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	<title>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>राष्ट्र का उत्थान हो विश्व का कल्याण हो यही है भारत की विशेषता : मुनिश्री सुधासागरजी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी समारोह मनाया  </title>
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		<pubDate>Mon, 13 Oct 2025 07:52:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्र का उत्थान हो विश्व का कल्याण हो यही है भारत की विशेषता है। इसीलिए तो भारत महान कहा जाता है। दुनिया के सारे देश अपने उत्थान के साथ दूसरे के उत्थान को दूर करते हैं। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राष्ट्र का उत्थान हो विश्व का कल्याण हो यही है भारत की विशेषता है। इसीलिए तो भारत महान कहा जाता है। दुनिया के सारे देश अपने उत्थान के साथ दूसरे के उत्थान को दूर करते हैं। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> राष्ट्र का उत्थान हो विश्व का कल्याण हो यही है भारत की विशेषता है। इसीलिए तो भारत महान कहा जाता है। दुनिया के सारे देश अपने उत्थान के साथ दूसरे के उत्थान को दूर करते हैं। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में संतों से जबपूछा गया कि हम किसे अपना कहे तो हमारे ऋषि मनीषियों ने कहा कि वसुदेव कुटुम्बकम हमारे लिए विश्व परिवार की तरह है। महावीर ने एक संकल्प दिया था, हमें किसी का विनाश नहीं करना है। उन्होंने संकल्पी हिंसा का त्याग कराया। मुनिश्री ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में हर दिन अपने आप को पांच मिनट का समय देना चाहिए सबसे पहले अपने एकाकी शक्ति को पहचानें मेरे साथ परमात्मा भी नहीं है। माता-पिता भाई-बंधु देश समाज कोई नहीं। तब विचार करें कि मुझे कुछ नहीं चाहिए। मुनिश्री ने आगे कहा कि मैं देश के लिए, समाज के लिए, घर परिवार के लिए क्या कर सकता हूं। कमजोर लोगों से संगठन नहीं चलता। बल जोर लोगों से संगठन चलता है। बजरंग बलि की तरह मैं भी भगवान की सेवा करूंगा। हम भगवान की रक्षा के लिए मर भी जाए तो शहीद माने जाएंगे।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-92380" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005.jpg" alt="" width="1280" height="716" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-1024x573.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-768x430.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-414x232.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-990x554.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />सहयोग देने के लिए चल पड़े उसका नाम है आरएसएस</strong></p>
<p>मैं इतना समर्थ हूं कि राष्ट्र की रक्षा कर सकता हूं। समाज की परिवार की रक्षा कर सकता हूं। दुनिया में सहयोग देने के लिए चल पड़े उसका नाम है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। चलो हम दो जन मिलकर तीसरे का सहयोग करें, तीन मिलकर चौथे-पांचवें। इस तरह सेवा का क्षेत्र बढ़ता चल गया, हम राष्ट्र के नाम पर एक हो सकते हैं।</p>
<p><strong>आचार्य भगवंत ने जो संदेश दिया है वह हमारे लिए प्रेरणा </strong></p>
<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक विद्या भारती प्रांत जागरण प्रमुख शिरोमणि दुबे ने कहा कि अभी आचार्य श्री का आशीर्वाद मिला। उन्होंने कहा कि हमें शिक्षा की पवित्रता को आगे बढ़ाना है, जो बहुत ही गहरा संदेश दिया है। हम इन्हें शीर्ष तक पहुंचाएंगे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सौ वर्ष का हो गया। हमारा देश उत्सवों और पर्वाें का देश है। जहां हर कार्य से लोग प्रेरणा लेते हैं। भगवान श्री राम, भगवान महावीर हमारे आराध्य हैं। हमारे मार्गदर्शक हैं। त्रेतायुग में श्री राम ने सोने की लंका को मिट्टी में मिलाकर हमारी संस्कृति सभ्यता को एक नई दिशा दी।</p>
<p><strong>जैन समाज ने किया आरएसएस के शताब्दी समारोह में अभिनंदन</strong></p>
<p>इसके पहले जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि आज हम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी समारोह मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में मना रहे हैं। हम सभी स्वयं सेवक का जैन समाज की ओर से हार्दिक अभिनन्दन करते हैं। इसके बाद भारत माता के चित्र का अनावरण किया और आचार्य भगवंत के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित किया। इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई सहित अन्य प्रमुखजनों ने सभी का अभिनंदन किया। इसके पहले ध्वज स्थापित किया। ध्वजारोहण किया गया। जिसने भारत में जन्म लिया है उसे मां भारतीय की सेवा करना होगी। हम हिंदुस्तानी हैं हमने भारत भूमि पर जन्म लिया। हम सब भारतीय हैं। हम उस देश के वासी हैं। जहां जन्म लेने वाली भूमि को माता कहा जाता है। हमारी संस्कृति में नदियों को भी माता कहा जाता है। यह संस्कृति, यह संस्कार हमें हर भारतीय संस्कृति से मिला है।</p>
<p><strong>ये भारत के सपूतों की संस्था </strong></p>
<p>आज जो हमारे देश का सबसे बड़ा कारण है। आज दुनिया में एनआरआई सबसे ज्यादा भारतीय है। जब कोई व्यक्ति विदेश में चला जाता है तो देश का विकास बाधित हो जाता है। अच्छे लोगों के साथ ही हमारे देश का दिमाग विदेश नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब-जब देश आयात बढ़ेगा, देश कमजोर होगा। आज हमारे शिशु मंदिर बंद हो रहे हैं। कांन्वेट स्कूल खुल रहे है। एजूकेशन की ओर कलिकाल में संगठन ही हमारी शक्ति है। राजनीति से ऊपर उठकर हम संगठन को मजबूत करें।</p>
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		<title>आचार्य भगवन जन -जन के प्राणी मात्र के भगवान है राम भगवान तो भारत क्या पूरे विश्व के हैं  </title>
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		<pubDate>Mon, 06 May 2024 16:36:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनि श्री निष्काम सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि हमें बोलना नहीं आता ,उतना ज्ञान भी नहीं, परंतु आचार्य महाराज का आदेश हुआ है [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनि श्री निष्काम सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि हमें बोलना नहीं आता ,उतना ज्ञान भी नहीं, परंतु आचार्य महाराज का आदेश हुआ है कि कुछ बोलना है ।हम अपनी बात आपके सामने रखने का प्रयास कर रहे हैं, जो अच्छा लगे ,आचार्य भगवन का समझ लेना और जो त्रुटि लगे ,अल्पज्ञ समझ कर क्षमा कर देना । <span style="color: #ff0000">पढि़ए विशेष रिपोर्ट …</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर ।</strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनि श्री निष्काम सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि हमें बोलना नहीं आता ,उतना ज्ञान भी नहीं, परंतु आचार्य महाराज का आदेश हुआ है कि कुछ बोलना है ।हम अपनी बात आपके सामने रखने का प्रयास कर रहे हैं, जो अच्छा लगे ,आचार्य भगवन का समझ लेना और जो त्रुटि लगे ,अल्पज्ञ समझ कर क्षमा कर देना ।एक संस्कारी गांव था। एक साधु के आने की जानकारी गांव वालों को लगी। गांव वालों ने सुना,हमारे छोटे से गांव में संत- महात्मा पधार रहे हैं, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा ।गांव के लोगों ने उनकी आगवानी हेतु भव्य से भव्य तैयारियां की।</p>
<p>गांव वालों ने उनकी भव्य आगवानी की। गांव वालों की आगवानी देखकर उन संत के मुंह से निकल पड़ा।बड़े से बड़े गांव और नगरों में भी हमारी ऐसी आगवानी नहीं हुई, जितनी अच्छी आगवानी छोटे से गांव में हमारे लिए लोगों ने की। हाथी ,घोड़ा ,बैलगाड़ी, बैंड- बाजे ,तोरणद्वार ,रंगोली आदि जो तैयारी थी, सब गांव के लोगों ने की। उनकी आगवानी देखकर संत -महात्मा ने मन बनाया। कुछ दिन इस गांव के लोगों को देना चाहिए। रास्ते में मन बना रहे थे। पहुंचने शाम हो गई तो गांव वालों ने अतिथि सत्कार किया। भोजन आदि की व्यवस्था की । रात में गांव के लोग पहुंचे, महात्मा हमें धर्म के बारे में बताइए।</p>
<p><strong> रामलला का मंदिर भव्य बनना चाहिए </strong></p>
<p>महात्मा ने अपनी योग्यता अनुसार गांव के लोगों को उपदेश देना चालू किया और आश्वासन दिया कि हो सकेगा तो कुछ समय आपके यहां व्यतीत कर सकता हूं ।अब गांव के लोगों ने यथायोग भक्ति दिखाना शुरू कर दी। महात्मा का बहुत अच्छे से समय निकलता रहा, निकलता रहा ।उनका मन थोड़ा चंचल हो गया । कब तक यहां बैठा रहूंगा, गांव में कुछ घूमने- फिरने निकल जाऊं। घूमने निकले एक चौराहे से एक गली की ओर जाने के लिए मुड़ें, जैसे अग्रसर हुए ,गांव के लोगों ने कहा महात्मा उस गाली की ओर न जाएं। महात्मा ने कहा क्यों? हमारा निवेदन है कि महाराज आप उस और ना जाये । जो भी व्यक्ति उस गली में जाता है, लौटकर नहीं आता। काल के गाल में समा जाता है।उन्होंने गांव वालों से प्रश्न किया। आप लोग ऐसा क्यों बोल रहे हैं ,गांव वालों से प्रति प्रश्न किया। आखिर ऐसा क्यों बोल रहे हो ,वहां ऐसा क्या है ।वहां रास्ते में बहुत बड़ा कुंआ है ,कुआं के पास वृक्ष है, वृक्ष में सांप की बहुत बड़ी बांबी बनी हुई है ।उसके अंदर बहुत बड़ा नागराज है ।जो वहां आने वालों की जीवन लीला समाप्त कर देता है ।साधु तो साधु ,उन्होंने मन बना लिया, उधर से ही जाएंगे ।लोगों ने काफी प्रयास किया, नहीं माने साधु हठी हो गए ।कौन रोक सकता हैंउन्हें।</p>
<p>इस रास्ते से जाने का मन बना लिया और आगे जाकर देखते हैं, एक बड़ा नाग राहगीर की राह देख रहा है ।साधु के पहुंचते ही नाग ने देखा ,यह तो संत महात्मा है ,और उन्हें उच्चासन पर बिठाया। संत ने देखा, गांव के लोग कुछ और बोल रहे थे । पर नाग का स्वभाव दूसरा निकला ।दोनों ने आपस में चर्चा की।संत ने कहा ,तुम गांव के लोगों को क्यों परेशान करते हो। आसपास के गांव के लोग काफी गरीब हैं ,यह रास्ता गांव वालों का मुख्य रास्ता है।आपके कारण लोगों का आना-जाना नहीं होता। लोगों का व्यापार ठप्प हो गया है। आपको ऐसा करना शोभा नहीं देता। नागराज ने कहा मैंने कभी लोगों को परेशान नहीं किया ।</p>
<p>गांव के लोग मुझे देखकर पत्थर मारते हैं, मेरे शरीर को जीर्ण-शीर्ण कर देते हैं ,तो मुझे काटना पड़ता है। महात्मा ने कहा एक बार फुकार लगा दोगे,तो सब डर कर भाग जाएंगे, काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नागराज ने उनकी बात मान ली और बांबी में चले गए ।महात्मा वापस गांव में आए ।लोगों को उनके चेहरे की प्रशंसा देखकर खुशी हुई। गांव वालें महात्मा से पूरा वार्तालाप सुनकर प्रसन्न हुए ।अब नागराज किसी को नहीं कटेगा। सब अपना व्यापार अच्छे से कर सकेंगे ।कुछ समय में संत महात्मा दूसरे गांव चले गए ।कुछ समय निकलने के बाद पुनः महात्मा उसी गांव में आए और उसी रास्ते से कुएं के पास पेड़ के नीचे बांबी के बाहर बैठे नागराज की दशा देखकर, उनकी जीर्ण-शीर्ण हालत देखकर पूछा, यह कैसे हुआ ।नागराज ने बताया गांव के लोग, बच्चे यहां से निकलते हैं, तो मुझे डंडे मारते, पत्थर मारते, मैंने ना काटने का नियम आपसे लिया था ।इस कारण हमारी यह दशा हो रही है। महिलाएं तो मेरे साथ बहुत बुरा बर्ताव करती हैं ।महात्मा ने कहा मैंने काटने को नहीं कहा था ।</p>
<p>पर फुकार देने को बोला था ।तुम भूल गए फुकारना और यह तुम्हारी दशा हुई।जब बुंदेलखंड में धर्म के नाम पर कुछ नहीं था। तब एक साधक ने यहां आकर लोगों को संस्कारित कर दिया । पूरे देश में बुंदेलखंड का नाम कर दिया और तो और कुंडलपुर में जो देखने मिल रहा है, वह सब विद्यासागर जी महाराज की महती कृपा है ।अब बड़े बाबा का दर्शन करने दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। 2019 में आचार्य भगवन का चातुर्मास नेमावर में चल रहा था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे नंबर के महोदय गोपाल कृष्ण को मोहन भागवत ने भेजा था । आचार्य श्री के दर्शन करने जाए और अयोध्या में जो रामलला का मंदिर बन रहा है, उसके बारे में चर्चा करके आए। आचार्य श्री ने उनसे कहा था। राम भगवान तो भारत क्या ,पूरे विश्व के हैं ,उनका मंदिर बड़ा बनना चाहिए। आप कुंडलपुर जाए। वहां का मंदिर देखकर आए और रामलला का जो भव्य मंदिर बना है ।वह बड़े बाबा के मंदिर के अनुरूप निर्माण किया गया। आचार्य भगवन जन जन के प्राणी मात्र के भगवान हैं।</p>
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		<title>संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत शामिल होंगे कुण्डलपुर महामहोत्सव में   नये आचार्य पद पदारोहण अनुष्ठान महामहोत्सव की भव्य तैयारियाँ शुरू </title>
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		<pubDate>Wed, 20 Mar 2024 16:29:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[16 अप्रैल 2024, मंगलवार को कुण्डलपुर में बड़े बाबा देवाधिदेव श्री आदिनाथ भगवान के चरण सान्निध्य में शुरू होगा पद पदारोहण अनुष्ठान महामहोत्सव जिसकी भव्य तैयारियाँ शुरू हो गई हैं नये आचार्य पद पदारोहण अनुष्ठान महामहोत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत उपस्थित रहेंगे। पढ़िए राजेश जैन रागी की रिपोर्ट….. कुण्डलपुर। 20 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>16 अप्रैल 2024, मंगलवार को कुण्डलपुर में बड़े बाबा देवाधिदेव श्री आदिनाथ भगवान के चरण सान्निध्य में शुरू होगा पद पदारोहण अनुष्ठान महामहोत्सव जिसकी भव्य तैयारियाँ शुरू हो गई हैं नये आचार्य पद पदारोहण अनुष्ठान महामहोत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत उपस्थित रहेंगे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन रागी की रिपोर्ट…..</span></strong></p>
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<p><strong>कुण्डलपुर।</strong> 20 मार्च दिगम्बर जैनाचार्य, समाधि सम्राट, राष्ट्रसंत, संतशिरोमणि परम पूज्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज की परम्परा में नये आचार्य पद पदारोहण अनुष्ठान महामहोत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत उपस्थित रहेंगे। यह महामहोत्सव 16 अप्रैल 2024, मंगलवार को कुण्डलपुर में बड़े बाबा देवाधिदेव श्री आदिनाथ भगवान के चरण सान्निध्य में होगा। भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय महामंत्री संतोष जैन पेंडारी के नेतृत्व में जैन समाज का प्रतिनिधि मण्डल आज बुधवार को नागपुर (महाराष्ट्र) में डॉ. मोहन भागवत से मिला।</p>
<p>महामहोत्सव समिति के प्रशासनिक संयोजक रवीन्द्र जैन पत्रकार ने कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डॉ. भागवत ने इस महोत्सव में आने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान कर दी। प्रतिनिधि मंडल में महोत्सव समिति की सह संयोजक डॉ. सुधा मलैया दमोह, कुण्डलपुर कमेटी के महासचिव और सांसद आर के जैन, सिद्धार्थ मलैया दमोह, स्वतन्त्र जैन खिमलासा, प्रभात सेठ, ललित जैन सर्राफ आदि शामिल थे।</p>
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		<title>&#039;गुरु विनयांजलि&#039; कार्यक्रम में सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा :  महामहिम आचार्य विद्यासागर राष्ट्र के लिए बड़ी पूंजी </title>
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		<pubDate>Mon, 26 Feb 2024 07:27:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नागपुर के चिटणीस पार्क में आयोजित श्रद्धांजलि पर कार्यक्रम ‘गुरु विनयांजलि’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि महामहिम आचार्य विद्यासागर जी से पहली बार भेंट और चर्चा के बाद मेरे ध्यान में आया कि वे तर्क से तो बात रखते ही थे, उस तर्क के पीछे भी उनका एक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नागपुर के चिटणीस पार्क में आयोजित श्रद्धांजलि पर कार्यक्रम ‘गुरु विनयांजलि’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि महामहिम आचार्य विद्यासागर जी से पहली बार भेंट और चर्चा के बाद मेरे ध्यान में आया कि वे तर्क से तो बात रखते ही थे, उस तर्क के पीछे भी उनका एक सहज आत्मीयता का भाव होता था। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>नागपुर।</strong> अत्यंत कठोर व्रताचरण तथा संपूर्ण वैराग्याचरण करने वाले महामहिम आचार्य विद्यासागर जी हम सबके मार्गदर्शक तो थे ही, साथ ही वे राष्ट्र की बड़ी पूंजी धरोहर थे, इन शब्दों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार दोपहर को आचार्य विद्यासागर जी महाराज के प्रति विनयांजलि सभा में श्रद्धांजलि अर्पण की। नागपुर के चिटणीस पार्क में आयोजित श्रद्धांजलि पर कार्यक्रम ‘गुरु विनयांजलि’ में उन्होंने कहा कि महामहिम आचार्य विद्यासागर जी से पहली बार भेंट और चर्चा के बाद मेरे ध्यान में आया कि वे तर्क से तो बात रखते ही थे, उस तर्क के पीछे भी उनका एक सहज आत्मीयता का भाव होता था। हालांकि, मेरी उनकी पहली भेंट हुई थी। लेकिन, संत तो सबको अपना मानते हैं।</p>
<p>हम भी यदि संतों की बात मान कर चलें, तो सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने कहा कि उनका नहीं होना मेरे लिए वैयक्तिक हानि की बात है। आचार्य श्री जी के पास आधा घंटा भी बैठें, तो अगले वर्ष भर मन स्थिर रहता था। &#8216;स्व से शुरू करो उसी आधार पर उन्नति होती है। अपने देश को भारत कहो इंडिया मत कहो,&#8217; ऐसा उनका सदैव आग्रह प्रेरणा होती थी। आचार्य श्री जी कहते थे कि देश का उत्पादन जनता के द्वारा बढ़ाओ तो उनको रोजगार मिलेगा और देश को लाभ मिलेगा, ऐसा काल सुसंगत मार्गदर्शन एवम् उपदेश उनसे मिलता था। व्यक्तिगत आचरण या राष्ट्र के विषय में उनकी बातें हम सब के लिए आगे के लिए मार्गदर्शन हैं। उनके जाने से मेरी व्यक्तिगत हानि हुई है, उसका तो कोई उपाय नहीं, लेकिन, हम उनके बताए मार्गदर्शन पर सदैव चलें, तो हमेशा के लिए उन्नति कर सकते हैं। मैं उनकी स्मृति में अपनी श्रद्धांजलि अर्पण करता हूं।</p>
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