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	<title>शाश्वत तीर्थ अयोध्या &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में चिंतन बैठक संपन्न : भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी ने लिए कई निर्णय  </title>
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		<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:31:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शाश्वत तीर्थ अयोध्या में भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगंबर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, रायगंज में 10 मई को भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की चिंतन बैठक गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के ससंघ सान्निध्य में हुई। शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष को अत्यन्त प्रभावशाली प्रभावनापूर्वक किए जाने के संदर्भ में सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में यह मीटिंग [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगंबर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, रायगंज में 10 मई को भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की चिंतन बैठक गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के ससंघ सान्निध्य में हुई। शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष को अत्यन्त प्रभावशाली प्रभावनापूर्वक किए जाने के संदर्भ में सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में यह मीटिंग की गई। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, उदयभान जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> शाश्वत तीर्थ अयोध्या में भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगंबर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, रायगंज में 10 मई को भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की चिंतन बैठक गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के ससंघ सान्निध्य में हुई। शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष को अत्यन्त प्रभावशाली प्रभावनापूर्वक किए जाने के संदर्भ में सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में यह मीटिंग की गई। बैठक का शुभारंभ प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन मंत्री उत्तरप्रदेश-उत्तरांचल तीर्थक्षेत्र कमेटी के मंगलाचरण से शुभारंभ हुआ एवं कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलन उपस्थित वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा किया गया। जिसमें मुख्यरूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन, महामंत्री संतोष पेंढ़ारी, कोषाध्यक्ष अशोक दोशी एवं समस्त आंचलीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पदाधिकारियों ने किया। जम्बू प्रसाद ने एक सशक्त योजना के द्वारा तीर्थक्षेत्र कमेटी के इस 125 वर्षीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। जिसमें उन्होंने बहुआयामी विविध आयोजनों द्वारा कार्यक्रम को मनाने की एक योजना प्रस्तुत की। जवाहरलाल जैन (चेयरमैन-शतकोत्तर रजत जयंती वर्ष समिति) द्वारा अनेक योजनाएं इस कार्यक्रम को चार-चांद लगा सकती हैं, प्रस्तुत की गई। तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय मंत्री हंसमुख गांधी ने एक विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत की। जिसमें प्रांतीय एवं क्षेत्रीय राष्ट्रीय सभी पदाधिकारी जुड़कर किस प्रकार से इस होने वाले आयोजन को संपन्न कर सकते हैं। उसकी संरचना प्रस्तुत की गई। इसी क्रम में मध्यप्रदेश अंचल के अध्यक्ष डी.के. जैन ने अपने विचार रखे कि हम लोग मध्यप्रदेश में किस प्रकार से इस शतकोत्तर वर्ष के कार्यक्रम कर सकते हैं। डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने तीर्थ चक्रवर्ती बनने की योजना से सभी को अवगत कराया। इस वर्ष के अन्तर्गत तीर्थ चक्रवर्ती बनाए जा रहे हैं, जिसकी राशि 1लाख रुपए रखी गई हैं। इस योजना के माध्यम से हम हर किसी को तीर्थक्षेत्र कमेटी से जोड़ने का उपक्रम चला रहे हैं।</p>
<p><strong>समायोजन की पूरी संरचना प्रस्तुत की</strong></p>
<p>इसी क्रम में शतकोत्तर रजत जयंती वर्ष के चेयरमैन स्थापना वर्ष समिति के प्रदीप जैन, पीएनसी-आगरा ने अपने महत्वपूर्ण वक्तव्य द्वारा होने वाले इस कार्यक्रम में हम किस प्रकार से अपनी सहभागिता कर सकते हैं। इस बात को रखा एवं समायोजन की पूरी संरचना प्रस्तुत की। किस व्यक्ति की क्या भूमिका होनी चाहिए। इस 125 वर्षीय कार्यक्रम के लिए अपने ओजस्वी वक्तव्य के द्वारा सभी को एक प्रेरणामयी वक्तव्य प्रदान किया। महामंत्री संतोष पेंढ़ारी ने कार्यक्रम को प्रभावशाली बनाने के लिए अनेक बिन्दुओं पर प्रकाश डाला कि हम किस प्रकार से अपने स्तर से शतकोत्तर वर्ष के लिए कार्य कर सकते हैं। इसी क्रम में टिकैतनगर महिला मंडल द्वारा एक सुंदर भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया गया। उत्तरप्रदेश के संयोजक श्री आदिश जैन सर्राफ ने भी अपनी बात को रखा एवं संजीव जैन, जैन प्लास्टिक-लखनऊ ने भी तीर्थक्षेत्र कमेटी के इस कार्य का सम्मान किया और सभी से जुड़ने का आह्वान किया।</p>
<p><strong>मुख्यरूप से तीन परिषद का गठन होना चाहिए</strong></p>
<p>गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने कहा कि प्रत्येक कमेटी में मुख्यरूप से तीन परिषद का गठन होना चाहिए। अंतरंग परिषद, बाह्य परिषद एवं सामाजिक परिषद। इस प्रकार से हम अपने कार्यक्रमों का समायोजन करें एवं समाज को जोड़ने का उपक्रम सदैव करें। अपने तीर्थों की सुरक्षा एवं उनका संवर्धन, विकास अवश्य करें। प्राचीन तीर्थों को गति प्रदान करें, उनके विकास के लिए अवश्य योजनाएँ बनाएं एवं तीर्थक्षेत्र कमेटी के इस 125 वर्षीय कार्यक्रम में हमारा मंगल आशीर्वाद है। इसी क्रम में आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने कार्यकर्ताओं को अपना मंगल उद्बोधन प्रदान किया। अयोध्या तीर्थक्षेत्र के यशस्वी पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने कहा कि यह कार्यक्रम ऐसा होना चाहिए कि जिसको सदैव आने वाली पीढ़ियाँ याद रखें। सन् 1989 के अंदर एक कार्यक्रम तीर्थक्षेत्र कमेटी के अधिवेशन का लालकिला-दिल्ली मैदान में किया गया था। जिसमें लगभग 1 लाख लोग सम्मिलित हुए थे, ऐसा ही प्रभावशाली कार्यक्रम होना चाहिए, जिससे तीर्थों के प्रति लोगों की सम्बद्धता बढ़े, जिससे जन-जन को जोड़ा का सके एवं तीर्थों की सशक्त भूमिका बताई जा सके। इस कार्यक्रम उद्घाटन 22 एवं 23अक्टूबर 2026 को मथुरा चौरासी में किया जाना है। उसके पश्चात् 1वर्ष तक सारे देश में एवं प्रदेश में अनेक आयोजनों के द्वारा संपन्न होना है। अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के मंत्री विजयकुमार जैन के अनुसार विनोद बाकलीवाल ने आभार माना।</p>
<p><strong>इन सभी यह उपस्थित रहे</strong></p>
<p>सभी प्रांतों के वरिष्ठ पदाधिकारीगण इस बैठक में सम्मिलित हुए। मुख्य रूप से संजय जैन पापड़ीवाल, प्रद्युम्न जैन, सुुनील जैन सर्राफ, मनोज जैन, राकेश जैन, मनोज कुमार जैन-आगरा, सुनयना जैन, मीनू जैन, रमाकांत जैन, वीरेश जैन सेठ, जयकुमार जैन, राजकुमार जैन कोठारी, संजय जैन ठोलिया, अनिल जैन, प्रीतविहार-दिल्ली, प्रशांत जैन, हेमचंद जैन, संतोष घड़ी, अमरचंद जैन, विनोद जैन बिहारी, संदेश जैन, डॉ. अनुपम जैन, संजीव जैन सराफ, वैहृलाशचंद जैन सर्राफ, शुभचंद जैन, कमल जैन पलवल, रितेश जैन, परमेन्द्र जैन, पारस जैन, निधेश जैन आदि गणमान्य महानुभाव उपस्थित रहे.।</p>
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		<title>दिगंबर जैन युवा परिषद कामां ने अवार्ड समाज को किया समर्पित: दिवंगत, अनुपस्थित पूर्व अध्यक्षों का स्मरण और उपस्थित पूर्व अध्यक्षों को किया समान्नित </title>
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		<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 09:12:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद शाखा को शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनी प्रमुख आर्यिका ज्ञानमती माताजी के ससंघ सानिध्य में युवा परिषद के स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान प्राप्त स्वर्ण जयंती गौरव अवॉर्ड को औपचारिक कार्यक्रम में समाज को समर्पित किया गया। कामां से पढ़िए, यह खबर&#8230; कामां। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद शाखा को शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनी प्रमुख आर्यिका ज्ञानमती माताजी के ससंघ सानिध्य में युवा परिषद के स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान प्राप्त स्वर्ण जयंती गौरव अवॉर्ड को औपचारिक कार्यक्रम में समाज को समर्पित किया गया। <span style="color: #ff0000">कामां से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कामां।</strong> अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद शाखा को शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनी प्रमुख आर्यिका ज्ञानमती माताजी के ससंघ सानिध्य में युवा परिषद के स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान प्राप्त स्वर्ण जयंती गौरव अवॉर्ड को औपचारिक कार्यक्रम में समाज को समर्पित किया गया।</p>
<p>युवा परिषद के अध्यक्ष आकाश जैन सर्राफ ने बताया कि जैन धर्म के सत्रहवें तीर्थंकर कुंथुनाथ भगवान के जन्म तप कल्याणक के अवसर पर कोट ऊपर स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में संध्याकालीन कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ णमोकार महामंत्र के जाप्य से हुआ और 48 दीपों से भक्तामर पाठ की अर्चना की गई। कार्यक्रम में स्वर्ण जयंती गौरव अवार्ड जैन समाज के अध्यक्ष अनिल जैन लहसरिया सहित पदाधिकारियों को दिया गया। संचालन करते हुए युवा परिषद के प्रदेश संयुक्त महामंत्री संजय जैन बड़जात्या ने कहा कि वर्ष 1979 में कामां निवासी उदय भान जैन के प्रयासों से अंकुरित बीज आज वटवृक्ष के रूप में फलित हो रहा है। युवा परिषद कामां शाखा उसी का परिणाम है। इस अवसर पर दीपक जैन, संजय सर्राफ ने भी विचार रखे।</p>
<p><strong>इनका किया गया सम्मान </strong></p>
<p>युवा परिषद के पूर्व दिवंगत अध्यक्षों शिखरचंद जैन, कपूरचंद पथराली वाले, सुरेश जैन सर्राफ, देवेंद्र जैन बड़जात्या का स्मरण किया गया। इस अवसर पर अनुपस्थित उदयभान जैन बड़जात्या,(कामां वाले, हाल जयपुर) वर्तमान राष्ट्रीय महामंत्री युवा परिषद्, मूलचंद जैन पटवारी को याद करते हुए उपस्थित अध्यक्ष कपूरचंद जैन, राजेंद्र जैन एलआईसी वाले, देवेंद्र जैन, बाबूलाल जैन अगोनिया, भगवानदास जैन,महावीर जैन टाल वाले, सुभाष जैन बिजली वाले, सुशील जैन बड़जात्या, संजय जैन बोलखेड़िया, मयंक जैन लहसरिया सहित समाज की कार्यकारिणी का सम्मान भी किया गया। आकाश जैन ने कहा कि यह गौरव सम्पूर्ण समाज का है, जिसे हम समाज की उपलब्धि मानकर समाज को ही समर्पित कर रहे हैं। कार्यक्रम का समापन पालना झुलाई के साथ हुआ।</p>
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		<title>अक्षय तृतीया पर इक्षु रस किया वितरित मनाया महोत्सव : श्री दिगंबर जैन वात्सल्य ग्रुप, पुलक मंच परिवार ने किया कार्यक्रम  </title>
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		<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 06:09:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगंबर जैन वात्सल्य ग्रुप और पुलक मंच परिवार के संयुक्त तत्वावधान दिगम्बर जैन मंदिर महारानी फार्म गायत्री नगर के बाहर प्रांगण में रविवार सुबह 7 से 9.30 तक इक्षु (गन्ने )रस पिलाने का कार्यक्रम रखा गया वात्सल्य ग्रुप के अध्यक्ष अनिल टोंग्या के अनुसार इस अवसर पर कार्यक्रम का उद्घाटन राजेंद्र सुमन सोगानी ने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगंबर जैन वात्सल्य ग्रुप और पुलक मंच परिवार के संयुक्त तत्वावधान दिगम्बर जैन मंदिर महारानी फार्म गायत्री नगर के बाहर प्रांगण में रविवार सुबह 7 से 9.30 तक इक्षु (गन्ने )रस पिलाने का कार्यक्रम रखा गया वात्सल्य ग्रुप के अध्यक्ष अनिल टोंग्या के अनुसार इस अवसर पर कार्यक्रम का उद्घाटन राजेंद्र सुमन सोगानी ने किया। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, उदयभान जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> श्री दिगंबर जैन वात्सल्य ग्रुप और पुलक मंच परिवार के संयुक्त तत्वावधान दिगम्बर जैन मंदिर महारानी फार्म गायत्री नगर के बाहर प्रांगण में रविवार सुबह 7 से 9.30 तक इक्षु (गन्ने )रस पिलाने का कार्यक्रम रखा गया वात्सल्य ग्रुप के अध्यक्ष अनिल टोंग्या के अनुसार इस अवसर पर कार्यक्रम का उद्घाटन राजेंद्र सुमन सोगानी ने किया। कार्यक्रम में वात्सल्य ग्रुप के संस्थापक अध्यक्ष सुरेश राज लुहाडिया, पुलक मंच परिवार की राष्ट्रीय महामंत्री बीना टोंग्या, अध्यक्षा मंजू सेवा वाली, उपाध्यक्षा विमला जैन, महासचिव रेखा अनिल झांझरी, वात्सल्य ग्रुप की उपाध्यक्ष उषा लुहाडिया, उपाध्यक्ष अशोक कासलीवाल एचपी सीएल, कोषाध्यक्ष सुरेश मीनू जैन, सांस्कृतिक सचिव प्रदीप गुड्डी पाटनी, साथ प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष कैलाश छाबडा, उपाध्यक्ष अरुण शाह, कोषाध्यक्ष राकेश छाबड़ा, अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन बडजात्या, मंजू सेवा वाली, अशोक जैन, अंजू जैन विधानसभा वाले, अरूण सांघी, प्रवक्ता राकेश राजकुमारी पाटोदी उपस्थित थे,।</p>
<p>इस अवसर पर समाज के लगभग 750 ब्यक्तियों ने गन्ने के रस का आनंद लिया। समाजजनों ने बताया कि शाश्वत तीर्थ अयोध्या में जन्मे जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का प्रथम पारणा इक्षु रस से वैशाख शुक्ल तृतीया को हस्तिनापुर में राजा श्रेयांस के यहां हुआ था। इसलिए इस दिवस का बहुत महत्व है। महासचिव रेखा झांझरी ने आभार ‌व्यक्त किया।</p>
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		<title>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में मनाया गया अक्षय तृतीया महोत्सव : गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने बताया यह आहारदान का पर्व है </title>
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		<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 06:07:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री भगवान ऋषभदेव बड़ी मूर्ति दिगंबर जैन मंदिर रायगंज में अक्षय तृतीया का पावन पर्व हर्षाेल्लास से मनाया गया। गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में मुनि श्री सोमदत्त सागर जी महाराज की उपस्थिति में प्रतिष्ठाचार्य विजयकुमार जैन आहारचर्या के लिए भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा को लेकर के निकले। अयोध्या से पढ़िए, उदयभान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्री भगवान ऋषभदेव बड़ी मूर्ति दिगंबर जैन मंदिर रायगंज में अक्षय तृतीया का पावन पर्व हर्षाेल्लास से मनाया गया। गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में मुनि श्री सोमदत्त सागर जी महाराज की उपस्थिति में प्रतिष्ठाचार्य विजयकुमार जैन आहारचर्या के लिए भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा को लेकर के निकले। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, उदयभान जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> श्री भगवान ऋषभदेव बड़ी मूर्ति दिगंबर जैन मंदिर रायगंज में अक्षय तृतीया का पावन पर्व हर्षाेल्लास से मनाया गया। गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में मुनि श्री सोमदत्त सागर जी महाराज की उपस्थिति में प्रतिष्ठाचार्य विजयकुमार जैन आहारचर्या के लिए भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा को लेकर के निकले। जैन शास्त्रों के अनुसार भगवान ऋषभदेव के काल में लोगों को जैन साधुओं को आहार देने का ज्ञान नहीं था। आहार कराने की विधि का ज्ञान किसी को भी नहीं था। भगवान को 1 वर्ष 39 दिन तक आहार नहीं प्राप्त हुआ। भगवान हस्तिनापुर नगरी में पहुँचे। हस्तिनापुर नगरी के राजा श्रेयांश को भगवान ऋषभदेव को देखते ही पूर्वभव का जातिय स्मरण हो गया। जाति स्मरण होते ही भगवान को नवद्या भक्ति पूर्वक पड़गाहन करके इछुरस (गन्ने का रस) का आहार दिया। जिससे उस पात्र में रस अक्षय हो गया एवं संपूर्ण नगर में गन्ने का रस का वितरण किया गया। उस इलाके में आज तक गन्ने की सर्वाधिक खेती है। इस अवसर पर गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने बताया कि यह आहारदान का पर्व है। संपूर्ण प्राणी मात्र के लिए ये मंगलकारी है। इस दिन किया गया कार्य अक्षय निधि को प्राप्त होता है। वर्तमान में लोग चांदी सोने के सिक्के एवं वस्तुओं को खरीदकर अक्षय तृतीय पर्व मनाते हैं। प्राचीन परंपरा अनुसार जहां पर जैन साधु विराजमान होते हैं। उन्हें श्रावकजन नवद्याभक्तिपूर्वक पड़गाहन करके इछुरस का आहार देते हैं।</p>
<p><strong>इन्होंने अर्जित किया सौभाग्य </strong></p>
<p>अयोध्या तीर्थ पर राजा श्रेयांस के रूप में सुभाषचंद जैन सर्राफ इंद्रानगर लखनऊ ने भगवान का पड़गाहन करके प्रथम आहारदान देने का सौभाग्य प्राप्त किया। कैलाशचंद जैन सर्राफ चौक लखनऊ, पुखराज पांड्या गोरखपुर, अंजय जैन बाराबंकी, डॉ. राधा जैन, दिनेश जैन लखनऊ, अरिंजय जैन दरियाबाद, डॉ. जीवन प्रकाश जैन आदि भक्तों ने भगवान को आहारदान दिया। आहारदान के बाद पंचाश्चर्य की वृष्टि की गई। जिसमें मुख्य रूप से रत्नवृष्टि, पुष्पवृष्टि, गंधोदक वृष्टि, देवदुंदभी जयजयकार आदि की गई। संपूर्ण कार्यक्रम पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीद्रकीर्ति स्वामी जी के निर्देशन में एवं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माताजी के मार्गदर्शन में किए गए। उपस्थित सभी भक्तजनों को गन्ने के रस का प्रसाद वितरण किया गया।</p>
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		<title>युवा परिषद के समारोह में कोल्हापुर शाखा को एक्सीलेंट अवार्ड : अपने गांव, नगर, शहर में अवश्य ही स्वर्ण जयंती समारोह करने का आह्वान  </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 11:20:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[युवाओं की प्राचीन संस्था ‘अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद’ के 50वें स्थापना वर्ष के अंतर्गत शाश्वत तीर्थ अयोध्या में स्वर्ण जयंती समारोह का राष्ट्रीय आयोजन हुआ। सन् 1977 में आचायश्री देशभूषण जी महाराज की प्रेरणा से स्थापित इस युवा परिषद संस्था का 1 जनवरी 2026 को 50 वां स्थापना दिवस मनाया गया। अयोध्या से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>युवाओं की प्राचीन संस्था ‘अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद’ के 50वें स्थापना वर्ष के अंतर्गत शाश्वत तीर्थ अयोध्या में स्वर्ण जयंती समारोह का राष्ट्रीय आयोजन हुआ। सन् 1977 में आचायश्री देशभूषण जी महाराज की प्रेरणा से स्थापित इस युवा परिषद संस्था का 1 जनवरी 2026 को 50 वां स्थापना दिवस मनाया गया। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> युवा परिषद राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.जीवनप्रकाश जैन ने कहा कि युवाओं की प्राचीन संस्था ‘अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद’ के 50वें स्थापना वर्ष के अंतर्गत शाश्वत तीर्थ अयोध्या में स्वर्ण जयंती समारोह का राष्ट्रीय आयोजन हुआ। सन् 1977 में आचायश्री देशभूषण जी महाराज की प्रेरणा से स्थापित इस युवा परिषद संस्था का 1 जनवरी 2026 को 50 वां स्थापना दिवस मनाया गया था। युवा परिषद स्वर्ण जयंती वर्ष के तहत रविवार को शाश्वत तीर्थ समारोह हुआ। भगवान ऋषभदेव आदि पांच जैन तीर्थंकरों की जन्मभूमि में गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के ससंघ सान्निध्य में इस समारोह को दीप प्रज्ज्वलन के साथ उद्घाटित किया गया। साथ ही युवा परिषद को सदैव मार्गदर्शन प्रदान करने वाली आर्यिका श्री चंदनामती माताजी की गौरवमयी उपस्थिति रही। कर्मयोगी पीठाधीश स्वस्तिश्री रवींद्रकीर्ति स्वामीजी जी को ‘जैन शासन युगपुरुष सम्मान’ से अभिनंदित किया गया। विगत वर्षों में श्रेष्ठतम कार्य करने वाली इन तीन शाखाओं में 51 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि सहित आउटस्टैंडिंग शाखा अवार्ड से प्रतापनगर संभाग (जयपुर) शाखा को, 31 हजार की प्रोत्साहन राशि सहित एक्सीलेंट शाखा अवार्ड से कोल्हापुर (महा.) शाखा को एवं 21 हजार की प्रोत्साहन राशि सहित बेस्ट शाखा अवार्ड से टिकैतनगर (बाराबंकी) शाखा को अभिनंदन पत्र प्रदान किया गया।</p>
<p>एक्सीलेंट अवार्ड को कोल्हापुर शाखा के कार्याध्यक्ष अभिषेक पाटिल और रेश्मा शाह आदि साथियों ने प्राप्त किया। समारोह में अध्यक्षीय उद्बोधन में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जीवन प्रकाश ने सभी शाखा के पदाधिकारियों का आभार माना। डॉ. जैन ने युवा परिषद शाखाओं को इस बात के लिए प्रेरित किया कि वे इस स्वर्ण जयंती वर्ष में अपने-अपने गांव, नगर, शहर में अवश्य ही स्वर्ण जयंती समारोह का कम से कम एक कार्यक्रम अवश्य करें। परिषद की प्रभावना बढ़ाएं। स्वर्ण जयंती समारोह में केंद्रीय पदाधिकारियों में डॉ. अनुपम जैन, इंदौर (संरक्षक), विकास जैन, वैशाली, गाजियाबाद (संरक्षक), विजय कुमार जैन, जम्बूद्वीप (मुख्य संयोजक), बिजेन्द्र कुमार जैन, शाहदरा, दिल्ली (कार्याध्यक्ष), पवन जैन, घुवारा-टीकमगढ़ (उपाध्यक्ष), उदयभान जैन, जयपुर (राष्ट्रीय महामंत्री), संघपति अतिशय जैन, कमल मंदिर, प्रीतविहार, दिल्ली (कोषाध्यक्ष), दिलीप जैन, जयपुर (संयुक्त महामंत्री एवं राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष)उपस्थित थे।</p>
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		<title>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में युवा परिषद् स्वर्ण जयंती, अवार्ड समर्पण समारोह 5 अप्रैल को : गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में होगा राष्ट्रीय अधिवेशन  </title>
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		<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 15:07:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद का 50 वें स्वर्ण जयंती स्थापना वर्ष 1 जनवरी 2026- 2027 के अंतर्गत वैशाख कृष्णा तृतीया 5 अप्रैल रविवार को शाश्वत तीर्थ बड़ी मूर्ति अयोध्या में मध्यान्ह 1बजे से स्वर्ण जयंती समारोह एवं अवार्ड समर्पण कार्यक्रम होगा। अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230; अयोध्या। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद का 50 वें स्वर्ण जयंती स्थापना वर्ष 1 जनवरी 2026- 2027 के अंतर्गत वैशाख कृष्णा तृतीया 5 अप्रैल रविवार को शाश्वत तीर्थ बड़ी मूर्ति अयोध्या में मध्यान्ह 1बजे से स्वर्ण जयंती समारोह एवं अवार्ड समर्पण कार्यक्रम होगा। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>अयोध्या। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद का 50 वें स्वर्ण जयंती स्थापना वर्ष 1 जनवरी 2026- 2027 के अंतर्गत वैशाख कृष्णा तृतीया 5 अप्रैल रविवार को शाश्वत तीर्थ बड़ी मूर्ति अयोध्या में मध्यान्ह 1बजे से स्वर्ण जयंती समारोह एवं अवार्ड समर्पण कार्यक्रम गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ के सानिध्य, आर्यिका रत्न श्री चंदनामती माताजी, पीठाधीश रवीन्द्र कीर्ति स्वामीजी के मार्गदर्शन में युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.जीवनप्रकाश जैन जम्बूद्वीप और हस्तिनापुर की अध्यक्षता में होगा। अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन जयपुर ने बताया कि इस समारोह में 47 वर्षीय सबसे प्राचीन कामां, राजस्थान शाखा का विशिष्ट सम्मान, पूज्य स्वामी जी के प्रति समर्पित युग पुरुष सम्मान, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को सेवा शिरोमणि सम्मान, कर्मठ व्यक्तित्व पुरस्कार, युवा रत्न पुरस्कार,सज्जातित्व विवाह से संपन्न नव दम्पति स्वर्ण श्री उपाधि से अलंकरण आदि सम्मान समर्पण होंगे।</p>
<p><strong>इस तरह दिए जाएंगे अवार्ड</strong></p>
<p>अवार्ड समारोह में आउटस्टैंडिंग शाखा अवार्ड 51हजार, एक्सीलेंट शाखा अवार्ड का ₹31000 , बेस्ट शाखा अवार्ड, अवार्ड 21हजार रुपए के होंगे। इन अवार्ड के चयन निर्णायक मंडल में युवा परिषद् के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष बिजेंद्र जैन दिल्ली, राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन जयपुर, राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री दिलीप जैन जयपुर हैं। परिषद के राष्ट्रीय मुख्य संयोजक प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन हस्तिनापुर ने बताया कि समारोह में दिगंबर जैन अयोध्या कमेटी का विशेष सहयोग रहेगा। उन्होंने बताया कि युवा परिषद् के स्वर्ण जयंती,अवार्ड समर्पण समारोह व राष्ट्रीय अधिवेशन में दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड आदि प्रांतों से सैकड़ों की संख्या में सदस्य उपस्थित होंगे। इस अवसर पर सांय 7 बजे युवा परिषद का प्रगति रिपोर्ट सत्र भी पीठाधीश रवीन्द्र कीर्ति स्वामी जी के निर्देशन में होगा।</p>
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		<title>गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में हुआ इंद्रध्वज विधान : विधान में माताजी का मिला परम् आशीर्वाद, गदगद हुए श्रावक-श्राविकाएं </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 06:29:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शाश्वत तीर्थ अयोध्या में नवनिर्मित 101 भगवान के मंदिर में प्रथम बार इंद्रध्वज विधान का आयोजन हुआ। खूब धूमधाम से पूर्णाहुति हवन एवं रथयात्रा के साथ विधान के समापन पर गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का मंगलमय आशीर्वाद प्राप्त हुआ। पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह रिपोर्ट&#8230; अयोध्या। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में नवनिर्मित 101 भगवान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में नवनिर्मित 101 भगवान के मंदिर में प्रथम बार इंद्रध्वज विधान का आयोजन हुआ। खूब धूमधाम से पूर्णाहुति हवन एवं रथयात्रा के साथ विधान के समापन पर गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का मंगलमय आशीर्वाद प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> शाश्वत तीर्थ अयोध्या में नवनिर्मित 101 भगवान के मंदिर में प्रथम बार इंद्रध्वज विधान का आयोजन हुआ। खूब धूमधाम से पूर्णाहुति हवन एवं रथयात्रा के साथ विधान के समापन पर गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का मंगलमय आशीर्वाद प्राप्त हुआ। आयोजक अध्यात्म जैन, अर्पिता जैन पुत्र, सम्यक जैन लखनऊ परिवार उपस्थित थे। इस अवसर पर डॉ जीवन प्रकाश जैन जी ने कहा कि पद्मनंदिपंचविंशतिका के स्वाध्याय के कारण बचपन से ही विकसित वैराग्य के बीज 1952 में शरदपूर्णिमा के दिन ही प्रस्फुटित हुए, जब बाराबंकी में आपने आचार्य श्री देशभूषण जी महाराज से सप्तम प्रतिमा (ब्रह्मचर्य) के व्रत अंगीकार किए। 1953 में चैत्र कृष्णा एकम् को श्री महावीर जी में आपने आचार्य श्री देशभूषण जी से क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण कर ‘वीरमती’ नाम प्राप्त किया। व्रत एवं नियमों का कठोरता से पालन करते हुए आप अपनी संज्ञा ‘वीरमती’ को तो सार्थक कर ही रही थीं, किन्तु आपको मात्र क्षुल्लिका के व्रतों से संतोष कहां। 19 वर्ष की यौवनावस्था में क्षुल्लिका के व्रतों का कठोरता से पालन करने के साथ ही आप निरन्तर वैराग्य के भावों को विकसित करती रहीं एवं अनन्तर इस युग के महान आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की आज्ञा से उनके ही पट्टशिष्य आचार्यश्री वीरसागर जी से वैशाख कृष्णा द्वितीया को 1956 ईसवीमाधोराजपुरा की पवित्र भूमि में आर्यिका के व्रतों को अंगीकार कर ‘ज्ञानमती’ की सार्थक संज्ञा प्राप्त की। धन्य हैं वे भविष्य दृष्टा आचार्य श्री वीरसागर जी, जिन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से इनकी प्रतिभा का आकलन कर इन्हें ‘‘ज्ञानमती’’ नाम दिया। आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी के साक्षात तीन बार दर्शन करने वाली गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी जैनशासन के वर्तमान व्योम पर छिटके नक्षत्रों में दैदीप्यमान सूर्य की भांति अपनी प्रकाश-रश्मियों को प्रकीर्णित कर रहीं। गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी, जिन्होंने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी के तीन बार दर्शन किए हैं। नीरा (महाराष्ट्र ) में सन् 1954 में, बारामती (महा.) में सन् 1955 में, कुंथलगिरि सिद्धक्षेत्र (महा.) में सन् 1955 में सल्लेखना के समय। सन्1955 में आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी ने कुंथलगिरि में देशभूषण-कुलभूषण जी की प्रतिमा के समक्ष 12 वर्ष की सल्लेखना ली थी।</p>
<p><strong>आचार्य श्री की प्रत्यक्ष सल्लेखना देखी</strong></p>
<p>ज्ञानमती माताजी उस समय क्षुल्लिका अवस्था में वीरमती माताजी थी,कुंथलगिरि में एक माह आचार्यश्री के श्रीचरणों में रहीं। क्षुल्लिकावस्था में आचार्य श्री की प्रत्यक्ष सल्लेखना तो देखी ही है, साथ ही उनके श्रीमुख से अनेक अनुभव वाक्य भी प्राप्त किए हैं। ज्ञानमती माताजी (क्षुल्लिका वीरमति) ने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी से आर्यिका दीक्षा की याचना की थी किन्तु, आचार्य श्री ने कहा था कि मैंने सल्लेखना ले ली है और अब दीक्षा देने का त्याग कर दिया है। तुम मेरे शिष्य वीरसागर से आर्यिका दीक्षा लेना। अत: आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के आदेशानुसार उन्होंने 1956 की वैशाख कृष्ण दूज को माधोराजपुरा (जयपुर-राजस्थान) में आचार्य श्री शांतिसागर जी के प्रथम शिष्य पट्टाचार्य आचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से आर्यिका दीक्षा (महिलाओं के लिए दीक्षा की सर्वोच्च अवस्था) ली और आर्यिका ज्ञानमती बन गईं एवं नाम के अनुसार सारे विश्व में एक विराट साहित्य की श्रृंखला का सृजन किया, जो कि न भूतो न भविष्यति।</p>
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		<title>आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के जन्मदिवस पर भक्ति के साथ मनाया उत्सव मनाया : तीर्थ क्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन को गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती पुरस्कार’ </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Oct 2025 12:59:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का 92वें जन्मदिन और 74वें संयम दिवस के अवसर पर शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव के तृतीय दिवस दिवस मंगलवार को प्रातः 6 बजे से बडी मूर्ति भगवान ऋषभदेव 31फुट उतंग प्रतिमा जी का अभिषेक और शांतिधारा हुई। अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230; अयोध्या। गणिनी प्रमुख श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का 92वें जन्मदिन और 74वें संयम दिवस के अवसर पर शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव के तृतीय दिवस दिवस मंगलवार को प्रातः 6 बजे से बडी मूर्ति भगवान ऋषभदेव 31फुट उतंग प्रतिमा जी का अभिषेक और शांतिधारा हुई। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माता जी ससंघ के सान्निध्य में भगवान ऋषभदेव आदि पांप तीर्थंकरों की जन्म भूमि शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का 92वें जन्मदिन और 74वें संयम दिवस के अवसर पर शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव के तृतीय दिवस दिवस मंगलवार को प्रातः 6 बजे से बडी मूर्ति भगवान ऋषभदेव 31फुट उतंग प्रतिमा जी का अभिषेक और शांतिधारा हुई।झण्डा रोहण अशोक चांदवाड परिवार जयपुर द्वारा किया गया। अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन जयपुर ने बताया कि दोपहर 2 बजे विनयांजलि सभा का मंगलाचरण सुभाष जैन सराफ लखनऊ ने किया एवं ऋचा जैन तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद ने सभा की अध्यक्षता की। कमेटी द्वारा उनका स्वागत, सम्मान किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-92112" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251008-WA0030.jpg" alt="" width="1056" height="755" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251008-WA0030.jpg 1056w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251008-WA0030-300x214.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251008-WA0030-1024x732.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251008-WA0030-768x549.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251008-WA0030-990x708.jpg 990w" sizes="(max-width: 1056px) 100vw, 1056px" /> अतिथि व अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया गया। साथ में ग्लोबल महासभा के अध्यक्ष जमुनालाल हपावत, अधिष्ठाता ऋषभदेवपुरम मांगीतुंगी सीआर पाटिल, कमल कासलीवाल मुंबई थे। कार्यक्रम के शुभारंभ में आर्यिका श्री चन्दनामती माताजी ने समारोह का प्रस्तावना वक्तव्य प्रदान किया। पीठाधीश स्वस्ति श्री रवींद्र कीर्ति स्वामी जी, प्रतिष्ठाचार्य विजयकुमार जैन, कमल कासलीवाल ने प्रस्तुति दी और कहा कि पूज्य माताजी ने जैन समाज को अनेकों उपकार किए।</p>
<p><strong>आचार्य श्री शांति सागरजी की परंपरा को भी आगे बढ़ाया </strong></p>
<p>उन्होंने भगवान ऋषभदेव व महावीर के अहिंसा, शाकाहार, आदि सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाया। आचार्य श्री शांति सागरजी की परंपरा को भी पूज्य माता जी ने आगे बढ़ाया। सभा में विशिष्ट भक्तों द्वारा पूज्य माताजी के पाद प्रक्षालन कर उन्हें नूतन पिच्छी, कमंडल व शास्त्र भी भेंट किए। युवा परिषद् बाराबंकी और अग्रवाल जैन महासंघ ने माताजी को ज्ञानसूर्य की उपाधि से विभूषित किया।</p>
<p><strong>पुरस्कार प्रदान कर सम्मान किया गया </strong></p>
<p>इस अवसर पर दिगंबर जैन त्रिलोक शोध संस्थान हस्तिनापुर द्वारा वीरा फाउंडेशन दिल्ली की ओर से भारतवर्षीय तीर्थ क्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन गाजियाबाद को देश का सर्वाेच्च पुरस्कार गणिनी ज्ञानमती पुरस्कार 2025 प्रदान किया गया। प्रशस्ति का वाचन डॉ. अनुपम जैन इंदौर ने किया। जिनको 1995 में सर्वप्रथम यह पुरस्कार दिया गया। समारोह में प्रातः अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद् द्वारा युवा रत्न’ पुरस्कार से सम्यक जैन लखनऊ को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद् की ओर से अजैन लोगों को भंडारे की व्यवस्था की गई।</p>
<p><strong>नूतन एसी भोजनालय का उद्घाटन किया</strong></p>
<p>अयोध्या तीर्थ विकास के क्रम में नूतन एसी भोजनालय का भी इस अवसर पर उद्घाटन किया गया जिसका सौभाग्य विनोद सेठी डीमापुर परिवार को प्राप्त हुआ। रात्रि में रूपेश एंड पार्टी द्वारा भक्ति संध्या का आयोजन रखा गया। जिसमें 9.15 बजे टिकैतनगर के महिला मंडल, युवा परिषद्, वीर वालिका मंडल, देश के विभिन्न प्रांतों से आए श्रेष्ठियों व सैंकडों भक्तों ने थाली बजाकर गुरु माँ का जन्मदिन मनाया। सभी उपस्थित अतिथियों व श्रेष्ठियों का अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के महामंत्री अमर चन्द जैन, मंत्री विजय कुमार जैन, डॉ. जीवनकुमार जैन, संघपति अनिल जैन दिल्ली द्वारा स्वागत किया गया। मंच संचालन डॉ. जीवनकुमार प्रकाश जैन जम्बूद्वीप ,हस्तिनापुर एवं विजेंद्र जैन दिल्ली ने किया।</p>
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		<title>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव मनाया: आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की 92वीं जन्म जयंती पर तीर्थ क्षेत्र कमेटी ने कालजयी व्यक्तित्व पदवी से किया विभूषित  </title>
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		<pubDate>Tue, 07 Oct 2025 11:23:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माता जी ससंघ के सानिध्य में भगवान ऋषभदेव आदि पांच तीर्थंकरों की जन्म भूमि शाश्वत तीर्थ अयोध्या में माताजी के 92 वें जन्मदिन और 74वें संयम दिवस पर शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को सुबह 6 बजे से बडी मूर्ति भगवान ऋषभदेव 31 फुट उतंग प्रतिमा जी के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माता जी ससंघ के सानिध्य में भगवान ऋषभदेव आदि पांच तीर्थंकरों की जन्म भूमि शाश्वत तीर्थ अयोध्या में माताजी के 92 वें जन्मदिन और 74वें संयम दिवस पर शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को सुबह 6 बजे से बडी मूर्ति भगवान ऋषभदेव 31 फुट उतंग प्रतिमा जी के अभिषेक और शांतिधारा की गई। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से उदयभान जैन की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माता जी ससंघ के सानिध्य में भगवान ऋषभदेव आदि पांच तीर्थंकरों की जन्म भूमि शाश्वत तीर्थ अयोध्या में माताजी के 92 वें जन्मदिन और 74वें संयम दिवस पर शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को सुबह 6 बजे से बडी मूर्ति भगवान ऋषभदेव 31 फुट उतंग प्रतिमा जी के अभिषेक और शांतिधारा की गई। इसके बाद आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की महा पूजा बड़े ही भक्ति भाव के साथ हुई। जिसके सौधर्म इंद्र कमलकुमार कासलीवाल मुंबई ने 101 सामूहिक अर्घ्य समर्पित किए। सभी ने भक्ति भावना से जयमाला पर नृत्य प्रस्तुत किए। अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन, जयपुर ने बताया कि दोपहर 2 बजे भारतवर्षीय तीर्थ क्षेत्र कमेटी का नियमित राष्ट्रीय अधिवेशन पूर्व न्यायाधीश कैलाश चांदीवाल महाराष्ट्र के मुख्य आतिथ्य एवं तीर्थ क्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बूप्रसाद जैन गाजियाबाद की अध्यक्षता में हुआ। जिसके विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पारुल जैन थे। मंगलाचरण प्रतिष्ठाचार्य विजयकुमार जैन एवं स्वागत उद्वोधन अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद् राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जीवनप्रकाश जैन ने दिया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-91926" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005.jpg" alt="" width="1280" height="970" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005-300x227.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005-1024x776.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005-768x582.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005-990x750.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /> इस अवसर परभारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी की ओर से गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माता जी को ’कालजयी’व्यक्तित्व’ उपाधि से नवाजा गया। कार्यक्रम में गणिनी प्रमुख श्री ज्ञान मती माताजी, प्रज्ञा श्रमणी चंदनामती माताजी, पीठाधीष रविंद्र कीर्ती स्वामी जी ने कहा कि तीर्थ संरक्षण के लिए संपूर्ण जैन समाज का योगदान होना चाहिए। अधिवेशन में सुनयना जैन लखनऊ, जय कुमार जैन कोटा, विजयकुमार लुहाडिया, कैलाश जैन सराफ लखनऊ, पवन घुवारा, संजय पापडीवाल, जवाहरलाल जैन सिकंद्राबाद, जम्बूप्रसाद जैन गाजियाबाद, कैलाश चांदीवाल, शरद जैन दिल्ली ने तीर्थ क्षेत्र के संरक्षण के लिए किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला। डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने बताया कि</p>
<p>मंगलवार सुबह 6 बजे 31 फुट उतंग प्रतिमा जी का महामस्तिकाभिषेक किया गया। दोपहर 2 बजे से माताजी की मुख्य विनयांजलि सभा एवं त्रिलोक शोध संस्थान का सर्वाेच्च गणिनी ज्ञानमती पुरस्कार 2025 प्रदान किया जाएगा। शाम 7 बजे आरती एवं सांस्कृतिक संध्या आदि कार्यक्रम होंगे। मंच संचालन हसमुख गांधी इंदौर ने किया।</p>
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		<title>तीर्थंकरों की शाश्वत जन्मभूमि अयोध्या में जिनमंदिरों का निर्माण: गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से हुए मंदिर निर्माण- आर्यिकाश्री चंदनामती माताजी </title>
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		<pubDate>Thu, 14 Aug 2025 10:09:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने कहा कि भगवान मुनिसुव्रतनाथ की जन्मभूमि ‘राजगृही’ में ‘मुनिसुव्रतनाथ जिनमंदिर’ एवं विपुलाचल पर्वत की तलहटी में मानस्तंभ रचना, भगवान महावीर की निर्वाण स्थली पावापुरी में जलमंदिर के समक्ष पांडुकशिला परिसर में भगवान की खड्गासन प्रतिमा सहित भगवान महावीर जिनमंदिर, गौतम गणधर स्वामी की निर्वाण स्थली गुणावां जी में गौतम स्वामी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने कहा कि भगवान मुनिसुव्रतनाथ की जन्मभूमि ‘राजगृही’ में ‘मुनिसुव्रतनाथ जिनमंदिर’ एवं विपुलाचल पर्वत की तलहटी में मानस्तंभ रचना, भगवान महावीर की निर्वाण स्थली पावापुरी में जलमंदिर के समक्ष पांडुकशिला परिसर में भगवान की खड्गासन प्रतिमा सहित भगवान महावीर जिनमंदिर, गौतम गणधर स्वामी की निर्वाण स्थली गुणावां जी में गौतम स्वामी की खड्गासन प्रतिमा सहित जिनमंदिर, श्री सम्मेदशिखर जी में भगवान ऋषभदेव मंदिर आदि निर्माण भी गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से ही हुए हैं। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान हैं। आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि -भगवान मुनिसुव्रतनाथ की जन्मभूमि ‘राजगृही’ में ‘मुनिसुव्रतनाथ जिनमंदिर’ एवं विपुलाचल पर्वत की तलहटी में मानस्तंभ रचना, भगवान महावीर की निर्वाण स्थली पावापुरी में जलमंदिर के समक्ष पांडुकशिला परिसर में भगवान की खड्गासन प्रतिमा सहित भगवान महावीर जिनमंदिर, गौतम गणधर स्वामी की निर्वाण स्थली गुणावां जी में गौतम स्वामी की खड्गासन प्रतिमा सहित जिनमंदिर, श्री सम्मेदशिखर जी में भगवान ऋषभदेव मंदिर आदि समस्त निर्माण भी गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से ही हुए हैं। तीर्थंकर जन्मभूमि विकास की श्रृंखला में भगवान पुष्पदंतनाथ की जन्मभूमि काकंदी में श्री पुष्पदंतनाथ जिनमंदिर का निर्माण कार्य होकर उसमें भगवान पुष्पदंतनाथ की विशाल सवा 9 फीट की उत्तुंग पद्मासन प्रतिमा पंचकल्याणक प्रतिष्ठापूर्वक विराजमान हो चुकी है।</p>
<p>तीर्थंकरों की शाश्वत जन्मभूमि अयोध्या में वर्तमानकालीन वहां जन्में पांच तीर्थंकरों की जन्मभूमि की टोकों पर जिनमंदिर निर्माण की प्रेरणा प्रदान कर आपने संस्कृति को जीवंत करने का अभूतपूर्व प्रयास किया है। उस श्रृंखला में प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की टोंक पर सन् 2011 में सुंदर कलात्मक मंदिर बनकर उसमें सवा चार फीट पद्मासन श्वेत प्रतिमा विराजमान हुई है तथा सरयू नदी के तट पर जून 2013 में भगवान अनंतनाथ के मंदिर का निर्माण होकर वेदी में भगवान की सवा दस फीट की उत्तुंग पद्मासन प्रतिमा विराजमान की गई है। इसी प्रकार जून 2014 में भगवान अजितनाथ की टोंक पर विशाल जिनमंदिर का निर्माण तथा दिसंबर 2014 में भगवान अभिनंदननाथ की टोंक पर विशाल जिनमंदिर का निर्माण करके वेदी में 5-5 फीट की सुंदर पद्मासन प्रतिमाएं विराजमान की गई हैं और भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठाएं हुई हैं।</p>
<p>साथ ही वहां निर्मित भरत-बाहुबली टोंक का भी नवनिर्माण होकर आज अयोध्या तीर्थ एक विकसित स्वरूप में जनमानस के आकर्षण का केंद्र बन गया है। उसी श्रृंखला में श्री सुमतिनाथ भगवान की टोंक पर भी सन् 2019 में पंचकल्याणक करके भव्य मंदिर निर्माण किया गया है। अनेक वर्षों से अड़चनों को प्राप्त हो रही भगवान श्रेयांसनाथ की जन्मभूमि सिंहपुरी-सारनाथ में भगवान की विशाल प्रतिमा का पंचकल्याणक महोत्सव जनवरी 2005 में सानंद हुआ। भगवान वासुपूज्य की जन्मभूमि चम्पापुरी में भगवान वासुपूज्य की लाल ग्रेनाइट की 31 फीट की विशाल खड्गासन प्रतिमा माताजी की प्रेरणा का ही सुफल है। वर्तमान में भगवान शीतलनाथ की जन्मभूमि भद्दिलपुर-भद्रिकापुरी का विकास कार्य माताजी के विशेष आशीर्वाद से अविरल गति से चल रहा है और भगवान मल्लिनाथ-नमिनाथ की जन्मभूमि मिथिलापुरी के विकास का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है।</p>
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