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	<title>राहतगढ़ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि श्री प्रमाणसागरजी का राहतगढ़ में मंगल प्रवेश: समाज बंधुओं ने की भव्य मंगल अगवानी लगाए जयकारे  </title>
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		<pubDate>Sun, 23 Nov 2025 14:06:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में 27 नवंवर से 2 दिसंबर तक पाषाण से परमात्मा बनाने का विशेष आयोजन श्री 1008जिनबिंब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव के लिए शंका समाधान प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज एवं मुनि श्री संधानसागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में मंगल प्रवेश प्रातःकालीन बेला में हुआ। राहतगढ़ से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में 27 नवंवर से 2 दिसंबर तक पाषाण से परमात्मा बनाने का विशेष आयोजन श्री 1008जिनबिंब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव के लिए शंका समाधान प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज एवं मुनि श्री संधानसागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में मंगल प्रवेश प्रातःकालीन बेला में हुआ। <span style="color: #ff0000">राहतगढ़ से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>राहतगढ़ (सागर)।</strong> नगर में 27 नवंवर से 2 दिसंबर तक पाषाण से परमात्मा बनाने का विशेष आयोजन श्री 1008जिनबिंब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव के लिए शंका समाधान प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज एवं मुनि श्री संधानसागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में मंगल प्रवेश प्रातःकालीन बेला में हुआ। मुनि संघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि संघ की मंगल अगवानी के अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज राहतगढ़ एवं मंगल विहार करा रहे भोपाल, विदिशा तथा आसपास के नगरों से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने मुनिसंघ की मंगल अगवानी की। इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि हमारे जीवन में छोटी-छोटी बातों का बहूत गहरा प्रभाव पड़ता है। हम जिस वातावरण और जिन लोगों के साथ रहते हैं, जिनके साथ हमारा रोज का उठना बैठना है तो हमारा व्यवहार भी ठीक वैसा ही बन जाता है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-95098" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251123-WA0023.jpg" alt="" width="1600" height="1066" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251123-WA0023.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251123-WA0023-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251123-WA0023-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251123-WA0023-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251123-WA0023-1536x1023.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251123-WA0023-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251123-WA0023-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251123-WA0023-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251123-WA0023-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251123-WA0023-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251123-WA0023-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251123-WA0023-1320x879.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />मुनिश्री ने अच्छी संगति में रहने की प्रेरणा दी</strong></p>
<p>मुनि श्री ने एक पुरानी युक्ति सुनाते हुए कहा कि जैसी संगत वैसी रंगत। कुरल काव्य में लिखा है कि पानी का गुण बदल जाता है तथा जैसी मिट्टी में रहता है वैसा रंग हो जाता है। उसी प्रकार मनुष्य के स्वभाव में संगति का व्यापक प्रभाव होता है। इसलिए हमारी संस्कृति ने हमेशा अच्छी संगति में रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि अच्छे लोगों की संगति में रहोगे तो तुम्हारा जीवन भी अच्छा बनेगा। मुनि श्री ने संगति के प्रभाव पर चर्चा करते हुए कहा कि जैसे गुलाब की क्यारी में रहने वाली मिट्टी में भी सुगंध आ जाती है तो नाली के किनारे रहने वाली मिट्टी में दुर्गंध आती है।</p>
<p><strong>दुःसंगति से बचो सुःसंगति में रहो न रहो</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि हम जैसे माहौल में रहते हैं। हमारा व्यवहार भी उस पर निर्भर करता है। इसीलिए हमेशा अच्छी संगति में रहने की प्रेरणा दी जाती है। आचार्य गुरुदेव एक नया दृष्टिकोण प्रकट कर कह रहे हैं कि दुःसंगति से बचो सुःसंगति में रहो न रहो। मुनि श्री ने कहा कि तुम अच्छो की संगति न कर पाओ तो कोई बात नहीं है लेकिन, बुरे की संगति से बचो क्योंकि, उससे तुम्हारा जीवन निश्चय ही बुरा बनेगा। उन्होंने कहा कि सत्संगति रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन का उत्कर्ष कर सकता है, लेकिन दुःसंगति में फंसे व्यक्ति का पतन अवश्यंभावी है। प्रायः व्यक्ति अपनी संगति को अच्छी ही मानता है लेकिन, आपके मानने से संगति अच्छी नहीं हो सकती तो ऐसी कौन सी संगती है जो सुसंगति कहलाती है?</p>
<p><strong>बुद्धिमान की संगति में रहोगे तो तुम्हारा ज्ञान भी विकसित होगा</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जिससे हमें अच्छी प्रेरणा, अच्छी बातें सीखने को मिले। जिससे हमारी आदतें तथा हमारा चरित्र अच्छा बने और हम आगे बढ़ सकें, ऐसी संगति सुसंगति है। इसके विपरीत जो हमारे आचार विचार को भ्रष्ट करें हमारे चरित्र का पतन कराए वह दुःसंगति है। गुरुदेव कहते है कि ऐसी दुःसंगति से बचो। चुनाव हमेशा अच्छे की करो। मुनि श्री ने कहा कि लोग तर्क देते है कि हम ठीक हैं तो दुनिया हमारा क्या बिगाड़ लेगी तो मुनि कहते हैं कि काजल की कोठरी में जाओगे तो कहीं न कहीं दाग लग ही जाएगा। आत्मा का निमित्त और नैमित्तिक संबंध है जो आंतरिक रूप से मजबूत है उनको बचाव की आवशकता नहीं है लेकिन, जो आंतरिक रुप से कमजोर होते हैं उनका मन बहूत चंचल होता है तथा वह छोटे छोटे निमित्तों से प्रभावित हो जाते है। ऐसी स्थिति में बचाव करने की जरुरत है। मुनि श्री ने कहा कि शास्त्रों में हम मुनियों को भी अच्छी संगति में रहने की प्रेरणा दी गई है। हमेशा अपने से अधिक बुद्धिमान की संगति में रहोगे तो तुम्हारा ज्ञान भी विकसित होगा।</p>
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		<title>हमारे दोष जिनसे फले-फूले वे हमारे बंधु कैसे ? : मुनिश्री प्रमाणसागर जी ने बागरौद में दी मंगल देशना, सच्चे मित्रों की बताई पहचान  </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 09:23:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सच्चे अर्थों में यह पहचानना बड़ा मुश्किल होता है कि कौन हमारा मित्र है अथवा कौन हमारा दुश्मन? यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने राहतगढ़ की ओर प्रस्थान करते हुए बूढ़ी बागरौद स्थित जिनालय परिसर में व्यक्त किए। बागरौद से पढ़िए, यह खबर&#8230; बागरौद विदिशा। सच्चे अर्थों में यह पहचानना बड़ा मुश्किल होता है [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सच्चे अर्थों में यह पहचानना बड़ा मुश्किल होता है कि कौन हमारा मित्र है अथवा कौन हमारा दुश्मन? यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने राहतगढ़ की ओर प्रस्थान करते हुए बूढ़ी बागरौद स्थित जिनालय परिसर में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">बागरौद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बागरौद विदिशा।</strong> सच्चे अर्थों में यह पहचानना बड़ा मुश्किल होता है कि कौन हमारा मित्र है अथवा कौन हमारा दुश्मन? यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने राहतगढ़ की ओर प्रस्थान करते हुए बूढ़ी बागरौद स्थित जिनालय परिसर में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब तक तुम्हारे पास धन पैसा है तो ऐसे मित्र मिल जाएंगे जो तुम्हारे परम हितैषी बनेंगे और तुम्हारे अंदर बुरी आदतों का समर्थन करेंगे लेकिन, जैसे ही तुम्हारा धन समाप्त होगा और बुरा बक्त शुरु होगा तो वह तुमसे किनारा कर लेंगे लेकिन, जो तुम्हारे हितैषी मित्र भाई बंधु होते हैं। वह संकट आने पर तुम्हारा सहयोग भी करते हैं और तुम्हें महसूस भी नहीं होंने देते। इस विषय पर गुरुदेव कहते हैं कि ‘हमारे दोष जिनसे फले-फूले वे हमारे बंधु कैसे? मुनि श्री ने कहा कि व्यवहारिक जीवन में हमें अनेक लोगों के संपर्क और संसर्ग में रहना पड़ता है। जिन्हें अक्सर हम अपना मित्र या बंधु कहते हैं, लेकिन क्या वास्तव में वह हमारे सच्चे मित्र या बंधु हैं?</p>
<p><strong>विपत्ति में साथ छोडकर भाग जाए, वह मित्र नहीं शत्रु </strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि यह जरूरी नहीं कि रक्त संबंधित भाई ही आपका बंधु है, कभी-कभी देखने में आता है कि जिससे हमारा कोई संबंध नहीं कोई स्वार्थ नहीं लेकिन, विपत्ति के समय पर हमारा ऐसा सहयोग दिया कि उससे रक्त से बढ़कर रिलेशन बन गया। मुनि श्री ने कहा कि सच्चा मित्र या बंधु बुराइयों में न तो खुद लगते हैं और न हीं दूसरों को लगने देते हैं। मुनि श्री ने कहा कि जो हमें दोषों और बुराइयों से बचाए और विपत्ति में साथ दे वही हमारा सच्चा मित्र है और जो विपत्ति में साथ छोडकर भाग जाए, वह मित्र नहीं शत्रु है।</p>
<p><strong>मुनिश्री शनिवार को सुबह राहतगढ़ में करेंगे मंगल प्रवेश </strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ससंघ की राहतगढ़ में मंगल अगवानी 22 नवंबर को प्रातःकालीन बेला में होगी। आपके साथ मुनि श्री संधानसागर महाराज सहित समस्त क्षुल्लक एवं बालब्रह्मचारियों का संघ है।यहां पर 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक नवीन जिनालय के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव होने जा रहा है।</p>
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		<title>वर्तमान का विदिशा शहर ही अतीत का भद्दिलपुर है: राहतगढ़ में 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक आयोजित होगा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव  </title>
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		<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 13:47:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भाव विशुद्धि युक्त अनुराग ही भक्ति है। इसमें व्यक्ति सबकुछ भूलकर गुरु का हो जाता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में शीतलधाम में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; विदिशा। भाव विशुद्धि युक्त अनुराग ही भक्ति है। इसमें व्यक्ति सबकुछ भूलकर गुरु का हो जाता है। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भाव विशुद्धि युक्त अनुराग ही भक्ति है। इसमें व्यक्ति सबकुछ भूलकर गुरु का हो जाता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में शीतलधाम में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> भाव विशुद्धि युक्त अनुराग ही भक्ति है। इसमें व्यक्ति सबकुछ भूलकर गुरु का हो जाता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में शीतलधाम व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुरु सान्निध्य के बाद भी जिनके अंदर भक्ति भाव नहीं उभर पाता। उनका कभी उद्धार नहीं हो सकता। हमने न केवल गुरु को पाया अपितु गुरु ने हमारे ऊपर कृपा बरसा कर हमें अपना प्रतिनिधि बनाया। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ससंघ का यह अल्पप्रवास है उनको राहतगढ़ में 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के लिये जाना है। अतः यह बीच का समय विदिशा नगर को मिल गया। मुनि श्री ने कहा कि आप लोगों पर 1992 से जो गुरु कृपा बरसी वह फिर लगातार बरसती रही और इस शहर को जैन धर्म के दशवंे तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ के नाम से पहचान दी।</p>
<p><strong>भगवान शीतलनाथ की जन्म भूमि को लेकर तीन क्षेत्र विकसित हो गए</strong></p>
<p>जब मैं वर्ष 1992 में विदिशा आया था तब मैंने अनेक ग्रंथों को पढ़ा और शोध किया था तब यह बात प्रमाणिक हो गयी थी कि वर्तमान का विदिशा शहर ही अतीत का भद्दिलपुर है। यहां पर तीन शिलालेख साक्ष्य प्राप्त हुए थे। जिसमें सबसे पहला श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में श्री पारसनाथ भगवान के पादमूल में 500 साल पुराना शिलालेख है। दूसरा विदिशा के एक प्राचीन कुएं में भद्दिलपुर लिखा मिला जो लगभग 800 साल पुराना है तथा तीसरा राजस्थान के चांदखेड़ी के एक शिलालेख में विदिशा का नाम भद्दिलपुर अंकित है। उसी समय पर एक किताब भी छपी थी। ‘पावन कल्याणक भूमि भद्दिलपुर पर एक अध्ययन’। मुनि श्री ने कहा कि भगवान शीतलनाथ की जन्म भूमि को लेकर तीन क्षेत्र विकसित हो गए। ,क्षेत्र का विकसित होंना बुरा नहीं है पर जन्मभूमि तो एक ही है और यह तुम्हारा भद्दिलपुर है।</p>
<p><strong>एकजुटता के साथ इस कार्य को पूर्ण करे</strong></p>
<p>जहां गुरुदेव की कृपा बरसी और यह उतुंग समवशरण तुम लोगों के बीच में है। काम अपनी गति से चल रहा है और आप लोगों ने इसमें बहूत कुछ लगाया भी है लेकिन, अब जबकि कार्य पूर्णतः की ओर है। उसमें पूरी तरह लगे रहने की जरूरत भी है। जितना उत्कृष्ट कार्य आप कर सकते हैं। उतना उत्कृष्ट कार्य आप लोग कीजिए। उन्होंने कहा कि प्रण कर लो और पूरी समाज मिलजुलकर एकजुटता के साथ इस कार्य को पूर्ण करे। मुनि श्री ने कहा कि इतना उतंग समवशरण पूरे भारत में कहीं नहीं बना। आप सभी लोग कमर कसके तैयार हो जाइये। उन्होंने कहा कि मुनिश्री संभवसागरजी महाराज जी यहां पर हैं ही उनके मार्गदर्शन में वह जैसा कहें इस काम को आगे बढ़ाओ। सभी लोग सकारात्मक एवं सहयोगात्मक दृष्टि रखकर बाकी बातें गौण करें।</p>
<p><strong>ागवान शीतलनाथ स्वामी का यह समवशरण पूर्णतः की ओर है</strong></p>
<p>इस अवसर पर श्री संभवसागर महाराज ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि धर्म के मामले में जो सूखा क्षेत्र था आचार्य गुरुदेव की ऐेसी कृपा हुई कि सूखा क्षेत्र हरियाली में परिवर्तित हो गया। उन्होंने कहा कि यह जो विशाल समवशरण देख रहे हैं। यह विदिशा वालों की गुरु भक्ति का प्रदर्शन ही है। भगवान शीतलनाथ स्वामी का यह समवशरण पूर्णतः की ओर है। यह मध्यप्रदेश का ऐसा पहला क्षेत्र है जहां पर भगवान के चार कल्याणक हुए हैं। उन्होंने कहा कि गुरुकृपा का आशीर्वाद है, जो हम सभी पर बरसा एवं 25 वर्ष तक लगातार संयोग मिला। उन्होंने कहा कि भले ही आज गुरुदेव नहीं है लेकिन, हम सभी के बीच में आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के रूप में विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि बड़े भाई प्रमाणसागर महाराज आए हैं। हम सभी को बहूत अच्छा लगा और हम सभी उनको ही सुनने के लिये आतुर है।</p>
<p><strong>आहार चर्या का सौभाग्य अर्जित किया </strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि मुनिसंघ ने दोपहर में समवशरण मंदिर का अवलोकन किया। भविष्य में विदिशा को एक नई पहचान देगा। यह कला एवं स्थापत्य का अदभुत उदाहरण है। मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज को निरंतराय आहार कराने का सौभाग्य बसंत जैन, सचिन जैन परिवार को मिला। वहीं मुनि श्री संभवसागरजी महाराज के आहार का सौभाग्य शीतल महिला मंडल को मिला।</p>
<p><strong>मंगलवार को यह होंगे कार्यक्रम </strong></p>
<p>द्वय मुनि संघ के मंगल सानिध्य में मंगलवार को चतुर्दशी पर प्रातः7.30 से 1008 भगवान आदिनाथ बर्राे बाले बाबा का महा मस्तकाभिषेक होगा तथा मुनि श्री के मुखारविंद से शांतिधारा होगी। 8.30 बजे से मुनिसंघ के प्रवचन होंगे। 10 बजे आहार चर्या शीतलधाम से संपन्न होगी। शीतलविहार न्यास एवं श्री सकल दिगंबर जैन समाज सभी धर्मश्रदालुओं से निवेदन करता है कि समय पर पधारें और धर्मलाभ लें।</p>
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		<title>राहतगढ़ में पंच कल्याणक महा महोत्सव 27 नवंबर से : मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने सफलता के लिए सार्थकता और नैतिकता जरूरी बताई  </title>
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		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 11:07:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि जीवन का सवाल सफलता का नहीं, बल्कि सार्थकता का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में लोग सफलता के पीछे इतने अंधे हो गए हैं कि जीवन की सार्थकता और नैतिकता को ही खो बैठे हैं। अवधपुरी से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि जीवन का सवाल सफलता का नहीं, बल्कि सार्थकता का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में लोग सफलता के पीछे इतने अंधे हो गए हैं कि जीवन की सार्थकता और नैतिकता को ही खो बैठे हैं। <span style="color: #ff0000">अवधपुरी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अवधपुरी।</strong> मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि जीवन का सवाल सफलता का नहीं, बल्कि सार्थकता का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में लोग सफलता के पीछे इतने अंधे हो गए हैं कि जीवन की सार्थकता और नैतिकता को ही खो बैठे हैं। मुनि श्री ने कहा कि हर व्यक्ति को सबसे पहले अपनी कमियों और कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। जब व्यक्ति अपने दायित्वों को सही ढंग से निभाता है, तभी जीवन सार्थक होता है। उन्होंने पिता के कर्तव्यों पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जब आप पिता बनते हैं, तो आपके ऊपर बहुत-सी जिम्मेदारियां आ जाती हैं। बच्चों को संस्कारित बनाना, उन्हें उत्तम शिक्षा दिलाना और सेवा-भाव जगाना यही सच्चे पिता का धर्म है।</p>
<p><strong>श्रद्धा की आंख में कोई प्रश्न नहीं होता</strong></p>
<p>एक प्रश्न के उत्तर में मुनि श्री ने कहा सरलता को समझने के लिए व्यक्ति का भीतर और बाहर दोनों से सरल होना आवश्यक है। जिसका जीवन खुली किताब की तरह होता है, उसे पढ़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने श्रद्धा और समर्पण के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रद्धा की आंख में कोई प्रश्न नहीं होता, बल्कि वह समर्पण के भाव से भरकर काम को त्वरित गति से करती है। युवाओं को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि जीवन को सार्थक बनाने के लिए पहले लक्ष्य बनाओ, फिर पुरुषार्थ जगाओ, और पुरुषार्थ में कभी कमी मत आने दो। हमारा पुरुषार्थ तभी फलता है जब हम उसे पूरी शक्ति और निष्ठा से करते हैं।</p>
<p><strong>गुरु को हृदय में स्थान दो, सदा तुम्हारे साथ रहेंगे</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ इन दिनों अवधपुरी में विराजमान हैं। 27 नवंबर से राहतगढ़ में श्री 1008 भगवान जिनेंद्र के पंच कल्याणक महा महोत्सव का आयोजन ससंघ सान्निध्य में होगा। जिसके लिए शीघ्र ही मुनिसंघ का विहार राहतगढ़ की ओर संभावित है। गुरुकुलम् के 180 छात्र मुनि श्री के सान्निध्य में रह रहे हैं, उनके संभावित विहार से भावुक दिखाई दिए। मुनि श्री ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि गुरु से राग होना अच्छा है, लेकिन मोह नहीं होना चाहिए। साधु आपके पास कुछ समय के लिए आते हैं, फिर उन्हें आगे बढ़ना ही होता है। गुरु को हृदय में स्थान दो, तो वे सदा तुम्हारे साथ रहेंगे। उन्होंने सभी छात्रों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि मन लगाकर पढ़ाई करें और अपने गुरुकुल तथा गुरुदेव की मान-मर्यादा का सदैव ध्यान रखें।</p>
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