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	<title>शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मार्ग भर श्रद्धालुओं ने गुरुसंघ के दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया : आचार्यश्री इंद्र नंदी जी एवं गणिनी आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी ससंघ का आगरा में भव्य मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 10:36:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री इंद्र नंदी जी महाराज, मुनिश्री उत्कर्षनंदी जी, मुनिश्री नाभिनंदी जी तथा गणिनी आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी एवं गणिनी आर्यिकाश्री विज्ञमति माता जी ससंघ के आगरा आगमन पर जैन समाज में विशेष उत्साह एवं श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230; आगरा। आचार्यश्री इंद्र नंदी जी महाराज, मुनिश्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री इंद्र नंदी जी महाराज, मुनिश्री उत्कर्षनंदी जी, मुनिश्री नाभिनंदी जी तथा गणिनी आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी एवं गणिनी आर्यिकाश्री विज्ञमति माता जी ससंघ के आगरा आगमन पर जैन समाज में विशेष उत्साह एवं श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> आचार्यश्री इंद्र नंदी जी महाराज, मुनिश्री उत्कर्षनंदी जी, मुनिश्री नाभिनंदी जी तथा गणिनी आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी एवं गणिनी आर्यिकाश्री विज्ञमति माता जी ससंघ के आगरा आगमन पर जैन समाज में विशेष उत्साह एवं श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। मंगलवार को जयपुर हाउस स्थित शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्यसंघ एवं गणिनी आर्यिकासंघ का भव्य मंगल प्रवेश श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ। प्रातःकाल श्री रामेश्वरी देवी कन्या विद्यालय नगला वसुआ पथोली से प्रारंभ हुए मंगल विहार के दौरान मार्ग भर श्रद्धालुओं ने गुरुसंघ के दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया। जयपुर हाउस पहुंचने पर श्री शांतिनाथ युवा मंडल,महिला मंडल एवं सकल जैन समाज द्वारा गुरुवर एवं गुरुमां ससंघ का भव्य स्वागत किया गया। बैंडबाजों, मंगल गीतों और जयघोषों के बीच श्रद्धालुओं ने अपनी अगाध श्रद्धा व्यक्त की। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं पदयात्रा में सम्मिलित हुईं। इस अवसर पर आचार्यश्री इंद्रनंदी जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचनों में कहा कि उत्तर प्रदेश की पावन भूमि पर उनका यह प्रथम आगमन है और यह सौभाग्य उन्हें माताजी ससंघ के साथ प्राप्त हुआ है। उन्होंने अपनी विशेष भावना व्यक्त करते हुए कहा कि जीवन के अंतिम समय में वे पवित्र सम्मेद शिखर जी की यात्रा करना चाहते हैं।</p>
<p>मंगल प्रवेश के उपरांत श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री ससंघ एवं गणिनी आर्यिकाश्री विशुद्धमति माताजी ससंघ के दर्शन कर धर्म आराधना का लाभ प्राप्त किया। समाजजनों ने आगामी शिकोहाबाद विहार की सफलता एवं धर्म प्रभावना के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं। विहार यात्रा एवं स्वागत व्यवस्था में राकेश जैन परदेवाले, दीपक जैन, विनोद रांवका, सुबोध पाटनी, अमित सेठिया, राजीव प्रकाश जैन, विमल जैन, अनुभव जैन, उदित जैन, अंकित जैन, तरुण जैन सहित अनेक युवा कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।</p>
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		<title>विश्व शांति महायज्ञ के समापन दिवस पर भक्ति आराधना का रहा दौर : इंद्र-इंद्राणियो ने विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना की </title>
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		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 00:27:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में गुरुवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के समापन दिवस की शुरुआत प्रातःकाल भगवान जिनेंद्र देव के अभिषेक, शांतिधारा हुई। आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह खबर&#8230; आगरा। नगर में श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में गुरुवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के समापन दिवस की शुरुआत प्रातःकाल भगवान जिनेंद्र देव के अभिषेक, शांतिधारा हुई। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> नगर में श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में गुरुवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के समापन दिवस की शुरुआत प्रातःकाल भगवान जिनेंद्र देव के अभिषेक, शांतिधारा हुई। समापन दिवस श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ संपन्न हुआ। जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय एवं उल्लासमय बन गया। बाल ब्रह्मचारी पीयूष शास्त्री एवं पंडित आशुतोष शास्त्री ने विधान पूजन और विधान के पूर्णाहुति अवसर पर श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, समाज की उन्नति एवं मानव कल्याण की मंगल कामना की। सामूहिक रूप से सभी इंद्र-इंद्राणियो ने विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना कर धर्मलाभ प्राप्त किया। मंत्रोच्चार, भक्ति गीतों एवं स्तुति वंदनाओं से मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। इसके पश्चात आयोजित होली मिलन समारोह में आपसी प्रेम, सौहार्द एवं भाईचारे का संदेश देते हुए एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के अंतर्गत समाज के वरिष्ठजनों, सहयोगकर्ताओं एवं आयोजन में विशेष योगदान देने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत एवं सम्मान भी किया गया।</p>
<p><strong>यह समाज श्रेष्ठिजन मौजूद रहे</strong></p>
<p>इस मौके संयोजक अशोक कुमार जैन, अध्यक्ष राजेश बैनाड़ा, मंत्री विजय जैन निमोरब, मगन कुमार जैन, अरुण जैन, महेश चंद जैन, सुशील जैन, अनिल आदर्श जैन, सतेंद्र जैन, राकेश जैन, रामप्रकाश जैन, अतुल जैन, प्रमोद जैन, विवेक जैन, अंकित जैन, संजीव जैन मीडिया प्रभारी राहुल जैन और सकल जैन समाज मौजूद था।</p>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का शिवदासपुरा में हुआ प्रवेश : 6 मार्च को आचार्य संघ की आहार चर्या बिलवा दिगंबर जैन मंदिर में होगी </title>
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		<pubDate>Thu, 05 Mar 2026 14:04:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पदमपुरा से 5 मार्च को शिवदासपुरा प्रवेश हुआ। आहार के बाद दोपहर को विहार कर 1008 श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर विमल परिसर नांगलिया बिलवा गांव में मंगल प्रवेश हुआ। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पदमपुरा से 5 मार्च [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पदमपुरा से 5 मार्च को शिवदासपुरा प्रवेश हुआ। आहार के बाद दोपहर को विहार कर 1008 श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर विमल परिसर नांगलिया बिलवा गांव में मंगल प्रवेश हुआ। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर</strong>। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पदमपुरा से 5 मार्च को शिवदासपुरा प्रवेश हुआ। आहार के बाद दोपहर को विहार कर 1008 श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर विमल परिसर नांगलिया बिलवा गांव में मंगल प्रवेश हुआ। 6 मार्च को आचार्य संघ की आहार चर्या बिलवा दिगंबर जैन मंदिर में होगी। 5 मार्च को प्रातः श्रीजी के अभिषेक के बाद जयपुर के अनेक मंदिरों के समाज जनों ने आचार्य श्री के दर्शन कर अपनी अपनी कॉलोनी मंदिर पधार कर धर्मलाभ देने के लिए निवेदन किया। ग्राम चंदलाई के सुमति, निर्मल छाबड़ा ने समाधिस्थ मुनि शिष्य देवेश सागर जी की जन्म नगरी पधारने का निमंत्रण दिया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-101168" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-300x223.jpg" alt="" width="300" height="223" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-300x223.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-1024x762.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-768x572.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-990x737.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029.jpg 1240w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong> इंजीनियर युवा ने लिया शुद्ध जल ग्रहण का नियम</strong></p>
<p>गुरुभक्त राजेश पंचोलिया इंदौर के अनुसार सनावद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित 19 महाव्रती की जन्मभूमि है। त्याग वैराग्य, संयम की गौरव शाली परम्परा में सनावद के 33 वर्षीय नवयुवक इंजीनियर शानिल सुपुत्र संगीता श्रीमंदर जैन (बडूद )सनावद ने शिवदासपुरा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से यज्ञोपवीत जनेऊ धारण कर आजीवन शुद्ध जल ग्रहण करने का नियम लेकर आचार्य श्री को आहार भी दिया।</p>
<p><strong>जब तक ममता है तब तक संसार है </strong></p>
<p>इस अवसर पर श्रीमंदर( पापा), राजा (चाचा), संगीता (मम्मी) सपना ( चाची) भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। ब्रह्मचारी लोकेश गजराज ने बताया कि दोपहर को प्रवचन सार ग्रन्थ के स्वाध्याय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि संसारी प्राणी मोह के वशीभूत होकर संसार में परिभ्रमण करता है। यह मेरी माता,पत्नी, घर भाई,पुत्र, पिता,मेरी धन दौलत है। मेरा सुख है, इस प्रकार ममता, मोह,राग रूपी अंधेरे के वश में होकर ऐसा प्राणी सुख प्राप्ति के कारण रूप अपने हित से दूर रहता है। संसारी प्राणी अपनी आत्मा के कल्याण से विमुख होकर रागद्वेष के भीतर पड़ा रहता है और मुक्ति के कारण विकार रहित होकर जिनेंद्र के वचनों में रमन नहीं करता है। इस तरह जब तक ममता है तब तक संसार है संसार के दु:खों को भ्रमण का कारण जानकार इससे ममता छोड़कर अपने शुद्ध आत्मा स्वरूप में स्थित होकर निजानंद का लाभ करना चाहिए।</p>
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		<title>सिद्धचक्र महामंडल विधान में 256 अर्घ्य समर्पित किए : सामूहिक रूप से सभी इंद्र-इंद्राणियो ने अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/256_offerings_were_made_in_the_siddhachakra_mahamandal_ritual/</link>
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		<pubDate>Mon, 02 Mar 2026 06:06:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में रविवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के तहत श्री शांतिनाथ भगवान जी का अभिषेक हुआ और 256 अर्घ्य समर्पित किए गए। आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह खबर&#8230; आगरा। नगर में श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में रविवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के तहत श्री शांतिनाथ भगवान जी का अभिषेक हुआ और 256 अर्घ्य समर्पित किए गए। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> नगर में श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में रविवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के तहत श्री शांतिनाथ भगवान जी का अभिषेक हुआ और 256 अर्घ्य समर्पित किए गए। पूजन में सामूहिक रूप से सभी इंद्र-इंद्राणियो ने अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त किया। संगीतमय विधान में संगीतकार विमल जैन एण्ड पार्टी के द्वारा मधुर से संगीतकार ने साथी कलाकारों द्वारा संगीतमय पूजन और विधान कराया। अपनी मनमोहक आवाज से पूजन और विधान में इंद्र और इंद्राणियों को झूमने पर मजबूर कर देते हैं।</p>
<p><strong>हमारे अच्छे कर्मों को आने का सहारा बन जाते हैं</strong></p>
<p>विधान के अंतर्गत बाल ब्रह्मचारी पीयूष भैया ने बताया कि कर्म सहित संसारी जीव हम सभी शुभ-अशुभ कर्मों के अधीन हैं। शुभ और अशुभ कर्म भी हमारे द्वारा उपार्जित किए जाते हैं। हम जैसे जैसे भाव करते हैं। वैसे-वैसे कर्मों का आगमन होता है। कर्मों का आना-जाना हमारे भावों पर ही आधारित है। यदि हम घर में दुकान अच्छे भाव करते हैं तो वह हमारे अच्छे कर्मों को आने का सहारा बन जाते हैं और यदि हम मंदिर में गुरु चरणों में बैठकर भाव करते हैं तो वह भाव हमारे पाप कर्मों को इकत्रित करते हैं। जैसे कर्म हम करते उसका वैसा ही फल भोगना पड़ता है।</p>
<p><strong>कर्म गरीब अमीर को नहीं देखते</strong></p>
<p>बाल ब्रह्मचारी पीयूष भैया ने कहा कि आप किसी से डरे या नहीं पर कर्मों से हमेशा डरना क्योंकि कर्मों के दरबार में पक्षपात नहीं होता l कर्म कभी छोटे बड़े जा भेद नहीं करते। जब कर्म उदय में आते हैं तो ग़रीब अमीर को नहीं देखते। श्री राम भगवान के जब कर्म उदय में आए तो राजपाठ को छोड़ चौदह वर्ष का वनवास भोगना पड़ा। जंगल-जंगल भटकना पड़ा। कितनी यातनाएँ पीड़ा सहन करनी पड़ी l जैन धर्म में ईसा आता है। भगवान प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ प्रभु ने पूर्व भव में खेत में हल चलाते समय छह घड़ी के लिए बैलों के मुख में रस्सी बाध दी थी ताकि वह हरि घास खेत की फसल ना खा पाए। जब कर्म बंधा तो तीर्थंकर पर्याय में उन्हें भी छह महीने भोजन नसीब नहीं हुआ। राजा श्रीपाल ने और सात सौ उप राजाओं ने एक मुनि का अनादर कर उनके शरीर पर थूक दिया था। जब बह कर्म उदय में आया तो सात सौ साथियों के साथ श्रीपाल को शरीर में कुष्ठ निकल आया। उन्होंने एक मुनि पर थूका था। सारी दुनिया ने उन सभी पर थूका। हमेशा अच्छे कर्म करते रहो। भगवान पल-पल आपका साथ देगा,आपके साथ रहेगा।</p>
<p>इस मौके संयोजक अशोककुमार जैन, अध्यक्ष राजेश बैनाड़ा, मंत्री विजय जैन निमोरब, अरुण जैन, महेश चंद जैन, अनिल आदर्श जैन, सतेंद्र जैन, राकेश जैन, सतेंद्र जैन राम प्रकाश जैन, अतुल जैन, प्रमोद जैन, विवेक जैन, अंकित जैन, संजीव जैन मीडिया प्रभारी राहुल जैन और सकल जैन समाज मौजूद था।</p>
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		<title>अर्घ्य 128 कर्म दोष रहित करने के लिए चढ़ाए जाते हैं : श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7 में चल रहा श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान </title>
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		<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 13:39:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में शनिवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के पांचवे दिन विधान के अंतर्गत भगवान महावीर का अभिषेक हुआ एवं शांतिधारा हुई। आगरा से पढ़िए, यह खबर&#8230; आगरा। नगर के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में शनिवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के पांचवे दिन विधान के अंतर्गत भगवान महावीर का अभिषेक हुआ एवं शांतिधारा हुई। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> नगर के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में शनिवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के पांचवे दिन विधान के अंतर्गत भगवान महावीर का अभिषेक हुआ एवं शांतिधारा हुई। बाल ब्रह्मचारी पीयूष भैया जी जबलपुर के निर्देशन में विधान में 128 अर्घ्य चढ़ाये गए l ये 128 अर्घ्य 128 कर्म दोष रहित करने के लिए चढ़ाये जाते हैं। पूजन में सामूहिक रूप से सभी इंद्र-इंद्राणियो ने अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त किया l संगीतमय विधान में संगीतकार विमल जैन एंड पार्टी के द्वारा मधुर से संगीतकार ने साथी कलाकारों द्वारा संगीतमय पूजन और विधान कराया जा रहा है और वो अपनी मनमोहक आवाज से पूजन और विधान में इंद्रों और इंद्राणियों को झूमने पर मजबूर कर देते हैं।</p>
<p><strong> भगवान की भक्ति कभी बेकार नहीं जाती</strong></p>
<p>बाल ब्रह्मचारी पीयूष शास्त्री ने बताया कि सिद्धचक्र विधान में विशेष रूप से सिद्धो की आराधना की जाती है सिद्ध भगवान आठ कर्मो से रहित होते है। संसारी जीव कर्मो के चक्र में फंसकर दुखी होता है और वह संसार में भटकता रहता है। प्रभु की आराधना प्रभु बनने के लिए की जाती है। भगवान की भक्ति कभी बेकार नहीं जाती। यदि नारकी जीव भी भगवान की भक्ति करता पशु पक्षी भी करते हैं। देवता भी करते हैं। किसकी भक्ति कभी निष्फल नहीं जाती। भक्ति में श्रद्धा ज्यादा और प्रर्दशन कम होना चाहिए। श्रद्धा हनुमान जी की तरह होनी चाहिए। श्रीराम के प्रति पूरा जीवन ही समर्पित कर दिया था। समर्पण का नाम ही श्रृद्धा है, कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। प्रभु को पाने के लिए अपना अहंकार खोना पड़ेगा।भक्ति करते रहो एक ना एक दिन प्रभु ज़रूर मिलेंगे l</p>
<p><strong>यह समाजजन मौजूद रहे</strong></p>
<p>इस मौके संयोजक अशोककुमार जैन, अध्यक्ष राजेश बैनाड़ा, मंत्री विजय जैन निमोरब, कोषाध्यक्ष मगन कुमार, अरुण जैन, महेशचंद जैन, अनिल आदर्श जैन, सतेंद्र जैन, राकेश जैन, सतेंद्र जैन, रामप्रकाश जैन, अतुल जैन, प्रमोद जैन, विवेक जैन, अंकित जैन, संजीव जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन और सकल जैन समाज मौजूद था। मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि एक मार्च को पीयूष भैया के सानिध्य में सुबह 8 बजे से शांतिधारा, सिद्धचक्र महामंडल विधान होगा l</p>
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		<title>आगरा के जयपुर हाउस में हुआ श्री मुनिसुव्रतनाथ विधान : मिला मेडिटेशन गुरु उपाध्याय संघ का मंगल सानिध्य </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 12:36:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जयपुर हाउस स्थित टीचर्स कॉलोनी के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसाम्यसागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव शनिवार को श्रद्धाभाव से मनाया गया। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230; आगरा। जयपुर हाउस स्थित टीचर्स [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जयपुर हाउस स्थित टीचर्स कॉलोनी के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसाम्यसागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव शनिवार को श्रद्धाभाव से मनाया गया। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> जयपुर हाउस स्थित टीचर्स कॉलोनी के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसाम्यसागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव शनिवार को श्रद्धाभाव से मनाया गया। इस पावन अवसर पर श्री मुनिसुव्रतनाथ विधान हुआ।</p>
<p>कार्यक्रम के अंतर्गत सर्वप्रथम भक्तों ने उपाध्यायश्री के मुखारविंद से उच्चारित मंत्रों द्वारा प्रभु का अभिषेक एवं वेहद शांतिधारा की। पंडित राकेश जैन शास्त्री के कुशल निर्देशन में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने अष्ट द्रव्यों के साथ मंडलों पर अर्घ्य अर्पित कर श्री मुनिसुव्रतनाथ विधान की मांगलिक क्रियाएं संपन्न कीं। विधान के दौरान सभी भक्तों ने निर्वाण कांड का वाचन कर प्रभु के समक्ष निर्वाण लाडू अर्पित किया। सायंकाल की बेला में जयपुर हाउस जैन समाज द्वारा श्री सर्वोतोभद्र जिनालय बलकेश्वर में आगामी अप्रैल माह में होने वाले पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत पारसदास जैन एवं स्नेहलता जैन को प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।इसी उपलक्ष्य में उनकी चौथी गोदभराई एवं सम्मान समारोह उपाध्यायश्री के सानिध्य में उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ।इसके पश्चात उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने मेवा,किशमिश फल एवं अखरोट से तीर्थंकर माता की गोद भराई की तथा तीर्थंकर पिता का तिलक, माला एवं दुपट्टा पहनाकर स्वागत एवं सम्मान किया गया।इस अवसर पर मंदिर अध्यक्ष राकेश जैन पर्देवाले,दीपक जैन, अजय जैन,नीरज जैन जिनवाणी, पंकज जैन,अजय बैनाड़ा,राजीव जैन,राहुल जैन,बॉबी जैन,अखिल जैन,अंकेश जैन,अमित जैन,विकास जैन,प्रियंक जैन,संजीव जैन,मजीत जैन,अजित जैन सहित समस्त जयपुर हाउस जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>आगरा शांतिनाथ जैन मंदिर में भव्य क्षमावाणी पर्व और 108 दीपों से आरती : जलयात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पर्यूषण पर्व का समापन </title>
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		<pubDate>Mon, 15 Sep 2025 11:59:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा के श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और क्षमावाणी पर्व मनाया गया। 108 दीपकों से भव्य आरती, जलयात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पर्यूषण पर्व का समापन हुआ। पढ़िए राहुल जैन की रिपोर्ट… आगरा के सेक्टर 7 आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा स्थित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आगरा के श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और क्षमावाणी पर्व मनाया गया। 108 दीपकों से भव्य आरती, जलयात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पर्यूषण पर्व का समापन हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राहुल जैन की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>आगरा के सेक्टर 7 आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में रविवार को धार्मिक उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण में कई कार्यक्रम आयोजित हुए। सबसे पहले श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। इसके बाद क्षमावाणी पर्व का आयोजन किया गया।</p>
<p>मंदिर प्रांगण में भगवान शांतिनाथ की भव्य आरती 108 दीपकों से संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने जलयात्रा में उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह जलयात्रा मंदिर से प्रारंभ होकर बैंडबाजों के साथ शिवालिक कैम्ब्रिज स्कूल होते हुए पुनः मंदिर पर संपन्न हुई। पंडित आशुतोष शास्त्री और अंशुल शास्त्री ने प्रवचन में कहा कि क्षमावाणी पर्व का महत्व तभी है जब हम मन की कटुता और कलुषता को दूर करें। क्षमा का दीपक हमारे भीतर सदैव प्रज्वलित रहना चाहिए जिससे हम धर्म और सौम्यता के मार्ग पर आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि माफी मांगने से बड़ा माफ करने वाला होता है, अतः क्षमाभाव को आत्मसात करना ही सच्चे पर्व की सार्थकता है।</p>
<p>आरती और विधान के बाद पर्यूषण पर्व 2024 का समापन समारोह भी आयोजित हुआ। इसमें दशलक्षण पर्व पर प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाली संस्थाओं, त्यागी वृत्ति सम्मान, सम्यगदर्शन महिला मंडल, शांतिनाथ पाठशाला, सखी बहु मंडल, जैन समाज, जैन मिलन सिद्धार्थ, जैन मिलन अहिंसा, महिला व युवा मंच सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं का सम्मान किया गया।</p>
<p><strong>यह रहे उपस्थित </strong></p>
<p>इस मौके पर श्री शांतिनाथ प्रबंध समिति के पदाधिकारी हीरालाल बैनाड़ा, सुरेश चंद जैन तार वाले, अध्यक्ष राजेश बैनाड़ा, मंत्री विजय जैन निमोरब, मगन चंद जैन, महेश चंद जैन, अरुण जैन, अनिल आदर्श जैन, सतीश जैन, राजेन्द्र जैन, दिलीप जैन, अतुल जैन, संजीव जैन, हेमा जैन, राकेश जैन, जितेश जैन, आलोक जैन, सिद्धांत जैन, मोहित जैन, विपुल जैन, वैभव जैन, प्रशांत जैन, दीपक जैन, अनंत जैन, दीपेश जैन, विकास जैन, आदिश जैन, शुभम जैन, विपिन जैन, संजय जैन, घनश्याम जैन, सिद्धार्थ जैन, दीपांशु जैन, विशाल जैन, अभिषेक जैन सहित बड़ी संख्या में सकल जैन समाज मौजूद रहा।</p>
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		<title>आत्म स्वभाव की अनुभूति करना ही निर्ग्रन्थ साधक का लक्ष्य है- आचार्य विमर्श सागर   चौबीस सन्तो के साथ कामां में धर्म प्रभावना, युवा वर्ग उत्साहित  </title>
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		<pubDate>Sun, 14 Apr 2024 15:08:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के प्रांगण में स्थित विजयमती स्वाध्याय भवन में भावलिंगी संत दिगम्बर जैन आचार्य विमर्श सागर महाराज ने कहा कि निर्ग्रन्थ वीतरागी मुद्रा को धारण बहिरंग के कारण नहीं करते हैं अपितु अंतरंग के कारण यह मुद्रा धारण की जाती है। पढि़ए मनोज जैन नायक की पूरी रिपोर्ट&#8230;    कामां। शांतिनाथ दिगम्बर जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के प्रांगण में स्थित विजयमती स्वाध्याय भवन में भावलिंगी संत दिगम्बर जैन आचार्य विमर्श सागर महाराज ने कहा कि निर्ग्रन्थ वीतरागी मुद्रा को धारण बहिरंग के कारण नहीं करते हैं अपितु अंतरंग के कारण यह मुद्रा धारण की जाती है। <span style="color: #ff0000">पढि़ए मनोज जैन नायक की पूरी रिपोर्ट&#8230;  </span></strong></p>
<hr />
<p><strong> कामां।</strong> शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के प्रांगण में स्थित विजयमती स्वाध्याय भवन में भावलिंगी संत दिगम्बर जैन आचार्य विमर्श सागर महाराज ने कहा कि निर्ग्रन्थ वीतरागी मुद्रा को धारण बहिरंग के कारण नहीं करते हैं अपितु अंतरंग के कारण यह मुद्रा धारण की जाती है। आत्म स्वभाव की अनुभूति करने के लिए ही दिगंबर संत निर्ग्रन्थ वीतरागी मुद्रा को धारण करते हैं वह जानते हैं की आत्म स्वभाव की अनुमति में बाधक तत्व क्या है इसे भेद विज्ञानी साधक अच्छी तरह समझते हैं। क्रोध, मान, माया, लोभ कषाय के परिणाम ही हमारे आत्म शुद्धि में बाधक है और इस अंतरंग तत्व की प्राप्ति हेतु अर्थात आत्म की शुद्धि हेतु वीतराग निर्ग्रन्थ मुद्रा को धारण किया जाता है व्यक्ति परिवार, रिश्ते, संबंध सबको अपना मानता रहता है और उनकी ही सार-संभाल में ही लगा रहता है और यही उसकी आत्म शुद्धि के बाधक तत्व हैं जिसे निर्ग्रन्थ दिगम्बर साधक अच्छी तरह समझता है और अपनी आत्मा में लीन हो जाता है यही भाव लिंगी होता है। आचार्य ने एक प्रश्न की भावलिंगी क्या होता है? का उत्तर देते हुए कहा कि शारीरिक 28 मूलगुण द्रव्य लिंग होते हैं जैसे निग्रन्थ बनना, परिग्रह रहित होना, केशलोंच होना आदि अर्थात् द्रव्य लिंग के आश्रय से निर्ग्रन्थ वीतरागी सन्त आत्म स्वभाव की अनुभूति करते है और यही भावलिंगी कहलाता है। अपने आत्म स्वभाव से परिचित होना अर्थात् स्वयं की आत्मा का कल्याण करने में लीन हो जाना ही भाव लिंगी कहलाता है।</p>
<p>आचार्य ने समाज को समझाते हुए कहा कि किसी भी कार्य को करने का प्रयोजन उचित होना चाहिए। प्रयोजन बदलने से परिणाम बदल जाता है अत: प्रयोजन की औचित्यता अति आवश्यक है, जिसका ध्यान समाज के सभी वर्गों को रखना चाहिए। संतों के आगमन पर समाज में संस्कृति का संरक्षण व जुड़ाव होता है और एक नई ऊर्जा का संचार भी होता है। एक सच्चा संत ही समाज को सही दिशा दिखाने में कारगर होता है। सभी श्रावकों को केवल तीन बातों पर ध्यान रखना चाहिए, सच्चे देव, सच्चे शास्त्र और सच्चे गुरु। वही उसके जीवन का कल्याण कर सकते हैं। धर्म नगरी कामा में आचार्य सुनील सागर महाराज के सानिध्य में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन हुआ उसके सवा माह बाद ही इतने बड़े संघ का आगमन हुआ है जिससे महती धर्म प्रभावना हो रही है।</p>
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		<title>भाईचारे का उदाहरण साधुओं को भी प्रस्तुत करना होगा: आचार्य प्रज्ञासागर</title>
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		<pubDate>Tue, 21 Jun 2022 03:33:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रिपोर्टर- महेंद्रकुमार जैन इन्दौर। समाज में, जनता में भाईचारा स्थापित करने के लिए पहले साधुओं को उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। हम जब भी भाईचारे की बात करें, वह तभी प्रभावकारी होगी जब साधु समाज स्वयं भाईचारे की नजीर प्रस्तुत करेगा। देश में अलग अलग पंथों के लगभग सोलह सौ दिगम्बर जैन साधु हैं। लगभग इतने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;">रिपोर्टर- महेंद्रकुमार जैन</span></p>
<p><strong>इन्दौर।</strong> समाज में, जनता में भाईचारा स्थापित करने के लिए पहले साधुओं को उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। हम जब भी भाईचारे की बात करें, वह तभी प्रभावकारी होगी जब साधु समाज स्वयं भाईचारे की नजीर प्रस्तुत करेगा। देश में अलग अलग पंथों के लगभग सोलह सौ दिगम्बर जैन साधु हैं। लगभग इतने ही अन्य जैन परम्परा के साधु हैं। सभी अपने-अपने प्रवचनों में समाज में भाईचारे की बात करते हैं, किन्तु कभी-कभी ऐसा भी देखने को मिलता है कि जहां एक पंथ-परम्परा के साधु होते हैं तो दूसरे पंथ-परम्परा के साधु पास से ही कन्नी काटकर अन्यत्र चले जाते हैं। निकट में होते हुए भी आपस में मिलते नहीं हैं। समाज में भाईचारा स्थापित करने के लिए साधु-संतों को भी साधु-संस्था में भाईचारा सथापित करना होगा।</p>
<p>ये विचार रविवार को इन्दौर के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर प्रांगण में एक धार्मिक सभा को संबोधित करते हुए आचार्य पुष्पदंत सागर मुनिमहाराज के शिष्य अचार्य प्रज्ञासागर जी मुनिमहाराज ने अपने प्रवचनों में प्रस्तुत किये। इस दौरान आचार्यश्री ने कहा कि,- &#8220;वे श्रवणबेलगोला के महामस्तकाभिषेक के अवसर पर गोम्मटेश बाहुबली गये थे। वहां 380 जैन साधु थे। वहां किसी पंथ की विचारधारा का कोई भेदभाव प्रतीत नहीं हुआ। जो जहां विधि मिली वहां आहार के लिए चले गये। बीसपंथी साधु तेरापंथी चैके में, तेरापंथी साधु बीसपंथी चैके में आहार के लिए चले जाते थे। कहीं कोई भेद-भाव दृष्टिगत नहीं हुआ। उसी तरह देश में सभी पंथों, उपपंथों के साधुओं को करना चाहिए।“</p>
<p>इस दौरान उन्होंने कहा,- “जब साधु ही भाईचारे का अनुपालन नहीं करेंगे तब शिष्यों-श्रावकों, समाज को कैसे भाईचारे का उपदेश दे पायेंगे। साधु एक हैं तो समाज एक है। साधुओं में दुराव है, तो समाज में दुराव होगा होगा। समाज को व्यक्तिगत रूप से भी सोचना होगा कि साधु संस्था के दुराव में कहीं उनकी संलग्नता तो नहीं है। विद्वत् परिषद् के महामंत्री डॉ. महेन्द्रकुमर जैन ‘मनुज’ ने बताया कि, आचार्य प्रज्ञासागर मुनि महाराज से पूर्व आचार्य विशुद्धसागर मुनि महाराज के शिष्य आदित्य सागर मुनि महाराज ने इसी धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, “गुरुसान्निध्य में कुछ बात और थी और अब बिना गुरु के वे तीन साधुओं के साथ भ्रमण कर रहे हैं, यह बात अलग है। किन्तु आचार्य प्रज्ञासागर मुनि महाराज से मिलने के उपरान्त इनसे भी हमें अपने गुरु के समतुल्य स्नेह मिल रहा है।“ उक्त दोनों प्रवचनकर्ता गुरुवर्यों ने कहा कि, मिलन दूध में पानी जैसा होना चाहिए। जब दोनों मिलें तो एकमेक हो जायें।</p>
<p>ज्ञातव्य है कि आचार्य प्रज्ञासागर जी और मुनि श्री आदित्यसागर जी ससंघ का प्रवास इन्दौर की विभिन्न कॉलोनियों में चल रहा है। रविवार को दोनों संघों का मिलन शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर मल्हारगंज में हुआ। इसी अवसर पर दोनों संघों के प्रमुखों ने जनता को अपने प्रवचनों द्वारा संबोधित किया।</p>
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