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	<title>राजस्थान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>राजस्थान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मैं आनंद स्वरूप हूं, ऐसा अनुभव करना होगा : वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक नंदी ने दिए वेबिनार में स्वयं को पहचाने के सूत्र  </title>
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		<pubDate>Tue, 19 May 2026 11:38:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य कनक नंदीजी ने शिवगौरी आश्रम भिलुड़ा राजस्थान से अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में बताया कहा कि स्वयं को जानना विश्व की सबसे बड़ी उपलब्धि है। मैं समस्त दुखों से संसार की प्रत्येक वस्तु से भिन्न हूं। मैं आनंद स्वरूप हूं। डडूका से पढ़िए, अजीत कोठिया की रिपोर्ट&#8230; डडूका। आचार्य कनक नंदीजी ने शिवगौरी आश्रम भिलुड़ा राजस्थान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य कनक नंदीजी ने शिवगौरी आश्रम भिलुड़ा राजस्थान से अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में बताया कहा कि स्वयं को जानना विश्व की सबसे बड़ी उपलब्धि है। मैं समस्त दुखों से संसार की प्रत्येक वस्तु से भिन्न हूं। मैं आनंद स्वरूप हूं। <span style="color: #ff0000">डडूका से पढ़िए, अजीत कोठिया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डडूका।</strong> आचार्य कनक नंदीजी ने शिवगौरी आश्रम भिलुड़ा राजस्थान से अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में बताया कहा कि स्वयं को जानना विश्व की सबसे बड़ी उपलब्धि है। मैं समस्त दुखों से संसार की प्रत्येक वस्तु से भिन्न हूं। मैं आनंद स्वरूप हूं, ऐसा अनुभव करना पड़ेगा। चेतना ही परम आध्यात्मिक मैं हूं। उन्होंने कहा कि संकल्प विकल्प से आत्म शक्ति कुंठित हो जाती है। जिसका मन शांत हो गया है, उसके विकार शांत हो गए हैं। ऐसा योगी आत्म सुख प्राप्त करता है। ज्ञानानंद सच्चिदानंद आत्मा से जुड़ने वाले योगी प्राप्त करते हैं। आर्त ध्यान रौद्र ध्यान करते हुए प्रसन्नता आनंद शांति कभी प्राप्त नहीं हो सकती। कभी दुर्गुणों से युक्त होने पर प्रसन्नता खुशी नहीं प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि शारीरिक मलमूत्र के वेग को नहीं रोकना चाहिए परंतु, मानसिक रोग ईर्षा, द्वैष, घृणा, अहंकार आदि को रोकना चाहिए। जिस प्रकार बल्ब के ऊपर धूल मिट्टी लगी हुई है तो प्रकाश फैलता नहीं है। इसी प्रकार इन मानसिक रोगों से आत्मा का प्रकाश जागृत नहीं होता है। बॉडी माइंड सॉल का अंतर संबंध है, तीनों एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। ध्यान मन की पवित्रता योग मोक्ष लक्ष्मी को वश करने के लिए श्रेष्ठ उपाय है। मन से अधिक शक्तिशाली आत्मा है। जब तक मन शांत नहीं है तब तक बाह्य तप करना शरीर को दंडित करना है।</p>
<p><strong>मन शुद्धि से अविद्यमान गुण भी विद्यमान हो जाते हैं</strong></p>
<p>अधिकतर संसारी लोग शारीरिक सुख के लिए धर्म करते हैं। जिस प्रकार तुष अर्थात छिलके कूटने से केवल श्रम होता है परंतु चावल नहीं निकलते हैं वैसे ही आत्मज्ञान बिना अनंत भव में साधु बनने पर भी मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकते। मन की शुद्धि ही एक मोक्ष मार्ग रुपी मार्ग में मार्ग प्रकाशक दीपिका है। इसको नहीं पाने से अनेक मोक्ष मार्गाे मोक्ष मार्ग से च्युत हो जाते हैं। मन शुद्धि से अविद्यमान गुण भी विद्यमान हो जाते हैं। जिनके पास गुण नहीं होते हैं परंतु मन शांत होने पर गुण प्रकट हो जाते हैं। मन शुद्ध से स्वयं ज्ञान प्रकट होता है। आनंद उत्पन्न होता है। मन की अशुद्धि से जो गुण होते हैं वह भी दुर्गुण बन जाते हैं। कब ये पापी मन पावन होगा। कब राग,द्वैष, मोह त्यागेगा। इस कविता द्वारा मुनि श्री सुविज्ञ सागर जी ने मंगलाचरण किया। ये जानकारी विजयलक्ष्मी गोदावत सागवाड़ा ने दी।</p>
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		<title>सेक्सटॉर्शन डिजिटली मर्डर : राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक ऐसे राज्य हैं जहाँ सेक्सटॉर्शन के सर्वाधिक मामले  </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:43:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[साइबर स्टॉकिंग और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग से जुड़े मामलों में पांच वर्षों में 300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में साइबर अपराध के 65,893 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2023 में यह संख्या और अधिक बढ़ी है। आज पढ़िए, मुरादाबाद से रवि कुमार का आलेख&#8230;. साइबर स्टॉकिंग और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>साइबर स्टॉकिंग और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग से जुड़े मामलों में पांच वर्षों में 300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में साइबर अपराध के 65,893 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2023 में यह संख्या और अधिक बढ़ी है। <span style="color: #ff0000">आज पढ़िए, मुरादाबाद से रवि कुमार का आलेख&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p>साइबर स्टॉकिंग और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग से जुड़े मामलों में पांच वर्षों में 300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में साइबर अपराध के 65,893 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2023 में यह संख्या और अधिक बढ़ी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो-एनसीआरबी के अनुसार भारत में साइबर अपराधों के आंकड़ें भयावह हैं। विशेषज्ञों का मानना है, वास्तविक मामले दर्ज केसों से कई गुना अधिक हैं, क्योंकि पीड़ित सामाजिक लाज और परिवार के डर से शिकायत नहीं करते। राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक ऐसे राज्य हैं जहाँ सेक्सटॉर्शन के सर्वाधिक मामले सामने आए हैं। हरियाणा के मेवात, राजस्थान के अलवर और भरतपुर क्षेत्र तो सेक्सटॉर्शन गैंग के गढ़ के रूप में बदनाम हो चुके हैं। उदाहरण के लिए रात के दस बजे थे, जब 22 वर्षीय अर्जुन के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। दूसरी तरफ से एक महिला की आवाज़ थी मीठी, आकर्षक। धीरे-धीरे बातों का सिलसिला वीडियो कॉल तक पहुंचा और फिर शुरू हुआ दुःस्वप्न। इस नाइटमेयर ने अर्जुन की महीनों की रातों की नींद छीन ली। यह कहानी केवल अर्जुन की नहीं है, यह लाखों भारतीयों की कहानी है, जो हर साल सेक्सटॉर्शन के जाल में फंसते हैं। सेक्सटॉर्शन-सेक्स और एक्सटॉर्शन का मिश्रण एक ऐसा साइबर अपराध है, जिसमें अपराधी पीड़ित की अंतरंग या आपत्तिजनक तस्वीरें, वीडियो या स्क्रीनशॉट प्राप्त करके उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने या परिवार-मित्रों को भेजने की धमकी देते हैं और बदले में पैसे या और अधिक आपत्तिजनक सामग्री की मांग करते हैं। यह एक योजनाबद्ध, भावनात्मक और आर्थिक शोषण का तरीका है, जो पीड़ित को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ देता है। मनोचिकित्सकों के मुताबिक सेक्सटॉर्शन के पीड़ितों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव अत्यंत गंभीर होते हैं। पीड़ित गंभीर अवसाद-डिप्रेशन और चिंता का शिकार हो जाते हैं। सामाजिक अलगाव और शर्म की भावना उन्हें किसी से बात करने से रोकती है। पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर- पीटीएसडी के लक्षण सामने आते हैं। पढ़ाई, काम और व्यक्तिगत संबंधों पर बुरा असर पड़ता है। दुखद रूप से, कुछ मामलों में पीड़ित आत्महत्या तक का कदम उठा लेते हैं। वर्ष 2023 में केरल और महाराष्ट्र में ऐसे कई मामले सामने आए, जहां युवाओं ने सेक्सटॉर्शन के कारण जीवन समाप्त कर लिया। यही कारण है कि इस अपराध को डिजिटल हत्या भी कहा जाने लगा है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-104232" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260408-WA0054-195x300.jpg" alt="" width="195" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260408-WA0054-195x300.jpg 195w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260408-WA0054-666x1024.jpg 666w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260408-WA0054.jpg 689w" sizes="(max-width: 195px) 100vw, 195px" /></p>
<p>यह खौफनाक या कहें तो डिजिटल युग के सेक्सटॉर्शन की कहानी है। दिल्ली के एक निजी कॉलेज में पढ़ने वाले 22 वर्षीय अर्जुन ने इंस्टाग्राम पर प्रिया नाम की एक युवती से बात शुरू की। महीने भर की दोस्ती के बाद प्रिया ने वीडियो कॉल करने का आग्रह किया। कॉल के दौरान स्क्रीन पर आपत्तिजनक दृश्य आए और अर्जुन की स्क्रीन रिकॉर्ड कर ली गई। अगले ही दिन 50,000 रुपये की मांग आई। डरे हुए अर्जुन ने पहले 20,000 भेजे, पर मांग और बढ़ती गई। तीन महीने की मानसिक यातना के बाद अर्जुन के माता-पिता को पता चला और उन्होंने साइबर सेल में शिकायत की। पुलिस ने राजस्थान के एक गांव से गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कियज्ञं भारतीय कानून में सेक्सटॉर्शन के विरुद्ध कड़े प्रावधान मौजूद हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सअप जो प्लेटफॉर्म दोस्ती और संपर्क के लिए बने हैं- आज सेक्सटॉर्शन के प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। अपराधी फर्जी प्रोफाइल बनाकर लड़कियों या आकर्षक युवतियों की फोटो लगाते हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सअप पर दोस्ती का नाटक करते हैं। व्हाट्सअप पर नंबर लेकर वीडियो कॉल के जाल में फंसाते हैं। स्नैपचौट और टेलीग्राम पर प्राइवेट चौट का भरोसा दिलाकर सामग्री प्राप्त करते हैं। एक बार अंतरंग तस्वीर या वीडियो मिल जाने के बाद ये अपराधी पूरी तरह बेनकाब हो जाते हैं और ब्लैकमेलिंग शुरू कर देते हैं। इन अपराधियों की कार्यप्रणाली बेहद चालाक और सुनियोजित होती है। पहला चरण फर्जी प्रोफाइल बनाना होता है। किसी आकर्षक युवती या युवक की फोटो चुराकर एक विश्वसनीय प्रोफाइल तैयार की जाती है। दूसरे चरण में दोस्ती का नाटक शुरू होता है। हफ्तों तक सामान्य बातचीत कर विश्वास बनाया जाता है। तीसरे चरण में वीडियो कॉल ट्रैप बिछाया जाता है। वीडियो कॉल के दौरान महिला सदस्य या डीपफेक तकनीक का उपयोग करके पीड़ित को आपत्तिजनक स्थिति में फंसाया जाता है और स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर ली जाती है। चौथे और अंतिम चरण में ब्लैकमेल पैटर्न शुरू होता है। तुरंत पैसे की माँग की जाती है और धमकी दी जाती है कि यह वीडियो परिवार और मित्रों को भेज दिया जाएगा। एक बार पैसे देने के बाद डिमांड बढ़ती ही जाती है।</p>
<p>यदि आप या आपका कोई परिचित सेक्सटॉर्शन का शिकार हो तो घबराएं नहीं- मदद उपलब्ध है। सबसे पहले किसी विश्वसनीय व्यक्ति को बताएं और एकदम अकेले न रहें। राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें। यह 24×7 उपलब्ध है। डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। सभी धमकी भरे संदेशों, कॉल रिकॉर्ड और स्क्रीनशॉट का साक्ष्य सुरक्षित रखें। अपराधी को पैसे न दें- एक बार देने के बाद मांग बंद नहीं होती। संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री को रिपोर्ट और रिमूव करने का अनुरोध करें। नजदीकी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराएं- पुलिस को कानूनी रूप से आपकी मदद करनी होगी। सेक्सटॉर्शन से बचाव के लिए डिजिटल जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है सेक्सटॉर्शन में पीड़ित की कोई गलती नहीं होती। सारा कुसूर अपराधी का होता है। पीड़ितों को शर्म छोड़कर तुरंत शिकायत करनी चाहिए। जो जितनी देर करता है, अपराधी उतना ही निर्भीक होता जाता है। साइबर टीम हर शिकायत को गंभीरता से लेती है और पीड़ित की पहचान गोपनीय रखती है। मनोचिकित्सकों के अनुसार इस अपराध के शिकार लोग यह न समझें कि उनकी ज़िंदगी खत्म हो गई। परामर्श और कानूनी मदद से हजारों पीड़ित इस भंवर से बाहर निकले हैं। परिवार और समाज को पीड़ित को दोष देने की बजाए उनका साथ देना चाहिए। डिजिटल क्रांति ने हमें असीमित सुविधाएं दी हैं, पर इसके साथ जिम्मेदारी भी आई है। सेक्सटॉर्शन केवल कानून और पुलिस से नहीं रुकेगा। इसके लिए सामाजिक जागरूकता, पारिवारिक संवाद और डिजिटल साक्षरता। हर शिकायत एक और जाल तोड़ती है। याद रखें आप अकेले नहीं हैं। मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है।</p>
<p>महत्वपूर्ण संपर्क नंबरः साइबर क्राइम हेल्पलाइन- 1930। पोर्टल डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन</p>
<p>(लेखक तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में फॉरेंसिक साइंस विभाग के एचओडी हैं। आर्टिकल में दिए गए सभी नाम काल्पनिक हैं )</p>
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		<title>लिया शुद्ध जल ग्रहण का नियम : संयम पथ की पहली सीढ़ी की ओर अग्रसर हुए इंजीनियर युवा </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/young_engineers_move_towards_the_first_step_of_the_path_of_restraint-2/</link>
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		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 12:06:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वात्सल्य वारिधि राष्ट्रसंत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित अठारह त्यागियों की जन्मस्थली सनावद के एक इंजीनियर युवा त्याग, वैराग्य और संयम की गौरवशाली परंपरा की ओर अग्रसर हुए हैं। पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट&#8230; सनावद। वात्सल्य वारिधि राष्ट्रसंत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित अठारह त्यागियों की जन्मस्थली सनावद के एक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वात्सल्य वारिधि राष्ट्रसंत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित अठारह त्यागियों की जन्मस्थली सनावद के एक इंजीनियर युवा त्याग, वैराग्य और संयम की गौरवशाली परंपरा की ओर अग्रसर हुए हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> वात्सल्य वारिधि राष्ट्रसंत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित अठारह त्यागियों की जन्मस्थली सनावद के एक इंजीनियर युवा त्याग, वैराग्य और संयम की गौरवशाली परंपरा की ओर अग्रसर हुए हैं। त्याग और वैराग्य की परंपरा के लिए प्रसिद्ध नगरी सनावद में इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 33 वर्षीय नवयुवक इंजीनियर शानिल, सुपुत्र संगीता एवं श्रीमंदर जैन (बडूद परिवार), सनावद ने संयम पथ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।</p>
<p>शानिल अपने परिवार के साथ राजस्थान के शिवदासपुरा पहुँचे, जहाँ उन्होंने नगर गौरव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के समक्ष श्रीफल समर्पित कर यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण किया तथा आजीवन शुद्ध जल ग्रहण करने का नियम लिया। इस अवसर पर उन्होंने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज को आहार भी प्रदान किया।</p>
<p>बताया गया कि शानिल ने यह नियम लेकर बीसवीं सदी के महान आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की कठिन संयम परंपरा का पालन करने वाले आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के सान्निध्य में संयम मार्ग की ओर पहला कदम बढ़ाया है।</p>
<p>इस अवसर पर उपस्थित समाजजनों ने शानिल के इन त्याग और संयम भावों की अनुमोदना करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य की मंगलकामनाएँ कीं।</p>
<p><strong>शानिल का परिचय</strong></p>
<p>जन्म : 12 जून 1992</p>
<p>नौकरी : एमडॉक्स कंपनी, पुणे में मैनेजर</p>
<p>शिक्षा : एम.टेक</p>
<p>परिवार में बचपन से ही धार्मिक संस्कार दिए गए हैं। उनके घर में अनेक वर्षों से स्वयं का भगवान का चैत्यालय स्थापित है। साथ ही उनके परिवार को पूर्व में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के मंगल विहार कराने का भी सौभाग्य प्राप्त हो चुका है।</p>
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		<title>लिया शुद्ध जल ग्रहण का नियम : संयम पथ की पहली सीढ़ी की ओर अग्रसर हुए इंजीनियर युवा </title>
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		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 11:51:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वात्सल्य वारिधि राष्ट्रसंत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित अठारह त्यागियों की जन्मस्थली सनावद के एक इंजीनियर युवा त्याग, वैराग्य और संयम की गौरवशाली परंपरा की ओर अग्रसर हुए हैं। पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट&#8230; सनावद। वात्सल्य वारिधि राष्ट्रसंत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित अठारह त्यागियों की जन्मस्थली सनावद के एक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वात्सल्य वारिधि राष्ट्रसंत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित अठारह त्यागियों की जन्मस्थली सनावद के एक इंजीनियर युवा त्याग, वैराग्य और संयम की गौरवशाली परंपरा की ओर अग्रसर हुए हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> वात्सल्य वारिधि राष्ट्रसंत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित अठारह त्यागियों की जन्मस्थली सनावद के एक इंजीनियर युवा त्याग, वैराग्य और संयम की गौरवशाली परंपरा की ओर अग्रसर हुए हैं। त्याग और वैराग्य की परंपरा के लिए प्रसिद्ध नगरी सनावद में इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 33 वर्षीय नवयुवक इंजीनियर शानिल, सुपुत्र संगीता एवं श्रीमंदर जैन (बडूद परिवार), सनावद ने संयम पथ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।</p>
<p>शानिल अपने परिवार के साथ राजस्थान के शिवदासपुरा पहुँचे, जहाँ उन्होंने नगर गौरव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के समक्ष श्रीफल समर्पित कर यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण किया तथा आजीवन शुद्ध जल ग्रहण करने का नियम लिया। इस अवसर पर उन्होंने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज को आहार भी प्रदान किया।</p>
<p>बताया गया कि शानिल ने यह नियम लेकर बीसवीं सदी के महान आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की कठिन संयम परंपरा का पालन करने वाले आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के सान्निध्य में संयम मार्ग की ओर पहला कदम बढ़ाया है।</p>
<p>इस अवसर पर उपस्थित समाजजनों ने शानिल के इन त्याग और संयम भावों की अनुमोदना करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य की मंगलकामनाएँ कीं।</p>
<p><strong>शानिल का परिचय</strong></p>
<p>जन्म : 12 जून 1992</p>
<p>नौकरी : एमडॉक्स कंपनी, पुणे में मैनेजर</p>
<p>शिक्षा : एम.टेक</p>
<p>परिवार में बचपन से ही धार्मिक संस्कार दिए गए हैं। उनके घर में अनेक वर्षों से स्वयं का भगवान का चैत्यालय स्थापित है। साथ ही उनके परिवार को पूर्व में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के मंगल विहार कराने का भी सौभाग्य प्राप्त हो चुका है।</p>
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		<title>निकाली गई प्रभात फेरी : भगवान ऋषभदेव का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया </title>
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		<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 19:10:50 +0000</pubDate>
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<p><strong>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जन्म कल्याणक महोत्सव जिले के जुरहरा कस्बे में चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर प्रातःकाल प्रभात फेरी निकाली गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए तरुण जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भरतपुर</strong>। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जन्म कल्याणक महोत्सव जिले के जुरहरा कस्बे में चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर प्रातःकाल प्रभात फेरी निकाली गई। इसके बाद मंदिर में पूजन, परिष्काल एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। शाम के समय भक्तों द्वारा भक्ति भाव से महाआरती की गई। इसके पश्चात अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान द्वारा दीप प्रज्ज्वलन, मंगलाचरण, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा आदिनाथ प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में जैन समाज के पुरुषों, महिलाओं एवं बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। संस्थान की मंत्री डिंपल जैन ने बताया कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जन्म अयोध्या में हुआ था। उनकी माता का नाम मरुदेवी तथा पिता का नाम नाभिराज था। उन्होंने हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की। भगवान ऋषभदेव ने मानव समाज को असि, मसि, कृषि, विद्या, वाणिज्य और शिल्प कला जैसे जीवन उपयोगी ज्ञान प्रदान कर श्रम, व्यापार और खेती के माध्यम से जीवन जीने की राह दिखाई।</p>
<p>बाद में भगवान ऋषभदेव ने अपने पुत्र भरत और बाहुबली को राज्य सौंपकर स्वयं सन्यास ग्रहण कर लिया। मान्यता है कि भरत के नाम से ही भारत देश का नाम पड़ा। इस अवसर पर अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान की अध्यक्ष अलका जैन, मंत्री डिंपल जैन, मंजू जैन, साधना जैन, पूनम जैन, क्षमा जैन सहित अन्य श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की।</p>
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		<title>आदिनाथ भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया : नगर-नगर निकाली गई शोभायात्रा </title>
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		<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 13:43:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव को वागड़ क्षेत्र सहित पूरे बांसवाड़ा जिले में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। गुरुवार को विभिन्न नगरों और गांवों में भगवान आदिनाथ की भव्य शोभायात्राएं निकाली गई तथा मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। पढ़िए सुरेश चंद्र गांधी की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव को वागड़ क्षेत्र सहित पूरे बांसवाड़ा जिले में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। गुरुवार को विभिन्न नगरों और गांवों में भगवान आदिनाथ की भव्य शोभायात्राएं निकाली गई तथा मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सुरेश चंद्र गांधी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा/बांसवाड़ा।</strong> जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव को वागड़ क्षेत्र सहित पूरे बांसवाड़ा जिले में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। गुरुवार को विभिन्न नगरों और गांवों में भगवान आदिनाथ की भव्य शोभायात्राएं निकाली गई तथा मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। वागड़ क्षेत्र के अधिकांश गांवों में भगवान आदिनाथ की प्रतिमाएं विराजमान हैं, जहां भक्तगण जन्म कल्याणक महोत्सव को हर्षोल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाते हैं।</p>
<p><strong>आदि पुरुष हैं भगवान ऋषभदेव</strong></p>
<p>भगवान आदिनाथ को भगवान ऋषभदेव के नाम से भी जाना जाता है। वे जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर और संस्थापक माने जाते हैं। उनका जन्म अयोध्या में इक्ष्वाकु वंश के राजा नाभि और रानी मरुदेवी के घर हुआ था। भगवान ऋषभदेव ने मानव सभ्यता को नई दिशा दी और लोगों को कृषि, कला, शिल्प तथा लेखन (ब्राह्मी लिपि) का ज्ञान दिया। उन्होंने समाज को असि (युद्ध), मसि (लेखन), कृषि, विद्या, शिल्प और वाणिज्य जैसे कार्यों की शिक्षा दी, जिससे कर्मभूमि की शुरुआत हुई। उनका प्रतीक (लांछन) बैल अर्थात वृषभ है। उनकी पत्नियां सुनंदा और सुमंगला थीं तथा उनके 100 पुत्र थे, जिनमें सबसे बड़े भरत चक्रवर्ती थे, और दो पुत्रियां ब्राह्मी व सुंदरी थीं। प्रयाग में वटवृक्ष के नीचे उन्होंने दीक्षा ली और कठोर तपस्या के बाद केवलज्ञान प्राप्त किया। अंततः माघ कृष्ण चतुर्दशी को कैलाश पर्वत पर उन्हें निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त हुआ। कुछ हिंदू परंपराओं में उन्हें भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है और उन्हें आदि पुरुष या संस्थापक के रूप में सम्मान दिया जाता है।</p>
<p><strong>बड़ी संख्या में प्रतिमाएं</strong></p>
<p>बांसवाड़ा जिले के वागड़ क्षेत्र में भगवान आदिनाथ की बड़ी संख्या में प्रतिमाएं स्थापित हैं और कई स्थानों पर वे मूलनायक के रूप में विराजमान हैं। वागड़ क्षेत्र में सबसे बड़ी मूलनायक प्रतिमा नौगामा में स्थित “वागड़ के बड़ेबाबा” की प्रतिमा मानी जाती है, जो लगभग 700 वर्ष पुरानी बताई जाती है। हालांकि वीरोदय तीर्थ पर इससे भी बड़ी प्रतिमा स्थापित की गई है, लेकिन उसकी प्रतिष्ठा अभी शेष है। इस कारण वर्तमान में नौगामा की प्रतिमा को ही सबसे बड़ी माना जाता है। वागड़ क्षेत्र के अनेक गांवों और कस्बों में भगवान आदिनाथ की पद्मासन मुद्रा में प्रतिमाएं विराजमान हैं। इनमें प्रमुख रूप से बडोदिया, आनंदपुरी, बांसवाड़ा का आजाद चौक, आदिनाथ कॉलोनी परतापुर, गनोडा, परतापुर, बेडवा के बावसी, गांगड़तलाई, नौगामा, घाटोल, खोड़न, कलिंजरा और भुंगड़ा सहित कई स्थान शामिल हैं। इन मंदिरों में श्रद्धालु नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं।</p>
<p><strong>विशेष पूजन कार्यक्रम</strong></p>
<p>भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक के अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजन, अभिषेक, आरती और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही नगरों और गांवों में भव्य शोभायात्राएं निकालकर भक्तजन भगवान के जन्मोत्सव को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाएंगे। यह महोत्सव जैन समाज के लिए आस्था, परंपरा और संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।</p>
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		<title>तीर्थंकर ऋषभदेव के कल्याणक पर राजस्थान में अनूठी पहल : 15 मार्च से मदरसों में भी गूंजेगा भगवान ऋषभदेव का संदेश </title>
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		<pubDate>Wed, 11 Mar 2026 08:14:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के प्रवर्तक एवं प्रथम तीर्थकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) के जन्म-तप कल्याणक पर 12 मार्च को राजस्थान में अनूठी पहल देखने को मिलेगी। जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; जयपुर। जैन धर्म के प्रवर्तक एवं प्रथम तीर्थकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) के जन्म-तप कल्याणक पर 12 मार्च को राजस्थान में अनूठी पहल देखने को मिलेगी। राजस्थान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के प्रवर्तक एवं प्रथम तीर्थकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) के जन्म-तप कल्याणक पर 12 मार्च को राजस्थान में अनूठी पहल देखने को मिलेगी। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर</strong>। जैन धर्म के प्रवर्तक एवं प्रथम तीर्थकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) के जन्म-तप कल्याणक पर 12 मार्च को राजस्थान में अनूठी पहल देखने को मिलेगी। राजस्थान मदरसा बोर्ड की ओर से राज्यभर के मदरसों, अल्पसंख्यक छात्रावासों, आवासीय विद्यालयों और अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों में भगवान ऋषभदेव के जीवन और उपदेशों पर आधारित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। गौरतलब है कि भगवान आदिनाथ ने लोक व्यवहार को बताने के लिए तीन वर्षीय कार्ययोजना की रूपरेखा तैयार की थी। इस संबंध में बोर्ड के सचिव चेतन चौहान ने सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं।</p>
<p><strong>हर राज्य में शुरू हो यह पहल</strong></p>
<p>इस निर्णय को भारत वर्षीय जैन समुदाय और अल्पसंख्यक वर्ग ने सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। विश्व जैन संगठन एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं अध्यक्ष मयंक जैन ने सरकार की इस अभिनव पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह पहल हर राज्यों में भी शुरू की जाएं।</p>
<p><strong>होंगी कई ज्ञानवर्धक प्रतियोगिता</strong></p>
<p>दद्दू ने बताया कि यह योजना के अंतर्गत विभिन्न आयोजन वर्ष भर चित्रकला, रंगोली, मरुदेवी के सोलह सपनों पर आधारित लघु फिल्म, पोस्टर निर्माण, डिजिटल प्रस्तुति और फिटनेस गतिविधियां होंगी।चित्रकला-पोस्टर प्रतियोगिताओं में भगवान ऋषभदेव के जन्म, दीक्षा, तप, ज्ञान, उपदेश और चरित्र से जुड़े प्रसंगों के साथ राष्ट्रीय एकता, स्वास्तिक प्रतीक और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय शामिल किए गए हैं। राजस्थान सरकार की ओर से 12 से 15 मार्च तक विभिन्न कार्यक्रम होंगे। पहली बार यह पहल की गई है। कार्यक्रम के बाबत तैयारियां जारी है।</p>
<p><strong>सरकार की इस पहल का स्वागत किया समाजजनों ने</strong></p>
<p>राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग के पूर्व अध्यक्ष और राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद के संरक्षक जस्टिस नरेंद्रकुमार जैन ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को भगवान ऋषभदेव के आदर्श जीवन और उनके कार्यों से प्रेरणा मिलेगी। इंदौर दिगम्बर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोहर झांझरी, हंसमुख गांधी, टीके वेद,सुशील पांड्या एवं फेडरेशन की राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका पुष्पा कासलीवाल, रेखा जैन, मुक्ता जैन ने भी राजस्थान सरकार की इस पहल का स्वागत अभिनंदन करते हुए सरकार का आभार प्रकट किया।</p>
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		<title>वैभव गोवाडिया को युवा प्रकोष्ठ राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनीत किया: राजस्थान प्रोविंस के युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष प्रीतेश वगैरिया को बनाया  </title>
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		<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 08:32:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष विपिन गांधी ने संस्था के युवा प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष वैभव गोवाडिया सागवाड़ा को मनोनीत कर निष्ठा और समर्पित भाव से समाज सेवा और युवा शक्ति को राष्ट्रीय स्तर पर जोड़कर समाज के समग्र विकास के प्रति समर्पण की शपथ दिलाई। बांसवाड़ा से पढ़िए, यह खबर&#8230; बांसवाड़ा। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष विपिन गांधी ने संस्था के युवा प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष वैभव गोवाडिया सागवाड़ा को मनोनीत कर निष्ठा और समर्पित भाव से समाज सेवा और युवा शक्ति को राष्ट्रीय स्तर पर जोड़कर समाज के समग्र विकास के प्रति समर्पण की शपथ दिलाई। <span style="color: #ff0000">बांसवाड़ा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बांसवाड़ा।</strong> फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष विपिन गांधी ने संस्था के युवा प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष वैभव गोवाडिया सागवाड़ा को मनोनीत कर निष्ठा और समर्पित भाव से समाज सेवा और युवा शक्ति को राष्ट्रीय स्तर पर जोड़कर समाज के समग्र विकास के प्रति समर्पण की शपथ दिलाई। फेडरेशन के संस्थापक एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अजीत कोठिया ने बताया कि विपिन गांधी ने वैभव गोवाडिया को देश के पांचों प्रोविंसेज राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश तथा शेष भारत के लिए कार्यकारिणी गठन का निर्देश दिया। इसी क्रम में राजस्थान प्रोविंस के युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष पद पर उदयपुर निवासी सीए प्रीतेश वगैरिया को मनोनीत किया गया है। दोनों ही पदाधिकारियों के मनोनयन से हूमड़ समाज के युवाओं में हर्ष व्याप्त हो गया है।</p>
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		<title>हूमड़ जैन समाज के इतिहास में फेडरेशन के अध्यक्ष विपिन गांधी ने रचा कीर्तिमान : तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर यात्रा का नया प्रकल्प सामने आया </title>
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		<pubDate>Fri, 23 Jan 2026 14:52:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हूमड़ फेडरेशन प्रीमियर लीग एचएलपीएल डे एंड नाइट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट 2026 का आयोजन इंदौर के एस एस कम्यून अकादमी एवं क्रिकेट क्लब के मैदान पर 16-17-18 जनवरी को हुआ। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। हूमड़ फेडरेशन प्रीमियर लीग एचएलपीएल डे एंड नाइट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट 2026 का आयोजन इंदौर के एसएस कम्यून अकादमी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>हूमड़ फेडरेशन प्रीमियर लीग एचएलपीएल डे एंड नाइट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट 2026 का आयोजन इंदौर के एस एस कम्यून अकादमी एवं क्रिकेट क्लब के मैदान पर 16-17-18 जनवरी को हुआ। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> हूमड़ फेडरेशन प्रीमियर लीग एचएलपीएल डे एंड नाइट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट 2026 का आयोजन इंदौर के एसएस कम्यून अकादमी एवं क्रिकेट क्लब के मैदान पर 16-17-18 जनवरी को हुआ। फेडरेशन के संस्थापक एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अजीत कोठिया ने बताया की देश के विभिन्न प्रांतों राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश गुजरात एवं तेलंगाना से आई 16 टीमों ने तीन दिन तीन सितारा आवास व्यवस्था, सुस्वादु पौष्टिक आहार और भाईचारे की मिसाल के साथ इंदौर में रहकर अपने बल्ले का रोमांच दिखलाते हुए सभी के दिल में जगह बनाते गए।</p>
<p><strong>गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से अवार्ड प्राप्त किया</strong></p>
<p>इस कार्यक्रम का सपना एक वर्ष पूर्व देखा अध्यक्ष विपिन गांधी एवं महामंत्री महेंद्र बंडी ने। विचारों का त्वरित संप्रेषण कार्यकारिणी के सदस्य अनुभवी क्रिकेटज्ञ शरद गोडलिया से किया। कार्यकारिणी बैठक गोडलिया को इस क्रिकेट मैच के लिए संयोजक घोषित करके मजबूत कंधों पर भार सौंप दिया। इस बीच 1008 यात्रियों के साथ तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर यात्रा का नया प्रकल्प सामने आया। जिसे अध्यक्ष एवं‌ मंत्री की सूझबूझपूर्ण योजना से कार्यकारिणी सदस्यों के परिश्रम एवं प्रत्येक प्रोविंस के सहयोगियों के सहयोग से ऐतिहासिक यात्रा पूर्ण हुई। साथ ही गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा अवार्ड प्राप्त किया गया।</p>
<p><strong>इंदौर से इसके आयोजक बन सहयोग का निवेदन</strong></p>
<p>यह आयोजन इंदौर में करना निश्चित किए जाने से अनूप गांधी को समन्वयक नियुक्त कर श्री हूमड़ युवा मंच से इसके आयोजक बन सहयोग का निवेदन किया गया। जिसे सहर्ष स्वीकृति मिलने से मानो फेडरेशन के‌ पंख लग गए। तेज गति से उड़ान भरते हुए अध्यक्ष विपिन गांधी एवं मंत्री महेंद्र बंडी इसके लिए कार्ययोजना बनाने में जुट गए एवं देश के विभिन्न प्रांतों से 16 टीमों की स्वीकृति प्राप्त की गई। 16 से 18 जनवरी के बीच रोमांचक मुकाबला हुआ।18 जनवरी को आयोजित संक्षिप्त समारोह में विशेष अतिथि के रूप में पद्मश्री सुशील दोषी, मोटीवेटर स्पीकर चकोर की गांधी पुणे एवं हमें मैच के लिए ग्राउंड प्रदान करने वाले मालिक सुधांशु का सान्निध्य मिला।</p>
<p><strong>सभी खिलाड़ियों का एक ही स्वर था सुपर,सुपर,सुपर &#8230;</strong></p>
<p>कहीं किसी प्रकार की सुविधा या अव्यवस्था देखने को नहीं मिली। कार्यक्रम का अंतिम पड़ाव चमचमाती ट्रॉफी को ले जाने की प्रति स्पर्धा थी। जो अंत में इंदौरी धुरंधर एवं मुंबई दहिसर की टीम के बीच फाइनल का मुकाबला हुआ। अंतिम क्षण तक बने हुए रोमांचकारी मैच में इंदौरी धुरंधर टीम को विजेता घोषित किया गया। आगे फिर आने की भावना के साथ में समापन किया गया।</p>
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		<title>आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज की दिव्य देशना कार्यक्रम : 24 तीर्थंकरों ने मानव जाति को दिखाया सही मार्ग &#8211; भजनलाल शर्मा  </title>
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		<pubDate>Thu, 27 Nov 2025 10:35:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि परम पूज्य श्री सुंदर सागर जी महाराज ज्ञान और अहिंसा का दीपक जलाते हुए समाज का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उनका जीवन त्याग, तपस्या और करूणा का अद्भुत समन्वय है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सभी धर्मों के विकास और संरक्षण के लिए समर्पित है। उन्होंने आमजन से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि परम पूज्य श्री सुंदर सागर जी महाराज ज्ञान और अहिंसा का दीपक जलाते हुए समाज का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उनका जीवन त्याग, तपस्या और करूणा का अद्भुत समन्वय है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सभी धर्मों के विकास और संरक्षण के लिए समर्पित है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे जैन मुनियों के उपदेशों को न केवल सुने, बल्कि उन्हें अपने जीवन में भी उतारें। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि परम पूज्य श्री सुंदर सागर जी महाराज ज्ञान और अहिंसा का दीपक जलाते हुए समाज का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उनका जीवन त्याग, तपस्या और करूणा का अद्भुत समन्वय है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सभी धर्मों के विकास और संरक्षण के लिए समर्पित है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे जैन मुनियों के उपदेशों को न केवल सुने, बल्कि उन्हें अपने जीवन में भी उतारें।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-95479" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0131.jpg" alt="" width="1600" height="1024" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0131.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0131-300x192.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0131-1024x655.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0131-768x492.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0131-1536x983.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0131-990x634.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0131-1320x845.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />शर्मा गुरुवार को सांगानेर कैम्प कार्यालय में आयोजित आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज की दिव्य देशना कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जैन मुनियों का जीवन साधना से पूर्ण है, वे सांसारिक सुखों को त्याग कर आध्यात्मिक मार्ग पर चलते हैं। उन्होंने कहा कि परम पूज्य श्री सुंदर सागर जी महाराज के जीवन से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची महानता विनम्रता, सच्ची शक्ति अहिंसा और सच्चा सुख त्याग में है।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-95478" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0132.jpg" alt="" width="1600" height="1064" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0132.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0132-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0132-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0132-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0132-1536x1021.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0132-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0132-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0132-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0132-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0132-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0132-990x658.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251127-WA0132-1320x878.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />मुख्यमंत्री द्वारा जैन मुनियों की पद वंदना</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सभी संतों की पद वंदना करते हुए उनका हाथ थामे एसएफएस मानसरोवर स्थित आदिनाथ मंदिर से सांगानेर कैम्प कार्यालय के कार्यक्रम में लेकर आए। इस दौरान मार्ग में पुष्प वर्षा एवं बैंड वादन कर उनका स्वागत-अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में शर्मा को ‘मातृ भू सेवक’ की मानद उपाधि से अलंकृत भी किया गया। इससे पहले श्री शर्मा ने एसएफएस मानसरोवर स्थित श्री आदिनाथ मंदिर में दर्शन कर प्रदेश की सुख समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।</p>
<p><strong>जैन धर्म के पंच महाव्रत ने दुनिया को दिया महत्वपूर्ण संदेश</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन धर्म हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। इस धर्म के 24 तीर्थंकरों ने समय-समय पर मानव जाति को सही मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता ‘अहिंसा परमो धर्म’ है। ये एक वाक्य नहीं बल्कि सम्पूर्ण जीवन दर्शन है। आज पूरी दुनिया हिंसा से जूझ रही है और जैन धर्म का यह संदेश वर्तमान परिवेश में और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के पंच महाव्रत- अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह आज की भौतिकतावादी दुनिया में महत्वपूर्ण संदेश देते हैं। जैन धर्म हमें बताता है कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, आन्तरिक संतोष में है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जैन धर्म के मूल्यों एवं शिक्षाओं को प्रसारित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जैन समाज के तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए सड़कें, पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है। कार्यक्रम में शर्मा ने आचार्य श्री सुंदर सागर महाराज के प्रवचनों का श्रवण भी किया।</p>
<p>इस अवसर पर आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज, आचार्य शंशाक जी महाराज, सहकारिता राज्यमंत्री गौतम कुमार दक, जयपुर ग्रेटर उप महापौर श्री पुनीत कर्णावत सहित जैन मुनि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
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