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	<title>याग मंडल विधान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>याग मंडल विधान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>71 वर्ष प्राचीन मान स्तंभ के चारों श्री जी का पंचामृत अभिषेक: मान स्तंभ देखकर अहंकार, घमंड नष्ट होकर मन शांत निर्मल होता है  </title>
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		<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:53:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 32 साधुओं सहित निवाई विराजित हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में 27 जनवरी को महिलाओं की कलशयात्रा से भूमि शुद्धि, याग मंडल विधान हुआ। निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; निवाई। आचार्य श्री शांतिसागर जी की परंपरा के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांतिसागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 32 साधुओं सहित निवाई विराजित हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में 27 जनवरी को महिलाओं की कलशयात्रा से भूमि शुद्धि, याग मंडल विधान हुआ। <span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई।</strong> आचार्य श्री शांतिसागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 32 साधुओं सहित निवाई विराजित हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में 27 जनवरी को महिलाओं की कलशयात्रा से भूमि शुद्धि, याग मंडल विधान हुआ। 28 जनवरी को आचार्य निमंत्रण, ध्वजवंदन, ध्वजारोहण मंदिरजी में कलशारोहण मानसतंभ में विराजित चार श्री जी का भव्य पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा का धार्मिक अनुष्ठान पुण्यार्जक परिवारों द्वारा विधानाचार्य सुरेश के शास्त्री के निर्देशन मंत्रोच्चार से किया गया। मंदिर समिति के मंत्री मोहित चंवरिया, पवन बोहरा अनुसार दिगंबर जैन बड़ा मंदिर कमेटी के तत्वाधान में सकल दिगंबर समाज के सहयोग से 27 एवं 28 जनवरी को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को आचार्य निमंत्रण दिया गया। प्रेमदेवी, चेतन, महेश गिंदौड़ी परिवार ने ध्वजारोहण, मंदिर के शिखर पर नूतन कलशारोहण नरेंद्र, वीरमती चंवरिया परिवार ने किया। 41 फिट ऊपर विराजित श्री आदिनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा अरुण, अर्पित लटूरिया परिवार ने श्री चंद्रप्रभ भगवान का पंचामृत अभिषेक विनोद, महेंद्र सुनारा परिवार ने, शांतिधारा सुरेश, महेंद्र रवि पाटनी परिवार ने, श्री शांतिनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा बिष्णु, राहुल, बोहरा परिवार ने तथा श्री महावीर स्वामी का पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा सुशील नीरा जैन पाइप फैक्ट्री परिवार ने किया। शांतिधारा का मंत्रोच्चार मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-99099" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260128-WA0014-300x253.jpg" alt="" width="300" height="253" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260128-WA0014-300x253.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260128-WA0014.jpg 720w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>प्राचीन समय में तीर्थंकर भगवान के समवशरण के बाहर मानस्तंभ होते थे</strong></p>
<p>बड़ा मंदिर कमेटी ने सभी पुण्यार्जक परिवारों का सम्मान कर बहुमान किया। मान स्तंभ क्यों बनाया जाता है इस बारे में आचार्य श्री वर्धमानसागर जी के शिष्य मुनि श्री हितेंद्रसागर जी ने बताया कि जैन मानस्तंभ जैन मंदिरों के सामने एक ऊंचा स्वतंत्र आध्यात्मिक स्तंभ होता है। मान का आशय अहंकार ,घमंड होता है और स्तंभ का मतलब खंबा होता है अर्थात ऐसा खंबा जो मान और अहंकार को नष्ट करें। वह मानस्तंभ होता है, प्राचीन समय में तीर्थंकर भगवान के समवशरण के बाहर मानस्तंभ होते थे। मान्यता है कि इसे देखकर जीवों का अहंकार घमंड नष्ट हो जाता है। वह विनम्र होकर भगवान के दर्शन करते हैं। मान स्तंभ के शीर्ष पर चारों दिशा में चार भगवान की प्रतिमा होती है निचले हिस्से में तीन सीढ़ियां होती है जो सम्यकदर्शन, सम्यकज्ञान और सम्यक चारित्र का प्रतीक है। मानस्तंभ जैन वास्तु कला का एक हिस्सा है। मानस्तंभ देखकर मंदिर में प्रवेश के पूर्व मन शांत, नम्र, और निर्मल हो जाता है।</p>
<p><strong>मान स्तंभ का धार्मिक इतिहास </strong></p>
<p>71 वर्ष पूर्व प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के प्रथम, द्वितीय और तृतीय पट्टाधीश मुनि अवस्था के मंगल पावन सानिध्य में 30 जनवरी 1955 माध शुक्ला सप्तमी विक्रम संवत 2010 वीर निर्वाण 2480 स्व रतनलाल गिदौड़ी द्वारा अपने पिता स्व. गजानंद की स्मृति में आचार्य कल्प श्री वीरसागर जी, मुनि श्री शिव सागर जी, मुनि श्री धर्मसागर जी, आर्यिका श्री वीरमति, श्री सिद्ध मति, श्री सुमति मति, श्री पार्श्व मति, श्री शांति मति एवं क्षुल्लक श्री पदम सागर जी 8 साधुओं की उपस्थिति में 41 फीट के मानस्तंभ की प्रतिष्ठा सूरजमल प्रतिष्ठाचार्य द्वारा हुई। 41 फिट के संगमरमर के सफेद पत्थरों के मानस्तंभ पर 1008 श्री आदिनाथ, श्री चंद्र प्रभु, श्री शांति नाथ और श्री महावीर स्वामी की चार प्रतिमाएं चारों दिशा में विराजित हैं तथा धार्मिक अनेक चित्र अंकित है। जिसमें सीता जी की अग्नि परीक्षा, षट् लेश्या, दिगंबर मुनियों के तप प्रभाव से सिंह और गाय एक साथ पानी पीते हुए, सम्राट चंद्रगुप्त के 16 सपने, संसार दर्शन मोह मधु बिंब आदि का चित्रण किया गया है।</p>
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		<title>घटयात्रा ध्वजारोहण सकलीकरण से पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू : मुख्य पंडाल में श्री जी को विराजमान कर अभिषेक शांतिधारा की  </title>
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		<pubDate>Sat, 08 Nov 2025 09:58:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव ब्रह्मचारी नमन भैया के निर्देशन में हो रहा है। प्रातः की बेला से ही भक्तों का मंदिर आना शुरू हो गया था। सर्वप्रथम देव आज्ञा के बाद आचार्य श्री से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव निर्विघ्न संपन्न हो, इसके लिए देव आज्ञा ली गई। रामगंजमंडी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव ब्रह्मचारी नमन भैया के निर्देशन में हो रहा है। प्रातः की बेला से ही भक्तों का मंदिर आना शुरू हो गया था। सर्वप्रथम देव आज्ञा के बाद आचार्य श्री से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव निर्विघ्न संपन्न हो, इसके लिए देव आज्ञा ली गई। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव ब्रह्मचारी नमन भया के निर्देशन में हो रहा है। प्रातः की बेला से ही भक्तों का मंदिर आना शुरू हो गया था। सर्वप्रथम देव आज्ञा के बाद आचार्य श्री से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव निर्विघ्न संपन्न हो, इसके लिए देव आज्ञा ली गई। साथ ही नगर के प्रमुख मार्ग से होते हुए घटयात्रा भी निकली। घटयात्रा में भी अपार उत्साह देखने को मिल रहा था। इसके उपरांत मुख्य पंडाल में श्री जी को विराजमान कर अभिषेक शांतिधारा की गई। वेदी शुद्धि, मंडप शुद्धि आदि की क्रियाएं की गई।</p>
<p>आयोजन की शुरुआत में ध्वजारोहण किया गया। यह भगवान स्वरूप पदमकुमार नीरजकुमार देवरी खानपुर वाले परिवार की ओर से किया गया। मंदिर जी का वातावरण भक्ति से ओतप्रोत रहा। इसी क्रम में इंद्र प्रतिष्ठा सकलीकरण आदि की क्रियाएं की गई। साथ ही याग मंडल विधान किया गया। दोपहर की बेला में भगवान की माता की गोद भराई की गई एवं भगवान के गर्भ कल्याण की खुशियां मनाई गई। इस महोत्सव में भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य सुधा जयकुमार डूंगरवाल परिवार को प्राप्त हुआ है।</p>
<p><strong>हमें तीनों लोकों को ज्ञात कराना है तो विशेष बनना पड़ता है। </strong></p>
<p>आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का महत्व समझाया। उन्होंने कहा हम अपने परमात्मा का गर्भकल्याणक मना रहे हैं। इसकी विशेषता है यह सामान्य नहीं है, इन क्षणों में तीनों लोक क्षण-क्षण के लिए सुकून प्राप्त करते हैं। ऐसे महान जीवों का हम गर्भ कल्याणक मनाते हैं। तीनों लोकों का ज्ञात कराना है तो विशेष बनना पड़ता है। आचार्य श्री ने कहा यदि हमें तीनों लोकों को ज्ञात कराना है तो विशेष बनना पड़ता है। हमे ही नहीं बनना पड़ता जन्मदाता को और गर्भधारण करने वाले को भी विशेष बनना पड़ता है।</p>
<p><strong>गर्भ कल्याणक ही आज मदर्स डे है </strong></p>
<p>उन्होंने गर्भ कल्याणक के विषय में कहा कि आज मदर्स डे है क्योंकि, गर्भ कल्याणक ही मां दिवस है। तीर्थंकर को गर्भ में धारण करने की योग्यता चाहिए। यह सबके बस की बात नहीं होती जो तीर्थंकर भगवान की अनंत भक्ति करते हैं। ऐसे जीव तीर्थंकर भगवान को गर्भ में धारण कर पाते हैं। परमात्मा से गले मिलकर नहीं जोड़ा जाता, परमात्मा को अपनी आस्था को जोड़ा जाता है। इतनी गहराई से जुड़ जाता है कि मनुष्य बने तो तीर्थंकर बन जाए महापुरुष बन जाए और महिलाएं हैं तो तीर्थंकर की माता बन जाए ऐसे जुड़ना चाहिए। आचार्य श्री ने पंचकल्याणक महोत्सव के लिए कहा कि यह पंचकल्याणक के 5 दिन आपके लिए अनमोल हैं। यह क्षण अमूल्य है आपके लिए तीन लोकों की संपत्ति एक तरफ है यदि आपका भाव कल्याणक के प्रति है, तीर्थंकर भगवान के पांचों कल्याणक हमारे भावों में हमारी क्रियाओं में चलने-फिरने में मात्र उनके कल्याणक और कुछ भी नहीं चाहिए, फिर देखो आनंद।</p>
<p><strong>झोली फैला रहे तो छोटी क्यों फैला रहे?</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने एक कथन के माध्यम से कहा कि यदि हम झोली फैला रहे हैं तो छोटी क्यों फैला रहे हैं ? इस विषय पर गुरुजी ने कहा कि इतनी बड़ी फैलाओं की देने वाला थक जाए, ऐसा मांगों की देने वाला सोच में पड़ जाए। लोग भगवान शांतिनाथ के समक्ष आकर कहते हैं कि मेरी दुकान नहीं चल रही, मेरी दुकान चल जाए। भगवान के समक्ष झोली इतनी बड़ी कर दो कि जैसे आप हो वैसा ही होना हमें जो आपके पास है वैसा का वैसा ही हमें चाहिए। उसमें सुई की नोक के बराबर भी नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं भगवान के सामने छोटा भिखारी बनकर नहीं जाता। मैं बड़ा भिखारी बनकर जाता हूं। भावना ही भा रहे हो तो ऐसी भाव की अदभुत हो। वह भावना अपनी आत्मा में ऐसी दस्तक दे दे ऐसा हस्ताक्षर दे दे कि आप भी तीर्थंकर हो, आप भी केवली हो। ऐसी भावना भाओ कमजोर भावना भाने से मतलब क्या है।यदि कमजोर भावना भाएंगे तो धराशाई हो जाएंगे। रामगंजमंडी के लोग कमजोर नहीं है। 5 दिनों में यही काम करना है कि अपनी भावनाओं को इतना ऊपर ले जाना है कि हमें अगर इच्छा हो तो भावना हो तो मोक्ष की हो तीर्थंकर पद की हो, मोक्ष की हो, अनंत चतुष्टय की हो।</p>
<p><strong>आज जो मैं हूं आचार्य श्री विराग सागर जी की वजह से हूं </strong></p>
<p>आचार्य श्री के गुरु आचार्य श्री विराग सागर महाराज के आचार्य</p>
<p>पदारोहण दिवस पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज में जो कुछ भी हूं आचार्य श्री विराग सागर की वजह से हूं। अगर गुरुदेव नहीं होते तो मैं भी नहीं होता। मैं नहीं होता तो मेरे पास भी कुछ भी नहीं होता। सारी की सारी कृपा उनकी है और यह सारा आशीर्वाद उन्हीं का है। मनुष्य पर्याय को सार्थक करने के लिए आचार्यश्री विराग सागर जी ने मुझे वरदान दिया कि मुझे दिगंबर बनाया। उनके उपकारों को हम सिर्फ स्मरण कर सकते हैं। रविवार की बेला में जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। जन्म की खुशियां मनाई जाएगी। जन्म कल्याण की शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्ग से होते हुए कृषि उपज मंडी पहुंचेगी, जहां बनी पांडुक शिला पर श्रीजी का अभिषेक होगा।</p>
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		<title>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ 8 नवंबर को : पांच दिवसीय महोत्सव में होंगे कई धार्मिक कार्यक्रम, मंदिर को सजाया </title>
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		<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 13:37:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव 8 नवंबर से शुरू होगा। जिसको लेकर सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। समाज में इसको लेकर काफी उत्साह बना हुआ है। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज के सानिध्य में पांच दिवसीय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव 8 नवंबर से शुरू होगा। जिसको लेकर सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। समाज में इसको लेकर काफी उत्साह बना हुआ है। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज के सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव 8 नवंबर से शुरू होगा। जिसको लेकर सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। समाज में इसको लेकर काफी उत्साह बना हुआ है। पूरे जिनालय को एवं आसपास के क्षेत्र को दुल्हन की तरह सजाया गया है। इन दिनों नगर का वातावरण भी भक्ति उल्लास से परिपूर्ण नजर आ रहा है। चारों ओर भक्ति भजनों की धुनें गूंज रही है। नगर के लिए यह तीसरा अवसर है, जब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव हो रहा है। यह आयोजन श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में होगा। 8 नवंबर की प्रातः बेला में श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा, घटयात्रा, ध्वजारोहण, याग मंडल विधान किया जाएगा। इंद्रसभा एवं माता के 16 सपनों का दृश्य दिखाया जाएगा। साथ ही गर्भ कल्याणक की क्रियाएं भी हांेगी। संपूर्ण क्रियाएं ब्रह्मचारी नमन भैया पूर्ण करवाएंगे। शुक्रवार की बेला में जिन्हें भी महोत्सव में प्रतिमा विराजमान करने का सौभाग्य मिला, वह अपने आप को बहुत ही पुण्यशाली मान रहे हैं। वे सभी भक्ति भाव उल्लास के साथ उन प्रतिमाओं को अपने घर तक लाए और घर पर लाकर भक्ति उल्लास किया।</p>
<p>इसके बाद पुनः भजनों पर थिरकते हुए प्रतिमाओं को जिन मंदिर तक लाए मानो लग रहा था साक्षात प्रभु ही नगर में आ गए हांे। जैन दर्शन ने पंच कल्याणक महोत्सव एक बहुत बड़ा महोत्सव माना जाता है एवं पंचकल्याणक में सौभाग्यशाली पात्र बनना सभी अपने आप को गौरवशाली मानते हैं और किसी अनंत जन्मों का पुण्य मानकर चलते हैं। सभी इस पुण्य कार्य में सहभागी बनकर अपने आप को हर्षित एवं गदगद महसूस करते हैं। इससे पूर्व नगर में दो बार महोत्सव हो चुका है वर्ष 1980, वर्ष 2007 में तथा अब 2025 में होने जा रहा है।</p>
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		<title>अस्थाई श्री पदमप्रभु जिनबिंब स्थापना महोत्सवः अवधपुरी पदमप्रभु जिनालय में घटयात्रा एवं रथयात्रा के साथ शुभारंभ हुआ   </title>
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		<pubDate>Wed, 19 Feb 2025 13:52:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंत सागरजी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य एवं श्री पदमप्रभु जिनालय ट्रस्ट अवधपुरी के तत्वावधान में आगरा के अवधपुरी स्थित श्री पदमप्रभु जिनालय में अस्थाई श्री पदमप्रभु जिनबिंब स्थापना महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का शुभारंभ घटयात्रा एवं रथयात्रा के साथ हुआ। बड़ी संख्या में सौभाग्यवती महिलाएं केसरिया साड़ियों में मांगलिक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंत सागरजी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य एवं श्री पदमप्रभु जिनालय ट्रस्ट अवधपुरी के तत्वावधान में आगरा के अवधपुरी स्थित श्री पदमप्रभु जिनालय में अस्थाई श्री पदमप्रभु जिनबिंब स्थापना महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का शुभारंभ घटयात्रा एवं रथयात्रा के साथ हुआ। बड़ी संख्या में सौभाग्यवती महिलाएं केसरिया साड़ियों में मांगलिक द्रव्य से भरे मंगल कलश लेकर चल रही थीं। घटयात्रा में बड़ी संख्या में भक्त बैंड बाजों की धुन पर नृत्य करते हुए चल रहे थे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए आगरा से शुभम जैन की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य एव। श्री पदमप्रभु जिनालय ट्रस्ट अवधपुरी के तत्वावधान में आगरा के अवधपुरी स्थित 115 बी/सी श्री पदमप्रभु जिनालय में अस्थाई श्री पदमप्रभु जिनबिंब स्थापना महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का शुभारंभ 19 फरवरी को घटयात्रा एवं रथयात्रा के साथ हुआ। जिसका शुभारंभ आगरा के सीएमडी पीयूष जैन ने हरी झंडी दिखाकर किया।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-74982" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0047.jpg" alt="" width="1600" height="1066" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0047.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0047-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0047-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0047-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0047-1536x1023.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0047-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0047-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0047-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0047-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0047-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0047-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250219-WA0047-1320x879.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />महिलाएं मंगल कलश लेकर चल रही थीं </strong></p>
<p>जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं केसरिया साड़ियों में मांगलिक द्रव्य से भरे मंगल कलश लेकर चल रही थीं। घटयात्रा में बड़ी संख्या में भक्त बैंड बाजों की धुन पर नृत्य करते हुए चल रहे थे। घटयात्रा में सौधर्में इंद्र जितेंद्र-शालू जैन यज्ञनायक ओम प्रकाश-बीना जैन, कुबेर इंद्र विवेक-हेमलता जैन, ईशान इंद्र, अजय कुमार-रश्मि जैन सानद इंद्र राकेश जैन-कविता जैन, महेन्द्र इंद्र अतुल जैन, अंजली जैन के स्वरूप बग्घियों में सवार थे। घटयात्रा कलाकुंज जैन मंदिर से शुरू होकर विभिन्न मार्गाे से होती हुई श्री पदमप्रभु जिनालय, अवधपुरी पहुंची।</p>
<p><strong>अनावरण, दीप प्रज्वलन व मंगलाचरण की प्रस्तुति</strong></p>
<p>जहाँ कार्यक्रम का ध्वजारोहण आगरा खंडेलवाल दिगंबर जैन समिति के अध्यक्ष निर्मल कुमार मौठया, राजेश जैन सेठी, अशोक कुमार जैन द्वारा किया गया। साथ ही श्री पदमप्रभु जिनालय के ट्रस्टियों ने समाधिस्थ आचार्यश्री विराग सागरजी महाराज के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया। बालिकाओं ने नृत्य कर मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। सौभाग्यशाली भक्तों ने उपाध्यायश्री के मुखारविंद से उच्चारित मंत्रोच्चारण से भगवान पदमप्रभु की प्रतिमा का अभिषेक एवं वृहद शांतिधारा संपन्न की।</p>
<p><strong>अतिथियों का सम्मान किया</strong></p>
<p>बाहर से पधारे सभी अतिथियों का आयोजन समिति ने स्वागत सम्मान किया। इसके बाद महोत्सव के सभी पात्रों ने पंडित ऋषभ जैन शास्त्री घिरोर वालों के कुशल निर्देशन में नवीन वेदी का शुद्धिकरण कर पदमप्रभु भगवान की प्रतिमा को सिंहासन सहित विधि विधान के साथ विराजमान किया गया।</p>
<p><strong>अष्ट द्रव्यों सहित याग मंडल विधान की मांगलिक क्रियाएं संपन्न </strong></p>
<p>कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रावक-श्राविकाओं ने पंडितजी के कुशल निर्देशन में अष्ट द्रव्यों क साथ याग मंडल विधान की मांगलिक क्रियाएं संपन्न कीं। कार्यक्रम में सभी भक्तों को उपाध्यायश्री की मंगल वाणी श्रवण करने का अवसर प्राप्त हुआ। इस कार्यक्रम में संगीत रॉकी जैन एंड पार्टी ने दिया। कार्यक्रम का संचालन सत्येंद्र जैन साहू एवं मनोज जैन बाकलीवाल द्वारा किया गया।</p>
<p><strong>बड़ी संख्या में समाजजनों की उपस्थिति रही</strong></p>
<p>कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पार्षद मीनाक्षी वर्मा की उपस्थिति रही। सायंकाल भक्तों ने संगीतमय में श्रीजी मंगल आरती की। इस अवसर पर इंद्रप्रकाश जैन अजय कुमार जैन, कार्यक्रम संयोजक अनंत कुमार जैन, निर्माण संयोजक विवेक जैन, विशाल जैन बंटी, राकेश जैन, राहुल जैन अहिंसा, रचित जैन पारस जैन, संभव जैन, प्रवीण जैन, नरेश जैन, राजा जैन, अंकेश जैन, रवींद्र जैन, पीयूष जैन, रश्मि जैन, करुणा जैन कविता जैन, पुष्पा जैन, समस्त अवधपुरी कलाकुंज जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।</p>
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		<title>सिहोनिया में ध्वज स्थापना के साथ पंचकल्याणक महोत्सव शुरूः प्रथम दिन भगवान के गर्भ में आने की क्रियाओं का चित्रण किया </title>
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		<pubDate>Thu, 06 Feb 2025 10:14:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र सिहोनियाजी में फरवरी के द्वितीय सप्ताह तक चलने वाले पंचकल्याणक एवं प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत हुई। पहले दिन तीर्थंकर बालक के माता के गर्भ में आने के पूर्व की क्रियाएं हुईं। श्री पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का सुबह मंगल घट यात्रा से शुभारंभ हुआ। प्रतिष्ठाचार्य ने प्रतिष्ठा विधि के अनुसार इन्द्र की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र सिहोनियाजी में फरवरी के द्वितीय सप्ताह तक चलने वाले पंचकल्याणक एवं प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत हुई। पहले दिन तीर्थंकर बालक के माता के गर्भ में आने के पूर्व की क्रियाएं हुईं। श्री पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का सुबह मंगल घट यात्रा से शुभारंभ हुआ। प्रतिष्ठाचार्य ने प्रतिष्ठा विधि के अनुसार इन्द्र की प्रतिष्ठा की। बुधवार सुबह से पहले मंगलाष्टक, रक्षा मंत्र, शांति मंत्र, भगवान का अभिषेक शांतिधारा, पूजन की गई इस दौरान विधान में महोत्सव के सभी पात्र शामिल हुए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अंबाह की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र सिहोनिया जी में 10 फरवरी तक चलने वाले पंचकल्याणक एवं प्रतिष्ठा महोत्सव की बुधवार से शुरुआत हुई। पहले दिन तीर्थंकर बालक के माता के गर्भ में आने के पूर्व की क्रियाएं हुईं। श्री पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का बुधवार की सुबह मंगल घटयात्रा से शुभारंभ हुआ। प्रतिष्ठा महोत्सव में सुसज्जित अयोध्या नगरी में पहले दिन गर्भ कल्याणक पूर्व रूप के विधान हुए तो भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला। ऐसा दृश्य बना जैसे कि धरती पर इंद्रासन जीवंत हो गया हो।</p>
<p><strong>दैविक शक्तियों का आव्हान कर आमंत्रित किया </strong></p>
<p>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रतिष्ठाचार्य ने प्रतिष्ठा विधि के अनुसार इन्द्र प्रतिष्ठा की। दोपहर में यागमंडल विधान हुआ, जिसमें पंच परमेष्टि, 24 तीर्थंकर, भूतकाल-भविष्य-वर्तमान के भगवानों का पूजन-अर्चन हुआ। सुबह सबसे पहले 248 दैविक शक्तियों का आव्हान कर उन्हें आमंत्रित किया गया। इससे पहले बुधवार सुबह 07 बजे से धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए थे। पहले मंगलाष्टक, रक्षा मंत्र, शांति मंत्र, भगवान का अभिषेक शांतिधारा, पूजन की गई इस दौरान विधान में महोत्सव के सभी पात्र शामिल हुए।</p>
<p><strong>एक साथ धर्म की आराधना का बना केंद्र</strong></p>
<p>प्रवचन के दौरान आचार्य वसुनंदी जी महाराज ने कहा कि आपका बड़ा सौभाग्य है कि ऐसे आयोजन में आप लोग धर्म की आराधना के लिए जुट रहे हैं। व्यक्तिगत धार्मिक क्रियाएं करना अलग बात है और सामूहिक रूप से जब पुण्य का उदय होता है। तब एक साथ एक मंच पर एक स्थान पर बैठ करके ऐसे प्रभु की आराधना करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। वही बुधवार की शाम को संगीतमयी महाआरती, विद्वानों के प्रवचन हुए।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73847" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0021.jpg" alt="" width="864" height="1152" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0021.jpg 864w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0021-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0021-768x1024.jpg 768w" sizes="(max-width: 864px) 100vw, 864px" />इंद्र-कुबेर ने की अयोध्या नगरी की रचना</strong></p>
<p>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पहले दिन बुधवार को गर्भ कल्याणक पूर्व रूप के विधान हुए। सौधर्म इंद्रों की सभा लगाई गई। आसन कम्पायमान, नगरी की रचना, माता-पिता की स्थापना, अष्ट देवियों द्वारा माता की परिचर्या, सोलह स्वप्न दर्शन का प्रदर्शन किया गया। सौधर्म सभा में इंद्रों के धर्म चर्चा में इंद्रासन कम्पायमान हुआ। इंद्र ने बताया, महाराजा नाभिराय के घर-आंगन में प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ऋषभनाथ भगवान माता मरुदेवी के गर्भ में आने वाले हैं। तब कुबेर-इन्द्र ने अयोध्या की रचना की।</p>
<p><strong>प्राचीन मंदिर से निकली घटयात्रा</strong></p>
<p>पंचकल्याणक का शुभारंभ घटयात्रा से हुआ। यह घटयात्रा सिहोनिया स्थित प्राचीन जैन मंदिर से शुरू हुई, जो आयोजन स्थल पहुंची। जहां पर ध्वजारोहण किया गया। देशभर से पधारी विद्वानों की टीम ने आचार्य वसुनंदीजी महाराज के निर्देशन में पूजा-अर्चना की।</p>
<p><strong>मंडप शुद्धि एवं मंगल कलश स्थापना</strong></p>
<p>महोत्सव में मंडप शुद्धि के बाद आचार्य वसुनंदी सागर के सानिध्य में मंडप का उद्घाटन हुआ।</p>
<p><strong>रात में हुईं गर्भ कल्याणक की क्रियाएं</strong></p>
<p>पंचकल्याणक के पहले दिन रात गर्भ कल्याणक के पूर्व रूप की क्रियाएं हुईं, इनमें सौधर्म इंद्र की सभा हुई। धनपति कुबेर ने रत्नों की वर्षा की। माता को 16 स्वप्न दिखाई दिए। अष्टकुमारियों ने माता की सेवा की।</p>
<p><strong>आचार्यश्री के संघ का हुआ मंगल प्रवेश</strong></p>
<p>आचार्य वसुनंदीजी महाराज अपने संघ के दो दर्जन मुनियों के साथ पहुंचे। उनकी अगवानी इंद्र-इंद्राणियों और जैन समाज के श्रावकों ने की। इस दौरान गजराज, घोड़े भी चल रहे थे। पंचकल्याणक में आने वाले श्रद्धालुओं को सिहोनिया पहुंचने के लिए अंबाह व मुरैना निरूशुल्क बसें चलाई जा रही हैं।</p>
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		<title>इंद्र-इंद्राणी ने भक्ति भाव से अर्घ्य चढ़ाएं : याग मंडल विधान का हुआ भव्य आयोजन </title>
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		<pubDate>Sun, 09 Jun 2024 10:08:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के चतुर्विध संघ के मंगल सानिध्य में सहस्त्रकूट जिनालय का वेदी प्रतिष्ठा समारोह एवं बड़े बाबा जिनालय का कलशारोहण समारोह का अभूतपूर्व आयोजन चल रहा है। इस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के चतुर्विध संघ के मंगल सानिध्य में सहस्त्रकूट जिनालय का वेदी प्रतिष्ठा समारोह एवं बड़े बाबा जिनालय का कलशारोहण समारोह का अभूतपूर्व आयोजन चल रहा है। इस अवसर पर आचार्य समय सागर महाराज के प्रवचन भी हुए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर (दमोह)।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के चतुर्विध संघ के मंगल सानिध्य में सहस्त्रकूट जिनालय का वेदी प्रतिष्ठा समारोह एवं बड़े बाबा जिनालय का कलशारोहण समारोह का अभूतपूर्व आयोजन चल रहा है। 8 जून को श्री यागमंडल विधान का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य सम्राट ब्रह्मचारी विनय भैया बंडा ने विधि विधान से याग मंडल विधान की सभी क्रियाएं संपन्न कराईक्ष। प्रातः अभिषेक, शांति धारा, पूजन उपरांत याग मंडल विधान प्रारंभ हुआ।</p>
<p>विधान में बैठे हजारों इंद्र-इंद्राणियों ने अत्यंत भक्ति भाव से संगीत की स्वर लहरियों के बीच पूजन करते हुए प्रत्येक अर्घ्य चढ़ाए। क्रमबद्ध श्रीफल सहित अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य भी प्रत्येक को प्राप्त हुआ। इस बीच पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांति धारा एवं पूजन विधान संपन्न हुई। मुनि संघ एवं आर्यिका संघ की आहार चर्या भी संपन्न हुई।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-61769" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011.jpg" alt="" width="1600" height="1068" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-1024x684.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-768x513.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-1536x1025.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-990x661.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-1320x881.jpg 1320w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />आत्मतत्व में उपयोग केंद्रित </strong></p>
<p>इस अवसर पर परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि पूर्ण रूप से उस दीपक के द्वारा प्रकाश नहीं मिल पा रहा है। दीपक की लौ स्थिर हो जाए तो पूरा का पूरा प्रकाश फैल जाता है। इसी प्रकार वह आत्म तत्व में उपयोग केंद्रित है और वह केंद्रित एक अंतर मुहूर्त के लिए हो जाए तो केवल ज्ञान रूपी दीपक जलेगा और विश्व प्रकाशित हो सकता है। आज तक सब कुछ संसारी प्राणी ने कार्य किया है केवल पुनरावृत्ति करता चला जा रहा है।किंतु आज तक कोई कार्य नहीं किया है परमात्म तत्व को नहीं जान पाया है, बहुत विस्मय होता है। 33 सागर की आयु है सर्वार्थ सिद्धि और परम सुख लेश्या के साथ अहमिंद्र आदि होते हैं निरंतर तत्व चिंतन में उनका उपयोग लगा होता है।</p>
<p>इसके उपरांत भी आत्म तत्व का संवेदन उन्हें नहीं हो सकता। क्यों ? क्योंकि संयम का अभाव है। द्वादशांग के पाटी होने के उपरांत भी समस्त पदार्थ को जानने की क्षमता रख रहे हैं। भले परोक्ष रूप में हो इसके उपरांत भी आत्म तत्व का वीतराग संवेदन इसको बोलते उससे वह वंचित हैं। क्षायिक सम्यक दृष्टि भी हो सकते कोई बाधा नहीं और 33 सागर तक तत्व चिंतन में लीन होते हुए भी एक विशेष बात और कह रहा हूं वहां पर वासना नहीं है। सोलहवें स्वर्ग तक तो भिन्न-भिन्न स्वर्ग में रहने वाले जो इंद्र आदिक हैं, वह विचार से सहित हैं किंतु नव अनुदिश पंचउन्त्तर विमान में रहने वाले जो अहमहेंद्र हैं, वे शुक्ल लेश्या के धारी होते हैं और वासना का अभाव रहता है। वासना संभव नहीं है इसके बावजूद भी असंयम पल रहा है। बड़ी विचित्र दशा है। 33 सागर तक तत्व का चिंतन करने के बावजूद वहां से उतरकर जीव मनुष्य पर्याय को प्राप्त कर लेता है। वह पुराने संस्कार हैं वह डिलीट हो जाते हैं। 33 सागर तक तत्व चिंतन में लीन रहा, यहां आने के उपरांत वासना जागृत होती है क्यों ?नौकर्म कर्म को फल देने के लिए जो निमित्त डिलीट हो जाते हैं।33 सागर तक तत्व चिंतन में लीन रहा यहां आने के उपरांत वासना जागृत होती है।</p>
<p>नौकर्म कर्म को फल देने के लिए जो ऐसी सामग्री है, उसके बीच में आता है तो अपने कर्म को रोक नहीं पाता, अपने परिणामों को रोक नहीं पाता। 33 सागर संबंधी जो संस्कार थे, वासना के अभाव में तत्व चिंतन किया था, सारा का सारा विस्मृत में हो जाता। यहां आकर के वृषभ नाथ भगवान का जीव, भरत चक्रवर्ती का जीव, बाहुबली का जीव यह तीनों सर्वार्थ सिद्धी से अवतरित हुए हैं। यहां पर अवतरित होने के उपरांत 24 लाख पूर्व की, जिनकी आयु है ऐसे वृषभ नाथ युग की आदि में मोक्ष मार्ग के नेता होने वाले हैं। इसके उपरांत भी वह सारे के सारे तत्व चिंतन के संस्कार डिलीट हो चुके हैं। कर्मबंध से बचना चाहते हो तो नौकर्म से बचने का पुरुषार्थ करो।</p>
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		<title>महावीर जिनालय चुंगीनाका अंबाह में हुआ घट यात्रा और याग मंडल विधान : दस जुलाई को होगी शांतिधारा और पूजन  </title>
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		<pubDate>Sun, 09 Jul 2023 16:20:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महावीर जिनालय चुंगी नाका अंबाह में 9 जुलाई को महावीर जिनालय से मुरैना रोड होते हुए घट यात्रा निकाली गई। घट यात्रा के बाद वेदी शुद्धि, वेदी संस्कार, ध्वज भूमि शुद्धि किए गए। दोपहर एक बजे से सौरभ एंड पार्टी मुरैना द्वारा संगीतमय याग मंडल विधान किया गया। पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट&#8230; अंबाह। महावीर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>महावीर जिनालय चुंगी नाका अंबाह में 9 जुलाई को महावीर जिनालय से मुरैना रोड होते हुए घट यात्रा निकाली गई। घट यात्रा के बाद वेदी शुद्धि, वेदी संस्कार, ध्वज भूमि शुद्धि किए गए। दोपहर एक बजे से सौरभ एंड पार्टी मुरैना द्वारा संगीतमय याग मंडल विधान किया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> महावीर जिनालय चुंगी नाका अंबाह में 9 जुलाई को महावीर जिनालय से मुरैना रोड होते हुए घट यात्रा निकाली गई। घट यात्रा के बाद वेदी शुद्धि, वेदी संस्कार, ध्वज भूमि शुद्धि किए गए। दोपहर एक बजे से सौरभ एंड पार्टी मुरैना द्वारा संगीतमय याग मंडल विधान किया गया। सौरभ जैन वरेह वालों ने जानकारी देते हुए बताया कि श्री 1008 महावीर दिगंबर जिनालय चुंगी नाका अंबाह, में जो ऊपर तल पर जो नवीन वेदिका बनी थी उसके शुद्धीकरण के पश्चात जिनबिंबो को नवीन वेदिका में पंडित मुकेश शास्त्री के सानिध्य में विराजमान किया जाएगा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-48073 size-full" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230709-WA0007.jpg" alt="" width="593" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230709-WA0007.jpg 593w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230709-WA0007-139x300.jpg 139w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230709-WA0007-474x1024.jpg 474w" sizes="auto, (max-width: 593px) 100vw, 593px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>दस जुलाई सोमवार को सुबह 6:30 बजे अभिषेक शांतिधारा एवं पूजन, नौ बजे श्री जिनबिंब स्थापना, 11 बजे श्री विश्वशांति महायज्ञ एवं विसर्जन व आभार प्रदर्शन किया जाएगा। सोमवार को दोपहर 2 बजे से 6 बजे तक जानकी गार्डन अंबाह में संपूर्ण समाज के वात्सल्य भोज की व्यवस्था की गई है।</p>
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		<item>
		<title>पंचकल्याणक महोत्सव : मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के सानिध्य में दिखाया गया गर्भ कल्याणक का पूर्व रूप  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Feb 2023 04:30:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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		<category><![CDATA[त्रिकाल चौबीसी]]></category>
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					<description><![CDATA[नंदीश्वर कॉलोनी स्थित आदिनाथ धाम त्रिकाल चौबीसी का पंचकल्याणक महोत्सव में शनिवार को प्रातः 6:30 मंगलाष्टक श्रीजी का अभिषेक, शांति धारा, नव देवता की पूजा के बाद याग मंडल विधान किया गया। पढ़िए राजीव सिंघई की विस्तृत रिपोर्ट&#8230; टीकमगढ़। शहर की नंदीश्वर कॉलोनी स्थित आदिनाथ धाम त्रिकाल चौबीसी का पंचकल्याणक महोत्सव शहर के ढोगा मैदान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नंदीश्वर कॉलोनी स्थित आदिनाथ धाम त्रिकाल चौबीसी का पंचकल्याणक महोत्सव में शनिवार को प्रातः 6:30 मंगलाष्टक श्रीजी का अभिषेक, शांति धारा, नव देवता की पूजा के बाद याग मंडल विधान किया गया।</strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>पढ़िए राजीव सिंघई की विस्तृत रिपोर्ट&#8230;</strong></span></p>
<hr />
<p><strong>टीकमगढ़।</strong> शहर की नंदीश्वर कॉलोनी स्थित आदिनाथ धाम त्रिकाल चौबीसी का पंचकल्याणक महोत्सव शहर के ढोगा मैदान में शुक्रवार से प्रारंभ हो चुका है। शनिवार को प्रातः 6:30 मंगलाष्टक श्रीजी का अभिषेक, शांति धारा, नव देवता की पूजा के बाद याग मंडल विधान किया गया। शनिवार को पंचकल्याणक महोत्सव में गर्भ कल्याणक का पूर्व रूप दिखाया गया। कार्यक्रम के मीडिया संयोजक प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि सुबह 8:30 बजे निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज मंच पर विराजमान हुए।</p>
<p>श्रीजी की शांति धारा एवं मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन शास्त्र भेंट एवं चित्र अनावरण का सौभाग्य नरेंद्र जैन एवं संजय जैन राजीव जैन को प्राप्त हुआ। मुनि श्री ने पंचकल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जो हम कर सकते हैं, उसके बारे में सोचें। हम एक कदम चल सकते हैं तो एक कदम आगे बढ़ें। हमारी मंजिल एक कदम पास आ जाएगी। जैसे ही हमने एक कदम की प्रशंसा की, एक कदम के बाद हमारा प्रयास दूसरे कदम के लिए प्रारंभ हो जाता है। हमें जीवन में एक कदम आगे बढ़ने की अनुभूति करनी है। उसके ज्ञान का उपकार बताना है। उससे हमारी शक्ति जागृत होती है। मुनि श्री ने कहा कि भगवान कुछ नहीं करते, कुछ नहीं देते हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-38331" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0046.jpg" alt="" width="1280" height="960" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0046.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0046-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0046-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0046-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0046-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0046-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0046-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0046-990x743.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>भगवान के दर्शन करने से जो आनंद की भक्ति की अनुभूति होती है, वह हमारा जागरण कराती है। संसार सागर में आज तक व्यक्ति अपने आप में पूर्ण नहीं हो पाया। संसार में संपूर्णता कभी होती ही नहीं है। कुछ ना कुछ हमारे जीवन में अपूर्ण रहता है। कोई ना कोई कमी हमें रहेगी। जो अवधि ज्ञानी हैं, वे भी संपूर्णता को प्राप्त नहीं हो पाते हैं। जो सुख हमें भगवान के दर्शन करने मे मिलता है, संसार में कहीं नहीं है। यही पूर्णता है, यही संपूर्णता है। हमारे जीवन में पूर्णता की अनुभूति होना चाहिए, तभी हम संसार को पार कर सकते हैं।</p>
<p>कार्यक्रम के संयोजक बाबा नायक,कार्यकारी अध्यक्ष जिनेंद्र जैन ने बताया कि शनिवार को मुनि श्री के आहारदान का सौभाग्य संध्या प्रदीप भदौरा को प्राप्त हुआ। शाम 6:00 बजे जिज्ञासा समाधान का आयोजन प्रतिदिन किया जा रहा है। 7:00 बजे से महाआरती 8:00 से हो रही है। सांस्कृतिक कार्यक्रम में गर्भ कल्याणक का पूर्व रूप दिखाया गया और गर्भ कल्याणक की पूर्व क्रियाओं का मंचन किया गया। कमेटी की ओर से लुइस चौधरी, विमल जैन, डीके जैन, गुलाब दाऊ आदि लोग शामिल रहे।</p>
<p><strong>दिखाए जाएंगे 16 स्वप्न</strong></p>
<p>रविवार को प्रातः 6:00 बजे मंगलाष्टक शांति मंत्र, नित्यम, अभिषेक, शांतिधारा, गर्भ कल्याणक पूजन होगा। इसके बाद 8:15 बजे मुनि श्री की मंगल देशना खिरेगी। दोपहर 1:00 बजे माता की गोद भराई, 3:00 बजे मंगल घट यात्रा, मंदिर शुद्धि, वेदी शुद्धि, शिखर शुद्धि आदि होंगे। रात्रि 8:00 गर्भ कल्याणक की उत्तर क्रियाओं में महाराजा नाभिराय का दरबार, लगेगा। माता मरूदेवी के सोलह स्वप्न आदि दिखाए जाएंगे।</p>
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