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	<title>रोहिणी नक्षत्र &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>रोहिणी नक्षत्र &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>नौतपा 25 मई से 2 जून तक तपेगा गर्मी का कहर रहेगा अधिक : अच्छे मानसून के लिए नौतपा का अधिक महत्व </title>
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		<pubDate>Tue, 19 May 2026 08:36:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नौतपा वह समय माना जाता है, जब सूर्य अत्यंत प्रखर ताप देता है। यह सामान्यतः नौ दिनों का होता हैं। इसलिए इसे नौ तपा नाम दिया गया है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में अच्छी गर्मी पड़े तो आगे वर्षा सामान्य और सामान्य से अच्छी होती है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नौतपा वह समय माना जाता है, जब सूर्य अत्यंत प्रखर ताप देता है। यह सामान्यतः नौ दिनों का होता हैं। इसलिए इसे नौ तपा नाम दिया गया है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में अच्छी गर्मी पड़े तो आगे वर्षा सामान्य और सामान्य से अच्छी होती है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना</strong>। नौतपा वह समय माना जाता है, जब सूर्य अत्यंत प्रखर ताप देता है। यह सामान्यतः नौ दिनों का होता हैं। इसलिए इसे नौ तपा नाम दिया गया है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में अच्छी गर्मी पड़े तो आगे वर्षा सामान्य और सामान्य से अच्छी होती है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि ज्योतिष अनुसार वृषभ राशि में रहते रोहिणी नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश से नौ तपा प्रारंभ होता है। वृषभ राशि में अर्थात जब सूर्य वृषभ राशि के 10°00′ से 23°20′ अंश तक रहता है, तब वह रोहिणी नक्षत्र में होता है। इस तरह सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 14 दिन रहता है लेकिन, परंपरागत रूप से सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के बाद के प्रथम 9 दिन “नौतपा” कहलाते हैं। सामान्यतः यह समय 25 मई से प्रारंभ होकर 2 जून के आसपास समाप्त होता है। ज्योतिषीय अनुसार रोहिणी नक्षत्र को चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र माना गया है। जब अग्नितत्व प्रधान सूर्य यहां आता है तो उसकी ऊष्मा प्रभावशाली मानी जाती है। पृथ्वी की स्थिति इस समय सूर्य उत्तरायण में ऊँचाई पर होता है, जिससे दिन बड़े होते हैं, सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक सीधी पड़ती हैं, इससे भूमि का तापमान तेजी से बढ़ता है।</p>
<p><strong>रोहिणी तपे, मृगशिरा बरसे </strong></p>
<p>इस तरह नौतपा जितना “तपेगा”, उतनी ही समुद्री वाष्पीकरण प्रक्रिया मजबूत होगी, जिससे आगे चलकर मानसून अच्छा बनता है। इसलिए कहा जाता है कि रोहिणी तपे, मृगशिरा बरसे अर्थात रोहिणी में अच्छी गर्मी पड़े तो आगे वर्षा अच्छी होती है। नौतपा काल में लू एवं अग्नि तत्व प्रबल रहता है, जल तत्व कमजोर माना जाता है। इसलिए इन दिनों में भयंकर लू चलती है। दिन में 12 से 3 बजे का समय लू और तपन से घर से बाहर निकलने में मुश्किल भरा रहता है। इसलिए इस समय पशु पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था प्याऊ लगवाना सर्वाधिक पुण्य का काम है।</p>
<p><strong> द्वितीय ज्येष्ठ माह होने से लू, गर्मी का असर रहेगा</strong></p>
<p>इस बार आंधी तूफान वर्षा का जोर नौतपा और उसके बाद भी बनेगा। जैन ने बताया कि इस बार दो ज्येष्ठ माह पड़ने से दोनों ज्येष्ठ माह में गर्मी के बीच आंधी तूफान वर्षा बीच-बीच में आती रहेगी। 1 जून से द्वितीय ज्येष्ठ माह सोमवार से प्रारंभ होने और द्वितीय ज्येष्ठ माह में पांच सोमवार पड़ने से 2 जून को बुध के आद्रा नक्षत्र में प्रवेश और 8 जून को शुक्र के कर्क राशि में प्रवेश से वर्षा आषाढ़ माह की जगह द्वितीय ज्येष्ठ माह में ही वर्षा मानसून चाल सक्रिय रहेंगी। लेकिन गर्मी उमस कम नहीं होगी और नौ तपा के बाद भी द्वितीय ज्येष्ठ माह होने से लू, गर्मी का कहर बना रहेगा।</p>
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		<title>नौ तपा 25 मई से 3 जून तक, भीषण गर्मी झुलसाने वाली होगी : नौतपा के बाद भी गर्मी का रहेगा असर </title>
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		<pubDate>Fri, 23 May 2025 16:43:56 +0000</pubDate>
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<p><strong>इस बार भी नौतपा अपना रंग दिखाएगा। नौतपा रविवार 25 मई से मंगलवार 3 जून तक रहेगा। यूं तो हर वर्ष नौ तपा मई माह के अंतिम दिनों में आते हैं। इन दिनों खूब गर्मी पड़ती है और लू भी अधिक चलती है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> इस बार भी नौतपा अपना रंग दिखाएगा। नौतपा रविवार 25 मई से मंगलवार 3 जून तक रहेगा। यूं तो हर वर्ष नौ तपा मई माह के अंतिम दिनों में आते हैं। इन दिनों खूब गर्मी पड़ती है और लू भी अधिक चलती है। मान्यता है कि नौ तपा में जितनी अधिक गर्मी होगी, तपन होगी, लू अधिक चलेगी और इन दिनों वर्षा न हो तो आगामी समय में उतनी ही अच्छी वर्षा होती है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार ग्रहों के राजा सूर्य ग्रह जब वृष राशि में रहते हुए रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब से नौ तपा शुरू होते हैं। हालांकि रोहिणी नक्षत्र में सूर्य लगभग 14 दिनों तक रहते हैं।</p>
<p><strong>समुद्र जल भी तेजी से होता है वाष्पित</strong></p>
<p>शुरू के नौ दिनों में सूर्य की किरणे अपना विकराल तेज से पृथ्वी को गर्म तवे के समान तपाती है। इससे भीषण गर्मी और लू का आभास होता हैं। समुद्र का पानी भी तेजी से वाष्पित होता है और आगे पुनः वर्षा के रूप में बरसता है। डॉ. जैन ने बताया कि नौ दिनों के अलावा जब तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 8 जून तक रहेगा। तब तक गर्मी और लू का प्रकोप अधिक रहेगा। नौतपा के बाद भी लू कम नहीं होगी और भयंकर गर्मी पड़ेगी। लू के थपेड़े रहेंगे। हालांकि नौ तपे के दिनों में कुछ-कुछ स्थानों पर धूलभरी आंधी तूफान आएंगे । कहीं-कहीं इस के साथ वर्षा भी होगी। ज्योतिष गणना के आधार पर संभावना है कि 28, 30 और 31 मई को आंधी के साथ वर्षा भी हो सकती है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-81510" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250523-WA0057.jpg" alt="" width="502" height="464" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250523-WA0057.jpg 502w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250523-WA0057-300x277.jpg 300w" sizes="(max-width: 502px) 100vw, 502px" />कब शुरू होगा नौतपा</strong></p>
<p>पंचांग के मुताबिक 25 मई 2025 को ग्रहों के राजा सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। वह इस दिन सुबह 3 बजकर 27 मिनट पर गोचर करेंगे। सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 8 जून 2025 तक रहने वाले हैं।</p>
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		<title>भगवान ऋषभनाथ जी ने अक्षय तृतीया पर ही किया था पारणा: इस बार अक्षय तृतीया तिथि अनुसार 30 अप्रैल को </title>
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		<pubDate>Tue, 29 Apr 2025 13:22:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज के साथ हिन्दु समाज में अक्षय तृतीया का धार्मिक उल्लास है। इस बार अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को आ रही है। इस दिन भगवान ऋषभनाथ जी को लगभग एक वर्ष के बाद आहार मिला था। उन्होंने इक्षु रस से पारणा किया था। यह इंदौर वासियों के लिए भी सौभाग्य की बात है कि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज के साथ हिन्दु समाज में अक्षय तृतीया का धार्मिक उल्लास है। इस बार अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को आ रही है। इस दिन भगवान ऋषभनाथ जी को लगभग एक वर्ष के बाद आहार मिला था। उन्होंने इक्षु रस से पारणा किया था। यह इंदौर वासियों के लिए भी सौभाग्य की बात है कि इसी दिन 30 अप्रैल को आचार्यश्री विशुद्धसागरजी महाराज को पट्टाचार्य की पदवी से विभूषित किया जाएगा। यह सुसंयोग सुमतिधाम की धरा पर बन रहा है। अक्षय तृतीया को लेकर वैसे तो असंख्य मान्यताएं हैं, लेकिन इनमें से प्रमुख मान्यताओं के बारे में <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में उपसंपादक प्रीतम लखवाल की कलम से जानिए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन समाज के साथ हिन्दु समाज में अक्षय तृृतीया का धार्मिक उल्लास है। इस बार अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को आ रही है। जब भगवान ऋषभदेव संसार, शरीर और भोगों से विरक्त हो तप और मौन साधना करने के बाद आहार के लिए नगर और ग्रामों में विहार करने लगे, कोई भी अज्ञानता के कारण विधि पूर्वक उन्हें आहार नहीं देता था। छह माह बाद जब पुनः आहार के लिए हस्तिनापुर पहुंचे तब वहां के राजा श्रेयांस ने उन्हें इक्षु रस प्रदान किया। इससे उन्होंने आहार प्राप्त किया। जिस दिन यह आहार प्राप्त किया। उस दिन वैशाख मास की अक्षय तृतीया थी। इधर, यह इंदौर वासियों के लिए भी सौभाग्य की बात है कि इसी दिन 30 अप्रैल को आचार्यश्री विशुद्धसागरजी महाराज को पट्टाचार्य की पदवी से विभूषित किया जाएगा। यह सुसंयोग सुमतिधाम की धरा पर बन रहा है। अक्षय यानि कभी जिसका क्षय न हो, इस तिथि का जैन धर्म से गहरा संबंध है। हिन्दु धर्म में यह अति पुण्यकारी तिथि के रूप में वर्णित है। यह भी मान्यता है कि इस तिथि पर होने वाले विवाह भी अक्षय होते हैं। हिन्दू धर्म में अक्षय तृतीया पर्व का बहुत अधिक महत्व है। अक्षय तृतीया का पर्व इस वर्ष अत्यंत विशिष्ट संयोगों के साथ मनाया जाएगा। 30 वर्षों बाद इस पावन दिन पर बुधवार का दिन रोहिणी नक्षत्र, शोभन योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग एक साथ बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के इस दुर्लभ संयोग में किया गया हर पुण्यकर्म अक्षय फल देने वाला होगा और जीवन में सुख, समृद्धि तथा उन्नति के द्वार खोलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया को युगादि तिथि भी कहा जाता है। इसी दिन त्रेता युग का प्रारंभ हुआ था। इस दिन दान, जप, तप, हवन आदि कर्मों का फल अनंत गुना हो जाता है। जैन धर्म के अनुसार भगवान ऋषभदेव ने पारणा इसी दिन राजा श्रेयांश द्वारा इक्षुरस (गन्ने के रस) से किया था। इसलिए आहार दान, जलदान और औषधि दान का विशेष महत्व है। जैन धर्म में अक्षय तृतीया को इक्षु तृतीया भी कहा जाता है।</p>
<p><strong>जैन धर्म में अक्षय तृतीया का महत्व</strong></p>
<p>प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ ने 6 महीने आहार और 6 महीने बिना आहार व्रत ले रखा था। जब वे आहार के लिए विहार करते तो उन्हें विधि-विधान से आहार नहीं मिला। ऐेसे में उन्हें आहार मिले एक वर्ष बीत गया। एक वर्ष बाद जब उन्हें विधि अनुसार आहार मिला उस दिन अक्षय तृतीया थी। हस्तिनापुर के राजा श्रेयांस ने आहार दान किया था। इसलिए इस दिन दान का महत्व भी बहुत अधिक है। अक्षय तृतीया पर जैन समाजजन दान करते हैं, क्योंकि यह माना जाता है कि भगवान ऋषभनाथ ने सबसे पहले समाज में दान का महत्व समझाया था। जैन धर्म में अक्षय तृतीया को इक्षु तृतीया भी कहा जाता है। अक्षय तृतीया पर दान में जैन धर्म के लोग आहार दान, ज्ञान दान, औषधि दान या मंदिरों में दान करते हैं।</p>
<p><strong>अक्षय तृतीया पर यह भी जानें</strong></p>
<p>अक्षय तृतीया के दिन नए युग की शुरूआत हुई थी। इस दिन से त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। मान्यता यह भी है कि इसी दिन भगवान विष्णु के छटवें अवतार के रूप में भगवान परशुराम का प्रकटीकरण हुआ था। अक्षय तृतीया के दिन से ही महर्षि वेद व्यास ने भगवान श्रीगणेश की सहायता से महाभारत का लेखन आरंभ करवाया था। एक अन्य मान्यता है कि इसी दिन लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने अग्नि परीक्षा लेकर माता सीता को दुबारा अपनाया था। एक और किवदंती है कि पांडवों को इसी दिन अक्षय पात्र प्राप्त हुआ था, जिसमें कभी भोजन समाप्त नहीं होता था।</p>
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