<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>वसंत पंचमी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A4%AE%E0%A5%80/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Mon, 26 Jan 2026 11:55:45 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>वसंत पंचमी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>टीएमयू के सीसीएसआईटी स्टूडेंट्स की मेधा को परखा : तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद में वसंत पंचमी पर प्रतियोगिताएँ हुईं </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/tmus_ccsit_students_talents_tested/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/tmus_ccsit_students_talents_tested/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:55:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[CCSIT Students]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Moradabad]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Teerthanker Mahaveer University]]></category>
		<category><![CDATA[Vasant Panchami]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मुरादाबाद]]></category>
		<category><![CDATA[वसंत पंचमी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सीसीएसआईटी स्टूडेंट्स]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=98907</guid>

					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग में ज्ञान, बुद्धि एवं नवाचार थीम पर हुई वसंत पंचमी में रंगोली प्रतियोगिता हुई। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230; मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग में ज्ञान, बुद्धि एवं नवाचार थीम पर हुई वसंत पंचमी में रंगोली प्रतियोगिता में दक्षिता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग में ज्ञान, बुद्धि एवं नवाचार थीम पर हुई वसंत पंचमी में रंगोली प्रतियोगिता हुई। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद</strong>। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग में ज्ञान, बुद्धि एवं नवाचार थीम पर हुई वसंत पंचमी में रंगोली प्रतियोगिता में दक्षिता सिंह, अनुष्का मोहन और दिशिका कश्यप विजेता रहे। इसके अलावा पतंग निर्माण, वाद्य यंत्र प्रस्तुति, गायन,नृत्य सरीखी प्रस्तुतियां में भी स्टूडेंट्स ने अपनी कल्पनाशीलता और कलात्मक कौशल का अद्भुत प्रदर्शन किया। इससे पूर्व सीसीएसआईटी के सभागार में वसंत पंचमी के भव्य सांस्कृतिक उत्सव का शुभारंभ फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी, सीसीएसआईटी के विभागाध्यक्ष प्रो. शंभु भारद्वाज, एडिशनल एचओडी डॉ. रूपल गुप्ता, सीसीएसआईटी की कल्चरल कोऑर्डिनेटर सुश्री स्वाति चौहान और फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग की कल्चरल कोऑर्डिनेटर्स- डॉ. इंदु त्रिपाठी, सुश्री निकिता जैन आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित करके किया।</p>
<p><strong>वसंत पंचमी ज्ञान, विद्या नवचेतना का प्रतीक</strong></p>
<p>डीन प्रो. द्विवेदी ने वसंत पंचमी के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं शैक्षिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि वसंत पंचमी ज्ञान, विद्या, सकारात्मकता और नवचेतना का प्रतीक है। यह पर्व हमें निरंतर सीखने, सृजनशील रहने और जीवन में उजास और आशा बनाए रखने की प्रेरणा देता है। प्रो. शम्भू भारद्वाज के संग-संग डॉ. रूपल गुप्ता, डॉ. रंजना शर्मा आदि ने भी विचार साझा किए। रंगोली प्रतियोगिता में आँचल, सिया और रक्षा वर्मा द्वितीय, जबकि नैन्सी चौहान, संस्कृति ठाकुर और निधि तृतीय स्थान पर रहे। कार्यक्रम में प्रो. प्रदीप कुमार, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. प्रियांक सिंघल, डॉ. नमित गुप्ता, डॉ. नूपा राम चौहान, डॉ. पराग अग्रवाल, डॉ. शालिनी निनोरिया, डॉ. विशाल मोहन गुप्ता, डॉ. प्रीति रानी, मो. सलीम आदि मौजूद रहे। संचालन स्टूडेंट्स जिया सिंह और गौरी ने किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/tmus_ccsit_students_talents_tested/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>वसंत पंचमी पर आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी के हुए पाद् प्रक्षालन: गायत्री नगर में आचार्य श्री ने प्रत्येक सदस्य को आशीर्वाद प्रदान किया </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/on_vasant_panchami_acharya_shri_prasannasagar_jis_feet_were_washed/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/on_vasant_panchami_acharya_shri_prasannasagar_jis_feet_were_washed/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 08:09:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Prasannasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Gayatri Nagar]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[pad prakshalan]]></category>
		<category><![CDATA[Sahastranam Puja]]></category>
		<category><![CDATA[Sammed Shikhar Tonk Puja]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Vasant Panchami]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[गायत्री नगर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पाद् प्रक्षालन]]></category>
		<category><![CDATA[वसंत पंचमी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सम्मेद शिखर टोंक पूजा]]></category>
		<category><![CDATA[सहस्त्रनाम पूजा]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=98741</guid>

					<description><![CDATA[आचार्यश्री प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य में वसंत पंचमी एवं आचार्य श्रीकुंदकुंद स्वामी की जन्म जयंती के पावन अवसर पर शुक्रवार सुबह 4 बजे सहस्त्रनाम पूजा, सम्मेद शिखर टोंक पूजा, पूर्व एवं वर्तमान परंपरा आचार्याें के अर्घ्य अर्पित कर पूजा की गई। आचार्य श्री का पाद् प्रक्षालन सुनील लता सोगानी परिवार द्वारा किया गया। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्यश्री प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य में वसंत पंचमी एवं आचार्य श्रीकुंदकुंद स्वामी की जन्म जयंती के पावन अवसर पर शुक्रवार सुबह 4 बजे सहस्त्रनाम पूजा, सम्मेद शिखर टोंक पूजा, पूर्व एवं वर्तमान परंपरा आचार्याें के अर्घ्य अर्पित कर पूजा की गई। आचार्य श्री का पाद् प्रक्षालन सुनील लता सोगानी परिवार द्वारा किया गया। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, उदयभान जैन की यह खबर..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> आचार्यश्री प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य में वसंत पंचमी एवं आचार्य श्रीकुंदकुंद स्वामी की जन्म जयंती के पावन अवसर पर शुक्रवार सुबह 4 बजे सहस्त्रनाम पूजा, सम्मेद शिखर टोंक पूजा, पूर्व एवं वर्तमान परंपरा आचार्याें के अर्घ्य अर्पित कर पूजा की गई। आचार्य श्री का पाद् प्रक्षालन सुनील लता सोगानी परिवार द्वारा किया गया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने बताया कि दोपहर को स्वाध्याय सभा, गुरु पूजा सारसमल, पदम भावना झांझरी, यागेश कासलीवाल, सूर्यप्रकाश छाबडा की ओर से भक्ति के साथ की गई। मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष कैलाश छाबड़ा, मंत्री राजेश वोहरा, उपाध्यक्ष अरुण शाह के विशेष निवेदन पर आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज के वसंत पंचमी के अवसर पर समाज के प्रत्येक मुखिया ने पाद् प्रक्षालन किए। आचार्य श्री ने प्रत्येक सदस्य को आशीर्वाद प्रदान किया।</p>
<p><strong>एक मास में एक उपवास प्रत्येक व्यक्ति को करना है: मुनिश्री </strong></p>
<p>धर्मसभा को उपाध्यक्ष श्री पीयूष सागर जी महाराज ने 25 जनवरी से वीटी रोड पर होने वाले चारित्र शुद्धि विधान की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। मुनि श्री सहजसागर जी महाराज ने कहा कि छोटे-छोटे नियम लेकर मानव जीवन को सार्थक करते हुए पुण्य अर्जन करना चाहिए। मुनि श्री ने कहा कि आचार्य श्री का आह्वान अच्छे स्वास्थ्य के लिए एक मास में एक उपवास प्रत्येक व्यक्ति को करना है। इस मिशन को जन-जन तक पालना करवाना है। शाम 7बजे से आनंद यात्रा व महाआरती हुई। विपुल छाबडा ने बताया कि आचार्य श्री को प्रवास के लिए झोंटवाडा, वैशाली नगर, श्याम नगर, मीरा मार्ग आदि कॉलोनियों के जैन समाज ने श्री फल चढ़ाया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/on_vasant_panchami_acharya_shri_prasannasagar_jis_feet_were_washed/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>वसंत पंचमी एवं सरस्वती जयंती 23 को : इस दिन शिक्षा और कला से जुड़े नए कार्य शुरू करना शुभ  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/vasant_panchami_and_saraswati_jayanti_will_be_celebrated_on_the_23rd/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/vasant_panchami_and_saraswati_jayanti_will_be_celebrated_on_the_23rd/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Jan 2026 12:41:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Auspicious Time]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Saraswati Jayanti]]></category>
		<category><![CDATA[Saraswati Puja]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Vasant Panchami]]></category>
		<category><![CDATA[Venus Star]]></category>
		<category><![CDATA[अबूझ मुहूर्त]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[वसंत पंचमी]]></category>
		<category><![CDATA[शुक्र तारा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सरस्वती जयंती]]></category>
		<category><![CDATA[सरस्वती पूजा]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=98634</guid>

					<description><![CDATA[वसंत पंचमी एवं सरस्वती जयंती रवि योग में शुक्रवार 23 जनवरी को मनाई जाएगी। सरस्वती पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 9.53 से 11.13 बजे तक और सामान्य मुहूर्त 7.15 से दोपहर 12.50 बजे तक रहेगा, जो ज्ञान और कला के लिए शुभ है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना। वसंत पंचमी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वसंत पंचमी एवं सरस्वती जयंती रवि योग में शुक्रवार 23 जनवरी को मनाई जाएगी। सरस्वती पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 9.53 से 11.13 बजे तक और सामान्य मुहूर्त 7.15 से दोपहर 12.50 बजे तक रहेगा, जो ज्ञान और कला के लिए शुभ है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> वसंत पंचमी एवं सरस्वती जयंती रवि योग में शुक्रवार 23 जनवरी को मनाई जाएगी। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार वसंत पंचमी एवं सरस्वती जयंती पूजन 23 जनवरी शुक्रवार को मनाई जाएगी क्योंकि, माघ शुक्ल पंचमी तिथि 23 जनवरी की सुबह 2.28 बजे शुरू होकर 24 जनवरी की सुबह 1.46 बजे समाप्त होगी। इसलिए उदया तिथि के अनुसार 23 जनवरी को यह पर्व मनाया जाएगा। जिसमें सरस्वती पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 9.53 से 11.13 बजे तक और सामान्य मुहूर्त 7.15 से दोपहर 12.50 बजे तक रहेगा, जो ज्ञान और कला के लिए शुभ है।</p>
<p><strong>पीले वस्त्र पहनना और पीले फूल अर्पित करना शुभ </strong></p>
<p>जैन ने कहा कि शुक्र ग्रह अस्त होने के कारण इस दिन विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे क्योंकि, शुक्र तारा अस्त कालांश में विवाह, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्य नहीं करना चाहिए हालांकि, परंपरागत सामाजिक जीवन में इस दिन को भी अबूझ मुहूर्त मानकर लोग सामूहिक विवाह आयोजन, नवीन गृह प्रवेश, मुंडन आदि मुहूर्त कर सकते हैं। यह दिन ज्ञान, संगीत और कला की देवी सरस्वती को समर्पित है। अबूझ मुहूर्त होने के कारण इस दिन शिक्षा और कला से जुड़े नए कार्य शुरू करना शुभ माना जाता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनना और पीले फूल अर्पित करना शुभ होता है, जो वसंत और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस दिन जिन बच्चों को देर से याद होता है जो पढ़ने में कमजोर है, उन्हें सरस्वती पूजन कर के पीले चावल केशर युक्त भात ग्रहण करके बाद में भोजन करना चाहिए। हर साल ऐसा करते रहने से विद्या में सफलता मिलती है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/vasant_panchami_and_saraswati_jayanti_will_be_celebrated_on_the_23rd/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का मंदिर स्थापना दिवस मनाया: 23 दृव्यों से हुआ भगवान अभिषेक और शांतिधारा  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/1008_shree_parshvanath_bhagwan_temple_foundation_day_celebrated/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/1008_shree_parshvanath_bhagwan_temple_foundation_day_celebrated/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Feb 2025 16:26:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[acharya shree vardhmansagarji Sangha]]></category>
		<category><![CDATA[bhagwan parshvnath]]></category>
		<category><![CDATA[dash humad digambar jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[panchamrat abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[sanmati nagar]]></category>
		<category><![CDATA[Shantidhara]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[sthapana divas]]></category>
		<category><![CDATA[Vasant Panchami]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमान सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दशा हूमड दिगंबर जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पंचामृत अभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[वसंत पंचमी]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिधारा]]></category>
		<category><![CDATA[श्री पार्श्वनाथ भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सन्मति नगर]]></category>
		<category><![CDATA[स्थापना दिवस]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=73671</guid>

					<description><![CDATA[प्राचीन पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में वसंत पंचमी पर स्थापना दिवस मनाया गया। इस मंदिर की स्थापना हुई थी। यह 400 साल पुराना मंदिर है। भगवान पार्श्वनाथ का 23 दृव्यों से अभिषेक किया गया। सजावट कर दीपोत्सव मनाया गया। पढ़िए पारसोला से राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; पारसोला। पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>प्राचीन पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में वसंत पंचमी पर स्थापना दिवस मनाया गया। इस मंदिर की स्थापना हुई थी। यह 400 साल पुराना मंदिर है। भगवान पार्श्वनाथ का 23 दृव्यों से अभिषेक किया गया। सजावट कर दीपोत्सव मनाया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पारसोला से राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पारसोला।</strong> पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित सन्मति नगर में विराजित हैं। जयंतीलाल कोठारी अध्यक्ष दशा हूमड दिगंबर जैन समाज ने बताया कि नगर के प्राचीन श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर की 400 वर्ष पूर्व माध सुदी पंचमी वसंत पंचमी के दिन स्थापना हुई थी। स्थानीय दिगंबर जैन समाज ने मंदिर के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ के सानिध्य में श्री पार्श्वनाथ भगवान का 23 द्रव्यों से भव्य पंचामृत अभिषेक किया।</p>
<p><strong>इन दृव्यों से किया अभिषेक </strong></p>
<p>सौभाग्यशाली परिवारों ने विशेष द्रव्यों जल, दूध, दही, केशर, सर्वाेषधी, सेवफल, अनार,केले, चीकू, नारियल पानी, धी, मौसबी, पपीता, नारंगी, अमरूद, अंगूर, सहित विभिन्न मौसमी फलों, सूखे मेवे बादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता,आदि के रसों, चंदन, चार कलशों, सुगंधित जल पुष्पों की वृष्टि शांतिधारा की।</p>
<p><strong>मुनिश्री हितेंद्रसागर जी ने करवाई शांतिधारा</strong></p>
<p>मुनिश्री हितेंद्र सागर जी द्वारा उच्चारित मंत्रोच्चार से सुगंधित जल से अभिषेक कुलदीप,पंडित कीर्तिश, श्रेणिक तथा वृहद शांतिधारा करने का सौभाग्य महावीर वगैरिया परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर सभी मंदिरों में सुंदर मन मोहक फूलों से सजावट कर प्रकाश से दीपोत्सव मनाया गया।</p>
<p><strong>श्री शांतिसागर जी ने बताया था मंदिर को अतिशयकारी</strong></p>
<p>पंडित कीर्तिश, राजेश पंचोलिया ने बताया कि उल्लेखनीय है कि प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी प्रतापगढ़ चातुर्मास के समय पारसोला आए थे। तब दो दिनों के प्रवास में इस प्राचीन श्री पार्श्वनाथ भगवान को अतिशयकारी बताया था। सन 1990 में खाड़ी युद्ध में नगर के भक्तों के कुवैत में प्राण संकट में थे। तब इस मंदिर में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी और मुनि श्री वीरसागर की के आशीर्वाद तथा प्रेरणा से विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। सभी भक्त सुरक्षित वापस आए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सन्मति नगर विराजित हैं। आचार्य संघ सानिध्य में धार्मिक मंडल विधान हो रहे हैं। वसंत पंचमी पर चौंसठ रिद्धि विधान की पूजा हुई। जिसमें मंत्रोच्चार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने किए।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/1008_shree_parshvanath_bhagwan_temple_foundation_day_celebrated/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सरस्वती पूजन वसंत पंचमी पर 2 फरवरी को: प्रकृति के बदलाव और वाग्देवी के प्रकटीकरण का दिन </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/day_of_change_of_nature_and_appearance_of_vaagdevi/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/day_of_change_of_nature_and_appearance_of_vaagdevi/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jan 2025 13:07:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Adhyatmikata]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[games]]></category>
		<category><![CDATA[Indore श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[jyotishacharya dr. hukumchand jain]]></category>
		<category><![CDATA[morena]]></category>
		<category><![CDATA[Saraswati]]></category>
		<category><![CDATA[Sewakarya]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Vasant Panchami]]></category>
		<category><![CDATA[Veenapani Pujan]]></category>
		<category><![CDATA[आध्यात्मिकता]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[जागृति]]></category>
		<category><![CDATA[जेएसी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मुरैना]]></category>
		<category><![CDATA[वसंत पंचमी]]></category>
		<category><![CDATA[वीणापाणि पूजन]]></category>
		<category><![CDATA[सरस्वती]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=73424</guid>

					<description><![CDATA[वसंत पंचमी पर प्रकृति के खिल-खिलाने का अवसर है। इस दिन वाग्देवी सरस्वती के प्रकटीकरण का दिन भी है। वे ज्ञान और बुद्धि की देवी है। इस दिन को विशेष माना गया है। इस बारे में वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया इस दिन से सर्दी का प्रकोप समाप्त हो जाता है। चारों तरफ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वसंत पंचमी पर प्रकृति के खिल-खिलाने का अवसर है। इस दिन वाग्देवी सरस्वती के प्रकटीकरण का दिन भी है। वे ज्ञान और बुद्धि की देवी है। इस दिन को विशेष माना गया है। इस बारे में वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया इस दिन से सर्दी का प्रकोप समाप्त हो जाता है। चारों तरफ खेतों में लहलहाती हुई गेहूं की फसल, सरसों के खेतों में चारों तरफ पीले खिले हुए फूल का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मुरैना से मनोज जैन नायक की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> प्रत्येक माह में दो बार पंचमी तिथि आती है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बच्चे, युवा, वृद्ध सभी ने सुना है क्योंकि, हर किसी के जीवन में कहावत के रूम में भी जुड़ा हुआ शब्द ‘कितने वसंत देख लिए अब तक’ है। वसंत नाम से मन में प्रफुल्ता, उमंग, ज्ञान की धारा अविरल बहने लगती है क्योंकि, यह तिथि ऋतुराज वसंत के आगमन की सूचना देती है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया इस दिन से सर्दी का प्रकोप समाप्त हो जाता है। चारों तरफ खेतों में लहलहाती हुई गेहूं की फसल, सरसों के खेतों में चारों तरफ पीले खिले हुए फूल का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। इस दिन हर घरों में केशरिया चावल बनाए जाते हैं और प्रातः स्नान के पश्चात पीले परिधान पहनना चाहिए। फिर मां सरस्वती का पूजन करना चाहिए।</p>
<p><strong>&#8230;तो सभी जीवांे को बोलने की शक्ति मिली</strong></p>
<p>कहते है कि प्रजापति ब्रह्मा जी ने विष्णु जी की आज्ञा से सृष्टि की रचना कर दी। पृथ्वी पर आकर देखा तो सन्नाटा किसी के मुंह से शब्द नहीं निकले थे। तब इस उदासी को देखकर ब्रह्मजी ने अपने कमंडल से जल को छिड़का जल कणों से वृक्षों पर एक शक्ति हाथों में वीणा लिए, पुस्तक लिए माला पहने प्रकट हुईं। तब ब्रह्म जी ने उस देवी से वीणा बजाकर उदासी दूर करने कहा। तो सभी जीवांे को बोलने की शक्ति मिली। उस देवी का नाम सरस्वती पड़ा। यह देवी विद्या, वृद्धि, ज्ञान, संगीत, कला, विज्ञान, शिल्प कला की देवी है। जैन ने कहा कि यह दिन सभी शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसलिए यह दिन अबूझ मुहूर्त के नाम से प्रसिद्ध है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73426" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250130-WA0038.jpg" alt="" width="366" height="374" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250130-WA0038.jpg 366w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250130-WA0038-294x300.jpg 294w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250130-WA0038-65x65.jpg 65w" sizes="(max-width: 366px) 100vw, 366px" />अबूझ मुहूर्त पर होते हैं विवाह आदि</strong></p>
<p>इस दिन सभी छात्र-छात्राओं को मां सरस्वती जी का स्नान, ध्यान करके पीले वस्त्र धारण कर विनम्र भाव से पूजन करना चाहिए और जिनको वाणी, वृद्धि, ज्ञान का विकास करना है, उन लोगों को भी। जैन ने बताया कि इस बार बसंत पंचमी को शास्त्र युक्त विवाह मुहूर्त नहीं है। परंपरागत इस दिन लोकाचार की दृष्टि से अबूझ मुहूर्त मानकर ज्यादातर लोग इस दिन विवाह के बंधन में बंध जाना पसंद करते हैं। ध्यान देने वाली बात है।</p>
<p><strong>पूजन का यह है मुहुर्त</strong></p>
<p>इस बार की पंचमी तिथि का क्षय भी है। 2 फरफरी को चतुर्थी का समापन सूर्याेदय के बाद सुबह 9.14 बजे हो रहा है। इसी समय से पंचमी प्रारंभ हो जाएगी जो 3 फरवरी को सूर्याेदय से पूर्व 6.52 बजे तक समाप्त हो जाएगी। इसलिए 2 फरवरी को बसंत पंचमी सरस्वती पूजन प्रातः 7.01 बजे से 12.31 बजे तक रहेगा। पूजन का कुल समय 5 घंटे 30 मिनट है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/day_of_change_of_nature_and_appearance_of_vaagdevi/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>धर्म का मर्म में जानिए वसंत पंचमी का महत्व : बसंत पंचमी से माघ मास वाला दसलक्षण पर्व होता है प्रारंभ </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/know_the_importance_of_vasant_panchami_in_the_essence_of_religion_dasalakshan_festival_of_magh_month_starts_from_basant_panchami/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/know_the_importance_of_vasant_panchami_in_the_essence_of_religion_dasalakshan_festival_of_magh_month_starts_from_basant_panchami/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Feb 2024 11:57:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आलेख]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Basant Panchami श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Magh month]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Vasant Panchami]]></category>
		<category><![CDATA[अभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[कुंदकुंद देव]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[तीर्थ क्षेत्र]]></category>
		<category><![CDATA[दसलक्षण पर्व]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[पिच्छिका परिवर्तन]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान शांतिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[माघ मास]]></category>
		<category><![CDATA[वसंत पंचमी]]></category>
		<category><![CDATA[शिखरजी]]></category>
		<category><![CDATA[स्वर्ण कलश]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=55703</guid>

					<description><![CDATA[बसंत पंचमी से माघ मास वाला दसलक्षण पर्व प्रारंभ होता है, वसंत पंचमी को ही आचार्य कुंदकुंद देव की जन्म तिथि है, ये सरस्वती की आराधना का दिन है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू का आलेख। बसंत पंचमी से माघ मास वाला दसलक्षण पर्व प्रारंभ होता है, वसंत पंचमी को ही आचार्य कुंदकुंद देव की जन्म [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बसंत पंचमी से माघ मास वाला दसलक्षण पर्व प्रारंभ होता है, वसंत पंचमी को ही आचार्य कुंदकुंद देव की जन्म तिथि है, ये सरस्वती की आराधना का दिन है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू का आलेख।</span></strong></p>
<hr />
<p>बसंत पंचमी से माघ मास वाला दसलक्षण पर्व प्रारंभ होता है, वसंत पंचमी को ही आचार्य कुंदकुंद देव की जन्म तिथि है,</p>
<p>ये सरस्वती की आराधना का दिन है। जगत में विद्या (ज्ञान) और वाणी की देवी को सरस्वती कहते हैं यह विद्या और वाणी हमें जिनवाणी से प्राप्त होती है। इसीलिए जैन धर्म के अनुसार जिनवाणी ही सरस्वती होती है जिनवाणी का स्वाध्याय ही सरस्वती की आराधना है। आचार्य कुंदकुंद के जन्म तिथि को जिनवाणी (सरस्वती) की पूजन इसीलिए होती है क्योंकि उन्होंने पंच परमागम की रचना की थी, परमागम अर्थात पूरे जैन आगम शास्त्र (जिनवाणी) के सबसे उत्कृष्ठ आगम शास्त्र (जिनवाणी) जिनके नाम निम्न अनुसार है-</p>
<p>समयसार नियमसार, प्रवचन सार, अष्ट पहाड़,पंच अस्तिकाय संग्रह</p>
<p>पंच परमागम की रचना के कारण इन्हें दिगंबर जैन धर्म के सबसे श्रेष्ठ आचार्य माना जाता है और मंगलाचरण में गणधरों के बाद और जैन धर्म के पहले उन्हे ही शुभ मांगलिक कहा है</p>
<p>मंगलम भगवान वीरो,मंगलम गौतमो गणी ।</p>
<p>मंगलम कुन्द्कुंदाद्दौ, जैन धर्मोस्तु मंगलम ॥</p>
<p>आचार्य कुंदकुंद आम्नाय अर्थात आचार्य कुंदकुंद परंपरा, भद्रबाहु आचार्य के काल मे 12 साल के अकाल में सभी साधु सफेद वस्त्र धारण कर रहे थे तब आचार्य कुंदकुंद देव ने ही दिगंबर परंपरा को जीवित रखा, सभी दिगंबर प्रतिमा के प्रशस्ति में आचार्य कुंदकुंद आम्नाय द्वारा प्रतिष्ठित लिखा होता है। मुनि दीक्षा के काल में भी यही प्रतिज्ञा ली जाती है की आचार्य कुंदकुंद आम्नाय के अनुसार दीक्षा का पालन करेंगे। शास्त्र स्वाध्याय के पहले कहे जाने वाले मंगलाचरण में भी आचार्य कुंदकुंद आम्नाय के अनुसार शास्त्र कहूंगा ऐसी प्रतिज्ञा लेते हैं ।अर्थात देव (जिन प्रतिमा), शास्त्र और गुरु तीनों भी आचार्य कुंदकुंद आम्नाय से ही प्रमाणित होते हैं, इतनी महान परंपरा को आचार्य कुंदकुंद आम्नाय कहा जाता है।पंच परमागम के रचना के कारण आचार्य कुंदकुंद को कलिकाल (पंचम काल) का सर्वज्ञ कहते हैं । उनके बारे में कहा जाता है &#8220;न हुए है ना होएंगे मुनि कुंदकुंद से&#8221;ऐसे दिगंबर धर्म के महान आचार्य को हमारा त्रिकाल वंदन है नमोस्तु शासन जयवंत हो।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/know_the_importance_of_vasant_panchami_in_the_essence_of_religion_dasalakshan_festival_of_magh_month_starts_from_basant_panchami/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
