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	<title>मेला महोत्सव &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>अपने जीवन में पांच सूत्र अपना लो तो आपका जीवन सफल : पावागिरी ऊन में मेला महोत्सव के अंतर्गत आचार्य कुमुद नंदीजी ने व्यक्त किए।  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 14:14:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य विपणत सागर जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति को जहां भी धर्म कार्य करने का मौका मिले उसे छोड़ना नहीं चाहिए, आप बहुत सौभाग्यशाली है जो आपको पुण्य प्राप्त करने का मौका मिला है नहीं तो अनेक लोग अनुकूलता होने पर भी धर्म कार्य में रुचि नहीं ले पाते। ऊन से पढ़िए, सन्मति जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य विपणत सागर जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति को जहां भी धर्म कार्य करने का मौका मिले उसे छोड़ना नहीं चाहिए, आप बहुत सौभाग्यशाली है जो आपको पुण्य प्राप्त करने का मौका मिला है नहीं तो अनेक लोग अनुकूलता होने पर भी धर्म कार्य में रुचि नहीं ले पाते। <span style="color: #ff0000">ऊन से पढ़िए, सन्मति जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>  धामनोद</strong>। आचार्य विपणत सागर जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति को जहां भी धर्म कार्य करने का मौका मिले उसे छोड़ना नहीं चाहिए, आप बहुत सौभाग्यशाली है जो आपको पुण्य प्राप्त करने का मौका मिला है नहीं तो अनेक लोग अनुकूलता होने पर भी धर्म कार्य में रुचि नहीं ले पाते। अरिहंत कीर्ति भट्ठारक पट्टाचार्य महास्वामी ने कहा कि भगवान से अलग होने पर इस शरीर का कोई महत्व नहीं रह जाता। जिन आंखों से संत या भगवान के दर्शन नहीं होते वे नेत्र मयूर पंख वाली आंखें मात्र है जो मस्तक कभी संत या भगवान के समक्ष नहीं झुकता वह कड़वे तुंबे के समान है। जिस जीभ द्वारा कभी भगवान का नाम नहीं लिया जाता वह जीभ मेंढक की जीभ के समान है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-101322" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260307-WA0033-234x300.jpg" alt="" width="234" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260307-WA0033-234x300.jpg 234w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260307-WA0033-799x1024.jpg 799w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260307-WA0033-768x985.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260307-WA0033-1198x1536.jpg 1198w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260307-WA0033-990x1269.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260307-WA0033.jpg 1248w" sizes="(max-width: 234px) 100vw, 234px" /></p>
<p><strong>नव देवता मंडल विधान हुआ</strong></p>
<p>पवागिरी ऊन के ट्रस्टी संजय बडूद, मनीष दोषी व दीपक प्रधान ने बताया कि 7 मार्च को प्रतिष्ठाचार्य पंडित धर्म चंद्र शास्त्री दिल्ली के निर्देशन में सुबह नित्य अभिषेक पूजन के पश्चात नव देवता मंडल विधान का आयोजन अत्यंत भक्ति भाव से संगीतमय वातावरण में प्रारंभ हुआ। शाम तक चले विधान पूजन में श्रद्धालुओं ने अत्यंत भक्ति भाव से भगवान की भक्ति आराधना की। दूसरी और नवनिर्मित सहस्त्रकूट जिनालय में शनिवार को भी दिनभर रत्नमय प्रतिमाओं के विराजमान होने का कार्य दिनभर चलता रहा।</p>
<p>बाल ब्रह्मचारी अक्षय भैया जी पंडित नितिन जी झंझरी के निर्देशन में मंत्रोच्चार के माध्यम से श्रद्धालुओं ने प्रतिमाएं विराजमान की। साथ ही आचार्य श्री विपणत सागर जी ने जैन धर्म की सबसे कठिन चर्या केशलोच को किया । केशलोच क्रिया के अंतर्गत सभी के समक्ष आचार्य श्री ने अपने दाढ़ी एवं सर के बालों को अपने हाथ से उखाड़ा । शाम को आरती भक्ति शास्त्र प्रवचन के पश्चात विशाल कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें शहनाज हिंदुस्तानी जयपुर, कवि जैन विद्रोही ललितपुर आदि करीब 6 कवियों ने  हास्य कविताओं के माध्यम से श्रद्धालुओं का खूब मनोरंजन किया।</p>
<p><strong>दिल्ली की नृत्य नाटिका को सराहा </strong></p>
<p>शुक्रवार रात्रि में आयोजित मयूर जैन दिल्ली द्वारा आयोजित नृत्य नाटिका के अंतर्गत पावागिरी ऊन के इतिहास पर सुंदर नाटिका एवं सती चेलना रानी के मिथ्यत्व पर आयोजित नृत्य नाटिका सुंदर प्रस्तुति ने सभी का मन मोहन लिया। मिमिक्री कलाकार मयूर जैन ने विभिन्न पात्रों की अलग-अलग आवाज को सभी के समक्ष प्रस्तुत किया।</p>
<p><strong>रविवार को होगा मस्तकाभिषेक</strong></p>
<p>महोत्सव के अंतिम दिन रंग पंचमी के दिन सुबह नित्य अभिषेक पूजन, मंगलाचरण चित्र अनावरण ,दीप प्रज्वलन, महाराज श्री की मंगल देशना, अतिथियों का सम्मान के पश्चात श्री जी की शोभायात्रा बैंड बाजा के साथ निकलेगी पश्चात पहाड़ मंदिर पर शांतिनाथ कुंथुनाथ अरहनाथ एवं महावीर स्वामी एवं स्वर्ण भद्रदि चार महामुनिराज की प्रतिमाओं पर महा मस्तकाभिषेक सम्पन्न होगा एवं सहस्त्रकूट जिनालय में शेष बची हुई समस्त प्रतिमाओं को विराजमान किया जाएगा।</p>
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		<title>चांदखेड़ी वाले बाबा का मेला अद्भुत और ऐतिहासिक होगा: व्यवस्थागत चर्चाओं को लेकर चंद्रोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी की बैठक में लिए निर्णय  </title>
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		<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 08:28:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रविवार को होली त्योहार एवं भगवान ऋषभदेव जन्म कल्याणक महोत्सव को लेकर चंद्रोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी की बैठक हुकम जैन काका की अध्यक्षता में हुई। इसमें होली का त्योहार होने पर यात्रियों के आने-जाने आवास एवं भोजन की समुचित व्यवस्था किए जाने पर विचार किया गया। 11 और 12 मार्च को ऋषभदेव जयंती के कार्यक्रम [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रविवार को होली त्योहार एवं भगवान ऋषभदेव जन्म कल्याणक महोत्सव को लेकर चंद्रोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी की बैठक हुकम जैन काका की अध्यक्षता में हुई। इसमें होली का त्योहार होने पर यात्रियों के आने-जाने आवास एवं भोजन की समुचित व्यवस्था किए जाने पर विचार किया गया। 11 और 12 मार्च को ऋषभदेव जयंती के कार्यक्रम संबंधित चर्चा की गई। <span style="color: #ff0000">चांदेखेड़ी खानपुर। </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>चांदखेड़ी (खानपुर)।</strong> प्रसिद्ध जैन तीर्थ क्षेत्र चंद्रोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी की बैठक चंद्रोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष हुकुम जैन काका, महामंत्री नरेश जैन वेद कार्याध्यक्ष अजय जैन बाकलीवाल, मुख्य संयोजक विनोद जैन सुरलाया की मौजूदगी में हुई। बैठक का शुभारंभ भगवान आदिनाथ के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं णमोकार मंत्र के साथ की गई। इसमें होली के त्योहार होने पर यात्रियों के आने-जाने आवास एवं भोजन की समुचित व्यवस्था किए जाने पर विचार किया गया। इसके साथ ही आगामी 11 एवं 12 मार्च को ऋषभदेव जयंती को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया एवं इसके लिए समिति ने सक्रियता के साथ कार्य किए जाने पर जोर दिया। आगामी ऋषभदेव जयंती मेला महोत्सव के लिए मेला संयोजक मुकेश जैन मासूम पिडावा को नियुक्त किया गया। सहसंयोजक कैलाश जैन भाल, प्रशांत जैन, नितेश जैन, अनिल जैन को नियुक्त किया गया।</p>
<p><strong>मेला महोत्सव को ऐतिहासिक बनाने के लिए क्षेत्र कमेटी सजग </strong></p>
<p>चंद्रोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी की बैठक में विशेष रूप से आवास व्यवस्था को लेकर कई सुझाव सदस्यों ने दिए। जिस पर हुकुम जैन काका ने पूरे सदन को आश्वस्त किया कि किसी भी प्रकार की ऑनलाइन बुकिंग नहीं की जाएगी एवं आने वाले यात्रियों को आवास एवं भोजन आदि की समुचित व्यवस्था होगी। इसके लिए क्षेत्र कमेटी कटिबद्ध हैं। सौहार्दपूर्ण वातावरण में बैठक में सभी व्यवस्थाओं को लेकर बातचीत की गई। प्रशांत जैन ने बताया कि होली एवं ऋषभदेव जयंती पर यात्रियों के अभिषेक आदि के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। जिसको लेकर यात्रियों को कोई असुविधा न हो। उन्होंने बताया कि मेला महोत्सव को ऐतिहासिक बनाने के लिए क्षेत्र कमेटी सजग है। इसको लेकर खाका तैयार किया जा रहा है।</p>
<p><strong>नगर में होगी साज-सज्जा </strong></p>
<p>मेले पर सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए महिला महासमिति चांदखेड़ी को मुख्य जिम्मेदारी दी गई है। सारोलाकलां और बारां महिला मंडल भी अपनी प्रस्तुतियां देंगी। शोभायात्रा यात्रा का मुख्य आकर्षण पंजाब के भटिंडा से बुलाया गया पाइप बैंड रहेगा एवं मध्यप्रदेश के दिव्य घोष भी आकर्षण में रहेंगे। नगर और जुलूस मार्ग पर भी साज-सज्जा की जाएगी। बैठक के बाद क्षेत्र पर विराजमान आर्यिका 105 संगममती माताजी को हुकम जैन काका ने पुरे क्षेत्र का अवलोकन करवाया। क्षेत्र पर यात्रियों के लिए अत्याधुनिक संत सुधासागर रेजिडेंसी और रायल रेजिडेंसी को देखकर माताजी ने क्षेत्र कार्यकारिणी और अध्यक्ष हुकम काका की सराहना की।</p>
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		<title>भारत का इतिहास दिन दूना बढ़ रहा है : मुनि श्री के सान्निध्य में अतिशय क्षेत्र पचाई तीर्थ पर हुआ मेला महोत्सव  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Dec 2025 08:40:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हमारे यहां वृद्ध सेवा को सर्वोच्च माना गया है। वहीं विदेशों में सिर्फ उपयोग है। यह उद्गार कदवया के निकट पचराई तीर्थ क्षेत्र में मेला महोत्सव में मुनि श्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। कदवया से पढ़िए, यह खबर&#8230; कदवया। हमें सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध विरासत मिली है। भारत का इतिहास दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>हमारे यहां वृद्ध सेवा को सर्वोच्च माना गया है। वहीं विदेशों में सिर्फ उपयोग है। यह उद्गार कदवया के निकट पचराई तीर्थ क्षेत्र में मेला महोत्सव में मुनि श्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">कदवया से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कदवया।</strong> हमें सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध विरासत मिली है। भारत का इतिहास दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। कभी सांस्कृतिक दृष्टि से कभी धार्मिक दृष्टि से और सामारिक दृष्टि से हम आगे बढ़ रहे हैं। हमारे यहां वृद्ध सेवा को सर्वोच्च माना गया है। वहीं विदेशों में सिर्फ उपयोग है। यह उद्गार कदवया के निकट पचराई तीर्थ क्षेत्र में मेला महोत्सव में मुनि श्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विदेशी व्यक्ति की जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, वे यूज लेस होते जाते हैं। उनको उनके ही लोग छोड़ देते हैं। उसे कोई चाहत ही नहीं, उन्हें वृद्ध आश्रम में भेज देते हैं। जहां वे अवसाद की ज़िंदगी जीने के लिए मजबूर हो जाते हैं। भारतीय संस्कृति में जो जितना उम्रदराज होता जाता है, उतना ही पूज्यनीय होता जाता है।</p>
<p><strong>हमारे यहां भी पश्चिम की हवा आने लगी</strong></p>
<p>भारतीय दर्शन में उसे शुभ सगुन माना जाता है। मुनि श्री ने कहा कि हमारे यहां जितना बूढ़ा हो उस व्यक्ति का आशीर्वाद मिले उतना ही मंगल हो जाता है। सौ साल से अधिक उम्र में कोमा में भी पड़ा है तो भी वह मांगलिक है। आज हमारे यहां भी पश्चिम की हवा आने लगी है। आज कुछ लोग हमारे यहां भी वृद्ध माता-पिता को भार मान लिया तो आपकी जिंदगी बहुत अभिशप्त होगी। बच्चों को गोद लेना तो तुम्हारा स्वार्थ है और वृद्ध माता-पिता को गोद लेना परमार्थ है। आचार्य भगवंत ज्ञानणा में कहा गया कि अपनों से छोटों की सेवा करना तो व्यवहार है। वृद्ध सेवा के लिए ढूंढकर सेवा करना।</p>
<p><strong>जितना वृद्ध असमर्थ हो उतना ही मांगलिक होगा</strong></p>
<p>हमारे आचार्य भगवंत के गुरुदेव तो वयोवृद्ध थे। जिस तरह से आचार्य महाराज ने आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की सेवा की। वह एक नजीर बन गई। जिस घर एक वृद्ध होगा उस घर में मंगल ही मंगल होगा। जितना वृद्ध असमर्थ हो उतना ही मांगलिक होगा। तुम उसे भार मानते हो उसे भार मत मानना। एक विदेशी से मैंने पूछा आप लोग यहां क्या देखने आते हैं तब वह विदेशी कहता है, यहां तीर्थ बहुत कम थे, जहां भगवान का जन्म होता है वहीं तीर्थ कहते हैं। तीर्थ तो वहीं है। जहां भगवान के पंच कल्याणक मनाए जाएं वहीं तीर्थ हो जाता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मुझे पता है आज मेले का आनंद लेने आप सब एकत्रित हुए है। भारत गांव में बसता था, जिस मंदिर ने वरदान दिया है। जिस मंदिर से हमारे पूर्वजों का संबंध रहा। उसकी सेवा करने से पित्रदोष दूर हो जाते हैं।</p>
<p><strong>पांडा शाह द्वारा बसाया गया पचराई तीर्थ क्षेत्र</strong></p>
<p>इसके पहले मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि पांडा शाह द्वारा स्थापित किए गए अति प्राचीन तीर्थ क्षेत्र श्री पचराई तीर्थ पर शनिवार को मेला महोत्सव का आयोजन किया गया है। जिसे मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ का सान्निध्य मिला है। इस दौरान महामंत्री डॉ.चक्रेश जैन ने कहा कि आगामी दिनों में तीर्थोदय तीर्थ गोलाकोट में भव्य पंच कल्याणक महोत्सव की तैयारियां जोरों पर है। आप और हम सब मिलकर इस महोत्सव को ऐतिहासिक बनाने जा रहे हैं।</p>
<p><strong>सहयोगियों का आभार जताया</strong></p>
<p>अशोक नगर जैन समाज के अध्यक्ष राकेश कांसल ने कहा कि अशोक नगर चातुर्मास के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने हर समारोह को अभूतपूर्व बनने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। हम उनका आभार व्यक्त करते हैं और हमारे ज़िले वह लगातार व्यवस्थाओं को बनाए हुए हैं। मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि आज हम आपके चरणों में आभार व्यक्त क्या करें बस इतना निवेदन करना चाहते हैं। हमें आगे भी अवसर मिलते रहें। इस दौरान नीलेश बड़कुल, नितिन बज, अक्षय अमरोद, सार्थक जैन सहित अन्य प्रमुखजनों ने श्रीफल भेंट किए।</p>
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