<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>लेखन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%A8/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Sat, 30 May 2026 16:04:14 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>लेखन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>अपने बच्चों को आत्म ज्ञान नहीं देने वाले माता-पिता उनके बैरी : धर्माचार्य कनक नंदी जी ने अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में माता-पिता को दी सीख </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/parents_who_do_not_give_selfknowledge_to_their_children_are_their_enemies/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/parents_who_do_not_give_selfknowledge_to_their_children_are_their_enemies/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 30 May 2026 16:04:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Chandragupta Maurya]]></category>
		<category><![CDATA[Dharmacharya Kanak Nandi Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[International Webinar]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Last Shrut Kevalin]]></category>
		<category><![CDATA[Reading of Scriptures]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Study of Scriptures]]></category>
		<category><![CDATA[Writing श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय वेबिनार]]></category>
		<category><![CDATA[अंतिम श्रुत केवली]]></category>
		<category><![CDATA[चंद्रगुप्त मौर्य]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्माचार्य कनक नंदी जी]]></category>
		<category><![CDATA[लेखन]]></category>
		<category><![CDATA[शास्त्र अध्ययन]]></category>
		<category><![CDATA[शास्त्र पठन-पाठन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=107509</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री कनक नंदीजी ने भिलुडा के पास शिवगौरी आश्रम से अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में बताया कि सामान्य लोगों से साधुओं की विपरीत वृत्ति होती है। अपने बच्चों को आत्म ज्ञान नहीं देने वाले मात-पिता उनके बैरी हैं।बांसवाड़ा/डडूका से पढ़िए, अजीत कोठिया की यह रिपोर्ट..  बांसवाड़ा/डडूका। आचार्य श्री कनक नंदीजी ने भिलुडा के पास शिवगौरी आश्रम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री कनक नंदीजी ने भिलुडा के पास शिवगौरी आश्रम से अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में बताया कि सामान्य लोगों से साधुओं की विपरीत वृत्ति होती है। अपने बच्चों को आत्म ज्ञान नहीं देने वाले मात-पिता उनके बैरी हैं।<span style="color: #ff0000">बांसवाड़ा/डडूका से पढ़िए, अजीत कोठिया की यह रिपोर्ट..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> बांसवाड़ा/डडूका।</strong> आचार्य श्री कनक नंदीजी ने भिलुडा के पास शिवगौरी आश्रम से अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में बताया कि सामान्य लोगों से साधुओं की विपरीत वृत्ति होती है। अपने बच्चों को आत्म ज्ञान नहीं देने वाले मात-पिता उनके बैरी हैं। दादा-दादी माता-पिता चाचा-चाची आदि परिवार के लोग ही दुश्मन हैं, जिन्होंने इस जीव को आत्मज्ञान नहीं दिया। हम आत्मा को नहीं जानते थे, अतः आत्मद्रोही थे।चंद्रगुप्त मौर्य अंतिम श्रुत केवली को अपने 14 सपनों का फल पूछते हैं।</p>
<p>शेर से भी केंचुआ अनंत गुना अधिक पापी है क्योंकि, शेर मन सहित पंचेेंद्रीय जीव है। गुरु के उपदेश से वह सम्यक दर्शन ग्रहण कर सकता है परंतु, केंचुआ नहीं।</p>
<p>भगवती आराधना ग्रंथ से आचार्य श्री ने बताया कि कारण वश साधु एक स्थान पर कम या अधिक दिन रह सकते हैं। चातुर्मास के बाद भी 30 दिन अधिक ठहर सकते हैं। वर्षा की अधिकता, शीत की अधिकता, गर्मी की अधिकता, महामारी आने पर, रोग होने पर प्राकृतिक आपदा आने पर युद्ध होने पर आतंकवाद आदि अनेक कारण होने पर साधु सुरक्षित एक स्थान पर रह सकते हैं। स्वाध्याय करने के लिए ज्ञानार्जन करने के लिए विहार भी कर सकते हैं तथा एक स्थान पर अधिक निवास भी कर सकते हैं। शास्त्र अध्ययन, शास्त्र पठन-पाठन, लेखन उनके निवास विहार में मुख्य कारण है। शिक्षा दीक्षा अध्ययन शास्त्र लिखने के लिए दक्षिण भारत से दो मुनिराजों को गुजरात बुलाया उसके बाद उनको पढ़ाया सिखाया। परीक्षा के बाद शास्त्र लेखन का आदेश आचार्य श्री धरसेनाचार्य ने दिया। उसमें उन्हें कई वर्ष लगे।</p>
<p><strong>वैयावृत्ति करना शिखर बंदी मंदिर बनाने से भी अधिक पुण्यबंध का कारण</strong></p>
<p>शक्ति के अभाव में भी एक स्थान पर साधु रह सकते हैं। उत्कृष्ट समाधि के लिए भी एक स्थान पर रह भी सकते हैं और विहार भी कर सकते हैं। साधु को उत्कृष्ट समाधि में कई महीने, 12 वर्ष भी लगते हैं। समाधिस्थ रोगी साधु की सेवा, वैयावृत्ति करने के लिए अधिक समय रह सकते हैं। वैयावृत्ति करना शिखर बंदी मंदिर बनाने से भी अधिक पुण्यबंध का कारण है। महामारी होने, दुर्भिक्ष होने पर अतिवृष्टि, अनावृष्टि होने पर साधु एक स्थान पर रह भी सकते हैं और विहार भी कर सकते हैं। उत्तर भारत में दुर्भिक्ष पड़ने पर 12000 साधुओं को लेकर आचार्य भद्रबाहु स्वामी साधुओं की सुरक्षा के लिए दक्षिण भारत गए।कोई कारण होने पर चातुर्मास के बीच में भी विहार कर सकते हैं। संघ में किसी प्रकार का किसी साधु को साध्वी को कष्ट होने पर चातुर्मास के बीच में विहार कर सकते हैं। आत्मविराधना, रत्नत्रय विराधना ना हो ऐसे स्थान पर रहते हैं। एक स्थान पर महीनों रह सकते हैं तथा समस्या होने पर चातुर्मास के बीच में भी जा सकते हैं। रत्नत्रय की विराधना ना हो अतः शरीर रूपी नौका को सुरक्षित रखते हैं।</p>
<p><strong>साधु ही बीज रूप में भगवान है</strong></p>
<p>धन कमाकर स्वर्ग मोक्ष नहीं मिलेगा धर्म से ही स्वर्ग मोक्ष मिलेगा। अभी के साधु भ्रूण अवस्था में है उनकी सुरक्षा सेवा व्यवस्था आहार विहार आदि में सुरक्षा हम श्रावकों का कर्तव्य है। जिस प्रकार भ्रूण,भ्रूण अवस्था में ही टूट जाएगा सुख जाएगा तो वृक्ष नहीं बन पाएगा वैसे ही मोक्ष रूपी वृक्ष के साधु भ्रूण है। बच्चों को शिशु अवस्था में खाना पानी पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है वह जवान मनुष्य की तरह कार्य नहीं कर सकता। जिस प्रकार मां अपने बच्चों की देखभाल करती है बचपन में नीचे गिर जाते हैं लग जाती है बीमार हो जाते हैं। भोजन बनाते समय तथा घर के कार्य करते समय भी मां अपने बच्चों का ख्याल रखती है, वैसे ही साधुओं की सेवा सुरक्षा हर पल करनी चाहिए। यह श्रावकों का मुख्य कर्तव्य है। साधु ही बीज रूप में भगवान है। जिस प्रकार मां अपने बेटे को भोजन कराती है तो ध्यान रखती है कि बेटे के लिए क्या पथ्य है, क्या अपथ्य है। साधु रुग्ण ना हो, वह स्वस्थ रहे, ध्यान,अध्ययन अच्छा कर सके। इस प्रकार वात्सल्य से श्रावकों को साधु को आहार देना चाहिए।</p>
<p><strong>मुनि श्री ने मंगलाचरण किया</strong></p>
<p>मुनि श्री सुविज्ञ सागर जी ने आचार्य श्री द्वारा रचित कविता &#8216;पंच परमेष्ठी तेरे भक्त हम तेरी भक्ति से बने भगवान तेरा ध्यान करें,तेरा ज्ञान करें, करे तेरा ही चिंतन मनन,पंच परमेष्ठी तेरे भक्त हम।द्वारा मंगलाचरण किया। यह जानकारी विजयलक्ष्मी गोदावत सागवाड़ा ने दी।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/parents_who_do_not_give_selfknowledge_to_their_children_are_their_enemies/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कर्म और अध्यात्म के आद्य उपदेष्टा ऋषभदेव : शिक्षा आगे बढ़ाने के लिए अनिवार्य होती हैं </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/rishabhdev_the_original_preacher_of_karma_and_spirituality/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/rishabhdev_the_original_preacher_of_karma_and_spirituality/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 07:52:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Aaradhydev]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[business]]></category>
		<category><![CDATA[Crafts]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[education]]></category>
		<category><![CDATA[First Tirthankara Adinath Bhagwan]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[War]]></category>
		<category><![CDATA[Writing]]></category>
		<category><![CDATA[आराध्यदेव]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[कृषि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[युद्ध]]></category>
		<category><![CDATA[लेखन]]></category>
		<category><![CDATA[विद्या]]></category>
		<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[शिल्प]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[साधु]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=77216</guid>

					<description><![CDATA[प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ के जन्म कल्याणक पर जगह-जगह कार्यक्रम होंगे। इस अवसर पर विविध जानकारी साझा की जा रही है। ललितपुर से डॉ. सुनील जैन &#8216;संचय&#8217; की यह खबर&#8230; ललितपुर। चैत्र कृष्ण नवमी को तीर्थंकर ऋषभदेव जन्मकल्याणक जैन समुदाय में हर्ष, उल्लास के साथ श्रद्धा पूर्वक मनाया जाता है। इस दिन प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ के जन्म कल्याणक पर जगह-जगह कार्यक्रम होंगे। इस अवसर पर विविध जानकारी साझा की जा रही है। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से डॉ. सुनील जैन &#8216;संचय&#8217; की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> चैत्र कृष्ण नवमी को तीर्थंकर ऋषभदेव जन्मकल्याणक जैन समुदाय में हर्ष, उल्लास के साथ श्रद्धा पूर्वक मनाया जाता है। इस दिन प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) का जन्म हुआ था। राजा नाभिराय और उनकी पत्नी रानी मरूदेवी से चैत्र कृष्ण नवमी के दिन मति, श्रुत और अवधिज्ञान के धारक पुत्र का जन्म अयोध्या में राजघराने में हुआ था। इंद्रों ने बालक का सुमेरू पर्वत पर अभिषेक महोत्सव करके ‘ऋषभ’ यह नाम रखा। जैन परंपरा में मान्य चौबीस तीर्थंकरों की श्रृंखला में भगवान ऋषभदेव का नाम प्रथम स्थान पर एवं अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी हैं। तीर्थंकर ऋषभदेव भारतीय संस्कृति के आद्य प्रणेता माने जाते हैं। वेदों, उपनिषदों और पुराणों में समागत उनके उल्लेख यह कहने के लिए पर्याप्त हैं कि वे ऐसे महापुरूष थे। जिन्होंने मानव समुदाय को कृषि, लेखन, व्यापार, शिल्प, युद्ध और विद्या की शिक्षा दी। किसी भी व्यक्ति और समुदाय के लिए इन प्रकल्पों की शिक्षा आगे बढ़ाने के लिए अनिवार्य होती हैं। विश्व के प्राचीनतम लिपिबद्ध धर्म ग्रंथों में से एक वेद में तथा श्रीमद्भागवत इत्यादि में आए भगवान ऋषभदेव के उल्लेख तथा विश्व की लगभग समस्त संस्कृतियों में ऋषभदेव की किसी न किसी रूप में उपस्थिति जैन धर्म की प्राचीनता और भगवान ऋषभदेव की सर्वमान्य स्थिति को व्यक्त करती है।</p>
<p><strong>भरत के नाम से इस देश का नामकरण</strong></p>
<p>नवीं शती के आचार्य जिनसेन के आदि पुराण में तीर्थकर ऋषभदेव के जीवन चरित्र का विस्तार से वर्णन है। भारतीय संस्कृति के इतिहास में ऋषभदेव ही एक ऐसे आराध्यदेव हैं, जिसे वैदिक संस्कृति तथा श्रमण संस्कृति में समान महत्व प्राप्त है। यह गौरव की बात है कि इन्हीं प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के ज्येष्ठ पुत्र भरत के नाम से इस देश का नामकरण ‘भारतवर्ष’ हुआ। कुछ विद्वान भी संभवतः इस तथ्य से अपरिचित होंगे कि आर्यखंड रूप इस भारतवर्ष का एक प्राचीन नाम नाभिखंड ‘अजनाभवर्ष’ भी इन्हीं ऋषभदेव के पिता ‘नाभिराय’ के नाम से प्रसिद्ध था।</p>
<p><strong>दुनिया को त्याग का मार्ग बताया</strong></p>
<p>जैन धर्म के प्रवर्तक प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव इस विश्व के लिए उज्जवल प्रकाश हैं। उन्होंने कर्मों पर विजय प्राप्त कर दुनिया को त्याग का मार्ग बताया। भगवान ऋषभदेव की शिक्षाएं मानवता के कल्याण के लिए हैं। उनके उपदेश आज भी समाज के विघटन, शोषण, साम्प्रदायिक विद्वेष एवं पर्यावरण प्रदूषण को रोकने में सक्षम एवं प्रासंगिक हैं। भारतीय संस्कृति के प्रणेता एवं जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव की जनकल्याणकारी शिक्षा द्वारा प्रतिपादित जीवन-शैली, आज के चुनौती भरे माहौल में उनके सामाजिक एवं राजनीतिक विचारों की प्रासंगिकता है।</p>
<p>सामाजिक संरचना में उन्होंने प्रजाजनों को श्रेणियों में विभाजित करते हुए उनको अपने-अपने कर्तव्य अधिकार तथा उपलब्धियों के बारे में प्रथम मार्गदर्शन किया। सर्वांगीण विकास के मूल आधारभूत तत्वों का विवेचन कर वास्तविक समाजवादी व्यवस्था का बोध कराया।</p>
<p><strong>बहत्तर कलाओं का ज्ञान प्रदर्शित किया</strong></p>
<p>प्रत्येक वर्ण व्यवस्था में पूर्ण सामंजस्य निर्मित करने हेतु तथा उनके निर्वाह के लिए आवश्यक मार्गदर्शक सिद्धांत, प्रतिपादन करते हुए स्वयं उसका प्रयोग या निर्माण करके प्रात्याक्षिक भी किया। अश्व परीक्षा, आयुध निर्माण, रत्न परीक्षा, पशु पालन आदि बहत्तर कलाओं का ज्ञान प्रदर्शित किया । उनके द्वारा प्रदत्त शिक्षाओं का वर्गीकरण कुछ इस प्रकार से किया जा सकता है- 1.असि-शस्त्र विद्या, 2. मसि-पशुपालन, 3. कृषि- खेती, वृक्ष, लता वेली, आयुर्वेद, 4.विद्या- पढना, लिखना, 5. वाणिज्य- व्यापार, वाणिज्य, 6.शिल्प- सभी प्रकार के कलाकारी कार्य।</p>
<p><strong>कर्मयोग की रसधारा बही</strong></p>
<p>जैन परंपरा के अनुसार तीर्थंकर ऋषभदेव ने कृषि का सूत्रपात किया। अनेकानेक शिल्पों की अवधारणा की। कृषि और उद्योग में अद्भुत सामंजस्य स्थापित किया कि धरती पर स्वर्ग उतर आया। कर्मयोग की वह रसधारा बही कि उजड़ते और वीरान होते जन जीवन में सब ओर नव बंसत खिल उठा। जनता ने अपना स्वामी उन्हेें माना और धीरे-धीरे बदलते हुए समय के अनुसार वर्ण व्यवस्था, दण्ड व्यवस्था, विवाह आदि सामाजिक व्यवस्था का निर्माण हुआ।</p>
<p><strong>अनेक गुणों के ज्ञान से अलंकृत किया</strong></p>
<p>ऋषभदेव ने महिला साक्षरता तथा स्त्री समानता पर भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। अपनी दोनों पुत्रियों को ब्राह्मी को अक्षर ज्ञान के साथ साथ व्याकरण, छंद, अलंकार, रूपक, उपमा आदि के साथ स्त्रियोचित अनेक गुणों के ज्ञान से अलंकृत किया।लिपि विद्या को ऋषभदेव ने विशेष रूप से ब्राह्मी को सिखाया। इसी के आधार पर उस लिपि का नाम ब्राह्मी लिपी पड़ गया। ब्राह्मी लिपी विश्व की आद्य लिपी है। दूसरी पुत्री सुंदरी को अंकगणतीय ज्ञान से पुरस्कृत किया।</p>
<p><strong>क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिलेगे</strong></p>
<p>आज भी उनके द्वार निर्मित व्याकरणशास्त्र तथा गणितिय सिद्धांतो ने महानतम ग्रंथों में स्थान प्राप्त किया है। आज जब भारत सरकार बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ का अभियान चला रही है, ऐसी में ऋषभदेव द्वारा अपनी पुत्रियों को दी गई शिक्षा और अधिक प्रासंगिक हो जाती है। उनके द्वारा दी गई बेटियों के शिक्षा संदेश को यदि अमल में लाया जाए तो इस अभियान में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिलेगे।</p>
<p>प्रशासनिक कार्य में इस भारत भूमि को उन्होंने राज्य, नगर, खेट, कर्वट, मटम्ब, द्रोण मुख तथा संवाहन में विभाजित कर सुयोग्य प्रशासनिक, न्यायिक अधिकारों से युक्त राजा, माण्डलिक, किलेदार, नगर प्रमुख आदि के सुर्पुद किया। आपने आदर्श दण्ड संहिता का भी प्रावधान कुशलता पूर्वक किया।</p>
<p><strong>निरासक्त व्यक्ति की यह आध्यात्मिक दृष्टि है</strong></p>
<p>तीर्थंकर ऋषभदेव अध्यात्म विद्या के भी जनक रहे हैं। उनके पुत्र भरत और बाहुबली का कथन इस तथ्य का प्रमाण है कि संसारी व्यक्ति कितना रागी-द्वेषी रहता है, जो अपने सहोदर के भी अधिकार को स्वीाकर नहीं कर पाता। दोनों भाईयों के बीच हुआ युद्ध हर परिवार के युद्ध का प्रतिबिम्ब है। बाहुबली का स्वाभिमान हर व्यक्ति के स्वाभिमान का दिग्दर्शक है। निरासक्त व्यक्ति की यह आध्यात्मिक दृष्टि है। तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की जीवन शैली, दर्शन एवं आर्दर्शों का प्रचार-प्रसार भारतीय युवा पीढ़ी के लिए और भी अधिक प्रासंगिक और महत्वपूर्ण है क्योंकि पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव से इनमें भौतिकवादी विचारों एवं आदर्शों को आगे ले जाने का मार्ग प्रशस्त हो रहा है जिसे पुरजोर प्रयास से साथ रोकना अनिवार्य है।</p>
<p><strong>सामाजिक जीवन की गुणवत्ता को बढ़ा सकते हैं</strong></p>
<p>पाश्चात्य सभ्यता का यह मार्ग निःसंदेह भारतीय संस्कृति और सभ्यता के मार्ग से काफी भिन्न है और संभवतः हमारे मानवीय मूल्यों के विपरीत भी है।</p>
<p>आज मानवता के सम्मुख भौतिकवादी चुनौतियों के कारण नाना प्रकार के सामाजिक एवं मानसिक तनाव तथा संकट व्यक्तिगत, सामाजिक एवं भू-मंडल स्तर पर दृष्टिगोचर हो रहे हैं। भगवान ऋषभदेव द्वारा बताई गई जीवन शैली की हमारी सामाजिक एवं राजनैतिक व्यवस्था में काफी प्रासंगिकता एवं महत्ता है। उनके द्वारा प्रतिपादित ज्ञान-विज्ञान की विभिन्न क्षेत्रों में ऐसी झलकियां मिलती हैं जिन्हें रेखांकित करके हम अपने सामाजिक एवं राजनैतिक जीवन की गुणवत्ता को बढ़ा सकते हैं।</p>
<p><strong>ऋषभदेव ने भारतीय संस्कृति के लिए अवदान दिया</strong></p>
<p>भगवान ऋषभदेव ने एक ऐसी समाज व्यवस्था दी, जो अपने आप में परिपूर्ण तो थी ही साथ ही जिसकी पृष्ठ भूमि में अध्यात्म पर आधारित नैतिकता की नींव भी थी। तीर्थंकर ऋषभदेव ने भारतीय संस्कृति के लिए जो अवदान दिया वह इतना महत्त्वपूर्ण है कि उसे जैन ही नहीं जैनेतर भारतीय परंपरा में आज भी कृतज्ञता पूर्वक स्मरण करती है और युगों तक करती रहेगी। तीर्थंकर ऋषभदेव द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत तथा शिक्षाएं आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक और उपयोगी हैं तथा भविष्य के विश्व संस्कृति के लिए आधार हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/rishabhdev_the_original_preacher_of_karma_and_spirituality/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जन्मदिन पर रेखा जैन और कमलेश जैन का किया सम्मानः हाइलिंक दिगंबर जैन समाज ने किया आयोजन </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/rekha_jain_and_kamlesh_jain_honored_on_their_birthday/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/rekha_jain_and_kamlesh_jain_honored_on_their_birthday/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Feb 2025 12:45:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Birthday]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Direction]]></category>
		<category><![CDATA[Editing]]></category>
		<category><![CDATA[Highlink Samaj Chhota Bangarda]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Kamlesh Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Pujya Varshayog Samiti]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News Editor Rekha Sanjay Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Writing]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[कमलेश जैन]]></category>
		<category><![CDATA[जन्मदिन]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[निर्देशन]]></category>
		<category><![CDATA[पूज्य वर्षायोग समिति]]></category>
		<category><![CDATA[लेखन]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज संपादक रेखा संजय जैन]]></category>
		<category><![CDATA[संपादन]]></category>
		<category><![CDATA[हाइलिंक समाज छोटा बांगड़दा]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=75286</guid>

					<description><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज की संपादक रेखा संजय जैन और पूज्य वर्षायोग समिति के कमलेश जैन का सोमवार को जन्मदिन हाइलिंक दिगंबर जैन समाज छोटा बांगडदा में मनाया गया। इस अवसर पर इनका हाइलिंक समाज छोटा बांगड़दा की ओर से सम्मान किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में दिगंबर जैन समाज के श्रेष्ठीजन मौजूद रहे। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रीफल जैन न्यूज की संपादक रेखा संजय जैन और पूज्य वर्षायोग समिति के कमलेश जैन का सोमवार को जन्मदिन हाइलिंक दिगंबर जैन समाज छोटा बांगडदा में मनाया गया। इस अवसर पर इनका हाइलिंक समाज छोटा बांगड़दा की ओर से सम्मान किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में दिगंबर जैन समाज के श्रेष्ठीजन मौजूद रहे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> श्रीफल जैन न्यूज की संपादक ,पूज्य वर्षायोग समिति की महामंत्री रेखा संजय जैन और पूज्य वर्षायोग समिति के कोषाध्यक्ष कमलेश जैन का सोमवार को जन्मदिन हाइलिंक दिगंबर जैन समाज छोटा बांगडदा में मनाया गया। इस अवसर पर इनका हाइलिंक समाज छोटा बांगड़दा की ओर से सम्मान किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में दिगंबर जैन समाज के श्रेष्ठीजन मौजूद रहे। हाइलिंक सिटी छोटा बांगदा में हुए इस कार्यक्रम में श्रीफल जैन न्यूज की संपादक और पूज्य वर्षायोग की महामंत्री रेखा संजय जैन और पूज्य वर्षायोग समिति के कोषाध्यक्ष कमलेश जैन का जन्मदिन समाज की और सम्मानित किया गया ।</p>
<p>समाजजनों ने दोनों को पुष्प गुच्छ ,पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। उनके द्वारा किए जा रहे समाजसेवा, धर्म प्रभावना के कार्यों की सराहना की गई। गौरतलब है कि रेखा संजय जैन श्रीफल जैन न्यूज मीडिया हाउस में संपादक के पद पर रहते हुए जैन समाज की खबरों, जैन धर्म के प्राचीन और अतिशयकारी मंदिरों के अलावा समाज से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को अपने लेखन, संपादन और निर्देशन में समाज तक पहुंचा रही हैं। इसी तरह पूज्य वर्षायोग समिति के कमलेश जैन भी दिगंबर जैन समाज के धार्मिक कार्यक्रमों में अपनी महती भूमिका अदा करते आ रहे हैं। कार्यक्रम के बाद हाईलिंक छोटा बांगड़दा जैन समाज की ओर से यहां आहार के पुण्यार्जक गिरीश, विकास रारा परिवार रहे। उपस्थित सभी समाजजनोें को नाश्ता करवाया गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-75288" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250224-WA0042.jpg" alt="" width="1280" height="960" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250224-WA0042.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250224-WA0042-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250224-WA0042-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250224-WA0042-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250224-WA0042-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250224-WA0042-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250224-WA0042-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250224-WA0042-990x743.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />इस अवसर पर यहां नवग्रह अध्यक्ष नरेंद्र वेद,अध्यक्ष महेंद्र पहाड़िया, कार्याध्यक्ष संजय बडजात्या, सचिव स्मिता लखावत, रविकांत सेठिया, सुनील अजमेरा, दिलीप जैन, पंकज जैन, दीपक लुहाड़िया, संदीप जैन, ललित जैन,दीपेश जैन, देवेन्द्र लखावत,गिरीश रारा,चंद्रसेन जैन,परविंदर लखावत उपस्थित रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/rekha_jain_and_kamlesh_jain_honored_on_their_birthday/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
