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	<title>मौसम &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>हीटस्ट्रोक से बचने के लिए सतर्क रहें :  अगर शरीर में दिखें तो फिर आपको सावधान रहने की जरूरत है </title>
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		<pubDate>Sun, 26 May 2024 12:40:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उत्तर भारत इन दिनों भीषण गर्मी के प्रकोप से जूझ रहा है। सूरज की तपन इस कदर बढ़ गई है कि घर से बाहर निकलना मुहाल हो रहा है। करीब 45 से 47 डिग्री तक बढ़ रहे पारे के बीच लू के थपेड़े शरीर का सारा पानी सुखा दे रहे हैं। हीट स्ट्रोक एक गंभीर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>उत्तर भारत इन दिनों भीषण गर्मी के प्रकोप से जूझ रहा है। सूरज की तपन इस कदर बढ़ गई है कि घर से बाहर निकलना मुहाल हो रहा है। करीब 45 से 47 डिग्री तक बढ़ रहे पारे के बीच लू के थपेड़े शरीर का सारा पानी सुखा दे रहे हैं। हीट स्ट्रोक एक गंभीर स्थिति है जिसके लिए शीघ्र उपचार की आवश्यकता होती है। हीटस्ट्रोक (लू) से बचाव बता रहे हैं डॉ.राजेश जैन एम.डी.(आयु.)मेडिसिन, आइ.एम.एस.,बी.एच.यू.<span style="color: #ff0000"> (रिपोर्ट सौरभ जैन&#8230;)</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>वाराणसी।</strong> हीटस्ट्रोक, जिसे लू भी कहा जाता है, एक चिकित्सा आपातकालीन स्थिति है जो अत्यधिक गर्म तापमान के कारण होती है। यह तब होता है जब शरीर लंबे समय तक उच्च तापमान में रहने या गर्म और आर्द्र परिस्थितियों में शारीरिक परिश्रम करने के कारण अपने तापमान को नियंत्रित नहीं कर पाता। इस स्थिति में शरीर का मुख्य तापमान सामान्य स्तर से बढ़कर 104°F (40°C) या उससे अधिक हो जाता है। हीटस्ट्रोक गर्मी से संबंधित बीमारी का सबसे गंभीर रूप है और यह मस्तिष्क, हृदय, गुर्दे और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। यदि समय पर इसका इलाज नहीं किया गया, तो यह जानलेवा भी हो सकता है।<br />
<strong>कारण :</strong><br />
हीटस्ट्रोक तब होता है जब शरीर अत्यधिक गर्मी में अपने तापमान को नियंत्रित नहीं कर पाता। आमतौर पर, शरीर का तापमान 98.6°F (37°C) के आसपास रहता है, जिसे हाइपोथैलेमस नियंत्रित करता है। लेकिन अगर शरीर को इतनी गर्मी मिलती है कि वह उसे बाहर निकालने में असमर्थ हो जाता है, तो आंतरिक तापमान बढ़ जाता है, जिससे हीटस्ट्रोक हो सकता है।</p>
<p><strong>लक्षण :</strong><br />
o उच्च शरीर का तापमान (104°F या 40°C से अधिक)<br />
o सिरदर्द<br />
o उल्टी या मतली<br />
o सूखी या गर्म त्वचा<br />
o लूज मोशन<br />
o चक्कर आना<br />
o मानसिक स्थिति में परिवर्तन या भ्रम<br />
o तेज धड़कन<br />
o श्वसन दर में वृद्धि<br />
o अत्यधिक प्यास<br />
o मांसपेशियों में ऐंठन<br />
o बेहोशी</p>
<p><strong>क्या करें (Do&#8217;s) :</strong><br />
o अधिक से अधिक पानी पिएं ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे।<br />
o ढीले और हल्के कपड़े पहनें।<br />
o घर से कुछ खाकर निकलें ताकि बाहर की चीजें खाने और पानी पीने से बचा जा सके।<br />
o संतरे, तरबूज, खरबूजा, आम का पन्ना, नींबू पानी, और ककड़ी जैसे मौसमी फलों का अधिक सेवन करें।<br />
o नारियल पानी, जूस, और लस्सी का भरपूर सेवन करें।<br />
o प्याज का सेवन करें, यह लू से बचाने में कारगर है।<br />
o सनस्क्रीन का प्रयोग करें।<br />
o बेल का शरबत पिएं, जिसमें विटामिन सी और फाइबर होते हैं, जो शरीर को ठंडा रखते हैं।</p>
<p><strong>क्या न करें (Don&#8217;ts) :</strong><br />
o अधिक तेज धूप में बाहर न निकलें। विशेषकर दोपहर 12 से 4 बजे के बीच।<br />
o अचानक ठंडी या गर्म जगह पर जाने से बचें।<br />
प्राथमिक चिकित्सा :<br />
o हीटस्ट्रोक एक गंभीर स्थिति है और इसके लिए शीघ्र उपचार की आवश्यकता होती है। अगर आपको संदेह है कि किसी को हीटस्ट्रोक हो रहा है, तो निम्नलिखित कदम उठाएं:<br />
o व्यक्ति को ठंडे स्थान पर ले जाएं।<br />
o अतिरिक्त कपड़े हटा दें।<br />
o व्यक्ति को ठंडा करें।<br />
o व्यक्ति के शरीर को ठंडा करने के लिए किसी भी उपलब्ध साधन का उपयोग करें, जैसे ठंडे स्नान या शॉवर, या पानी से त्वचा को स्प्रे करना।<br />
o तरल पदार्थ प्रदान करें।<br />
o चिकित्सीय सावधानी बरतें।<br />
o आपातकालीन सेवाओं को कॉल करें या व्यक्ति को नजदीकी अस्पताल ले जाएं।<br />
बच्चों के लिए सावधानियाँ :<br />
o बच्चों के साथ हमेशा पानी की बोतल रखें।<br />
o धूप में सिर को कवर करें।<br />
o छाता या कैप लगाकर बच्चों को बाहर भेजें।<br />
o हल्का खाना खिलाएं और भूखे न रहने दें।<br />
o फ्रेश फ्रूट्स, जूस, या नींबू पानी पिलाएं।<br />
o समय-समय पर ग्लूकोन डी या ओआरएस पिलाएं।<br />
o धूप में खेलने या स्पोर्ट्स एक्टिविटी से बचाएं।<br />
o खूब पानी पिलाएं और हाइड्रेट रखें।<br />
o हल्के और सूती कपड़े पहनाएं।<br />
o बासी और बाहर का खाना न खिलाएं।<br />
हीटस्ट्रोक से बचने के लिए सतर्क रहना और उचित कदम उठाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे आप न केवल स्वस्थ रहेंगे, बल्कि गर्मियों में सुरक्षित भी रहेंगे।</p>
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		<title>बदलते मौसम में बढ़ा बीमारियों का खतरा :  गला खराब होने पर अपनाएं ये घरेलू उपाय </title>
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		<pubDate>Wed, 28 Feb 2024 03:23:11 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>देशभर में इस समय तेजी से मौसम में बदलाव हो रहा है। कुछ जगहों पर तेज धूप तो कहीं ठंडी हवाएं चल रही हैं। सुबह सुबह ठंडी हवाओं और हल्की धूप के कारण लोगों को एक बार फिर सर्दी का अहसास हुआ। मौसम में बदलाव के कारण लोगों में सर्दी-जुकाम बुखार और गले की समस्याओं का जोखिम काफी सामान्य हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों और बुजुर्गों में इस तरह की समस्याओं का जोखिम सबसे अधिक देखा जाता है, ऐसे लोगों को बदलते मौसम में विशेष सावधानियों की जरूरत होती है। वहीं यदि आपको सर्दी-गले में खराश की दिक्कत हो भी जाती है तो हर बार इसके लिए दवाओं की आवश्यकता नहीं है, इसमें कुछ आसान से घरेलू उपाय करके भी लाभ पाया जा सकता है।</strong></p>
<hr />
<p><strong>बदलते मौसम में गला खराब होने पर अपनाएं ये घरेलू उपाय </strong></p>
<p><strong>गर्म पानी के गरारे</strong></p>
<p>गर्म पानी से गले की खराश में राहत मिलेगी। अगर आपको कफ की समस्या है, तो गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करें। इससे गले मे जमा कफ पिघलकर बाहर आने लगेगा।</p>
<p><strong>तुलसी का काढ़ा पिएं</strong></p>
<p>तुलसी सबसे अच्छी एंटीवायरल जड़ी-बूटियों में से एक है जिसे खांसी, सर्दी और गले में खराश में बहुत प्रभावी माना जाता है। 4-5 तुलसी के पत्तों को थोड़े से पानी में उबालकर इसे पीने से लाभ मिलता है। आप चाहें तो इसमें अदरक मिला सकते हैं। तुलसी के काढ़े में काली मिर्च, अदरक, लौंग, दालचीनी मिलाकर इसका सेवन करने से भी इस तरह की समस्याओं में आसानी से लाभ पाया जा सकता है। यह काढ़ा प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में भी आपके लिए मददगार है।</p>
<p><strong>मुलेठी और मिश्री</strong></p>
<p>पुरानी से पुरानी गले की समस्या के लिए मुलेठी और मिश्री रामबाण उपाय है। आपको मुलेठी के टुकड़े के साथ मिश्री को कुछ देर के चबाना है। इससे मुलेठी का रस गले तक जाएगा और इंफेक्शन कम होगा। इसमें एंटी-वायरल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। जो इंफेक्शन को रोकने में मदद करते हैं।</p>
<p><strong>हल्दी का पानी</strong></p>
<p>हल्दी की तासीर गर्म होती है। गले की समस्या में हल्दी का गर्म पानी पीने से खराश भी कम होती है। इससे गले में दर्द, खुजली और इरिटेशन भी कम होने लगती है। इसे आप दिन में एक से दो बार सेवन कर सकते हैं। लेकिन अगर आप किसी दवा का सेवन करते हैं, तो इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करें।</p>
<p><strong>लौंग की चाय</strong></p>
<p>लौंग में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो गले की समस्या से राहत दे सकते हैं। गले का इंफेक्शन कम करने के लिए आप लौंग की चाय का सेवन कर सकते हैं। इससे आपको वायरल इंफेक्शन से जुड़ी समस्याओं से राहत मिल सकती है।</p>
<p>इन खास घरेलू नुस्खों से आपको बदलते मौसम में गले की समस्या से राहत पाने में मदद मिल सकती है। अगर आपको समस्या 3-4 दिन से ज्यादा समय से है, तो बिना देरी किये डॉक्टर से संपर्क करें। लेख में दी गई जानकारी पसंद आई हो, तो इसे शेयर करना न भूलें।</p>
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		<title>बसंत के मौसम में कैसा हो खानपान? : जानें इस मौसम में स्वस्थ रहने के लिए कैसा हो आपका खानपान </title>
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		<pubDate>Wed, 14 Feb 2024 06:26:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बसंत ऋतु का आगाज हो चुका है। प्रकृति की खूबसूरती के साथ हवा में भी अलग सी चहक हम सब के कानों में मानों एक अलग ही ऊर्जा का संचार कर रही है। पक्षियों की चहचहाहट हमें सर्द भरी धूप से बाहर निकालने की कोशिश में है। यह मौसम बहुत ही सुहावना होता है। इस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बसंत ऋतु का आगाज हो चुका है। प्रकृति की खूबसूरती के साथ हवा में भी अलग सी चहक हम सब के कानों में मानों एक अलग ही ऊर्जा का संचार कर रही है। पक्षियों की चहचहाहट हमें सर्द भरी धूप से बाहर निकालने की कोशिश में है। यह मौसम बहुत ही सुहावना होता है। इस मौसम में पूरी प्रकृति ही सुन्दर दिखती है। इस समय ना तो ज्यादा ठंडी होती है ना ही ज्यादा गर्मी, मौसम एक दम मिला जुला होता है। दिन में गर्मी होने के कारण शरीर में जमा कफ पिघलकर निकलने लगता है। इसलिए इस मौसम में कफ के असंतुलन से होने वाले रोग जैसे कि खाँसी, जुकाम, दमा, गले की खराश, टॉन्सिल्स, पाचन-शक्ति की कमी, जी-मिचलाना आदि बढ़ जाते हैं। <span style="color: #ff0000">इसलिए इस मौसम में खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बसंत ऋतु में क्या खाएं</strong></p>
<p>इस मौसम में ताजा हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए। मूँग, चना और जौ की रोटी, पुराना गेहूँ और चावल, जौ,राई, भीगा व अंकुरित चना, मक्खन लगी रोटी, हरी शाक-सब्जी एवं उनका सूप, सरसों का तेल आदि का सेवन करें।</p>
<p>सब्जियों में- करेला, पालक, केले के फूल, सोंठ, काली मिर्च, हरड़, बहेड़ा, आँवला, धान की खील, खस का जल, नींबू आदि का सेवन करें।</p>
<p>इस मौसम में मौसमी फलों और चासनी का सेवन भी ज़रुर करें। पानी अधिक मात्रा में पिएं। कफ को कम करने के लिए मुंह में ऊँगली डालकर उल्टी करें।</p>
<p><strong>क्या ना खाएं </strong></p>
<p>बसंत ऋतु में भारी, चिकनाई युक्त, खट्टी (इमली, अमचूर) और मीठी चीजों (जैसे कि गुड़, शक्कर) आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा ठंडी तासीर वाले आहार, उड़द, रबड़ी, मलाई जैसे भारी आहार लेने से बचना चाहिए।</p>
<p><strong>रहन सहन में बदलाव </strong></p>
<p>नियमित रूप से हल्का व्यायाम अथवा योगासन करना चाहिए। सूर्योदय से पहले टहलने से स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। तेल मालिश करके गुनगुने पानी से नहाएं। धूप में निकलते समय सिर पर टोपी या छाते का प्रयोग करें।</p>
<p><strong>क्या ना करें </strong></p>
<p>इस मौसम में खुले आसमान के नीचे सोना, ठंड में रहना, धूप में घूमना व दिन में सोना भी हानिकारक माना जाता है।</p>
<p><strong>बसंत के मौसम में खानपान के इन नियमों का भी रखें ध्यान</strong></p>
<p>बसंत के मौसम में आपको खानपान से जुड़ी कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। चूंकि इस मौसम में सर्दी कम होने लगती है और मौसम ठंडे से गर्म की तरफ बढ़ने लगता है, इसलिए बसंत के मौसम में खानपान को लेकर निम्न सावधानियां जरूरी हैं।</p>
<p><strong>-ताजा, हल्का और सुपाच्य भोजन ही खाएं।</strong></p>
<p>-कफ वर्धक तैलीय आहार (फ्राइड चीजें) या दूध से बने उत्पादों का सेवन कम करें।</p>
<p>-फास्ट फूड (fast food and cold drinks), ठंडे पेय पदार्थ, आइसक्रीम का जहां तक संभव हो सेवन ना करें।</p>
<p>-दिन में सोने की आदत से बचें।</p>
<p>-गुनगुने पानी में सौंठ और चासनी मिलाकर पी लें।</p>
<p>-नियमित रूप से तिल के तेल की मालिश करें।</p>
<p>-सौंठ, काली मिर्च व पिपली का चूर्ण बनाकर चासनी के साथ सेवन करें।</p>
<p>-आवश्यकतानुसार तुलसी, अजवाइन, मुलेठी का चूर्ण बनाएं या काढ़ा बनाकर लें।</p>
<p>तो ये हैं कुछ ऐसे फल और सब्जी या खाद्य हैं, जिनसे न सिर्फ आपको स्वाद मिलेगा बल्कि सेहत भी दुरुस्त रहेगी। इसके अलावा आप बिना मौसम की सब्जी और फलों को खाने से बचें ये आपके लिए हानिकारक हो सकता है।</p>
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