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	<title>रथयात्रा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>रथयात्रा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जिन शासन तीर्थ क्षेत्र पर निकलेगी भव्य रथयात्रा महामस्तकाभिषेक होगा: सामूहिक अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्यमह पूजन किया जाएगा  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 May 2026 08:22:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी के जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव के अवसर पर श्री शांतिनाथ दिगंबर जैसवाल जैन धर्मार्थ प्रन्यास, श्री जिन शासन तीर्थ क्षेत्र नाका मदार अजमेर में 15 मई को विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के साथ भगवान शांतिनाथ स्वामी का महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। मुरैना/अजमेर से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी के जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव के अवसर पर श्री शांतिनाथ दिगंबर जैसवाल जैन धर्मार्थ प्रन्यास, श्री जिन शासन तीर्थ क्षेत्र नाका मदार अजमेर में 15 मई को विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के साथ भगवान शांतिनाथ स्वामी का महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">मुरैना/अजमेर से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/अजमेर।</strong> तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी के जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव के अवसर पर श्री शांतिनाथ दिगंबर जैसवाल जैन धर्मार्थ प्रन्यास, श्री जिन शासन तीर्थ क्षेत्र नाका मदार अजमेर में 15 मई को विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के साथ भगवान शांतिनाथ स्वामी का महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। आयोजन समिति के उत्सव एवं प्रचार-प्रसार संयोजक राकेश जैन घीया ‘मामा’ ने बताया कि इस पावन अवसर पर श्री जिन शासन तीर्थ क्षेत्र नाका मदार में प्रातः 6.30 बजे सामूहिक अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्यमह पूजन के साथ 54 फीट उत्तंग श्री शांतिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक होगा। तत्पश्चात संगीतमय विधान, निर्वाण कांड वाचन के साथ मोक्ष लक्ष्मी की कामना के साथ निर्वाण लाडू अर्पित किया जाएगा। साथ ही श्री जिनेन्द्र प्रभु की भव्य एवं विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। भव्य रथयात्रा श्री जिन शासन तीर्थ क्षेत्र से प्रारंभ होकर बैंक कॉलोनी, रेनू शर्मा शॉपिंग सेंटर, प्रोफेसर साहब के मकान से होती हुई नरेशजी वाली गली, नवीन भाई साहब वाली गली, कक्का गली, संजय टेंट के सामने नीचे रोड से होते हुए नाका मदार जिनालय होते हुए जिन शासन तीर्थ पहुंचेगी।</p>
<p><strong> इन कार्यक्रमों से होगा सभी का पुण्यार्जन </strong></p>
<p>इस पावन अवसर पर प्रथम तीन महामस्तकाभिषेक कर्ता परिवारों को रजत कलश भेंट किया जाएगा। प्रथम तीन अभिषेक कलशकर्ता, विधान कलश स्थापना कर्ता, खवासी एवं सारथी परिवारों के लिए बग्घी की व्यवस्था रहेगी। महोत्सव के समापन पश्चात उपस्थित सभी साधर्मी बंधुओं के लिए वात्सल्य भोज की व्यवस्था रखी गई है। जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक के अवसर पर चार दिन निरंतर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। प्रतिदिन शाम को 7.30 बजे श्री भक्तामर दीप महा अर्चना, रात्रि 8.00 बजे से आदि सृष्टि महिला मंडल द्वारा भक्तिमय जैन भजन एवं रात्रि 09.00 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाएंगे।</p>
<p><strong>अधिकाधिक संख्या में शामिल होने की अपील </strong></p>
<p>श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैसवाल जैन धर्मार्थ प्रन्यास, श्री जिन शासन तीर्थ क्षेत्र नाका मदार अजमेर द्वारा आयोजित समारोह में अध्यक्ष सुभाषचंद जैन चाड़ोसिया, महामंत्री कपिल जैन दनगसिया, मंत्री नागेन्द्र जैन दनगसिया, प्रचार प्रसार संयोजक राकेश जैन घीया, नरेंद्र पांड्या ने सकल जैन समाज से अधिकाधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।</p>
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		<title>शोभायात्रा के साथ श्री आदिनाथ पंचकल्याणक महोत्सव का शुभारंभ : एमडी इंटर कॉलेज ग्राउंड अयोध्या नगरी में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 11:31:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्मनगरी आगरा एक बार फिर आस्था, भक्ति और उल्लास के रंग में रंगी नजर आई, जब श्री 1008 सर्वताभद्र जिनालय, आदर्श नगर बल्केश्वर के श्री आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ 23 अप्रैल को अत्यंत भव्यता और धार्मिक गरिमा के साथ हुआ। आगरा से पढ़िए, यह खबर&#8230; आगरा। धर्मनगरी आगरा एक बार फिर आस्था, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धर्मनगरी आगरा एक बार फिर आस्था, भक्ति और उल्लास के रंग में रंगी नजर आई, जब श्री 1008 सर्वताभद्र जिनालय, आदर्श नगर बल्केश्वर के श्री आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ 23 अप्रैल को अत्यंत भव्यता और धार्मिक गरिमा के साथ हुआ। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> धर्मनगरी आगरा एक बार फिर आस्था, भक्ति और उल्लास के रंग में रंगी नजर आई, जब श्री 1008 सर्वताभद्र जिनालय, आदर्श नगर बल्केश्वर के श्री आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ 23 अप्रैल को अत्यंत भव्यता और धार्मिक गरिमा के साथ हुआ। एम.डी. जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत ग्राउंड स्थित अयोध्या नगरी के विशाल पांडाल में इस महोत्सव की शुरुआत प्रातःकाल जैन धर्मशाला, कचौड़ा बाजार बेलनगंज से निकली भव्य रथयात्रा, शोभायात्रा एवं घटयात्रा के साथ हुई। जिसने पूरे शहर को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। उपाध्याय श्री विहसंतसागरजी एवं मुनि श्री विश्वसाम्यसागर जी ससंघ के मंगल सानिध्य में निकली इस शोभायात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रातः 7 बजे आरंभ हुई यात्रा में बैंडबाजों की मधुर धुन, ढोल-नगाड़ों की गूंज, ऊंट-घोड़ों की आकर्षक उपस्थिति और विविध धार्मिक झांकियों ने सभी का मन मोह लिया। लगभग 500 मांगलिक महिलाएं सिर पर कलश धारण कर अनुशासित ढंग से घटयात्रा में शामिल हुईं, जो श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत प्रतीक बनीं।</p>
<p>शोभायात्रा में भगवान के माता-पिता, सौधर्म इंद्र, महायज्ञनायक, कुबेर, यज्ञनायक सहित विभिन्न पात्रों की झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। 56 कुमारिकाएं, अष्ट देवियां, सौभाग्यवती महिलाएं एवं भगवान की सह-बुआओं के लिए विशेष सिटिंग प्लेटफॉर्म युक्त झांकियां सजाई गईं।</p>
<p><strong>आध्यात्मिक वातावरण ने श्रद्धालुओं को अभिभूत किया </strong></p>
<p>आगरा के प्राचीन घोड़े वाले रथ पर श्रीजी को विराजमान कर भव्यता के साथ मेला स्थल तक लाया गया। रथ के आगे पूज्य उपाध्याय श्री विहसंतसागरजी ससंघ स्वयं विहार करते हुए चल रहे थे। वहीं नगर के प्रमुख श्रेष्ठी, समाजसेवी एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उनके साथ चल रहे थे। निर्धारित समय पर यह यात्रा अयोध्या नगरी स्थित पांडाल में पहुंची, जहां रोहित जैन अहिंसा एवं रचित जैन अहिंसा परिवार द्वारा विधिवत ध्वजारोहण किया गया। पंडाल का उद्घाटन डॉ. अरिंजय जैन द्वारा तथा मुख्य मंच का उद्घाटन निर्मल जैन मोठया एवं वीरेंद्र मोठया परिवार द्वारा किया गया। प्रतिष्ठाचार्य जयकुमार निशांत भैया जी एवं संदीप जैन शास्त्री के कुशल निर्देशन में आचार्य निमंत्रण, चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन हुए। इसके उपरांत दोपहर 1 बजे से संकल्प, प्रतिष्ठा विधान, मंडप प्रतिष्ठा, मंगल कलश स्थापना, जाप-अनुष्ठान एवं नित्य नियम जैसे मांगलिक कार्यक्रम हुए। भगवान का कलशाभिषेक कर विधिपूर्वक महोत्सव का शुभारंभ किया गया। विशाल पांडाल की आकर्षक सज्जा, सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं और आध्यात्मिक वातावरण ने श्रद्धालुओं को अभिभूत कर दिया।</p>
<p><strong>चंपक कुमारिकाओं द्वारा 16 स्वप्नों का मनोहारी प्रदर्शन </strong></p>
<p>इस अवसर पर उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी मुनिराज ने कहा कि पंचकल्याणक महोत्सव आत्मा के उत्थान और जीवन में संस्कारों के जागरण का महापर्व है। उन्होंने कहा कि भगवान के जीवन के पंच कल्याणक हमें त्याग, संयम, करुणा और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। महोत्सव के प्रथम दिवस दोपहर में सीमंतोन्नयन क्रिया (माता की गोद भराई) एवं नवीन प्रतिमाओं की सुगंधित द्रव्यों से आकार शुद्धि तथा गर्भ कल्याणक की पूजन विधि हुई। वहीं रात्रि में श्रीजी की महाआरती, गर्भकाल लाना एवं इन्द्रसभा की भव्य प्रस्तुति हुई। जिसमें अष्ट कुमारिकाओं द्वारा तीर्थंकर माता की सेवा तथा चंपक कुमारिकाओं द्वारा 16 स्वप्नों का मनोहारी प्रदर्शन किया गया। पहली बार विशाल एलइडी वॉल पर इंद्र दरबार एवं राजदरबार के जीवंत दृश्य प्रस्तुत किए गए, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।</p>
<p><strong>तीर्थंकर बालक का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा</strong></p>
<p>पूरे आयोजन में अनुशासन, भव्यता और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। संचालन मनोज बाकलीवाल एवं उमेश जैन भिंड वाले द्वारा किया गया। मीडिया प्रभारी शुभम जैन ने बताया कि महोत्सव के दूसरे दिन 24 अप्रैल को प्रातः 6 बजे से अयोध्या नगरी में तीर्थंकर बालक का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर निर्मल मोठया,रोहित जैन अहिंसा, हीरालाल बैनाड़ा,रजत जैन, पंकज जैन, पारस जैन कंसल, राजीव जैन, सुमेर जैन पांड्या, नरेंद्र कुमार जैन, मनोज जैन बल्लो, प्रवीण कुमार जैन, पारसदास जैन, दीपक जैन, विशाल जैन, कमल जैन, विष्णु भगवान जैन, अंकेश जैन, आकाश जैन, मनीषराज जैन, अलंकृत जैन, उषा मारसंस, खुशबू जैन, बबीता जैन उपस्थित रहे।</p>
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		<title>भगवान महावीर की रथयात्रा में उमड़ा भव्य आस्था का सैलाब : भगवान महावीर के जयकारों से सराबोर रहा आगरा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 06:35:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में शहर में अपार श्रद्धा,उल्लास और भव्यता के साथ विशाल रथयात्रा का आयोजन किया गया। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230; आगरा। भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में शहर में अपार श्रद्धा,उल्लास और भव्यता के साथ विशाल रथयात्रा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में शहर में अपार श्रद्धा,उल्लास और भव्यता के साथ विशाल रथयात्रा का आयोजन किया गया। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में शहर में अपार श्रद्धा,उल्लास और भव्यता के साथ विशाल रथयात्रा का आयोजन किया गया। श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, हनुमान चौराहा, मोती कटरा से निकली इस भव्य रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया। 12 वर्षों बाद मोती कटरा क्षेत्र को इस ऐतिहासिक आयोजन का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिससे क्षेत्रवासियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। आचार्य श्री चैत्य सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में यह आयोजन हुआ। प्रातः 8:30 बजे रथयात्रा का शुभारंभ राज्यसभा सांसद नवीन जैन द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया। इस रथ यात्रा की प्रथम आरती करने का सौभाग्य प्रदीप जैन पीएनसी परिवार को प्राप्त हुआ| रथयात्रा का दृश्य अत्यंत मनोहारी और भक्तिमय रहा। सुसज्जित रथ पर विराजमान भगवान महावीर की झांकी के साथ नगर भ्रमण कराया गया। पूरे मार्ग में “भगवान महावीर की जय” के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा, जिससे पूरा शहर भक्तिमय हो उठा। इस यात्रा में ताशा दल, 12 बैंड, 12 बगियाँ, जैन ध्वज, मंगल कलश सहित अनेक आकर्षक झांकियां शामिल रहीं—जिनमें आचार्य विद्यासागर जी, शांतिनाथ भगवान, नेमिनाथ भगवान की बारात, वर्धमान से महावीर, पांडुक शिला, बाहुबली भगवान, आदिनाथ भगवान, राजा सिद्धार्थ, माता के सोलह स्वप्न, कुबेर द्वारा धनवर्षा, अहिंसा का संदेश, पावापुरी, चंदनबाला आहार सहित अनेक धार्मिक एवं प्रेरणादायक दृश्य प्रस्तुत किए गए। देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने कार्यक्रम में चार चांद लगाए। एटा का मयूर नृत्य, महाराष्ट्र की डीजे पार्टी, असम के कलाकारों की म्यूजिकल प्रस्तुति, सपेरा बीन बैंड, भरतनाट्यम नृत्य, राजस्थान और इटावा के कलाकारों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जहां श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह शीतल जल एवं जलपान की व्यवस्था भी की गई।</p>
<p>जिनवाणी रथ, पांडुक शिला रथ, चांदी का रथ, हाथी एवं घोड़े वाले रथ विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। रथयात्रा को चार सेक्टरों—नवकार युवा मंच अवधपुरी, अरिहंत सेवा मंडल नुनिहाई एवं यमुना कॉलोनी, शांतिनाथ युवा मंडल जयपुर हाउस एवं एनसीसी क्लब छीपीटोला—में विभाजित कर सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया गया। यात्रा मोती कटरा से प्रारंभ होकर पटेल नगर, हींग की मंडी, सब्जी मार्केट, फव्वारा, सुभाष बाजार, जौहरी बाजार, दरेसी, धूलियागंज और बेलनगंज होते हुए एम.डी. जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत पहुंची। पूरे मार्ग में आकर्षक सजावट, तोरण द्वार और स्वागत मंच बनाए गए थे, जहां श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का अभिनंदन किया। अनेक स्थानों पर सामाजिक संगठनों द्वारा स्वागत, आरती एवं भक्ति गीतों का आयोजन किया गया, जिससे वातावरण और अधिक आध्यात्मिक बन गया। एम.डी. जैन इंटर कॉलेज परिसर में निर्यापक मुनि श्री विलोक सागर जी महाराज ससंघ एवं आयिका श्री सत्यमति माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य एवं विधानाचार्य पंडित श्री अभिषेक जैन शास्त्री के कुशल निर्देशन में पांडुकशिला पर श्रीजी की प्रतिमाओं को विराजमान कर विधिवत अभिषेक किया गया। रात्रि में महिलाओं द्वारा भगवान के बाल स्वरूप को पालने में झुलाने का भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें भजन, नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।</p>
<p>इस रथयात्रा का संचालन रथयात्रा संयोजक एवं महामंत्री अनंत कुमार जैन एवं मनोज जैन बाकलीवाल द्वारा किया गया| इस अवसर पर प्रदीप जैन पीएनसी, चक्रेश जैन,निर्मल मोठ्या,हीरा लाल बैनाड़ा,जगदीश प्रसाद जैन मनीष कुमार जैन ठेकेदार,राकेश कुमार पर्देवाले,राजेंद्र कुमार जैन,मनोज कुमार जैन बल्लो,विमल जैन,महावीर प्रसाद जैन,अजीत जैन, जयंती प्रसाद जैन,रविंद्र कुमार जैन,मोक्ष जैन,गिरीश जैन,पंकज जैन,पीयूष जैन,मीडिया प्रभारी शुभम जैन राहुल जैन समस्त मोती कटरा जैन समाज एवं आगरा सकल जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।</p>
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		<title>भगवान महावीर जन्म कल्याणक 30 को मनाएंगे : जैन वीर मंडल कुचामन सिटी के तत्वावधान में होगा आयोजन  </title>
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		<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 11:28:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जिओ और जीने दो सूत्र के प्रतिपादक, वर्तमान शांसन नायक, अहिंसा मय विश्वधर्म के प्रवर्तक जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थकर भगवान महावीर के 2625 वे जन्म कल्याणक पर कुचामन में श्री जैन वीर मंडल के तत्ववाधान में चैत्र सुदी तेरस सोमवार 30 मार्च को भव्य आयोजन किया जाएगा। कुचामनसिटी से पढ़िए, यह खबर&#8230; कुचामनसिटी। जिओ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जिओ और जीने दो सूत्र के प्रतिपादक, वर्तमान शांसन नायक, अहिंसा मय विश्वधर्म के प्रवर्तक जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थकर भगवान महावीर के 2625 वे जन्म कल्याणक पर कुचामन में श्री जैन वीर मंडल के तत्ववाधान में चैत्र सुदी तेरस सोमवार 30 मार्च को भव्य आयोजन किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">कुचामनसिटी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुचामनसिटी।</strong> जिओ और जीने दो सूत्र के प्रतिपादक, वर्तमान शांसन नायक, अहिंसामय विश्वधर्म के प्रवर्तक जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थकर भगवान महावीर के 2625 वे जन्म कल्याणक पर कुचामन में श्री जैन वीर मंडल के तत्ववाधान में चैत्र सुदी तेरस सोमवार 30 मार्च को भव्य आयोजन किया जाएगा। सौभागमल गंगवाल और सुभाष पहाडिया ने बताया कि सुबह साढ़े 6 बजे सभी जिनालयों में अभिषेक, शांतिधारा और भगवान महावीर के पूजा विधान किए जाएंगे। अजमेरी मंदिर के जयकुमार पहाडिया और मनोज पांड्या ने बताया कि प्रातः 9 बजे मंदिर से घटयात्रा जूलूस पलटन गेट, गोल प्याऊ, सब्जी मंडी स्थित महावीर चौक पर पहुंचेगा और यहां झंडारोहण कर बसस्टैंड, अंबेडकर सर्किल, डीडवाना रोरड, अहिंसा सर्किल होते हुए महावीर उद्यान में पांडुक शिला पर श्रीजी का कलशाभिषेक किया जाएगा। शांतिधारा के बाद जुलूस डीडवाना रोड होते हुए आथुना दरवाजा उपासरा गली से धानमंडी मंदिर पहुंचेगा। णमोकार महामंत्र का जाप किया जाएगा। शाम 4 बजे श्रीजी को रथ में विराजमान कर भव्य रथयात्रा पलटन गेट, आथुना दरवाजा होते हुए धान मंडी के मंदिर में पहुंचेगी और श्रीजी को मंदिर में विराजमान किया जाएगा। शाम को साढ़े सात बजे आरती और सांस्कृतिक प्रोग्राम होंगे।</p>
<p>जन्म कल्याणक के पूर्व दिवस 29 मार्च को जिओ और जीने दो के उद्देश्यों से जैन समाज और सर्व समाज द्वारा मानव सेवार्थ रक्तदान शिविर का आयोजन सुबह 9 से अपरान्ह 3 बजे तक महावीर भवन पुरानी धानमंडी में लगाया जाएगा। देवेंद्र पहाड़िया ने बताया कि शाम 7 बजे अहिंसा सर्किल डीडवाना रोड पर दीप प्रज्वलन कर आरती कर विश्व शांति के लिए णमोकार महामंत्र का जाप किया जाएगा। सुभाष रावका, अशोक झाझंरी ने बताया कि जुलुस में पुरुष सफेद वस्त्र और महिलाएं केसरिया परिधान पहनकर जुलूस में शामिल होंगे।</p>
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		<title>गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में हुआ इंद्रध्वज विधान : विधान में माताजी का मिला परम् आशीर्वाद, गदगद हुए श्रावक-श्राविकाएं </title>
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		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 06:29:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शाश्वत तीर्थ अयोध्या में नवनिर्मित 101 भगवान के मंदिर में प्रथम बार इंद्रध्वज विधान का आयोजन हुआ। खूब धूमधाम से पूर्णाहुति हवन एवं रथयात्रा के साथ विधान के समापन पर गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का मंगलमय आशीर्वाद प्राप्त हुआ। पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह रिपोर्ट&#8230; अयोध्या। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में नवनिर्मित 101 भगवान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में नवनिर्मित 101 भगवान के मंदिर में प्रथम बार इंद्रध्वज विधान का आयोजन हुआ। खूब धूमधाम से पूर्णाहुति हवन एवं रथयात्रा के साथ विधान के समापन पर गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का मंगलमय आशीर्वाद प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> शाश्वत तीर्थ अयोध्या में नवनिर्मित 101 भगवान के मंदिर में प्रथम बार इंद्रध्वज विधान का आयोजन हुआ। खूब धूमधाम से पूर्णाहुति हवन एवं रथयात्रा के साथ विधान के समापन पर गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का मंगलमय आशीर्वाद प्राप्त हुआ। आयोजक अध्यात्म जैन, अर्पिता जैन पुत्र, सम्यक जैन लखनऊ परिवार उपस्थित थे। इस अवसर पर डॉ जीवन प्रकाश जैन जी ने कहा कि पद्मनंदिपंचविंशतिका के स्वाध्याय के कारण बचपन से ही विकसित वैराग्य के बीज 1952 में शरदपूर्णिमा के दिन ही प्रस्फुटित हुए, जब बाराबंकी में आपने आचार्य श्री देशभूषण जी महाराज से सप्तम प्रतिमा (ब्रह्मचर्य) के व्रत अंगीकार किए। 1953 में चैत्र कृष्णा एकम् को श्री महावीर जी में आपने आचार्य श्री देशभूषण जी से क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण कर ‘वीरमती’ नाम प्राप्त किया। व्रत एवं नियमों का कठोरता से पालन करते हुए आप अपनी संज्ञा ‘वीरमती’ को तो सार्थक कर ही रही थीं, किन्तु आपको मात्र क्षुल्लिका के व्रतों से संतोष कहां। 19 वर्ष की यौवनावस्था में क्षुल्लिका के व्रतों का कठोरता से पालन करने के साथ ही आप निरन्तर वैराग्य के भावों को विकसित करती रहीं एवं अनन्तर इस युग के महान आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की आज्ञा से उनके ही पट्टशिष्य आचार्यश्री वीरसागर जी से वैशाख कृष्णा द्वितीया को 1956 ईसवीमाधोराजपुरा की पवित्र भूमि में आर्यिका के व्रतों को अंगीकार कर ‘ज्ञानमती’ की सार्थक संज्ञा प्राप्त की। धन्य हैं वे भविष्य दृष्टा आचार्य श्री वीरसागर जी, जिन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से इनकी प्रतिभा का आकलन कर इन्हें ‘‘ज्ञानमती’’ नाम दिया। आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी के साक्षात तीन बार दर्शन करने वाली गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी जैनशासन के वर्तमान व्योम पर छिटके नक्षत्रों में दैदीप्यमान सूर्य की भांति अपनी प्रकाश-रश्मियों को प्रकीर्णित कर रहीं। गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी, जिन्होंने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी के तीन बार दर्शन किए हैं। नीरा (महाराष्ट्र ) में सन् 1954 में, बारामती (महा.) में सन् 1955 में, कुंथलगिरि सिद्धक्षेत्र (महा.) में सन् 1955 में सल्लेखना के समय। सन्1955 में आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी ने कुंथलगिरि में देशभूषण-कुलभूषण जी की प्रतिमा के समक्ष 12 वर्ष की सल्लेखना ली थी।</p>
<p><strong>आचार्य श्री की प्रत्यक्ष सल्लेखना देखी</strong></p>
<p>ज्ञानमती माताजी उस समय क्षुल्लिका अवस्था में वीरमती माताजी थी,कुंथलगिरि में एक माह आचार्यश्री के श्रीचरणों में रहीं। क्षुल्लिकावस्था में आचार्य श्री की प्रत्यक्ष सल्लेखना तो देखी ही है, साथ ही उनके श्रीमुख से अनेक अनुभव वाक्य भी प्राप्त किए हैं। ज्ञानमती माताजी (क्षुल्लिका वीरमति) ने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी से आर्यिका दीक्षा की याचना की थी किन्तु, आचार्य श्री ने कहा था कि मैंने सल्लेखना ले ली है और अब दीक्षा देने का त्याग कर दिया है। तुम मेरे शिष्य वीरसागर से आर्यिका दीक्षा लेना। अत: आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के आदेशानुसार उन्होंने 1956 की वैशाख कृष्ण दूज को माधोराजपुरा (जयपुर-राजस्थान) में आचार्य श्री शांतिसागर जी के प्रथम शिष्य पट्टाचार्य आचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से आर्यिका दीक्षा (महिलाओं के लिए दीक्षा की सर्वोच्च अवस्था) ली और आर्यिका ज्ञानमती बन गईं एवं नाम के अनुसार सारे विश्व में एक विराट साहित्य की श्रृंखला का सृजन किया, जो कि न भूतो न भविष्यति।</p>
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		<title>संगीतमय श्री चंद्रप्रभ महामंडल विधान हुआ: ट्रांस यमुना कॉलोनी में रथयात्रा के पात्रों का हुआ चयन </title>
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		<pubDate>Mon, 08 Dec 2025 12:55:15 +0000</pubDate>
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<p><strong>दिसंबर को श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर ट्रांस यमुना कॉलोनी में श्री चंद्रप्रभ भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव के पूर्व गायक विवेक जैन द्वारा श्री चंद्रप्रभु विधान सानंद किया गया। विधान उपरांत मंदिर समिति द्वारा आगामी रथोत्सव के पात्रों का चयन किया गया। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> दिसंबर को श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर ट्रांस यमुना कॉलोनी में श्री चंद्रप्रभ भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव के पूर्व गायक विवेक जैन द्वारा श्री चंद्रप्रभु विधान सानंद किया गया। विधान उपरांत मंदिर समिति द्वारा आगामी रथोत्सव के पात्रों का चयन किया गया। जिसमें सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य देवेन्द्र जैन को मिला। महेंद्र इंद्र मुकेश जैन, ईशान इंद्र कमल जैन, सारथी सुनील जैन, धनपति कुबेर मुकेशबाबू जैन, जबकि जिनवाणी रथ के पात्र नत्थीलाल जैन रहे।</p>
<p>इस मौके पर अध्यक्ष राजेश जैन, महामंत्री कुमार मंगलम जैन, कोषाध्यक्ष कैलाशचंद जैन, सांस्कृतिक मंत्री चंद्रप्रकाश जैन, संजय जैन, पुष्पेंद्र जैन, नरेशचंद्र जैन, विनीत जैन, सुनील जैन, विजय कुमार जैन, नीलम जैन, कुसुमलता जैन, सरिता जैन, संध्या जैन, बबीता जैन अंजना जैन, खुशबू जैन आदि लोग उपस्थित रहे।</p>
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		<title>आचार्यश्री विनम्रसागर जी ने बताया सिद्धचक्र विधान का महत्व: विधान के समापन पर निकाली भव्यतम रथयात्रा, हाथी और बैंडबाजे रहे शामिल </title>
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		<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 08:04:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री सिद्धचक्र मंडल विधान आत्मशुद्धि, आत्मकल्याण और मोक्ष मार्ग का अद्वितीय साधन है। इसमें साधक सिद्ध भगवान की पूर्णता, पवित्रता और मुक्तात्म स्वरूप का स्मरण करता है। यह उद्गार आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज ने श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतिम दिन निकली रथयात्रा के दौरान व्यक्त किए। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री सिद्धचक्र मंडल विधान आत्मशुद्धि, आत्मकल्याण और मोक्ष मार्ग का अद्वितीय साधन है। इसमें साधक सिद्ध भगवान की पूर्णता, पवित्रता और मुक्तात्म स्वरूप का स्मरण करता है। यह उद्गार आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज ने श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतिम दिन निकली रथयात्रा के दौरान व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> श्री सिद्धचक्र मंडल विधान आत्मशुद्धि, आत्मकल्याण और मोक्ष मार्ग का अद्वितीय साधन है। इसमें साधक सिद्ध भगवान की पूर्णता, पवित्रता और मुक्तात्म स्वरूप का स्मरण करता है। यह उद्गार आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज ने श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतिम दिन निकली रथयात्रा के दौरान व्यक्त किए। महोत्सव अध्यक्ष राहुल जैन केसरी ने बताया कि रथयात्रा सुबह इंडो किड्स स्कूल तिलकनगर से निकाली गई। बैंडबाजों, ध्वज, आकर्षक झांकियों, मनमोहक सजावट, तीन विशाल रथ और हाथी के साथ यात्रा निकाली गई। तिलक नगर महिला मंडल सदस्य भी मौजूद रहीं। सुबह 6.45 बजे वंदना, अभिषेक-अर्घ्य, स्वाध्याय, पूजन, कलश स्थापना, प्रवचन और शाम को आरती और ध्यान सत्र हुए।</p>
<p>इस अवसर पर विधान संरक्षक राजेश उदावत, विमल अजमेरा, सचिन उद्योगपति, विधानाचार्य राजेश भैया, जिनेश मलैया, मनोज छाबड़ा, विमल जैन, प्रवीण दिवाकर और नवीन गोधा आदि मौजूद रहे। विधान समिति में देवेंद्र जैन, अतिशय जैन, राजेंद्र गंगवाल, रज्जू भैया, राजू श्रीफल, ऋषभ जैन और राजेंद्र मोदी का विशेष सहयोग रहा। द्रव्य पुण्यार्जक मनोज बाकलीवाल, भोजन पुण्यार्जक सतीश, विक्रम राजावत और मनीष नायक रहे।</p>
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		<title>अपने अंदर की बुराइयों की आहुति ही वास्तविक हवन है – मुनि श्री प्रमाण सागर : रथयात्रा के साथ सम्पन्न हुआ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन </title>
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		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 14:25:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अवधपुरी स्थित विद्याप्रमाण “गुरुकुलम्” में आयोजित आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन भगवान जिनेन्द्र देव की भव्य रथयात्रा और हवन के साथ हुआ। मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने कहा कि वास्तविक हवन वह है जिसमें व्यक्ति अपनी बुराइयों की आहुति दे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… अवधपुरी स्थित विद्याप्रमाण “गुरुकुलम्” में विगत आठ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अवधपुरी स्थित विद्याप्रमाण “गुरुकुलम्” में आयोजित आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन भगवान जिनेन्द्र देव की भव्य रथयात्रा और हवन के साथ हुआ। मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने कहा कि वास्तविक हवन वह है जिसमें व्यक्ति अपनी बुराइयों की आहुति दे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>अवधपुरी स्थित विद्याप्रमाण “गुरुकुलम्” में विगत आठ दिनों से चल रहे 1008 श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन जाप, हवन और भगवान जिनेन्द्र देव की भव्य रथयात्रा के साथ हुआ। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रातःकाल भगवान जिनेन्द्र देव का अभिषेक, शांतिधारा और नित्यनियम पूजन के पश्चात मंत्रोच्चारण के साथ अग्निकुंड में आहुतियाँ दी गईं।</p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि “यदि श्रद्धा सच्ची है, तो व्यक्ति के भीतर की बुराइयाँ स्वयं मिट जाती हैं। केवल धुआँ उड़ाना हवन नहीं है, बल्कि अपनी बुराइयों और पापों की आहुति देना ही वास्तविक हवन है।” उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को स्वयं चिंतन करना चाहिए कि विधान के पहले उसके जीवन में क्या प्रवृत्तियाँ थीं और अब उनमें कितना परिवर्तन आया है।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि धार्मिक आयोजन से पुण्य का संचय और पाप का क्षय तो होता है, परंतु इसका वास्तविक मापदंड यह है कि इन दिनों में आपके भीतर कितनी भौतिक आकांक्षाएँ घटीं और कितनी आध्यात्मिक चेतना जागृत हुई। उन्होंने आशीर्वाद स्वरूप कहा कि “भौतिकता के प्रति उदासीनता और भगवान के प्रति आराधना ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है।”</p>
<p>कार्यक्रम के अंत में भगवान जिनेन्द्र देव की विशाल रथयात्रा निकाली गई, जिसमें जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। मंच पर मुनि श्री संधान सागर जी महाराज सहित समस्त क्षुल्लक विराजमान रहे। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मचारी अशोक भैया और ब्रह्मचारी अभय भैया ने किया।</p>
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		<title>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन एवं रथयात्रा रविवार को: सभी जिन प्रतिमाएं अभिषेक के बाद श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में होंगी विराजमान  </title>
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		<pubDate>Fri, 10 Oct 2025 11:24:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री विद्याप्रमाण गुरु कुलम् अवधपुरी में संस्कृत भाषा में निबद्ध श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन रविवार को प्रातः कालीन बेला में होने जा रहा है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया विगत 4 अक्टूबर से यहां श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ हुआ था। उसका समापन रविवार को होगा। अवधपुरी(भोपाल) से पढ़िए, यह खबर... अवधपुरी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री विद्याप्रमाण गुरु कुलम् अवधपुरी में संस्कृत भाषा में निबद्ध श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन रविवार को प्रातः कालीन बेला में होने जा रहा है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया विगत 4 अक्टूबर से यहां श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ हुआ था। उसका समापन रविवार को होगा। <span style="color: #ff0000">अवधपुरी(भोपाल) से पढ़िए, यह खबर..</span>.</strong></p>
<hr />
<p><strong>अवधपुरी (भोपाल)।</strong> श्री विद्याप्रमाण गुरु कुलम् अवधपुरी में संस्कृत भाषा में निबद्ध श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन रविवार को प्रातः कालीन बेला में होने जा रहा है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया विगत 4 अक्टूबर से यहां श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ हुआ था। उसका समापन रविवार को होगा। प्रात:6 बजे से अभिषेक एवं शांतिधारा नित्य नियम पूजन के पश्चात हवन एवं 9 बजे से रथयात्रा श्री विद्याप्रमाण गुरुकुलम् से मुनिसंघ के सानिध्य में प्रारंभ होगी, जो समन्वयनगर होती हुई वापस विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में आएगी। सभी जिन प्रतिमाओं का अभिषेक उपरांत श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान किया जाएगा। जैन ने बताया विधान के सातवें दिवस मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज एवं मुनि श्री संधान सागरजी महाराज ने अपने मुखारबिंद से पंच परमेष्ठी श्री अरहंतजी, सिद्धजी, आचार्यजी, उपाध्याय जी तथा सर्व साधुओं की आराधना करते हुए दोपहर 12 बजे तक 512 अर्घ्य पूर्ण भक्ति भाव के साथ चढ़ाए गए तथा शनिवार को भगवान के सहस्त्र नामों के साथ 1024 अर्घ्य चढ़ाए जाएंगे। इस मौके पर मुनि श्री ने पंच परमेष्ठी के 143 मूलगुणों की चर्चा करते हुए कहा कि इन्ही मूलगुणों के आधार पर इन परमेष्ठियों की पहचान हुआ करती है। मूलगुणों से ही उनके आचार-व्यवहार तथा चर्या को देखा जाता है।</p>
<p><strong>साधु परमेष्ठी में 28 मूल गुण समाहित होते हैं</strong></p>
<p>जब आचार्य परमेष्ठी के गुणों की चर्चा आई तो मुनि श्री ने कहा कि आचार्य गुरुदेव में वह सभी मूल गुण परिलक्षित होते थे। उनकी चर्या में मूलाचार समाया हुआ था। उन्होंने कहा कि अरिहंत भगवान में छियालीस, सिद्ध भगवान में आठ, आचार्य परमेष्ठी में छत्तीस, उपाध्याय परमेष्ठी में पच्चीस तथा साधु परमेष्ठी में 28 मूल गुण समाहित होते हैं। उन सभी मूल गुणों की आज आप लोगों ने बड़े ही भक्ति भाव के साथ आराधना की। इस अवसर पर समस्त क्षुल्लक आदरसागर जी, श्री समादर सागर जी, श्री चिद्रूप सागर जी, श्री स्वरूपसागर जी तथा श्री सुभग सागर जी महाराज एवं सभी ब्रह्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन बाल ब्र. अभय भैया आदित्य तथा अशोक भैया लिधोरा ने किया।</p>
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		<title>पंच बालयति मंदिर में श्रुत आराधना महोत्सव आरंभ: एक जून तक चलेगा धार्मिक आराधना का दौर </title>
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		<pubDate>Sun, 25 May 2025 09:42:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर के विजयनगर स्थित पंचबालयति मंदिर में श्रुत आराधना महोत्सव का आयोजन शुरू किया गया है। इसमें बाल ब्रह्मचारी संजीव भैया कटंगी विधानाचार्य की भूमिका निभा रहे हैं। महोत्सव में समवशरण, आचार्य छत्तीसी, श्रुत स्कंध विधान, महामस्तकाभिषेक, निवार्ण लाडु और रथयात्रा जैसे आयोजन होंगे। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; स्रोत दैनिक भास्कर&#8212; इंदौर। धार्मिक आयोजनों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इंदौर के विजयनगर स्थित पंचबालयति मंदिर में श्रुत आराधना महोत्सव का आयोजन शुरू किया गया है। इसमें बाल ब्रह्मचारी संजीव भैया कटंगी विधानाचार्य की भूमिका निभा रहे हैं। महोत्सव में समवशरण, आचार्य छत्तीसी, श्रुत स्कंध विधान, महामस्तकाभिषेक, निवार्ण लाडु और रथयात्रा जैसे आयोजन होंगे। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; स्रोत दैनिक भास्कर&#8212;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> धार्मिक आयोजनों की महानगरी इंदौर में श्रुत आराधना महोत्सव का आयोजन रविवार से आरंभ हुआ है। इस महोत्सव में 1 जून तक श्री दिगंबर जैन पंचबालयति मंदिर विजयनगर में विविध धार्मिक कार्यक्रम किए जा रहे हैं। आचार्यश्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद और मुनिश्री निष्पक्ष सागरजी महाराज, मुनिश्री निष्प्रहसागर जी महाराज के सानिध्य में हो रहे श्रुत आराधना महोत्सव में बाल ब्रह्मचारी संजीव भैया कटंगी विधानाचार्य की भूमिका का निर्वहन करेंगे। उनके विधानाचार्यत्व में समवशरण, आचार्य छत्तीसी, श्रुत स्कंध विधान, महामस्तकाभिषेक, निर्वाण लाडु और रथयात्रा के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।</p>
<p><strong>श्री कातंत्र व्याकरण पंचसंधि प्रशिक्षण शिविर होगा</strong></p>
<p>इस महती आयोजन में श्री कातंत्र व्याकरण पंचसंधि प्रशिक्षण शिविर भी लगाया जा रहा है। इसमें देश के अनेक त्यागी और शिष्यगण बाल ब्रह्मचारी प्रदीप पीयूष के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करेंगे। बाल ब्रह्मचारी जिनेश मलैया ने बताया कि संन्यासियों के लिए आवास और भोजन के विशेष प्रबंध किए गए हैं। रोज सुबह से रात तक चार सत्रों में कक्षाएं लगाई जाएंगी। विशेष दैनिक शंका समाधान सुबह साढ़े 9 बजे से 10बजे तक होगा। मुनिद्वय के प्रवचन रोज सुबह 9 बजे से होंगे। अर्हम ध्यान योग शाम को 6.45 से 7.45 बजे तक होगा।</p>
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