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	<title>राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद से वैशाली का प्राकृत भाषा संस्थान फिर हुआ सक्रिय : लंबे समय से बंद शैक्षणिक गतिविधियां होंगी पुनः प्रारंभ </title>
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		<pubDate>Tue, 30 Jun 2026 13:40:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वैशाली स्थित बिहार सरकार के प्राकृत भाषा संस्थान की लंबे समय से बंद शैक्षणिक गतिविधियां पुनः शुरू करने का निर्णय लिया गया है। जैन समाज ने इसका श्रेय मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के मार्गदर्शन एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रयासों को दिया है। पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन दद्दू की यह रिपोर्ट। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वैशाली स्थित बिहार सरकार के प्राकृत भाषा संस्थान की लंबे समय से बंद शैक्षणिक गतिविधियां पुनः शुरू करने का निर्णय लिया गया है। जैन समाज ने इसका श्रेय मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के मार्गदर्शन एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रयासों को दिया है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन दद्दू की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर/वैशाली</strong>। भगवान महावीर स्वामी की जन्मस्थली वैशाली स्थित बिहार सरकार के प्राकृत भाषा शोध संस्थान की लंबे समय से बंद पड़ी शैक्षणिक गतिविधियों को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। संस्थान में नियुक्तियां रुकने तथा प्रशासनिक कारणों से इसकी गतिविधियां लगभग ठप हो गई थीं। अब इसे पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।</p>
<p><strong>समाज जागरूकता अभियान से मिली नई दिशा</strong></p>
<p>राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं संघ के प्रमुख राकेश जैन गोहिल ने बताया कि इस विषय को लेकर परम पूज्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने समाज को जागरूक करते हुए प्रेरणा, आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्रदान किया। उनके आह्वान पर राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ ने देशभर में जनजागरण अभियान चलाया तथा बिहार के राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं संबंधित विभागों को विभिन्न स्थानों से ज्ञापन सौंपे गए।</p>
<p><strong>बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय</strong></p>
<p>राजेश जैन दद्दू ने बताया कि 16 जून को बिहार सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा जैन समाज के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए आमंत्रित किया गया। बैठक में बिहार राज्य तीर्थ क्षेत्र कमेटी के मानद मंत्री पराग जैन की विशेष भूमिका रही। सर्वसम्मति से निम्न निर्णय लिए गए—</p>
<p>&#8211; संस्थान में रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।</p>
<p>&#8211; वर्तमान शैक्षणिक सत्र से संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियां पुनः प्रारंभ होंगी।</p>
<p>&#8211; प्राकृत भाषा के त्रैमासिक एवं छह माह के अल्पकालीन पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे।</p>
<p><strong>गुरुदेव का संदेश</strong></p>
<p>जैन समाज के अनुसार इस उपलब्धि में परम पूज्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज तथा मुनि श्री अभयसागर जी महाराज का विशेष मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि &#8220;प्राकृत भाषा हमारी मातृभाषा है। शोध संस्थान की गतिविधियों का पुनः प्रारंभ होना जैन समाज के लिए गर्व का विषय है। हालांकि जब तक यह संस्थान पूर्ववत स्थायी रूप से स्थापित नहीं हो जाता, तब तक समाज और राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ को जागरूकता बनाए रखनी होगी। शांति मत लेना।&#8221;</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि जिन शासन एकता संघ के सतत प्रयासों से बोर्ड की बैठक में आवश्यक संशोधन संभव हो सके तथा इस अभियान को वर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक बताया।</p>
<p><strong>समाज में हर्ष का वातावरण</strong></p>
<p>इस निर्णय पर वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन, अमित कासलीवाल, आनंद नवीन गोधा, मयंक जैन, टी.के. वेद, हंसमुख गांधी, डी.के. जैन (डीएसपी), श्रीमती पुष्पा कासलीवाल, श्रीमती मुक्ता जैन एवं श्रीमती रेखा जैन सहित अनेक समाजजनों ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने मुनि श्री सुधासागर जी महाराज, मुनि श्री अभयसागर जी महाराज तथा राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे जैन समाज और प्राकृत भाषा के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।</p>
<p><strong>प्राकृत भाषा संरक्षण की दिशा में अहम कदम</strong></p>
<p>समाज के प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान की गतिविधियां पुनः प्रारंभ होने से प्राकृत भाषा के अध्ययन, शोध एवं संरक्षण को नई गति मिलेगी तथा आने वाली पीढ़ियों को जैन आगम एवं प्राचीन साहित्य के अध्ययन का बेहतर अवसर प्राप्त होगा।</p>
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		<title>मेनका गांधी जैन समाज से माफी मांगें : पिच्छिका संबंधी बयान पर विश्व जैन संगठन और समाजजनों ने जताई आपत्ति </title>
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		<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:27:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पिच्छिका के उपयोग को लेकर दिए गए कथित बयान पर विश्व जैन संगठन एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ से जुड़े पदाधिकारियों और समाजजनों ने आपत्ति जताई है। उन्होंने बयान को निराधार बताते हुए मेनका गांधी से सार्वजनिक क्षमा मांगने की मांग की है। पढ़िए इंदौर ब्यूरो की यह रिपोर्ट। इंदौर। पिच्छिका के उपयोग को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पिच्छिका के उपयोग को लेकर दिए गए कथित बयान पर विश्व जैन संगठन एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ से जुड़े पदाधिकारियों और समाजजनों ने आपत्ति जताई है। उन्होंने बयान को निराधार बताते हुए मेनका गांधी से सार्वजनिक क्षमा मांगने की मांग की है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर ब्यूरो की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। पिच्छिका के उपयोग को लेकर हाल ही में दिए गए कथित बयान पर जैन समाज में नाराजगी देखने को मिल रही है। विश्व जैन संगठन एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ से जुड़े पदाधिकारियों और समाजजनों ने इसे जैन धर्म एवं संस्कृति की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया है।</p>
<p><strong>बयान को बताया निराधार</strong></p>
<p>धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू, वरिष्ठ समाजसेवी सलेकचंद जैन, राकेश जैन, मयंक जैन, डॉ. जैनेन्द्र जैन, अमित कासलीवाल, हंसमुख गांधी, टीके वेद सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि संबंधित बयान तथ्यहीन, मनगढ़ंत और अप्रमाणिक है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म अहिंसा, करुणा और जीव संरक्षण के सिद्धांतों पर आधारित है।</p>
<p><strong>पिच्छिका के उपयोग का बताया महत्व</strong></p>
<p>समाजजनों ने कहा कि जैन साधु-संत पिच्छिका का उपयोग सूक्ष्म जीवों की रक्षा और अहिंसा के पालन के लिए करते हैं। उनका कहना है कि यह संयम और जीवदया का प्रतीक है तथा इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की हिंसा से बचना है।</p>
<p><strong>विशेषज्ञों ने रखे तर्क</strong></p>
<p>डॉ. जैनेन्द्र जैन ने कहा कि जैन धर्म सदैव जीव मात्र की रक्षा का संदेश देता है। समाजजनों ने यह भी कहा कि मोर प्राकृतिक रूप से अपने पंख त्यागता है और परंपरागत रूप से प्राप्त ऐसे पंखों का ही धार्मिक उपयोग किया जाता है।</p>
<p><strong>धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप</strong></p>
<p>विश्व जैन संगठन और राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि इस प्रकार के वक्तव्यों से जैन समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से तथ्य स्पष्ट करने और समाज से क्षमा मांगने की मांग की है।</p>
<p><strong>कानूनी कार्रवाई की चेतावनी</strong></p>
<p>संगठनों ने कहा कि यदि जल्द ही इस विषय पर स्पष्टीकरण या क्षमा याचना नहीं की जाती है तो आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। समाजजनों ने सभी समुदायों की धार्मिक मान्यताओं के प्रति सम्मान बनाए रखने की अपील की है।</p>
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		<title>भारतवर्षीय जैन समाज ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा न्याय : शांतिप्रिय जैन समाज के साथ तथ्यहीन मुद्दे उठाकर अपमानजनक रूप से हो रहा भेदभाव  </title>
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		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 03:39:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महाराष्ट्र में तथ्यहीन मुद्दों पर जैन समाज का अपमान भारत वर्षीय जैन समाज नहीं सहेगा। सरकार से मांग की गई है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। महाराष्ट्र में तथ्यहीन मुद्दों पर जैन समाज का अपमान भारत वर्षीय जैन समाज नहीं सहेगा। सरकार से मांग की गई है कि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>महाराष्ट्र में तथ्यहीन मुद्दों पर जैन समाज का अपमान भारत वर्षीय जैन समाज नहीं सहेगा। सरकार से मांग की गई है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> महाराष्ट्र में तथ्यहीन मुद्दों पर जैन समाज का अपमान भारत वर्षीय जैन समाज नहीं सहेगा। सरकार से मांग की गई है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। एक तरफ तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री द्वारा जैन समाज की सराहना के बाद भी सोशल मीडिया पर भेदभाव का आरोप लगाया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार के प्रमुख पुलिस अधिकारी से सार्वजनिक बयान जारी करने की मांग की। भारतवर्षीय जैन समाज एवं विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र डीजीपी, मुंबई पुलिस से सोशल मीडिया पर जैन समाज के विरुद्ध तथ्यहीन व अपमानजनक सामग्री पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। भारतवर्षीय जैन समाज एवं विश्व जैन संगठन, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ का कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं जैन समाज के देश की उन्नति, जीडीपी में योगदान, निस्वार्थ समाज सेवा और अहिंसा के प्रचार की सराहना की जाती है। इसके बावजूद सोशल मीडिया का सहारा लेकर शांतिप्रिय जैन समाज के साथ तथ्यहीन मुद्दे उठाकर अपमानजनक रूप से भेदभाव किया जा रहा है। विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन एवं प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने सरकार से मुख्य मांगें एवं समाज ने सीएमओ महाराष्ट्र, महाराष्ट्र के डीजीपी, मुंबई पुलिस को संबोधित कर मांग रखी कि जैन समाज विरोधी गतिविधियों पर त्काल सख्त कार्रवाई की जाए प्रमुख पुलिस अधिकारी द्वारा सार्वजनिक बयान जारी कर समाज को न्याय प्रदान किया जाए।</p>
<p>इस संबंध में भाजपा को भी अवगत कराया गया है।</p>
<p><strong>अहिंसा का संदेश </strong></p>
<p>भारतवर्षीय जैन समाज ने कहा कि अहिंसा का पालन और प्रचार करने वाला जैन समाज राष्ट्र निर्माण में सहभागी रहा है। ऐसे समाज के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है।</p>
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		<title>बिहार के प्राकृत शोध संस्थान पर सरकार से सकारात्मक वार्ता : बिहार सरकार से राज्यपाल ने तलब की रिपोर्ट </title>
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		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 14:38:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत वर्षीय जैन समाज की ओर से वैशाली स्थित संस्थान को शिक्षा से संस्कृति विभाग में स्थानांतरण पर रोक की मांग की जा रही है। विगत 16 जून को राज्यपाल ने बिहार सरकार से रिपोर्ट तलब की है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; &#160; इंदौर। भारत वर्षीय जैन समाज की ओर से वैशाली स्थित संस्थान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भारत वर्षीय जैन समाज की ओर से वैशाली स्थित संस्थान को शिक्षा से संस्कृति विभाग में स्थानांतरण पर रोक की मांग की जा रही है। विगत 16 जून को राज्यपाल ने बिहार सरकार से रिपोर्ट तलब की है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> भारत वर्षीय जैन समाज की ओर से वैशाली स्थित संस्थान को शिक्षा से संस्कृति विभाग में स्थानांतरण पर रोक की मांग की जा रही है। विगत 16 जून को राज्यपाल ने बिहार सरकार से रिपोर्ट तलब की है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि बिहार सरकार से राज्यपाल ने रिपोर्ट मांगी है। 16 जून को बिहार सरकार के कला-संस्कृति सचिव के साथ बैठक हुई। राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने व्यापक ज्ञापन अभियान चलाया था। भगवान महावीर स्वामी की पावन जन्मस्थली वैशाली में स्थित प्राकृत भाषा एवं अहिंसा शोध संस्थान को बिहार सरकार द्वारा शिक्षा विभाग से संस्कृति विभाग में स्थानांतरित करने और शैक्षणिक गतिविधियां बंद करने के निर्णय के विरोध में राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने व्यापक अभियान चलाकर विरोध जताया था।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>समाज की एकजुटता से बनी बात </strong></p>
<p>संघ के राकेश जैन गोहिल ने बताया कि यह अभियान मुनि श्री सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा और आशीर्वाद और मुनिश्री श्री अभय सागर जी के मार्गदर्शन में चलाया गया। भारत वर्षीय जैन समाज की एकजुटता के परिणाम स्वरूप बिहार के राज्यपाल की ओर से संस्कृति विभाग से इस विषय में रिपोर्ट तलब की गई। 16 जून मंगलवार को कला एवं संस्कृति विभाग के मुख्य सचिव के साथ जैन समाज के प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक की गई। सरकार ने इसमें सकारात्मकता दिखाई है।</p>
<p><strong>सरकार ने जैन समाज की मांगों और भावनाओं को समझा</strong></p>
<p>मानद मंत्री, बिहार राज्य तीर्थ क्षेत्र कमेटी पराग जैन, राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ व अन्य विशिष्ट महानुभावों के प्रयासों से यह बैठक सकारात्मक वातावरण में हुई। बैठक में सरकार ने जैन समाज की मांगों और भावनाओं को गंभीरता से स्वीकार किया तथा विषय पर सकारात्मक दृष्टिकोण दर्शाया। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ ने कहा कि बैठक की कार्रवाई का विवरण शीघ्र ही समाज के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ, मुनिश्री के मार्गदर्शन में समाज के दायित्ववान और विशिष्ट जनों के साथ सतत संपर्क तथा संवाद बनाए हुए हैं।</p>
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		<title>पुणे विश्वविद्यालय में दिगंबर संत को प्रवेश से रोका : जैन विरासत संगोष्ठी का था आयोजन, जैन समाज में रोष </title>
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		<pubDate>Sun, 31 May 2026 07:51:13 +0000</pubDate>
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<p><strong>सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में &#8216;भारत की प्राचीन जैन विरासत&#8217; विषय पर आयोजित संगोष्ठी के दौरान आमंत्रित दिगम्बर मुनि श्री अक्षय सागर जी को कथित रूप से उनके पारंपरिक दिगम्बर स्वरूप के कारण प्रवेश से रोक दिया गया। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में &#8216;भारत की प्राचीन जैन विरासत&#8217; विषय पर आयोजित संगोष्ठी के दौरान आमंत्रित दिगम्बर मुनि श्री अक्षय सागर जी को कथित रूप से उनके पारंपरिक दिगम्बर स्वरूप के कारण प्रवेश से रोक दिया गया। यह मामला सामने आने के बाद देशभर के जैन समाज में आक्रोश व्याप्त हो गया है। विभिन्न जैन संगठनों ने इसे भारतीय श्रमण संस्कृति, तप, त्याग और अहिंसा की परंपरा का अपमान बताया है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन “दद्दू” और मयंक जैन ने कहा कि यह घटना केवल एक संत का अपमान नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी जैन श्रमण परंपरा और भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति का अपमान है।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला</strong></p>
<p>जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय के इतिहास एवं पुरातत्व विभाग द्वारा प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत जैन विरासत पर विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई थी। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मुनि श्री अक्षय सागर जी को आधिकारिक निमंत्रण पत्र देकर आमंत्रित किया गया था। बताया गया कि जब मुनि श्री कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, तब विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उनके पारंपरिक दिगम्बर स्वरूप को आधार बनाकर प्रवेश देने से इनकार कर दिया। इस घटना के बाद जैन समाज में भारी नाराजगी फैल गई। समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन ने कहा कि दिगम्बरत्व जैन साधुओं की पहचान है। यह केवल वस्त्र त्याग नहीं, बल्कि समस्त परिग्रहों के त्याग और तपस्या का प्रतीक है। इसे रोकना भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की अवमानना है।</p>
<p><strong>आयोजकों और प्रशासन से सवाल</strong></p>
<p>जैन समाज के प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सवाल उठाया कि जब कार्यक्रम जैन विरासत पर आधारित था और संत को आधिकारिक रूप से आमंत्रित किया गया था, तब उनके स्वरूप की जानकारी पहले से होने के बावजूद अंतिम समय में प्रवेश से क्यों रोका गया? राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ, विश्व जैन संगठन एवं अन्य जैन संस्थाओं ने विश्वविद्यालय के कुलपति से लिखित स्पष्टीकरण और सार्वजनिक माफी की मांग की है।</p>
<p><strong>संवैधानिक और कानूनी पक्ष</strong></p>
<p>जैन समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के पालन और प्रचार की स्वतंत्रता प्राप्त है। उनका कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय भी पूर्व में दिगम्बर जैन साधुओं के सार्वजनिक विचरण को धार्मिक स्वतंत्रता के अंतर्गत मान्यता दे चुका है।</p>
<p><strong>देशव्यापी विरोध की तैयारी</strong></p>
<p>मयंक जैन ने बताया कि इस घटना के विरोध में देशभर में जैन समाज द्वारा मौन प्रदर्शन और ज्ञापन देने की तैयारी की जा रही है। अखिल भारतीय जैन महासंघ ने भी इसे शैक्षणिक संस्थान में धार्मिक असहिष्णुता का उदाहरण बताया है। इंदौर दिगम्बर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद नवीन गोधा, महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, हर्ष जैन, सुशील पांड्या, टीके वेद, हंसमुख गांधी, डीके जैन, डीएसपी मनोहर झांझरी, फेडरेशन की राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका पुष्पा कासलीवाल, महिला परिषद की संभागीय अध्यक्ष मुक्ता जैन, साधना दगड़े, रेखा जैन श्रीफल सहित अनेक समाजजनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जैन समाज एवं पूज्य संत से खेद प्रकट करते हुए सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है।</p>
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		<title>बढ़ती चोरियों के मद्देनजर मंदिरों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों : समाज एवं मंदिर प्रबंधन के हित में महत्वपूर्ण अपील   </title>
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		<pubDate>Fri, 08 May 2026 13:44:29 +0000</pubDate>
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<p><strong>सकल जैन समाज के सभी मंदिरों के पदाधिकारियों, ट्रस्टियों एवं समाजजन से हमारे धर्म आयतनों संस्कृति एवं धरोहर की सुरक्षा के लिए विनम्र निवेदन है कि वर्तमान समय में देखने में आ रहा है कि जिन मंदिर में बढ़ती चोरी की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> सकल जैन समाज के सभी मंदिरों के पदाधिकारियों, ट्रस्टियों एवं समाजजन से हमारे धर्म आयतनों संस्कृति एवं धरोहर की सुरक्षा के लिए विनम्र निवेदन है कि वर्तमान समय में देखने में आ रहा है कि जिन मंदिर में बढ़ती चोरी की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू, मयंक जैन ने कहा कि मंदिरों में चांदी, अष्टधातु की प्रतिमाएं, पांडूकशिला, कलश, छत्र ,अष्ट प्रातिहारी एवं अन्य मूल्यवान रत्न एवं धातुओं से बनी अनेक जिन प्रतिमाएं एवं धार्मिक वस्तुएं स्थापित रहती हैं। वर्तमान समय में धातुओं के बढ़ती कीमतों के कारण असामाजिक तत्व इन वस्तुओं को सोना, चांदी समझ कर चोरी करने का प्रयास करते हैं। वर्तमान समय में कई बार लालच के कारण ऐसी घटनाएं घटित हो रही हैं। जिससे समाज को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन ने भारत वर्षीय जैन समाज से अपील करते हुए कहा कि अपने-अपने क्षेत्रों के धर्म आयतनों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे पुरे परिसर में अनिवार्य रूप से लगवाएं जाए। मंदिर के मुख्य द्वार, गर्भगृह, परिसर एवं प्रवेश-निकास के सभी स्थानों पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगवाकर 24 घंटे रिकॉर्डिंग का पुख्ता इंतजाम किया जाएं। मंदिर परिसर में 24 घंटे के लिए सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति करें। मंदिर परिसर में विशेष रूप से रात्रि के समय निगरानी और भी मजबूत हो।</p>
<p><strong>इन उपायों और प्रयासों को करना होगा </strong></p>
<p>धर्म आयतनों की मूल्यवान वस्तुओं का आवक-जावक रजिस्टर तैयार करें। मंदिर में रखी सभी जिन प्रतिमाएं, चांदी के बर्तन, कलश, छत्र भामडल आदि की पूरी सूची बनाकर एक रजिस्टर में दर्ज कर रिकार्ड रखा जाएं। वस्तु का नाम वजन संख्या और विशेष पहचान यह जानकारी नियमित रूप से ट्रस्ट कमेटी द्वारा अपडेट होती रहनी चाहिए। सुरक्षा के लिए बीमा करवाएं। जिससे, मंदिर की मूल्यवान वस्तुओं का बीमा करवाना भी एक सुरक्षित और समाज हित में अनुकरणीय कदम हो सकता है। आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए सेंसर वाले अलार्म सिस्टम लगवाएं। जिससे किसी भी संदिग्ध घटना ,गतिविधि पर तुरंत संकेत मिल सके। रात के समय मंदिर में अनावश्यक व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह बंद रखा जाए और केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही अनुमति दी जाए। स्थानीय एवं नजदीक पुलिस से संपर्क रखा जाए। नजदीकी पुलिस स्टेशन को मंदिर कमेटी द्वारा मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी दी जाएं और रात्रि के समय-पुलिस पेट्रोलिंग की मांग की जाएं।</p>
<p><strong>सर्व समाज की जिम्मेदारी तय करें</strong></p>
<p>समाज के जागरूक व्यक्तियों की एक सुरक्षा समिति बनाई जाए जो समय-समय पर सुरक्षा की समीक्षा करें। समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेंद्र जैन ने कहा कि जिन आयतन</p>
<p>केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और विश्वास की अटूट धरोहर है। इनकी सुरक्षा करना हम सभी समाज जन का सामूहिक कर्तव्य है। जैन राजनीतिक चेतना मंच के सुभाष काला ने कहा कि इस विषय को गंभीरता से लेते हुए भारत वर्षीय जैन समाज तुरंत आवश्यक कदम उठाएं।</p>
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		<title>राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ की महिला प्रदेश इकाई का गठन : आधे घंटे किए हुए पुण्य को 24 घंटे में गंवा रहे है लोग- मुनि श्री सुधा सागर जी  </title>
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		<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:12:21 +0000</pubDate>
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<p><strong>इस संसार में 90 प्रतिशत लोग खाकड़ा देते है,व्यक्ति जितना पुण्य करता है उतना गंवा भी देता है। हाथी होता वह तालाब में जाकर अपनी सूंड से अपने शरीर पर पानी डाल लेता है। यह उदगार नगर में विराजमान मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने धर्म सभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">मुंगावली से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुंगावली।</strong> इस संसार में 90 प्रतिशत लोग खाकड़ा देते है,व्यक्ति जितना पुण्य करता है उतना गंवा भी देता है। हाथी होता वह तालाब में जाकर अपनी सूंड से अपने शरीर पर पानी डाल लेता है और नहा लेता है मगर, वही हाथी जब तालाब से बाहर आता है और पीठ पर मिट्टी डाल लेता है। यह उदगार नगर में विराजमान मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने धर्म सभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यही स्थिति आप लोगों की है मंदिर में जाते हो, गुरुओं के पास जाते हो,स्नान करके आते हो। मंदिर में जाकर जाप भी कर लेता हूं। साधुओं के साथ अलाप भी कर लेता हूं। इंसान से कही भगवान न बन जाऊं इस लिए थोड़ा पाप भी कर लेता हूं। यही दशा है गृहस्थ की।आधा घंटे मंदिर में पुण्य कमाता है उधर, 24 पाप में गंदा हो जाता है। मंदिर से निकलते ही पुनः राग देष, कषाय में लग जाता है दसलक्षण पर्व आते है ओर दस दिनों तक जमकर पूजा, पाठ,विधान आदि की क्रियाएं करता है ओर दस दिन बाद दसलक्षण के दिनों में सब्जी सस्ती हो जाती है मगर जैसे ही दसलक्षण खत्म होते हैं। वैसे ही सब्जियां महंगी हो जाती है। तुम जैन हो हाथी के समान इतनी मेहनत करके तुम तालाब में जाते हो और पुन: तुम खुद आकर मिट्टी डाल लेते हो कोई दूसरा डाले तो कोई बात नहीं मगर तुम खुद अपने किए कराए पर मिट्टी डाल लेते हो।</p>
<p><strong> कुछ नया करने का सौभाग्य मिला रहा</strong></p>
<p>इस दौरान राष्ट्रीय जिनशासन एकता की प्रेरणा से मुनि श्री के सान्निध्य में एकता संघ की महिला इकाई का गठन किया गया। इस दौरान महिला महा समिति कि राष्ट्रीय महासचिव इन्द्र गांधी ने कहा कि हम सब संगठन के लिए काम करें और कुछ अलग करके दिखाए। इस दौरान संगठन के सर कार्य वाहक राकेश बाबा ने कहा कि गुरुदेव के आशीर्वाद से अशोक नगर में राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान कुछ बिंदुओं पर निर्णय लिया गया था। हम सब उन्हीं पर अमल कर रहे हैं। इस दौरान मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि हम सब विभिन्न संगठनों के मध्य से काम कर रहे हैं लेकिन, सौभाग्य से हमें गुरुदेव के आशीर्वाद से हमें कुछ नया करने का सौभाग्य मिला रहा है इस हेतु तैयार रहना है इस दौरान जिला प्रमुख विपिन सिंघई निर्मल मिर्ची शैलेन्द्र दददा हेमंत टडैया नवीन सर सहित प्रमुख जनो ने विचार रखे।</p>
<p><strong>तुममें यह परिवर्तन कैसे आ गया</strong></p>
<p>उन्होंने कहा तुम स्कूल में पड़ कर कुछ बन गये तो आप अपनी योग्यता से उस स्कूल का गौरव लौटाने का पुरूषार्थ अपनी योग्यता से करों इसी प्रकार आपको अपने नगर में कुछ करने का सौभाग्य प्राप्त हो जरूर करना चाहिए करो कुछ तो करो कुछ ऐसा करो कि लोग तुम्हे देखते ही कहे कि तुममें यह परिवर्तन कैसे आ गया,आप सभी लोग जिस दिन उस मिट्टी डालना बंद कर दोगे तो सब कुछ बदल जाएगा वही मुनि श्री को नवधा पूर्वक आहार कराने का सौभाग्य संजय,शुभांशु सिंघई परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>जीव के ही पुदगल कर्म बंधते है वो ही उसमें शक्ति भरते हैं</strong></p>
<p>जीव के ही पुदगल कर्म बंधते हैं वो ही उसमें इतनी शक्ति भरते हैं जिससे वह सत्ता में पड़े रहते हैं। बाद में उदय में आते जीव ही तद रुप होकर व्यवहार में आ जाता है। ये सब निमित्त नैमित्तिक संबंध जीव ही स्वयं अपने आप बनता चला जाता है। आपको कोई जन्म मरण के कष्ट नहीं दे रहा जो आपने जो कर्म किये उन्हीं का फल समाने आते हैं जिस प्रकार आप लोग घंडी में चावी भर देते हैं और जो समय आपने भर दिया। उस समय ही अलार्म बजता है भले आपकी नींद ख़राब हो रही हो वो आप आपके द्वारा ही तो भरा गया इसी प्रकार आपको जो कर्म किए हैं उसी का फल आपके समाने होता है।</p>
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		<title>मध्यप्रदेश में गुरुवार से हुआ जनगणना का शुभारंभ : अपने-अपने नाम के साथ सिर्फ जैन ही लिखें, सरनेम नहीं लिखे </title>
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		<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 09:17:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रदेश में जनगणना का 16 अप्रैल गुरुवार से शुभारंभ हो रहा है। यह सिर्फ आंकड़ों की प्रक्रिया नहीं बल्कि हमारे राष्ट्र, हमारी जातिगत पहचान के भविष्य को सही दिशा देने का देशहित में महत्वपूर्ण कदम है। जनगणना देश की रीढ़ है, यह विकास की नींव है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। प्रदेश में जनगणना [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रदेश में जनगणना का 16 अप्रैल गुरुवार से शुभारंभ हो रहा है। यह सिर्फ आंकड़ों की प्रक्रिया नहीं बल्कि हमारे राष्ट्र, हमारी जातिगत पहचान के भविष्य को सही दिशा देने का देशहित में महत्वपूर्ण कदम है। जनगणना देश की रीढ़ है, यह विकास की नींव है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> प्रदेश में जनगणना का 16 अप्रैल गुरुवार से शुभारंभ हो रहा है। यह सिर्फ आंकड़ों की प्रक्रिया नहीं बल्कि हमारे राष्ट्र, हमारी जातिगत पहचान के भविष्य को सही दिशा देने का देशहित में महत्वपूर्ण कदम है। जनगणना देश की रीढ़ है, यह विकास की नींव है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं मयंक जैन ने कहा कि इस बार की जनगणना डिजिटल और आधुनिक तकनीक के साथ हो रही है। प्रदेशवासियों को इसमें पूर्ण निष्ठा और सत्यता के साथ भाग लेना चाहिए। यह जनगणना हमारे बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए है। सही आंकड़े बेहतर स्कूल, बेहतर अस्पताल और बेहतर अवसर देंगे।</p>
<p>प्रदेश में 16 से 30 अप्रैल तक स्व गणना का कार्य होगा। एक से 30 मई तक मकान सूचीकरण होगा। यह प्रक्रिया डिजिटल रूप से होगी। दद्दू ने समग्र जैन समाज से आह्वान करते हुए कहा कि अपने अपने नाम के साथ सिर्फ जैन ही लिखें सरनेम नहीं लिखे। जैन राजनीतिक चेतना मंच के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष काला ने भी समाजजनों से आह्वान किया है कि इस जनगणना में कोई परिवार जनगणना से वंचित ना रहे।</p>
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		<title>महावीर जयंती नहीं महावीर जन्म कल्याणक कहें : भारत वर्षीय जैन समाज ने सरकारों से अनुरोध किया जन्म कल्याणक महोत्सव घोषित करें </title>
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		<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 07:36:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इस वर्ष भगवान महावीर जन्म कल्याणक 31 मार्च को वर्तमान शासन नायक तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन ने जयंती के स्थान पर जन्म कल्याणक घोषित करने की मांग की। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। इस वर्ष भगवान महावीर जन्म कल्याणक 31 मार्च [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इस वर्ष भगवान महावीर जन्म कल्याणक 31 मार्च को वर्तमान शासन नायक तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन ने जयंती के स्थान पर जन्म कल्याणक घोषित करने की मांग की। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> इस वर्ष भगवान महावीर जन्म कल्याणक 31 मार्च को वर्तमान शासन नायक तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं मयंक जैन ने भारत वर्षीय समग्र जैन समाज एवं भारत के सभी जैन परिवारों और श्रावक-श्राविकाओं से निवेदन और अनुरोध करते हुए कहा कि 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक पर जयंती नहीं तीर्थंकर श्री महावीर जन्म कल्याणक ही प्रयोग करें। श्री महावीर स्वामी जयंती नही। दद्दू ने कहा कि हमारे तीर्थंकर कोई साधारण इंसान नही थे, महान महापुरुष थे।</p>
<p>जयंती इंसान की मनाई जाती है और पूरे भारत और विश्व में कोई भी जैन श्रावक-श्राविकाओं को यह मंजूर नहीं कि हमारे प्रभुजी के मान-सम्मान में जरा सी भी कमी आए। पूरे देश में सभी राज्य सरकारों से श्री महावीर स्वामी जयंती के स्थान पर तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी जन्म कल्याणक करवाने के प्रयास जारी हैं। उल्लेखनीय है कि विश्व जैन संगठन एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ की मांग पर गुजरात सरकार ने श्री महावीर जन्म कल्याणक कर भी दिया है। भारत वर्षीय जैन समाज अन्य प्रदेश सरकारों से अनुरोध करती है कि आप भी जयंती नहीं जन्म कल्याणक महोत्सव घोषित करें।</p>
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		<title>पुणे के एचएनडी हॉस्टल की भूमि बिक्री का विरोध तेज: भारत वर्षीय जैन समाज में रोष व्याप्त, सामाजिक संगठनों ने डील रद्द करने की मांग की  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/protests_intensify_against_sale_of_land_for_punes_hnd_hostel/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Oct 2025 10:52:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[पुणे स्थित ऐतिहासिक एचएनडी जैन हॉस्टल एवं भगवान महावीर स्वामी के मंदिर की भूमि की बिक्री को लेकर जैन समुदाय में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। 17 अक्टूबर को समाज के हजारों लोग, छात्र, साधु, संत और सामाजिक संस्थाओं ने सड़क पर उतरकर भूमि की बिक्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। पुणे से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पुणे स्थित ऐतिहासिक एचएनडी जैन हॉस्टल एवं भगवान महावीर स्वामी के मंदिर की भूमि की बिक्री को लेकर जैन समुदाय में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। 17 अक्टूबर को समाज के हजारों लोग, छात्र, साधु, संत और सामाजिक संस्थाओं ने सड़क पर उतरकर भूमि की बिक्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। <span style="color: #ff0000">पुणे से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पुणे।</strong> पुणे स्थित ऐतिहासिक एचएनडी जैन हॉस्टल एवं भगवान महावीर स्वामी के मंदिर की भूमि की बिक्री को लेकर जैन समुदाय में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। 17 अक्टूबर को समाज के हजारों लोग, छात्र, साधु, संत और सामाजिक संस्थाओं ने सड़क पर उतरकर भूमि की बिक्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी एवं अन्य साधु संतों के मंगल सानिध्य में रैली निकालकर विरोध दर्ज कराया गया। विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के अध्यक्ष मयंक जैन एवं हजारों समाजजनों ने स्पष्ट रूप से ट्रस्टियों एवं प्रशासन से मांग की है कि हॉस्टल व मंदिर की भूमि बिक्री को तुरंत रद्द किया जाए। संपूर्ण मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाए ताकि समाज के हित सुरक्षित रहें। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह भूमि समाज और छात्रों के कल्याण के लिए दान की गई थी, इसलिए इसका किसी बिल्डर को बेचना पूरी तरह अनुचित है। समाज ने इस प्रकरण की जांच के लिए सरकार व संबंधित विभागों से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित किया जा सके।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-92645" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251018-WA0013.jpg" alt="" width="1080" height="677" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251018-WA0013.jpg 1080w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251018-WA0013-300x188.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251018-WA0013-1024x642.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251018-WA0013-768x481.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251018-WA0013-320x200.jpg 320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251018-WA0013-990x621.jpg 990w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" />आंदोलन तेज करने की चेतावनी </strong></p>
<p>आंदोलनकारियों ने कहा कि अगर मांग नहीं मानी गई, तो विरोध और तेज़ किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी सेव एचएनडी हॉस्टल और कैंसल हॉस्टल सेल ट्रेंड कर रहा है। ’राष्ट्रीय जैन एकता संघ और विश्व जैन संगठन जैन राजनीतिक चेतना मंच समाज की भावनाओं के साथ खड़े हैं और समाज के वरिष्ठजन डॉ. जैनेंद्र जैन, टीके वेद, हंसमुख गांधी, सुभाष काला, नकुल पाटोदी, नरेंद्र वेद, राहुल जैन, पारस जैन पारसमणी ने मांग की है कि ट्रस्ट और प्रशासन से तात्कालिक कार्रवाई करे।</p>
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