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	<title>विश्व कल्याण के पथ प्रदर्शक &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>विश्व कल्याण के पथ प्रदर्शक हैं भगवान महावीर स्वामी: मूक पशु पक्षियों तथा मनुष्य को एक माला में पिरोकर जोड़ने का किया प्रयास </title>
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		<pubDate>Wed, 09 Apr 2025 09:18:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक गुरुवार को संपूर्ण जगत में धार्मिक आस्था और श्रद्धा से मनाया जाएगा। इंदौर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिर और चैत्यालयों में विशेष तैयारियां की जा रही है। सकल जैन समाज में भगवान महावीर के जन्म कल्याणक मनाने के लिए उत्साहित हैं। भगवान महावीर के संदेशों के बारे में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक गुरुवार को संपूर्ण जगत में धार्मिक आस्था और श्रद्धा से मनाया जाएगा। इंदौर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिर और चैत्यालयों में विशेष तैयारियां की जा रही है। सकल जैन समाज में भगवान महावीर के जन्म कल्याणक मनाने के लिए उत्साहित हैं। <span style="color: #ff0000">भगवान महावीर के संदेशों के बारे में स्मरण करा रहे हैं इंदौर से हरिहरसिंह चौहान पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> भगवान महावीर स्वामी ने अहिंसा और सच्चाई की राह पर चलकर धर्म को दिशा दिखाई थी और आज वर्तमान को उसी वर्धमान, महावीर, वीर, अतिवीर, सन्मति की आवश्यकता है। समाजिक दूरियों के बढ़ने के कारण झूठ, फरेब, लालच का बोलबाला हो रहा है। ऐसे समय में वीर प्रभु के उपदेशों और उनके बताए मार्ग पर हम सभी के लिए बहु उपयोगी है। जैन धर्म के 24 वें तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म चैत्र शुक्ल तेरस को पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला के यहां हुआ था। क्षत्रिय राजकुमार होते हुए भी आप ने हिंसा का साथ कभी भी नहीं दिया। वर्धमान महावीर ने 12 वर्ष तक मौन तपस्या की थी। उन्हें बहुत कठिनाइयों से केवल ज्ञान प्राप्त हुआ। उन्होंने पांच मूलभूत सिद्धांतों का पालन किया। वह अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य(अस्तेय) और ब्रह्मचर्य से नाता जोड़े रखा। तभी वह जगत के पालनहार बनकर आप ने समन्वय भाव रखते हुए सभी मूक पशु पक्षियों तथा मनुष्य को एक माला में पिरोकर जोड़ने का प्रयास किया। आपके त्याग, संयम, प्रेम और करुणा शील सदाचार ने जियो और जीने दो का संदेश दिया था।</p>
<p><strong>हम सभी में जनकल्याण के भाव हों</strong></p>
<p>प्रभु महावीर जहां तपस्या करते थे। उस स्थान पर गाय, बकरी, बंदर, चिड़िया, हाथी और हिंसक जीव शेर आदि एक साथ आते थे और प्रभु महावीर स्वामी के सामने बैठकर उनके चरणों में समर्पण भाव से बैठे रहते थे। उनकी अहिंसा और आध्यात्मिक स्वतंत्रता से ही विश्व-कल्याण के भाव जगत में आए। इसका मतलब भी यही होता है कि सभी जीवों पर दया भाव रखो। उन्हें भी जीने का अधिकार है। महावीर स्वामी और उनकी तपस्या का प्रतिफल है अहिंसा धर्म। जिस युग में हिंसा और पशु बलि, जात-पात का भेदभाव बढ़ रहा था। ऐसे समय में जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी विश्व कल्याण के पथ प्रदर्शक बन ‘अहिंसा परमो धर्मः’ का दिव्य संदेश दिया। उन्होंने कहा था ‘जियो और जीने दो’ हम सभी में जनकल्याण के भाव होना चाहिए। हमेशा से प्रेम और क्षमा के साथ रहते हुए प्रभु महावीर स्वामी कहते थे कि हम सच्चे ह्रदय से गलतियों के लिए क्षमा करें तो वह हमें जगत में सम्मान दिलाएगा।</p>
<p><strong>अहिंसा और विश्व कल्याण के पथ पर आगे बढ़ें</strong></p>
<p>मैत्री भाव जगत कल्याण के लिए बहुत जरूरी है। विचारों की हिंसा से बचें। सच्चाई की राह पर मानव प्रेम के भाव जागृत करें। वीर शासन में महावीर स्वामी के भाव और दिव्य संदेश क्षमा और सहनशीलता रहना, वर्तमान में बहुत जरूरी है। हम सभी निडर होकर अहिंसा और विश्व कल्याण के पथ पर आगे बढ़ें तो ही हमें जिनवाणी का मोल समझ में आएगा। जैन धर्म और महावीर स्वामी के बताए हुए मार्ग पर चलने से ही जीवन में उज्जवलता के साथ वैचारिक मतभेद भी दूर होंगे।</p>
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		<pubDate>Wed, 09 Apr 2025 08:53:48 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक गुरुवार को संपूर्ण जगत में धार्मिक आस्था और श्रद्धा से मनाया जाएगा। इंदौर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिर और चैत्यालयों में विशेष तैयारियां की जा रही है। सकल जैन समाज में भगवान महावीर के जन्म कल्याणक मनाने के लिए उत्साहित हैं। <span style="color: #ff0000">भगवान महावीर के संदेशों के बारे में स्मरण करा रहे हैं इंदौर से हरिहरसिंह चौहान पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> भगवान महावीर स्वामी ने अहिंसा और सच्चाई की राह पर चलकर धर्म को दिशा दिखाई थी और आज वर्तमान को उसी वर्धमान, महावीर, वीर, अतिवीर, सन्मति की आवश्यकता है। समाजिक दूरियों के बढ़ने के कारण झूठ, फरेब, लालच का बोलबाला हो रहा है। ऐसे समय में वीर प्रभु के उपदेशों और उनके बताए मार्ग पर हम सभी के लिए बहु उपयोगी है। जैन धर्म के 24 वें तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म चैत्र शुक्ल तेरस को पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला के यहां हुआ था। क्षत्रिय राजकुमार होते हुए भी आप ने हिंसा का साथ कभी भी नहीं दिया। वर्धमान महावीर ने 12 वर्ष तक मौन तपस्या की थी। उन्हें बहुत कठिनाइयों से केवल ज्ञान प्राप्त हुआ। उन्होंने पांच मूलभूत सिद्धांतों का पालन किया। वह अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य(अस्तेय) और ब्रह्मचर्य से नाता जोड़े रखा। तभी वह जगत के पालनहार बनकर आप ने समन्वय भाव रखते हुए सभी मूक पशु पक्षियों तथा मनुष्य को एक माला में पिरोकर जोड़ने का प्रयास किया। आपके त्याग, संयम, प्रेम और करुणा शील सदाचार ने जियो और जीने दो का संदेश दिया था।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-78642" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0027.jpg" alt="" width="860" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0027.jpg 860w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0027-202x300.jpg 202w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0027-688x1024.jpg 688w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0027-768x1143.jpg 768w" sizes="(max-width: 860px) 100vw, 860px" />हम सभी में जनकल्याण के भाव हों</strong></p>
<p>प्रभु महावीर जहां तपस्या करते थे। उस स्थान पर गाय, बकरी, बंदर, चिड़िया, हाथी और हिंसक जीव शेर आदि एक साथ आते थे और प्रभु महावीर स्वामी के सामने बैठकर उनके चरणों में समर्पण भाव से बैठे रहते थे। उनकी अहिंसा और आध्यात्मिक स्वतंत्रता से ही विश्व-कल्याण के भाव जगत में आए। इसका मतलब भी यही होता है कि सभी जीवों पर दया भाव रखो। उन्हें भी जीने का अधिकार है। महावीर स्वामी और उनकी तपस्या का प्रतिफल है अहिंसा धर्म। जिस युग में हिंसा और पशु बलि, जात-पात का भेदभाव बढ़ रहा था। ऐसे समय में जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी विश्व कल्याण के पथ प्रदर्शक बन ‘अहिंसा परमो धर्मः’ का दिव्य संदेश दिया। उन्होंने कहा था ‘जियो और जीने दो’ हम सभी में जनकल्याण के भाव होना चाहिए। हमेशा से प्रेम और क्षमा के साथ रहते हुए प्रभु महावीर स्वामी कहते थे कि हम सच्चे ह्रदय से गलतियों के लिए क्षमा करें तो वह हमें जगत में सम्मान दिलाएगा।</p>
<p><strong>अहिंसा और विश्व कल्याण के पथ पर आगे बढ़ें</strong></p>
<p>मैत्री भाव जगत कल्याण के लिए बहुत जरूरी है। विचारों की हिंसा से बचें। सच्चाई की राह पर मानव प्रेम के भाव जागृत करें। वीर शासन में महावीर स्वामी के भाव और दिव्य संदेश क्षमा और सहनशीलता रहना, वर्तमान में बहुत जरूरी है। हम सभी निडर होकर अहिंसा और विश्व कल्याण के पथ पर आगे बढ़ें तो ही हमें जिनवाणी का मोल समझ में आएगा। जैन धर्म और महावीर स्वामी के बताए हुए मार्ग पर चलने से ही जीवन में उज्जवलता के साथ वैचारिक मतभेद भी दूर होंगे।</p>
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