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	<title>रायगंज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>रायगंज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में चिंतन बैठक संपन्न : भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी ने लिए कई निर्णय  </title>
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		<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:31:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शाश्वत तीर्थ अयोध्या में भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगंबर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, रायगंज में 10 मई को भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की चिंतन बैठक गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के ससंघ सान्निध्य में हुई। शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष को अत्यन्त प्रभावशाली प्रभावनापूर्वक किए जाने के संदर्भ में सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में यह मीटिंग [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगंबर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, रायगंज में 10 मई को भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की चिंतन बैठक गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के ससंघ सान्निध्य में हुई। शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष को अत्यन्त प्रभावशाली प्रभावनापूर्वक किए जाने के संदर्भ में सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में यह मीटिंग की गई। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, उदयभान जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> शाश्वत तीर्थ अयोध्या में भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगंबर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, रायगंज में 10 मई को भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की चिंतन बैठक गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के ससंघ सान्निध्य में हुई। शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष को अत्यन्त प्रभावशाली प्रभावनापूर्वक किए जाने के संदर्भ में सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में यह मीटिंग की गई। बैठक का शुभारंभ प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन मंत्री उत्तरप्रदेश-उत्तरांचल तीर्थक्षेत्र कमेटी के मंगलाचरण से शुभारंभ हुआ एवं कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलन उपस्थित वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा किया गया। जिसमें मुख्यरूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन, महामंत्री संतोष पेंढ़ारी, कोषाध्यक्ष अशोक दोशी एवं समस्त आंचलीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पदाधिकारियों ने किया। जम्बू प्रसाद ने एक सशक्त योजना के द्वारा तीर्थक्षेत्र कमेटी के इस 125 वर्षीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। जिसमें उन्होंने बहुआयामी विविध आयोजनों द्वारा कार्यक्रम को मनाने की एक योजना प्रस्तुत की। जवाहरलाल जैन (चेयरमैन-शतकोत्तर रजत जयंती वर्ष समिति) द्वारा अनेक योजनाएं इस कार्यक्रम को चार-चांद लगा सकती हैं, प्रस्तुत की गई। तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय मंत्री हंसमुख गांधी ने एक विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत की। जिसमें प्रांतीय एवं क्षेत्रीय राष्ट्रीय सभी पदाधिकारी जुड़कर किस प्रकार से इस होने वाले आयोजन को संपन्न कर सकते हैं। उसकी संरचना प्रस्तुत की गई। इसी क्रम में मध्यप्रदेश अंचल के अध्यक्ष डी.के. जैन ने अपने विचार रखे कि हम लोग मध्यप्रदेश में किस प्रकार से इस शतकोत्तर वर्ष के कार्यक्रम कर सकते हैं। डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने तीर्थ चक्रवर्ती बनने की योजना से सभी को अवगत कराया। इस वर्ष के अन्तर्गत तीर्थ चक्रवर्ती बनाए जा रहे हैं, जिसकी राशि 1लाख रुपए रखी गई हैं। इस योजना के माध्यम से हम हर किसी को तीर्थक्षेत्र कमेटी से जोड़ने का उपक्रम चला रहे हैं।</p>
<p><strong>समायोजन की पूरी संरचना प्रस्तुत की</strong></p>
<p>इसी क्रम में शतकोत्तर रजत जयंती वर्ष के चेयरमैन स्थापना वर्ष समिति के प्रदीप जैन, पीएनसी-आगरा ने अपने महत्वपूर्ण वक्तव्य द्वारा होने वाले इस कार्यक्रम में हम किस प्रकार से अपनी सहभागिता कर सकते हैं। इस बात को रखा एवं समायोजन की पूरी संरचना प्रस्तुत की। किस व्यक्ति की क्या भूमिका होनी चाहिए। इस 125 वर्षीय कार्यक्रम के लिए अपने ओजस्वी वक्तव्य के द्वारा सभी को एक प्रेरणामयी वक्तव्य प्रदान किया। महामंत्री संतोष पेंढ़ारी ने कार्यक्रम को प्रभावशाली बनाने के लिए अनेक बिन्दुओं पर प्रकाश डाला कि हम किस प्रकार से अपने स्तर से शतकोत्तर वर्ष के लिए कार्य कर सकते हैं। इसी क्रम में टिकैतनगर महिला मंडल द्वारा एक सुंदर भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया गया। उत्तरप्रदेश के संयोजक श्री आदिश जैन सर्राफ ने भी अपनी बात को रखा एवं संजीव जैन, जैन प्लास्टिक-लखनऊ ने भी तीर्थक्षेत्र कमेटी के इस कार्य का सम्मान किया और सभी से जुड़ने का आह्वान किया।</p>
<p><strong>मुख्यरूप से तीन परिषद का गठन होना चाहिए</strong></p>
<p>गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने कहा कि प्रत्येक कमेटी में मुख्यरूप से तीन परिषद का गठन होना चाहिए। अंतरंग परिषद, बाह्य परिषद एवं सामाजिक परिषद। इस प्रकार से हम अपने कार्यक्रमों का समायोजन करें एवं समाज को जोड़ने का उपक्रम सदैव करें। अपने तीर्थों की सुरक्षा एवं उनका संवर्धन, विकास अवश्य करें। प्राचीन तीर्थों को गति प्रदान करें, उनके विकास के लिए अवश्य योजनाएँ बनाएं एवं तीर्थक्षेत्र कमेटी के इस 125 वर्षीय कार्यक्रम में हमारा मंगल आशीर्वाद है। इसी क्रम में आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने कार्यकर्ताओं को अपना मंगल उद्बोधन प्रदान किया। अयोध्या तीर्थक्षेत्र के यशस्वी पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने कहा कि यह कार्यक्रम ऐसा होना चाहिए कि जिसको सदैव आने वाली पीढ़ियाँ याद रखें। सन् 1989 के अंदर एक कार्यक्रम तीर्थक्षेत्र कमेटी के अधिवेशन का लालकिला-दिल्ली मैदान में किया गया था। जिसमें लगभग 1 लाख लोग सम्मिलित हुए थे, ऐसा ही प्रभावशाली कार्यक्रम होना चाहिए, जिससे तीर्थों के प्रति लोगों की सम्बद्धता बढ़े, जिससे जन-जन को जोड़ा का सके एवं तीर्थों की सशक्त भूमिका बताई जा सके। इस कार्यक्रम उद्घाटन 22 एवं 23अक्टूबर 2026 को मथुरा चौरासी में किया जाना है। उसके पश्चात् 1वर्ष तक सारे देश में एवं प्रदेश में अनेक आयोजनों के द्वारा संपन्न होना है। अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के मंत्री विजयकुमार जैन के अनुसार विनोद बाकलीवाल ने आभार माना।</p>
<p><strong>इन सभी यह उपस्थित रहे</strong></p>
<p>सभी प्रांतों के वरिष्ठ पदाधिकारीगण इस बैठक में सम्मिलित हुए। मुख्य रूप से संजय जैन पापड़ीवाल, प्रद्युम्न जैन, सुुनील जैन सर्राफ, मनोज जैन, राकेश जैन, मनोज कुमार जैन-आगरा, सुनयना जैन, मीनू जैन, रमाकांत जैन, वीरेश जैन सेठ, जयकुमार जैन, राजकुमार जैन कोठारी, संजय जैन ठोलिया, अनिल जैन, प्रीतविहार-दिल्ली, प्रशांत जैन, हेमचंद जैन, संतोष घड़ी, अमरचंद जैन, विनोद जैन बिहारी, संदेश जैन, डॉ. अनुपम जैन, संजीव जैन सराफ, वैहृलाशचंद जैन सर्राफ, शुभचंद जैन, कमल जैन पलवल, रितेश जैन, परमेन्द्र जैन, पारस जैन, निधेश जैन आदि गणमान्य महानुभाव उपस्थित रहे.।</p>
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		<title>गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में आयोजन: भगवान ऋषभदेव जन्मजयंती हर्षोल्लासपूर्वक सम्पन्न </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 08:38:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान ऋषभदेव की जन्मजयंती हर्षोल्लासपूर्वक एवं प्रभावना के साथ सम्पन्न की गई। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में यह भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। अयोध्या स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर, रायगंज में प्रातःकाल ऐरावत हाथी पर सौधर्म इन्द्र के रूप में अध्यात्म जैन, अर्पिता जैन एवं सम्यक जैन (लखनऊ) द्वारा भगवान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान ऋषभदेव की जन्मजयंती हर्षोल्लासपूर्वक एवं प्रभावना के साथ सम्पन्न की गई। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में यह भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। अयोध्या स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर, रायगंज में प्रातःकाल ऐरावत हाथी पर सौधर्म इन्द्र के रूप में अध्यात्म जैन, अर्पिता जैन एवं सम्यक जैन (लखनऊ) द्वारा भगवान के जन्मकल्याणक को पाण्डुक शिला पर अभिषेक कर मनाया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अभिषेक अशोक पाटील की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> भगवान ऋषभदेव की जन्मजयंती हर्षोल्लासपूर्वक एवं प्रभावना के साथ सम्पन्न की गई। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में यह भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। अयोध्या स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर, रायगंज में प्रातःकाल ऐरावत हाथी पर सौधर्म इन्द्र के रूप में अध्यात्म जैन, अर्पिता जैन एवं सम्यक जैन (लखनऊ) द्वारा भगवान के जन्मकल्याणक को पाण्डुक शिला पर अभिषेक कर मनाया गया। परम पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ के सानिध्य एवं आचार्य श्री भद्रबाहू सागर जी महाराज ससंघ के मार्गदर्शन में भगवान ऋषभदेव एवं चक्रवर्ती भरत स्वामी की जन्मजयंती का कार्यक्रम अत्यंत भावनापूर्वक सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>हुआ भव्य विधान</strong></p>
<p>कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातःकाल रायगंज मंदिर स्थित पाण्डुक शिला पर भगवान का पंचामृत अभिषेक एवं भगवान ऋषभदेव विधान सम्पन्न किया गया। इसके पश्चात विशाल रथयात्रा अयोध्या तीर्थ के मुख्य मार्गों से होती हुई भगवान ऋषभदेव की जन्मस्थान टोंक पर पहुँची, जहाँ भगवान का पंचामृत अभिषेक सम्पन्न हुआ। जन्मस्थान पर स्थित भगवान के प्राचीन चरणों का भी अभिषेक किया गया।</p>
<p><strong>निकाली गई रथयात्रा</strong></p>
<p>रथयात्रा में ऐरावत हाथी, अवध प्रांत के विभिन्न जैन मंदिरों से विराजमान भगवंतों की झांकियाँ, रथ-बग्गियाँ, साधुगण, मंगल कलश लिए महिलाएँ एवं पुरुष वर्ग पूजन वेशभूषा में बैंड-बाजों के साथ भगवान के अहिंसामयी सिद्धांतों का शंखनाद करते हुए सम्मिलित हुए। रथयात्रा में भगवान को लेकर बैठने का सौभाग्य श्री सुभाषचंद सुयश जैन (लखनऊ, टिकेटनगर) को प्राप्त हुआ, जबकि सारथी के रूप में श्री विनोद कुमार शकुंतला जैन (उत्तमनगर, दिल्ली) रहे। भगवान भरत को लेकर परमेन्द्र जैन परिवार (टिकेटनगर) ने सहभागिता की। धनकुबेर सिद्धार्थ जैन एवं दीप्ति जैन (लखनऊ) भी रथयात्रा में सम्मिलित हुए।</p>
<p>रथयात्रा रामपथ होते हुए तुलसी उद्यान, स्वर्गद्वार स्थित जन्मस्थान टोंक पहुँची। मार्ग में भगवान के जन्मकल्याणक के उपलक्ष्य में नगरवासियों को लड्डू-मिष्ठान का वितरण किया गया तथा पूजन-अभिषेक सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>इन्हें मिला सौभाग्य</strong></p>
<p>मध्याह्न में रायगंज दिगम्बर जैन मंदिर में भगवान ऋषभदेव की 31 फुट ऊँची विशाल प्रतिमा का परम्परागत मस्तकाभिषेक अनेक द्रव्यों से किया गया। सर्वप्रथम कलश करने का सौभाग्य सुभाषचंद शुभम जैन (फैजाबाद) को प्राप्त हुआ। द्वितीय कलश डॉ. राधा जैन एवं दिनेश जैन (लखनऊ), तृतीय कलश श्री राजकुमार जैन (पटना) द्वारा सम्पन्न किया गया।</p>
<p><strong> इसके अतिरिक्त विभिन्न द्रव्यों से अभिषेक इस प्रकार सम्पन्न हुआ&#8230;</strong></p>
<p>नारियल जल से नितीश कुमार चौक (लखनऊ), इक्षुरस से श्री पुखराज पाण्डया (गोरखपुर), घी से अभिषेक श्री चन्द्रशेखर कासलीवाल, दूध से अभिषेक श्री नितीश जैन (लखनऊ), दही से अभिषेक प्रदीप कुमार एवं अभिषेक जैन (बहराइच), सर्वोषधि से अभिषेक संजय जैन एवं निधेश जैन (टिकेटनगर), हरिद्रा से अभिषेक अनुज जैन एवं अरिहंत जैन (फैजाबाद), लाल चंदन से अभिषेक भरत जैन एवं वर्धमान जैन (टिकेटनगर), चतुष्कोण कलश से अभिषेक अनुज, सोमिल, नीशू एवं रोमा जैन (लखनऊ), विजय कुमार एवं रश्मि जैन (लखनऊ)। मंगल आरती अनिल शरत बाकलीवाल द्वारा सम्पन्न की गई। केसर से अभिषेक योगेश जैन एवं जितेन्द्र जैन (लल्ला भैया, फतेहपुर महमूदाबाद) द्वारा किया गया। पूर्णकलश का सौभाग्य सुरेशचंद जैन (खंडवा) को प्राप्त हुआ। अंत में शांतिधारा जितेन्द्र जैन एवं वैशाली जैन (लल्ला भैया, फतेहपुर) द्वारा सम्पन्न की गई। इसी क्रम में भगवान भरत स्वामी की 31 फुट ऊँची प्रतिमा का सम्पूर्ण पंचामृत अभिषेक नितीश जैन एवं शालिनी जैन (लखनऊ) द्वारा किया गया। सायंकाल 1008 दीपकों द्वारा आरती सम्पन्न की गई तथा भगवान का पालना झुलाने का सौभाग्य अवध प्रांत से आए सभी भक्तों को प्राप्त हुआ। सम्पूर्ण कार्यक्रम प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती के मार्गदर्शन में तथा पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी के कुशल नेतृत्व में सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>ये भी रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस अवसर पर श्री अमरचंद जैन, विजय कुमार जैन, डॉ. जीवन प्रकाश जैन, तेजकुमार जैन, अंकुर जैन (बाराबंकी), टिकेटनगर से अतुल जैन, राजन जैन, निधेश जैन, पारस जैन सहित अवध प्रांत, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, लखनऊ, कानपुर आदि स्थानों से आए अनेक भक्तगण उपस्थित रहे।</p>
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		<title>त्याग और तप की प्रतिमूर्ति जैन सन्तः जैन साध्वी ज्ञानमती माताजी ने किया केशलोच </title>
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		<pubDate>Mon, 31 Mar 2025 13:26:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन साध्वी गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने भव्य केशलोच किया। जैन ग्रंथ के अनुसार दिगम्बर साधु-साध्वियों को साल में 3 बार यह प्रक्रिया प्रत्येक 4 माह में करनी होती है। जिसमें प्रातःकाल भगवान ऋषभदेव की 39 फुट उत्तुंग प्रतिमा का मस्तकाभिषेक सम्पन्न किया गया एवं विश्वशांति की कामना के लिए भगवान के मस्तक पर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन साध्वी गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने भव्य केशलोच किया। जैन ग्रंथ के अनुसार दिगम्बर साधु-साध्वियों को साल में 3 बार यह प्रक्रिया प्रत्येक 4 माह में करनी होती है। जिसमें प्रातःकाल भगवान ऋषभदेव की 39 फुट उत्तुंग प्रतिमा का मस्तकाभिषेक सम्पन्न किया गया एवं विश्वशांति की कामना के लिए भगवान के मस्तक पर शांतिधारा सम्पन्न की गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए उदयभान जैन की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>रायगंज।</strong> भगवान ऋषभदेव दिगम्बर जैन मंदिर बडी मूर्ति रायगंज अयोध्या में जैन साध्वी गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने किया भव्य केशलोच। जिसमें प्रातःकाल भगवान ऋषभदेव की 39 फुट उत्तुंग प्रतिमा का मस्तकाभिषेक सम्पन्न किया गया एवं विश्वशांति की कामना के लिए भगवान के मस्तक पर शांतिधारा सम्पन्न की गई एवं वरिष्ठ जैन साध्वी गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने अपने हाथों से अपने केशों को उखाड़ा जैन ग्रंथ के अनुसार दिगम्बर साधु-साध्वियों को साल में 3 बार यह प्रक्रिया प्रत्येक 4 माह में करनी होती है।</p>
<p><strong>दीक्षा के पश्चात् अपने हाथों से अपने केश को निकालना </strong></p>
<p>जैन मंदिर के विजय कुमार जैन ने बताया कि पूज्य भारत गौरव गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने केशलोच किया। जिसके अन्तर्गत दिगम्बर जैन साधु एवं साध्वियों को दीक्षा के पश्चात् अपने हाथों से अपने केश को निकालना होता है। जिसे शरीर से निर्ममता का प्रतीक समझा जाता है। जैन साधु अपने केश अपने हाथ से निकालते हैं एवं उस दिन निर्जल उपवास करते हैं।</p>
<p><strong>केशलोच वर्ष में चार बार किया जाता है</strong></p>
<p>वर्तमान में सारे देश के अन्दर 1750 दिगम्बर संत विराजमान हैं। जो साल में 4 बार इस प्रक्रिया को अपने हाथों से सम्पन्न करते हैं। त्याग और संयम की साधना करते हुए सिर्फ दिन में एक बार आहार ग्रहण करते हैं। दवाई, पानी आदि उसी समय लेते हैं यदि भोजन में अन्तराय आ जाए तो 24 घंटे पश्चात् जल की बूंद ग्रहण करते हैं। पदयात्रा करते हैं। किसी भी वाहन का प्रयोग नहीं करते हैं। बिस्तर आदि का प्रयोग ठंडी गर्मी बरसात में नहीं करते हैं। जैन साधुओं का ये मुख्य गुण होता है।</p>
<p><strong>माताजी ने 550 से अधिक ग्रंथों का सृजन किया </strong></p>
<p>परमपूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी 73 वर्ष से संयम की आराधना से जीवन यापन कर रही हैं। त्याग की प्रतिमूर्ति महासाधिक विदुषी संत हैं जिन्होंने 550 से अधिक ग्रंथों का सृजन अपनी लेखनी से किया है।</p>
<p><strong>केशलोच साधु की मुख्य क्रिया है </strong></p>
<p>पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने बताया कि प्रत्येक जैन साधु को यह प्रक्रिया करना अनिवार्य होता है। साधु बनने के पूर्व सबसे पहले केशलोच करना होता है। उसके पश्चात् ही उनके मस्तक पर संस्कार गुरु के द्वारा किए जाते हैं। जिससे वह दीक्षा ग्रहण करते हैं। यह अपने आप में कठोर तपश्चरण है, क्योंकि वर्तमान युग में केश ही श्रृंगार का मुख्य आकर्षण है। लेकिन जैन संत घास के समान इसको अपने हाथों से निकालते हैं।</p>
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