवसीय स्वयंभू विधान का समापन शुक्रवार को हुआ। धर्मसभा में मुनि श्री हितेंद्रसागर जी ने पुण्य, संस्कार और नमोस्तु का महत्व बताया। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित श्याम नगर जयपुर में विराजित हैं। तीन दिवसीय स्वयंभू विधान का समापन शुक्रवार को हुआ। धर्मसभा में मुनि श्री हितेंद्रसागर जी ने पुण्य, संस्कार और नमोस्तु का महत्व बताया। राजा सिद्धार्थ पहले भी थे, लेकिन उन्हें सीमित लोग ही जानते थे परन्तु, जिस दिन उनके घर वर्धमान महावीर का जन्म हुआ। उसी दिन से तीनों लोकों में सिद्धार्थ की पूजा होने लगी। पुण्यवान संतान के कारण पिता भी पूज्य बन जाता है। इसलिए जीवन में सबसे जरूरी है पुण्य का संचय। बच्चों में संस्कार क्यों जरूरी हैं? आज के बच्चे मंदिर और धर्म से दूर हो रहे हैं। कारण, उन्हें बचपन से गुरुओं और मंदिर से नहीं जोड़ा जाता। मिथ्यात्व (गलत दृष्टि) के साथ जन्म लेते हैं। सुरेश सबलावत के अनुसार मुनि श्री ने कहा किबच्चों को बार-बार मंदिर लाओ, गुरु के पास बैठाओ, सही वातावरण दो वैसे ही सही जगह ले जाना माता-पिता की जिम्मेदारी है।</p>
<p><strong>बच्चों को धर्म से जोड़ो, वही भविष्य बनाता है </strong></p>
<p>अक्षय तृतीया और नमोस्तु का महत्व प्रतिपादित कर मुनि श्री ने बताया कि अक्षय तृतीया का दिन अत्यंत पुण्यदायक है। भगवान आदिनाथ को 12 महीने से अधिक के बाद आहार मिला और पहली बार “नमोस्तु” का उच्चारण हुआ। वह नमोस्तु अक्षय (कभी समाप्त न होने वाला) बन गया।इस दिन किया गया नमोस्तु भी अक्षय हो जाता है भावपूर्वक किया गया। नमोस्तु जीवन के दःुख मिटा सकता है सच्चा नमोस्तु कैसे करें। इसकी सरल भाषा में विवेचना कर बताया कि नमोस्तु केवल शब्द नहीं है, यह भाव है। आवश्यक है, मन, वचन और काया की एकाग्रता पूर्ण श्रद्धा और समर्पण। यदि एक बार भी सच्चे भाव से नमोस्तु हो जाए तो जीवन के अनेक दःुख समाप्त हो सकते हैं। अंतिम संदेश पुण्य कमाओ, वही जीवन को ऊँचा उठाता है। बच्चों को धर्म से जोड़ो, वही भविष्य बनाता है नमोस्तु को भाव से करो, वही जीवन बदल देता है सिर्फ मेहनत से नहीं, सही भाव से जीवन सफल होता है।</p>
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		<title>देव शास्त्र गुरु की शरण ही सच्ची शरण: आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ने कहा कि आचार्य परमेष्ठी हमें आत्म कल्याण का मार्ग दिखाते हैं </title>
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		<pubDate>Sun, 12 Apr 2026 08:51:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित हैं। आज कीे धर्मसभा में प्रवचन में बताया गया कि भगवान, गुरु और धर्म की शरण ही जीवन की सच्ची शरण है। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230; जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित हैं। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित हैं। आज कीे धर्मसभा में प्रवचन में बताया गया कि भगवान, गुरु और धर्म की शरण ही जीवन की सच्ची शरण है। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>जयपुर।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित हैं। आज कीे धर्मसभा में प्रवचन में बताया गया कि भगवान, गुरु और धर्म की शरण ही जीवन की सच्ची शरण है। संसार के सभी संबंध और साधन अस्थायी हैं, जबकि आत्मा शाश्वत है। हम सभी नमस्कार महामंत्र का जाप करते हैं, पर उसके गूढ़ अर्थ को समझना भी आवश्यक है। सुरेश सबलावत ने बताया कि आचार्य श्री ने कहा कि यह मंत्र पंच परमेष्ठी, अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु की वंदना है, जो हमें आत्मकल्याण का मार्ग दिखाते हैं। सच्चा मंगल केवल बाहरी कार्यों (जैसे विवाह आदि) में नहीं, बल्कि धर्म, संयम और आत्मचिंतन में है। भगवान की भक्ति के साथ विनय (नम्रता) और सही आचरण भी जरूरी है। हमें यह समझना चाहिए कि हर छोटे से छोटे जीव में भी आत्मा है, इसलिए सभी के प्रति करुणा और समान भाव रखना चाहिए। यह शरीर आत्मा का मंदिर है और मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभ एवं मूल्यवान है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री के दर्शन के लिए भक्त पधार रहे हैं</strong></p>
<p>पूर्वाचार्यों की परंपरा और आगम हमारे मार्गदर्शक हैं, जिन्हें हमें बनाए रखना चाहिए। धर्म के मार्ग में स्त्री और पुरुष दोनों का समान अधिकार और सहभाग है। अतः हमें लज्जा, मर्यादा, भक्ति और सही आचरण के साथ जीवन जीते हुए भगवान की शरण में रहकर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। प्रतिदिन अनेक नगरों से आचार्य श्री के दर्शन के लिए भक्त पधार रहे है। उदयपुर के विधायक ताराचंद जैन एवं श्राविका रत्न 6 प्रतिमा व्रत धारी सुशीला अशोक पाटनी आरके मार्बल किशनगढ़ दर्शन के लिए पधारे।</p>
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