<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>वर्धमान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Sat, 28 Mar 2026 07:49:09 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>वर्धमान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>मानव कल्याण के लिए भगवान महावीर के सिद्धांतों की आवश्यकता : महावीर जयंती जैन धर्म का एक अत्यंत पावन और प्रेरणादायक पर्व </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_need_for_lord_mahavirs_principles_for_human_welfare/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_need_for_lord_mahavirs_principles_for_human_welfare/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Mar 2026 07:49:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Human Welfare]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Mahavir Jayanti]]></category>
		<category><![CDATA[Principle of Non-violence]]></category>
		<category><![CDATA[Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Vardhaman]]></category>
		<category><![CDATA[अहिंसा का सिद्धांत]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[महावीर जयंती]]></category>
		<category><![CDATA[मानव कल्याण]]></category>
		<category><![CDATA[वर्धमान]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[साधु]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=103244</guid>

					<description><![CDATA[विश्व में हिंसा, युद्ध, असहिष्णुता, आतंकवाद और पर्यावरण संकट जैसी समस्याएँ भी तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में मानवता को जिस नैतिक दिशा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन की आवश्यकता है, वह हमें लगभग 2600 वर्ष पहले भगवान महावीर के जीवन और उनके सिद्धांतों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। महावीर जयंती पर जयेन्द्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>विश्व में हिंसा, युद्ध, असहिष्णुता, आतंकवाद और पर्यावरण संकट जैसी समस्याएँ भी तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में मानवता को जिस नैतिक दिशा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन की आवश्यकता है, वह हमें लगभग 2600 वर्ष पहले भगवान महावीर के जीवन और उनके सिद्धांतों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। <span style="color: #ff0000">महावीर जयंती पर जयेन्द्र जैन&#8217;निप्पू चन्देरी का यह विशेष आलेख पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>मानव सभ्यता आज अभूतपूर्व वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के दौर से गुजर रही है। अंतरिक्ष की खोज से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक मनुष्य ने अनेक अद्भुत उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं, किंतु इसके साथ ही विश्व में हिंसा, युद्ध, असहिष्णुता, आतंकवाद और पर्यावरण संकट जैसी समस्याएँ भी तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में मानवता को जिस नैतिक दिशा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन की आवश्यकता है, वह हमें लगभग 2600 वर्ष पहले भगवान महावीर के जीवन और उनके सिद्धांतों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इसलिए आज यह कहना अत्यंत सार्थक है कि विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए वर्तमान युग को पुनः वर्धमान की आवश्यकता है।</p>
<p>महावीर जयंती जैन धर्म का एक अत्यंत पावन और प्रेरणादायक पर्व है। इस दिन भगवान महावीर के जन्मोत्सव को पूरे विश्व में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि मानवता को उनके महान संदेशों का स्मरण कराने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देने का अवसर भी है। भगवान महावीर का जीवन तप, त्याग, आत्मसंयम और करुणा का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से यह सिद्ध किया कि आत्मा की शुद्धि और समाज की शांति का मार्ग अहिंसा, संयम और सत्य के माध्यम से ही संभव है।</p>
<p>भगवान महावीर के उपदेशों का मूल आधार अहिंसा है। उन्होंने कहा कि किसी भी जीव को मन, वचन और कर्म से कष्ट पहुँचाना हिंसा है। महावीर स्वामी के अनुसार प्रत्येक जीव में आत्मा समान रूप से विद्यमान है, इसलिए हर जीव के प्रति दया और करुणा का भाव रखना ही सच्चा धर्म है। आज जब विश्व के अनेक क्षेत्रों में युद्ध और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, तब महावीर का अहिंसा का सिद्धांत विश्व शांति के लिए सबसे प्रभावी और प्रासंगिक मार्ग बन सकता है। यदि मानव समाज इस सिद्धांत को अपनाए, तो हिंसा, घृणा और प्रतिशोध की भावना स्वतः समाप्त हो सकती है।</p>
<p>भगवान महावीर ने केवल अहिंसा का ही संदेश नहीं दिया, बल्कि उन्होंने अनेकांतवाद का भी महान सिद्धांत प्रतिपादित किया। अनेकांतवाद का अर्थ है कि सत्य के अनेक पहलू हो सकते हैं और प्रत्येक दृष्टिकोण में कुछ न कुछ सत्य अवश्य होता है। यह सिद्धांत हमें सहिष्णुता, संवाद और आपसी समझ की भावना विकसित करने की प्रेरणा देता है। आज की दुनिया में विचारों की कट्टरता और असहिष्णुता के कारण अनेक विवाद और संघर्ष उत्पन्न होते हैं। यदि समाज महावीर के अनेकांतवाद को स्वीकार कर ले, तो मतभेद संवाद और समझदारी के माध्यम से सुलझाए जा सकते हैं।</p>
<p>इसी प्रकार भगवान महावीर ने अपरिग्रह अर्थात अधिक संग्रह न करने का सिद्धांत भी दिया। आधुनिक युग में मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं और संसाधनों के अत्यधिक संग्रह की प्रवृत्ति में उलझता जा रहा है। इसका परिणाम पर्यावरण संकट, सामाजिक असमानता और मानसिक तनाव के रूप में सामने आ रहा है। यदि मनुष्य महावीर के अपरिग्रह सिद्धांत को अपनाए, तो जीवन में संतुलन और संतोष की भावना विकसित हो सकती है और प्रकृति के साथ सामंजस्य भी स्थापित हो सकता है।</p>
<p>जैन दर्शन का प्रसिद्ध सूत्र है — “परस्परोपग्रहो जीवानाम्”, अर्थात सभी जीव एक-दूसरे के उपकार के लिए हैं। यह सिद्धांत हमें यह समझाता है कि इस संसार में कोई भी जीव पूर्णतः स्वतंत्र नहीं है। सभी जीव और प्रकृति के तत्व एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। आज जब पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता की रक्षा की आवश्यकता पूरी दुनिया में महसूस की जा रही है, तब महावीर का यह संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है।</p>
<p>महावीर जयंती का पर्व हमें भगवान महावीर के इन महान सिद्धांतों को स्मरण करने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है। यह दिन केवल पूजा-अर्चना का अवसर नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मसुधार का भी अवसर है। यदि मानव समाज महावीर के अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतार ले, तो विश्व में शांति, सद्भाव और संतुलन की स्थापना संभव है।</p>
<p>अंततः कहा जा सकता है कि भगवान महावीर के सिद्धांत केवल जैन धर्म तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सम्पूर्ण मानवता के लिए मार्गदर्शक हैं। उनका जीवन और दर्शन आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना हजारों वर्ष पहले था। इसलिए यह कहना बिल्कुल उचित है कि विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए आज के युग को फिर से वर्धमान की आवश्यकता है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_need_for_lord_mahavirs_principles_for_human_welfare/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>तीर्थंकर महावीर&#8230; एक नजर में</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/tirthankar-mahavir-ek-najar-me/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Apr 2022 07:57:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आलेख]]></category>
		<category><![CDATA[जन्मकल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[महावीर जन्मकल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[महावीर जयंती]]></category>
		<category><![CDATA[महावीर भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[वर्धमान]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=24830</guid>

					<description><![CDATA[प्रस्तुति -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज अन्य नाम- वर्द्धमान, वीर, अतिवीर, महावीर, सन्मति तीर्थकर क्रम -चतुर्विंशतम जन्मस्थान -क्षत्रिय कुण्डग्राम, वैशाली पिता नाम-सिद्धार्थ मातानाम -त्रिशला देवी (प्रियकारिणी) वंशनाम-नाथवंश गर्भावतरण -आषाढ़ शुक्ल षष्ठी जन्म तिथि -चैत्र शुक्ल त्रयोदशी, वर्ण (कान्ति) -स्वर्णाभ चिह-सिंह गृहस्थ-काल-अविवाहित कुमारकाल -28 वर्ष, 5 माह, 15 दिन दीक्षा तिथि-मार्गशीर्ष कृष्ण 10 , सोमवार, 26 [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff6600">प्रस्तुति -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज</span></p>
<p><span style="color: #ff99cc">अन्य नाम- वर्द्धमान, वीर, अतिवीर, महावीर,</span> <span style="color: #ff99cc">सन्मति</span></p>
<p><span style="color: #ff00ff">तीर्थकर क्रम -चतुर्विंशतम</span></p>
<p><span style="color: #ff0000">जन्मस्थान -क्षत्रिय कुण्डग्राम, वैशाली</span></p>
<p><span style="color: #800000">पिता नाम-सिद्धार्थ</span></p>
<p><span style="color: #000000">मातानाम -त्रिशला देवी (प्रियकारिणी)</span></p>
<p><span style="color: #870000">वंशनाम-नाथवंश</span></p>
<p><span style="color: #ff6600">गर्भावतरण -आषाढ़ शुक्ल षष्ठी</span></p>
<p><span style="color: #870000">जन्म तिथि -चैत्र शुक्ल त्रयोदशी,</span></p>
<p><span style="color: #ff9900">वर्ण (कान्ति) -स्वर्णाभ</span></p>
<p><span style="color: #ffcc99">चिह-सिंह</span></p>
<p><span style="color: #ffcc00">गृहस्थ-काल-अविवाहित</span></p>
<p><span style="color: #333333">कुमारकाल -28 वर्ष, 5 माह, 15 दिन</span></p>
<p><span style="color: #00ff00">दीक्षा तिथि-मार्गशीर्ष कृष्ण 10 , सोमवार, 26</span></p>
<p><span style="color: #cc99ff">सितम्बर, 566 ई.पू.</span></p>
<p><span style="color: #666699">तप-12 वर्ष, 5 मास, 15 दिन</span></p>
<p><span style="color: #800080">कैवल्य -वैशाख शुक्ल 10 , रविवार, 26 अप्रैल, 556 ई.पू.</span></p>
<p><span style="color: #008080">देशना पूर्व मौन -66 दिन</span></p>
<p><span style="color: #33cccc">देशना-तिथि (प्रथम)-श्रावण कृष्ण प्रतिपदा,</span></p>
<p><span style="color: #003366">शनिवार, 1 जुलाई, 556 ई.पू.</span></p>
<p><span style="color: #008000">निर्वाण-तिथि -कार्तिक कृष्ण अमावस्या,</span></p>
<p><span style="color: #999999">मंगलवार, 15 अक्टूबर, 527 ई</span></p>
<p><span style="color: #333333">निर्वाण-भूमि-पावापुरी</span></p>
<p><span style="color: #99ccff">आयु -72 वर्ष (71-4-25)</span></p>
<p><span style="color: #00ccff">जन्म-समय -नक्षत्र : उत्तरा फाल्गुनी</span></p>
<p><span style="color: #0000ff">ज्योतिर्ग्रह-स्थिति राशि : कन्या</span></p>
<p><span style="color: #00ff00">महादशा -बृहस्पति</span></p>
<p><span style="color: #ff0000">दशा -शनि</span></p>
<p><span style="color: #008080">अन्तर्दशा- बुध</span></p>
<p><span style="color: #008000"><strong>पूर्व भव :</strong>पुरुखा भील/सौधर्म देव/ मरीचि/ब्रह्मस्वर्ग का देव/जटिल ब्राह्मण/सौधर्म स्वर्ग का देव/पुष्यमित्र ब्राह्मण/अग्निसह ब्राह्मण/सनत्कुमार स्वर्ग का देव/ अग्निमित्र ब्राह्मण/भारद्वाज ब्राह्मण/माहेन्द्र स्वर्ग का देव (त्रसस्थावर योनियों में असंख्य वर्षों तक परिभ्रमण)/स्थावर ब्राह्मण/विश्वनन्दि/महाशुक्र स्वर्ग का देव/त्रिपुष्ठनारायण/सातवें नरक का नारकी/सिंह/प्रथम नरक का नारकी/सिंह/प्रथम स्वर्ग का देव/कनकोज्ज्वल राजा जलांतक स्वर्ग का देव/ हरिषेण राजा/महाशुक्र स्वर्ग का देव/प्रियमित्र चक्रवर्ती/सहस्त्रार स्वर्ग का देव/नंद राजा/अच्युत स्वर्ग का देव/</span></p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>गणधर</strong>: भगवान महावीर भगवान महावीर के ११ गणधर हैं। इन्द्रभूति (गौतम)/अग्निभूति/वायुभूति/व्यक्त/धर्मा/मण्डित/मौर्य पुत्र/अर्पित/अचल भ्राता/ मेनार्य/प्रभात</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">केवली -700</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">मनः पर्याय ज्ञान -700</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">अवधिज्ञानी -1300</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">चौदह पूर्वधारी-300</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">वादी -400</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">वैक्रियकलब्धिधारी-700</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">अनुत्तरोपपातिक मुनि :-800</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">साधु -14000</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">साध्वियां-36000</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">श्रावक- <a style="color: #870000" href="tel:159000">159000</a></span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">श्राविकाएं &#8211;<a style="color: #870000" href="tel:318000">318000</a></span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">ऊंचाई -7 हाथ</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">वैराग्य का कारण -जाति स्मरण</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">दीक्षा पालकी-चन्द्रप्रभा</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">दीक्षा वृक्ष-शाल</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">प्रथम आहार नगरी-कुलग्राम(कुंडलपुर)</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">प्रथम आहार दाना-राजाकूल</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">आहार किसका लिया -गौ क्षीर(दूध) से बने पकवान</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">छदमस्तकाल -12 वर्ष</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">केवल ज्ञान का स्थान-ऋजुकलातीर(षगढ़ वन)</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">केवल ज्ञान का वृक्ष-शाल</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">समवशरण भूमि -योजन</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">मुख्य गणधर -इन्द्रभूमि</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">मुख्य श्रोता -श्रेणिक</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">केवली काल -30 वर्ष</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">मोक्ष आसन -खड़गासन</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">रुद्र -सात्यकि</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">यक्ष -गुह्नक</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">यक्षिणी-सिद्धायिनी</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">विशेष पद- बाल ब्रह्मचारी</span></p>
<p dir="ltr"><span style="color: #870000">प्रमुख उपदेश- जीओ और जीने  दो</span><br />
<span style="color: #870000">अहिंसा परमो धर्म:</span></p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
