<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>विशेष पूजा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Fri, 15 Aug 2025 06:09:59 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>विशेष पूजा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>भगवान श्री शांतिनाथ का गर्भ कल्याणक 15 अगस्त को: भादों की कृष्ण पक्ष की सप्तमी को आता है भगवान का गर्भ कल्याणक  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/lord_shri_shantinaths_garbha_kalyanak_on_15th_august/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/lord_shri_shantinaths_garbha_kalyanak_on_15th_august/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 Aug 2025 06:09:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[16th Tirthankara]]></category>
		<category><![CDATA[16वें तीर्थंकर]]></category>
		<category><![CDATA[Abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Bhadon Krishna Paksha Saptami]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Shri Shantinath]]></category>
		<category><![CDATA[Maha Aarti]]></category>
		<category><![CDATA[Panch Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[Shantidhara]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Special Worship]]></category>
		<category><![CDATA[अभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पंचकल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान श्री शांतिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[भादों कृष्ण पक्ष सप्तमी]]></category>
		<category><![CDATA[महाआरती]]></category>
		<category><![CDATA[विशेष पूजा]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिधारा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=87634</guid>

					<description><![CDATA[जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याणक पूर्ण भक्ति भाव से समूचे देश में दिगंबर जैन मंदिरों में मनाया जाएगा। भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याण तिथि के अनुसार भादों की कृष्ण पक्ष की सप्तमी को आता है। इस बार यह 15 अगस्त को है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष प्रस्तुति में आज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याणक पूर्ण भक्ति भाव से समूचे देश में दिगंबर जैन मंदिरों में मनाया जाएगा। भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याण तिथि के अनुसार भादों की कृष्ण पक्ष की सप्तमी को आता है। इस बार यह 15 अगस्त को है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष प्रस्तुति में आज <span style="color: #ff0000">पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित जानकारी&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याणक पूर्ण भक्ति भाव से समूचे देश में दिगंबर जैन मंदिरों में मनाया जाएगा। भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याण तिथि के अनुसार भादों की कृष्ण पक्ष की सप्तमी को आता है। इस बार यह 15 अगस्त को है। जैन धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याणक जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ के जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना है। यह दिन भाद्रपद कृष्ण सप्तमी को मनाया जाता है। जब भगवान शांतिनाथ की माता महारानी ऐरा के गर्भ में आने की घटना होती है। यह विदित है कि गर्भ कल्याणक तीर्थंकरों के जीवन की पांच महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है, जिन्हें पंचकल्याणक कहा जाता है। भगवान शांतिनाथ का नाम ही शांति का प्रतीक है और उनके गर्भ में आने से राज्य में सुख-शांति और समृद्धि का वातावरण छा गया था। इसलिए उनका नाम शांतिनाथ रखा गया था। ग्रंथों के अनुसार तीर्थंकरों के जीवन की ये घटनाएं अन्य जीवों के कल्याण का आधार बनती हैं।</p>
<p>भगवान शांतिनाथ जी के गर्भ कल्याणक के उपलक्ष्य में दिगंबर जैन मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा, अभिषेक, शांतिधारा और महाआरती जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस अवसर पर भगवान शांतिनाथ की भक्ति और आराधना की जाती है। गर्भ कल्याणक दिवस पर भक्त भगवान शांतिनाथ से सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। संक्षेप में देखा जाए तो भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याणक जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक अवसर है, जो सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक है।</p>
<p><strong>कामदेव जैसे रूपवान थे भगवान शांतिनाथ </strong></p>
<p>शांतिनाथ जैन धर्म के 24 तीर्थकरों में से अवसर्पिणी काल के 16वें तीर्थंकर थे। माना जाता हैं कि शांतिनाथ के संग 900 साधु मोक्ष गए थे। भगवान शांतिनाथ का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन हुआ था। तब भरणी नक्षत्र था। उनके पिता का नाम विश्वसेन था, जो हस्तिनापुर के राजा थे और माता का नाम महारानी ऐरा था। जैन ग्रंथों में शांतिनाथ को कामदेव जैसा स्वरूपवान बताया गया है। पिता के बाद शांतिनाथ हस्तिनापुर के राजा बने। जैन ग्रंथो के अनुसार उनकी 86 हजार रानियां थीं। उनके पास 84 लाख हाथी, 360 रसोइए, 84 करोड़ सैनिक, 28 हजार वन, 18 हजार मंडलिक राज्य, 360 राजवैद्य, 32 हजार अंगरक्षक देव, 32 चमर ढोलने वाले, 32 हजार मुकुटबंध राजा, 32 हजार सेवक देव, 16 हजार खेत, 56 हजार अंतर्दीप, 4 हजार मठ, 32 हजार देश, 86 करोड़ ग्राम, 1 करोड़ हंडे, 3 करोड़ गायें, 3करोड़ 50 लाख बंधु-बांधव, 10 प्रकार के दिव्य भोग, 9 निधियां और 24 रत्न, 3 करोड़ थालियां आदि संपदा थीं।</p>
<p>वैराग्य आने पर इन्हांेने ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी को दीक्षा प्राप्त की। बारह माह की छ्दमस्थ अवस्था की साधना से शांतिनाथ ने पौष शुक्ल नवमी को ‘कैवल्य ज्ञान’ प्राप्त किया। ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन सम्मेद शिखर पर भगवान शांतितनाथ ने पार्थिव शरीर का त्याग किया था।</p>
<p><strong>लक्षण</strong></p>
<p>रंग-स्वर्ण, चिन्ह -हिरण, ऊंचाई-40 धनुष (120 मीटर), आयु- 7,00,000 वर्ष, वृक्ष- नंदी वृक्ष</p>
<p>शासक देव-यक्ष गरुड़, यक्षिणी निर्वाणी</p>
<p>गणधरः-प्रथम गणधर चक्रयुध स्वामी गणधरों की संख्या 36</p>
<p><strong>चिन्ह का महत्व</strong></p>
<p>हिरण शांतिनाथ भगवान का चिन्ह है। जैनधर्म की मान्यता के अनुसार हिरण की यह शिक्षा है कि तुम भी संसार में संगीत के समान प्रिय लगने वाले चापलूसों, चमचों की दिल लुभाने वाली बातों में न फ़ंसना अन्यथा बाद में पछताना पडे़गा। यदि तनाव मुक्ति चाहते हो तो मेरे समान सरल सीधा तथा पापों से बचो और चौकन्ना रहो।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/lord_shri_shantinaths_garbha_kalyanak_on_15th_august/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आत्म शांति के लिए होगी तीन दिवसीय विशेष पूजा :  जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी का विनयांजलि कार्यक्रम सात अप्रेल से </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/vinayajali_program_of_jagadguru_karmayogi_swastishree_charukirti_bhattarak_mahaswamiji_from_7_th_april/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/vinayajali_program_of_jagadguru_karmayogi_swastishree_charukirti_bhattarak_mahaswamiji_from_7_th_april/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Apr 2023 12:15:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Jagadguru Karmayogi Swastishree Charukirti Bhattarak]]></category>
		<category><![CDATA[jain dharm]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Math]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[Shravanabelagola]]></category>
		<category><![CDATA[Shravanabelagola Math]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Special Puja श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मठ]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[विशेष पूजा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रवणबेलगोला]]></category>
		<category><![CDATA[श्रवणबेलगोला मठ]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=41771</guid>

					<description><![CDATA[जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के समाधि मरण के बाद उनकी आत्मा की शांति के लिए सात अप्रेल से श्रीमठ मंदिर में विशेष पूजा होगा। यह कार्यक्रम तीन दिन चलेगा। इसमें सभी भट्टारक महास्वामीजी का सानिध्य रहेगा। श्रवणबेलगोला। जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के समाधि मरण के बाद उनकी आत्मा की शांति के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के समाधि मरण के बाद उनकी आत्मा की शांति के लिए सात अप्रेल से श्रीमठ मंदिर में विशेष पूजा होगा। यह कार्यक्रम तीन दिन चलेगा। इसमें सभी भट्टारक महास्वामीजी का सानिध्य रहेगा।</strong></p>
<hr />
<p><strong>श्रवणबेलगोला।</strong> जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के समाधि मरण के बाद उनकी आत्मा की शांति के लिए सात अप्रेल को प्रातः 8:00 बजे से श्रीमठ मंदिर में विशेष पूजा होगा। इस अवसर पर भगवान श्री श्री श्री 1008 चंद्रप्रभु तीर्थकर का पंचामृत अभिषेक और यक्षी श्री कूष्मांडिनी माता की षोडशोपचार पूजा होगी। इसके बादा प्रातः 10 बजे कर्मदहन विधान होगा।</p>
<p>शनिवार प्रातः 8-00 बजे से जैन मठ मंंदिर में मः श्रीश्रीश्री 1008 चंद्रप्रभु तीर्थंकर की 504 कलशों से महाभिषेक पूजा होगी। इसके बाद प्रातः 11-00 बजे से विनयांजली कार्यक्रम होगा। वहीं नौ अप्रेल को प्रातः 8:00 बजे से श्री विंध्यगिरी के भगवान श्रीश्रीश्री बाहुबली स्वामी की विशेष पादपूजा होगी। कार्यक्रम में परमपूज्य स्वस्तिश्री समस्त भट्टारक महास्वामीजी का सानिध्य रहेगा।वहीं नौ अप्रेल को प्रातः 8:00 बजे समस्त जैन मठ तथा सभी जैन मंदिरों में पूज्यश्री स्वामीजी के आत्मशांति हेतु विशेष पूजा कराई जाएगी।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/vinayajali_program_of_jagadguru_karmayogi_swastishree_charukirti_bhattarak_mahaswamiji_from_7_th_april/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
