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	<title>वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>गुरु का कर्क राशि में प्रवेश 1जून से : शिक्षा एवं अध्यात्म के क्षेत्र में होगा विकास, पांच राशि वालों के जीवन में आएगी चमक </title>
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		<pubDate>Thu, 28 May 2026 15:04:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हम सभी जानते हैं कि ग्रहों की दशा मानव जीवन को प्रभावित करती है। 1 जून की रात्रि 1:48 बजे गुरु मिथुन राशि से निकल कर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना। हम सभी जानते हैं कि ग्रहों की दशा मानव जीवन को प्रभावित करती है। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>हम सभी जानते हैं कि ग्रहों की दशा मानव जीवन को प्रभावित करती है। 1 जून की रात्रि 1:48 बजे गुरु मिथुन राशि से निकल कर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> हम सभी जानते हैं कि ग्रहों की दशा मानव जीवन को प्रभावित करती है। 1 जून की रात्रि 1:48 बजे गुरु मिथुन राशि से निकल कर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। कर्क राशि में 31 अक्टूबर तक रहने के बाद सिंह राशि में प्रवेश कर जाएंगे । पुनः 24 जनवरी 2027 से पुनः कर्क राशि में चले जाएंगे। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ.हुकुमचंद जैन ने बताया कि देश-दुनिया पर इस का सकारात्मक प्रभाव देखने मिलेगा। जनता जनार्दन और देश में शिक्षा, धर्म, आध्यात्मिकता और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यों में वृद्धि, कृषि, जल संसाधन, दुग्ध व्यवसाय तथा खाद्य क्षेत्र को लाभ होगा। जनकल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा पर सरकारों का अधिक ध्यान रहेगा। परिवार, संस्कृति और परंपराओं के प्रति लोगों का झुकाव बढ़ सकता है। 8 जून से कर्क राशि में शुक्र के पहुंचने से वर्षा प्रारंभ हो सकती है एवं 22 जून से कर्क राशि में बुध +गुरु+शुक्र युति चलने से कही-कही भारी वर्षा, बाढ़, अतिवृष्टि या जल से संबंधित घटनाओं से जन धन की हानि पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता रह सकती है। 29 मई से 22 जून तक बुध का अपनी स्वयं की मिथुन राशि में रहने और 8 जून तक शुक्र ग्रह से युति करने से चिकित्सा, शिक्षा और अनुसंधान क्षेत्र में नई प्रगति देखने को मिल सकती है। ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन के अनुसार 12 में से पांच राशि वालों कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक और मीन की किस्मत गुरु के कर्क राशि में प्रवेश से बुलंद होगी।</p>
<p><strong>12 राशियों पर गुरु गोचर का क्या रहेगा प्रभाव</strong></p>
<p>मेष राशि- मेष राशि वालों के लिए चौथे भाव में गुरु। मकान, वाहन, भूमि सुख में वृद्धि। माता का सहयोग मिलेगा। व्यापार और नौकरी में स्थिरता।</p>
<p>वृषभ राशि- वृष राशि वालों के लिए तीसरे भाव में गुरु।</p>
<p>पराक्रम और साहस बढ़ेगा। छोटे भाई-बहनों से लाभ।</p>
<p>नए कार्यों की शुरुआत संभव।</p>
<p>मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों के लिए दूसरे भाव में गुरु। धन संचय के अवसर, परिवार में शुभ कार्य, वाणी से लाभ मिलेगा।</p>
<p>कर्क राशि- कर्क राशि वालों के लिए प्रथम भाव में उच्च गुरु। व्यक्तित्व प्रभावशाली बनेगा, सम्मान, प्रतिष्ठा और उन्नति। विवाह योग्य जातकों के लिए अच्छे अवसर।</p>
<p>सिंह राशि- सिंह राशि वालो के लिए बारहवें भाव में गुरु।</p>
<p>धार्मिक यात्राएं संभव, खर्चों में वृद्धि, विदेश संबंधी कार्यों में सफलता।</p>
<p>कन्या राशि- कन्या राशि वालों के लिए ग्यारहवें भाव में गुरु। आय में वृद्धि, मित्रों और बड़े लोगों का सहयोग, रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे।</p>
<p>तुला राशि- तुला राशि वालों के लिए दशम भाव में गुरु। केरियर में उन्नति, पदोन्नति और सम्मान, व्यवसाय विस्तार के अवसर।</p>
<p>वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों के लिए गुरु नवम भाव में। भाग्योदय का समय, धर्म-कर्म में रुचि, उच्च शिक्षा और यात्राओं से लाभ।</p>
<p>धनु राशि- धनु राशि वालों के लिए गुरु अष्टम भाव में ।</p>
<p>अचानक परिवर्तन, शोध, बीमा, गुप्त विद्याओं में लाभ, स्वास्थ्य पर ध्यान आवश्यक।</p>
<p>मकर राशि- मकर राशि वालों के लिए सप्तम भाव में गुरु। विवाह और दांपत्य सुख, साझेदारी के कार्यों में लाभ, व्यापारिक समझौते सफल होंगे।</p>
<p>कुंभ राशि- कुंभ राशि वाले के लिए गुरु छठे भाव में । शत्रुओं पर विजय, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता, स्वास्थ्य में सुधार की संभावना।</p>
<p>मीन राशि-मीन राशि वाले के लिए पंचम भाव में गुरु । संतान सुख में वृद्धि, शिक्षा और विद्या में सफलता, प्रेम संबंधों में अनुकूलता।</p>
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		<title>शनि और मंगल ग्रह की युति से युद्ध और हिंसा में बढ़ोतरी की आशंका : डॉ. जैन ने कहा- भूकंप आने से जन धन हानि की संभावना </title>
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		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 12:57:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शनि और मंगल ग्रह की युति से विश्व में हिंसा और युद्ध की संभावना बलबती दिखाई दे रही है। साथ ही भूकंप आदि से जन धन की आशंका है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया शनि ग्रह 17 अप्रैल को 13.59 बजे मीन राशि में उदय, मंगल 18 अप्रैल को मीन राशि में रात्रि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शनि और मंगल ग्रह की युति से विश्व में हिंसा और युद्ध की संभावना बलबती दिखाई दे रही है। साथ ही भूकंप आदि से जन धन की आशंका है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया शनि ग्रह 17 अप्रैल को 13.59 बजे मीन राशि में उदय, मंगल 18 अप्रैल को मीन राशि में रात्रि 01.52 बजे उदय होंगे। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> शनि और मंगल ग्रह की युति से विश्व में हिंसा और युद्ध की संभावना बलबती दिखाई दे रही है। साथ ही भूकंप आदि से जन धन की आशंका है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया शनि ग्रह 17 अप्रैल को 13.59 बजे मीन राशि में उदय, मंगल 18 अप्रैल को मीन राशि में रात्रि 01.52 बजे उदय होंगे। शनि एवं मंगल दोनों ग्रह 20 अप्रैल से युति से युद्ध, हिंसा, उपद्रव को पृथ्वी पर भड़काएंगे चारों तरफ आग के गोले, धुआं से पृथ्वी थर्राएगी। कहीं कहीं भूकंप से भी हानि के योग है। जैन ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि मंगल-शनि की युति के साथ ही लगातार तीन राशियों में सभी पाप और क्रूर ग्रह चलेंगे।</p>
<p>कुंभ राशि में राहु है, मीन राशि में मंगल एवं शनि ,चंद्रमा रहेंगे, मेष राशि में सूर्य एवं शुक्र रहेंगे। मंगल एवं शनि का मीन राशि में युति का गुरु से केंद्र योग सूर्य और राहु से द्विर्द्वादश योग रहने से 18 अप्रैल से 15 मई 2026 तक का समय इजराइल अमेरिका, ईरान के लिए और उनके राष्ट्राध्यक्ष के लिए घातक है। अन्य देश भी इसकी चपेट में रहेंगे। महंगाई बढ़ेगी, तेल, पेट्रोल, गैस नष्ट होने से महंगाई का जन जीवन पर व्यापक असर पड़ेगा। भूमंडल पर युद्ध, भूकंप, सुनामी, हिंसा, उपद्रव से जन-धन हानि से आम जनता दुःखी और पीड़ित रहेगी। ज्ञात रहे कि वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन तीन दशक से अधिक समय से ज्योतिष पर अपनी सटीक भविष्यवाणियां कर रहे हैं। जिनमें दर्जनों जटिल मुद्दों पर भविष्यवाणियां समय समय पर सत्य सिद्ध होती रही हैं।</p>
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		<title>14 अप्रैल को मीन मलमास होगा समाप्त : शुभ कार्यों पर लगी रोक हटेगी </title>
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		<pubDate>Tue, 07 Apr 2026 06:02:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि अब 14 मार्च की रात 1:01 बजे से सूर्य के मीन राशि में प्रवेश से मलमास होने से विवाह, गृह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा आदि पर 14 अप्रैल को प्रातः 9:32 बजे तक रोक लगी है, वो हटेगी। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि अब 14 मार्च की रात 1:01 बजे से सूर्य के मीन राशि में प्रवेश से मलमास होने से विवाह, गृह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा आदि पर 14 अप्रैल को प्रातः 9:32 बजे तक रोक लगी है, वो हटेगी। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> कभी-कभी साल में कुछ ऐसा समय आता है जिससे शुभ कार्यों के मुहूर्तों पर रोक कुछ दिनों या महीनों के लिए लग जाती हैं। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि अब 14 मार्च की रात 1:01 बजे से सूर्य के मीन राशि में प्रवेश से मलमास होने से विवाह, गृह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा आदि पर 14 अप्रैल को प्रातः 9:32 बजे तक रोक लगी है, वो हटेगी।</p>
<p>वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि एक महीने बाद 14 मार्च से14 अप्रैल तक सूर्य मीन राशि में रहने से सभी शुभ कार्य के मुहूर्त रुके हुए थे। अब सूर्य 14 अप्रैल को प्रातः 9:32 बजे से मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। जो सूर्य की उच्च राशि भी है। इसके बाद 20 अप्रैल से पुनः विवाह, गृह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा आदि शुभ कार्य के मुहूर्त आरंभ होंगे।</p>
<p>ये रहेंगे विवाह के आगे मुहूर्त- अप्रैल माह में 20, 21, 26</p>
<p>मई-05, 06, 07, 08, 14 जून-19, 20, 22, 23, 26, 27, 29</p>
<p>जुलाई -06, 07, 11</p>
<p>नवंबर -21, 24, 25, 26</p>
<p>दिसंबर-02, 03,11,12</p>
<p><strong>आगे कब ओर क्यों रहेगी विवाह, गृह प्रवेश आदि शुभ मुहूर्तों पर रोक</strong></p>
<p>ज्येष्ठ अधिक मास होने से &#8211; प्रथम ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा रविवार 17 मई से द्वितीय ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या सोमवार 15 जून तक।</p>
<p>गुरु तारा अस्त- आषाढ़ शुक्ल द्वितीया गुरुवार 16 जुलाई को गुरु तारा पश्चिम में अस्त होकर श्रावण कृष्ण एकादशी रविवार 9 अगस्त को पूर्व दिशा में उदय होगा। गुरु अस्त कालांश एवं अस्त से तीन दिन पूर्व तक वृद्धत्वकाल तथा उदय से तीन दिन तक बाल्यतावकाल भी वर्जित हैं।</p>
<p>हरि शयन काल &#8211; आषाढ़ शुक्ल एकादशी 15 जुलाई से कार्तिक शुक्ल एकादशी शुक्रवार 20 नवंबर तक देवशयन काल वर्जित है।</p>
<p>श्राद्ध पक्ष- भाद्र मास पूर्णिमा शनिवार 26 सितंबर से अमावस्या शनिवार 10 अक्टूबर तक महालय श्राद्ध पक्ष सभी शुभ कार्य में वर्जित है।</p>
<p>शुक्र तारा अस्त- अश्वनी शुक्ल चतुर्थी बुधवार 14 अक्टूबर को शुक्र तारा पश्चिम दिशा में अस्त होकर कार्तिक कृष्ण तृतीया बुधवार 28 अक्टूबर को पूर्व दिशा ने उदय होगा। शुक्र तारा अस्त कालांश एवं अस्त से तीन दिन पूर्व तक वृद्धावकाल तथा उदय से तीन दिन तक बाल्यकाल तक शुभ कार्य वर्जित हैं।</p>
<p>धनु मलमास- मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी बुधवार 16 दिसंबर से पौष शुक्ल षष्ठी गुरुवार 14 जनवरी 2027 तक धनु राशि स्थित सूर्य संज्ञक पौष मलमास वर्जित हैं।</p>
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		<title>मार्गशीर्ष माह गुरुवार से शुरू गुरुवार को ही होगा समाप्त: पश्चिमी देशों में फिर युद्ध के वातावरण का बन सकता है योग  </title>
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		<pubDate>Thu, 06 Nov 2025 13:25:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इस बार मार्गशीर्ष माह गुरुवार से शुरू होकर गुरुवार को ही समाप्त होगा। कार्तिक पूर्णिमा के बाद मार्गशीर्ष माह का आरंभ 6 नवंबर गुरुवार से हो चुका है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस माह का आरंभ गुरुवार से और समापन भी गुरुवार चार दिसंबर को होगा। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इस बार मार्गशीर्ष माह गुरुवार से शुरू होकर गुरुवार को ही समाप्त होगा। कार्तिक पूर्णिमा के बाद मार्गशीर्ष माह का आरंभ 6 नवंबर गुरुवार से हो चुका है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस माह का आरंभ गुरुवार से और समापन भी गुरुवार चार दिसंबर को होगा। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> इस बार मार्गशीर्ष माह गुरुवार से शुरू होकर गुरुवार को ही समाप्त होगा। कार्तिक पूर्णिमा के बाद मार्गशीर्ष माह का आरंभ 6 नवंबर गुरुवार से हो चुका है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस माह का आरंभ गुरुवार से और समापन भी गुरुवार चार दिसंबर को होगा। इस महीने ही गुरु अतिचारी होकर 18 अक्टूबर को कर्क राशि में प्रवेश कर गए थे फिर से 11 नवंबर को वक्री चाल चलेंगे। 6 नवंबर को ही मंगल वृश्चिक राशि में अस्त होंगे। 7 नवंबर को शुक्र स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। 26 नवंबर को तुला राशि में बुध उदय होंगे। 28 को अनुराधा नक्षत्र में शुक्र प्रवेश करेंगे। डॉ.जैन के मुताबिक इस माह मंगल-सूर्य की युति भी 16 नवंबर से चलेगी।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-93840" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251106-WA0045.jpg" alt="" width="1080" height="1104" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251106-WA0045.jpg 1080w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251106-WA0045-293x300.jpg 293w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251106-WA0045-1002x1024.jpg 1002w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251106-WA0045-768x785.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251106-WA0045-65x65.jpg 65w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251106-WA0045-990x1012.jpg 990w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" />जो राहु एवं केतु दोनों ग्रहों से केंद्र योग बनाएगी एवं शनि ग्रह से नवम पंचम योग बनाने से पश्चिमी देशों में फिर से युद्ध के हालत बनकर अशांति, जनता में रोग, भय का वातावरण बन सकता है। राजनेताओं में परस्पर राज विग्रह एवं कहीं कहीं सत्ता परिवर्तन के योग दिखाई देते हैं। कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की वृद्धि और शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का क्षय भी उपद्रव, हिंसा, अशांति का वातावरण बना सकता है। वे मौसम बरसात और ओला वृष्टि भी संभव है।</p>
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		<title>गुरु तारा अस्त और देव शयन के कारण लंबे समय तक नहीं होंगे विवाह : आज शादियों का अंतिम मुहूर्त, अब साढ़े पांच माह नहीं बजेगी शहनाई </title>
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		<pubDate>Sat, 07 Jun 2025 15:08:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आज 8 जून को इस विवाह सीजन का अंतिम शुभ मुहूर्त है। इसके बाद साढ़े पांच महीने तक विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। आमतौर पर विवाह मुहूर्त देवशयन एकादशी तक यानी जुलाई मध्य तक रहते हैं, लेकिन इस बार विशेष खगोलीय परिस्थितियों के चलते मुहूर्त समय से पहले समाप्त हो रहे हैं। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आज 8 जून को इस विवाह सीजन का अंतिम शुभ मुहूर्त है। इसके बाद साढ़े पांच महीने तक विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। आमतौर पर विवाह मुहूर्त देवशयन एकादशी तक यानी जुलाई मध्य तक रहते हैं, लेकिन इस बार विशेष खगोलीय परिस्थितियों के चलते मुहूर्त समय से पहले समाप्त हो रहे हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> आज 8 जून को इस विवाह सीजन का अंतिम शुभ मुहूर्त है। इसके बाद साढ़े पांच महीने तक विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। आमतौर पर विवाह मुहूर्त देवशयन एकादशी तक यानी जुलाई मध्य तक रहते हैं, लेकिन इस बार विशेष खगोलीय परिस्थितियों के चलते मुहूर्त समय से पहले समाप्त हो रहे हैं।</p>
<p><strong>जुलाई में विवाह की इच्छा रखने वालों को झटका</strong></p>
<p>वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार, कई लोग गर्मी के कारण मई-जून की बजाय जुलाई में विवाह करना चाहते थे, लेकिन इस बार यह संभव नहीं हो पाएगा। गुरु तारा 12 जून को आषाढ़ कृष्ण प्रतिपदा गुरुवार के दिन अस्त हो जाएगा और 6 जुलाई, देवशयनी एकादशी के दिन ही उदय होगा। ऐसे में विवाह योग्य मुहूर्त न तो गुरु अस्त के काल में होते हैं और न ही उदय के तीन दिन बाद तक।</p>
<p><strong>विवाह पर रोक अब चार नहीं, साढ़े पांच महीने</strong></p>
<p>ज्योतिषाचार्य के अनुसार, परंपरागत रूप से देवशयन एकादशी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) से देव जागरण एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) तक चार माह तक विवाह-वर्जना होती है। लेकिन इस बार गुरु तारा अस्त होने के कारण यह अवधि बढ़कर लगभग साढ़े पांच माह की हो गई है। विवाह पर यह प्रतिबंध 22 नवंबर तक लागू रहेगा।</p>
<p><strong>22 नवंबर से शुरू होंगे शुभ मुहूर्त</strong></p>
<p>डॉ. जैन के अनुसार, अगला शुभ विवाह मुहूर्त 22 नवंबर को आएगा। इस सीजन में शुद्ध विवाह मुहूर्त की तिथियाँ हैं—22, 23, 24, 25 और 30 नवंबर, तथा 4 दिसंबर। लोकाचार की दृष्टि से देवप्रबोधिनी एकादशी (2 नवंबर) और भड़ली नवमी को भी विवाह संपन्न किए जा सकते हैं, लेकिन शास्त्र सम्मत विवाह के लिए 22 नवंबर से ही शुरुआत मानी जा रही है।</p>
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		<title>नौ तपा 25 मई से 3 जून तक, भीषण गर्मी झुलसाने वाली होगी : नौतपा के बाद भी गर्मी का रहेगा असर </title>
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		<pubDate>Fri, 23 May 2025 16:43:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इस बार भी नौतपा अपना रंग दिखाएगा। नौतपा रविवार 25 मई से मंगलवार 3 जून तक रहेगा। यूं तो हर वर्ष नौ तपा मई माह के अंतिम दिनों में आते हैं। इन दिनों खूब गर्मी पड़ती है और लू भी अधिक चलती है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की खबर&#8230; मुरैना। इस बार भी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इस बार भी नौतपा अपना रंग दिखाएगा। नौतपा रविवार 25 मई से मंगलवार 3 जून तक रहेगा। यूं तो हर वर्ष नौ तपा मई माह के अंतिम दिनों में आते हैं। इन दिनों खूब गर्मी पड़ती है और लू भी अधिक चलती है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> इस बार भी नौतपा अपना रंग दिखाएगा। नौतपा रविवार 25 मई से मंगलवार 3 जून तक रहेगा। यूं तो हर वर्ष नौ तपा मई माह के अंतिम दिनों में आते हैं। इन दिनों खूब गर्मी पड़ती है और लू भी अधिक चलती है। मान्यता है कि नौ तपा में जितनी अधिक गर्मी होगी, तपन होगी, लू अधिक चलेगी और इन दिनों वर्षा न हो तो आगामी समय में उतनी ही अच्छी वर्षा होती है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार ग्रहों के राजा सूर्य ग्रह जब वृष राशि में रहते हुए रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब से नौ तपा शुरू होते हैं। हालांकि रोहिणी नक्षत्र में सूर्य लगभग 14 दिनों तक रहते हैं।</p>
<p><strong>समुद्र जल भी तेजी से होता है वाष्पित</strong></p>
<p>शुरू के नौ दिनों में सूर्य की किरणे अपना विकराल तेज से पृथ्वी को गर्म तवे के समान तपाती है। इससे भीषण गर्मी और लू का आभास होता हैं। समुद्र का पानी भी तेजी से वाष्पित होता है और आगे पुनः वर्षा के रूप में बरसता है। डॉ. जैन ने बताया कि नौ दिनों के अलावा जब तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 8 जून तक रहेगा। तब तक गर्मी और लू का प्रकोप अधिक रहेगा। नौतपा के बाद भी लू कम नहीं होगी और भयंकर गर्मी पड़ेगी। लू के थपेड़े रहेंगे। हालांकि नौ तपे के दिनों में कुछ-कुछ स्थानों पर धूलभरी आंधी तूफान आएंगे । कहीं-कहीं इस के साथ वर्षा भी होगी। ज्योतिष गणना के आधार पर संभावना है कि 28, 30 और 31 मई को आंधी के साथ वर्षा भी हो सकती है।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-81510" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250523-WA0057.jpg" alt="" width="502" height="464" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250523-WA0057.jpg 502w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250523-WA0057-300x277.jpg 300w" sizes="(max-width: 502px) 100vw, 502px" />कब शुरू होगा नौतपा</strong></p>
<p>पंचांग के मुताबिक 25 मई 2025 को ग्रहों के राजा सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। वह इस दिन सुबह 3 बजकर 27 मिनट पर गोचर करेंगे। सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 8 जून 2025 तक रहने वाले हैं।</p>
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		<title>आम के आम, गुठलियों के दाम : एक पेड़ लगाएं, अपने जन्म नक्षत्र,जन्म राशि एवम ग्रह को बलवान बनाएं </title>
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		<pubDate>Tue, 09 Jul 2024 10:20:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बरसात का सीजन है पेड़ पौधों को आसानी से लगाया जा सकता है । बढ़ते प्रदूषण को कंट्रोल करने, घुटती मानवता को बचाने की आवश्यक है। ऐसे में आप अपने जन्म नक्षत्र के अनुसार भी पेड़ पोधे लगाकर पर्यावरण के क्षेत्र में अपना योगदान दे सकते हैं । अगर नक्षत्र मालूम नहीं है तो अपनी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बरसात का सीजन है पेड़ पौधों को आसानी से लगाया जा सकता है । बढ़ते प्रदूषण को कंट्रोल करने, घुटती मानवता को बचाने की आवश्यक है। ऐसे में आप अपने जन्म नक्षत्र के अनुसार भी पेड़ पोधे लगाकर पर्यावरण के क्षेत्र में अपना योगदान दे सकते हैं । अगर नक्षत्र मालूम नहीं है तो अपनी राशि अनुसार, बोलते नाम की राशि अनुसार और अगर वर्तमान में कोई ग्रह की महादशा अंतर्दशा खराब है या जन्म कुंडली में ग्रह खराब बैठा है तो उसके अनुसार पेड़, पौधों को लगाएं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> बरसात का सीजन है पेड़ पौधों को आसानी से लगाया जा सकता है । बढ़ते प्रदूषण को कंट्रोल करने, घुटती मानवता को बचाने की आवश्यक है। ऐसे में आप अपने जन्म नक्षत्र के अनुसार भी पेड़ पोधे लगाकर पर्यावरण के क्षेत्र में अपना योगदान दे सकते हैं । अगर नक्षत्र मालूम नहीं है तो अपनी राशि अनुसार, बोलते नाम की राशि अनुसार और अगर वर्तमान में कोई ग्रह की महादशा अंतर्दशा खराब है या जन्म कुंडली में ग्रह खराब बैठा है तो उसके अनुसार पेड़, पौधों को लगाएं।</p>
<p><strong> वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचन्द जैन ने ज्योतिष नक्षत्र, राशि के अनुसार पेड़, पैधे लगाने की बात करते हुए कहा कि </strong></p>
<p>नक्षत्र के अनुसार किस नक्षत्र में जन्म से कोनसा पेड़ लगाए &#8211;</p>
<p>1 आश्वनी नक्षत्र के लिए कोचिल।</p>
<p>2- भरणी नक्षत्र के लिए आंवला</p>
<p>3- कृतिका नक्षत्र के लिए गुलहड़</p>
<p>4 रोहिणी नक्षत्र के लिए जामुन</p>
<p>5- मृगशिरा नक्षत्र के लिए खेर</p>
<p>6 &#8211; आद्रा नक्षत्र के लिए शीशम</p>
<p>7 पुनर्वसु नक्षत्र के लिए बांस</p>
<p>8 &#8211; पुष्य नक्षत्र के लिए पीपल</p>
<p>9 &#8211; आश्लेषा नक्षत्र के लिए नागकेशर</p>
<p>10 मघा नक्षत्र के लिए बट</p>
<p>11 पूर्वा फाल्गुनीनक्षत्र के लिए पलाश</p>
<p>12 उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के लिए पाकड़</p>
<p>13 हस्त नक्षत्र के लिए रीठा</p>
<p>14 &#8211; चित्रा नक्षत्र के लिए बेल</p>
<p>15 स्वाति नक्षत्र के लिए अर्जुन</p>
<p>16 विशाखा नक्षत्र के लिए कटैया</p>
<p>17 अनुराधा नक्षत्र के लिए भालसरी</p>
<p>18 ज्येष्ठा नक्षत्र के लिए चीर</p>
<p>19 मूल नक्षत्र के लिए शाल</p>
<p>20 पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के लिए अशोक</p>
<p>21 उत्तराषाढ़ नक्षत्र के लिए कटहल</p>
<p>22 श्रवण नक्षत्र के लिए अकौन</p>
<p>23 धनिष्ठा नक्षत्र के लिए शमी</p>
<p>24 शतभिषा नक्षत्र के लिए कदम्य</p>
<p>25 पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के लिए आम</p>
<p>26 उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र पाकड़</p>
<p>27 रेवती नक्षत्र के लिए महुआ</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63196" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0020.jpg" alt="" width="474" height="351" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0020.jpg 474w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0020-300x222.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0020-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0020-111x83.jpg 111w" sizes="(max-width: 474px) 100vw, 474px" />जिन्हें अपना जन्म नक्षत्र मालूम नहीं हो उन्हें अपने जन्म की या बोलने की राशि से पेड़ चुन</strong></p>
<p>1 मेष &#8211; आंवला, कुचला, गूगल</p>
<p>2- वृष &#8211; जामुन,खेर ,गूगल</p>
<p>3- मिथुन- खैर,शीशम,बांस</p>
<p>4- कर्क- पीपल,बांस,नागकेशर</p>
<p>5- सिंह- बरगद,पलाश</p>
<p>6- कन्या- बेल,जूही</p>
<p>7- तुला- अर्जुन,नागकेशर</p>
<p>8-बृश्चिक- नागकेशर,साल</p>
<p>9- धनु- साल, कटहल</p>
<p>10-मकर- शमी,कटहल</p>
<p>11- कुंभ- शमी,कदम्ब, आम</p>
<p>12- मीन- नीम,आम,महुआ</p>
<p><strong>अगर महादशा अंतर्दशा किसी ग्रह की या गोचर में ग्रह खराब हो तब कोनसा पेड़ लगाए  </strong></p>
<p>सूर्य ग्रह शान्ति के लिए मदार</p>
<p>चन्द्र ग्रह के लिए पलाश,खिरनी</p>
<p>मंगल ग्रह के लिए खैर,ढांक, नीम</p>
<p>बुध ग्रह के लिए अपामार्ग,</p>
<p>गुरु ग्रह के लिए पीपल</p>
<p>शुक्र ग्रह के लिए कपास</p>
<p>शनि ग्रह के लिए शमी, कीकर,खजूर</p>
<p>राहु ग्रह के लिए चंदन,दूर्वा,नारियल</p>
<p>केतु ग्रह के लिए तिल, इमली,कुशा</p>
<p>लगाना चाहिए।</p>
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		<title>पश्चिमी देशों में फिर युद्ध के आसार : आषाढ़ मास कृष्ण पक्ष केवल 13 दिन का होगा </title>
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		<pubDate>Sun, 23 Jun 2024 08:41:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि कोई तिथि जब दो सूर्योदय को स्पर्श करती है तो तिथि वृद्धि होती है और जब कोई तिथि किसी भी सूर्योदय को स्पर्श नहीं करती तो क्षय होती है। इस बार आषाढ़ कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा तिथि और त्रियोदशी तिथि दोनों तिथि सूर्योदय के समय न होने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि कोई तिथि जब दो सूर्योदय को स्पर्श करती है तो तिथि वृद्धि होती है और जब कोई तिथि किसी भी सूर्योदय को स्पर्श नहीं करती तो क्षय होती है। इस बार आषाढ़ कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा तिथि और त्रियोदशी तिथि दोनों तिथि सूर्योदय के समय न होने से इनका क्षय हो गया । इससे आषाढ़ कृष्ण पक्ष 15 दिनों की जगह 13 दिनों का रह गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>मुरैना।</strong> चंद्र माह में दो पक्ष होते हैं एक कृष्ण पक्ष दूसरा शुक्ल पक्ष । दोनों में पंद्रह पंद्रह दिन यानी तिथियां होती हैं। कई बार एक पक्ष में एक तिथि बढ़ जाती है कभी एक तिथि कम हो जाती है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि कोई तिथि जब दो सूर्योदय को स्पर्श करती है तो तिथि वृद्धि होती है और जब कोई तिथि किसी भी सूर्योदय को स्पर्श नहीं करती तो क्षय होती है। इस बार आषाढ़ कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा तिथि और त्रियोदशी तिथि दोनों तिथि सूर्योदय के समय न होने से इनका क्षय हो गया । इससे आषाढ़ कृष्ण पक्ष 15 दिनों की जगह 13 दिनों का रह गया। जैन ने कहा यह संयोग द्वापर युग के महाभारत काल में बना था। इस बार आषाढ़ मास कृष्ण पक्ष 23 जून से शुरू होकर 05 जुलाई को समाप्त होगा।</p>
<p>शुक्ल पक्ष 06 जुलाई से 21 जुलाई तक चलेगा। बहुत सालों बाद आषाढ़ कृष्ण पक्ष केवल 13 दिन का पड़ रहा है । ऐसा संयोग महाभारत काल में पड़ा था। यह एक प्रकार का दुर्योग है। इस बार पूरे आषाढ़ माह में पांच शनिवार, पांच रविवार होंगे। शनि ग्रह 29 जून को रात 12:38 बजे वक्री होंगे, जो 15 नवंबर को मार्गी होंगे। बुध 25 जून की रात 04:12 बजे पश्चिम में उदय होंगे और शुक्र ग्रह 05 जुलाई को पश्चिम में मिथुन राशि में उदय होंगे। 29 जून के बाद से जुलाई अगस्त माह में दक्षिण, पश्चिम दिशा शहरों में भारी वर्षा बाढ़ से बड़ी हानि हो सकती है। पश्चिमी दो देशों में नए युद्ध की शुरुआत हो सकती है।</p>
<p>जिसमे दूसरे देश भी सामिल हो सकते हैं। ये युद्ध का खतरा 29 जून से 15 अगस्त तक शनि के कुंभ राशि में वक्री रहने तक रहेगा। आषाढ मास में शुक्र व बुध ग्रह का उदय जल प्लावन, बाढ़, प्राकृतिक प्रकोप, नई बीमारी का भय दे सकता है। 13 दिनों का पक्ष का संयोग बहुत सालों बाद आता है। महाभारत युद्ध के पहले 13 दिन के पक्ष का दुर्योग काल आया था। उस समय बड़ी जन धन हानि हुई थी। घनघोर युद्ध हुआ था। ज्योतिष शास्त्र में 13 दिनों का पक्ष अच्छा नहीं माना गया है। ऐसा दुर्योग होने से अतिवृष्टि, अनावृष्टि, राजसत्ता का परिवर्तन, जाति भेद, रंग भेद आदि उपद्रव होने की आशंका पूरे साल बनी रहती है।</p>
<p>ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है समस्त प्रकृति को पीड़ित करने वाला यह दुर्योग संक्रामक रोगों की भी वृद्धि कर सकता है। इस पक्ष में मांगलिक कार्य, व्रतारम्भ, उद्यापन, भूमि भवन का क्रय विक्रय, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्यों को नहीं करना चाहिए।</p>
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