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	<title>विनम्र एकेडमी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>विनम्र एकेडमी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>धर्म संस्कार शिविर में बच्चों ने सीखी जल अभिषेक और द्रव्य पूजा की विधि: श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़े मंदिर में तीसरे रविवार आयोजित हुआ विशेष प्रशिक्षण, बच्चों ने उत्साह से लिया भाग </title>
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		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 06:04:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ अंबाह के श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़े मंदिर में आयोजित धर्म संस्कार शिविर में बच्चों को जल अभिषेक एवं द्रव्य पूजा की विधि सिखाई गई। विद्वानों ने पूजा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को धार्मिक संस्कारों से जोड़ने का संदेश दिया। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर  &#160; अंबाह। विनम्र [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> अंबाह के श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़े मंदिर में आयोजित धर्म संस्कार शिविर में बच्चों को जल अभिषेक एवं द्रव्य पूजा की विधि सिखाई गई। विद्वानों ने पूजा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को धार्मिक संस्कारों से जोड़ने का संदेश दिया। <span style="color: #ff0000">अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर </span></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> विनम्र एकेडमी द्वारा संचालित धर्म संस्कार शिविर के अंतर्गत रविवार सुबह श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़े मंदिर में विशेष पूजन प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। लगातार तीसरे रविवार आयोजित इस शिविर में बच्चों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लिया तथा जैन धर्म की मूल पूजन विधियों को सीखा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>बच्चों को सिखाई गई पूजन की विधि</strong></p>
<p>शिविर में बाहर से पधारे विद्वान नमन जैन एवं स्थानीय प्रशिक्षक राजुल जैन ने बच्चों को भगवान श्री शांतिनाथ के समक्ष जल अभिषेक और द्रव्य पूजा की संपूर्ण विधि सिखाई। बच्चों को केवल प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे आध्यात्मिक महत्व की भी जानकारी दी गई।</p>
<p><strong>जल अभिषेक का बताया महत्व</strong></p>
<p>विद्वान नमन जैन ने बच्चों को बताया कि जल अभिषेक आत्मशुद्धि, मन की निर्मलता और पापकर्मों के क्षय का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि विधिपूर्वक अभिषेक करने से मन में शांति आती है, सकारात्मक सोच विकसित होती है और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।</p>
<p><strong>द्रव्य पूजा से बढ़ती है भक्ति भावना</strong></p>
<p>राजुल जैन ने द्रव्य पूजा का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान के प्रति श्रद्धा और समर्पण भाव से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, सदाचार और नैतिक मूल्यों को मजबूत करती है। साथ ही यह व्यक्ति को अहंकार से दूर रखकर आत्मविकास की दिशा में आगे बढ़ाती है।</p>
<p><strong>बच्चों ने बड़े उत्साह से किया अभ्यास</strong></p>
<p>जैसे ही बच्चों ने कतारबद्ध होकर भगवान के समक्ष जल अभिषेक प्रारंभ किया, पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से भर गया। बच्चों ने पूरे अनुशासन और श्रद्धा के साथ अभिषेक किया तथा द्रव्य पूजा की विधि का अभ्यास भी किया। इससे उन्हें पूजा की संपूर्ण प्रक्रिया का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>धर्म के साथ संस्कारों की भी शिक्षा</strong></p>
<p>शिविर में बच्चों और युवाओं को जैन धर्म के मूल सिद्धांतों जैसे अहिंसा, सत्य, संयम और आत्मशुद्धि के महत्व से भी परिचित कराया गया। विद्वानों ने कहा कि यदि बचपन से ही अच्छे धार्मिक संस्कार दिए जाएं तो आने वाली पीढ़ी सुसंस्कारित और आदर्श बन सकती है।</p>
<p><strong>विश्व शांति और जनकल्याण की कामना</strong></p>
<p>इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्री शांतिनाथ की आराधना कर विश्व शांति, समाज के कल्याण और सुख-समृद्धि की मंगलकामना की। विद्वानों ने बताया कि नियमित पूजन और आराधना से आत्मा की शुद्धि होती है तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं</p>
<p><strong>बच्चों के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था</strong></p>
<p>कार्यक्रम के बाद मंदिर परिसर के बाहर चंदनबाला महिला मंडल द्वारा बच्चों को स्वल्पाहार वितरित किया गया। इससे बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला और सभी ने आनंदपूर्वक प्रसाद ग्रहण किया।</p>
<p><strong>शांतिपाठ के साथ हुआ समापन</strong></p>
<p>कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ के साथ हुआ। आयोजकों ने बताया कि धर्म संस्कार शिविर का उद्देश्य नई पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है, ताकि वे संस्कारवान और आदर्श जीवन की ओर आगे बढ़ सकें।</p>
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		<title>बच्चे सीख रहे हैं अभिषेक पूजन पद्धति : विनम्र एकेडमी में चल रहे हैं विशेष कार्यक्रम  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Jun 2025 13:14:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विनम्र एकेडमी पाठशाला में शांतिनाथ दिगम्बर जैन बड़े मंदिर में रविवार को जैन समाज के बच्चों ने पहुंचकर भगवान महावीर की विशेष पूजा-अर्चना की। बच्चों के लिए इस विशेष कार्यक्रम किया गया है। जिसमें 8 वर्ष से लेकर 16 वर्ष तक आयु वर्ग के बच्चे-बच्चियां सम्मलित हुए हैं। भगवान की प्रतिमा का पूजन करने की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>विनम्र एकेडमी पाठशाला में शांतिनाथ दिगम्बर जैन बड़े मंदिर में रविवार को जैन समाज के बच्चों ने पहुंचकर भगवान महावीर की विशेष पूजा-अर्चना की। बच्चों के लिए इस विशेष कार्यक्रम किया गया है। जिसमें 8 वर्ष से लेकर 16 वर्ष तक आयु वर्ग के बच्चे-बच्चियां सम्मलित हुए हैं। भगवान की प्रतिमा का पूजन करने की विधि बच्चों को बताई गई। <span style="color: #ff0000">अंबाह से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> विनम्र एकेडमी पाठशाला में शांतिनाथ दिगम्बर जैन बड़े मंदिर में रविवार को जैन समाज के बच्चों ने पहुंचकर भगवान महावीर की विशेष पूजा-अर्चना की। समाज के वरिष्ठ जनों ने बताया कि इस समय बच्चों की छुट्टियां चल रही हैं। बच्चों में जैन धर्म के संस्कार व धर्म प्रभावना प्रवाहित हो सके, इसके लिए इस विशेष कार्यक्रम किया गया है। जिसमें 8 वर्ष से लेकर 16 वर्ष तक आयु वर्ग के बच्चे-बच्चियां सम्मलित हुए हैं। इस दौरान भगवान की प्रतिमा का पूजन करने की विधि बच्चों को बताई गई। समाज के वरिष्ठ पुजारी व बालिका मंडल प्रमुख राजुल जैन और उनके साथी सदस्यों ने जिनेंद्र भगवान का विधि विधान पूर्वक पूजा-अर्चना करना छोटे-छोटे बच्चों को सिखाया।</p>
<p>इसके साथ ही पूजन में आवश्यक नियमों का पालन किस तरह करें, इस संबंध में भी बच्चों को जानकारी दी गई। राजुल जैन ने बताया कि भगवान की पूजन की विधि सीखने प्रति रविवार बच्चे उत्साह के साथ आ रहे हैं। बच्चों को बताया गया कि वह जैन मंदिर में प्रवेश करते ही णमोकार मंत्र बोलें। मंत्र बोलकर हम वादा करते हैं कि मंदिर के भीतर हम सांसारिक विचार, बातें या प्रवृत्ति नहीं करेंगे।</p>
<p><strong>बच्चों के साथ बड़े भी सही विधि से पूजन विधि सीख सकते हैं</strong></p>
<p>सबसे पहले केसर-चंदन रखने के कमरे में जाकर हम अपनी ललाट पर दो भौंहों के बीच बराबर आज्ञा चक्र के बिन्दु पर बादाम के आकार का, दीये की लौ-ज्योति जैसा तिलक करें। वही बिना सही विधि के पूजा करने से भगवान की असातना भी होती हैं। राजुल जैन ने बताया कि इस शिविर में समाज के बच्चों के साथ बड़े भी सही विधि से पूजन करना सीख सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो बच्चे नियमित पूजा करने आते है, उन सभी बच्चों को पुरस्कृत भी किया जाता है। उक्त संबंध में आयोजकों ने बताया कि उनका उद्देश्य भविष्य के लिए पुजारी तैयार करना है जिससे मंदिरों में पूजा अर्चना होती रहे और सभी में धार्मिक संस्कार बने रहे।</p>
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		<title>ग्रीष्मकालीन शिविर का उद्घाटन : जैन धर्म की शिक्षा युवा पीढ़ी के लिए अनिवार्य है- सरस जैन  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 May 2024 10:20:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ग्रीष्म कालीन में शिविर में विनम्र एकेडमी का शुभारंभ परेड जैन ने आचार्य श्री विनम्र सागर के चित्र के आगे दीप जलाकर किया। वीतराग शासन बालिका मंडल द्वारा बच्चों को शिक्षाएं सिखाई जाएंगी। सरस जैन ने बताया कि जैन धर्म जो कि अनादिकाल से चलता रहा है, इसको और आगे बढ़ाने की जरूरत है। जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ग्रीष्म कालीन में शिविर में विनम्र एकेडमी का शुभारंभ परेड जैन ने आचार्य श्री विनम्र सागर के चित्र के आगे दीप जलाकर किया। वीतराग शासन बालिका मंडल द्वारा बच्चों को शिक्षाएं सिखाई जाएंगी। सरस जैन ने बताया कि जैन धर्म जो कि अनादिकाल से चलता रहा है, इसको और आगे बढ़ाने की जरूरत है। जैन धर्म की शिक्षा देना आज की युवा पीढ़ी और छोटे बच्चों को अनिवार्य हो गया है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सौरभ जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अम्बाह।</strong> ग्रीष्म कालीन में शिविर में विनम्र एकेडमी का शुभारंभ परेड जैन ने आचार्य श्री विनम्र सागर के चित्र के आगे दीप जलाकर किया। वीतराग शासन बालिका मंडल द्वारा बच्चों को शिक्षाएं सिखाई जाएंगी। सरस जैन ने बताया कि जैन धर्म जो कि अनादिकाल से चलता रहा है, इसको और आगे बढ़ाने की जरूरत है। जैन धर्म की शिक्षा देना आज की युवा पीढ़ी और छोटे बच्चों को अनिवार्य हो गया है। इससे उनमें त्याग, तपस्या और संस्कारी होने की भावना आती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सही शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार हों तो जीवन का चहुंमुखी विकास संभव है। बालक का जन्म अच्छे संस्कारों से होता है। आवश्यकता है कि जीवन को संस्कारवान बनाया जाए क्योंकि जब तक जीवन संस्कारित नहीं होगा, तब तक वह समाज व राष्ट्र के लिए उपयोगी कैसे होगा? उन्होंने कहा कि आज का बालक कल का भारत है, राष्ट्र का भावी निर्माता है, बालक देश की धरोहर है, जिस प्रकार धन की रक्षा के लिए सुरक्षा के अच्छे इंतजाम किए जाते हैं<img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-60895" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240520-WA0022.jpg" alt="" width="720" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240520-WA0022.jpg 720w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240520-WA0022-169x300.jpg 169w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240520-WA0022-576x1024.jpg 576w" sizes="(max-width: 720px) 100vw, 720px" /></p>
<p>ठीक उसी प्रकार बालक के जीवन की सुरक्षा करना माता पिता का प्रथम कर्तव्य होता है। इसलिए धार्मिक संस्कार अपने बच्चों को देना जरूरी है। सभी अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें और उन्हें धर्म के प्रति वफादार बनाएं। नई पीढ़ी को सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूक करने बेहद जरूरी है।</p>
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