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	<title>विज्ञान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>विज्ञान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>यदि जीना कला है तो उसका प्रबंधन विज्ञान : नीतीश जैन ने समझाया- कैसे करें परीक्षा की तैयारी </title>
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		<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 07:29:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[परीक्षा की तैयारी करना अक्सर तनावपूर्ण हो सकता है, लेकिन एक सही रणनीति और योजना के साथ आप न केवल अच्छे अंक ला सकते हैं बल्कि विषय को गहराई से समझ भी सकते हैं। मुरैना/अम्बाह से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह प्रस्तुति&#8230; मुरैना/अम्बाह। परीक्षा की तैयारी करना अक्सर तनावपूर्ण हो सकता है, लेकिन एक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>परीक्षा की तैयारी करना अक्सर तनावपूर्ण हो सकता है, लेकिन एक सही रणनीति और योजना के साथ आप न केवल अच्छे अंक ला सकते हैं बल्कि विषय को गहराई से समझ भी सकते हैं। <span style="color: #ff0000">मुरैना/अम्बाह से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/अम्बाह</strong>। परीक्षा की तैयारी करना अक्सर तनावपूर्ण हो सकता है, लेकिन एक सही रणनीति और योजना के साथ आप न केवल अच्छे अंक ला सकते हैं बल्कि विषय को गहराई से समझ भी सकते हैं। यदि जीना एक कला है तो उसका प्रबंधन एक विज्ञान है। लोक सेवा प्रबंधक नीतीशकुमार जैन के अनुसार परीक्षाओं के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों पर चर्चा करते हैं &#8211;</p>
<p><strong>योजना और समय सारणी</strong></p>
<p>बिना योजना के पढ़ाई करना अंधेरे में तीर चलाने जैसा है। सबसे पहले यह देखें कि सिलेबस में कौन से विषय ज्यादा महत्वपूर्ण हैं और कितना पढ़ना है। उसके अनुसार शेड्यूल बनाएं एवं प्रत्येक विषय के लिए समय तय करें। स्वयं के प्रति सकारात्मक रहते हुए समय सारणी का पालन करें।</p>
<p><strong>सक्रिय अध्ययन तकनीक </strong></p>
<p>कठिन विषयों को उस समय पढ़ें, जब आपका दिमाग सबसे ज्यादा फ्रेश हो (जैसे सुबह के समय)। एकाग्रता के लिए 25-30 मिनट पढ़ाई के बाद 5 मिनट का छोटा ब्रेक लें। इससे एकाग्रता बनी रहती है।</p>
<p><strong>अभ्यास और रिवीजन</strong></p>
<p>जो पढ़ा है, उसे समय समय के अंतराल में दोहराते रहें, पिछले 5-10 सालों के प्रश्न पत्र हल करें। इससे आपको परीक्षा के पैटर्न और समय प्रबंधन का अंदाजा होगा। शॉर्ट नोट्स बनाएं, इससे रिवीजन आसान हो जाता है दूसरों को सिखाएं। अगर आप किसी टॉपिक को किसी और को समझा सकते हैं तो इसका अर्थ है कि आप उसे अच्छी तरह समझ गए हैं।</p>
<p><strong>स्वस्थ जीवनशैली</strong></p>
<p>एक स्वस्थ शरीर में तेज दिमाग का निवास होता है। जिसके लिए आवश्यक है। आपके शरीर को जितनी नींद की आवश्यकता है, उतनी नींद अवश्य लें। हल्का-फुल्का खाना खाएं। जिससे आलस्य न आएं।</p>
<p><strong>जल चिकित्सा एक प्राचीन और वैज्ञानिक तरीका</strong></p>
<p>खुद को हाइड्रेट रखें, समय-समय पर पानी पियें। यह एकाग्रता और संकल्प शक्ति बढ़ाने के लिए यह बहुत प्रभावी है। वॉटर थेरेपी या जल चिकित्सा एक प्राचीन और वैज्ञानिक तरीका है, जिसका उपयोग शरीर को शुद्ध करने और मानसिक स्पष्टता बढ़ाने के लिए किया जाता है। जब भी आप मानसिक रूप से थका हुआ या विचलित महसूस करें, एक गिलास ठंडा पानी घूंट-घूंट करके पिएं। यह आपके नर्वस सिस्टम को रीसेट करता है।</p>
<p><strong>‘वापस लाना’ ही दिमाग की असली कसरत</strong></p>
<p>तनाव कम करने के लिए गहरी सांस लें, शांत बैठें और अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान दें। जब मन भटके (और वह भटकेगा ही), तो बिना खुद को कोसे वापस सांसों पर ले आएं। यही ‘वापस लाना’ ही दिमाग की असली कसरत है। 30 सेकंड के लिए उंगलियों से आंखों को बंद करें। जिससे आपकी आंखों की थकान कम होगी। मूवमेंट थैरेपी का अर्थ केवल व्यायाम करना नहीं है, बल्कि शरीर की गति का उपयोग अपने मानसिक स्वास्थ्य, भावनाओं और दिमागी एकाग्रता को बेहतर बनाने के लिए करना है।</p>
<p><strong>वातावरण को ‘फोकस-फ्रेंडली’ बनाएं</strong></p>
<p>अपने कार्यस्थल से वह सब हटा दें जो ध्यान भटकाता है। जैसे फोन को अपनी नजरों से दूर रखें। ध्यान और प्राणायाम रू यह आपके मस्तिष्क के ‘प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स’ को मजबूत करता है, जो निर्णय लेने और आत्म-नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है। रोज 10 मिनट का ध्यान भी जादुई असर करता है। ध्यान का मतलब विचार शून्य होना नहीं है, बल्कि विचारों को आते-जाते देखना है।</p>
<p><strong>एक समय में एक काम</strong></p>
<p>मल्टी टास्किंग से दिमाग की शक्ति कम होती है। एक समय पर सिर्फ एक ही विषय पर ध्यान लगाएं। संकल्प की शक्ति केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक मानसिक बल है जो असंभव को संभव बनाने की क्षमता रखता है। जब आप किसी कार्य को करने का ष्निश्चयष् कर लेते हैं, तो आपकी पूरी मानसिक और शारीरिक ऊर्जा एक ही दिशा में केंद्रित हो जाती है।</p>
<p><strong>स्वामी विवेकानंद ने कहा था-</strong></p>
<p>एक विचार लें, उस विचार को अपना जीवन बना लें, उसके बारे में सोचें, उसके सपने देखें और उस विचार को जिएं। यही संकल्प की पराकाष्ठा है। छोटे संकल्पों से शुरुआत करेंरू पहले छोटे लक्ष्य तय करें (अपने कार्यों को स्वयं पूर्ण करना या ‘आज मैं 1 घंटा बिना फोन छुए पढ़ूंगा)। जब आप छोटे संकल्प पूरे करते हैं, तो आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और संकल्प शक्ति की मांसपेशी मजबूत होती है। स्वयं को सकारात्मक रखें और यह सोच बनाए कि ‘डर के आगे जीत है’ अपने विचारों और भावनाओं को वश में करना ही सफलता की पहली सीढ़ी है।</p>
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		<title>विज्ञान का जितना भी अनुसरण है उसमें जैन धर्म का अनुसरण: आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी ने समर्पण के लिए बताए कई रहस्य  </title>
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		<pubDate>Sun, 10 Aug 2025 16:40:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रामगंजमंडी नगर में चातुर्मास के दौरान आचार्यश्री विनिश्चय सागर जी की धर्मसभा में धर्म, समाज, विज्ञान के अलावा संयम, समर्पण आदि के बारे में दिव्य ज्ञान बंट रहा है। इसका धर्मलाभ यहां के समाजजन ले रहे हैं। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी महाराज ने कहा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रामगंजमंडी नगर में चातुर्मास के दौरान आचार्यश्री विनिश्चय सागर जी की धर्मसभा में धर्म, समाज, विज्ञान के अलावा संयम, समर्पण आदि के बारे में दिव्य ज्ञान बंट रहा है। इसका धर्मलाभ यहां के समाजजन ले रहे हैं। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी महाराज ने कहा मानव का मस्तिष्क सर्वांग होता है। समर्पण के क्षेत्र में सबसे पहले मस्तिष्क को ही झुकाना पड़ता है। कोई व्यक्ति कितना भी कुछ कर ले सिर न झुकाए तो उसका समर्पण स्वीकार नहीं होता और वह कुछ भी ना करें मात्र सिर झुका ले तो यह उसका समर्पण स्वीकार हो जाता है। सिर यहां-वहां नहीं झुकना चाहिए। किसी ऐरे-गैरे चमत्कारी विद्याओं के बल पर जो लोगों को प्रभावित करते हैं, वहां नहीं झुकना चाहिए। यह मस्तक वहां झुकना चाहिए, जहां किसी प्रकार का कोई चमत्कार न हो। उन्होंने कहा कि आप जैसे लोग विद्याओं के बल पर चमत्कार करते हैं और आप जैसे ही लोग चमत्कार से प्रभावित हो जाते हैं।</p>
<p>प्रभावित हो जाते मस्तक ऐसी जगह झुक जाता है, जहां पर नहीं झुकना था। जहां पर अंधविश्वास वहां पर आपका मस्तिष्क झुक जाता है। दो ही चीजे है एक अंधविश्वास एक आत्मविश्वास। बाहर में जो कुछ भी आपको दिख रहा है उसमें अंधविश्वास हो सकता है, अंतस चेतना में जो उपलब्धि होती है उसमें आत्मविश्वास हो सकता है।</p>
<p><strong>अंधविश्वास सही नहीं भटकाने वाला होता है</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि जैन दर्शन आत्मविश्वास की बात करता है, अंधविश्वास को नकारता है। समझदार पढ़ा-लिखा व्यक्ति वह किसी भी धर्म का हो वह भी यही कहता है कि अंधविश्वास सही नहीं है। यह भटकाने वाला होता है। यह लोगों की आस्था को गलत जगह स्थापित कर देता है। मूढ़ नहीं होना चाहिए कोई पढ़ा लिखा न हो चलेगा, कोई पढ़ा लिखा होकर मूढ़ हो तो यह नहीं चल सकता। आज के समय में पढ़े लिखे लोग मूढ़ हैं। साइंस को पढ़ रहे हैं फिर भी अंधविश्वास पर उनकी आस्था है,</p>
<p><strong>विज्ञान धर्म के बिना हो ही नहीं सकता</strong></p>
<p>जैन दर्शन और विज्ञान के अनुसरण पर बोलते हुए गुरुदेव ने कहा है कि विज्ञान का जो भी अनुसरण है, वह जैन धर्म का अनुसरण ही है। विज्ञान जो भी आविष्कार करेगी प्रयोग करेगी वह जैन दर्शन की किसी न किसी पर्याय से लिया होगा। विज्ञान का सबसे ज्यादा फोकस पुदगल पर होता है। पुदगल की शक्तियां असीम होती है। इसे वैज्ञानिक आविष्कार करते जाइए, करते जाइए लेकिन, इसकी शक्तियां समाप्त नहीं होती। वैज्ञानिक आविष्कार से जितनी भी चीज हमारे आसपास घर में हैं। यह सब चमत्कार पुदगल का है। विज्ञान की दुहाई देकर हम धर्म से अलग होते जा रहे हैं लेकिन, विज्ञान धर्म के बिना हो ही नहीं सकता। धर्म का विशेष ज्ञान विज्ञान है। ऐसे पढ़े-लिखे लोग विज्ञान को पढ़ने वाले लोग अंधविश्वास की ओर झुक गए हैं। वह इसलिए झुक रहे हैं क्योंकि, उनका विश्वास चमत्कार पर है अंधविश्वास पर है, लोग सही बात को न समझ रहे हैं न दूसरों को समझा रहे हैं।</p>
<p><strong>अज्ञानता है कि आप अमृत को विष कह रहे हो</strong></p>
<p>जीव को अगर संसार में कोई भटका रहा है तो वह मिथ्यात्व है। अगर कहीं जाने से काम बनते तो लोग पुरुषार्थ क्यों करते हैं, लोग दुकान व्यापार नौकरी क्यों करते । भ्रांति हो सकती वहां जाना हुआ सुख साता का उदय हुआ और काम बन गया। हमने यह समझ लिया वहां जाने से यह काम हुआ। कोई विष को अमृत कहे तो आप नहीं मानोगे कोई अमृत को विष कहे तब भी नहीं मानोगे और मान रहे हैं तो आपकी बुद्धि काम नहीं कर रही है, अज्ञानता है कि आप अमृत को विष कह रहे हो। भगवान के सामने मांगो मत नहीं मांगोगे तो वह मिलेगा जिसकी कोई सीमा नहीं है। न उनको कुछ देना न आपको कुछ लेना आपको अंदर उस शक्ति को जगाना है। जिससे सब आपको मिल जाए।</p>
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		<title>देश दुनियां में आतंकवाद पर लगेगी लगाम और होगी अमन शांति :                   एक महीने में सभी नौ ग्रह बदल रहे हैं राशि और नक्षत्र </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Nov 2023 10:53:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि एक माह के भीतर सभी नौ ग्रह राशि और नक्षत्र बदल रहे हैं। इससे देश दुनियां में अमन- चैन बढ़ेगा । भारत में धर्म का परचम के साथ विश्व में सम्मान बढ़ेगा। वहीं ये ग्रह व्यक्ति की राशियों पर भी असर करेंगे। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230; [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p>वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि एक माह के भीतर सभी नौ ग्रह राशि और नक्षत्र बदल रहे हैं। इससे देश दुनियां में अमन- चैन बढ़ेगा । भारत में धर्म का परचम के साथ विश्व में सम्मान बढ़ेगा। वहीं ये ग्रह व्यक्ति की राशियों पर भी असर करेंगे। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></p>
<hr />
<p>मुरैना। कहते हैं कि ग्रह ही राज्य दिलाते है और ग्रह ही राज्य छीन लेते हैं। सचराचर ग्रहों के अधीन है। एक माह के अंदर सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहू, केतु सभी नौ ग्रह राशि या नक्षत्र बदल रहे हैं। इनके बदलने से देश में ही नहीं बल्कि विश्व में हिंसा, आतंकवाद, अराजकता पर लगाम लगेगी। भारत में राजनैतिक पार्टियां आपसी आरोप-प्रत्यारोप से भी दूरी बनाएंगी और जनता में अमन चैन रहेगा। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि एक माह के भीतर सभी नौ ग्रह राशि और नक्षत्र बदल रहे हैं। इससे देश दुनियां में अमन- चैन बढ़ेगा । भारत में धर्म का परचम के साथ विश्व में सम्मान बढ़ेगा। वहीं ये ग्रह व्यक्ति की राशियों पर भी असर करेंगे।<br />
राहु, केतु ने 30 अक्टूबर को राशि बदल ली। राहु मेष राशि अश्वनी नक्षत्र से मीन राशि रेवती नक्षत्र में प्रवेश कर लिया। केतु ने तुला राशि से कन्या राशि में चित्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण में चंद्रमा सभी राशियां में चक्कर लगा लेगा, सूर्य तारीख 16 को तुला से वृश्चिक में, मंगल ता.16 को तुला से वृश्चिक में , बुध ता. 06 को तुला से वृश्चिक में, गुरु ता.26 को वक्री चाल चलते हुए भरणी नक्षत्र से अश्वनी नक्षत्र में प्रवेश करेगा, शुक्र ता. 03 नवम्बर को सिंह से कन्या राशि में प्रवेश, शनि का ता.24 को वक्री चाल से शतभिषा नक्षत्र में मार्गी चाल चलेगा।<br />
इस प्रकार सभी ग्रह राशि / नक्षत्र बदलेंगे। सूर्य, बुध, मंगल तीनों की युति मंगल के घर वृश्चिक में ता. 16 से रहेगी।<br />
दीपावली के बाद देश, दुनियां में आतंकवाद , युद्ध , हिंसा, अराजकता पर विराम लगेगा और अमन चैन बढ़ेगा। भारत में धर्म अध्यात्म की गंगा बहेगी और दूसरे देशो में भारत की तारीफ होगी।<br />
वहीं व्यक्तिगत रूप से राशियों पर राहू, केतु के बदलाव और गुरु के राहू, केतु की पकड़ से बाहर निकलने के साथ सभी ग्रहों के बदलने से लंबे अरसे तक अच्छे और हानिकारक प्रभाव भी देखने मिलेंगे।<br />
क्या होगा राशियों पर असर<br />
मेष: यात्रा पर धन खर्च,बाहरी क्षेत्रों पर रोजगार या स्थानांतरण, आर्थिक जरूरत, पत्नी का स्वास्थ्य नर्म गर्म रह सकता है।<br />
वृष : वृष राशि वाले को नए कार्यों में सफलता, धन लाभ, धार्मिक स्थल की यात्रा, संतान को श्रम संघर्ष और धैर्य रखना होगा।<br />
मिथुन : मिथुन राशि वाले को अचानक पद प्रतिष्ठा, उन्नति, परंतु स्थान परिवर्तन और माता पिता से दूरी हो सकती है।<br />
कर्क: कर्क राशि वाले को अति लाभ, यात्रा से सफलता, घर में शुभ कार्य, विवाह संभव है।<br />
सिंह: सिंह राशि वाले को गुप्त लाभ, शेयर आदि से लाभ, दूसरे स्थान पर जाकर नया कार्य आरंभ हो सकता है। गुप्त रोगों के प्रति जागरूक रहे।<br />
कन्या : कन्या राशि वालो को व्यापार में अचानक उन्नति, आवागमन से धन लाभ, मित्रो, साझेदार से सहयोग, लाभ। शरीर में फोड़े, फुंसी के प्रति सजग रहे।<br />
तुला: तुला राशि वाले को पुराने मित्रों से पुनः जुड़ाव, लाभ, चिंता दूर होगी, स्त्री का सहयोग मिलेगा, कार्य उन्नति होगी।<br />
वृश्चिक :वृश्चिक राशि वाले को धन लाभ, यश कीर्ति, विवाह, संतान और जीविका उपार्जन के नए साधन बनेंगे।<br />
धनु :धनु राशि वाले को अशांति, घर में क्लेश, मानसिक अशांति, शरीर कष्ट हो सकता है।<br />
मकर: राशि मकर राशि वाले को आत्म विश्वास में वृद्धि, धर्म अध्यात्म में रुचि, ज्ञान, ध्यान कार्य क्षेत्र में लगाव बढ़ेगा।<br />
कुंभ: कुंभ राशि वाले को कार्यों में सफलता, धन, परिवार में वृद्धि, कमर, पेट रोगों से सचेत रहें।<br />
मीन: मीन राशि वाले को मानसिक अशांति, उतार चढ़ाव, आर्थिक परिवार जनों से झंझट होने में धैर्य और सावधानी बरतें।</p>
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