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	<title>विश्व गौरया दिवस &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>महावीर जन्मकल्याणक पर्व पर सांस्कृतिक कार्यक्रम तय : दिगंबर जैन पाठशाला डडूका के बच्चों का गौरैया संरक्षण का संकल्प </title>
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		<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 06:51:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन पाठशाला डडूका के 23 बच्चों ने विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर लुप्त होती घरों के आसपास फुदकने वाली छोटी सी चिड़िया गौरैया के संरक्षण का संकल्प लिया। पाठशाला प्रेरक अजीत कोठिया के निर्देशन में बच्चों ने गौरैया को बचाने के लिए घोंसले बनाने, उनके लिए पेयजल की व्यवस्था करने तथा दाना रखने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन पाठशाला डडूका के 23 बच्चों ने विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर लुप्त होती घरों के आसपास फुदकने वाली छोटी सी चिड़िया गौरैया के संरक्षण का संकल्प लिया। पाठशाला प्रेरक अजीत कोठिया के निर्देशन में बच्चों ने गौरैया को बचाने के लिए घोंसले बनाने, उनके लिए पेयजल की व्यवस्था करने तथा दाना रखने हेतु सकोरे बांधकर राहत प्रदान करने का संकल्प लिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डडूका।</strong> दिगंबर जैन पाठशाला डडूका के 23 बच्चों ने विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर लुप्त होती घरों के आसपास फुदकने वाली छोटी सी चिड़िया गौरैया के संरक्षण का संकल्प लिया। पाठशाला प्रेरक अजीत कोठिया के निर्देशन में बच्चों ने गौरैया को बचाने के लिए घोंसले बनाने, उनके लिए पेयजल की व्यवस्था करने तथा दाना रखने हेतु सकोरे बांधकर राहत प्रदान करने का संकल्प लिया।</p>
<p>कोठिया ने बताया कि बच्चों को महावीर इंटरनेशनल, गढ़ी परतापुर के माध्यम से 7 अप्रैल को सकोरे वितरित किए जाएंगे, जिससे गौरैया संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाया जा सके।</p>
<p>इस अवसर पर भगवान महावीर के जन्म कल्याणक पर्व की पूर्व संध्या पर बच्चों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें झूला सजाना, प्रभात फेरी में हिस्सा लेना, ‘पुरुरवा’ नाटिका का मंचन, ‘सोलह स्वप्न’ पर आधारित नृत्य तथा एकल एवं युगल वर्ग में नृत्य प्रस्तुतियाँ शामिल हैं।</p>
<p>इन कार्यक्रमों के संचालन एवं व्यवस्थापन के लिए रियल जैन, माही जैन, मानवी जैन, आकृति जैन, चर्या जैन, दिव्य जैन, सिद्धम जैन, कथनी जैन एवं दीक्षिता जैन को जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं।</p>
<p>29 अप्रैल को दो चरणों में महावीर प्रश्न मंच का आयोजन भी किया जाएगा।</p>
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		<title>अब घर-घर में चहकेगी नन्हीं गौरैया : बच्चों ने “गौरैया वाटिका” में लगाए गौरैया के घोंसले </title>
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		<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 14:40:30 +0000</pubDate>
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<p><strong>करूणा केंद्र ललितपुर के तत्वावधान में सिविल लाइन चांदमारी स्थित स्याद्वाद बाल संस्कार जूनियर हाईस्कूल में करूणा केंद्र ललितपुर के अध्यक्ष अक्षय अलया के आतिथ्य में विश्व गौरैया दिवस मनाया गया। इस दौरान उन्होंने बच्चों से कहा कि यदि गौरैया का संरक्षण करना है, तो बालमन में इसके प्रति संवेदनशीलता विकसित करना आवश्यक है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> करूणा केंद्र ललितपुर के तत्वावधान में सिविल लाइन चांदमारी स्थित स्याद्वाद बाल संस्कार जूनियर हाईस्कूल में करूणा केंद्र ललितपुर के अध्यक्ष अक्षय अलया के आतिथ्य में विश्व गौरैया दिवस मनाया गया। इस दौरान उन्होंने बच्चों से कहा कि यदि गौरैया का संरक्षण करना है, तो बालमन में इसके प्रति संवेदनशीलता विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि विलुप्त हो रही गौरैया का संरक्षण वृक्षों पर एवं घरों में घोंसले लगाकर किया जा सकता है। गौरैया संरक्षण के मुख्य स्तंभ बच्चे ही हैं, जिन्हें जागरूक कर इस दिशा में सार्थक प्रयास किए जा सकते हैं।</p>
<p>प्रधानाचार्य के.पी. पांडे ने कहा कि विद्यालय में बच्चों को पर्यावरण संरक्षण एवं गौरैया संरक्षण के लिए समय-समय पर प्रेरित किया जाता है। करूणा क्लब के माध्यम से बच्चे जागरूक होकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आगे आ रहे हैं।</p>
<p>विद्यालय के बच्चों—परी सेन, कंचन, सुरभि पंथ, राधिका, वैष्णवी, अमन नामदेव, प्रिंस पाल, कार्तिक, शिव दुबे, सरस, विकास एवं अभिषेक—ने विद्यालय परिसर में स्थित “गौरैया वाटिका” में घोंसले लगाए और पक्षियों के लिए दाना-पानी रखने का संकल्प लिया।</p>
<p>इस दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य केशव प्रसाद पाण्डे, सीमा जैन, लक्ष्मी सिरौठिया, चांदनी, दीक्षा, रूपाली, मोहिनी, तृप्ति तिवारी एवं आकांक्षा उपस्थित रहीं।</p>
<p>इसी क्रम में गौरैया संरक्षण के उद्देश्य से आचार्य श्री विद्यासागर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मडावरा में करूणा केंद्र मडावरा के संरक्षक एवं प्रवक्ता रमेशचंद्र जैन के निर्देशन में छात्राओं ने आकर्षक गौरैया घोंसले बनाकर संरक्षण का संकल्प लिया।</p>
<p>उधर, कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय डुलावन में बच्चों ने क्राफ्ट प्रतियोगिता के अंतर्गत गौरैया के घोंसले बनाकर उनमें आकर्षक रंग भरे और उन्हें पेड़ों पर स्थापित किया। इस दौरान विद्यालय के सहायक अध्यापक पुष्पेंद्र जैन ने बच्चों को बताया कि गर्मियों के दिनों में घर की छत, बालकनी एवं बाग-बगीचों में पक्षियों के लिए दाना-पानी अवश्य रखना चाहिए, जिससे वे प्यास से व्याकुल न हों। उन्होंने अधिक से अधिक घोंसले लगाने पर भी जोर दिया, ताकि घरेलू पक्षी गौरैया का संरक्षण किया जा सके।</p>
<p>करूणा क्लब प्रभारी यशोदा के निर्देशन में आयोजित चित्रकला एवं “गौरैया बॉक्स बनाओ” प्रतियोगिता में भागवती कुशवाहा, प्रिंसी पाल, रश्मि पाल, शिवानी कुशवाहा, रुबी कुशवाहा, मोहिनी चंदेल, चाहत, प्रियंका, दीपक, हरिशंकर कुशवाहा, संजय एवं अर्जुन ने प्रतिभाग किया।</p>
<p>पूर्व माध्यमिक विद्यालय टोडी में इंचार्ज प्रधानाध्यापक डॉ. बृजेश कुशवाहा के मार्गदर्शन में बच्चों ने चित्रकला प्रतियोगिता के अंतर्गत गौरैया के घोंसले बनाए और उसके संरक्षण का संकल्प लिया।</p>
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		<title>विश्व गौरैया दिवस मनाया गया : महावीर इंटरनेशनल के तीन दिवसीय पर्यावरण आयोजन प्रारंभ </title>
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		<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 14:39:17 +0000</pubDate>
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<p><strong>महावीर इंटरनेशनल गढ़ी परतापुर के तीन दिवसीय पर्यावरणीय आयोजन विश्व गौरैया दिवस के कार्यक्रमों के साथ प्रारंभ हुए। स्थानीय पंवार परिसर, गढ़ी में आयोजित कार्यक्रम में संस्था के इंटरनेशनल डायरेक्टर (नॉलेज शेयरिंग एवं ई-चौपाल) अजीत कोठिया के मुख्य आतिथ्य एवं हिम्मत सिंह पंवार की अध्यक्षता में बड़ी संख्या में बहनों ने सहभागिता की तथा गौरैया संरक्षण की शपथ ली। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>गढ़ी परतापुर।</strong> महावीर इंटरनेशनल गढ़ी परतापुर के तीन दिवसीय पर्यावरणीय आयोजन विश्व गौरैया दिवस के कार्यक्रमों के साथ प्रारंभ हुए। स्थानीय पंवार परिसर, गढ़ी में आयोजित कार्यक्रम में संस्था के इंटरनेशनल डायरेक्टर (नॉलेज शेयरिंग एवं ई-चौपाल) अजीत कोठिया के मुख्य आतिथ्य एवं हिम्मत सिंह पंवार की अध्यक्षता में बड़ी संख्या में बहनों ने सहभागिता की तथा गौरैया संरक्षण की शपथ ली। इस अवसर पर पक्षियों के पेयजल प्रबंधन हेतु क्षेत्र में 1000 मिट्टी के सकोरे वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। केंद्र सचिव रामभरत चेजारा के निर्देशन में सकोरा वितरण 7 अप्रैल को स्थानीय नवयुवक मंडल खेल मैदान में किया जाएगा।</p>
<p>कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि अपने घरों के आसपास फुदकने वाली और कभी हमारे ड्राइंग रूम तक पहुंच रखने वाली गौरैया की संख्या में कमी आना अत्यंत चिंताजनक है। हिम्मत सिंह पंवार ने कहा कि खेतों में पेड़ों से सकोरे बांधकर पक्षियों के लिए पेयजल की व्यवस्था करना हम सभी की जिम्मेदारी है, जिसमें सामूहिक सहभागिता आवश्यक है। तीन दिवसीय पर्यावरणीय आयोजनों की जानकारी देते हुए अजीत कोठिया ने बताया कि 21 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस तथा 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन रामभरत चेजारा ने किया तथा आभार हिम्मत सिंह पंवार ने व्यक्त किया। आयोजन में 11 बहनों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली।</p>
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		<title>विश्व गौरया दिवस आज :  तकनीक का असर पड़ रहा है गौरैया पर </title>
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		<pubDate>Wed, 20 Mar 2024 08:42:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आज दुनिया भर में ‘विश्व गौरैया दिवस’ मनाया जा रहा है. यह हर साल 20 मार्च को होता है। दुनिया भर में गौरैया पक्षी की संख्या तेजी से घट रही है। ऐसे में इस पक्षी के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के मकसद से ‘विश्व गौरैया दिवस’ मनाया जाता है। आज हमें गौरया की चहचहाहट [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आज दुनिया भर में ‘विश्व गौरैया दिवस’ मनाया जा रहा है. यह हर साल 20 मार्च को होता है। दुनिया भर में गौरैया पक्षी की संख्या तेजी से घट रही है। ऐसे में इस पक्षी के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के मकसद से ‘विश्व गौरैया दिवस’ मनाया जाता है। आज हमें गौरया की चहचहाहट सुनाई नहीं दे रही है। कैसे हो इनका संरक्षण इसी पर<span style="color: #ff0000"> पढ़िए पर्यावरण प्रेमी और स्तंभकार डॉ सुनील जैन संचय का यह विशेष आलेख</span></strong></p>
<hr />
<p>गौरेया की घटती संख्या का मुख्य कारण है, भोजन-पानी की कमी और पेड़ों का कटान। बढ़ती मॉडर्न टेक्नोलॉजी ने चिड़ियों का सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। शहरीकरण के नए दौर में घरों में बगीचों के लिए स्थान नहीं है। पेट्रोल के दहन से निकलने वाला मिथाइल नाइट्रेट छोटे कीटों के लिए विनाशकारी होता है, जबकि यही कीट चूजों के खाद्य पदार्थ होते हैं। मोबाइल फोन टावरों से निकलने वाली तरंगों में इतनी क्षमता होती है, जो इनके अंडों को नष्ट कर सकती है।</p>
<p><strong>गौरैया को विलुप्त होने से हम ऐसे बचा सकते हैं</strong></p>
<p>यदि इसके संरक्षण के उचित प्रयास नहीं किए गए तो हो सकता है कि गौरैया इतिहास की चीज बन जाए और भविष्य की पीढ़ियों को यह देखने को ही न मिले। गौरैया को विलुप्त होने से बचाने के लिए हम कुछ छोटे-छोटे प्रयास कर सकते हैं।</p>
<p><strong>गौरैया संरक्षण के उपाय</strong></p>
<p>ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी ऑफ बर्डस द्वारा विश्व के विभिन्न देशों में किए गए अनुसंधान के आधार पर भारत और कई बड़े देशों में गौरैया को रेड लिस्ट कर दिया गया है जिसका अर्थ है कि यह पक्षी अब पूर्ण रूप से विलुप्ति की कगार पर है। गौरैया संरक्षण के लिए हम यही कर सकते हैं कि अपनी छत पर दाना-पानी रखें, अधिक से अधिक पेड़- पौधे लगाएं, उनके लिए कृत्रिम घोंसलों का निर्माण करें।<br />
गौरैयों को इस तरह बचा सकते हैं :<br />
1. गर्मी के दिनों में अपने घर की छत पर एक बर्तन में पानी भरकर रखें।<br />
2. गौरैया को खाने के लिए कुछ अनाज छतों और पार्कों में रखें।<br />
3. कीटनाशक का प्रयोग कम करें।<br />
4. अपने वाहन को प्रदूषण मुक्त रखें।<br />
5. हरियाली बढ़ाएं, छतों पर घोंसला बनाने के लिए कुछ जगह छोड़ें और उनके घोंसलों को नष्ट न करें।<br />
गौरैया को फिर से बुलाने के लिए लोगों को अपने घरों में कुछ ऐसे स्थान उपलब्ध कराने चाहिए जहां वे आसानी से अपने घोंसले बना सकें और उनके अंडे तथा बच्चे हमलावर पक्षियों से सुरक्षित रह सकें।<br />
गौरैया शहरों से तो लगभग लुप्त हो चुकी है तथा गांवों में भी इनके घरौंदे अपेक्षाकृत कम ही हैं। हमें इस चिड़िया को बचाने हेतु थोड़ा-सा प्रयास करना होगा। यदि हम यह कर सके तो क्या पता यह रूठा मेहमान हमारे घर -आँगन में फिर से फुदकने लगे। फिर से चूँ-चूँ की मधुर आवाज गूँजने लगे।<br />
गौरैया जो कभी गांवों में हैंडपंप पर टपकते पानी से अठखेलियां करती नजर आती थी, कभी दीवार पर लगे आईने में चोंच बजाती थी। चीं चीं करती उस नन्ही गौरैया को देखकर बच्चे किलकारी मारा करते थे। वो गौरैया अब कभी-कभार ही दिखती है। शहर में तो छोड़िए गांवों में भी कम ही नजर आती हैं। हर घर में पाई जाने वाली ये नन्ही चिड़िया तेजी से कम हो रही है। ऐसे में गौरैया को बचाने के लिए पहल नहीं की गई तो वह सिर्फ किस्सा बन रह जाएंगी।<br />
हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि गौरैया का गौरव लौटाएं, ताकि फिर आंगन व छत पर गौरैया फुदकती नजर आए।<br />
प्रयास रंग ला रहे : गौरैया को बचाने के लिए बहुत से स्वयंसेवी संस्थाओं, संगठन अनेक वर्षों से इस दिशा में सार्थक प्रयास कर रहे हैं उनकी जागरूकता का फल दिखने लगा है हालांकि इस दिशा में बहुत कार्य करने की जरूरत है। जागरूकता का परिणाम है कि लोग छतों पर दाना, पानी के साथ ही घरों में एवं अन्य स्थानों पर घोसले आदि रखने लगे हैं।</p>
<p><strong>किसी कवि की यह पंक्तियां प्रासंगिक हैं-</strong><br />
<strong>धीरे-धीरे यादें अब अवशेष रह गईं,</strong><br />
<strong>लुका-छिपी का खेल स्मृति-शेष रह गया।</strong><br />
<strong>ना रहा गांव, न रहा मुंडेर,</strong><br />
<strong>गौरेया कहानी के बीच रह गई।।</strong></p>
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