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	<title>विशुद्ध सागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>विशुद्ध सागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज का 28वां अवतरण दिवस 1 जुलाई को हेरले में मनाया जाएगा : भक्तिभाव से होंगे विविध धार्मिक आयोजन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 14:16:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज का 28वां अवतरण दिवस 1 जुलाई को हेरले में श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। कार्यक्रम में समाजजन बड़ी संख्या में सहभागी होंगे। पढ़िए श्रीफल साथी अभिषेक अशोक पाटील की यह रिपोर्ट। हेरले। पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री 108 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज का 28वां अवतरण दिवस 1 जुलाई को हेरले में श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। कार्यक्रम में समाजजन बड़ी संख्या में सहभागी होंगे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी अभिषेक अशोक पाटील की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>हेरले।</strong> पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री 108 सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज एवं मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज उपसंघ इन दिनों हेरले में विराजमान हैं। मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज के 28वें अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में 1 जुलाई 2026 को हेरले में भव्य धार्मिक आयोजन किया जाएगा।</p>
<p><strong>भक्तिभाव से मनाया जाएगा अवतरण दिवस</strong></p>
<p>श्री 1008 चंद्रप्रभू दिगंबर जैन मंदिर, हेरले एवं श्री 1008 मुनीसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर, आदिनाथ नगर, हेरले के अध्यक्ष श्री सुरेश चौगुले ने बताया कि मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज का 28वां अवतरण दिवस अनु-शाम मंगल कार्यालय, हेरले में श्रद्धा, भक्ति एवं धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा।</p>
<p><strong>वैराग्य से दीक्षा तक का प्रेरक सफर</strong></p>
<p>मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज का जन्म 1 जुलाई 1998 को मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले के ग्राम मजना में श्रावक श्री विनयकुमार जैन एवं श्रीमती सुनीता जैन के यहां हुआ। बाल्यकाल से ही साधु सेवा, स्वाध्याय एवं धार्मिक संस्कारों के कारण उनके जीवन में वैराग्य का भाव जागृत हुआ। 6 अक्टूबर 2017 को इंदौर में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज से विशाल जनसमूह की उपस्थिति में उन्होंने सीधे मुनि दीक्षा ग्रहण की और उनका नाम मुनि श्री सारस्वत सागर जी रखा गया।</p>
<p><strong>विभिन्न राज्यों में हुए चातुर्मास</strong></p>
<p>मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज का वर्षायोग एवं चातुर्मास वर्ष 2018 में औरंगाबाद (महाराष्ट्र), 2019 में भिंड (मध्यप्रदेश), 2020 में वैशाली बसकुंड (बिहार), 2021 में सम्मेद शिखरजी (झारखंड), 2022 में रायपुर (छत्तीसगढ़), 2023 में बड़ौत (उत्तर प्रदेश), 2024 में सोलापुर (महाराष्ट्र) तथा 2025 में नांद्रे (महाराष्ट्र) में संपन्न हुआ। वर्ष 2026 का चातुर्मास जयसिंगपुर (महाराष्ट्र) में संपन्न होगा।</p>
<p><strong>समाज की ओर से व्यापक तैयारियां</strong></p>
<p>श्री 1008 चंद्रप्रभू दिगंबर जैन मंदिर, श्री 1008 मुनीसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर, समस्त दिगंबर जैन समाज हेरले, वीर सेवा दल हेरले एवं वीर महिला मंडल हेरले द्वारा अवतरण दिवस समारोह की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं ने अर्पित की मंगल भावनाएं</strong></p>
<p>अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद, कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष श्री अभिषेक अशोक पाटील ने मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज के 28वें अवतरण दिवस पर बारंबार नमोस्तु अर्पित करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घ संयम जीवन एवं धर्मप्रभावना की मंगल कामना की।</p>
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		<title>मुनि श्री आदित्य सागर जी का 40 वां अवतरण दिवस 24 को : सन्मति से आदित्य के उदय होने का दिन पर नमन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 May 2026 14:13:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री आदित्यसागर जी धरातल पर प्रत्यक्ष दर्शन देने वाली उन भव्य आत्माओं में से एक हैं, जिनका सान्निध्य पारस मणि के स्पर्श के समान है। इंदौर से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की खबर&#8230; इंदौर। मुनि श्री आदित्यसागर जी धरातल पर प्रत्यक्ष दर्शन देने वाली उन भव्य आत्माओं में से एक हैं, जिनका सान्निध्य पारस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री आदित्यसागर जी धरातल पर प्रत्यक्ष दर्शन देने वाली उन भव्य आत्माओं में से एक हैं, जिनका सान्निध्य पारस मणि के स्पर्श के समान है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> मुनि श्री आदित्यसागर जी धरातल पर प्रत्यक्ष दर्शन देने वाली उन भव्य आत्माओं में से एक हैं, जिनका सान्निध्य पारस मणि के स्पर्श के समान है। आपके 40 वें अवतरण दिवस पर उनके चरणों में नमन। संस्कारधानी जबलपुर के मस्तक पटल पर गौरव का चंदन तो उसी दिन लग चुका था, जब 24 मई 1986 के दिन, पिता राजेश और माँ वीणा की कोख में जन्म हुआ था। वैसे तो इस पुत्र का नाम सन्मति रखा गया था, पर कोई नहीं जानता था कि यही सन्मति एक दिन जिनशासन के यश आकाश को प्रकाशित करने वाला अद्वितीय आदित्य बन कर उदित होगा, एक दिन अपनी साधना और वात्सल्य के बल पर सहस्रों लोगों के जीवन में सौभाग्य बन कर प्रवेश कर जाएगा परंतु, हम ने उनके चमत्कारों पर या लाखों लोगों द्वारा हो रहे उनके जय-जयकारों के सामने अपना मस्तक नहीं टेका, हम ने किसी भय या स्वार्थ से उन्हें अपना गुरु नहीं माना…। हमने तो बहुत गहराई से समझा उस व्यक्ति को जिसने MBA (Gold Medalist) और BBA जैसी शैक्षिक योग्यता, संपन्न एवं समृद्ध परिवार, स्वर्ण-आभूषणों के प्रतिष्ठित व्यापार और सुकुमारिता से भरे भविष्य की कामनाओं को एक पल में किसी तृण के समान छोड़ देने का साहस किया। जिसके पास विलासितापूर्ण जीवन जीने के अनेकों विकल्प मौजूद थे। जिसकी प्रखर दैहिक आभा, अप्रतिम सुंदरता, अद्वितीय बुद्धिलब्धि और पुण्य-शक्ति के आगे सभी सांसारिक सुख किसी चरण चंचरिक की तरह उसके सामने नतमस्तक होने को तैयार बैठे थे…</p>
<p>परंतु, इन सब मोह और सुखों के आगे तो भोगी झुका करते हैं योगी नहीं, सन्मति भैया ने जो पथ चुना7 था वह इन सब से ऊपर था- निर्ग्रंथ पथ और फिर सन्मति भैया ने 8 नवम्बर 2011 को गुरु के प्रति समर्पण के विशुद्ध-सागर में ऐसी डुबकी लगाई कि सागर के अंदर जो गया वह थे सन्मति, पर जो बाहर आये वह थे “आदित्य”…*।जिन्होंने हम जैसे अनेकों को सत्पथ दिखाया, हम जब जब गिरने लगे उनके शब्दों ने हमें वापस उठाया, उन्होंने हमें कला सिखाई कि जीवन कैसे जिया जाता है, उन्होंने हमें बताया व्यक्ति को व्यक्तित्व कैसे बनाया जाता है। उन्हें शब्दों में बयॉं कर पाना संभव नहीं है, हाँ ! ये वही हैं जिनके लिये असंभव भी पूरी तरह असंभव नहीं है।</p>
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		<title>कोटा में भव्य ऐतिहासिक मंगल अगवानी : मुनि श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ (27 पिच्छी) का मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Mon, 05 Feb 2024 07:55:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ (27 पिच्छी) का मंगल प्रवेश 5 फरवरी सोमवार के दिन जंगल वाले बाबा मुनि श्री चिन्मय सागर जी महाराज की पावन प्रेरणा से निर्मित श्री 1008 मुनिसुब्रतनाथ दिगंबर जैन,त्रिकाल चौबीसी मंदिर आर.के. पुरम में होने जा रहा है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ (27 पिच्छी) का मंगल प्रवेश 5 फरवरी सोमवार के दिन जंगल वाले बाबा मुनि श्री चिन्मय सागर जी महाराज की पावन प्रेरणा से निर्मित श्री 1008 मुनिसुब्रतनाथ दिगंबर जैन,त्रिकाल चौबीसी मंदिर आर.के. पुरम में होने जा रहा है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है । <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट। </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> कई जन्मों का पुण्य सिमट कर जब जीवन में आता है तब जाकर एक साथ 27 जैन संतो का जीवन में दर्शन मिल पाता है। श्रद्धा भक्ति समर्पण का दौर यह आया है । आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ (27 पिच्छी) का मंगल प्रवेश 5 फरवरी सोमवार के दिन जंगल वाले बाबा मुनि श्री चिन्मय सागर जी महाराज की पावन प्रेरणा से निर्मित श्री 1008 मुनिसुब्रतनाथ दिगंबर जैन,त्रिकाल चौबीसी मंदिर आर.के. पुरम में होने जा रहा है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है। पूरे संघ की आहारचार्य का परम सौभाग्य भी आर .के.पुरम जैन समाज को प्राप्त होगा।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-55353" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240205-WA0018.jpg" alt="" width="1272" height="1272" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240205-WA0018.jpg 1272w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240205-WA0018-300x300.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240205-WA0018-1024x1024.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240205-WA0018-150x150.jpg 150w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240205-WA0018-768x768.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240205-WA0018-65x65.jpg 65w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240205-WA0018-990x990.jpg 990w" sizes="(max-width: 1272px) 100vw, 1272px" /></p>
<p><strong>भव्य जुलुस निकलेगा </strong></p>
<p>मंदिर समिति के अध्यक्ष अंकित जैन, महामंत्री अनुज जैन और कोषाध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर धर्म सभा आयोजित की जाएगी। धर्म सभा में चित्र अनावरण शास्त्र भेंट गुरुदेव का पाद प्रक्षालन भी किया जाएगा। राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी एवम मंदिर समिति के प्रचार प्रसार मंत्री पारस जैन पार्श्वमणि व अंशुल जैन ने बताया कि महावीर नगर द्वितीय स्थित संत भवन लोकार्पण के बाद वहां से परम पूज्य चर्या शिरोमणि आचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ विशाल जुलूस के साथ रवाना होंगे। जगह जगह स्वागत द्वारा बनाए जाएंगे, सैंकड़ों की संख्या में श्रावकजन साधु संतो की मंगल आरती उतार कर पाद प्रक्षालन करेंगे। केशरिया परिधान में महिलाएं और सफेद ड्रेस में पुरुष भक्ति रस में संगीत की मधुर धुनों पर डूबते हुए चलेंगे ।</p>
<p><strong>ये रहेंगे मौजूद </strong></p>
<p>कार्याध्यक्ष प्रकाश जैन ने बताया कि इस अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज समाज समिति के अध्यक्ष विमल जैन नांता महामंत्री विनोद टोरडी कार्याध्यक्ष जे.के.जैन, प्रकाश बज राजमलजी पाटोदी, अनिल ठोरा, मनोज जैसवाल, पवन पाटोदी, महावीर जैन, चंद्रेश जैन, पदम जैन, हरक चंद गोधा, मुकेश पापड़ीवाल, राजकुमार वेद, पंकज जैन, मनीष जैन अशोक पाटनी विकास अजमेरा, दीपक जैन डीसीएम, बाबूलाल जैन, नरेशजी-निशाजी वेद एस के जैन, अमोलक चंद जैन विमल जैन इत्यादि लोग उपस्थित रहेंगे। समस्त आयोजन का सीधा प्रसारण पारस टी वी चैनल पर विनोद जैन टोरडी एम डी (पारस टी वी चैनल)परिवार द्वारा दिखाया जायेगा।</p>
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		<title>सत्साहित्य जीवन का आधार है</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Dec 2021 16:35:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[पुस्तक]]></category>
		<category><![CDATA[विशुद्ध सागर]]></category>
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					<description><![CDATA[• आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के 50 वे स्वर्णिम जन्म दिवस पर आचार्यश्री पर केंद्रित पुस्तक पुण्यार्जक डॉ. विकास जैन को भेंट • आध्यात्म की ज्योति को जनसामान्य में आचार्यश्री ने प्रवाहित किया ललितपुर। आध्यात्मिक साहित्य सेवन में संयम, स्वास्थ्य मजबूत करने की अथाह शक्ति होती है।जैसा साहित्य हम पढ़ते हैं, वैसे ही विचार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>• आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के 50 वे स्वर्णिम जन्म दिवस पर आचार्यश्री पर केंद्रित पुस्तक पुण्यार्जक डॉ. विकास जैन को भेंट</strong></p>
<p><strong>• आध्यात्म की ज्योति को जनसामान्य में आचार्यश्री ने प्रवाहित किया</strong></p>
<p><strong>ललितपुर</strong>। आध्यात्मिक साहित्य सेवन में संयम, स्वास्थ्य मजबूत करने की अथाह शक्ति होती है।जैसा साहित्य हम पढ़ते हैं, वैसे ही विचार मन के भीतर चलते रहते हैं और उन्हीं से हमारा सारा व्यवहार प्रभावित होता है। वर्तमान विषम वातावरण में संत-साहित्य की उपादेयता बहुत है। अतः इस भीषण वर्तमान परिवेश में संतों की पीयूषवाणी जनसाधारण को सबल प्रदान कर सकती है। आज के मानव को परिज्ञान प्रदान कर, उसका पथप्रदर्शन कर, समाज को सशक्त, निर्दोष एवं कल्याणकारी मार्ग पर अग्रसर करना केवल संत साहित्य के सामाजिक आदर्शों के वरण से ही संभव है। &#8216;आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी का व्यक्तित्व-कृतित्व&#8217; महत्वपूर्ण व पठनीय शोध कृति है। आचार्यश्री के अवदान को राष्ट्रीय विद्वानों ने अपने लेखों से रेखांकित किया है।<br />
उक्त विचार नगर के सुप्रसिद्ध नवजात शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास जैन ने उनके परिवार के पुण्यार्जन से प्रकाशित कृति &#8216; आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी का व्यक्तित्व-कृतित्व&#8217; को कृति के संपादक डॉ. सुनील संचय से आचार्यश्री के 50वे जन्म दिवस पर प्राप्त करते हुए कहीं।<br />
कृति के संपादक डॉ. सुनील संचय ललितपुर ने बताया कि उक्त कृति में पूज्य मुनि श्री सुप्रभसागर जी महाराज एवं परम पूज्य मुनि श्री प्रणतसागर जी महाराज के सान्निध्य में मड़ावरा में आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज व्यक्तित्व-कृतित्व विषय पर आयोजित राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी में विद्वानों द्वारा प्रस्तुत शोधालेखों को प्रकाशित किया गया है। उक्त मुनिद्व्य का 2020 में ललितपुर में भी चातुर्मास हुआ था। हाल ही में प्रकाशित उक्त कृति के पुण्यार्जक बनने का सौभाग्य डॉ. विरधीचन्द्र जैन , लक्ष्मी जैन, चंद्रकुमार, हंसराज, दीपक जैन, मड़ावरा, डॉ विकास जैन ललितपुर, डॉ विशाल जैन परिवार ने प्राप्त किया है। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के 50वे जन्म दिवस 18 दिसम्बर के प्रसंग पर उक्त कृति -पुण्यार्जक डॉ. विकास जैन को भेंट की गई, जिसका सर्वप्रथम उन्होंने विमोचन किया। उक्त कृति का प्रकाशन उक्त मुनिद्व्य की प्रेरणा से किया गया है।<br />
कृति में मुनि श्री प्रणत सागर जी, डॉ रमेश जैन दिल्ली, प्रोफेसर अशोक वाराणसी , डॉ नरेंद्र गाजियाबाद, प्राचार्य निहालचंद बीना, ब्र. जय निशांत टीकमगढ़, पंडित विनोद रजवांस, डॉ विमल जयपुर, डॉ महेंद्र मनुज इंदौर, डॉ सुशील मैनपुरी, राजेन्द्र महावीर सनावद, डॉ पंकज भोपाल, डॉ सुनील संचय, शीतल चंद्र ललितपुर, संतोष शास्त्री साढूमल, डॉ सुमत उदयपुर, डॉ आशीष वाराणसी, सुनील शास्त्री, डॉ निर्मल जैन, मयंक अलीगढ़ आदि के संगोष्ठी में प्रस्तुत शोधालेख प्रकाशित किए गए हैं। प्रारंभ में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी व मुनि श्री सुप्रभसागर जी के आशीर्वचन इसके बाद संपादकीय प्रकाशित है।<br />
श्रमण संस्कृति की गौरवशाली परंपरा में परम पूज्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी मुनिराज अपनी आगमोक्त चर्या और आध्यात्मिक चिंतन के द्वारा निरंतर आत्मसाधना व प्रभावना में संलग्न हैं। आप श्रमण परंपरा के विलक्षण और तपस्वी संत हैं। आपने समाज और संस्कृति को भी एक नई दिशा दिखाई है। आध्यात्मिक संत आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने आध्यात्म की धारा को जन-जन में प्रवाहित किया</p>
<p><strong>समाचार सौजन्य- डॉ. सुनील संचय,ललितपुर</strong></p>
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