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	<title>लाडनूं &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>लाडनूं &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>प्रो जिनेंद्र जैन आचार्य आदिसागर अंकलीकर विद्वत् पुरस्कार से सम्मानित : समाज जनों में अपार हर्ष, दी बधाइयां </title>
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		<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 06:15:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पट्टाचार्य सुनील सागर महा मुनिराज के सान्निध्य में महावीर जयंती के पवन अवसर पर प्राकृत एवं संस्कृत विभाग, जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय, लाडनूं के प्रो जिनेन्द्र जैन (उदयपुर) को जैनविद्या, प्राकृत भाषा के विकास, पांडुलिपि संरक्षण एवं उत्कृष्ट लेखन कार्य साहित्य संपादन के लिए उन्हें आदिसागर अंकलीकर विद्वत् सम्मान-2025 से सम्मानित सम्मानित किया गया। लाडनूं से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पट्टाचार्य सुनील सागर महा मुनिराज के सान्निध्य में महावीर जयंती के पवन अवसर पर प्राकृत एवं संस्कृत विभाग, जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय, लाडनूं के प्रो जिनेन्द्र जैन (उदयपुर) को जैनविद्या, प्राकृत भाषा के विकास, पांडुलिपि संरक्षण एवं उत्कृष्ट लेखन कार्य साहित्य संपादन के लिए उन्हें आदिसागर अंकलीकर विद्वत् सम्मान-2025 से सम्मानित सम्मानित किया गया। <span style="color: #ff0000">लाडनूं से पढ़िए, यह शरद जैन सुधांशु की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>लाडनूं।</strong> आचार्य श्री आदिसागर अंकलीकर परम्परा के चतुर्थ पट्टाचार्य सुनील सागर महा मुनिराज के सान्निध्य में महावीर जयंती के पवन अवसर पर प्राकृत एवं संस्कृत विभाग, जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय, लाडनूं के प्रो जिनेन्द्र जैन (उदयपुर) को जैनविद्या, प्राकृत भाषा के विकास, पांडुलिपि संरक्षण एवं उत्कृष्ट लेखन कार्य साहित्य संपादन के लिए उन्हें आदिसागर अंकलीकर विद्वत् सम्मान-2025 से सम्मानित सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार आदिसागर अंकलीकर जागृति मंच, मुम्बई द्वारा आचार्य श्री सुनीलसागर महाराज के सानिध्य में बड़ोदरा (गुजरात) में आयोजित तीर्थंकर श्री अजितनाथ के पंचकल्याणक महोत्सव के अवसर पर प्रदान किया गया। आपको पुरस्कार स्वरूप श्रीफल, शाल, प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र और 51 हजार नकद राशि प्रदान की गई। इस अवसर पर सैकड़ो लोगों ने व्यक्तिश:, दूरभाष एवं सोशल मीडिया के माध्यम से बधाई संदेश भेजकर शुभकामनाएं दी।</p>
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		<title>सुजलांचल के कवियों ने किया काव्य पाठ : डॉ. लिपि जैन को मिला क्षुल्लक जिनेंद्र वर्णी अहिंसा एवं जन चेतना राष्ट्रीय पुरस्कार  </title>
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		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 12:04:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ प्राच्यविद्या एवं जैन संस्कृति संरक्षण संस्थान, जयपुर की आयोजना में सुजलांचल क्षेत्र के कवियों की काव्य-गोष्ठी का आयोजन नगर के दाधीच भवन में आयोजित हुआ। जिसकी अध्यक्षता प्राच्यभाषा मनीषी प्रो. जिनेंद्र कुमार जैन, मुख्य अतिथि वरिष्ठ गज़लकार राजेश विद्रोही, वरिष्ठ शिक्षाविद रामकुमार तिवारी, गौरी शंकर &#8216;भावुक&#8217; थे। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; लाडनूं । प्राच्यविद्या एवं [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> प्राच्यविद्या एवं जैन संस्कृति संरक्षण संस्थान, जयपुर की आयोजना में सुजलांचल क्षेत्र के कवियों की काव्य-गोष्ठी का आयोजन नगर के दाधीच भवन में आयोजित हुआ। जिसकी अध्यक्षता प्राच्यभाषा मनीषी प्रो. जिनेंद्र कुमार जैन, मुख्य अतिथि वरिष्ठ गज़लकार राजेश विद्रोही, वरिष्ठ शिक्षाविद रामकुमार तिवारी, गौरी शंकर &#8216;भावुक&#8217; थे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>लाडनूं ।</strong> प्राच्यविद्या एवं जैन संस्कृति संरक्षण संस्थान, जयपुर की आयोजना में सुजलांचल क्षेत्र के कवियों की काव्य-गोष्ठी का आयोजन नगर के दाधीच भवन में आयोजित हुआ। जिसकी अध्यक्षता प्राच्यभाषा मनीषी प्रो. जिनेंद्र कुमार जैन, मुख्य अतिथि वरिष्ठ गज़लकार राजेश विद्रोही, वरिष्ठ शिक्षाविद रामकुमार तिवारी, गौरी शंकर &#8216;भावुक&#8217; थे। विशिष्ट अतिथि प्रेमलता बेगवानी, हर्षलता दुधोड़िया थी। इस काव्य संध्या में मदनलाल गुर्जर सरल, वी जी शर्मा सुजानगढ़, पंकज सबलानिया &#8216;सफर&#8217;, निशा इणानिया, रामबाबू शर्मा आदि कवियों ने विविध विषयों पर कविताएं प्रस्तुत की। राजेश विद्रोही ने अपनी कविता &#8216;बाबुल की बेस कीमती थाथी हैं बेटियां, बेटे अगर चिराग हैं बाती है बेटियां&#8217; प्रस्तुत की।</p>
<p>इस अवसर पर संस्थान द्वारा आगंतुक सभी अतिथियों नगर के प्रबुद्ध लोगों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर अहिंसा एवं जैन जीवनशैली, पर्यावरण, जन-चेतना, गांधी दर्शन आदि विषयों पर उल्लेखनीय लेखन कार्य के लिए अहिंसा एवं शांति विभाग, जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय, लाडनूं की सहायक आचार्य डॉ लिपि जैन को आपकी पुस्तक &#8220;विकास &#8211; गांधी एवं आचार्य महाप्रज्ञ की दृष्टि में&#8221; को क्षुल्लक जिनेंद्र वर्णी : अहिंसा एवं जन चेतना राष्ट्रीय पुरस्कार 2023 से पुरस्कृत किया गया । कार्यक्रम संयोजिका डॉ मनीषा जैन ने डॉ लिपि जैन परिचय देते हुए बताया कि 6 से अधिक पुस्तकें, 30 शोधालेख का प्रकाशन एवं आठ पेटेंट केंद्रीय सरकार द्वारा पंजीकृत हैं। संस्थान ने आपकी लेखन कार्य कुशलता को दृष्टि में रखते हुए इस राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। पुरस्कार संस्था के अध्यक्ष प्रो जिनेंद्र कुमार जैन व कार्यक्रम अतिथि राजेश विद्रोही, रामकुमार तिवारी, गौरी शंकर भावुक, प्रेमलता बेगवानी द्वारा प्रदान किया गया।</p>
<p>प्रोफेसर जिनेंद्र जैन ने बताया कि पुरस्कार स्वरूप आपको प्रशस्ति-पत्र स्मृति चिन्ह, अंग वस्त्र, शास्त्र व पुरस्कार राशि ₹11000 नगद प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा प्रत्येक वर्ष तीन राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। जिसमें से एक यह पुरस्कार डॉक्टर लिपि जैन के उत्कृष्ट लेखन के लिए दिया जा रहा है। काव्य-गोष्ठी में सुजलांचल क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित थे। जिसमें हनुमानमल जांगीड़, मंत्री सुशील पीपलवा, प्रवीण जोशी, डॉ रविंद्र सिंह राठौड़, डॉ बलवीर सिंह चारण, पंकज भटनागर, सागरमल शर्मा, मदनलाल दाधीच, सुमित जांगिड़, सुमन चौधरी, छवि भटनागर, रामसिंह रेगर, अनुज तिवारी, विनोद पारीक, माया शेखावत आदि मौजूद थे। अंत में युवा साहित्यकार दीक्षांत हिंदुस्तानी ने सभी आगंतुक अतिथियों का आभार प्रकट किया। मंगलाचरण एवं स्वागत गीत पार्षद रेणु कोचर ने किया।</p>
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		<title>श्री दिगंबर महिला महासमिति उज्जैन संभाग की तीर्थवंदन यात्रा पूर्ण: संस्था सदस्याओं का जगह-जगह हुआ सम्मान  </title>
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		<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 08:16:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगंबर महिला महासमिति उज्जैन संभाग अध्यक्ष साधना बोहरा के नेतृत्व में शानदार तीर्थ वंदन यात्रा उज्जैन से निकाली गई। संस्था सदस्याओं का जगह-जगह समाजजनों ने सम्मान किया। उज्जैन से पढ़िए, यह खबर&#8230; उज्जैन। श्री दिगंबर महिला महासमिति उज्जैन संभाग अध्यक्ष साधना बोहरा के नेतृत्व में शानदार तीर्थ वंदन यात्रा उज्जैन से निकाली गई। जिसमें [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगंबर महिला महासमिति उज्जैन संभाग अध्यक्ष साधना बोहरा के नेतृत्व में शानदार तीर्थ वंदन यात्रा उज्जैन से निकाली गई। संस्था सदस्याओं का जगह-जगह समाजजनों ने सम्मान किया। <span style="color: #ff0000">उज्जैन से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>उज्जैन।</strong> श्री दिगंबर महिला महासमिति उज्जैन संभाग अध्यक्ष साधना बोहरा के नेतृत्व में शानदार तीर्थ वंदन यात्रा उज्जैन से निकाली गई। जिसमें उज्जैन की महिलाओं ने भाग लिया। यात्रा इस प्रकार से की गई, जिसमें अजमेर, नारेली, किशनगढ़, डंपिंग यार्ड, मोजमाबाद ,लूणवा, लाडनूं, सुजानगढ़, रेवासा, रानोली, सीकर, पुष्कर इत्यादि तीर्थ की वंदना करवाते हुए जत्था वापस उज्जैन की तरफ आया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-94309" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251113-WA0005.jpg" alt="" width="480" height="1040" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251113-WA0005.jpg 480w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251113-WA0005-138x300.jpg 138w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251113-WA0005-473x1024.jpg 473w" sizes="(max-width: 480px) 100vw, 480px" /> यात्रा एकदम शुद्ध परिणाम से निर्विघ्न संपन्न हुई। जगह-जगह पर ग्रुप का सम्मान हुआ। किशन किशनगढ़ में अध्यक्ष मोना द्वारा पूरी टीम का सम्मान किया गया। सीकर में रजनी गंगवाल के भाई-भाभी ने ग्रुप का सम्मान किया। पुष्कर में सुरेश छाबड़ा की बहन ने ग्रुप का सम्मान किया। उज्जैन संभाग अध्यक्ष साधना बोहरा ने कहा कि हम सब के आभारी हैं। आपने हमें इतना सम्मान दिया।</p>
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		<title>ज्ञान परंपरा मानव जाति को बचाने का माध्यम : 10 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न </title>
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		<pubDate>Sat, 01 Mar 2025 03:34:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य सिद्धसेन दिवाकर कृत सन्मति तर्क प्रकरण विषय पर 10 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन समारोह हुआ। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा पर चर्चा हुई। कई विद्वानों ने इसमें भाग लिया। लाडनूं से पढ़िए यह खबर&#8230; लाडनूं। आचार्य सिद्धसेन दिवाकर कृत सन्मति तर्क प्रकरण विषय पर 10 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन समारोह समणी नियोजिका मधुरप्रज्ञा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य सिद्धसेन दिवाकर कृत सन्मति तर्क प्रकरण विषय पर 10 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन समारोह हुआ। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा पर चर्चा हुई। कई विद्वानों ने इसमें भाग लिया। <span style="color: #ff0000">लाडनूं से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>लाडनूं।</strong> आचार्य सिद्धसेन दिवाकर कृत सन्मति तर्क प्रकरण विषय पर 10 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन समारोह समणी नियोजिका मधुरप्रज्ञा जी के सानिध्य में जैन विश्व भारती संस्थान के आचार्य महा श्रमण आडिटोरियम में हुआ। संस्थान के जैन विद्या एवं तुलनात्मक धर्म-दर्शन विभाग के तत्वावधान एवं भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के प्रायोजकत्व में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दुगड़ ने कहा कि सन्मति तर्क प्रकरण के माध्यम से अनेकांत और स्याद्वाद का तार्किक विश्लेषण समझा जा सकता है। उन्होने कहा कि इन 10 दिनों में जैन न्याय और ज्ञान मीमांसा को समझने का जो प्रयास हुआ है, इससे ज्ञान की वृद्वि हुई है। उन्होंने कहा कि सत्य सापेक्ष होता है। सत्य को जानने का लक्ष्य ही व्यक्ति को ज्ञान तक ले जाता है।</p>
<p><strong>प्राकृत ग्रंथों को समझें, भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाएं</strong></p>
<p>कुलपति प्रो. दुगड़ ने ज्ञान परंपरा के विभिन्न विद्वानों की चर्चा करते हुए कि आप, मैं और हम सबके विचार जानने के बाद भी जो शेष रह जाता है, उसे मिलाने के बाद ही सत्य पूर्ण हो सकता है। समारोह के मुख्य अतिथि महर्षि वाल्मिकी विश्वविद्यालय हरियाणा के कुलपति प्रो. रमेशचंद भारद्वाज ने कहा कि सन्मति तर्क प्रकरण के विश्लेषण के माध्यम से आपका ज्ञानार्जन हुआ है। जरूरत है कि इस ज्ञान को माध्यम बनाकर प्राकृत ग्रंथों को समझकर भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढाने के लिए प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल ज्ञान नहीं है बल्कि मानव जाति को बचाने और भविष्य के निर्माण का माध्यम है। प्रो भारद्वाज ने कहा कि मौलिक ग्रंथों को समझने के लिए तीन सूत्रों यथा काल को दृष्टिगत, वर्तमान संदर्भ एवं प्रांसगिकता और ज्ञान को प्रसारित करने का भाव का औचित्य होना चाहिए। इसके साथ ही आने वाली समस्या को समझने से ही ज्ञान की आराधना संभव है।</p>
<p><strong>भगवान महावीर का एक नाम भी सन्मति था</strong></p>
<p>सानिध्य प्रदान करते हुए समणी नियोजिका समणी मधुरप्रज्ञाजी ने कहा कि गंभीर अनुशीलन, सैद्धांतिक व्याख्या से ओतप्रोत समन्मति तर्क ग्रंथ वर्तमान में भी प्रासंगिक हैं। 5वीं सदी का यह ग्रंथ आज भी सही दृष्टि प्रदान कर रहा है। उन्होंने ज्ञान परंपरा के आचार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान महावीर का एक नाम भी सन्मति था। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि जैन विश्वभारती के पूर्व अध्यक्ष धर्मचन्द लूंकड थे।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-75584" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250301-WA0000.jpg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250301-WA0000.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250301-WA0000-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250301-WA0000-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250301-WA0000-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250301-WA0000-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250301-WA0000-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250301-WA0000-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250301-WA0000-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250301-WA0000-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250301-WA0000-990x660.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />कार्यशाला की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की</strong></p>
<p>कार्यशाला के समन्वयक प्रो.आनंदप्रकाश त्रिपाठी ने दस दिवसीय कार्यशाला की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने हुए सभी समागतों का आभार भी व्यक्त किया। विभाग की प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा ने स्वागत वक्तव्य दिया। इस अवसर पर संभागी डाॅ.विजय जैन, संतोष जैन, जिनेंद्र जैन ने अपने अनुभव प्रस्तुत किए। मुमुक्षु रक्षा द्वारा प्रस्तुत मंगलगान से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। अतिथियों का स्वागत प्रो.रेखा तिवाड़ी, प्रो. बीएल जैन आदि ने किया। संयोजन डाॅ.सत्यनारायण भारद्वाज ने किया। कार्यशाला में देश भर से समागत विद्वतजनों को अतिथियों द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।</p>
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		<title>जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में शीघ्र शुरू होंगे मेडिकल डिग्री कोर्स, राज्य सरकार ने जारी की एनओसीः शीघ्र ही साढ़े पांच वर्षीय बीएनवाईएस पाठ्यक्रम प्रारंभ </title>
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		<pubDate>Wed, 19 Feb 2025 13:02:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लाडनूवासियों के लिए यह सुखद खबर है कि अब शीघ्र ही यहॉ मेडिकल कॉलेज शुरू होने जा रहा है, जिसके लिए राज्य सरकार ने अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी कर दिया है। अब शीघ्र ही जैविभा विश्वविद्यालय में नए सत्र से साढ़े पांच वर्षीय बैचलर ऑफ नेचुरोपैथी एंड यौगिक साइंस का पाठ्यक्रम प्रारंभ होने जा रहा है। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>लाडनूवासियों के लिए यह सुखद खबर है कि अब शीघ्र ही यहॉ मेडिकल कॉलेज शुरू होने जा रहा है, जिसके लिए राज्य सरकार ने अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी कर दिया है। अब शीघ्र ही जैविभा विश्वविद्यालय में नए सत्र से साढ़े पांच वर्षीय बैचलर ऑफ नेचुरोपैथी एंड यौगिक साइंस का पाठ्यक्रम प्रारंभ होने जा रहा है। इसके लिए प्रवेश प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जा रही है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए शरद जैन सुधांशु व जगदीश यादव की यह पूरी खबर लाडनू से&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>लाडनू।</strong> यह सुखद खबर है कि अब शीघ्र ही लाडनू क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज शुरू होने जा रहा है, जिसके लिए राज्य सरकार ने अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी कर हरी झंडी दे दी है। अब शीघ्र ही जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में नए सत्र से साढ़े पांच वर्षीय बीएनवाईएस कोर्स यानि बैचलर ऑफ नेचुरोपैथी एंड यौगिक साइंस का पाठ्यक्रम प्रारंभ होने जा रहा है। इसके लिए प्रवेश प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जा रही है।</p>
<p><strong>60 सीटों की प्रवेश हेतू मान्यता प्राप्त हुई</strong></p>
<p>सरकार के आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा, एवं होम्योपैथी (आयुष) विभाग के शासन उपसचिव सावन कुमार चायल ने इस बारे में अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करते हुए अपने आदेश में बताया है कि राईजिंग राजस्थान समिट-2024 में विभाग के साथ हस्ताक्षरित एम.ओ.यू. की क्रियान्विति के लिए जैन विश्वभारती इंस्टीट्यूट, लाडनू को ‘नवीन योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय‘ संचालन के लिए 60 सीटों की प्रवेश क्षमता का अनापत्ति प्रमाण-पत्र राज्य सरकार द्वारा जारी किया जाता है, जो आगामी तीन शैक्षणिक सत्रों की अवधि तक यह प्रभावी रहेगा। इसके लिए सम्बंधित नियामक संस्थाओं द्वारा निर्धारित सभी मानकों की पूर्ति किया जाना अनिवार्य होगा।</p>
<p><strong>केन्द्र की उपचार गतिविधियां विगत 2 वर्षों से संचालित हो रही</strong></p>
<p>यहां ज्ञातव्य रहे कि आचार्य महाप्रज्ञ प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र का भवन यहां जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में पूर्ण साज-सज्जा के साथ आवश्यक आधुनिकतम मशीनरी व उपकरणों सहित पूर्ण प्राकृतिक साहचर्य के साथ तैयार है। यहां वर्तमान में न्यूनतम दरों के साथ नेचूरोपैथी चिकित्सा केन्द्र की उपचार गतिविधियां विगत 2 वर्षों से पूर्ण दक्ष स्टाफ के माध्यम से सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। वर्तमान में यहां छः माह का प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग सर्टिफिकेट कोर्स भी संचालित किया जा रहा है।</p>
<p><strong>लाडनू क्षेत्र में हर्ष की लहर, लोगों ने दी बधाइयां</strong></p>
<p>अब राज्य सरकार द्वारा अनापत्ति प्राप्त होने पर नेचुरोपैथी का मेडिकल डिग्री कोर्स शीघ्र ही शुरू किया जाएगा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ को इस उपलब्धि हेतु इस क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों और समाज के प्रवासी उद्योगपति व समाजसेवी बंधुओं आदि की बधाइयां व शुभकामनाएं प्राप्त हो रही है, वहीं पूरे विश्वविद्यालय परिसर में खुशी का माहौल छा गया है।</p>
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		<title>साधु-साध्वियों को उच्च शिक्षा प्रदान करने वाला पहला विश्वविद्यालय बना : भारत सरकार जैविभा विश्वविद्यालय को प्राकृत भाषा का केन्द्र बनाएगी – धर्मेन्द्र प्रधान </title>
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		<pubDate>Sun, 24 Nov 2024 09:13:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन विश्वभारती संस्थान (मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय) का 15वां दीक्षांत समारोह सोमवार को अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में गुजरात के सूरत में भगवान महावीर विश्वविद्यालय केम्पस वेसू में आचार्य महाश्रमण चातुर्मास प्रवास स्थल पर आयोजित किया गया। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में मुख्य अतिथि भारत सरकार के उच्च शिक्षा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन विश्वभारती संस्थान (मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय) का 15वां दीक्षांत समारोह सोमवार को अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में गुजरात के सूरत में भगवान महावीर विश्वविद्यालय केम्पस वेसू में आचार्य महाश्रमण चातुर्मास प्रवास स्थल पर आयोजित किया गया। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में मुख्य अतिथि भारत सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान थे। जैविभा विश्वविद्यालय के 15वें दीक्षांत समारोह में न्यायमूर्ति दिनेश महेश्वरी को मानद डी.लिट. उपाधि दी गई, तथा 21 को पी.एचडी. और 10 को गोल्ड मैडल सहित कुल 1917 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>लाडनूं।</strong> जैन विश्वभारती संस्थान (मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय) का 15वां दीक्षांत समारोह सोमवार को अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में गुजरात के सूरत में भगवान महावीर विश्वविद्यालय केम्पस वेसू में आचार्य महाश्रमण चातुर्मास प्रवास स्थल पर आयोजित किया गया। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में मुख्य अतिथि भारत सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान थे। दीक्षांत समारोह में 1895 स्नातक और स्नातकोत्तर उपाधियां, 10 स्वर्ण पदक, 21 पी.एचडी. और 1 मानद डी.लिट. उपाधि प्रदान की गई। विश्वविद्यालय के समस्त विभागों के विभागाध्यक्षों ने अपने-अपने विद्यार्थियों को उपाधियों के लिए आमंत्रित किया और कुलपति प्रो. दूगड़ एवं मुख्य अतिथि केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान द्वारा सभी को उपाधियां प्रदान की गई। जस्टिस दिनेश महेश्वरी को समारोह में डी.लिट. की मानद उपाधि प्रदान की गई।</p>
<p><strong>देश का पहला चलंतमान विश्वविद्यालय</strong></p>
<p>भारत सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने अपने सम्बोधन में कहा कि पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि जिस माहौल और परिवेश में पढ़ाई की जाती है, वह अधिक महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने केवल डिग्री को उपलब्धि मानने के बजाय कार्य दक्षता और मानसिक दक्षता को भी जरूरी बताया और कहा कि यह जीवन मूल्यों से भी संभव है। उन्होंने बताया कि अब तक भारतीय शिक्षा पद्धति पाश्चात्य से प्रभावित रही है, लेकिन अब नई शिक्षा पद्धति से इसे भारतीय संस्कृति से जोड़ा गया है। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह ज्ञान और चरित्र का निर्माण करने वाला विश्वविद्यालय है। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि उन्हें 1100 विश्वविद्यालयों को नजदीक से देखने का अवसर मिला है, जिनमें यह देश का पहला चलंतमान विश्वविद्यालय है। इसका दीक्षांत समारोह आचार्यश्री के चातुर्मास की अंतिम समयावधि के दौरान उनके सान्निध्य में ही होता है। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्राकृत भाषा को शास्त्रीय भाषा की मान्यता दी जा चुकी है और अब यह मेरा दायित्व है कि जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय को भारत सरकार की ओर से प्राकृत भाषा को शोध केन्द्र बनाया जाए। उन्होंने जैनिज्म के मूल में और कण-कण में ईश्वरत्व, देवत्व और जीवन के महत्व को बताया और कहा कि इन मूल्यों का महत्व है। भारत 2047 तक विकसित होने का संकल्प ले चुका है, और आप सभी उसका आधार होंगे। हमें दुनिया की कोई ताकत भौतिक विकास में नहीं रोक सकती है। मनुष्य को उसकी चेतना ही चलाएगी, और अच्छे व्यक्तित्व से संतुलन बन पाएगा।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-70282" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0019.jpg" alt="" width="1234" height="976" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0019.jpg 1234w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0019-300x237.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0019-1024x810.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0019-768x607.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0019-990x783.jpg 990w" sizes="(max-width: 1234px) 100vw, 1234px" />शराब और नशे से दूर रहने का संकल्प</strong></p>
<p>विश्वविद्यालय के अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण ने अपने अनुशासन के प्रेरणा से ज्ञान के साथ संयम की चेतना को भी जरूरी बताया और कहा कि ज्ञान प्राप्ति का एक लाभ यह भी होता है कि आदमी के मन की एकाग्रता बढ़े। मन की चंचलता से आदमी परेशान हो सकता है, जबकि एकाग्रता से मन की स्थिति अच्छी हो सकती है। उन्होंने समाज और राष्ट्र की विभिन्न समस्याओं का मूल कारण असंयम को बताते हुए कहा कि मन और इंद्रियों का नियंत्रण नहीं होने से समस्याएं उत्पन्न होती हैं। जैन दर्शन इच्छा परिमाण, अपरिग्रह, भोगोपभोग की बात करता है। जीवन के लिए आवश्यकताओं की पूर्ति तक तो ठीक है, लेकिन लालसा से असंयम होता है। विद्यार्थियों के लिए ज्ञान के साथ संयम की प्रवृत्ति भी जरूरी है। नैतिकता, मैत्री और संयम को महत्व दिया गया है। आचार्य तुलसी के अणुव्रत का प्राणतत्व संयम है। अणुव्रत गीत में भी यही आता है। उन्होंने इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों से जीवन में कभी शराब नहीं पीने और किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहने का संकल्प ग्रहण कराया।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-70281" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0018.jpg" alt="" width="904" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0018.jpg 904w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0018-212x300.jpg 212w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0018-723x1024.jpg 723w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0018-768x1087.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 904px) 100vw, 904px" />विभिन्न क्षेत्रों में देश का पहला विश्वविद्यालय होने का श्रेय</strong></p>
<p>कार्यक्रम में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने अपने संबोधन में सभी को अहिंसक, प्रामाणिक और व्यसनमुक्त जीवन जीने का संकल्प कराया और विश्वविद्यालय की विशिष्टताओं को चित्रित किया। उन्होंने बताया कि यह विश्वविद्यालय विभिन्न क्षेत्रों में पहल करने वाला देश का पहला विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय ने योग और जीवन विज्ञान का पहला स्नातकोत्तर कोर्स प्रारंभ किया। प्राकृत विभाग को स्नातकोत्तर स्तर पर स्वतंत्र रूप से शुरू करने वाला यह पहला विश्वविद्यालय है। संवैधानिक रूप से अनुशास्ता के पद वाला पहला और एकमात्र विश्वविद्यालय है। अपनी स्थापना से आज तक दूरस्थ शिक्षा का संचालन बिना किसी अवरोध के संचालित करने वाला एकमात्र विश्वविद्यालय है। गांधी दर्शन के अलावा अहिंसा और शांति को स्नातकोत्तर स्तर पर कोर्स शुरू करने वाला भी यह पहला विश्वविद्यालय है तथा साधु-साध्वियों को उच्च शिक्षा प्रदान करने वाला भी यह पहला विश्वविद्यालय बना हुआ है।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-70280" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0017.jpg" alt="" width="1450" height="968" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0017.jpg 1450w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0017-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0017-1024x684.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0017-768x513.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0017-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0017-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0017-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0017-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0017-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0017-990x661.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0017-1320x881.jpg 1320w" sizes="auto, (max-width: 1450px) 100vw, 1450px" />2500 साधु-साध्वियों को शिक्षित किया और 140 को पीएचडी भी</strong></p>
<p>कुलपति प्रो. दूगड़ ने बताया कि यह देश का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जिसमें बिना किसी साम्प्रदायिक भेदभाव के साधु-साध्वियों को उच्च शिक्षा प्रदान की जा रही है। इस विश्वविद्यालय ने अब तक कुल 2500 साधु-साध्वियों को शिक्षित किया है और 140 को पीएचडी प्रदान की है। इन साधु-साध्वियों के लिए उनके स्थान पर ही परीक्षाएं संचालित की जाती हैं।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-70279" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0016.jpg" alt="" width="807" height="1080" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0016.jpg 807w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0016-224x300.jpg 224w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0016-765x1024.jpg 765w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241124-WA0016-768x1028.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 807px) 100vw, 807px" />व्यक्ति की गरिमा और अंतर्निहित मूल्यों का महत्व</strong></p>
<p>डी.लिट. की मानद उपाधि प्राप्त करने के बाद न्यायमूर्ति दिनेश महेश्वरी ने अपनी उपाधि को अपने गुरुजनों, परिवारजनों और जीवन की विधिक यात्रा के दौरान सहभागी रहे समस्त कार्यकर्ताओं को समर्पित किया और कहा कि व्यक्ति की गरिमा को भारतीय संविधान की उद्देश्यिका में सम्मिलित किया गया है, जो काफी महत्वपूर्ण है। व्यक्ति में अंतर्निहित मूल्य ही उसकी गरिमा होते हैं। उन्होंने जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय को मूल्यों के लिए अनोखा, प्रतिष्ठित और सुदृढ़ योगदानकर्ता बताया और कहा कि यह विश्वविद्यालय राष्ट्र के निर्माण में अनूठा योगदान कर रहा है और हम सभी उससे लाभान्वित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>कार्यक्रम का संचालन और समापन </strong></p>
<p>कार्यक्रम के प्रारंभ में विश्वविद्यालय की छात्राओं ने कुल-प्रार्थना प्रस्तुत की। अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण द्वारा मंगलाचरण और कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अनुमति से समारोह प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम में मुनिश्री कुमार श्रमण, मुनिश्री विश्रुत कुमार, मुख्य मुनिश्री महावीर कुमार का सान्निध्य भी रहा। साथ ही विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति जैसे प्रो. संजीव शर्मा, प्रो. आरएस यादव, प्रो. गोपाल शर्मा, प्रो. धर्मचंद जैन, प्रो. जगतराम भट्टाचार्य आदि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन और अंत में आभार ज्ञापन कुलसचिव डॉ. अजयपाल कौशिक ने किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।</p>
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		<title>महावीर इंटरनेशनल की सेवा यात्रा से संक्षिप्त रूप में अवगत कराया : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को &#8216;महावीर प्रवाह&#8217; का स्वर्ण जयंती अंक प्रदान किया गया </title>
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		<pubDate>Thu, 14 Nov 2024 05:12:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर उन्हें महावीर इंटरनेशनल की सेवा यात्रा से संक्षिप्त रूप में अवगत कराया गया और उन्हें संगठन द्वारा प्रकाशित &#8216;महावीर प्रवाह&#8217; का स्वर्ण जयंती अंक भेंट किया गया। यह उल्लेखनीय है कि धर्मेंद्र प्रधान हाल ही सूरत के महावीर समवसरण में तेरापंथ धर्म संघ के एकादशम अधिशास्ता [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर उन्हें महावीर इंटरनेशनल की सेवा यात्रा से संक्षिप्त रूप में अवगत कराया गया और उन्हें संगठन द्वारा प्रकाशित &#8216;महावीर प्रवाह&#8217; का स्वर्ण जयंती अंक भेंट किया गया। यह उल्लेखनीय है कि धर्मेंद्र प्रधान हाल ही सूरत के महावीर समवसरण में तेरापंथ धर्म संघ के एकादशम अधिशास्ता परम श्रद्धेय आचार्य श्री महाश्रमण जी के सानिध्य में जैन विश्व भारती इंस्टीट्यूट, लाडनू द्वारा आयोजित कन्वोकेशन में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई और वीर गणपत भंसाली की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सूरत।</strong> केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर उन्हें महावीर इंटरनेशनल की सेवा यात्रा से संक्षिप्त रूप में अवगत कराया गया और उन्हें संगठन द्वारा प्रकाशित &#8216;महावीर प्रवाह&#8217; का स्वर्ण जयंती अंक भेंट किया गया। यह उल्लेखनीय है कि धर्मेंद्र प्रधान हाल ही सूरत के महावीर समवसरण में तेरापंथ धर्म संघ के एकादशम अधिशास्ता परम श्रद्धेय आचार्य श्री महाश्रमण जी के सानिध्य में जैन विश्व भारती इंस्टीट्यूट, लाडनू द्वारा आयोजित कन्वोकेशन में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। महावीर इंटरनेशनल सूरत मुख्य शाखा के वरिष्ठ सदस्य और हाल ही में एमआईएफ बने, साथ ही भगवान महावीर यूनिवर्सिटी, सूरत के प्रबंधक डॉ. प्रो. संजय जैन ने धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गौरतलब है कि वर्ष 2024 में आचार्य श्री महाश्रमण जी का सूरत चातुर्मास भगवान महावीर यूनिवर्सिटी के विशाल परिसर में सम्पन्न होने जा रहा है।</p>
<p>यह विश्वविद्यालय सूरत के पॉश क्षेत्र द्वितीय वी.आई.पी रोड पर स्थित है और चार माह के लिए जैन बंधुओं ने इसे पूर्ण श्रद्धा भाव से सस्नेह निःशुल्क रूप से समर्पित किया है। ज्ञात रहे कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा से ओतप्रोत प्रो. डॉ. श्री संजय जैन RSS के पर्यावरण मिशन के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी भी हैं। भविष्य में प्रो. डॉ. जैन महावीर इंटरनेशनल अपेक्स में अपनी सेवाएं प्रदान कर सकते हैं और इस संबंध में प्रबल संभावना है।</p>
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		<title>लाडनूं की बेटी पूरी दुनिया में छाने के बाद भी अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक साधना के पथ पर रही अडिग : ज्ञान और तप साधना का अद्भुत संगम हैं डॉ. निर्मला बरड़िया </title>
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		<pubDate>Thu, 29 Aug 2024 12:16:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक डॉ. निर्मला बरड़िया की विलक्षण आध्यात्मिक साधना, तीन मासखमण और 11 वर्षीतप हैं। उनकी उपलब्धियां, ज्ञान और तप: साधना का अद्भुत संगम है। आधुनिक विज्ञान के उच्च शिखर पर पहुंचने और अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति अर्जित करने के बावजूद अपनी संस्कृति, धर्म-परम्पराओं और मान्यताओं के साथ आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात् करने की एक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक डॉ. निर्मला बरड़िया की विलक्षण आध्यात्मिक साधना, तीन मासखमण और 11 वर्षीतप हैं। उनकी उपलब्धियां, ज्ञान और तप: साधना का अद्भुत संगम है। आधुनिक विज्ञान के उच्च शिखर पर पहुंचने और अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति अर्जित करने के बावजूद अपनी संस्कृति, धर्म-परम्पराओं और मान्यताओं के साथ आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात् करने की एक विलक्षण मिसाल लाडनूं की बेटी डॉ. निर्मला बरड़िया ने पेश की है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए शरद जैन सुधांशु की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>लाडनूं।</strong> अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक डॉ. निर्मला बरड़िया की विलक्षण आध्यात्मिक साधना, तीन मासखमण और 11 वर्षीतप हैं। उनकी उपलब्धियां, ज्ञान और तप: साधना का अद्भुत संगम है। आधुनिक विज्ञान के उच्च शिखर पर पहुंचने और अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति अर्जित करने के बावजूद अपनी संस्कृति, धर्म-परम्पराओं और मान्यताओं के साथ आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात् करने की एक विलक्षण मिसाल लाडनूं की बेटी डॉ. निर्मला बरड़िया ने पेश की है। निर्मला बरड़िया यहां के मालचंद बरड़िया की पुत्री और समाजसेवी भागचंद बरड़िया की भतीजी हैं। उनका वर्तमान में तीसरी &#8216;मास-खमण&#8217; तपस्या चल रही है।</p>
<p>इसमें वे लगातार एक महीने तक कोई आहार ग्रहण नहीं करती, केवल जल ग्रहण करके आध्यात्मिक साधना में लीन रहती हैं। इस प्रकार ज्ञान और तप: साधना का अद्भुत संगम है डॉ. निर्मला बरड़िया। साथ ही समाज सेवा और सामाजिक कार्यों के लिए सहयोग करने में भी उनकी भावना उच्च हैं और इस तरह सहयोग करने में वे अमेरिका हो या भारत सभी जगह सक्रिय व अग्रणी रहीं हैं।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-65091" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240829-WA0010.jpg" alt="" width="550" height="781" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240829-WA0010.jpg 550w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240829-WA0010-211x300.jpg 211w" sizes="auto, (max-width: 550px) 100vw, 550px" />विभिन्न देशों में वैज्ञानिक के रूप में किया कार्य</strong></p>
<p>वे अब तक दुनिया भर में ढाई लाख किलोमीटर से अधिक की अन्तरराष्ट्रीय यात्राएं कर चुकी हैं। वे व्यावसायिक दृष्टि से माइक्रोबायोलॉजिस्ट होने के साथ बायोकेमिस्ट, मॉलिक्यूलर, बायोलॉजिस्ट, जेनेटिक इंजीनियर के रूप में प्रशिक्षित हैं। उन्होंने 25 वर्ष से अधिक समय तक भारत, इंग्लैंड, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान में वैज्ञानिक के रूप में काम किया है। 15 वर्षों से अधिक समय तक कई प्रतिष्ठित उच्च-प्रभाव वाले अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं के लिए उन्होंने मानद पांडुलिपि समीक्षक के रूप में भी कार्य किया है। 30 से अधिक देशों में रह कर एवं वहां के लोगों के साथ मिलकर उन्होंने काम किया।</p>
<p><strong>अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक शोध कार्य </strong></p>
<p>डॉ. निर्मला बरड़िया ने वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक शोधों में भी ख्याति अर्जित की है। भारत, दक्षिण कोरिया, हांगकांग, सीरिया, ब्रिटेन, जर्मनी, नीदरलैंड, अमेरिका आदि से प्रकाशित प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक शोध पत्रिकाओं में उनके वैज्ञानिक शोध कार्य प्रकाशित हुए हैं। उनके शोध कार्य को सबसे उच्च प्रभाव वाले कई अन्य शोधों में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में उद्धृत किया जा चुका। उन्होंने अपना शोध कार्य दो दर्जन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलनों में प्रस्तुत किया है।</p>
<p><strong>आध्यात्मिक यात्रा</strong></p>
<p>विश्व स्तर की प्रख्यात वैज्ञानिक होने के साथ ही वे तप-साधना और आध्यात्मिक मार्ग पर भी उनकी यात्रा अपूर्व है। उनकी आध्यात्मिक उपलब्धियों में 75 उपवास, 6 बेला, 5 तेला, 3 माह का एकांतर तप उपवास, 1 अठाईस तप, 10 वर्षीतप-10 कर चुकी और अब 11वां वर्षीतप 11 मई से शुरू है। उनके 2 मासखमण पूरे हो चुके , जिनमें 31 दिन का 2021 में और 28 दिनों का 2022 में किया था। अब वे तीसरा मासखमण 2024 में कर रही हैं, जिनके 29 दिन व्यतीत हो चुके हैं। इनके अलावा डा. बरड़िया पिछले कई वर्षों से सोमवार, गुरुवार, शुक्रवार का व्रत-उपवास लगातार रख रही हैं। इस प्रकार ज्ञान और तप: साधना का अद्भुत संगम है डॉ. निर्मला बरड़िया।</p>
<p>उनके सामाजिक सहयोगबरड़िया वैज्ञानिक व आध्यात्मिक पथ पर निरंतर अग्रसर रहने के साथ ही समाज सेवा और सामाजिक सहयोग के लिए भी सदैव तत्पर रहती रही हैं। उन्होंने वॉलमार्ट के माध्यम से रेड क्रॉस सोसाइटी यूएसए में वर्ष- 2005-2007, 2009-2010 और 2015-2017 में सेवाएं दीं। नारायण सेवा संस्थान, उदयपुर में 1-पोलियो ऑपरेशन व 1 व्हीलचेयर प्रति वर्ष का सहयोग 2019 से लगातार अब तक कर रही हैं। हर छह महीने या एक वर्ष तक वर्ल्ड विजन, चेन्नई में एक बच्चे के भरण-पोषण का जिम्मा वर्ष 2021 से अब तक लगातार संभाल रही हैं। अपना घर आश्रम, भरतपुर को अगस्त 2021 से अब तक लगातार मासिक आधार पर ईंटें और निर्माण सामग्री की आपूर्ति का जिम्मा ले रखा है। इन सबके अलावा अन्य सामुदायिक सेवाओं में स्वेच्छा से शिरडी साईंबाबा मंदिर लोधी रोड नई दिल्ली में उन्होंने 1998-2000 के दौरान में कुष्ठ रोगी समुदाय (कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों) को व्यक्तिगत रूप से चाय और ब्रेड (सप्ताह में कम से कम 2-3 बार) परोसी। बेगम ब्रिज मेरठ यूपी के मंदिर टेरेसा होम &#8216;प्रेम निवास&#8217; में वर्ष 2000-2002 में मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से विकलांग रोगियों की प्रतिदिन 3-4 घंटे व्यक्तिगत रूप से सेवा की गई।</p>
<p><strong>होनहार बीरबान के होत चिकने पात </strong></p>
<p>डॉ. निर्मला बरड़िया ने अपनी विलक्षण प्रतिभा का परिचय बचपन से ही देना शुरू कर दिया था। अपनी शिक्षा के दौरान उन्होंने 1980 में 10वीं कक्षा (हाई स्कूल) में ही जीवविज्ञान में विशिष्टता के साथ और अंग्रेजी में भी विशिष्टता के साथ उत्तीर्ण किया। वे 1986 में एमएससी गोल्ड मेडलिस्ट और यूनिवर्सिटी-टॉपर रही। साथ ही मेरठ जिले यूपी के 35 कॉलेजों में भी टॉपर रही। उन्होंने 1986 में ही पहले प्रयास में ही आईएएस की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की। 1991 में वे पूसा इंस्टीट्यूट नई दिल्ली से पीएचडी में गोल्ड मेडलिस्ट रहीं। उन्होंने 60 क्रेडिट कोर्स पूरे किए और जीपीए 4.00/4.00 हासिल किया। एआरएस 1990-91 बैच में लिखित, माइक्रोबायोलॉजी अनुभाग में अखिल भारतीय टॉपर रहीं।</p>
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		<title>आचार्य प्रज्ञसागरजी, श्रुत सागरजी के सान्निध्य में कार्यक्रम : प्रो. नलिन के. शास्त्री आचार्य विद्यानंद पुरस्कार से सम्मानित </title>
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		<pubDate>Wed, 24 Apr 2024 08:11:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म दर्शन, साहित्य, शिक्षा आदि अनेक विषयों के प्रकांड विद्वान सरलता एवं सादगी के प्रतीक, संपादक अनेक लेख एवं शोध आलेख के लेखक, संस्कृत, प्राकृत, अंग्रेजी, अपभ्रंश आदि भाषाओं के विशेषज्ञ, वाणी के जादूगर प्रोफेसर नलिन के. शास्त्री को आचार्य विद्यानंद जी महाराज की जन्म शताब्दी के शुभारंभ अवसर पर आचार्य विद्यानंद पुरस्कार एवं [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म दर्शन, साहित्य, शिक्षा आदि अनेक विषयों के प्रकांड विद्वान सरलता एवं सादगी के प्रतीक, संपादक अनेक लेख एवं शोध आलेख के लेखक, संस्कृत, प्राकृत, अंग्रेजी, अपभ्रंश आदि भाषाओं के विशेषज्ञ, वाणी के जादूगर प्रोफेसर नलिन के. शास्त्री को आचार्य विद्यानंद जी महाराज की जन्म शताब्दी के शुभारंभ अवसर पर आचार्य विद्यानंद पुरस्कार एवं वाचस्पति की उपाधि से सम्मानित किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेंद्र जैन महावीर की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>दिल्ली।</strong> जैन धर्म दर्शन, साहित्य, शिक्षा आदि अनेक विषयों के प्रकांड विद्वान सरलता एवं सादगी के प्रतीक, संपादक अनेक लेख एवं शोध आलेख के लेखक, संस्कृत, प्राकृत, अंग्रेजी, अपभ्रंश आदि भाषाओं के विशेषज्ञ, वाणी के जादूगर प्रोफेसर नलिन के शास्त्री को आचार्य विद्यानंद जी महाराज की जन्म शताब्दी के शुभारंभ अवसर पर आचार्य विद्यानंद पुरस्कार एवं वाचस्पति की उपाधि से सम्मानित किया गया। लाल किला मैदान, दिल्ली में हुए भव्य आयोजन के दौरान उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार अंतेवासी, पट्ट शिष्य, राष्ट्र संत, परंपराचार्य श्री प्रज्ञ सागर जी महाराज, आचार्य श्री श्रुत सागरजी महाराज संसघ के पावन सानिध्य में प्रदान किया गया। बीते 21 अप्रैल को महावीर जयंती के पावन अवसर पर यह पुरस्कार उन्हें दिगंबर जैन रत्नत्रय जिन मंदिर द्वारका सेक्टर 10 नई दिल्ली में प्रदान किया गया। भारत मंडपम प्रगति मैदान में हुए भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आचार्य श्री प्रज्ञ सागरजी महाराज ने प्रो नलिन के शास्त्री द्वारा सृजित जैन धर्म जन धर्म की प्रथम प्रति भेंट की।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि प्रोफेसर नलिन के शास्त्री जैन दर्शन के मूर्धन्य विद्वानों में सम्मिलित हैं, जो पर्यावरण एवं वनस्पति विज्ञान के पूर्व आचार्य होने के साथ-साथ उच्च शिक्षा के प्रबंधन के क्षेत्र में एक परिचित नाम है। उन्होंने अपनी 50 वर्षीय साहित्य सेवा में अनेक आयामों को गढ़ा है। उन्होंने जैन दर्शन को आगे बढ़ाने के लिए अनेक कार्य किये, जो युवा विद्वानों के लिए मील का पत्थर है। दिल्ली के गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ, मगध विश्वविद्यालय बोधगया, जैन विश्व भारती संस्थान लाडनूं के कुलसचिव भी रहे हैं। वर्तमान में वे जैन विश्व भारती संस्थान मनित विश्वविद्यालय लाडनूं में कुलपति के विशेष कर्तव्य अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। प्रोफेसर नलिन के शास्त्री को मिले इस उत्कृष्ट पुरस्कार हेतु अनेक विद्वत जनों एवं समाज जनों ने बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।</p>
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		<title>इंदौर के हंसमुख गांधी को तीर्थ सेवी सम्मान:  राजस्थान के सलुम्बर में हुआ आयोजन </title>
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		<pubDate>Fri, 12 Jan 2024 11:31:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य वर्धमान सागर जी के सानिध्य में जैन युवा रत्न श्री हंसमुख जैन गांधी इंदौर तीर्थ सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया। श्री गांधी ने सम्मान के लिए आभार प्रकट करते हुए प्राप्त सम्मान निधि में अपनी ओर से भी राशि मिलकर आगामी 2 वर्ष तक के लिए श्रुत सेवी यंग जैन अवार्ड देने की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य वर्धमान सागर जी के सानिध्य में जैन युवा रत्न श्री हंसमुख जैन गांधी इंदौर तीर्थ सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया। श्री गांधी ने सम्मान के लिए आभार प्रकट करते हुए प्राप्त सम्मान निधि में अपनी ओर से भी राशि मिलकर आगामी 2 वर्ष तक के लिए श्रुत सेवी यंग जैन अवार्ड देने की घोषणा की। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> इंदौर दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी एवं देश प्रदेश के अनेक जैन तीर्थो के ट्रस्टी, पदाधिकारी श्री हसमुख जैन गांधी इंदौर द्वारा पांच दशक से धर्म ,समाज, संस्कृति और तीर्थो के विकास एवं संरक्षण के क्षेत्र में की जा रही सेवाओं के लिए तीर्थ सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया। प्रभावना जनकल्याण परिषद द्वारा उदयपुर राजस्थान के सलू़ंबर नगर में समारोह पूर्वक श्रमण संस्कृति के श्रेष्ठ एवं ज्येष्ठ वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में श्री बालचंद मलैया स्मृति तीर्थ सेवी सम्मान प्रदान किया गया, इसके अंतर्गत श्री गांधी को शॉल, श्रीफल, माला, एवं पगड़ी पहनाकर प्रशस्ति पत्र एवं ₹21000 की राशि नगद प्रदान कर सम्मानित किया गया। श्री गांधी ने सम्मान के लिए आभार प्रकट करते हुए प्राप्त सम्मान निधि में अपनी ओर से भी राशि मिलकर आगामी 2 वर्ष तक के लिए श्रुत सेवी यंग जैन अवार्ड देने की घोषणा की।</p>
<p><strong>ये रहे मौजूद </strong><br />
इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने श्री गांधी द्वारा की जा रही तीर्थ सेवाओं एवं सामाजिक सेवाओं का उल्लेख करते हुए उनके कार्यों की सराहना की और आशीर्वाद दिया। समारोह में डॉ शीतल चंद जैन, डॉक्टर मणींद्र जैन, राजेंद्र जैन महावीर, डॉक्टर सुनील संचय, राजेश रागी, सुनील शास्त्री, मनीष विद्यार्थी, सुशील मिंडा एवं सलूंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।</p>
<p><strong>इंदौर जैन समाज ने दी बधाई </strong><br />
श्री गांधी को प्राप्त इस सम्मान के लिए इंदौर की दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ जन सर्वश्री, अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी, महामंत्री सुशील पांडया मंत्री डॉक्टर जैनेंद्र जैन, महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, अष्टापद बद्रीनाथ तीर्थ के अध्यक्ष श्री आदित्य कासलीवाल, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के अध्यक्ष श्री राकेश विनायका, मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू एवं संजीव जैन संजीवनी, संत कदम के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीयूष जैन आजाद जी जैन बीड़ी वाले सीए अशोक खासगीवाला एवं महिपाल बक्षी ने बधाई दी।</p>
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