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	<title>शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>हरि पर्वत में श्रद्धा और उल्लास से हुआ प्रतिमा प्रथम दर्शन एवं तिलक दान उत्सव : भक्ति भाव, मंगलाचरण और जयकारों से गुंजा परिसर </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 14:21:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्मनगरी में शुक्रवार को प्रातःकालीन बेला में श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, एम.डी. जैन इंटर कॉलेज परिसर, हरी पर्वत में प्रतिमा प्रथम दर्शन एवं तिलक दान उत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230; आगरा। धर्मनगरी में शुक्रवार को प्रातःकालीन बेला में श्री शांतिनाथ दिगंबर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धर्मनगरी में शुक्रवार को प्रातःकालीन बेला में श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, एम.डी. जैन इंटर कॉलेज परिसर, हरी पर्वत में प्रतिमा प्रथम दर्शन एवं तिलक दान उत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> धर्मनगरी में शुक्रवार को प्रातःकालीन बेला में श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, एम.डी. जैन इंटर कॉलेज परिसर, हरी पर्वत में प्रतिमा प्रथम दर्शन एवं तिलक दान उत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे और दिव्य वातावरण में धर्मलाभ प्राप्त किया। इस पावन अवसर पर सर्वतोभद्र जिनालय, न्यू आदर्श नगर, बल्केश्वर में विराजमान होने जा रही मूलनायक भगवान आदिनाथ सहित सभी पाषाण 11 प्रतिमाओं के प्रथम दर्शन कर श्रद्धालुओं ने स्वयं को धन्य महसूस किया। मंदिर परिसर में भक्ति भाव, मंगलाचरण और जयकारों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। निर्यापक मुनि श्री विलोक सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विबोध सागर जी मुनिराज के पावन सानिध्य में प्रथम तिलक दान की मंगलमयी क्रिया विधिपूर्वक सम्पन्न हुई। साथ ही पंडित संदीप जैन शास्त्री के निर्देशन में समस्त धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से तिलक अर्पित कर पुण्य अर्जित किया।संतों के आशीर्वचन से उपस्थित जनसमूह को धर्म, संयम और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली। कार्यक्रम के उपरांत सभी प्रतिमाएं गाड़ी के माध्यम से एमडी जैन इंटर कॉलेज से डी ब्लॉक कमला नगर, शालीमार एनक्लेव, कर्मयोगी एनक्लेव होते हुए सर्वतोभद्र जिनालय,बल्केश्वर पहुँचीं।</p>
<p>इस पूरे आयोजन का संचालन सुव्यवस्थित रूप से किया गया। आयोजन श्री आदिनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति,बल्केश्वर (आगरा) द्वारा किया गया। कार्यक्रम ने आगरा में धार्मिक आस्था, एकता और संस्कृति की भव्य झलक प्रस्तुत की। इस मौके पर प्रदीप जैन पीएनसी, रजत जैन, पंकज जैन, राजीव जैन, पारस जैन कांसल,पारसमल जैन,सुमेर पांडया,अंकेश जैन,शुभम जैन,सहित समस्त आगरा जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।</p>
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		<title>रामगंजमंडी में जैन समाज का उग्र प्रदर्शन, मंदिर जीर्णोद्धार और 6 लोगों को अभियुक्त बनाने का विरोध: 800 से अधिक समाज बंधुओं ने रैली निकालकर उप जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, कार्रवाई निरस्त करने की मांग </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 11:01:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रामगंजमंडी में सकल दिगंबर जैन समाज ने शांतिनाथ जैन मंदिर के जीर्णोद्धार और 6 समाजसेवियों को अभियुक्त बनाए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। समाज ने कार्रवाई को निराधार बताते हुए इसे तुरंत निरस्त करने की मांग की। अभिषेक लुहाड़िया की रिपोर्ट  रामगंजमंडी । रामगंजमंडी में सकल दिगंबर जैन समाज ने श्री शांतिनाथ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी में सकल दिगंबर जैन समाज ने शांतिनाथ जैन मंदिर के जीर्णोद्धार और 6 समाजसेवियों को अभियुक्त बनाए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। समाज ने कार्रवाई को निराधार बताते हुए इसे तुरंत निरस्त करने की मांग की। <span style="color: #ff0000">अभिषेक लुहाड़िया की रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> रामगंजमंडी ।</strong> रामगंजमंडी में सकल दिगंबर जैन समाज ने श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के जीर्णोद्धार और 6 प्रतिष्ठित लोगों को अभियुक्त बनाए जाने के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। समाज के लगभग 1200 सदस्यों में से 800 से अधिक लोगों की सक्रिय भागीदारी ने आक्रोश को स्पष्ट रूप से दर्शाया।</p>
<p><strong> जुलूस निकालकर सौंपा ज्ञापन</strong></p>
<p>समाज बंधु मंदिर से जुलूस के रूप में न्यायालय पहुंचे और उप जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान समाज में भारी रोष देखने को मिला।</p>
<p><strong>“अभियुक्त बनाए गए लोग समाजसेवी हैं”</strong></p>
<p>समाज के लोगों का कहना है कि जिन 6 व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया है, वे हमेशा समाज सेवा में आगे रहते हैं और धार्मिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।</p>
<p><strong> मंदिर की संपत्ति को लेकर स्पष्टता</strong></p>
<p>ज्ञापन में बताया गया कि बाजार नंबर 1 स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर का निर्माण फर्म श्री नाथूराम जोरजी और श्रीमती प्यार कुंवर बाई द्वारा किया गया था। बाद में यह मंदिर ट्रस्ट के अंतर्गत आ गया और यह किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है।</p>
<p><strong> ट्रस्ट और अधिकारों का विवरण</strong></p>
<p>मंदिर ट्रस्ट देवस्थान विभाग उदयपुर और कोटा में पंजीकृत है (संख्या 220, दिनांक 31-12-1975)। श्रीमती प्यार कुंवर बाई ने अपने जीवनकाल में ही सभी अधिकार ट्रस्ट को सौंप दिए थे।</p>
<p><strong> खंडित मूर्तियों के कारण जीर्णोद्धार आवश्यक</strong></p>
<p>मंदिर में विराजमान भगवान शांतिनाथ और कुंथुनाथ की प्रतिमाएं खंडित हो चुकी हैं। जैन धर्म अनुसार खंडित मूर्तियों का जीर्णोद्धार या नई प्रतिमा की प्रतिष्ठा आवश्यक होती है।</p>
<p><strong> मुनि श्री की प्रेरणा से लिया गया निर्णय</strong></p>
<p>मुनि श्री 108 निष्पक्ष सागर महाराज और मुनि श्री 108 निष्प्रह सागर महाराज की प्रेरणा से पूरे समाज ने जीर्णोद्धार का निर्णय लिया और लिखित सहमति दी।</p>
<p><strong> नमन रावका की भूमिका पर सवाल</strong></p>
<p>ज्ञापन में यह भी कहा गया कि नमन रावका रामगंजमंडी के निवासी नहीं हैं, फिर भी उन्होंने समाज के लोगों पर शांति भंग का आरोप लगाया, जिसके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।</p>
<p><strong> कार्रवाई निरस्त करने की मांग</strong></p>
<p>समाज ने धारा 126/170 बीएनएसएस के तहत दर्ज प्रकरण संख्या 263/2026 को पूरी तरह निरस्त करने की मांग की है।</p>
<p><strong> 6 लोगों को अभियुक्त बनाए जाने का विरोध</strong></p>
<p>प्रकाश विनायका, चेतन बागड़ियां, धर्मेंद्र लुहाड़िया, राजीव बाकलीवाल, सुरेश बाबरिया और राकेश बाकलीवाल को अभियुक्त बनाए जाने पर समाज ने कड़ा विरोध जताया।</p>
<p>ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने भी इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि ये सभी व्यक्ति समाज के प्रतिष्ठित और सेवाभावी सदस्य हैं।</p>
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		<title>प्रत्येक जीव में आत्मा का वास, राग-द्वेष से बंधते हैं कर्म : मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने माधवगंज में दी धर्म देशना में बताई कर्मों की गति </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/soul_resides_in_every_living_being_karma_is_bound_by_love_and_hatred/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 09:58:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वनस्पति, जल, अग्नि, वायु और पृथ्वी—इन सभी में असंख्य जीव विद्यमान हैं। ये उद्गार मुनि श्री संभवसागर जी महाराज ने श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, माधवगंज में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। विदिशा से राजीव सिंघई की पढ़िए यह खबर&#8230; विदिशा। इस संसार में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वनस्पति, जल, अग्नि, वायु और पृथ्वी—इन सभी में असंख्य जीव विद्यमान हैं। ये उद्गार मुनि श्री संभवसागर जी महाराज ने श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, माधवगंज में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से राजीव सिंघई की पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> इस संसार में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव में आत्मा का वास होता है। वनस्पति, जल, अग्नि, वायु और पृथ्वी—इन सभी में असंख्य जीव विद्यमान हैं। ये उद्गार मुनि श्री संभवसागर जी महाराज ने श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, माधवगंज में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुनि श्री ने एकेन्द्रिय से लेकर पंचेन्द्रिय जीवों की व्याख्या करते हुए कहा कि एक पत्ती में भी अनगिनत जीव होते हैं और जल की एक बूंद में भी असंख्य जीव निवास करते हैं। उन्होंने संसार चक्र की व्याख्या करते हुए बताया कि संसारी जीवों की अवस्था निरंतर बदलती रहती है। अधिकांश जीव एकेन्द्रिय होते हैं, इसलिए उनकी क्रियाएँ सीमित रहती हैं।मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य पंचेन्द्रिय प्राणी है। वह आँखों से देखता है,कानों से सुनता है,नाक से सूंघता है,जीभ से स्वाद लेता है और त्वचा से स्पर्श करता है। इन पाँच इन्द्रियों के माध्यम से ही मनुष्य के भीतर राग और द्वेष उत्पन्न होते हैं। जब कोई अच्छी वस्तु दिखाई देती है तो राग उत्पन्न होता है और अप्रिय बात सुनने पर द्वेष पैदा हो जाता है। उन्होंने इसे एक सुंदर उदाहरण से समझाते हुए कहा कि आज के समय में लोग बिना दुकान पर गए ऑनलाइन सामान मंगा लेते हैं। घर बैठे ऑर्डर किया और होम डिलीवरी हो गई। उसी प्रकार हमारे राग-द्वेष ही कर्मों का &#8216;ऑनलाइन ऑर्डर&#8217; है। जहाँ भी हम हैं और जैसे भी भाव करते हैं, उसी क्षण कर्म आकर आत्मा से चिपक जाते हैं।</p>
<p><strong>जीव जैसा कर्म करता है,वैसा ही अगला भव निश्चित होता है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जैनाचार्यों ने इसलिए सावधानीपूर्वक जीवन जीने की शिक्षा दी है, क्योंकि प्रत्येक क्षण हमारे भाव बन रहे हैं और उन्हीं भावों से कर्मों का बंध हो रहा है। जब तक जीव कर्मों का बंध करता रहता है, तब तक कर्मों की आवक निरंतर चलती रहती है। यदि जीव अपने भावों को शुद्ध कर लें और कर्मों के बंधन को रोक दे तो कर्मों की यह आवक भी रुक सकती है। यही अवस्था ‘संवर’ कहलाती है। उन्होंने कहा कि संसार में सभी जीव अपने-अपने कर्मों के अनुसार चार गतियों में जन्म लेते हैं—नरक गति, तिर्यंच गति (पशु-पक्षी, कीट आदि), मनुष्य गति और देव गति। जीव जैसा कर्म करता है,वैसा ही उसका अगला भव निश्चित हो जाता है।</p>
<p><strong>कर्मों का यह नियम अपने आप कार्य करता है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जब यह शरीर छूटता है, उससे पहले ही जीव अपने अगले भव की “टिकट” काट चुका होता है। संसार की यह व्यवस्था पूर्णतः न्यायपूर्ण और ईमानदार है। यहाँ ऐसा नहीं होता कि किसी ने कहीं और का टिकट लिया हो और कहीं और पहुँच जाए। यदि किसी जीव ने नरक गति के कर्म बाँध लिए हैं, तो उसे नियम से नरक में ही जाना पड़ेगा। कर्मों का यह नियम अपने आप कार्य करता है।</p>
<p><strong>मोक्षमार्ग अपनाएँ या सद्गृहस्थ बनें</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में हमें अत्यंत सावधानीपूर्वक ऐसे कर्म करने चाहिए,जिससे हमारा अगला भव उत्तम बने और हम मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हो सकें। मुनि श्री ने आचार्य श्री के हाइकु—&#8217;धर्म प्रभाव, प्रभावित हुआ क्या? &#8220;बिना विवाह&#8217;</p>
<p>का उल्लेख करते हुए गृहस्थों को उपदेश दिया कि दो ही मार्ग हैं—या तो मोक्षमार्ग अपनाएँ या सद्गृहस्थ बनें। गृहस्थ की जिम्मेदारी है कि वह संतानोत्पत्ति कर अपने कुल को आगे बढ़ाए, जिससे कुल की मर्यादा और समाज की वृद्धि हो सके।उन्होंने बताया कि पंचकल्याणक महामहोत्सव में सभी पात्रों के लिए समिति द्वारा हथकरघा के वस्त्रों की व्यवस्था की गई है। इन वस्त्रों में आचार्य गुरुदेव का आशीर्वाद और &#8216;अपनापन&#8217; है। ये वस्त्र अहिंसक धागों से दिल्ली की तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों द्वारा तैयार किए गए हैं।</p>
<p><strong>भगवान आदिनाथ की पाती सभी को भेजी गई है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने हथकरघा के वस्त्रों के उपयोग की सलाह देते हुए कहा कि ये वस्त्र इको-फ्रेंडली हैं,जो शरीर और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी हैं। इससे स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। उन्होंने कहा कि बर्रो वाले भगवान आदिनाथ की पाती सभी को भेजी गई है। विदिशा नगर का कोई भी परिवार इस महाअनुष्ठान से वंचित नहीं रहना चाहिए, समय कम है लेकिन आश्चर्य की बात है कि सभी कार्य अपने-आप बनते चले जा रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो बर्रो वाले भगवान आदिनाथ की कृपा और गुरुदेव के आशीर्वाद से सभी व्यवस्थाएँ स्वतः पूर्ण हो रही हैं। पंचकल्याणक महा महोत्सव के प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि जैन महाविद्यालय के विशाल प्रांगण में यह आयोजन अत्यंत भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। यहाँ देश और प्रदेश का सबसे सुंदर पंडाल बनाया जा रहा है, जिसमें बैठकर हजारों श्रद्धालु भगवान की अर्चना करेंगे।</p>
<p><strong>घर-घर पंचरंगा ध्वज </strong></p>
<p>समिति द्वारा सभी प्रमुख पात्रों के साथ-साथ सामान्य इंद्र एवं इंद्राणियों के लिए भी “अपनापन”हथकरघा वस्त्र और शुद्ध भोजन की व्यवस्था की गई है। बुकिंग हेतु महिलामंडल एवं कार्यकर्ता गण बर्रो वाले भगवान श्री आदिनाथ की पाती लेकर एवं जैन मिलन के कार्यकर्ता पचरंगा ध्वज लगाने के लिये घर-घर पहुंच रहे हैं, आप उनका स्वागत करें।</p>
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		<title>मोह मिथ्यात्व और अज्ञान ही जीव के भटकाव का मूल कारण : मुनि श्री प्रमाण सागरजी ने बताया सम्यक दर्शन धर्म का मूल आधार </title>
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		<pubDate>Sun, 01 Mar 2026 14:11:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नव-निर्मित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के 5वें दिवस मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने भगवान के कैवल्य ज्ञान के बाद समवसरण की गणधर पीठिका से अत्यंत मार्मिक एवं आध्यात्मिक उद्बोधन दिया। बुढ़ार से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230; बुढ़ार। नव-निर्मित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नव-निर्मित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के 5वें दिवस मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने भगवान के कैवल्य ज्ञान के बाद समवसरण की गणधर पीठिका से अत्यंत मार्मिक एवं आध्यात्मिक उद्बोधन दिया। <span style="color: #ff0000">बुढ़ार से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बुढ़ार।</strong> नव-निर्मित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के 5वें दिवस मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने भगवान के कैवल्य ज्ञान के बाद समवसरण की गणधर पीठिका से अत्यंत मार्मिक एवं आध्यात्मिक उद्बोधन दिया। मुनि श्री ने कहा कि इस अनादि संसार में जीव चारों गतियों और 84 लाख योनियों में निरंतर भटक रहा है,उसके इस भटकाव का मूल कारण उसके अंतर में पलने वाला मोह, मिथ्यात्व और अज्ञान है। उन्होंने नरक गति का वर्णन करते हुए कहा कि वहाँ जीव को असहनीय यातनाएं सहनी पड़ती हैं। कभी उसे कड़ाही में डाला जाता है तो कभी तलवार की तीक्ष्ण धार का सामना करना पड़ता है, मानो हजारों बिच्छुओं ने एक साथ डंक मार दिए हों। नरक से निकलकर जीव कभी एक इंद्रिय, कभी द्वि-इंद्रिय, फिर तिर्यंच गति में भ्रमण करता हुआ मनुष्य जन्म प्राप्त करता है किंतु, मनुष्य जीवन में भी वह कभी भिखारी बनकर कष्ट भोगता है। मुनि श्री ने कहा कि मोह, मिथ्यात्व और अज्ञान आत्मा के प्रबल शत्रु हैं। इन्हीं के कारण जीव अपने आत्मस्वरूप से दूर होकर पंचेंद्रिय विषयों तथा क्रोध, मान, माया, लोभ जैसी कषायों में फँसकर पाप और दुर्गतियों का भागी बनता है।</p>
<p><strong>सम्यक दर्शन ही धर्म का मूल</strong></p>
<p>समवसरण में विराजमान मुनि श्री प्रसाद सागरजी, मुनि श्री शीतलसागर जी, मुनि श्री संधानसागर जी तथा</p>
<p>क्षुल्लक श्री समादर सागर जी महाराज, बाल ब्रह्मचारी अशोक भैया,बाल ब्रह्मचारी अभय भैया</p>
<p>ने भी धार्मिक प्रश्न प्रस्तुत किए। जिनका समाधान मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने औंकार ध्वनि के साथ किया। उन्होंने कहा कि जब तक जीव अपने आत्मस्वरूप को नहीं समझेगा तब तक उसे सम्यक दर्शन की प्राप्ति नहीं हो सकती। भव-बन्धन से मुक्ति का एकमात्र उपाय सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र रूपी रत्नत्रय की पूर्णता है। दर्शन मूलो धम्मो का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि सम्यक दर्शन धर्म का मूल आधार है। बिना सम्यक्त्व के न ज्ञान शुद्ध होता है और न चरित्र।</p>
<p><strong>‘भगवान महावीर द्वार’ का ऐतिहासिक शिलान्यास</strong></p>
<p>पंचकल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर एक और ऐतिहासिक क्षण जुड़ा जब प्रातःकाल मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ससंघ की मंगलमय उपस्थिति में भगवान महावीर द्वार का विधिवत शिलान्यास हुआ। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक जय सिंह मरावी, नगर परिषद अध्यक्षा शालिनी सरावगी एवं परिषद सदस्यों ने श्रद्धा-भक्ति के साथ शिलान्यास किया। धर्ममय वातावरण में जयघोष गूँज उठा। मुनि श्री ने कहा कि</p>
<p>जब कोई नगर में भगवान के नाम के साथ प्रवेश करता है तो उसके सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं। ‘भगवान महावीर द्वार’ केवल निर्माण नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति का प्रतीक बनेगा। इस अवसर पर राज्यमंत्री दिलीप जयसवाल, कलेक्टर केदार सिंह तथा अन्य गणमान्य जनों ने समवसरण में श्रीफल समर्पित किया। भागवत कथा वाचक डॉ. मदनमोहन मिश्र (चित्रकूट धाम) भी उपस्थित रहे।</p>
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		<title>मुनि श्री निष्पक्ष सागरजी एवं मुनि श्री निस्पृह सागर जी का हुआ मंगल प्रवेश : जय जयकार करते हुए बैंड बाजों दिव्यघोष के साथ हुई अगवानी </title>
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		<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 16:18:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के दीक्षित एवं आचार्य श्रीसमयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी महाराज मुनि श्री निस्पृह सागरजी महाराज का शनिवार की बेला में नगर में मंगल आगमन हुआ।रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;  रामगंजमंडी। आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के दीक्षित एवं आचार्य श्रीसमयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के दीक्षित एवं आचार्य श्रीसमयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी महाराज मुनि श्री निस्पृह सागरजी महाराज का शनिवार की बेला में नगर में मंगल आगमन हुआ।<span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> रामगंजमंडी</strong>। आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के दीक्षित एवं आचार्य श्रीसमयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी महाराज मुनि श्री निस्पृह सागरजी महाराज का शनिवार की बेला में नगर में मंगल आगमन हुआ। पूज्य संघ अतिशय क्षेत्र कैथुली से मंगल विहार करते हुए नगर आगमन हुआ।</p>
<p>नगर की सीमा पर पहुंचे ही उन्हें जय जयकार करते हुए बैंड बाजों एवम दिव्यघोष के साथ उन्हें नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर लाया गया। जगह- जगह मुनि संघ का पाद प्रक्षालन करते हुए मंगल आरती करते हुए उनकी अगवानी की गई। जैसे ही मुनि संघ ने शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रवेश किया मंदिर के प्रवेश द्वार पर भव्य आगवानी करते हुए पाद प्रक्षालन एवम मंगल आरती की गई। उसके उपरांत मुनि द्वय ने मूलनायक शांतिनाथ भगवान के दर्शन करते हुए समस्त जिनालय के दर्शन किए इसके उपरांत धर्म सभा हुई धर्म सभा के शुभारंभ में मुनिद्वय के सानिध्य में आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज का पूजन किया गया। धर्मसभा का संचालन प्रशांत जैन शास्त्री एवं राजकुमार गंगवाल ने किया। सभी समाजबंधुओं ने मुनि द्वय के चरणों में आदिनाथ जयंती आपके सानिध्य में आयोजित हो इस हेतु निवेदन किया। मंगल प्रवचन से पूर्व आर्वी जैन ने नृत्य करते हुए मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। मंगल प्रवचन देते हुए मुनि श्री निस्पृह सागर जी महाराज ने कहा कि घोड़े पर अपने हाथ फेरो तो उसे अच्छा लगता है और इस प्रकार यदि मनुष्य की कोई प्रशंसा करता है तो उसे भी अच्छा लगता है आप सभी प्रशंसनीय है रामगंजमंडी का नाम सुन रखा था काफी समय से मुनि श्री ने श्रद्धा के विषय में बोलते हुए कहा कि श्रद्धा को यदि विवेक की आंख मिल जाए तो उससे रत्नत्रय की पूर्ति में विलंब नहीं होगा। ज्ञान का पर्याप्त होना ही काफी नहीं है विवेक भी होना चाहिए उपादान में भी शक्ति होना चाहिए मिट्टी में घड़े बनने की यदि योग्यता नहीं है तो कुछ नहीं है उसमें योग्यता होनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने एक लोकोक्ति के माध्यम से कहा मेहनत करना जिनकी आदत बन जाती है वहां पर जो फल उसे प्राप्त होता है वही उसका मुकद्दर बन जाती है।</p>
<p><strong>आत्मा की चिंता करो स्वयं की चिंता नहीं </strong></p>
<p>महाराज श्री ने जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने आचरण को छोड़ नहीं पाता यदि वह उसे छोड़ दे तो देखें कि उसका स्वरूप कैसा हो जाता है छोटी-छोटी खुशियों को कुर्बान कर दो फिर देखो बड़ी खुशियां अपने आप सुशोभित हो जाएगी। पंचेंद्रीय के विषयों का त्याग करो। जैसी संगत वैसी रंगत जैसी संगत में रहोगे वैसा ही प्रभाव दिखता है।</p>
<p>आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का जिक्र करते हुए कहा कि संयम का सुख प्राप्त करना है &#8220;डूबो मत डुबकी लगाओ&#8221; आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के विषय में कहा कि हमने उनमें डुबकी लगाई उन डुबकी की बूंदों ने हमें सराबोर किया आचार्य श्री के तप का प्रताप है कि गुरुवर यहां नहीं आए लेकिन उनकी खुशबू यहां तक आती है। आचार्य श्री का औरा इतना ज़बरदस्त था कि उन्होंने संपूर्ण भारत को प्रभावित किया अपने शिष्यों को सब जगह भेजा कहा सभी जीवो का कल्याण करो।</p>
<p>जो गुरु की आज्ञा का पालन करेगा वहीं लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा : मुनि श्री निष्पक्ष सागरजी महाराज</p>
<p>मुनि श्री निष्पक्ष सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि युग बदलते हैं सृष्टि में परिवर्तन आता है समय के प्रभाव से अपने अनुसार होती है। गुरु महिमा का बखान करते हुए कहा कि आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज की कृपा हम पर सदा बरसती रहती है उन्होंने कहा कि जो भी गुरु आज्ञा का पालन करेगा वहीं लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। आपको आत्म राम बनने का प्रयास करना है जो राम के दास हैं वही राम के खास हैं रामगंज मंडी का मतलब बताते हुए उन्होंने कहा कि रामगंजमंडी का मतलब है राम के पास आने का पुरुषार्थ करो। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि दुनिया धन की दास है लेकिन धन किसी का दास नहीं है धन वैभव शक्ति पुण्य आत्मा की दास है। इस संसार में दुर्लभ एक जथारथ ज्ञान है। धन कन कंचन राज सुख सबही सुलभ कर जान दुर्लभ है संसार में एक जथारथ ज्ञान।</p>
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		<title>जयपुर हाउस में श्रद्धा और भक्ति से मनाया गया उपाध्याय पदारोहण : दीक्षा दिवस समारोह में भक्ति का दिखा अद्भुत नजारा </title>
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		<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 17:23:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर,जयपुर हाउस में मंदिर स्थापना के 32 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भव्य एवं आध्यात्मिक समारोह का आयोजन किया गया।आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230; आगरा। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर,जयपुर हाउस में मंदिर स्थापना के 32 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भव्य एवं आध्यात्मिक समारोह का आयोजन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर,जयपुर हाउस में मंदिर स्थापना के 32 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भव्य एवं आध्यात्मिक समारोह का आयोजन किया गया।<span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर,जयपुर हाउस में मंदिर स्थापना के 32 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भव्य एवं आध्यात्मिक समारोह का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर उपाध्यायश्री विहसंत सागर जी महाराज का चौथा उपाध्याय पदारोहण दिवस तथा मुनि श्री विश्वसाम्य सागर जी महाराज का मुनि दीक्षा दिवस भक्ति और उल्लास के साथ रविवार को मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। दोपहर 1 बजे से प्रारंभ हुए इस समारोह में जयपुर हाउस जैन समाज सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। संपूर्ण वातावरण भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा। इस अवसर पर सौभाग्यशाली भक्तों ने उपाध्यायश्री एवं मुनिश्री के चरणों का पाद-प्रक्षालन कर शास्त्र भेंट किए। बाहर से पधारे भक्तों ने अष्टद्रव्य की सुसज्जित थालियों के साथ संगीतमय पूजन कर गुरुवरों की आराधना की। आगरा की विभिन्न शैलियों के पदाधिकारियों ने भी उपाध्यायश्री के चरणों में श्रीफल अर्पितकर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>धर्म परंपरा को समाज के नैतिक उत्थान का आधार बताया</strong></p>
<p>अपने मंगल प्रवचन में उपाध्यायश्री विहसंत सागर जी महाराज ने धर्म,संयम,तप और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हुए कहा कि दीक्षा और उपाध्याय पद केवल सम्मान का प्रतीक नहीं,बल्कि आत्मानुशासन, त्याग और समाज को सही दिशा देने की महान जिम्मेदारी है। वहीं मुनिश्री विश्वसाम्य सागर जी महाराज के दीक्षा दिवस पर श्रद्धालुओं ने उनके तप, त्याग और साधना की भावपूर्ण सराहना की तथा पुष्पांजलि अर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>संगीत की प्रस्तुति हेमलता जैन ने दी</strong></p>
<p>भक्ति गीतों,स्तवन एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को धर्ममय बना दिया। समारोह में जयपुर हाउस जैन समाज के गणमान्यजन,स्वास्तिक महिला मंडल,शांतिनाथ महिला मंडल शांतिनाथ युवा मंडल एवं विभिन्न समितियों के पदाधिकारी सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। संगीत की प्रस्तुति हेमलता जैन द्वारा दी गई तथा कार्यक्रम का संचालन दीपक जैन ने किया। इस पावन अवसर पर भारत सरकार के केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल ने गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराते हुए पूज्य गुरुवर के चरणों में वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में संस्कार, संयम,सदाचार और सेवा की भावना को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने धर्म परंपरा को समाज के नैतिक उत्थान का आधार बताते हुए आयोजन समिति को शुभकामनाएं दीं।</p>
<p><strong>यह रहे मौजूद रहे</strong></p>
<p>इस अवसर पर राकेश जैन पर्देवाले, जगदीश प्रसाद जैन,मनोज जैन बाकलीवाल,सुनील जैन ठेकेदार, मनीष जैन ठेकेदार,विमल जैन,जितेंद्र जैन,नीरज जैन जिनवाणी,अजय जैन, रोहित जैन अहिंसा,राजीव जैन,मनोज जैन बल्लो,अशोक जैन,सुमेर पांडया, अमित जैन संजय जैन,पवन जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन सहित समस्त आगरा जैन समाज के श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>सल्लेखना सेविका मिलन समारोह भव्यता पूर्वक सम्पन्न : संपूर्ण भारतवर्ष की जैन समाज के लिए सल्लेखना सेवा मंडल की अनुकरणीय सेवा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Oct 2025 14:23:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सहारनपुर स्थित अहोभाग्य तीर्थ क्षेत्र, जैन बाग में श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में सल्लेखना सेविका मिलन समारोह का भव्य आयोजन हुआ। यह आयोजन जैन महिला सल्लेखना सेवा मंडल सहारनपुर की मुख्य शाखा एवं 19 उपशाखाओं के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। पढ़िए पारस जैन “पार्श्वमणि” की रिपोर्ट… मुख्य अतिथि पारस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सहारनपुर स्थित अहोभाग्य तीर्थ क्षेत्र, जैन बाग में श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में सल्लेखना सेविका मिलन समारोह का भव्य आयोजन हुआ। यह आयोजन जैन महिला सल्लेखना सेवा मंडल सहारनपुर की मुख्य शाखा एवं 19 उपशाखाओं के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पारस जैन “पार्श्वमणि” की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>मुख्य अतिथि पारस जैन ‘पार्श्वमणि’ पत्रकार कोटा का मंगलाचरण से शुभारंभ</p>
<p>कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार कोटा के मंगलाचरण से हुआ। उन्होंने अपनी सुरीली आवाज़ में स्वरचित मंगलाचरण पाठ कर वातावरण को भावविभोर कर दिया। समारोह का संचालन अध्यक्षा डॉ. रेणु जैन ने अपनी ओजस्वी वाणी में किया, जबकि अतिथियों का स्वागत कोषाध्यक्ष अरुण जैन ने किया।</p>
<p><strong>महिला वक्ताओं ने सल्लेखना साधना की गहराई पर रखे विचार</strong></p>
<p>शशी जैन, शोभा जैन, रीना जैन, वीना जैन और रेखा जैन ने सल्लेखना की पवित्र साधना और अंतिम क्षणों में किए जाने वाले त्याग पर अपने विचार रखे। इस दौरान जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन ने कहा कि महिलाओं द्वारा धर्मप्रभावना का यह कार्य अद्भुत और प्रेरणादायक है।</p>
<p>आचार्य विमर्श सागर जी महाराज ने कहा — “सल्लेखना सेवा मंडल भारत में प्रथम प्रेरणा स्रोत”</p>
<p>आचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि सल्लेखना सेवा मंडल का यह आयोजन सम्पूर्ण भारत के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि यह मंडल उन माताओं और बहनों के लिए कार्य करता है जिनका अंत निकट होता है, और उनके अंतिम क्षणों को शांतिपूर्ण बनाने का प्रयास करता है। उन्होंने बताया कि सल्लेखना समाधि जैन धर्म का परम फल है और णमोकार मंत्र का उच्चारण मृत्यु के समय आत्मा को मोक्ष मार्ग की दिशा में ले जाता है।</p>
<p><strong>धार्मिक वातावरण में गूंजा ‘जिनागम पंथ जयवन्त हो’ का उद्घोष</strong></p>
<p>समारोह के अंत में “जिनागम पंथ जयवन्त हो” की जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान की संस्थापिका डॉ. रेणु जैन ने अपने कुशल संचालन से कार्यक्रम को सफलता के शिखर पर पहुंचाया।</p>
<p><strong>गुरुदेव का मंगल आशीर्वाद</strong></p>
<p>आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज ने सल्लेखना सेवा मंडल की इस प्रेरणादायक पहल की प्रशंसा करते हुए सभी को मंगलमय आशीर्वाद प्रदान किया।</p>
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		<title>श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में हुई मां पद्मावती की भव्य आराधना : श्रद्धालुओं ने पंचामृत अभिषेक और भजन-भक्ति से किया समर्पण </title>
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		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 13:21:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रामगंजमंडी के शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में नवरात्रि अष्टमी के अवसर पर मां पद्मावती की भव्य अर्चना हुई। पंचामृत अभिषेक, मंत्रोच्चार और भजन के साथ भक्तों ने भक्ति भाव से पूजा की। पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट… रामगंजमंडी नगर के श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार की प्रातः बेला में नवरात्रि अष्टमी के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रामगंजमंडी के शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में नवरात्रि अष्टमी के अवसर पर मां पद्मावती की भव्य अर्चना हुई। पंचामृत अभिषेक, मंत्रोच्चार और भजन के साथ भक्तों ने भक्ति भाव से पूजा की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>रामगंजमंडी नगर के श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार की प्रातः बेला में नवरात्रि अष्टमी के पावन पर्व पर मां पद्मावती की भव्य अर्चना संपन्न हुई।</p>
<p>जानकारी देते हुए श्री महेश कटारिया ने बताया कि सर्वप्रथम माता पद्मावती भक्त मंडल द्वारा पंडित जयकुमार शास्त्री के निर्देशन में मूलनायक 1008 श्री शांतिनाथ भगवान का भव्य अभिषेक और शांति धारा की गई। उसके उपरांत भगवान को अर्घ समर्पित कर अनुष्ठान की आज्ञा ली गई। इसके बाद नगर में विराजित परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज को अर्घ समर्पित कर उनका आशीर्वाद लिया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसे रितु चांदवाड ने किया।</p>
<p>तत्पश्चात इंदौर से पधारे पंडित श्री राकेश जैन रत्नाकर के निर्देशन में माता पद्मावती का 1008 मंत्रों से भव्य अर्चन पुष्प और कुमकुम के द्वारा संपन्न हुआ। प्रथम अर्चन का सौभाग्य श्रीमती नमिता महेश कटारिया और परिवार को प्राप्त हुआ। अर्चन के पश्चात माता का भव्य पंचामृत अभिषेक (दूध, दही, घृत, नारियल, जल और अष्टगंध) किया गया और शांति धारा संपन्न हुई।</p>
<p>कार्यक्रम में माता के भजनों से पूरे वातावरण को भक्ति रस से भर दिया गया। अंत में माता रानी का श्रृंगार श्रीमती डिंपल बडजात्या, जितेंद्र वेद और विकास जैन द्वारा संपन्न किया गया। उपस्थित सभी महिलाओं ने माता रानी की गोद भराई कर भक्ति उमंग से माता रानी की भव्य आरती की।</p>
<p>अंत में मां पद्मावती ग्रुप ने सभी अतिथियों को प्रसाद वितरण किया। हर कार्यक्रम में सक्रिय सहयोग देने के लिए श्री अभिषेक जैन लुहाड़िया को सम्मानित किया गया।</p>
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		<title>धार्मिक प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता के परिणाम घोषित : जयपुर में जैन मैत्री संघ ने विजेताओं को सम्मानित किया </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Sep 2025 16:38:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बॉब रिटायर्ड जैन मैत्री संघ, जयपुर द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता का परिणाम मालवीय नगर स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में घोषित हुआ। विजेताओं को पुरस्कृत कर प्रेरित किया गया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… जयपुर स्थित बॉब रिटायर्ड जैन मैत्री संघ द्वारा 28 अगस्त से 6 सितम्बर 2025 तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बॉब रिटायर्ड जैन मैत्री संघ, जयपुर द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता का परिणाम मालवीय नगर स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में घोषित हुआ। विजेताओं को पुरस्कृत कर प्रेरित किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>जयपुर स्थित बॉब रिटायर्ड जैन मैत्री संघ द्वारा 28 अगस्त से 6 सितम्बर 2025 तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता का परिणाम 12 सितम्बर को त्रैमासिक कार्यक्रम में घोषित किया गया। यह आयोजन श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर-3, मालवीय नगर में हुआ।</p>
<p>प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर अंजू नीरज सेठी, द्वितीय स्थान पर सुरेश मीनू जैन (रघुविहार) और तृतीय स्थान पर शशि अनिल जैन रहे। इसके अतिरिक्त चार प्रतिभागियों — मुनेन्द्र ज्योति गंगवाल, सरोज रमेश काला, उषा विमल जैन और प्रेम वीरेंद्र कासलीवाल को सांत्वना पुरस्कार दिए गए। साथ ही 11 प्रतिभागियों को विशेष प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्रदान किए गए।</p>
<p>कार्यक्रम के संयोजक श्री महावीर जैन एवं श्रीमती मंजू जैन सेवावाले रहे। संघ के संस्थापक अध्यक्ष पी. सी. जैन ने विजेताओं को शुभकामनाएं दीं, संघ अध्यक्ष श्री आर. के. जैन ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया, वहीं संघ सचिव श्री अभिनन्दन जैन ने जैसे ही परिणामों की घोषणा की, पूरा सभा कक्ष तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मुख्य संयोजक महावीर जैन ने विजेताओं को बधाई दी और भविष्य में और अधिक सहभागिता की प्रेरणा दी। इस अवसर पर संघ परिवार ने सभी प्रतिभागियों के उत्साह और समर्पण को सराहा।</p>
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		<title>त्याग धर्म का संदेश देते हुए हुआ सामूहिक पूजन और आरती : आगरा जैन मंदिर में मुनियों के अभयदान और त्याग धर्म पर प्रवचन </title>
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		<pubDate>Fri, 05 Sep 2025 10:11:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा के शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर 7 आवास विकास कालोनी सिकंदरा में पर्युषण महापर्व के अवसर पर आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म का आयोजन हुआ। पंडित अंशुल जैन शास्त्री ने मुनियों के दान और अभयदान की महत्ता बताई। कार्यक्रम में अभिषेक, शांतिधारा, सामूहिक आरती, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और समाजजनों की सहभागिता रही। पढ़िए राहुल जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आगरा के शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर 7 आवास विकास कालोनी सिकंदरा में पर्युषण महापर्व के अवसर पर आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म का आयोजन हुआ। पंडित अंशुल जैन शास्त्री ने मुनियों के दान और अभयदान की महत्ता बताई। कार्यक्रम में अभिषेक, शांतिधारा, सामूहिक आरती, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और समाजजनों की सहभागिता रही। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राहुल जैन की खास रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा, 4 सितम्बर।</strong> शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, आवास विकास कालोनी, सिकंदरा में पर्युषण महापर्व के अंतर्गत आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म का आयोजन बड़ी श्रद्धा और भक्ति भाव से किया गया। श्री अंशुल जैन शास्त्री (मथुरा) के निर्देशन में विधिविधान से पूजा अर्चना सम्पन्न हुई। सर्वप्रथम मूलनायक भगवान श्री शांतिनाथ जी का स्वर्ण कलश से अभिषेक किया गया, तत्पश्चात इन्द्रों द्वारा रजत मुकुट, माला और झारियों से शांतिधारा की गई। इसके उपरांत सामूहिक आरती और संगीतमय पूजन से वातावरण भक्तिमय बना।</p>
<p><strong>गृहस्थों के दान से भी श्रेष्ठ माना </strong></p>
<p>पंडित अंशुल जैन शास्त्री ने प्रवचन में बताया कि मुनिराज स्वयं भी दान करते हैं और उनका दान गृहस्थों के दान से भी श्रेष्ठ माना जाता है। वे अहिंसा महाव्रत धारण कर सब जीवों को अभयदान देते हैं। उनकी शांति का प्रभाव जीवों को हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित करता है। उदाहरण स्वरूप श्रेणिक राजा द्वारा भेजे गए कुत्ते भी यशोधर मुनि के समीप पहुँचकर शांत हो गए थे। मुनिराज आत्मज्ञान, पुण्य-पाप और मोक्षमार्ग का बोध कराकर सभी को वास्तविक दान प्रदान करते हैं।</p>
<p>शांतिनाथ महिला मंडल द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिनसे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर राजेश बैनाड़ा, विजय जैन, महेश चंद जैन सहित मंदिर प्रबंध कमेटी के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि 5 सितम्बर को उत्तम आकिंचन्य धर्म का आयोजन प्रातः 8 बजे से पूजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ होगा।</p>
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