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	<title>लुधियाना &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>लुधियाना में मनाया आचार्य पद चादर समारोह दिवस : आचार्य शिवमुनि जी के नेतृत्व में श्रमण संघ धर्म प्रभावना में अग्रसर-दिनेश मुनि </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 May 2026 13:08:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रमण संघ के चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के 26 वें आचार्य पद चादर समारोह दिवस पर हुई धर्मसभा में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का वातावरण देखने को मिला। लुधियाना शहर के न्यू किचलूनगर स्थित जैन स्थानक में हुए समारोह में संतों एवं श्रद्धालुओं ने आचार्य भगवंत के आध्यात्मिक नेतृत्व [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्रमण संघ के चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के 26 वें आचार्य पद चादर समारोह दिवस पर हुई धर्मसभा में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का वातावरण देखने को मिला। लुधियाना शहर के न्यू किचलूनगर स्थित जैन स्थानक में हुए समारोह में संतों एवं श्रद्धालुओं ने आचार्य भगवंत के आध्यात्मिक नेतृत्व और समाजोत्थान में उनके योगदान का स्मरण किया। <span style="color: #ff0000">लुधियाना से पढ़िए, यह खबर&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>लुधियाना।</strong> श्रमण संघ के चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के 26 वें आचार्य पद चादर समारोह दिवस पर हुई धर्मसभा में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का वातावरण देखने को मिला। लुधियाना शहर के न्यू किचलूनगर स्थित जैन स्थानक में हुए समारोह में संतों एवं श्रद्धालुओं ने आचार्य भगवंत के आध्यात्मिक नेतृत्व और समाजोत्थान में उनके योगदान का स्मरण किया। इस अवसर पर श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि ने कहा कि आचार्य संघ का नायक और अनुशासन का केंद्र होता है। साधु-साध्वी आचार्य की आज्ञा में विचरण करते हुए धर्म प्रभावना, साधना और लोक कल्याण के कार्य करते हैं। आचार्य की मर्यादा एवं निर्देश ही संघ को एक सूत्र में बांधकर आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि आचार्य देवेंद्र मुनि जी के स्वर्गवास के बाद श्रमण संघ के चतुर्थ पद पर आचार्य शिवमुनि जी महाराज विराजमान हुए। उनके नेतृत्व में संघ ने आध्यात्मिक साधना, अनुशासन और धर्म प्रचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया। सलाहकार दिनेश मुनि ने कहा कि आचार्य शिवमुनि जी महाराज का जन्म पंजाब में हुआ और उन्होंने ध्यान साधना को पुनर्जीवित कर समाज को नई दिशा प्रदान की। आज उनकी प्रेरणा से लाखों लोग ध्यान साधना के माध्यम से मानसिक शांति और आत्मिक ऊर्जा प्राप्त कर रहे हैं।</p>
<p><strong>समाज में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला </strong><br />
मुनिश्री ने कहा कि वर्तमान में आचार्य श्री की आज्ञा में लगभग 1300 साधु-साध्वी कश्मीर से कन्याकुमारी तथा अटक से कटक तक पद विहार करते हुए भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांतों और श्रमण संघ के नियमों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। संत समाज गांव-गांव और शहर-शहर पहुंचकर लोगों को व्यसनमुक्ति, शाकाहार, सात्विक जीवन शैली, नैतिकता और सदाचारयुक्त जीवन जीने का संदेश दे रहा है। वर्तमान समय में मनुष्य मानसिक तनाव, अशांति और भौतिकता के दबाव से घिरा हुआ है। ऐसे दौर में आचार्य शिवमुनि जी द्वारा प्रेरित ध्यान साधना लाखों लोगों के लिए आत्मिक शांति और मानसिक संतुलन का माध्यम बनी है। उनके मार्गदर्शन में संचालित ध्यान शिविरों एवं आध्यात्मिक अभियानों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है।नवकार मंत्र के तीसरे पद पर आचार्य को नमस्कार किया जाता है</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि आचार्य का जीवन केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह संपूर्ण मानवता के कल्याण का पथ प्रदर्शित करता है। आचार्य भगवंत अपने संयम, ज्ञान, तप और त्याग से समाज को नैतिकता, अहिंसा और आत्मअनुशासन की प्रेरणा देते हैं। संघ के साधु-साध्वी उनके निर्देशों का पालन करते हुए धर्म प्रभावना और लोककल्याण के कार्यों में निरंतर संलग्न रहते हैं। वक्ताओं ने कहा कि आज जब समाज भौतिकता और तनाव से प्रभावित है, ऐसे समय में श्रमण संघ द्वारा दिया जा रहा संयम, अहिंसा और आत्मशुद्धि का संदेश मानवता के लिए अत्यंत आवश्यक है। आचार्य शिवमुनि जी के मार्गदर्शन में संघ केवल धार्मिक चेतना ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागृति और नैतिक मूल्यों के संरक्षण का भी कार्य कर रहा है। नवकार मंत्र के मंत्रोच्चार से शुभारंभ समारोह में डॉ दीपेंद्र मुनि ने का कि नवकार मंत्र के तीसरे पद पर आचार्य को नमस्कार किया जाता है क्यूँकि आचार्य संघ के संचालन करने वाले होते हैं। समारोह में न्यू किचलूनगर संघ अध्यक्ष दिनेश जैन, मंत्री राजेन्द्र जैन, विजय जैन (जैन पैकवेल) लालचंद जैन, महावीर युवक मंडल के अध्यक्ष वरूण जैन (दीपसंस) सहित शहर के गणमान्य श्रद्धालुओं ने मंगलकामना व्यक्त करते हुए कहा कि आचार्य भगवंत का दिव्य मार्गदर्शन, तप और ज्ञान सदैव मानवता का पथ आलोकित करता रहे तथा उनके सान्निध्य से समाज में धर्म और संस्कारों की ज्योति निरंतर प्रज्वलित होती रहे।</p>
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		<title>दिल्ली से नेपाल काठमांडू तक 1045 किमी की यात्रा कीः मेघा जैन, समाज की पहली साइक्लिस्ट बन गयी हैं </title>
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		<pubDate>Tue, 08 Apr 2025 16:09:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[साइकिल चलाना हर किसी को पसंद होता है लेकिन साइकिल चलाने का यही शौक अगर दो देशों के बीच सद्भाव बढा़ने का कार्य करे तो यही शौक आम लोगों के लिए प्रेरणा बन जाता है। मेघा जैन ने इसी साइकिल राइडिंग को जुनून बनाकर दिल्ली से नेपाल काठमांडू तक 1045 किमी की यात्रा की है। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>साइकिल चलाना हर किसी को पसंद होता है लेकिन साइकिल चलाने का यही शौक अगर दो देशों के बीच सद्भाव बढा़ने का कार्य करे तो यही शौक आम लोगों के लिए प्रेरणा बन जाता है। मेघा जैन ने इसी साइकिल राइडिंग को जुनून बनाकर दिल्ली से नेपाल काठमांडू तक 1045 किमी की यात्रा की है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए स्वाती जैन से हैदराबाद की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>हैदराबाद।</strong> लुधियाना की मेघा जैन ने इसी साइकिल राइडिंग को जुनून बनाकर हाल ही में 22 फरवरी को अपने कुछ साथियों के साथ दिल्ली से नेपाल काठमांडू तक 1045 किमी की यात्रा कर एक अनोखी मिसाल पेश की है और यह कीर्तिमान बना कर वह जैन समाज की पहली साइक्लिस्ट बन गयी हैं। इसके माध्यम से मेघा पर्यावरण संरक्षण, कैंसर के प्रति जागरूकता और फिट रहने का संदेश देती हैं। ऐसा एक बार नहीं बल्कि दो दो बार मेघा अपने हौसलों को पंख देकर इस चुनौती को पूरा कर चुकी हैं। मेघा इससे पहले भी 2022 में नेपाल की सरजमीं पर साइकिल से पहुंचकर कदम रख चुकी हैं जब नेपाल सांसदों द्वारा इनका स्वागत और सम्मान किया गया।</p>
<p><strong>यह यात्रा मेघा के लिए मकसद बन चुकी </strong></p>
<p>खुद को फिट रखने के लिए शुरू हुई यह यात्रा आज मेघा के लिए मकसद बन चुकी है और इसी मकसद को पूरा करने के लिये वह 9 बार लुधियाना सुपर रेंडुनर का खिताब हासिल कर चुकी हैं। उपलब्धियां सिर्फ इतनी भर ही नहीं हैं। मेघा 2020 में इंडिया गेट से मुंबई गेटवे ऑफ इंडिया तक 1450 किमी की दूरी भी साइकिल से तय कर चुकी हैं। वहीं 2023 में ये पहले भी दिल्ली से काठमांडू साइकिल से जा चुकी हैं। इसके अलावा मेघा 2024 में अमृतसर गोल्डन टेंपल से 1130 किमी की दूरी तक अयोध्या की यात्रा कर सामाजिक समरसता का संदेश दे चुकी हैं।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-78610" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250408-WA0032.jpg" alt="" width="900" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250408-WA0032.jpg 900w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250408-WA0032-169x300.jpg 169w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250408-WA0032-576x1024.jpg 576w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250408-WA0032-768x1365.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250408-WA0032-864x1536.jpg 864w" sizes="(max-width: 900px) 100vw, 900px" />डिप्रेशन से निकालने के लिए हमसफर बनाया</strong></p>
<p>दो बार 42 किमी की मड रेस और लुधियाना रेस पूरा करने के अलावा मेघा साइक्थलॉन में 300 किमी का सफर तय करके कश्मीर जा चुकी हैं। मेघा की यह यात्रा सिर्फ दस साल पहले शुरू हुई जब उन्होंने खुद को डिप्रेशन से निकालने के लिए साइकिल को अपना हमसफर बनाया था। लेकिन आज मेघा बिना चुनौतियों से घबराये अब तक साइक्लिंग में अनेकों उपलब्धियां अर्जित कर चुकी हैं। परिवार के सहयोग से मेघा आगे भी अपने इस सफर को नयी ऊंचाइयां देना चाहती हैं।</p>
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		<title>तीर्थंकर आदिनाथ का जन्म व दीक्षा कल्याणक मनाया गयाः तप अभिनंदन अनुमोदना समारोह संपन्न हुआ </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/birth_and_initiation_kalyanak_of_tirthankar_adinath_was_celebrated/</link>
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		<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 09:08:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर आदिनाथ के जन्म व दीक्षा कल्याणक महोत्सव पर आयोजित धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए सलाहकार दिनेश मुनि ने कहा कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने न केवल आध्यात्मिक मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि मानव सभ्यता को एक सुसंस्कृत और संगठित रूप देने में भी अतुलनीय योगदान दिया। पढ़िए लुधियाना की यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर आदिनाथ के जन्म व दीक्षा कल्याणक महोत्सव पर आयोजित धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए सलाहकार दिनेश मुनि ने कहा कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने न केवल आध्यात्मिक मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि मानव सभ्यता को एक सुसंस्कृत और संगठित रूप देने में भी अतुलनीय योगदान दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए लुधियाना की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>लुधियाना</strong>। सिविल लाइंस स्थित एस एस जैन सभा, जैन स्थानक में प्रथमेश आदिसृष्टि तीर्थंकर आदिनाथ के जन्म व दीक्षा कल्याणक महोत्सव पर आयोजित धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए सलाहकार श्री दिनेश मुनि ने कहा कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ, जिन्हें ऋषभनाथ, ऋषभदेव या आदिनाथ के नाम से जाना जाता है, उन्होंने न केवल आध्यात्मिक मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि मानव सभ्यता को एक सुसंस्कृत और संगठित रूप देने में भी अतुलनीय योगदान दिया।</p>
<p><strong>कर्म, कर्तव्य और कला के संस्थापक </strong></p>
<p>संसार में कर्म, कर्तव्य और कला का संस्थापक माना जाता है। क्योंकि उन्होंने मानव जीवन को जीने की कला, सामाजिक व्यवस्था की नींव, और विभिन्न व्यावहारिक कौशलों का ज्ञान प्रदान किया। ग्रंथों में भगवान आदिनाथ को एक ऐसे युग-प्रवर्तक के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने उस समय के असंगठित और अज्ञानी समाज को सभ्यता की ओर अग्रसर किया। सलाहकार दिनेश मुनि ने आगे कहा कि समाज में स्त्री शिक्षा के महत्व को स्थापित करने के लिए तीर्थंकर आदिनाथ ने अपनी पुत्री ब्राह्मी को लिपि लिखने का एवं सुन्दरी को इकाई, दहाई आदि अंक विद्या भी सिखाई।</p>
<p><strong>वर्ण व्यवस्था का उपदेश भी दिया</strong></p>
<p>समारोह में डॉ दीपेन्द्र मुनि (दसवां वर्षीतप-उपवास) व डॉ पुष्पेंद्र मुनि के (दसवां वर्षीतप-एकासन) को बधाई दी गई व मंगल गीतों से श्रोताओं ने दोनों तपस्वी संतों के नाम जयघोष से वातावरण गुंजायमान किया। नवकार महामंत्र व ऊं श्री आदिनाथायः नमः के मंत्रोच्चार से प्रारंभ हुए समारोह में डॉ दीपेन्द्र मुनि ने कहा कि तीर्थंकर आदिनाथ ने सामाजिक व्यवस्था के संचालन के लिए नगर, गांव, मकान आदि बनाने और उन्हें बसाने का उपदेश दिया था। इसी के साथ उन्होंने वर्ण व्यवस्था का उपदेश भी दिया। उन्होंने वर्ण व्यवस्था की स्थापना प्रजा के कार्य के अनुसार की थी।</p>
<p><strong>“यादों में है आदिनाथ” भजन की शानदार प्रस्तुति </strong></p>
<p>श्रमण डॉ पुष्पेंद्र ने इस अवसर पर कहा कि भगवान आदिनाथ ने जीवन में पुरुषार्थ करने और विभिन्न विद्याओं व कलाओं के माध्यम से जीवन को व्यवस्थित ढंग से जीने का उपदेश दिया। वास्तव में भगवान आदिनाथ ने ही जीविकोपार्जन के सिद्धांतो से जनता को अवगत करवाया था। बहिन अंजली मुकेश जैन ने “यादों में है आदिनाथ” भजन प्रस्तुत किया। समारोह में विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।</p>
<p><strong>समाजजनों व धर्म प्रेमियों की उपस्थिति दर्शनीय रहीं </strong></p>
<p>कार्यक्रम में लड्डू की प्रभावना नीरू विजय जैन (जैन पैकवेल) परिवार द्वारा दी गई व सभा द्वारा श्रद्धालुओं की गौतम प्रसादी रखी गयी। समारोह का संचालन सभा के मंत्री प्रमोद जैन ने किया। समारोह में मानव रत्न रामकुमार जैन, जैन कान्फ्रेंस पंजाब शाखा के अध्यक्ष अनिल जैन, आत्म गद्दी के महामंत्री दीपांशु जैन, मेरठ से हिम्मत बागरेचा, अंबाला से अशोक बंसल, मलेरकोटला से दर्शन कुमार जैन, अभिषेक जैन, सुंदर नगर सभा से अभय जैन, महिला मंडल से अनीता जैन, इसके अलावा आत्म नगर, शिवपुरी, अग्र नगर, इत्यादि सभाओं से धर्म प्रेमियों की उपस्थिति रही ।</p>
<p><strong>यह होता है वर्षी तप</strong></p>
<p>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने एक साल तक घोर तपस्या की। इस दौरान उन्होंने अन्न व जल का पूर्णतरू त्याग कर दिया। एक वर्ष के पश्चात भगवान ने गन्ने के रस से ऋषभदेव का व्रत खुलवाया। ढाई हजार साल पुरानी इसी मान्यता के आधार पर आज भी जैन भक्त एक दिन उपवास व एक दिन भोजन का विधान रखते हुए 365 दिन का अनुष्ठान करते हैं। इसमें सूर्यास्त के बाद भोजन व पानी ग्रहण करना वर्जित है।</p>
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