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	<title>शांतिधारा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>शांतिधारा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि श्री के सानिध्य में मनाया निर्वाण महोत्सव: गुरु महोत्सव के साथ मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज का दीक्षा महोत्सव पर होगा गुणानुवाद  </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:48:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बुधवार प्रातः श्री दिगंबर जैन समाज के सानिध्य में जैन मंदिर में श्री शांतिनाथ भगवान का महमस्तिकाभिषेक और विशेष गुरु मुख से शांतिधारा कराई गई। इसके बाद कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। झुमरी तिलैया से पढ़िए, राज कुमार जैन अजमेरा और नवीन जैन की यह खबर&#8230; झुमरीतिलैया। बुधवार प्रातः श्री दिगंबर जैन समाज के सानिध्य में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बुधवार प्रातः श्री दिगंबर जैन समाज के सानिध्य में जैन मंदिर में श्री शांतिनाथ भगवान का महमस्तिकाभिषेक और विशेष गुरु मुख से शांतिधारा कराई गई। इसके बाद कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। <span style="color: #ff0000">झुमरी तिलैया से पढ़िए, राज कुमार जैन अजमेरा और नवीन जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>झुमरीतिलैया।</strong> बुधवार प्रातः श्री दिगंबर जैन समाज के सानिध्य में जैन मंदिर में श्री शांतिनाथ भगवान का महमस्तिकाभिषेक और विशेष गुरु मुख से शांतिधारा कराई गई। इसके बाद कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। जिसमें सर्व प्रथम सौधर्म इंद्र प्रदीप-मीरा जैन छाबड़ा के द्वारा ध्वजारोहण किया गया।मुनि श्री भाव सागर जी मुनिराज को कमंडल अर्पण करने का सौभाग्य प्रदीप-मीरा जैन छाबड़ा, संजय-बबीता जैन गंगवाल के परिवार को प्राप्त हुआ। समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञान सागर जी और उनके परम प्रभावक शिष्य समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर जी के चरण चिंह का प्राण प्रतिष्ठा नगर में प्रथम बार हुआ। मुनिद्वय ने 84 मंत्रों के साथ पूजा-पाठ आदि जाप के साथ प्रतिष्ठा करवाई। अष्ठ कुमारी ने भी पूजन किया। ये चरण चिन्ह पाटनी परिवार आरके मार्बल किशनगढ़ (राजस्थान) ने दिए जो देवघर जैन मंदिर में स्थापित होंगे।</p>
<p><strong>24 भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाना चाहिए</strong></p>
<p>मुनिश्री धर्म सागर जी मुनिराज और मुनि श्री भाव सागर जी मुनिराज ने इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मेरा भी सौभाग्य है कि 22 वर्ष में प्रथम बार महाकवि आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के चरण चिह्न की प्रतिष्ठा का अवसर प्राप्त हुआ। इस तिथि में दीक्षित सभी मुनिराज स्वस्थ रहें एवं जिन शासन की प्रभावना करते रहें। श्रीअभिनंदन नाथ भगवान का महोत्सव मनाया गया। यह भी सौभाग्य की बात है। 24 भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाना चाहिए। मोक्ष की प्रस्तावना, कर्मों की समीक्षा, समता का उद्घाटन है। शून्य से शिखर तक की यात्रा है। आत्म उत्थान का मुकाम है। निर्माण से निर्वाण तक की यात्रा है दीक्षा। जितने भी साधु इस तिथि में दीक्षित हुए वह हमेशा स्वस्थ रहें जिनशासन की प्रभावना करते रहे। उन सभी को हम यहीं से नमस्कार करते हैं। 84 करोड़ मंत्रों में सबसे बड़े महामंत्र में गुरु का नाम आता है, गुरु के माध्यम से हृदय का आंगन पवित्र हो जाता है। गुरु जी कहते थे गौशालाएं जीवित कारखाना है। विदेशी गुलामी का प्रतीक इंडिया नहीं हमें गौरव का प्रतीक भारत देश नाम चाहिए और हम सब को इंडिया नही भारत कहना है साथ ही हिन्दी भाषा मे बहुत जोर देते थे।</p>
<p><strong>मुनि श्री का दीक्षा महोत्सव तिथि अनुसार मनाया जाएगा</strong></p>
<p>आज गुरु नही है, मगर गुरु चरण ही हम सब के लिए पूज्य है इसलिये गुरु चरण की प्रतिष्ठा कर गुरु चरण विराजमान किया जा रहा है। इसके बाद गुरु पूजा सुबोध-आशा जैन गंगवाल के संगीतमय पूजन आचार्य छत्तीसी बिधान के द्वारा किया गया। जिसमें 36 अर्घ्य के साथ श्रीफल मंडप पर सभी भक्तों ने चढ़ाए और साथ ही निर्वाण लड्डू भी भक्तों द्वारा प्रभु चरणों मे समर्पित किए। इन सभी कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल समाज के उप मंत्री नरेंद्र जैन झांझरी, जय कुमार जैन गंगवाल, ललित जैन सेठी, महिला समाज की अध्यक्ष नीलम जैन सेठी, मंत्राणी आशा जैन गंगवाल शामिल हुए। आहार चर्या नया मंदिर की ओर से हुई। सभी कार्यक्रम स्थानीय पंडित अभिषेक शास्त्री ने करवाए। गुरुवार को गुरु पूजा और मुनि श्री का दीक्षा महोत्सव तिथि अनुसार मनाया जाएगा।</p>
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		<title>भक्ति और उल्लास से मनाया गया भगवान अभिनंदननाथ का मोक्ष कल्याणक : पीठ दिगंबर जैन मंदिर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:50:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मोक्ष गए प्रभु अभिनंदन स्वामी, चरणों में वंदन बारंबार&#8230;इन भक्तिमय पंक्तियों और जयकारों के साथ ग्राम पीठ स्थित दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के चतुर्थ तीर्थंकर भगवान अभिनंदननाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव बड़ी श्रद्धा और हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। पीठ से पढ़िए, यह खबर&#8230; पीठ (डूंगरपुर)। मोक्ष गए प्रभु अभिनंदन स्वामी, चरणों में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मोक्ष गए प्रभु अभिनंदन स्वामी, चरणों में वंदन बारंबार&#8230;इन भक्तिमय पंक्तियों और जयकारों के साथ ग्राम पीठ स्थित दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के चतुर्थ तीर्थंकर भगवान अभिनंदननाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव बड़ी श्रद्धा और हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। <span style="color: #ff0000">पीठ से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पीठ (डूंगरपुर)</strong>। मोक्ष गए प्रभु अभिनंदन स्वामी, चरणों में वंदन बारंबार&#8230;इन भक्तिमय पंक्तियों और जयकारों के साथ ग्राम पीठ स्थित दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के चतुर्थ तीर्थंकर भगवान अभिनंदननाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव बड़ी श्रद्धा और हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर पुण्य अर्जन किया।</p>
<p><strong>अभिषेक और शांतिधारा से हुआ मंगल प्रारंभ</strong></p>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः काल भगवान के मंगल अभिषेक और शांतिधारा के साथ हुई। भक्तों ने पवित्र मंत्रोच्चार के बीच भगवान की प्रतिमा पर जलार्पण किया। वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया जब श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान अभिनंदननाथ का पूजन कर अष्टद्रव्यों से अर्घ्य समर्पित किए।</p>
<p><strong>निर्वाण लाडू अर्पित कर मांगी सुख-समृद्धि</strong></p>
<p>महोत्सव का मुख्य आकर्षण भगवान को निर्वाण लाडू अर्पित करना रहा। समाज के अध्यक्ष राजकुमार डेचिया ने जानकारी दी कि तीर्थंकर प्रभु के मोक्ष गमन के प्रतीक स्वरूप भव्य ‘निर्वाण लाडू’ की रचना की गई थी। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने पालकी और थाल में लाडू सजाकर भगवान के चरणों में अर्पित किए और जगत के कल्याण व सुख-समृद्धि की कामना की। शाम को भगवान की महाआरती की गई, जिसमें समूचा पीठ गांव धर्म की गंगा में सराबोर नजर आया।</p>
<p><strong>समाज के प्रबुद्ध जनों की गरिमामयी उपस्थिति</strong></p>
<p>इस पुनीत अवसर पर दिगंबर जैन समाज के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान चंद्रकांत शाह, महेंद्र डेचिया, डॉ. देवीलाल, कोदरलाल डेचिया, रोशन भूता और लक्ष्मीलाल टोकर वाले सहित कई प्रमुख श्रावकों ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। अध्यक्ष राजकुमार डेचिया ने बताया कि भगवान अभिनंदननाथ का जीवन हमें संयम और आत्म-कल्याण का मार्ग दिखाता है। इस तरह के आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को प्रभावना वितरित की गई।</p>
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		<title>मुनि श्री ने भोजन को जूठा नहीं छोड़ने का संकल्प दिलाया : झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखंड) में श्री जी का अभिषेक और शांतिधारा की </title>
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		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 05:37:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी से दीक्षित एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्मसागर जी, मुनि श्री भावसागर जी के सान्निध्य में सोमवार को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन नया मंदिर झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखंड) में श्री जी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। झुमरी तिलैया से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागर जी से दीक्षित एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्मसागर जी, मुनि श्री भावसागर जी के सान्निध्य में सोमवार को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन नया मंदिर झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखंड) में श्री जी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। <span style="color: #ff0000">झुमरी तिलैया से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> झुमरी तिलैया।</strong> आचार्य श्री विद्यासागर जी से दीक्षित एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्मसागर जी, मुनि श्री भावसागर जी के सान्निध्य में 20अप्रैल को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन नया मंदिर झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखंड) में श्री जी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। विशेष मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुई। इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भावसागर जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में अन्न को विशेष माना गया है। इसलिए इसका सम्मान करना हम सभी का कर्तव्य है। थाली में भोजन को जूठा छोड़ना इसका अनादर करने के समान है। ऐसे ही कुछ संस्कारों की शुरूआत की गई है। रोजाना हजारों लोग रोटी के बगैर भूखे सो जाते हैं और कई लोग थाली में भोजन को जूठा छोड़ देते हैं। भोजन उतना ही लो, जितना खा सको ताकि बचा हुआ भोजन किसी दूसरे के काम आ सके।</p>
<p><strong>अन्य स्कूल भी प्रेरणा ले तो कोई भूखा नहीं रहेगा</strong></p>
<p>इन्हीं सब उद्देश्यों को लेकर एक विद्यालय में शनिवार का दिन &#8216;भोजन जूठा न छोड़ें&#8217; के रूप में मनाया जाता है। इस दिन एक भी बच्चा अपने टिफिन में भोजन को जूठा नहीं छोड़ता है। अगर भोजन बचता भी है तो उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी स्कूल की ही होतीहै। इतना ही नहीं इस स्कूल के सभी बच्चे एक साथ बैठकर भोजन करते हैं और टीचर उन्हें पूरा भोजन खाने के लिए प्रोत्साहित भी करती है। अन्य स्कूल भी प्रेरणा ले तो कोई भूखा नहीं रहेगा। कहा जाता है कि जूठन छोड़ना पाप है, फिर भी बहुत लोग जूठन छोड़ते हैं।</p>
<p>आजकल अन्न पैसे से खरीदते हैं। इसलिये लोग उसकी तुलना पैसे से करते हैं। जूठन छोड़ देते हैं और उसे फेंक देते हैं किन्तु यह वास्तविकता नहीं है।</p>
<p><strong>जल का भी उपयोग सीमित करना चाहिए</strong></p>
<p>पैसे से अन्न खरीदा नहीं जा सकता। अन्न धरती अपनी छाती चीर कर देती है। कोई उसका अपमान करता है तो धरती दुःखी होती है और दूसरे जन्म में उसे अन्न के लिये तरसाती है। आज से सभी संकल्प लें कि थाली में जूठन नहीं छोड़ेंगे और इतना लो थाली में, व्यर्थ ना जाए नाली में। जल का भी उपयोग सीमित करना चाहिए। आधा गिलास भरकर रिश्तेदारों को, मित्रों को, परिवार वालों को देना चाहिए। जिससे कि अन्न और जल की बर्बादी ना हो, पक्षी को भी सकोरे में जल रखना चाहिए। पशुओं के लिए भी जल की व्यवस्था करना चाहिए। सेविंग में एवं स्नान आदि कार्यो में जल की बचत करना चाहिए। जल की सोचे कल की सोचे। कई लोगों ने संकल्प लिया।</p>
<p><strong>मुनि दीक्षा स्मृति महोत्सव 22 अप्रैल को</strong></p>
<p>समाज के पदाधिकारी ने कहा कि मुनि श्री धर्मसागर जी का 28 वां मुनि दीक्षा स्मृति महोत्सव प्रथम चरण में 22 अप्रैल को प्रातः 6बजे ध्वजारोहण से प्रारंभ होगा। फिर नगर के इतिहास में प्रथम बार समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज एवं समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण चिह्न की शुद्धि, अष्ट कुमारियों के द्वारा होगी। आचार्य छत्तीसी विधान होगा। मुनिसंघ के प्रवचन होंगे। 23अप्रैल को द्वितीय चरण में प्रातः6बजे मांगलिक क्रियाएं, गुरु महापूजन, सांस्कृतिक प्रस्तुति, मुनिसंघ के प्रवचन होंगे। यह झारखंड में प्रथम बार होगा। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राजकुमार जैन अजमेरा और नवीन जैन ने दी।</p>
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		<title>1008 दीपों के आलोक की आरती से निखरी श्रद्धा : भक्ति से जगमगाया समवशरण विधान का पांचवां दिन </title>
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		<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 18:36:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जयपुर हाउस स्थित श्री राम पार्क में चल रहे 25 समवशरण महामंडल विधान का पांचवां दिन शनिवार को भक्ति, संगीत, दीप आराधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230; आगरा। जयपुर हाउस स्थित श्री राम पार्क में चल रहे 25 समवशरण महामंडल विधान का पांचवां दिन शनिवार को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जयपुर हाउस स्थित श्री राम पार्क में चल रहे 25 समवशरण महामंडल विधान का पांचवां दिन शनिवार को भक्ति, संगीत, दीप आराधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>आगरा।</strong> जयपुर हाउस स्थित श्री राम पार्क में चल रहे 25 समवशरण महामंडल विधान का पांचवां दिन शनिवार को भक्ति, संगीत, दीप आराधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। उपाध्यायश्री विहसंत सागर जी ससंघ के सान्निध्य एवं श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति, जयपुर हाउस के तत्वावधान में चल रहे इस महोत्सव में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर दिखाई दिया। प्रातःकाल प्रभु के अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने गहन भक्तिभाव के साथ विधान की मांगलिक क्रियाओं में सहभागिता कर पुण्य अर्जित किया। विशेष रूप से 25 समवशरणों में विराजमान चक्रवर्ती परिवारों द्वारा विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की गई, जिससे संपूर्ण वातावरण धर्ममय हो उठा। मंत्रोच्चार, घंटानाद और भक्ति की गूंज से पंडाल गुंजायमान रहा। इस अवसर पर बाहर से पधारे अतिथियों का आयोजक समिति द्वारा भव्य स्वागत किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने विनम्र भाव से आशीर्वाद प्राप्त किया। चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन की भावपूर्ण प्रक्रिया ने उपस्थित जनसमूह को आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का संदेश दिया।</p>
<p><strong>धर्म के गूढ़ तत्वों को सरलता से जाना</strong></p>
<p>उपाध्यायश्री ने अपनी धर्मदेशना में समवशरण की आठ भूमियों का विस्तार से वर्णन कर धर्म के गूढ़ तत्वों को सरलता से समझाया। सायंकालीन सत्र में भक्ति का रंग और अधिक गहरा हो गया। शानू एंड पार्टी द्वारा प्रस्तुत मधुर भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। इसके बाद चक्रवर्ती परिवार द्वारा 1008 दीपकों से भव्य मंगल आरती का आयोजन किया गया। जो पूरे दिवस का मुख्य आकर्षण रहा। पुण्यार्जक परिवार नरेन्द्र जैन के निवास से आरती प्रस्थान हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित किया।आयोजन की सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं, अनुशासन और समाजजनों की सक्रिय भागीदारी इस महोत्सव को निरंतर सफलता की ओर अग्रसर कर रही हैं। इस अवसर पर समाज के गणमान्य नागरिकों, महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।</p>
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		<title>समवशरण विधान के चौथे दिन श्रद्धालुओं की उमड़ी आस्था : भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक ऊर्जा का दिखा अद्वितीय संगम  </title>
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		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 12:55:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जयपुर हाउस स्थित श्री राम पार्क में चल रहे 25 समवशरण महामंडल विधान के चौथे दिन शुक्रवार को भक्ति, भावना और भव्यता का अद्भुत संगम नजर आया। उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य एवं श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति जयपुर हाउस के तत्वावधान में चल रहा यह आयोजन निरंतर आध्यात्मिक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जयपुर हाउस स्थित श्री राम पार्क में चल रहे 25 समवशरण महामंडल विधान के चौथे दिन शुक्रवार को भक्ति, भावना और भव्यता का अद्भुत संगम नजर आया। उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य एवं श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति जयपुर हाउस के तत्वावधान में चल रहा यह आयोजन निरंतर आध्यात्मिक ऊंचाइयों को स्पर्श कर रहा है। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>आगरा।</strong> जयपुर हाउस स्थित श्री राम पार्क में चल रहे 25 समवशरण महामंडल विधान के चौथे दिन शुक्रवार को भक्ति, भावना और भव्यता का अद्भुत संगम नजर आया। उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य एवं श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति जयपुर हाउस के तत्वावधान में चल रहा यह आयोजन निरंतर आध्यात्मिक ऊंचाइयों को स्पर्श कर रहा है। प्रातःकाल प्रभु के अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ दिन का शुभारंभ हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर पुण्य अर्जित किया। इसके बाद विधान की मांगलिक क्रियाएं विधिपूर्वक कराई गईं। पंडितों के मंत्रोच्चार से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। विधान के दौरान चौबीस समवशरणों में श्रद्धालु 24 चक्रवर्ती परिवार के रूप में विराजमान हुए तो वहीं 25वें समवशरण में मुख्य चक्रवर्ती के रूप में सौधर्म, कुबेर एवं यज्ञनायक ईशान इंद्र-इंद्राणियों के साथ विधान की मांगलिक क्रियाएं पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से संपन्न की गईं, जो आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा।</p>
<p><strong>मधुर भजनों की मनमोहक प्रस्तुति </strong></p>
<p>मुख्य समवशरण में उपाध्यायश्री ने गणधर रूप में विराजमान होकर धर्मदेशना प्रदान की। जिससे उपस्थित श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। सायं कालीन बेला में भक्ति का रंग और भी गहरा हो गया, जब शानू एंड पार्टी द्वारा मधुर भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। वहीं सायं कालीन मंगल आरती मंजीत जैन, राहुल जैन एवं दीपक जैन परिवार द्वारा अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न की गई, जिसमें समस्त श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। आयोजन की सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं एवं श्रद्धालुओं की सक्रिय सहभागिता इस भव्य धार्मिक आयोजन को निरंतर सफल बना रही हैं। इस अवसर पर सुनील सिंघई, संजय जैन मारसंस, राजकुमार गुड्डू, डॉ. वीके अग्रवाल, संदेश जैन सहित जयंती हाउस जैन समाज के अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>भगवान नमिनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव सिद्धाचल पर्वत पर मनाया : विश्व शांति के लिए शांतिधारा और मोक्ष लाडू चढ़ाया  </title>
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		<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:41:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गुरुवार को वैशाख मास कृष्ण पक्ष तिथि चतुर्दशी को मोक्ष पधारे मिथिला नगरी के राजा विजय एवं रानी वप्रा देवी के कोख से जन्मे 21वें तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 भगवान नमिनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव दिवस बड़ी धूमधाम से सिद्धाचल पर्वत पर मनाया गया। ग्वालियर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ग्वालियर। गुरुवार को वैशाख मास कृष्ण पक्ष [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गुरुवार को वैशाख मास कृष्ण पक्ष तिथि चतुर्दशी को मोक्ष पधारे मिथिला नगरी के राजा विजय एवं रानी वप्रा देवी के कोख से जन्मे 21वें तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 भगवान नमिनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव दिवस बड़ी धूमधाम से सिद्धाचल पर्वत पर मनाया गया। <span style="color: #ff0000">ग्वालियर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>ग्वालियर।</strong> गुरुवार को वैशाख मास कृष्ण पक्ष तिथि चतुर्दशी को मोक्ष पधारे मिथिला नगरी के राजा विजय एवं रानी वप्रा देवी के कोख से जन्मे 21वें तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 भगवान नमिनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव दिवस बड़ी धूमधाम से सिद्धाचल पर्वत पर मनाया गया। 21वे तीर्थंकर भगवान नमिनाथ का ग्वालियर की प्राचीन धरोहर कोटेश्वर रोड पर स्थित सिद्धाचल पर्वत पर पंडित अनुभव शास्त्री के सानिध्य में अभिषेक ,पूजा, विश्व शांति के लिए शांतिधारा और मोक्ष लाडू चढ़ाया गया। फूप के इंजीनियर सुरेंद्र जैन, सुगनचंद अनिल कुमार जैन, प्रफुल्ल प्रसन्न कुमार जैन, सुरेंद्र कुमार जैन, महिला मंडल लोहा मंडी ग्वालियर और अनेक भक्तों ने बढ़-चढ़कर अपनी चंचला राशि से क्षेत्र की प्रगति में अपने को धन्य किया। प्रभारी पंकज जैन ने सभी को टीका लगा सम्मानित किया। वीरेंद्र जैन, सुनील जैन, माता त्रिशला तीर्थ कमेटी, सौरभ जैन अंबाह वाले, हिमांशु जैन ने सब का आभार व्यक्त किया।</p>
<p><strong> आत्मा को न कोई मार सकता है और न ही उत्पन्न कर सकता</strong></p>
<p>पंडित अनुभव जैन शास्त्री ने निर्वाण लाडू की जानकारी देते हुए बताया कि लड्डू का आकर गोल होता है। लड्डू का न आदि है और न ही अंत है। साथ ही लड्डू को तैयार होने में कई प्रकार की परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। ठीक उसी प्रकार मानव देह में समाहित आत्मा की स्थिति है। आत्मा अविनाशी है। आत्मा न कभी मरती है और न पैदा होती है। आत्मा को न कोई मार सकता है और न ही उत्पन्न कर सकता है। वहीं, व्यक्ति को आत्म ज्ञान के लिए जीवन में विषम परिस्थिति से गुजरना पड़ता है। सर्दी, गर्मी, बरसात सभी मौसम में समभाव रह ईश्वर का सुमिरन करना पड़ता है। तब जाकर व्यक्ति को आत्म ज्ञान की प्राप्ति होती है। एक बार आत्म ज्ञान होने के बाद लंबे समय तक कठिन तप के बाद व्यक्ति को केवल ज्ञान की प्राप्ति होती है। अतः तीर्थंकर भगवान नमिनाथ को उनके निर्वाण तिथि पर लड्डू चढ़ाया जाता है।</p>
<p><strong>भगवान नमिनाथ के चरणों का चिन्ह नीलकमल है</strong></p>
<p>नीति जैन अंबाह ने बताया कि नीलकमल, भगवान नमिनाथ के चरणों का चिन्ह नीलकमल है। कमल की अनेक जातियां हैं तथा अनेक रंग हैं। जैसे श्वेत कमल, रक्त कमल, नीलकमल आदि परन्तु,सबकी प्रक्रति, गुण व स्वभाव एक जैसा ही होता है। नीलकमल की शोभा आंखों को बडी सुरमई व मोहक लगती है तथा शीतलता भी पहुंचाती है। कमल का मुख्य गुण है निर्लिप्तता। कमल हमें निष्काम और निर्लेप जीवन जीने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम के उपरांत सभी के स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई थी।</p>
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		<title>णमोकार महामंत्र से सभी आत्माओं का कल्याण होता है: तेरहपंथी जैन मंदिर में जलाभिषेक, शांतिधारा भक्ति भाव से हुई </title>
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		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:45:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के आज्ञानुवर्ती शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज के सानिध्य मे धाटीकुआं स्थित तेरहपंथी जैन मंदिर में जलाभिषेक, शांतिधारा भक्ति भाव से करवाई गई। कुचामनसिटी से सुभाष पहाड़िया की रिपोर्ट&#8230;  कुचामनसिटी। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के आज्ञानुवर्ती शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज के सानिध्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के आज्ञानुवर्ती शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज के सानिध्य मे धाटीकुआं स्थित तेरहपंथी जैन मंदिर में जलाभिषेक, शांतिधारा भक्ति भाव से करवाई गई। <span style="color: #ff0000">कुचामनसिटी से सुभाष पहाड़िया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong> कुचामनसिटी।</strong> आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के आज्ञानुवर्ती शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज के सानिध्य मे धाटीकुआं स्थित तेरहपंथी जैन मंदिर में जलाभिषेक, शांतिधारा भक्ति भाव से करवाई गई। शांतिधारा के पुण्यार्जक गुणमाला देवी कैलाश चन्द, निर्मल कुमार, अमित, उमंग अरिहंत पांड्या परिवार रहे। धर्मसभा का मंगलाचरण किरणदेवी मुन्नी देवी झांझरी ने किया। संतोष कुमार, प्रवीण, विपिन, चिन्मय, दिव्य पहाडिया परिवार ने शास्त्र भेंट किया। ललितकुमार, चिरंजी लाल, लेखराज, निखिल पहाडिया परिवार ने पाद प्रक्षालन किया। आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के फोटो के सामने लालचंद, संतोष, ज्ञानचंद, अशोक पहाडिया पुरणमल, विनोद झांझरी, अशोक अजमेरा, सुरेश कुमार, प्रकाशचंद, मोनू पाटोदी, निखिल जैन ने दीप प्रज्वलन किया।</p>
<p>उपाध्याय श्री ने अपने प्रवचन में धार्मिक वही है जो दुसरो को दुख देने का जरा सा ही भाव नहीं करें। सभी आत्माएं एक समान हैं। मृत्यु व वैराग्य की कोई उम्र नहीं होती है। सभी आत्माओं की सम्मान और कल्याण की भावना करनी चाहिए। णमोकार महामंत्र की महिमा में बताया कि नाग नागीन को मरते समय णमोकार सुनाने से जीव देवगती जाकर अपना कल्याण किया। यह महामंत्र अनाघि अंनत व सबके लिए मंगलकारी है। प्रवचन के बाद सभी के लिए संतोष देवी संतोष पहाडिया परिवार ने अल्पाहार रखा।</p>
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		<title>भक्ति और श्रद्धा से परिपूर्ण 25 समवशरण महामंडल विधान : श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति, जयपुर हाउस के तत्वावधान में हुआ अभिषेक और शांतिधारा </title>
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		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:43:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जयपुर हाउस स्थित श्रीराम पार्क में आयोजित 25 समवशरण महामंडल विधान का दूसरा दिन भी गहन आध्यात्मिकता और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य तथा श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति, जयपुर हाउस के तत्वावधान में सुबह की शुरुआत अभिषेक एवं शांतिधारा से हुई। आगरा से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जयपुर हाउस स्थित श्रीराम पार्क में आयोजित 25 समवशरण महामंडल विधान का दूसरा दिन भी गहन आध्यात्मिकता और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य तथा श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति, जयपुर हाउस के तत्वावधान में सुबह की शुरुआत अभिषेक एवं शांतिधारा से हुई। <span style="color: #ff0000">आगरा से शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>आगरा।</strong> जयपुर हाउस स्थित श्रीराम पार्क में आयोजित 25 समवशरण महामंडल विधान का दूसरा दिन भी गहन आध्यात्मिकता और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य तथा श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति, जयपुर हाउस के तत्वावधान में सुबह की शुरुआत अभिषेक एवं शांतिधारा से हुई। श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण और मंगलाचरण के बीच भगवान का अभिषेक कर वातावरण को पूर्णत धर्ममय बना दिया।</p>
<p>पंडित अरविंद जैन शास्त्री एवं पंडित संदीप जैन शास्त्री के निर्देशन में 24 समवशरण में विराजमान तीर्थंकरों के समक्ष इंद्र-इंद्राणियों द्वारा विधिपूर्वक विधान किया गया। विधान के मध्य उपस्थित भक्तों ने संगीतकार शानू एंड पार्टी के मधुर भजनों पर नृत्य कर प्रभु की भक्ति की। बाहर से पधारे अतिथियों का आयोजन समिति द्वारा माला एवं दुपट्टा पहनकर का स्वागत सम्मान किया। भक्ति और अनुशासन का यह दृश्य उपस्थित जनसमूह के लिए अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रहा। एक विशेष समवशरण में श्रीजी की प्रतिमाओं की स्थापना की गई, जहां उपाध्यायश्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए संयम साधना और आत्म शुद्धि का संदेश दिया।कार्यक्रम के अंतर्गत चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन भी गरिमामय वातावरण में हुआ।</p>
<p>जिसमें गणमान्य अतिथियों ने भाग लेकर आयोजन की सराहना की। सायंकालीन बेला में श्रद्धा का उत्साह और अधिक बढ़ गया, जब पुण्यार्जक राकेश जैन, अभिषेक जैन, सूर्यांश जैन परिवार एवं मनोज जैन एवं ऋषभ जैन परिवार द्वारा बैंड-बाजों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसके बाद श्रीजी की मंगल आरती एवं उपाध्यायश्री की संगीतमय आरती ने पूरे पंडाल को “जय जिनेंद्र” के जयघोष से गुंजायमान कर दिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।दिनभर चले धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया। सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं के चलते आयोजन सफलता के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है।</p>
<p>इस मौके पर पन्नालाल बैनाड़ा,राजेश बैनाड़ा,राकेश जैन परर्देवाले,सुबोध पाटनी,दीपक जैन, अशोक जैन,मनोज जैन,अरुण जैन, नीरज जैन,अजय जैन,पंकज जैन, राजीव प्रकाश जैन,अभिषेक जैन, राहुल जैन,अमित सेठिया,ऊषा मारसंस,वंदना जैन,नीतू जैन,इशिता जैन,ऊषा जैन,नीता जैन, रूचि जैन, समस्त जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>विश्व शांति के लिए उपाध्याय श्री ने किया कलशाभिषेक: सम्यक दर्शन के आठ अंगों का विस्तार से वर्णन किया  </title>
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		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 13:14:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज के सानिध्य में नागौरी नसियाजी, सब्जी मंडी में विश्व शांति की मंगल कामना के साथ भव्य कलशाभिषेक एवं शांतिधारा की गई। इस पावन अवसर पर मुनिश्री ने मंत्रोच्चार के साथ अर्घ्य बोलकर शांतिधारा कराई। कुचामनसिटी से पढ़िए, सुभाष पहाड़िया की यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज के सानिध्य में नागौरी नसियाजी, सब्जी मंडी में विश्व शांति की मंगल कामना के साथ भव्य कलशाभिषेक एवं शांतिधारा की गई। इस पावन अवसर पर मुनिश्री ने मंत्रोच्चार के साथ अर्घ्य बोलकर शांतिधारा कराई। <span style="color: #ff0000">कुचामनसिटी से पढ़िए, सुभाष पहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>कुचामन सिटी।</strong> आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज के सानिध्य में नागौरी नसियाजी, सब्जी मंडी में विश्व शांति की मंगल कामना के साथ भव्य कलशाभिषेक एवं शांतिधारा की गई। इस पावन अवसर पर मुनिश्री ने मंत्रोच्चार के साथ अर्घ्य बोलकर शांतिधारा कराई तथा समस्त विश्व में शांति, सद्भाव और कल्याण की भावना व्यक्त की। किरण झांझरी के अनुसार शांतिधारा का पुण्यार्जन करने का सौभाग्य विमला देवी, नरेश, सविता, आदिश एवं डॉ. आस्था झांझरी परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p>कार्यक्रम में समेरमल बज, अजित पहाड़िया, विनोद, राजकुमार, दीपक, सोनू झांझरी, संजय सेठी, इन्द्रा, सुशीला बज, विमला काला, भंवरी देवी पाटोदी सहित अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया। उपाध्याय श्री के प्रवचन में सम्यक दर्शन के आठ अंगों का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि जीवन में “जियो और जीने दो” की भावना अपनाकर अहिंसा का पालन करना चाहिए। साथ ही सभी जीवों के प्रति दया, करुणा और प्रेम भाव रखना ही सच्चे धर्म का मार्ग है।</p>
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		<title>नवागत दमोह कलेक्टर ने पूज्य बड़े बाबा के किए दर्शन: अर्घ्य, श्रीफल अर्पितकर पूज्य बड़े बाबा की आरती की चढ़ाया छत्र  </title>
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		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 06:24:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र, जैनतीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में नवागत दमोह कलेक्टर प्रतापनारायण यादव सपरिवार पहुंचे। पर्वत पर स्थित बड़े बाबा मंदिर पहुंचकर बड़े बाबा के दर्शन किए एवं अर्घ्य, श्रीफल अर्पितकर बड़े बाबा की आरती की तथा छत्र चढ़ाया। कुंडलपुर दमोह से पढ़िए, यह खबर&#8230; कुंडलपुर दमोह। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र, जैनतीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में नवागत दमोह कलेक्टर प्रतापनारायण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र, जैनतीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में नवागत दमोह कलेक्टर प्रतापनारायण यादव सपरिवार पहुंचे। पर्वत पर स्थित बड़े बाबा मंदिर पहुंचकर बड़े बाबा के दर्शन किए एवं अर्घ्य, श्रीफल अर्पितकर बड़े बाबा की आरती की तथा छत्र चढ़ाया। <span style="color: #ff0000">कुंडलपुर दमोह से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>कुंडलपुर दमोह।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र, जैनतीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में नवागत दमोह कलेक्टर प्रतापनारायण यादव सपरिवार पहुंचे। पर्वत पर स्थित बड़े बाबा मंदिर पहुंचकर बड़े बाबा के दर्शन किए एवं अर्घ्य, श्रीफल अर्पितकर बड़े बाबा की आरती की तथा छत्र चढ़ाया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों की उपस्थिति रही। प्रचारमंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि इस अवसर पर कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष चंद्रकुमार सराफ, महामंत्री इंजीनियर आरके जैन, कोषाध्यक्ष अशोक सराफ, मंत्री नेमकुमार सराफ, पदमचंद जैन खली, पंडित अभिषेक जैन, अमरसेठ, विजय डायमंड आदि ने कलेक्टर यादव का शाल श्रीफल स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया। इस अवसर पर प्रातः भक्तामर महामंडल विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांतिधारा, रिद्धिकलश, पूजन विधान हुआ।</p>
<p><strong>इन समाजजनों ने किया अभिषेक का पुण्यार्जन </strong></p>
<p>प्रथम अभिषेक, शांति धारा, रिद्धिकलश आदि करने का सौभाग्य अक्षय महेश जैन टढ़ाकेसली, प्रियंक राकेश जैन मेरठ, रविंद्र आशीष जैन ग्वालियर, रमेश अनिल निखिल जैन केकड़ी, प्रवीण गौरव नितिन जैन दिल्ली, राजेंद्र ऋषभ जैन जबलपुर, गुना, दिनेश अविनेश जैन जतारा, सुभाष अभय गौरव जैन गुना, अंकित सुकुमार जैन दिल्ली, दिव्य कमल जैन दिल्ली, प्रियांशु राहुल जैन इंदौर आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने बड़े बाबा के अभिषेक करने का सौभाग्य प्राप्त किया। शाम को भक्तामर दीप अर्चना एवं पूज्य बड़े बाबा की महाआरती हुई।</p>
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