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	<title>शताब्दी वर्ष &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भक्तामर दीप आराधना में श्रद्धालुओं ने की प्रभावना वितरित: जिनेंद्र अभिषेक रिद्धिमंत्र पूर्वक शांतिधारा  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Mar 2025 12:32:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री आदिनाथ चैत्यालय स्कीम-71 में भक्तामर महा आराधना करते हुए दीप अर्चना भक्ति हुई। प्रतिदिन अनवरत भक्तामर दीप आराधना भी शाम को 7.15 बजे हो रही है। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी के शताब्दी वर्ष तथा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के हीरक जयंती महोत्सव पर 75 दिवसीय आराधना के दौरान 48 वें दिन 48 दीपकों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री आदिनाथ चैत्यालय स्कीम-71 में भक्तामर महा आराधना करते हुए दीप अर्चना भक्ति हुई। प्रतिदिन अनवरत भक्तामर दीप आराधना भी शाम को 7.15 बजे हो रही है। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी के शताब्दी वर्ष तथा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के हीरक जयंती महोत्सव पर 75 दिवसीय आराधना के दौरान 48 वें दिन 48 दीपकों से आराधना की गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। श्री आदिनाथ चैत्यालय स्कीम-71 में भक्तामर महा आराधना करते हुए दीप अर्चना भक्ति की गई। यहां प्रतिदिन सुबह 6.30 बजे जिनेंद्र अभिषेक के बाद रिद्धिमंत्र से शांतिधारा होती है। चैत्यालय के संरक्षक आरती-सनत जैन ने बताया कि भगवान आदिनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक के बाद से प्रतिदिन अनवरत भक्तामर दीप आराधना भी शाम को 7.15 बजे से की जा रही है। जिनेंद्र आरती, गुरुभक्ति के बाद दीप आराधना होती है। प्रतिदिन अलग-अलग भक्त प्रभावना वितरित करते हैं। रविवार पाठ के पुण्यार्जक चैतन्य, अवनिश पंचोलिया ने बताया कि एक साथ सामूहिक रूप से प्रभु भक्ति, पाठ करने से असंख्य कर्मों की निर्जरा होती है। हम सभी सदस्य पूर्व के उपार्जित पुण्य के कारण प्रभु चरणों में बैठकर भक्ति कर रहे हैं। अध्यक्ष महेंद्र जैन, सुनील जैन ने आदिनाथ चैत्यालय के बारे में कहा कि ये चैत्यालय बहुत प्राचीन है। इसकी स्थापना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के आशीर्वाद तथा मुनि श्री चारित्र सागर जी की पावन प्रेरणा से हुई थी।</p>
<p><strong>48 वें दिन 48 दीपकों से आराधना</strong></p>
<p>प्रतिदिन भक्तों की उपस्थिति में यहां अभिषेक पूजन और विभिन्न कार्यक्रम होते हैं। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी के शताब्दी वर्ष तथा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के हीरक जयंती महोत्सव पर 75 दिवसीय आराधना के दौरान 48 वें दिन 48 दीपकों से आराधना की गई। रविवारीय कार्यक्रम में सावन-प्रमथेश जैन, अंकुरी-लवीश जैन, मीना-शांतिलाल रोकड़िया, ममता सुनील जैन, चैतन्य अवनिश पंचोलिया, रीना-अरिहंत गोठाणे, समीक्षा-महेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
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		<title>श्री चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मन्दिर में आयोजन         :        पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शताब्दी वर्ष पर बही धर्म की गंगा </title>
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		<pubDate>Tue, 28 Nov 2023 16:34:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर श्री चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मन्दिर के शताब्दी वर्ष के मौके पर धरियावद के ईष्ट देव मूलनायक भगवान चंद्र प्रभु स्वामी के शिखर पर ध्वजा परिवर्तन का कार्यक्रम हुआ। पढ़िए अशोक जेतावत की रिपोर्ट&#8230; &#160; धरियावद। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर श्री चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मन्दिर के शताब्दी वर्ष के मौके [&#8230;]]]></description>
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<p dir="ltr"><strong>कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर श्री चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मन्दिर के शताब्दी वर्ष के मौके पर धरियावद के ईष्ट देव मूलनायक भगवान चंद्र प्रभु स्वामी के शिखर पर ध्वजा परिवर्तन का कार्यक्रम हुआ। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए अशोक जेतावत की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>धरियावद।</strong> कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर श्री चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मन्दिर के शताब्दी वर्ष के मौके पर धरियावद के ईष्ट देव मूलनायक भगवान चंद्र प्रभु स्वामी के शिखर पर ध्वजा परिवर्तन का कार्यक्रम हुआ। इस मौके पर सुबह भव्य पंचामृत और भिन्न रसों से अभिषेक किया गया। इसके बाद शांतिधारा और चन्द्र प्रभु की आराधना की गई। ध्वजा पुण्यार्जक परिवार शशि कांत केसरीमल चम्पावत के द्वारा शिखर पर नवीन ध्वजा चढ़ाई गई। इस अवसर पर राजेंद्र चंपावत, कमलेश रजावत, राजेन्द्र जोधावत आदि ने शांति धारा करने का लाभ लिया। श्रेष्ठी सेठ करणमल और अरविन्द जोदावत, बॉम्बे निवासी दिनेश जूठावत, बाबूलाल दोषी, श्रवण सरिया, महेन्द्र चम्पावत, मुकेश डागरिया, हर्षित चंपावत, पवन जोदावत मौजूद रहे। सभी कार्यक्रम पंडित सेजल जैन महू अतिशय क्षेत्र द्वारा सम्पन्न कराए गए।</p>
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		<title>चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागरजी का आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी वर्ष : वीरेन्द्र हेगड़े धर्मस्थल और अशोक पाटनी परम शिरोमणि संरक्षक मनोनीत </title>
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		<pubDate>Tue, 30 May 2023 14:11:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागरजी का आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी वर्ष मनाने के हुए गठित राष्ट्रीय कमेटी में पद्म विभूषण धर्माधिकारी डॉ. डी. वीरेन्द्र हेगड़े धर्मस्थल और दानवीर भामाशाह अशोक पाटनी (आर के मार्बल) को परम शिरोमणि संरक्षक मनोनीत किया गया है। अनिल सेठी, बेंगलुरु की अध्यक्षता में एक कमेटी के गठन को स्वीकृति मिली है। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागरजी का आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी वर्ष मनाने के हुए गठित राष्ट्रीय कमेटी में पद्म विभूषण धर्माधिकारी डॉ. डी. वीरेन्द्र हेगड़े धर्मस्थल और दानवीर भामाशाह अशोक पाटनी (आर के मार्बल) को परम शिरोमणि संरक्षक मनोनीत किया गया है। अनिल सेठी, बेंगलुरु की अध्यक्षता में एक कमेटी के गठन को स्वीकृति मिली है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेंद्र जैन महावीर की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>उदयपुर।</strong> चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागरजी का आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी वर्ष मनाने के हुए गठित राष्ट्रीय कमेटी में पद्म विभूषण धर्माधिकारी डॉ. डी. वीरेन्द्र हेगड़े धर्मस्थल और दानवीर भामाशाह अशोक पाटनी (आर के मार्बल) को परम शिरोमणि संरक्षक मनोनीत किया गया है। अनिल सेठी, बेंगलुरु की अध्यक्षता में एक कमेटी के गठन को स्वीकृति मिली है। गौरवाध्यक्ष दिनेश खोड़निया, प्रदीप जैन (पीएनसी, आगरा), राजेन्द्र कटारिया, अहमदाबाद, महामंत्री राकेश सेठी कोलकाता, कार्याध्यक्ष शांतिलाल बेलायत, उदयपुर, कोषाध्यक्ष कैलाश पाटनी किशनगढ़, संयोजक संजय पापड़ीवाल किशनगढ़, सुरेश सबलावत, जयपुर को मनोनीत किया गया है। प्रारंभिक तौर पर रीजनल चेयरमैन विनोद डोडनवार बेलगांव, राजेश शाह उदयपुर, पवन गोधा दिल्ली, हंसमुख गांधी इन्दौर, प्रकाशचंद बड़जात्या चैन्नई, जमनालाल हपावत उदयपुर को बनाया गया। राष्ट्रीय सभा को दानवीर भामाशाह अशोक पाटनी आर. के. मार्बत, अनिल सेठी बेंगलूर, विनोद डोड्डनवार बेलगांव, संजय पापड़ीवाल किशनगढ़, राजेश शाह उदयपुर, पवन गोधा दिल्ली, प्रकाशचंद बड़जात्या चैन्नई, जमनालाल रूपावत उदयपुर, उदयपुर नगरनिगम उपमहापौर पारस सिंघवी, हेमंत सोगानी पदमपुरा, प्रभुलाल जैन सलुम्बर, राजेन्द्र जैन &#8216;महावीर&#8217; सनावद आदि ने संबोधित कर अनेक सुझावों से अवगत कराया। अशोक पाटनी सहित सभी ने तन-मन-धन से सहयोग करने की घोषणा महोत्सव के लिए की।</p>
<p><strong>सभी को जोड़ने की अपील</strong></p>
<p>संचालन राकेश सेठी कोलकाता ने करते हुए महोत्सव को विश्वव्यापी बनाने की बात कही। अशोक पाटनी ने कहा कि ड्राइवर अच्छा हो तो सभी जुड़ते चले जाते हैं। अनिल सेठी ने कहा कि आचार्य शांतिसागरजी के नाम पर कोई मतभेद नहीं है, सभी जुड़ेंगे और हम सफल होंगे। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि अनेक आयोजनों के नाम पर हमारा अनापशनाप खर्च बंद होना चाहिए। जैन समाज के पास जो है, वह अन्य किसी के पास नहीं है। विनोद डोड्डनवार ने कहा कि समडोली में आचार्य पद मिला था। पूज्य कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी ने भी आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी वर्ष महोत्सव मनाने के भाव रखे थे । प्रकाशचंद बड़जात्या ने कहा कि पूरे देश में तीन करोड़ से अधिक जैन हैं व तीस करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं, सबको संगठित होना चाहिए। राष्ट्रीय सभा में गुवाहाटी, कोलकाता, इन्दौर, दिल्ली, किशनगढ़, इचलकरंजी, बेलगाम, समडोली, सलुम्बर, धरियावाद, चेन्नई, मुंबई, अहमदाबाद, बेंगलुरु, राजस्थान आदि अनेक प्रदेशों से गुरु भक्तों ने सहभागिता की। सभी ने उत्साह पूर्वक शताब्दी महोत्सव को मनाने का संकल्प लिया।</p>
<p><strong>जैनत्व के उन्नयन के लिए कार्य किए</strong></p>
<p>उल्लेखनीय है कि कर्नाटक के भोज में सन् 1872 में जन्मे बालक सातगौड़ा ने बरनाल में सन् 1920 में मुनि दीक्षा ग्रहण कर सन् 1924 समडोली में आचार्य पद प्राप्त किया था। संपूर्ण देशभर में पद विहार कर उन्होंने बीसवी सदी में दिगम्बरस्व के विस्तार व जैनत्व के उन्नयन के लिए अनेकों कार्य किये। वर्तमान में 1500 से अधिक पिच्छीधारी संत उनका स्मरण कर मोक्षमार्ग पर अग्रसर हैं। उनकी पट्ट परम्परा के पट्टाधीश आचार्य के रूप में आचार्यश्री वर्धमानसागरजी विगत सन् 1990 से उक्त पद पर शोभायमान हैं।</p>
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