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	<title>विमल सागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>विमल सागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य श्री विमल सागर महाराज का समाधि दिवस मनाया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संपादक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Dec 2021 12:30:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[विमल सागर]]></category>
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		<category><![CDATA[सुंदर सागर]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; बांसवाड़ा। शहर की मोहन कॉलोनी दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्य श्री सुन्दर सागर महाराज के सानिध्य में आचार्य श्री विमल सागर महाराज का 27 वां समाधि दिवस मनाया गया। समाज के श्रावक- श्राविका एवं संघ के भैया -दीदी द्वारा आचार्य विमल सागर महाराज की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक और आरती की गई। आचार्य श्री [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div style="width: 640px;" class="wp-video"><video class="wp-video-shortcode" id="video-24542-1" width="640" height="352" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2021/12/VID-20211230-WA0013.mp4?_=1" /><a href="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2021/12/VID-20211230-WA0013.mp4">https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2021/12/VID-20211230-WA0013.mp4</a></video></div>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>बांसवाड़ा</strong>। शहर की मोहन कॉलोनी दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्य श्री सुन्दर सागर महाराज के सानिध्य में आचार्य श्री विमल सागर महाराज का 27 वां समाधि दिवस मनाया गया। समाज के श्रावक- श्राविका एवं संघ के भैया -दीदी द्वारा आचार्य विमल सागर महाराज की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक और आरती की गई। आचार्य श्री सुन्दर सागर महाराज, मुनि श्री पूज्य सागर महाराज, मुनि श्री शुद्ध सागर महाराज, आर्यिका सदय मति माता जी, आर्यिका सुकाव्य मति माता जी, आर्यिका सूक्ष्ल मति माता जी, आर्यिका सुरम्य मति माता जी सहित त्यागी समूह ने स्मरण सुनाकर आचार्य श्री विमल सागर महाराज को शब्द सुमन अर्पण कर श्रद्धान्जलि अर्पित की। इस अवसर पर रात में आचार्य विमल सागर पर बने भजनों की संघ्या की गई।</p>
<p>आचार्य श्री सुन्दर सागर महाराज ने कहा कि आचार्य विमल सागर महाराज ऐसे साधु थे जिन्हों कभी परंपरा का भेद नही किया। आचार्य श्री विमल सागर महाराज किसी को खाने के लिए अपने हाथों से फल दे देते थे तो उसके बिगड़े काम बन जाते थे। आज पूरी दुनिया मे उनके भक्त है आज भी वह अपने काम का निर्णय आचार्य श्री की फ़ोटो के समक्ष खेड़े होकर करते है। आचार्य विमल सागर महाराज के लिए सब एक सामना थे चाहे गरीब हो, अमीर हो, विशेष या सामान्य सब पर उनका वात्सल्य बरसता था। आचार्य को तीर्थो के संरक्षण के प्रति अधिक उत्साह था उन्हें अपने जीवन के 42 चातुर्मास में से 7 सम्मेदशिखर जी, 5 सोनागिरि, 1 राजगृही, बड़वानी में एक, श्रवणबेलगोला में एक ,गिरनार में एक में किए। आप ने अपने पूरे जीवन मे 5 हजार से अधिक उपवास किए थे। आप के दो मुख्य शिष्य थे आचार्य श्री सन्मति सागर, आचार्य भरत सागर महाराज। आचार्य विमल सागर महाराज अहिंसा का प्रचार -प्रसार बहुत किया।</p>
<p>आचार्य श्री निमित्तज्ञानी थे उन्हें यह ज्ञान आचार्य सुधर्म सागर महाराज से प्राप्त हुआ था। आचार्य श्री महावीरकीर्ती महाराज में आचार्य श्री विमल सागर महाराज को मुनि दीक्षा सोनागिर में थी उनकी दीक्षा में मुनि वीर सागर महाराज भी थे। मुनि वीर सागर महाराज दीक्षा के मंत्र बोल रहे थे और आचार्य श्री महावीरकीर्ती स्वामी दीक्षा के संस्कार कर रहे थे इसलिए ही मुनि दीक्षा के समय नाम विमल रखा था। विमल के वि का अर्थ वीर और म का अर्थ महावीर और ल का अर्थ लाल</p>
<p>आचार्य विमल सागर महाराज के जन्म का नाम नेमिचन्द्र था। उनका जन्म एटा के कोसमा में हुआ था। उनकी माता का नाम कटोरी बाई और पिता का नाम बिहारीलाल था। जेनेरु संस्कार आचार्य शांति सागर महाराज से, सात प्रतिमा आचार्य वीर सागर से ली, क्षुल्लक दीक्षा बड़वानी में 1950 में आचार्य महावीरकीर्ती से ली और नाम क्षुल्लक वृषभ सागर, ऐलक दीक्षा धरपुरी नाम सुधर्म सागर 1951, मुनि दीक्षा 1953 सोनागिरि में आचार्य महावीरकीर्ती से नाम विमल सागर ,आचार्य पद 1960 में हुआ था। आचार्य विमल सागर महाराज ने अपने हस्त कमलो से 42 मुनि दीक्षा, 28 आर्यिका, 24 क्षुल्लक,18 क्षुल्लिका और एक ऐलक दीक्षा प्रदान की था ।</p>
<p><strong>कन्टेन -ब्रह्मचारी कनक जैन</strong></p>
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		<title>परम वात्सल्य के धनी थे आचार्य विमलसागर जी महाराज -आचार्य श्री सुन्दर सागर महाराज</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/param-vatsaly-ke-dhani-the-aachary-vimal-sagar-ji-maharaj/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[मनीष गोधा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Dec 2021 11:34:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Shreephalnews]]></category>
		<category><![CDATA[Sundar sagar]]></category>
		<category><![CDATA[Vimal sagar]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य सुंदर सागर]]></category>
		<category><![CDATA[विमल सागर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल]]></category>
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					<description><![CDATA[बांसवाड़ा । जिन शासन में जो जन्म ले लेता है वह चाहता है कि मैं अपने जीवन का कल्याण करूं। ऐसे जिनशासन में महावीर स्वामी के गणधर हुए। इसके बाद आचार्य कुंदकुंद स्वामी आदि ने धर्म प्रभावना की। जिस दिन मुनि मुद्रा का विनाश हो जाएगा उस दिन त्राहि-त्राहि मच जाएगी। भारत का सौभाग्य है [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बांसवाड़ा</strong> । जिन शासन में जो जन्म ले लेता है वह चाहता है कि मैं अपने जीवन का कल्याण करूं। ऐसे जिनशासन में महावीर स्वामी के गणधर हुए। इसके बाद आचार्य कुंदकुंद स्वामी आदि ने धर्म प्रभावना की। जिस दिन मुनि मुद्रा का विनाश हो जाएगा उस दिन त्राहि-त्राहि मच जाएगी। भारत का सौभाग्य है कि यहां साधु संत हैं। भारत की धरा पर ऐसे अनेक साधु संत हुए हैं, जिन्होंने अपने आचरण, तप, साधना से महती धर्म प्रभावना की है। जो महान व्रतों का पालन करते हैं, वे बडभागी होते हैं।<br />
आज आषाढ कृष्णा सप्तमी ऐसे मुनिराज का दिन है कि आज वे ना होते तो जिन शासन की इतनी प्रभावना  ना होती। भद्र बाहु स्वामी को निमित्त ज्ञान था और उनके बाद आचार्य विमल सागर जी को ऐसा श्रुत ज्ञान था कि बैठे-बैठे आपका पूरा जीवन चरित्र बता देते थे। वे ऐटा जिले के कोसमा में जन्में। माता का नाम कटोरी देवी था। कटोरी ने सागर को जन्म दिया। उस सागर ने पूरे भारत में धूम मचा दी। उनके बचपन का नाम नेमीचद्रं था। चंद्र मतलब चंदाप्रभु। आचार्य विमल सागर के मन में सोनागिरी बसा था। नंगानंग की प्रतिमा का अनावरण आचार्य विमल सागर जी ने किया। सम्मदेशिखर जी में मंदिर भी उनकी ही देन हैं। जन्म के छह माह में ही मां का स्वर्गवास हो गया। बुआ दुर्गादेवी ने प्रण लिया कि मैं इस बालक का पालन-पोषण करूंगी। मुरैना में पढे भी और पढाया भी। शास्त्रों का ज्ञान भी लिया।<br />
प्रतिदिन साइकिल से व्यापार करते थे। कोसमा से बीस किलोमीटर जाते थे। आचार्य शांतिसागर जी फिरोजाबाद पधारे। उनसे मिलने की इच्छा की। नंगे पैर निकल लिए। साथ में थोडी सी मक्का, मूंगफली के दाने डाल लिए। फिरोजाबाद पहुंच तो आचार्य शांतिसागर जी महाराज प्रवचन दे रहे थे। सबको नियम दे रहे थे।<br />
उन्होंने आचार्य श्री से कहा कि जनेउ पहना दो। उन्होंने उन्हे सात मुनिराजों के पास भेज दिया। किसी ने पहनाई नहीं। वापस शांतिसागर के पास पहुंचे। वे परीक्षा ले रहे थे। इससे पता चलता है कि जनेउ पहनाने के संस्कार पहले से थे। जिस समय विद्याधर थे, वे देशभूशण जी महाराज के पास गए। आचार्य श्री बोले यह बालक भविष्य में जिन शासन की बहुत प्रभावना करेगा। उन्होंने सम्मेदशिखर जी यात्रा साइकिल से की। पूरे भारत की तीन बार वंदना की। णमोकार मंत्र की सिद्धी थी। आचार्य कल्पचंद्र सागर जी से शुद्ध जल का नियम और सात प्रतिमा ले ली। चारों अनुयोगों के पाठी थे। धीरे-धीरे दीक्षा मार्ग पर बढ रहे थे। आचार्य महावीरकीर्ति महाराज से बावनी में 1950 में दीक्षा ले ली।<br />
सोनागिरी में आचर्य वीर सागर जी महाराज आचार्य, महावीरकीर्ति महाराज थे। जैसे ही पता चला वहां वीर सागरजी महाराज विराजमान हैं, उन्हें आनंद आ गया। वहां पहुंच कर महाराज के चरणों में वंदना की और कहा कि आप आचार्य परमेष्ठी हा,े दीक्षा दो। महावीरकीर्ति से कहा कि मेरे संस्कार दोनों महाराज करेंगे। इस तरह विमल में “वि“ हुआ वीर सागर जी का और “म“ हुआ महावीरकीर्तिजी का।<br />
आचर्य विमल सागर वात्सलय के धनी थे। क्षुल्लक, आर्यिका सबके लिए वात्सलय था। उन्होने पूरे जीवन मे ंसाढे पांच हजार उपवास किए। निमित्त ज्ञान के धारी थे। आपका चेहरा देख कर पूरा इतिहास बता देते थे। जो बोल दिया वही सच हो गया। जिस श्रीफल मिला, वह करोडपति हो गया। सोनागिरी में छह चातुर्मास किए। सम्मेद शिखर जी में तीन चातुर्मास किए। लगभग सौ मुनि, आर्यिका, क्षुल्लक बनाए। उनके साथ ही आचार्य भरतसागर जी भी थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन उन्हें समर्पित कर दिया। जब जन्म जयती मनती थी तो पांव रखने की भी जगह नहीं होती थी। ऐसे विमलसागर जी के चरणों में हमारा शत-शत प्रणाम।</p>
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