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	<title>राष्ट्रपति &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>राष्ट्रपति &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आर्यिका साध्वियों साथ हुए हादसे के विरोध में जैन समाज का आक्रोश : सैकड़ों ने मौन प्रदर्शन कर राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन </title>
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		<pubDate>Tue, 26 May 2026 11:12:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मध्यप्रदेश के रीवा में हुई दु:खद घटना के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बकस्वाहा तहसील क्षेत्र की सकल जैन समाज ने भी एकजुट होकर अनुशासित शांतिपूर्ण मौन जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया। बकस्वाहा से पढ़िए, राजेश जैन रागी और रत्नेश जैन रागी की यह रिपोर्ट&#8230; बकस्वाहा। मध्यप्रदेश के रीवा में हुई दु:खद घटना के विरोध [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मध्यप्रदेश के रीवा में हुई दु:खद घटना के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बकस्वाहा तहसील क्षेत्र की सकल जैन समाज ने भी एकजुट होकर अनुशासित शांतिपूर्ण मौन जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया। <span style="color: #ff0000">बकस्वाहा से पढ़िए, राजेश जैन रागी और रत्नेश जैन रागी की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा।</strong> मध्यप्रदेश के रीवा में हुई दु:खद घटना के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बकस्वाहा तहसील क्षेत्र की सकल जैन समाज ने भी एकजुट होकर अनुशासित शांतिपूर्ण मौन जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया तथा पांच सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के नाम ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। रीवा में हुई जैन साध्वियों की मर्मान्तक सड़क दुर्घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है । बीती 20 मई को घटित इस हृदयविदारक हादसे में आर्यिका श्री श्रुतमति माताजी एवं श्री उपशममति माताजी के असामायिक समाधिमरण से देश भर के जैन समुदाय में गहरा शोक और भारी आक्रोश है। सम्पूर्ण देश में राष्ट्रव्यापी एक साथ सोमवार को शांतिपूर्ण मौन जुलूस प्रदर्शन की कड़ी में बकस्वाहा तहसील मुख्यालय पर क्षेत्रीय जैन समाज एकत्रित होकर सड़कों पर उतरकर अनुशासित शांतिपूर्ण मौन प्रर्दशन किया। समाज का स्पष्ट मत है कि धर्म ,अहिंसा, मानवता की रक्षा,अपरिग्रह और निहत्थे रहकर निरन्तर पैदल/विहार पदयात्रा करने जैन साधु &#8211; संतों की सुरक्षा के लिए सरकार अब मूकदर्शक बनी नहीं रह सकती। जैन समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि रीवा में जैन साध्वी आर्यिकाओं पर योजनाबद्ध इरादतन हमला हुआ है और निर्दोष आर्यिकाओं की हत्या राशिद अली की जिहादी कुत्सित मानसिकता का दुष्परिणाम है। जिसमें इस कार ड्राइवर के अतिरिक्त अनेक लोगों के शामिल होने की आशंका है, ईर्यापथ पर चलने वाले हमारे साधु मात्र चार हाथ की दूरी पर अपनी दृष्टि रखते हैं। सामने से आती हुई कार तक नहीं देखते हैं और इस हमले की चपेट में आ गए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक समाज विशेष का नहीं बल्कि संतों की सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है। लोगों ने मांग की है कि सभी दोषियों पर हत्या का प्रकरण दर्ज कर सभी को फांसी की सजा और बुलडोजर की कार्रवाई सुनिश्चित की जाना आवश्यक है।</p>
<p>इस राष्ट्रव्यापी अनुशासित शांतिप्रिय मौन प्रर्दशन आंदोलन में बकस्वाहा तहसील मुख्यालय पर हुए प्रदर्शन में ग्राम सुनवाहा , ग्राम मडदेवरा की जैन समाज बड़ी संख्या में शामिल हुई, इसी प्रकार तहसील क्षेत्र के बाजना ग्राम में हुए प्रदर्शन में ग्राम दरगुवां की समाज तथा क्षेत्र के ही ग्राम बम्हौरी में हुए प्रदर्शन में जैन तीर्थ नैनागिरि , ग्राम निवार, ग्राम मझगुवांघाटी के समाजजन, महिलाएं एवं युवा ,बच्चे भारी संख्या में शामिल हुए। जो पुरुष वर्ग सफेद वस्त्र तथा महिला वर्ग पीले वस्त्र पहने हुए थे, सभी ने एक स्वर में कहा कि अविलंब ही मांगों की पूर्ति एवं कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र व्यापक रूप दिया जाएगा। ज्ञापन में संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने,संत सुरक्षा प्रोटोकॉल तुरन्त लागू करने, घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी , राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाई जाने, संतों के विरुद्ध अपराधियों को विशेष संवेदनशील ‌श्रेणी मिलने, प्रशासन एवं समाज के बीच समन्वय तंत्र बनाने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की गई।</p>
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		<title>गाय का सम्मान हो गौ माता बचेगी तभी राष्ट्र बचेगा : गोरीलाल कुंज वृन्दावन के महंत श्री की अगुवाई में गौ माता की रक्षा के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन </title>
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		<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 10:03:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पूरे देश में तहसील और विकासखंड स्तर पर गौ माता सम्मान आह्वान के तहत प्रदर्शन करते हुए गौ माता की रक्षा करने हेतु विभिन्न बिंदुओं का ज्ञापन प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को भेजा जा रहा है। बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230; बकस्वाहा। पूरे देश में तहसील [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पूरे देश में तहसील और विकासखंड स्तर पर गौ माता सम्मान आह्वान के तहत प्रदर्शन करते हुए गौ माता की रक्षा करने हेतु विभिन्न बिंदुओं का ज्ञापन प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को भेजा जा रहा है। <span style="color: #ff0000">बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा।</strong> पूरे देश में तहसील और विकासखंड स्तर पर गौ माता सम्मान आह्वान के तहत प्रदर्शन करते हुए गौ माता की रक्षा करने हेतु विभिन्न बिंदुओं का ज्ञापन प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को भेजा जा रहा है। बकस्वाहा तहसील मुख्यालय में भी गौ माता की रक्षा हेतु हजारों सनातन धर्मावलंबियों ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन करते हुए बस स्टैंड पर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। इस पूरे कार्यक्रम की अगवाई श्रीधाम वृन्दावन स्थित गोरीलाल कुंज और पड़रिया धाम के महंत श्री किशोरदास जी महाराज ने की। महाराज श्री ने कहा कि जब गाय बचेगी तभी राष्ट्र बचेगा। उन्होंने गौ माता की महिमा का बखान करते हुए कहा कि गौ माता से ही सारे संकट दूर होंगे। तपती दोपहर के बावजूद हजारों की संख्या में सनातन धर्म प्रेमी ढोल-नगाड़ों और संकीर्तन के साथ सड़क पर उतरे और गौ माता की रक्षा के लिए अपनी एकजुटता दिखाई।</p>
<p><strong> अभ्यारण (गौशालाओं) के निर्माण की मांग की</strong></p>
<p>स्थानीय सिद्ध स्थल श्री बिहारी जी मंदिर में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए। यहीं से प्रदर्शन करते हुए बस स्टैंड कदम्ब मैदान पर पहुंचे , जहां विशाल सभा का आयोजन किया गया । सभा के माध्यम से लोगों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। प्रदर्शन के दौरान श्रद्धालुओं और साधु-संतों ने गौ संरक्षण को राष्ट्र की संस्कृति और सभ्यता आस्था से जोड़ते हुए गौ अभ्यारण (गौशालाओं) के निर्माण की मांग की। साथ ही देश में संचालित हो रहे बूचड़खानों को बंद करने की पुरजोर मांग भी उठाई गई।कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण और धार्मिक भावनाओं से ओतप्रोत रहा। इस अवसर पर महंत श्री किशोरदास जी महाराज ने कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति की आधारशिला है और उनकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने प्रशासन से गौ संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक , सामाजिक, राजनीतिक सहित विभिन्न संगठनों में काम करने वाले सनातनी बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।</p>
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		<title>जैन पदयात्रा को लेकर राष्ट्रपति को पत्र : गिरनार की पांचवीं टोंक पर सुरक्षा की मांग </title>
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		<pubDate>Wed, 25 Jun 2025 11:48:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गुजरात के गिरनार पर्वत स्थित जैन तीर्थ स्थल पर होने वाली धार्मिक पदयात्रा को लेकर विश्व जैन संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र भेजा है। पत्र में 2 जुलाई 2025 को भगवान नेमिनाथ के निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जैन पदयात्रा के दौरान सुरक्षा और न्यायालय के निर्देशों के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गुजरात के गिरनार पर्वत स्थित जैन तीर्थ स्थल पर होने वाली धार्मिक पदयात्रा को लेकर विश्व जैन संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र भेजा है। पत्र में 2 जुलाई 2025 को भगवान नेमिनाथ के निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जैन पदयात्रा के दौरान सुरक्षा और न्यायालय के निर्देशों के पालन की मांग की गई है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नई दिल्ली/जूनागढ़।</strong> गुजरात के गिरनार पर्वत स्थित जैन तीर्थ स्थल पर होने वाली धार्मिक पदयात्रा को लेकर विश्व जैन संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र भेजा है। पत्र में 2 जुलाई 2025 को भगवान नेमिनाथ के निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जैन पदयात्रा के दौरान सुरक्षा और न्यायालय के निर्देशों के पालन की मांग की गई है।</p>
<p>पत्र में बताया गया है कि गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश (स्पेशल सिविल एप्लीकेशन संख्या 6426/2004) दिनांक 17 फरवरी 2005 के अनुसार, गिरनार पहाड़ की पांचवीं टोंक तक जैन यात्रियों को धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना करने की अनुमति है। इस आदेश के पालन हेतु जूनागढ़ के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भी सूचित किया गया था।</p>
<p>विश्व जैन संगठन ने निवेदन किया है कि 2 जुलाई को महिलाएं, बच्चे समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूसरी, तीसरी, चौथी और विशेष रूप से पांचवीं टोंक तक पहुंचेंगे। संगठन ने आशंका जताई है कि पूर्व में इस क्षेत्र में यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार और हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं, जिनकी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रशासनिक हस्तक्षेप आवश्यक है।</p>
<div class="wp-block-pdfemb-pdf-embedder-viewer"><a href="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/courtorder-2005.pdf" class="pdfemb-viewer" style="" data-width="max" data-height="max" data-toolbar="bottom" data-toolbar-fixed="on">courtorder 2005</a></div>
<p>पत्र में एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि 24 मई 2025 को महाराष्ट्र के वासिम निवासी जैन श्रद्धालु आशीष प्रभाकर डहाले पर पांचवीं टोंक पर लाठी से हमला किया गया। यह घटना न्यायालय के स्पष्ट आदेशों और अल्पसंख्यक अधिकारों का उल्लंघन मानी जा रही है।</p>
<p>संगठन ने मांग की है कि पूरे यात्रा मार्ग, विशेषकर पांचवीं टोंक के भीतर और बाहर समुचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की बाधा या हिंसा से तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, संबंधित अधिकारियों से इस संबंध में ठोस कार्रवाई की जानकारी भी प्रदान करने का आग्रह किया गया है।</p>
<p>गौरतलब है कि गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक दिगंबर जैन समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है, जहां भगवान नेमिनाथ के प्राचीन चरणचिह्न और मूर्ति स्थित हैं।</p>
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		<title>राष्ट्रपति के सानिध्य में कार्यक्रम :  ‘जैन श्रुतवंदना’ से हुआ 58वें ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोह का शुभारंभ </title>
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		<pubDate>Mon, 19 May 2025 06:36:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोह का शुभारंभ डॉ. इन्दु जैन ‘राष्ट्र गौरव’ द्वारा प्रस्तुत जैन श्रुतवंदना के मंगलाचरण से हुआ। डॉ. इन्दु जैन ने प्राकृत-अपभ्रंश भाषा में निबद्ध जैन श्रुतदेवी (सरस्वती) की स्तुति का भावार्थ सहित सस्वर वाचन करते हुए समारोह की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को और भी समृद्ध किया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; नई दिल्ली। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोह का शुभारंभ डॉ. इन्दु जैन ‘राष्ट्र गौरव’ द्वारा प्रस्तुत जैन श्रुतवंदना के मंगलाचरण से हुआ। डॉ. इन्दु जैन ने प्राकृत-अपभ्रंश भाषा में निबद्ध जैन श्रुतदेवी (सरस्वती) की स्तुति का भावार्थ सहित सस्वर वाचन करते हुए समारोह की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को और भी समृद्ध किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोह का शुभारंभ डॉ. इन्दु जैन ‘राष्ट्र गौरव’ द्वारा प्रस्तुत जैन श्रुतवंदना के मंगलाचरण से हुआ। डॉ. इन्दु जैन ने प्राकृत-अपभ्रंश भाषा में निबद्ध जैन श्रुतदेवी (सरस्वती) की स्तुति का भावार्थ सहित सस्वर वाचन करते हुए समारोह की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को और भी समृद्ध किया।</p>
<p>इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने संस्कृत के महान विद्वान जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी को 58वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया। उन्होंने इस अवसर पर कवि गुलज़ार को भी परोक्ष रूप से सम्मानित करते हुए उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित कीं।</p>
<p>डॉ. इन्दु जैन, जो राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में विशेषज्ञ सलाहकार सदस्य हैं, भारत और विदेशों में जैन समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्हें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित देश की विभिन्न प्रमुख विभूतियों के समक्ष संचालन, मंगलाचरण और वैचारिक अभिव्यक्ति का अवसर मिलता रहा है।</p>
<p>अपने संबोधन में राष्ट्रपति महोदया ने साहित्य को समाज को जोड़ने और जागरूक करने का माध्यम बताया। उन्होंने भारतीय साहित्य की समृद्ध परंपरा की प्रशंसा करते हुए भारतीय ज्ञानपीठ ट्रस्ट के कार्यों की सराहना की, जो 1965 से विभिन्न भारतीय भाषाओं के श्रेष्ठ साहित्यकारों को सम्मानित कर रही है और भाषाई विविधता की गरिमा को सशक्त बना रही है।</p>
<p>इस गरिमामयी अवसर पर ज्ञानपीठ प्रवर परिषद की अध्यक्ष डॉ. प्रतिभा राय, ज्ञानपीठ ट्रस्ट के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विजेन्द्र जैन, प्रबंध न्यासी साहू अखिलेश जैन, के.एल. जैन, डॉ. प्रभाकिरण जैन सहित देश के कई प्रतिष्ठित साहित्यकार, कलाकार और शिक्षाविद् उपस्थित थे।</p>
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		<title>असफलता से सफलता की यात्रा: संघर्ष की आग में तपकर निखरता है इंसान  </title>
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		<pubDate>Fri, 16 May 2025 08:30:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मनुष्य के जीवन में असफलता एक ऐसा पड़ाव है, जहां उसके भीतर की सच्ची शक्ति का परीक्षण होता है। जैन दर्शन इसे आत्म-निर्माण की प्रयोगशाला मानता है। जब तक आत्मा अज्ञान, मोह और पाप कर्मों से बंधी है, तब तक असफलताएं उसका पीछा नहीं छोड़तीं। असफलता में छिपी सफलता के बारे में पढ़िए, ललितपुर से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मनुष्य के जीवन में असफलता एक ऐसा पड़ाव है, जहां उसके भीतर की सच्ची शक्ति का परीक्षण होता है। जैन दर्शन इसे आत्म-निर्माण की प्रयोगशाला मानता है। जब तक आत्मा अज्ञान, मोह और पाप कर्मों से बंधी है, तब तक असफलताएं उसका पीछा नहीं छोड़तीं। असफलता में छिपी सफलता के बारे में <span style="color: #ff0000">पढ़िए, ललितपुर से डॉ. सुनील जैन संचय की कलम से&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> हर इंसान के जीवन में एक ऐसा मोड़ आता है, जब वह असफलता का सामना करता है। कुछ लोग इस मोड़ पर थम जाते हैं तो कुछ लोग इसे एक सबक की तरह स्वीकार कर आगे बढ़ते हैं। वास्तव में असफलता कोई अंत नहीं, बल्कि सफलता की ओर पहला कदम होती है। यह हमें हमारी कमियों का आईना दिखाती है, हमारे भीतर सुधार की संभावनाओं को उजागर करती है और हमें मजबूत बनाती है।</p>
<p>उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।</p>
<p>न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः।।</p>
<p>केवल इच्छाओं से कार्य सिद्ध नहीं होते। जैसे सोते हुए सिंह के मुख में मृग स्वयं प्रवेश नहीं करते, वैसे ही बिना प्रयास के सफलता नहीं मिलती।</p>
<p><strong>असफलता क्यों ज़रूरी है?</strong></p>
<p>असफलता जीवन का वह शिक्षक है, जो बिना फीस लिए सबसे गहरी शिक्षा देता है। जब हम गिरते हैं, तब हमें यह समझ आता है कि हमें कहां सावधानी बरतनी चाहिए। यह अनुभव हमें परिपक्व बनाता है और हमारी सोच को गहराई देता है। थॉमस एडिसन ने जब बल्ब बनाने में 1000 बार असफलता का सामना किया तो उन्होंने कहा ‘मैं असफल नहीं हुआ, मैंने 1000 ऐसे तरीके खोज लिए जो काम नहीं करते।’</p>
<p><strong>सफलता की ओर कदम दर कदम </strong></p>
<p>1. दृष्टिकोण बदलें: असफलता को नकारात्मकता के रूप में नहीं, अवसर के रूप में देखें।</p>
<p>2. सीखने की जिज्ञासा रखें: हर असफलता में छिपे सबक को खोजें और अगली बार बेहतर करें।</p>
<p>3. लक्ष्य स्पष्ट रखें: छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं और हर कदम पर आत्ममंथन करें।</p>
<p>4. धैर्य और निरंतरता: सफलता एक दिन में नहीं मिलती, लेकिन हर दिन प्रयास करने से वह निश्चित रूप से मिलती है।</p>
<p>5. आत्मविश्वास बनाए रखें: खुद पर विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत है।</p>
<p><strong>प्रेरणा के कुछ उदाहरण </strong></p>
<p>एपीजे अब्दुल कलाम, एक साधारण मछुआरे के बेटे से भारत के मिसाइलमेन और राष्ट्रपति बनने तक का सफर, कई असफलताओं और संघर्षों से भरा था। जेके रोलिंग, जिन्हें हार्वर्ड समेत कई प्रकाशकों ने ठुकराया, उन्होंने अंततः हैरिपॉटर जैसी विश्वप्रसिद्ध कृति रची। असफलता से डरिए नहीं, उसे अपनाइए। वह आपके भीतर छिपे उस हीरे को तराशती है, जिसे दुनिया देखना चाहती है। सच्ची सफलता वही होती है जो संघर्षों के रास्ते से होकर आती है। जब आप गिरकर फिर उठते हैं, तब आपकी आत्मा और अधिक ऊर्जावान हो जाती है।</p>
<p><strong>असफलता से डरिए नहीं, उसे अपनाइए </strong></p>
<p>हमारे समाज में असफलता को अक्सर एक नकारात्मक अनुभव के रूप में देखा जाता है। जैसे ही कोई व्यक्ति असफल होता है, उस पर सवालों की बौछार शुरू हो जाती है। ‘क्या किया?’ ‘क्यों नहीं हुआ?’, ‘अब आगे क्या?’। लेकिन अगर हम गहराई से सोचें, तो पाएंगे कि असफलता ही वह मंच है जहां से सफलता की असली यात्रा शुरू होती है।</p>
<p>असफल होना इस बात का संकेत है कि हमने प्रयास किया, कुछ नया करने की कोशिश की। और जहां प्रयास होते हैं, वहां गलतियां भी होती हैं। यही जीवन का हिस्सा है। असफलता हमें झकझोरती है, पराजित नहीं करती। वह हमें रुकने नहीं, समझने और संवरने का अवसर देती है।</p>
<p><strong>असफलता से घबराने की जगह उसे समझें</strong></p>
<p>1. खुद से सवाल करें: असफलता क्यों हुई? क्या तैयारी में कमी थी? क्या दृष्टिकोण सही था?</p>
<p>2. सीख को स्वीकारें: हर असफलता कोई न कोई सबक जरूर देती है। उसे पहचानें और अगली बार उससे बचें।</p>
<p>3. स्वयं को प्रेरित करें: खुद को याद दिलाएं कि असफलता स्थायी नहीं है। यह सिर्फ एक पड़ाव है, मंज़िल नहीं।</p>
<p>इतिहास गवाह है अल्बर्ट आइंस्टीन को बचपन में मंदबुद्धि समझा गया था। अमिताभ बच्चन को ऑल इंडिया रेडियो से उनकी आवाज़ के कारण ठुकरा दिया गया था। महात्मा गांधी को दक्षिण अफ्रीका में ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया था, और उसी घटना ने उनके भीतर वह चिंगारी भरी जिससे स्वतंत्रता संग्राम की लौ जली।</p>
<p>इन सब उदाहरणों में एक बात समान है। उन्होंने असफलता को अपनाया, उससे सीखा और आगे बढ़े।</p>
<p>मनुष्य के जीवन में असफलता एक ऐसा पड़ाव है जहां उसके भीतर की सच्ची शक्ति का परीक्षण होता है। सामान्य दृष्टिकोण से यह केवल विफलता प्रतीत होती है, लेकिन जैन दर्शन इसे आत्म-निर्माण की प्रयोगशाला मानता है। यह दर्शन कहता है कि जब तक आत्मा अज्ञान, मोह और पाप कर्मों से बंधी है, तब तक असफलताएं उसका पीछा नहीं छोड़तीं। किंतु जैसे-जैसे आत्मा सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र की ओर बढ़ती है, वह कर्मों की परतों को हटाकर अपनी उज्ज्वलता को प्रकट करती है।</p>
<p>असफलता कोई कलंक नहीं, बल्कि एक गौरव है। वह दर्शाती है कि आपने कुछ ऐसा करने की कोशिश की जो आसान नहीं था।</p>
<p>इसलिए अगली बार जब जीवन आपको गिरा दे, तो मुस्कराइए और कहिए दृ</p>
<p>‘मैं गिरा जरूर हूं। पर रुका नहीं हूं। अगली बार और बेहतर होकर लौटूंगा’</p>
<p>याद रखिए, असफलता से डरिए नहीं, उसे अपनाइए क्योंकि, यही सफलता का असली मार्ग है।</p>
<p>गिरना नहीं है हार का नाम,</p>
<p>उठना ही तो है सच्चा काम।</p>
<p>रास्ते भले हों कांटों भरे,</p>
<p>हौसले हों तो क्या नहीं करे।</p>
<p>हर असफलता एक सीढ़ी बने,</p>
<p>सपनों का सूरज फिर से तले।</p>
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		<title>राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री ने किया राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन : डॉ. इंदु जैन ने किया महावीराष्टक स्तोत्र का वाचन  </title>
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		<pubDate>Sat, 01 Feb 2025 15:03:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शहीद दिवस पर डॉ. इंदु जैन ने प्रार्थना सभा में महावीराष्टक स्तोत्र के रूप में महावीर स्वामी की स्तुति का सस्वर वाचन किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, तीनों सेना अध्यक्षों तथा कई विशिष्ट व्यक्तित्व मौजूद रहे। पढ़िए दिल्ली से यह खबर&#8230; नईदिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शहीद दिवस पर डॉ. इंदु जैन ने प्रार्थना सभा में महावीराष्टक स्तोत्र के रूप में महावीर स्वामी की स्तुति का सस्वर वाचन किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, तीनों सेना अध्यक्षों तथा कई विशिष्ट व्यक्तित्व मौजूद रहे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए दिल्ली से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>नईदिल्ली।</strong> राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के 77वें बलिदान दिवस और शहीद दिवस समारोह के तहत प्रातः समाधि स्थल, राजघाट और दिन में गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति तीस जनवरी मार्ग में सर्वधर्म प्रार्थना और भक्ति संगीत का आयोजन किया गया। राजघाट में सुबह की सभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, तीनों सेना अध्यक्षों तथा कई विशिष्ट व्यक्तियों ने बापू की समाधि पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। भारतीय सेना पद्धति के अनुसार शहीदों को सलामी दी गई। इस अवसर पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा में धार्मिक प्रार्थनाओं के बाद राष्ट्र गौरव डॉ. इंदु जैन ने गांधी जी के मुख्य विचारों को अभिव्यक्त किया और पं.साजन मिश्रा, स्वरांश मिश्रा ने रामधुन प्रस्तुत की।</p>
<p>मध्याह्न गांधी स्मृति में आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ जी, गाँधी स्मृति के उपाध्यक्ष विजय गोयल , देश-विदेश से पधारे अतिथिगण एवं सभी विशिष्ट जनों ने बापू की समाधि पर पुष्प अर्पित करके उन्हें नमन किया।</p>
<p><strong>महावीर स्वामी की स्तुति की</strong></p>
<p>प्रार्थना सभा में अंगवस्त्र द्वारा सभी धर्म प्रतिनिधियों के साथ ही जैन प्रतिनिधि डॉ. इन्दु जैन का सम्मान किया गया। विश्व शांति की भावना से &#8220;जैन प्रार्थना&#8221; के अंतर्गत राष्ट्र गौरव डॉ. इन्दु जैन ने &#8220;णमो जिणाणं-जय जिनेन्द्र-जय ऋषभदेव-जय महावीर&#8221; के साथ ही 24 वर्षों बाद श्री भगवान महावीर केन्द्र ,अहिंसा स्थल, दिल्ली में 9-10 अप्रैल 2025 से प्रारंभ होने जा रहे महामस्तकाभिषेक का उद्घोष करते हुए महावीराष्टक स्तोत्र के रूप में महावीर स्वामी की स्तुति का सस्वर वाचन किया। जो पूरे वातावरण में गूंज गया।</p>
<p><strong>धर्म प्रभावना कर रही हैं इंदु जैन</strong></p>
<p>ज्ञातव्य है कि डॉ. इन्दु राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में विशेषज्ञ सलाहकार सदस्य होने के साथ ही भारत की प्रतिष्ठित संस्थाओं से जुड़कर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय रूप में जैन धर्म का प्रतिनिधित्व करते हुए धर्म प्रभावना कर रही हैं। सर्वधर्म प्रार्थना एवं सुविख्यात गायिका कौशिकी चक्रवर्ती के सुमधुर भक्ति संगीत एवं बच्चों के समूह गान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सभी धर्म के प्रतिनिधियों का अभिवादन किया।</p>
<p><strong>महामस्तकाभिषेक में आने का निवेदन</strong></p>
<p>अभिवादन करते हुए डॉ. इन्दु जैन ने माननीय प्रधानमंत्री जी से भगवान महावीर केन्द्र ,अहिंसा स्थल,दिल्ली में 9-10 अप्रैल 2025 से होने जा रहे महामस्तकाभिषेक में आने का निवेदन भी किया । श्रद्धांजलि सभा में सर्वधर्म प्रार्थना सभा के अंतर्गत जैन, बौद्ध, ईसाई, पारसी, बहाई, यहूदी, मुस्लिम, सिक्ख, हिन्दु सभी धर्म के प्रतिनिधियों ने बापू को नमन करते हुए विश्व शांति की भावना से प्रार्थनाएं कीं।</p>
<p><strong>हुआ सीधा प्रसारण</strong></p>
<p>गांधी जी की स्मृति में आयोजित संगीतमय भावांजलि, सर्वधर्म प्रार्थना एवं भक्ति संगीत का सीधा प्रसारण दूरदर्शन, आकाशवाणी एवं विभिन्न समाचार चैनल के माध्यम से लाखों लोगों तक पहुंचा।</p>
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		<title>डॉ. राजाराम जैन को पद्मश्री : जैन समाज गौरवान्वित हुआ  </title>
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		<pubDate>Fri, 10 May 2024 09:47:09 +0000</pubDate>
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<p><strong>जैन रत्न समाज गौरव सुप्रसिद्ध शिक्षा विद जैन मूर्धन्य विद्वान डॉ. राजाराम जैन को भारत की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के द्वारा राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन रत्न समाज गौरव सुप्रसिद्ध शिक्षा विद जैन मूर्धन्य विद्वान डॉ. राजाराम जैन को भारत की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के द्वारा राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जैन समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि समग्र जैन समाज के लिए बहुत ही गौरवशाली क्षण हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-60288" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240510-WA0013.jpg" alt="" width="584" height="343" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240510-WA0013.jpg 584w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240510-WA0013-300x176.jpg 300w" sizes="(max-width: 584px) 100vw, 584px" />आप के इस सम्मान से इंदौर दिगम्बर जैन समाज सामाजिक संसद के मंत्री डॉ. जैनेन्द्र जैन, महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश विनायका, मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू, सुशील पांड्या, हंसमुख गांधी, टीके वेद, परवार समाज महिला संगठन की अध्यक्ष मुक्ता जैन, सारिका जैन पुष्पा कासलीवाल आदि समाज जनों ने आपके यशस्वी जीवन की मंगल कामनाएं प्रेषित कर बधाई दी।</p>
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		<title>राष्ट्रपति ने दिया महावीर जन्मकल्याणक पर संदेश :  देश को आज भी महावीर की आवश्यकता </title>
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		<pubDate>Sun, 02 Apr 2023 08:14:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर (राजेश जैन दद्दू)। राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्म का देशवासियों को विशेषकर जैन समुदाय के लोगों को महावीर जयंती की अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि आज भी इस देश को महावीर की आवश्यकता है और महावीर स्वामी जी का संदेश जिओ और जीने दो आज भी प्रासंगिक है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर (राजेश जैन दद्दू)।</strong> राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्म का देशवासियों को विशेषकर जैन समुदाय के लोगों को महावीर जयंती की अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।</p>
<p><iframe title="राष्ट्रपति ने दिया महावीर जन्मकल्याणक पर संदेश" width="1320" height="743" src="https://www.youtube.com/embed/dmmo_9lVDME?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" allowfullscreen></iframe></p>
<p>उन्होंने कहा कि आज भी इस देश को महावीर की आवश्यकता है और महावीर स्वामी जी का संदेश जिओ और जीने दो आज भी प्रासंगिक है।</p>
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		<title>अहिंसा की प्रबल समर्थक हैं नई राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू &#8211; अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Jul 2022 05:00:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[shrrephal news]]></category>
		<category><![CDATA[अहिंसा]]></category>
		<category><![CDATA[द्रौपदी मुर्मू]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रतापगढ़/बांसवाड़ा । प्रख्यात जैन संत अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज ने कहा है कि भारत की अगली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पू्र्ण शाकाहारी रहकर भगवान महावीर के अहिंसा के सिद्दान्त का पालन किया है। वह सच्चे अर्थों में अहिंसा की अनुयायी हैं। उनका अपने खाने में प्याज और लहसुन तक का भी इस्तेमाल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>प्रतापगढ़/बांसवाड़ा ।</strong> प्रख्यात जैन संत अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज ने कहा है कि भारत की अगली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पू्र्ण शाकाहारी रहकर भगवान महावीर के अहिंसा के सिद्दान्त का पालन किया है। वह सच्चे अर्थों में अहिंसा की अनुयायी हैं। उनका अपने खाने में प्याज और लहसुन तक का भी इस्तेमाल नहीं करना यह प्रदर्शित करता है कि उन्होंने राजनीति में रहते हुए भी सात्विक तरीके के जीवन जिया है। उनका यह आचरण बताता है कि वे सच्चे अर्थों में भगवान महावीर के बताए मार्ग का अनुसरण करने वाली हैं।<br />
मुनिश्री ने कहा कि यदि सभी देशों के लोग भगवान महावीर के बताए मार्ग का अनुसरण करते हुए जीवों पर दया की भावना रखें तो कभी युद्ध की नौबत ही नहीं आए।<br />
अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज ने कहा है कि आजादी के 75 साल बाद भारत को पहली आदिवासी राष्ट्रपति मिली हैं। आशा है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू आदिवासियों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में सार्थक कदम उठाएंगी। साथ ही कमजोर और निचले तबको की महिलाओं के सशक्तिकरण की राह भी आसान करेंगी।<br />
मुनिश्री ने मुर्मू के सम्बंध में एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि अक्टूबर 2016 में जब मूर्मू झारखंड की राज्यपाल थीं तब जैन समाज के कुछ लोग उन्हें शाकाहार प्रदर्शनी का उद्घाटन का आमंत्रण देने गए। जब द्रौपदी मुर्मू से उन लोगों ने पूछा कि शाकाहार के संदर्भ में आपके क्या विचार है, तो उन्होंने कहा था कि मैं कट्टर शाकाहारी हूं। मेरे राज्यपाल बनने के बाद यहां के राजभवन में मांसाहार नहीं बनाया गया। राजभवन परिसर में रहने वाले सभी अधिकारियों व कर्मियों के आवासों में भी मांस-मछली का बनना प्रतिबंधित था।<br />
बता दें कि मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण 25 जुलाई को होगा।</p>
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		<title>द्रौपदी मुर्मू निर्वाचित होने पर जैन समाज में हर्ष</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Jul 2022 15:38:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[draupadi murmu]]></category>
		<category><![CDATA[द्रौपदी मुर्मू]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूज सौजन्य- राजकुमार अजमेरा झुमरी तिलैया (कोडरमा)। झारखंड की पूर्व राज्यपाल माननीय द्रौपदी मुर्मू जी के राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित होने पर जैन समाज ने हर्ष व्यक्त किया और बधाई दी है। निवर्तमान पार्षद पिंकी जैन, जैन समाज के अध्यक्ष प्रदीप जैन पांड्या, मंत्री ललित जैन सेठी, जैन विद्यालय के डायरेक्टर किशोर जैन पांड्या दिल्ली, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000">न्यूज सौजन्य- राजकुमार अजमेरा</span></p>
<p><strong>झुमरी तिलैया (कोडरमा)।</strong> झारखंड की पूर्व राज्यपाल माननीय द्रौपदी मुर्मू जी के राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित होने पर जैन समाज ने हर्ष व्यक्त किया और बधाई दी है। निवर्तमान पार्षद पिंकी जैन, जैन समाज के अध्यक्ष प्रदीप जैन पांड्या, मंत्री ललित जैन सेठी, जैन विद्यालय के डायरेक्टर किशोर जैन पांड्या दिल्ली, संयोजक सुनील छाबड़ा ने शुभकामनाएं व्यक्त की। निवर्तमान पार्षद पिंकी जैन ने कहा कि माननीय द्रौपदी मुर्मू जी कोरोना काल में  बच्चों की शिक्षा के प्रति बहुत गंभीर थीं। कोरोना काल में जैन विद्यालय, झुमरी तिलैया मे पढ़ने वाले सैकड़ों जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क ऑनलाइन पढ़ाई का उन्होंने उद्घाटन भी किया था, तब मुझे उनसे लाइव बात करने का मौका मिला था।</p>
<p>उन्होंने कहा था कि जीना उसी का जीना है जो औरों के काम आ सके। जैन विद्यालय के डायरेक्टर किशोर जैन पांड्या के प्रयास से यह कार्य हुआ था। पांड्या जी ने बताया कि माननीय द्रौपदी मुर्मू जी ने झारखंड के राज्यपाल पद पर रहते हुए अपने पद का संवैधानिक रूप में अच्छी तरह से निर्वहन किया है। उनके राष्ट्रपति बनने पर देश का नाम विश्वस्तर पर आगे बढ़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को नमन करता हूं। उनकी सोच को नमन करता हूं जिन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए उनका नाम प्रस्तावित किया। उनको बधाई देने वाले में जैन समाज के उप मंत्री नरेंद्र झाझंरी, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र जैन, उपाध्यक्ष कमल जैन सेठी, सह मंत्री राज छाबड़ा, सुशील छाबड़ा, सुरेश झांझरी, प्रदीप जैन छाबड़ा, मनीष सेठी, जय कुमार गंगवाल,विनोद अजमेरा आदि थे। जैन समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन राजकुमार अजमेरा ने यह जानकारी दी है।</p>
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