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	<title>मुनि सुधासागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>मुनि सुधासागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आज निकलेगी भव्य शोभायात्रा : तीर्थचक्रवर्ती मुनि सुधासागर ससंघ की अगवानी को लेकर जैन समाज उत्साहित </title>
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		<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 14:14:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन संत तीर्थचक्रवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज ससंघ के ललितपुर नगर आगमन को लेकर जैन समाज में उत्साह का माहौल है। विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा नगर को तोरणद्वार, बैनर और पोस्टरों से सुसज्जित किया गया है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; ललितपुर। जैन संत तीर्थचक्रवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज ससंघ के ललितपुर नगर आगमन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन संत तीर्थचक्रवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज ससंघ के ललितपुर नगर आगमन को लेकर जैन समाज में उत्साह का माहौल है। विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा नगर को तोरणद्वार, बैनर और पोस्टरों से सुसज्जित किया गया है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर</strong>। जैन संत तीर्थचक्रवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज ससंघ के ललितपुर नगर आगमन को लेकर जैन समाज में उत्साह का माहौल है। विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा नगर को तोरणद्वार, बैनर और पोस्टरों से सुसज्जित किया गया है।</p>
<p>निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 14 मार्च को प्रातः 7 बजे मुनि श्री सुधासागर महाराज अपने संघस्थ साधुओं के साथ ज्ञानोदय तीर्थ से विहार करते हुए नेहरू महाविद्यालय मार्ग पहुंचेंगे, जहां दिगंबर जैन पंचायत समिति के तत्वावधान में जैन समाज द्वारा उनकी भव्य अगवानी की जाएगी। इसके बाद शोभायात्रा निर्धारित मार्ग से मवेशी बाजार, आजाद चौक, घंटाघर चौक, तुवन चौराहा होते हुए वर्णी कॉलेज चौराहा से अभिनंदनोदय तीर्थ पहुंचेगी, जहां मुनि श्री धर्मसभा को संबोधित करेंगे।</p>
<p>अगवानी को लेकर जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत जैन खजुरिया, धार्मिक आयोजन संयोजक प्रतीक इमलिया, राकेश जैन ‘रिंकू’, मंदिर प्रबंधक मोदी पंकज जैन, अशोक दैलवारा, मनोज जैन (बबीना), अजय जैन गंगचारी सहित श्रेष्ठी शीलचंद अनौरा, अनिल जैन अंचल, राजेंद्र जैन थनवारा, अक्षय अलया, संजीव जैन (ममता स्पोर्ट), जिनेंद्र जैन (डिस्को), संजीव जैन (सीए), नरेंद्र जैन ‘छोटे पहलवान’, अरविंद जैन (ऑप्टिशियन), धन्यकुमार जैन एड., संजय रसिया और नरेंद्र जैन ‘छोटे पहलवान’ सहित अनेक प्रमुख लोग सक्रिय हैं। महिला मंडल ने भी जुलूस की अगवानी को लेकर भव्य तैयारियां की हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि मुनि श्री सुधासागर महाराज के सानिध्य में 28 मार्च से देवोदय तीर्थ देवगढ़ एवं शांतोदय तीर्थ जहाजपुर में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन भी प्रस्तावित है।</p>
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		<title>विद्या सुधासागर त्यागी व्रती अमृतशाला का शुभारंभ : अमृतशाला के निर्विघ्न संचालन का संकल्प  </title>
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		<pubDate>Sat, 28 Jun 2025 13:46:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में शनिवार को श्री विद्या सुधासागर त्यागी व्रती अमृतशाला का शुभारंभ दिगम्बर जैन समाज पंचायत समिति के तत्वावधान में मुनि सुधासागर महाराज की प्रेरणा से श्रेष्ठीजनों ने किया। ललितपुर से अक्षय अलय की पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में शनिवार को श्री विद्या सुधासागर त्यागी व्रती अमृतशाला का शुभारंभ दिगम्बर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में शनिवार को श्री विद्या सुधासागर त्यागी व्रती अमृतशाला का शुभारंभ दिगम्बर जैन समाज पंचायत समिति के तत्वावधान में मुनि सुधासागर महाराज की प्रेरणा से श्रेष्ठीजनों ने किया। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से अक्षय अलय की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में शनिवार को श्री विद्या सुधासागर त्यागी व्रती अमृतशाला का शुभारंभ दिगम्बर जैन समाज पंचायत समिति के तत्वावधान में मुनि सुधासागर महाराज की प्रेरणा से श्रेष्ठीजनों ने किया। समाज में त्यागी व्रतियों के लिए इस पहल की प्रेरणा के लिए समाज के श्रेष्ठीजनों ने आचार्य श्री समय सागर महाराज का आशर्वाद लेते हुए अमृतशाला में कलश की स्थापना की। दीप प्रज्वलन जैन पंचायत के पदाधिकारियों ने किया। मंदिर प्रबंधक अजय जैन,मनोज जैन बबीना के साथ श्रेष्ठी अखिलेश जैन गदयाना, शिखरचंद्र जैन किसलवास, सोमचंद्र संजीव जैन लकी, ज्ञानचंद जैन, कपूरचंद लागौन ने अमृतशाला के निर्विघ्न संचालन का संकल्प लिया। अमृतशाला शुभारंभ में ब्रहमचारी मनोज भैया के संयोजन में धार्मिक कियाएं हुई। इस मौके पर प्रमुख रूप से जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, पूर्व अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, राजेन्द्र जैन थनवारा, सनत खजुरिया, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, संजीव जैन, धन्यकुमार जैन, अमित सराफ, कामरेड मनोज जैन आदि मौजूद रहे।</p>
<p><strong> आचार्य निर्भयसागर महाराज की रविवार को होगी अगवानी</strong></p>
<p>आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज महरौनी नगर से पदविहार करते हुए ससंघ ललितपुर में प्रवेश करेंगे। दिगम्बर जैन समाज पंचायत समिति के अनुसार आचार्य श्री 29 जून को प्रातःकाल ग्राम मिर्चवारा से पदविहार करते हुए गोविन्दसागर बांध सम्मुख ज्ञानोदय तीर्थ पहुंचेंगे। मध्यान्ह एक बजे ज्ञानोदय तीर्थ से दिगम्बर जैन पंचायत समिति के तत्वावधान में आचार्य संघ की अगवानी होगी। आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के संघस्थ मुनि शिवदत्त सागर महाराज, मुनि सुदत्तसागर महाराज,मुनि गुरूदत्त सागर महाराज, मुनि भूदत्त सागर महाराज, मुनि मेधदत्त सागर महाराज, मुनि पदमदत्तसागर महाराज, मुनि वृशभदत्त सागर महारा, क्षुल्लक चन्द्रदत्तसागर महाराज, श्रीदत्त सागर महाराज पदविहार करते हुए नेहरू महाविद्यालय मार्ग से मवेशी बाजार होते हुए आजाद चौक से सावरकर चौक होते हुए पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर पहुंचेंगे। आचार्य संघ की अगुवाई को लेकर जैन समाज उत्साहित है। जिसकी व्यवस्थाओं को धार्मिक संयोजक प्रतीक इमलिया, राकेश जैन रिंकू स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से संयोजित कर रहे हैं।</p>
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		<title>मुनि अविचल सागर सुधासागर कन्या विद्यालय में निर्यापक श्रमण मुनि दीक्षा दिवस पर हुई रोचक प्रस्तुति :  नारी संस्कारों की जननी और समाज में सर्वोपरि </title>
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		<pubDate>Thu, 26 Sep 2024 11:12:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारतीय परम्परा में नारी का स्थान समाज में सर्वोपरि है जो व्यक्ति महिलाओं बालिकाओं का सम्मान नहीं करता या उनपर बुरी नजर रखता उनके लिए नारी नरक के समान है। नारी को संस्कारों की जननी बताते हुए मुनि श्री ने कहा संस्कारवान नारी ही बच्चों को संस्कारित करती है। उक्त विचार जैन संत मुनि अविचल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारतीय परम्परा में नारी का स्थान समाज में सर्वोपरि है जो व्यक्ति महिलाओं बालिकाओं का सम्मान नहीं करता या उनपर बुरी नजर रखता उनके लिए नारी नरक के समान है। नारी को संस्कारों की जननी बताते हुए मुनि श्री ने कहा संस्कारवान नारी ही बच्चों को संस्कारित करती है। उक्त विचार जैन संत मुनि अविचल सागर महाराज ने नगर के तालाबपुरा स्थित सुधासागर कन्या इण्टर कालेज में निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज के 42वें दीक्षा दिवस पर व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> भारतीय परम्परा में नारी का स्थान समाज में सर्वोपरि है जो व्यक्ति महिलाओं बालिकाओं का सम्मान नहीं करता या उनपर बुरी नजर रखता उनके लिए नारी नरक के समान है। नारी को संस्कारों की जननी बताते हुए मुनि श्री ने कहा संस्कारवान नारी ही बच्चों को संस्कारित करती है। उक्त विचार जैन संत मुनि अविचल सागर महाराज ने नगर के तालाबपुरा स्थित सुधासागर कन्या इण्टर कालेज में निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज के 42वें दीक्षा दिवस पर व्यक्त करते हुए कहा बच्चे लोकिक शिक्षा के साथ संस्कारवान बनें तभी भविष्य सुधरेगा। मुनि श्री ने संत सुधासागर महाराज के मार्गदर्शन में धार्मिक एवं सामाजिक सुधार की दिशा में किए जा रहे कार्यो को आर्शीवाद प्रदान किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-67299" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-26-at-4.39.32-PM-1.jpeg" alt="" width="1600" height="849" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-26-at-4.39.32-PM-1.jpeg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-26-at-4.39.32-PM-1-300x159.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-26-at-4.39.32-PM-1-1024x543.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-26-at-4.39.32-PM-1-768x408.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-26-at-4.39.32-PM-1-1536x815.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-26-at-4.39.32-PM-1-990x525.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-26-at-4.39.32-PM-1-1320x700.jpeg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />कार्यक्रम का शुभारम्भ नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि मुन्नालाल जैन एवं भाजपा जिलाध्यक्ष राजकुमार जैन, जैन पंचायत अध्यक्ष डा० अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन संयोजक सनत खजुरिया ने आचार्य श्री के चित्र के सम्मुख दीपप्रज्जवलित कर किया। मुनि श्री का पादप्रक्षालन शिक्षामंत्री जैन समाज प्रफुल्ल जैन द्वारा किया गया। विद्यालय की वालिकाओं ने गुरूवंदना द्वारा संगीतमय मंगलाचरण किया। निर्यापक श्रमण मुनि श्री की संगीतमय पूजन श्रेष्ठीजनों ने भक्तिपूर्वक कर अर्ध समर्पित किए। अतिथियों द्वारा हाईस्कूल इण्टरमीडियेट परीक्षा 23-24 में विद्यालय के मेधावी अब्बल वालिकाओं को पुरूष्कृत कर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त दीक्षादिवस पर रंगोली, मेंहदी, दीपसजाओ प्रतियोगिता में अब्बल वालिकाओं को पुरूष्कृत किया गया।</p>
<p>इस दौरान विद्यालय की वालिकाओं ने रोचक नृत्य नाटिकाए एवं धार्मिक भक्ति गीत प्रस्तुत किए जो सराहनीय रहे। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से शीलचंद अनौरा, पार्षद आलोक जैन मयूर, अक्षय अलया, सजल जैन, अमित सराफ, संजीव जैन लकी, राकेश जैन रिंकू, संजीव जैन ममता स्पोर्ट, सुमित खजुरिया, पारस मनया, दिलीप चौधरी, अशोक जैन उमरिया, वीरचंद सराफ प्रमोद जैन पाह, अजय जैन गंगचारी मनोज जैन बबीना, मनीष जैन, श्रयांस जैन गदयाना, अभय जैन ग्राफिक्स, सौरभ जैन, राजेश जैन बडकुल, पवन जैन करमुहारा आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रफुल्ल जैन ने किया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की संयोजना में प्रधानाचार्य श्रीमति कल्पना जैन अम्रता जैन रजनी सक्सेना विजय जैन सहित सुधासागर पव्लिक स्कूल, शान्तिसागर जूनियर हाईस्कूल, महावीर वाल विद्यामंदिर का विशेष योगदान रहा।</p>
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		<title>स्वास्थ चिकित्सा कैम्प का आयोजन : मुनि सुधासागर दीक्षा दिवस पर चिकित्सा शिविर में हुए 118 मरीज लाभान्वित </title>
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					<description><![CDATA[निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव सुधासागर महाराज के दीक्षा दिवस पर जैन एम्बुलेंस सेवा समिति के तत्वावधान में टडैया एक्सरे वं डेंटल क्लीनिक पर स्वास्थ चिकित्सा कैम्प का आयोजन हुआ जिसमें 118 लोगों की हड्डी की जांच की गई। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट&#8230; ललितपुर। निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव सुधासागर महाराज के दीक्षा दिवस पर जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव सुधासागर महाराज के दीक्षा दिवस पर जैन एम्बुलेंस सेवा समिति के तत्वावधान में टडैया एक्सरे वं डेंटल क्लीनिक पर स्वास्थ चिकित्सा कैम्प का आयोजन हुआ जिसमें 118 लोगों की हड्डी की जांच की गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव सुधासागर महाराज के दीक्षा दिवस पर जैन एम्बुलेंस सेवा समिति के तत्वावधान में टडैया एक्सरे एवं डेंटल क्लीनिक पर स्वास्थ चिकित्सा कैम्प का आयोजन हुआ जिसमें 118 लोगों की हड्डी की जांच की गई। शिविर में वरिष्ठ अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. ए.के. दिवाकर एवं डॉ. अक्षय टडैया ने मरीजों का स्वास्थ परीक्षण किया। मरीजों में कैल्शियम की कमी होने पर उन्हें उचित सलाह दी गई। शिविर का शुभारम्भ जैन पंचायत के महामंत्री आकाश जैन ने करते हुए कहा कि मुनि श्री सुधासागर महाराज जन-जन के लिए कल्याण का मार्ग बता रहे हैं।</p>
<p>उन्होने जीवन में शाकाहार अपनाने पर सभी से आग्रह किया। इस मौके पर प्रमुख रूप से संयोजक सनत जैन खजुरिया, सीए सौरभ जैन, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, मनोज जैन बबीना, पारस जैन मनया, संदीप जैन ककडार, अंकित जैन, निखलेष चौधरी प्रकाश जैन, पुष्पेन्द्र जैन शिक्षक आदि मौजूद रहे। कैम्प की व्यवस्थाओं में ओवरसीज हैल्थ केयर के प्रतिनिधि अंकुश श्रीवास्तव का विशेष सहयोग रहा।</p>
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		<title>धर्मसभा में दिए प्रवचन : परिवार मेरे साथ नहीं रहता है, मैं परिवार के साथ रहता हूं &#8211; मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Sun, 01 Sep 2024 08:06:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धन तो सब चाह रहे हैं लेकिन तरीके इतने भिन्न हैं कि एक धन कमाकर सेठ बन जाता है और एक धन कमाकर डाकू बन जाता है। दोनों की दृष्टि धन पर है लेकिन वह धन से प्रभावित होते ही किसी की तिजोरी में पैसा देखा और मन ललच जाता है। जब जब तुम किसी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धन तो सब चाह रहे हैं लेकिन तरीके इतने भिन्न हैं कि एक धन कमाकर सेठ बन जाता है और एक धन कमाकर डाकू बन जाता है। दोनों की दृष्टि धन पर है लेकिन वह धन से प्रभावित होते ही किसी की तिजोरी में पैसा देखा और मन ललच जाता है। जब जब तुम किसी के पास कोई संपत्ति देखकर उसे हांसिल करने का भाव करोगे तो तुम्हें डाकू बनना पड़ेगा। धन देखकर धन से प्रभावित होना बुरी चीज नहीं थी, धन को देखकर वो धन मुझे कब मुझे मिली यह बुरी आदत थी। यह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन के दौरान कही। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> धन तो सब चाह रहे हैं लेकिन तरीके इतने भिन्न हैं कि एक धन कमाकर सेठ बन जाता है और एक धन कमाकर डाकू बन जाता है। दोनों की दृष्टि धन पर है लेकिन वह धन से प्रभावित होते ही किसी की तिजोरी में पैसा देखा और मन ललच जाता है। जब जब तुम किसी के पास कोई संपत्ति देखकर उसे हांसिल करने का भाव करोगे तो तुम्हें डाकू बनना पड़ेगा। धन देखकर धन से प्रभावित होना बुरी चीज नहीं थी, धन को देखकर वो धन मुझे कब मुझे मिली यह बुरी आदत थी। यह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि मन ललाचने का अर्थ है यह वस्तु मुझे मिल जाए, समझ लेना तुम्हें उसको पाना है तो डाकू बनना पड़ेगा, दूसरा एक तरीका है उस धन को पाने के लिए शकुनि मामा बनना पड़ेगा, जुआ खेलना पड़ेगा। डाकू सामने वाले का नाश करके धन प्राप्त करता है और जुआ धन वाले का नाश नही करता, पांसे फेंककर धन ले लेता है। दूसरे और तरीके में सामने वाले का वीक पॉइंट देखकर के उसको धन को अपने हवाले करा लेना।</p>
<p><strong>धन का लोभी सीधा डाकू बनता है</strong></p>
<p>मनि श्री ने कहा कि ऐसा ही तुमने किसी धर्मात्मा को देखा, सिद्ध, अरिहंत, मुनियों को देखा, तुम्हारी मन में उस धनी के समान भाव आया कि मैं भी एक दिन भगवान बनूंगा। वहाँ धन पाने का लालच आया, ऐसे ही यहां धर्म की महिमा सुनी तो मन लालच गया कि यदि धर्म मेरे पास आ जायेगा तो मैं संसार की हर वस्तु प्राप्त कर लूँगा। मैं मंदिर जाऊंगा दान करूंगा, पूजा करूंगा, व्रत करूंगा तो मुझे बहुत इज्जत मिलेगी, शान शौकत मिलेगी और संसार की सर्वश्रेष्ठ वस्तु मिलेगी। ऐसा ललाचानने के बाद वहां तो डाकू बना था और यहां डाकू साधु बन गया। धन का लोभी सीधा डाकू बनता है और कभी-कभी धन चुराने के लिए डाकू भी साधु बन जाता है। जब जब भक्त के मन में आया कि मेरा मंदिर है, यह मेरे भगवान है, समझ लेना भाई भक्त नहीं रहा गुंडा बन गया। वह निडर होकर जाएगा, जो चाहे वह करेगा क्योंकि वह उस मंदिर का अध्यक्ष है, ये अंग्रेजों की दिन है, पहले कोई मंदिर का अध्यक्ष, कमेटी नहीं होती था, भक्त के भगवान नहीं होते थे, भगवानों का भक्त होता था।</p>
<p><strong>अपनी भाषा बदलो</strong></p>
<p>जब तुम्हारे मन में यही भाव आ जाए कि मेरी मम्मी पापा, घर के बड़े लोग मेरे से पूछे बिना कुछ नहीं करते, मेरे बिना घर का पत्ता नही हिल सकता, कोई कुछ नहीं करता, समझ लेना तुम उस घर के सदस्य नहीं, उस घर का गुंडा हो। एक बाजार का गुंडा है जो दूसरों पर गुंडागर्दी करता है, तुम तो महा गुंडे हो जो अपने बाप पर, परिवार पर गुंडागर्दी करते हो। यदि गुंडे बनने की इच्छा हो तो बाजार का गुंडा बन जाना लेकिन कभी परिवार में गुंडा मत बनना। कभी तुम्हें यह भाव आ गया हो कि मेरे से पूछे बिना घर का व्यक्ति दान भी नहीं दे सकता, ऐसा स्वप्न में भी भाव आ गया हो कभी तो कृपया कर प्रायश्चित कर लेना, यह बहुत बड़ा पाप तुम्हारे मन में आया है। घर में ऐसा माहौल बनाओ कि धार्मिक कार्य करने के लिए मेरे से पूछने की जरूरत नहीं है, हर व्यक्ति स्वतंत्र है। मेरे माता-पिता मेरे साथ रहते हैं यह पाप वाक्य छोड़ो, यह अनाथ बनने का लक्षण है अगले भाव में तुझे ऐसे गन्दे माता पिता मिलेंगे जो तेरी एक भी सुनने वाले नहीं होंगे, एकदम अनाथ बनोगे। यदि तुमने कभी सपने में कहा कि मम्मी पापा मेरे साथ रहते हैं, घर में मेरी बात के बिना कोई कुछ नहीं कर सकता और इस बात की तुम्हें खुशी और हो जाये, अब तुमने अनाथ बनने का स्वयं को निमंत्रण दे दिया, ऐसे गंदे माता-पिता मिलेंगे कि तुम दो दो दो आंसू रोओगे कि मुझे ऐसा बाप मिला, इसलिए भाषा बदलो परिवार मेरे साथ नहीं रहता है मैं परिवार के साथ रहता हूँ।</p>
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		<title>धर्मसभा में दिए प्रवचन : बड़ा आदमी वह है जो छोटों को गले लगाता है &#8211; मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Fri, 30 Aug 2024 16:51:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सम्यकचारित्र को प्राप्त करना कठिन नहीं है यदि सम्यकज्ञान हो जाये तो। यदि ज्ञान तुम्हारा समीचीन है तो चारित्र भी कोई दूर नहीं है और सम्यक्दर्शन यदि तुम्हें हो गया है तो भी तुम्हारा कल्याण निश्चित है। चारित्र से भ्रष्ट व्यक्ति की शुद्धि जल्दी हो जाती है, दर्शन से भ्रष्ट व्यक्ति कभी सुधरता नहीं है। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सम्यकचारित्र को प्राप्त करना कठिन नहीं है यदि सम्यकज्ञान हो जाये तो। यदि ज्ञान तुम्हारा समीचीन है तो चारित्र भी कोई दूर नहीं है और सम्यक्दर्शन यदि तुम्हें हो गया है तो भी तुम्हारा कल्याण निश्चित है। चारित्र से भ्रष्ट व्यक्ति की शुद्धि जल्दी हो जाती है, दर्शन से भ्रष्ट व्यक्ति कभी सुधरता नहीं है। तस्स मिच्छा में दुक्कडम कहते ही चारित्र में आई हुई अशुद्धि सुधर जाती है। यह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन के दौरान कही। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> सम्यकचारित्र को प्राप्त करना कठिन नहीं है यदि सम्यकज्ञान हो जाये तो। यदि ज्ञान तुम्हारा समीचीन है तो चारित्र भी कोई दूर नहीं है और सम्यक्दर्शन यदि तुम्हें हो गया है तो भी तुम्हारा कल्याण निश्चित है। चारित्र से भ्रष्ट व्यक्ति की शुद्धि जल्दी हो जाती है, दर्शन से भ्रष्ट व्यक्ति कभी सुधरता नहीं है। तस्स मिच्छा में दुक्कडम कहते ही चारित्र में आई हुई अशुद्धि सुधर जाती है। चारित्र का एक प्रतिक्रमण है, सम्यकर्शन का, सम्यकन का कोई प्रतिक्रमण नहीं है। यह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि सम्यकर्शन व सम्यकज्ञान के दोषों के निराकरण का कोई नही उपाय जैनागम में नहीं बताया, इसलिए सम्यकर्शन को यदि निरतिचार पालन नहीं किया तो जन्म संतति तुम्हारी मिटने वाली नहीं है, वहां ये संदेशा दे रहे है कि सम्यकदर्शन निर्दोष ही होना चाहिए, अतिचार युक्त सम्यक्दर्शन कोई काम का नहीं।</p>
<p><strong>मंदिरों को बचाएं</strong></p>
<p>मरो तो ऐसे मरो की उसमें जन्म का अंकुर न फूटे, इसलिए उन्होंने जन्म संतति के नाश की बात कही। जैन दर्शन में जितनी भी प्रक्रियाएं हैं सबका एक ही अर्थ है भव का नाश, जन्म का नाश। किसी ने पूछा कि महाराज आप जैन समाज को अल्पसंख्यक क्यों घोषित करवाना चाहते हैं। मैंने कहा कि आपका कानून बना हुआ है कि भक्त अपने देवता को जैसे प्रसन्न व पूजा करना चाहे, कर सकता है और अल्पसंख्यक का नियम है कि भक्त के अनुसार पूजा नही होगी, मंदिर के नियम के अनुसार पूजा होगी क्योंकि हमें अपनी समाज नहीं बचाना है, हमें मंदिर बचाना है। हमें आरक्षण नहीं चाहिए नौकरी का, हम तो सख्त विरोधी हैं, आरक्षण पर नौकरी पाना सबसे बड़ा अपराध है क्योंकि वह अयोग्य है। आरक्षण का डॉक्टर या इंजीनियर 35% पर बनेगा तो क्या होगा? मैं आरक्षण का समर्थक हूं, पढ़ाई में आरक्षण करो। गरीबों को खूब पढ़ाओ, निशुल्क पढ़ाओ, कोचिंग पढ़ाओ, जितना पढ़ा सको पढ़ाओ लेकिन नौकरी तो योग्य बनाकर ही मिलना चाहिए, नौकरी कभी आरक्षण में नहीं मिलना चाहिए। जिस देश में नौकरी आरक्षण पर हो जाएगी वह देश एक दिन अयोग्य होता जाएगा और पढ़ाई में आरक्षण दिया जाएगा तो हर नौकरी और पद में अच्छे लोग ही आयेंगे।</p>
<p><strong>दो प्रकार की एनर्जी</strong></p>
<p>दो प्रकार की एनर्जी होती है स्वकल्याणी, पर कल्याणी। स्वकल्याणी जो एनर्जी है वह त्याग तपस्या से मिलेगी, कितने उपसर्ग परिषह आ जाये कोई उसको फर्क पड़ने वाला नहीं है लेकिन तुम्हारे द्वारा दूसरे का कल्याण- तुम्हारी आँख उठे और दूसरे का कल्याण हो जाये, हाथ में ऐसी ताकत हो जिसको हाथ लग जाए उसका बेड़ा पार हो जाए, ये है परकल्याणी एनर्जी। तीर्थंकरों की हर क्रिया पर कल्याणी होती है- उनके आशीर्वाद उनकी वाणी में दम है, हरिवंश पुराण में लिखा कि तीर्थंकर जहाँ से गुजर जाए 50 साल तक वहाँ सुभिक्ष होता है। यह एनर्जी उनमे क्यों आई क्योंकि वह दुनिया के लिए जिये है, उन्होंने सुखी नही, दुःखी आत्माओं का ध्यान किया। अपाय विचय, विपाक विचय धर्मध्यान हमें पर कल्याणी एनर्जी देता है। आज्ञा विचय, संस्थान विचय ये सब आत्मा का कल्याण करते है। हे भगवन! इन आँखों में इतनी ताकत बनाए रखना कि मैं तेरा दर्शन कर सकूं, गुरु को पहचान सकूं, जिनवाणी का स्वाध्याय कर सकूं, ऐसे लोगों के आंखों में ज्योति आएगी कि वह यहाँ से बैठे-बैठे सूर्य के विमानों में जिनबिम्ब के दर्शन कर लेंगे। दूसरी एनर्जी- बस भगवन! इन आँखो में इतनी ज्योति बनी रहे कि पैर के नीचे आने वाले तुच्छ जीव मुझे दिखते रहे, कंही वो मेरे पैर से न कुचल जाये, तुम मुझे दिखो या न दिखो लेकिन मुझे चींटी दिखना चाहिए, अब उस आँख में ऐसी ताकत आएगी कि वह आंख जिस पर उठ जाएगी वही मालामाल हो जाएगा, दुखों से दूर हो जाएगा।</p>
<p><strong>छोटों को गले लगाएं</strong></p>
<p>पहली एनर्जी- हे भगवान मेरे कानों में वह ताकत रहे कि तेरी वाणी, गुरु की वाणी सुन सकूं, जाओ तुम्हारे कानों में ऐसी ताकत आएगी कि 12 योजन तक पूरे लोग एक साथ बोलेंगे और तुम क्रमश: बता दोगे और दूसरी एनर्जी- भगवान यह कान सदा दुखियों के दुख सुनने के लिए तैयार रहे। पहली एनर्जी- मुँह से णमोकार मंत्र, भगवान का भजन निकलता रहे, इससे ऐसी ताकत आएगी कि तुम एक अन्तर्मुहूर्त में पूरे द्वादशांग का पाठ कर लोगे और दूसरी एनर्जी- हे भगवन! मेरे मुख से बात निकले और दुखियों के दुख दूर हो जाए। पहली एनर्जी- इन हाथों से सदा आपका जाप और अभिषेक करता रहूं। इन हाथों में ऐसी ताकत आएगी कि तुम जम्बूद्वीप को उठाकर फेंक दोंगे। दूसरी एनर्जी- इन हाथों में इतनी ताकत बनी रहें कि मैं किसी अपाहिज की सहायता कर सकूं। इन पैरों में ताकत बनी रहे कि मैं सम्मेदशिखर की वंदना कर लूँ और मन्दिर तक जा सकूं तो ऐसी ताकत आएगी कि बाहुबली जैसी अड़िग खड़े रहोगे तो भी चक्कर नहीं आएगा। हे भगवन! दुखियों के दुख दूर करने के लिए मैं सदा चलता रहूं, जाओ उन पैरों में ऐसी ताकत आएगी कि उन चरणों को दो बूंद पानी छू लेंगे और सारे जगत के दुख दूर हो जाएंगे। बड़ा आदमी वह नहीं है जो बड़ा है, बड़ा आदमी वह है जो छोटों को गले लगाता है, छोटों को साथ साथ लेकर चलता है, छोटों के लिए जीता है छोटों के लिए मरता है, सब कुछ दुखियों के लिए है कि वह एक दिन तीर्थंकर बनेगा।</p>
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		<title>धर्मसभा में दिए प्रवचन : सहायता उनकी करो जिसका कोई सहारा नहीं : मुनि श्री सुधासागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Fri, 30 Aug 2024 12:59:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हम अपने आप को सबसे छोटा, सबसे बड़ा मूर्ख समझें, अज्ञानी होकर नही, ज्ञानी होकर। दूसरा व्यक्ति हमें मूर्ख कहे उसके पहले कहना मैं तो मूर्ख हूं ही, कौन सा बुरा बोल रहा है। चाहने की यह परिभाषा नहीं है कि कौन हमारी जिंदगी में कितना काम आएगा, 90% लोग दुनिया को इसलिए चाहते हैं [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>हम अपने आप को सबसे छोटा, सबसे बड़ा मूर्ख समझें, अज्ञानी होकर नही, ज्ञानी होकर। दूसरा व्यक्ति हमें मूर्ख कहे उसके पहले कहना मैं तो मूर्ख हूं ही, कौन सा बुरा बोल रहा है। चाहने की यह परिभाषा नहीं है कि कौन हमारी जिंदगी में कितना काम आएगा, 90% लोग दुनिया को इसलिए चाहते हैं कि यह वस्तु यह व्यक्ति जिंदगी में काम आएगा। यह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन के दौरान कही। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> हम अपने आप को सबसे छोटा, सबसे बड़ा मूर्ख समझें, अज्ञानी होकर नही, ज्ञानी होकर। दूसरा व्यक्ति हमें मूर्ख कहे उसके पहले कहना मैं तो मूर्ख हूं ही, कौन सा बुरा बोल रहा है। चाहने की यह परिभाषा नहीं है कि कौन हमारी जिंदगी में कितना काम आएगा, 90% लोग दुनिया को इसलिए चाहते हैं कि यह वस्तु यह व्यक्ति जिंदगी में काम आएगा। यह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन के दौरान कही।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मरते समय व्यक्ति यह नहीं सोचता कि वह कहां गया, उसे रोना इसलिए आता है कि अब मेरा क्या होगा, मैं तो इसी के भरोसे पर था। जैसे तुम एफडी बना लेते कि किसी काम मे आएगी, ऐसे ही तुम सम्बन्ध बनाते हो कि ये मेरे किसी काम आएगा। धर्म कहता है जिसका कोई नहीं है उसके तुम हो जाओ, वो तुम्हारा जन्म जन्म तक एहसान मानेगा। जिसका साथ दुनिया दे रही है, किस्मत, परिवार, गुरुजन, समाज भी साथ दे रही है, उसका साथ तुम दे रहे हो तो कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन जिसका कोई भी साथ नहीं दे रहा है, धर्म में जाने लायक नहीं है वो, ऐसी किस्मत खराब है कि गुरु का दर्शन नहीं कर सकता, बदकिस्मती है, देख नही सकता, अंधा है।</p>
<p>बोल नहीं सकता गूंगा है। चल नहीं सकता लंगड़ा है। उसमे भी भिखारी है, अनाथ है। नीति कहती है कि ऐसे व्यक्ति का तुम साथ दे दो, जाओ तुम्हारा एक दोस्त जन्म जन्म का तुम्हारा हो गया। विपत्ति काल में कोई साथ दे दे तो वही सच्चा साथी है।</p>
<p><strong>संकट के साथी को मत छोड़ना</strong></p>
<p>कौन है हमारा साथी? उस साथी का साथ कभी नहीं छोड़ना, मरना पड़े तो मर जाना, लूटना पड़े तो लूट जाना पीटना पड़े तो पिट जाना, कुछ भी कर लेना लेकिन जिसने संकट में साथ दिया हो, इसको कभी मत छोड़ना। वह स्थान सबसे अच्छा माना जाता है जिसे व्यक्ति मरने के लिए चुनता है, दुनिया तो मंदिर अमर होने के लिए जाती है लेकिन पूज्यपाद स्वामी कहते हैं कि मरुं तो प्रभु तेरे मंदिर में मरुं। दुनिया तो णमोकार मंत्र इसलिए पढ़ती है कि णमोकार मंत्र पढ़ेंगे तो मरने से बच जायेगे, पूज्यपाद स्वामी कहते हैं मरुं तो णमोकार मंत्र फेरते समय मरुं। नीलांजना की मौत आदिनाथ के लिए शगुन बन गयी। दुनिया गुरु के सामने इसलिए आती है कि मैं मर रहा हूं, मुझे बचाओ लेकिन पूज्यपाद स्वामी कहते हैं कि यदि मेरा मरण हो तो गुरु महाराज के चरणों की वंदना करते समय हो।</p>
<p>जहां यतियों का समूह हो वहां मेरा मरण हो। मरण करते समय चैत्यालय नही, चैत्यालय की वंदना कर रहा हूं उस समय मेरा मरण हो। मुनि महाराज के मुख से प्रवचन हो रहा हो उस समय मेरा मरण हो। मरुं तो सम्मेदशिखरे में मरुं, दिवाली के दिन मरुं। दिवाली के दिन कोई मर जाए तो डबल दिवाली मनाओ, एक महावीर स्वामी की और एक महावीर स्वामी के दिन।</p>
<p><strong>जैन दर्शन में मृत्यु का महोत्सव</strong></p>
<p>संसार के किसी भी दर्शन ने मौत को महोत्सव नहीं कहा, उन्होंने मौत की संज्ञा यमराज को दी जाती है। मात्र एक जैनदर्शन ऐसा है जो मृत्यु को महोत्सव और शुभ मानता है। कुछ स्थानों पर मौत को नहीं, समाधि को महत्व दिया पर वहाँ जो मरने का प्रोसेस है वह विनोबा भावे को पसंद नहीं था, जल समाधि- कमर में पत्थर बांधकर पानी में डूब जाओ, अग्नि समाधि- अग्नि चिता में जलती हुई प्रवेश कर जाओ, भूमिगत समाधि- गड्ढे में गिर जाओ ऊपर से गड्ढा पैक कर दो, ये हठयोग है, इसलिए हमारे यहां कहा कि लाखों वर्षों तक जीना पड़े तो मुझे कोई डर नही है लेकिन मृत्यु आवे तो आ जावे। जो विधि जैन दर्शन में है घुट घुट कर मत मरो, प्राणों का घात मत करो। जैनदर्शन मरो और मरने दो का नाम नहीं, जियो और जीने दो का नाम है। तो कब मरना- जब मरना निश्चित हो चुका है, जब मरण को अब कोई टालने वाला नहीं है।</p>
<p>यदि जीने के लिए संयम में दोष लगता है तो पूज्य अमृतचन्द्र स्वामी महाराज अपहृतसंयम का उपदेश देते है, अति कर्कश आचरण मत करो जिससे तुम्हारी मौत हो जाये। संयम में दोष भी लगता है और जिंदा रह सकते हो तो दोष लगा दो तो बाद में प्रायिश्चित्य किसके लिए था। प्रायिश्चितय इसलिए था कि कवचित कदाचित बुद्धिपूर्वक भी दोष लगाना पड़े तो जिंदा रहने के लिए लगाया हैं, बाद में प्रयाश्चित दे दिया जाएगा। हानि लाभ देखा जाएगा।</p>
<p><strong>मन में सोचे तो ही फल मिलेगा</strong></p>
<p>विनोबा भावे ने पकड़ा कि जैनियों के यहां जो संल्लेखना है वहां मारा नहीं जाता, मरने वाले को हंसते-हंसते भेजा जाता है। विनोबा भावे हमेशा भावना भाते थे कि मेरा मरण हो तो महावीर भगवान की विधि के अनुसार हो। मरने के पहले 12-15 दिन पहले से उन्होंने विधिपूर्वक अन्न-जल छोड़ना शुरू किया। अंत मे जब तीन दिन बचे उन्होंने अन्न-जल छोड़ दिया। इंदिरा गांधी ने कहा आप राष्ट्रसंत है, आपकी देश को बहुत जरूरत है, आप दवाई ले लीजिए, अन्न जल ग्रहण कीजिये। उन्होंने कहा मेरे जीवन का अंत निकट आ चुका है, अब दवाई ले या भोजन करे तो भी मैं बचने वाला नही हूं। जब इंदिरा गांधी ने दबाब डाला तो विनोवा भावे ने कहा कि मेरे और परमात्मा के बीच मे दबाब और दवाई की जरूरत नही है। धवला जी मे लिखा है कि घर से यदि व्यक्ति ने संकल्प कर लिया कि मैं मंदिर जाऊंगा, अब वो पहुंचे या न पहुंचे , उसे मंदिर का पुण्य उसी समय लागू हो गया, जिस समय उसने संकल्प किया। यदि संसार में पापी नहीं होते तो धर्मात्मा को धर्म करने का मौका नहीं मिलता क्योंकि पापियों की आड़ में भी धर्म पलता है यदि हम पॉजिटिव सोच लेते हैं। जिनका कोई बचाता नहीं उनका बचाओ तो तुम बच जाओगे। सहायता उनकी करो जिसका कोई सहारा नहीं। जो विपत्ति में काम आता है, वहीं अंत में साथ आता है। जब किसी ने साथ नहीं तब जिसने साथ दिया हो, बस उसका साथ कभी छोड़ना नही।</p>
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		<title>धर्म सभा में दिए प्रवचन : कर्म जो कराएगा वह करूंगा नहीं, मैं जो करूंगा उसे कर्म को करना पड़ेगा &#8211; मुनि श्री सुधासागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Mon, 26 Aug 2024 12:31:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जो जहां है वहां से आगे बढ़ने का भाव आए तो ये तीन बातें ध्यान रखना- कभी भी अपनी जिंदगी किस्मत के भरोसे मत छोड़ना। किसी भी कार्य को शुरू करने के पहले यह भाव मत लाना कि मेरी किस्मत में क्या लिखा, जो मेरी किस्मत में लिखा होगा वही होगा, यदि कार्य के प्रारंभ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जो जहां है वहां से आगे बढ़ने का भाव आए तो ये तीन बातें ध्यान रखना- कभी भी अपनी जिंदगी किस्मत के भरोसे मत छोड़ना। किसी भी कार्य को शुरू करने के पहले यह भाव मत लाना कि मेरी किस्मत में क्या लिखा, जो मेरी किस्मत में लिखा होगा वही होगा, यदि कार्य के प्रारंभ में यह भाव आ गया तो निश्चित समझना तुम कभी सफल नहीं हो पाओगे, आगे नहीं बढ़ पाओगे। यह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन के दौरान कही। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> जो जहां है वहां से आगे बढ़ने का भाव आए तो ये तीन बातें ध्यान रखना- कभी भी अपनी जिंदगी किस्मत के भरोसे मत छोड़ना। किसी भी कार्य को शुरू करने के पहले यह भाव मत लाना कि मेरी किस्मत में क्या लिखा, जो मेरी किस्मत में लिखा होगा वही होगा, यदि कार्य के प्रारंभ में यह भाव आ गया तो निश्चित समझना तुम कभी सफल नहीं हो पाओगे, आगे नहीं बढ़ पाओगे। यह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन के दौरान कही।</p>
<p><strong>श्रद्धा सोच समझ कर करो</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि दूसरी बात कभी कोई कार्य भगवान भरोसे मत करना, जो भगवान की मर्जी होगी वही होगा, यदि ये भाव तुम्हारे मन में आ गया, नियम से तुम्हारा विकास वही रुक जाएगा क्योंकि वो करते ही नहीं हैं। जो करते ही नहीं हैं उनके भरोसे रहे क्यों? फिर भी उनके दर्शन करने जाना है, उनका नाम लेना है क्योंकि उनका नाम लिए बिना हमारा शगुन होने वाला नहीं है। भगवान का दर्शन इसलिए किया जाता है कि मैं जो करूं, उसमें सफल हो जाऊं। इनका दर्शन करना भावी पर्याय में कुछ अच्छा होने की उम्मीद है, इनका नाम लेना विघ्नों को दूर करने में कारण बनता है। ये भगवान, गुरु सब माचिस की काड़ी के समान है, इनके भरोसे हमारा अंधकार दूर नहीं होने वाला है लेकिन इनके बिना भी अंधकार दूर होने वाला नहीं है। जो धर्म को, भगवान को, गुरु को, शास्त्र को नहीं जानते हैं, धर्म से, भगवान से, गुरु से, शास्त्र से बहुत दूर है वे व्यक्ति दुर्भागे है लेकिन उससे बड़ा दुर्भागी वो है जिसे धर्म को जानने के बाद, धर्म को करने के बाद, धर्म से घृणा हो जाती है, इसलिए कहीं ऐसी श्रद्धा मत कर लेना कि भगवान वो पूर्ति न कर पाए।</p>
<p><strong>कर्मफल चेतना का ध्यान रखें</strong></p>
<p>तीसरा किसी कार्य करते समय ये भाव न आ जाए नियतिवाद का- &#8216;जिस समय जैसा होना है वैसा होगा।&#8217; जब तक व्यक्ति औदयिक भाव में लीन है, वहां से मोक्ष के रास्ते बंद है, औदयिक भाव का दूसरा नाम है- कर्मफल चेतना। कर्मफल चेतना का अर्थ है- मैं क्या कर सकता हूँ जो किस्मत में लिखा है वही होगा, जैसा कर्म कराएगा वैसा वो करेगा, ऐसा भाव आ रहा है तो समझ लेना तुम संसार के सबसे बड़े पापी जीवों की गिनती में आने वाले हो। जब कार्य हो जाए या बिगड़ जाए तो उस समय कहना मेरी किस्मत में यही लिखा था, ये सबसे बड़ा शुभ है। कर्मफल चेतना एक इंद्रियों की होती है और अपन पंचेेंद्रीय होकर कर्मफल की चेतना की अनुभूति कर रहे है, कर्मो के अनुसार हमारा परिणमन हो रहा है, जब जब तुम्हे कर्म के उदय की अनुभूति हो जाये तब तब तुम सोचना मैं पंचेन्द्रिय होकर भी एकेन्द्रिय हो गया। ये अनुभव कभी अपनी जिंदगी में आने मत देना नही तो तुम सम्यकदर्शन के अधिकारी नही होगे। सम्यकदर्शन के पहले क्षयोपशम लब्धि कहती है कर्म जो कराएगा वह करूंगा, नहीं, मैं जो करूँगा उसे कर्म को करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>परिश्रम करना जरूरी</strong></p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि व्यवहाराभासी जिंदगी में व्यवहार को, क्रियाकांडों को पकड़ लेता है, कभी स्वप्न में भी इससे ऊपर उठने के भाव नहीं करता और निश्चयाभासी कहता है जब ट्रेन को छोड़ना है तो ट्रेन में बैठना क्यों? मंजिल आने पर अपने आप ट्रेन को ऐसे छोड़ देते हो जैसे उससे हमारा कुछ मतलब ही न था। इसी तरह व्यवहार प्राप्त करने के लिए परिश्रम करना है, व्यवहार छोड़ने की चिंता मत करो। पुण्य छोड़ा नही जाता, पुण्य छूट जाता है। पाप बुद्धि पूर्वक छोड़े जाते हैं, पाप छोड़ने के लिए गुरु ढूंढा जाता है, पाप छोड़ने के लिए दीक्षा ली जाती है, साधना की जाती है। पाप को काटना यानी तलवार पर चलने के समान है। यदि तुम्हारी मन में ये भाव आ गया कि मैं सही हूं, मैं जो कर रहा हूं, वह सही है, बस यही से तुम्हारा विनाश चालू हो गया। अपने आप पर कभी भरोसा मत करना, आत्मा पर भरोसा करने वाला व्यक्ति का नाश होगा। किस्मत पर भरोसा करने वाले को कभी किस्मत उठा लेगी, भगवान पर भरोसा करने वाले को कभी भगवान उठा लेगा, नियत पर भरोसा करने वाले की कभी अच्छी नियत भी आएगी, पर जिसने अपनी आत्मा पर भरोसा किया उसे कोई उठाने वाला नही है, तुम क्षयोपशम लब्धि के अधिकारी नही हो। वो पुण्य कमाओ, जो देव शास्त्र गुरु को नमस्कार करने से मिलता है।</p>
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		<title>धर्म सभा में दिए प्रवचन : मां बाप जिंदा है और तू उनके बिना जीना चाहता है, इसी का नाम पशु है &#8211; निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Sun, 25 Aug 2024 06:03:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि देवों में कोई व्यसन नहीं होता इसलिए वह करते नहीं, मोक्ष का दरवाजा बन्द है क्योंकि तुम्हें मिला नही है, इसलिए तुम करते नही। नारकी को कुछ अच्छा मिलता ही नहीं, वे शुभ करे तो अशुभ होता है, उनको बन्द कर दिया। पढ़िए यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि देवों में कोई व्यसन नहीं होता इसलिए वह करते नहीं, मोक्ष का दरवाजा बन्द है क्योंकि तुम्हें मिला नही है, इसलिए तुम करते नही। नारकी को कुछ अच्छा मिलता ही नहीं, वे शुभ करे तो अशुभ होता है, उनको बन्द कर दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर</strong>। पशु कहता है कि मैं कुछ नहीं जानता, मैं जो कुछ भी कर रहा हूँ, मेरी दृष्टि में अच्छा है इसलिए मैं कर रहा हूं। जब तुम्हें यह परिणाम आ जाए कि मैं जो कर रहा हूँ, सब अच्छा है, समझ लेना यही पशु का लक्षण है, यही असंज्ञी, विकलत्रय का लक्षण है। अब तुम मानव हो तो मानव का लक्षण है कि वह कभी अपनी इच्छा से कुछ नही करता। वह कहता है कि मुझे वही अच्छा है, जो मेरा गार्जियन अच्छा कहता है। मेरे मां-बाप, कुल, जाति, भगवान, गुरु, शास्त्र सब सही है, मैं सही नही हूं। यह परिणाम तुम्हारे अंदर जब आ जाए, समझ लेना तुम पशु से ऊपर उठ गए, मानव हो। मोक्ष की शुरुआत मानव से होती है, देव मोक्ष नहीं जा सकता। यह बात निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि देवों में कोई व्यसन नहीं होता इसलिए वह करते नहीं, मोक्ष का दरवाजा बन्द है क्योंकि तुम्हें मिला नही है, इसलिए तुम करते नही। नारकी को कुछ अच्छा मिलता ही नहीं, वे शुभ करे तो अशुभ होता है, उनको बन्द कर दिया। भोगभूमि मनुष्य है, उनके कभी बुरा नहीं होता, सब अच्छा होता है। मात्र एक कर्मभूमि का मानव है जो न अपने पुण्य को अच्छा मानता हैं, कितने ही कर्म का उदय आ जाये, प्रकृति ने कहा सही वही है जिसकी गोदी में तुमने जन्म लिया, तू गलत है। मां-बाप सही है, मैं गलत हूं, यदि इतना सा भी नियम तुमने ले लिया तो इतना तो पक्का है कि तुम इस दुनिया में कभी बर्बाद नहीं हो पाओगे, शराब नहीं पी पाओगे, गुटखा नहीं खा पाओगे, इंसान बनो या न बनो लेकिन दानव नहीं बन पाओगे।</p>
<p><strong>बच्चों को न दिखाएं वैभव</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि आप की अमीरी बेटे के अनुभव में नहीं आना चाहिए। बेटे को पढ़ते समय कभी भी अपनी अमीरी मत दिखाना, कभी तिजोरी मत दिखाना, वैभव मत दिखाना। तुम्हें बेटे को अच्छा बनाना है या अमीर बनाकर बिगड़े अय्याश बनाना है। यदि सही में रहीश बनाना है तो सारे माँ बाप अपने बेटे के सामने इतने गरीब बनना कि इतने इनकम टैक्स वाले के पास भी मत बनना। मेहनत के बल पर जो बड़े बनते हैं, बहुत गरीब होते हैं वो। उस गरीबी में से जो अमीर निकलता है, वो पसीने की कमाई होती है। भरत चक्रवर्ती के दीक्षा लेने के बाद उसका पुत्र अर्ककीर्ति वापस महल लौटकर आया तो 32 मुकुटबद्ध राजाओं ने नमस्कार करना बंद कर दिया, कोषाध्यक्ष ने कहा कि सारी निधियां खाली हो गईं, उधर 12 योजन की छलांग लगाने वाला घोड़ा 12 फीट की छलांग नही लगा पा रहा, वही रसोईयां है वही सब्जी है लेकिन अब भोजन में वो स्वाद नही रहा, एक अन्तर्मुहूर्त के बाद इतना परिवर्तन हो गया, इसलिए मत मानना कि बाप अमीर है तो तुम अमीर रहोगे, बाप के पास वैभव है तो तुम्हारा रहेगा, मत मानना बाप की जो इज्जत है वो मेरी रहेगी। बाप की इज्जत पाने के लिए तुम्हे उतनी मेहनत करनी पड़ेगी, जितनी तुम्हारे बाप ने की थी।</p>
<p><strong>मां-बाप सबसे बड़े</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि जिंदगी में यदि मां-बाप को छोड़ने का भाव आवे तो समझना तुममें पशु का लक्षण आ गया, मरने के बाद जीना तो मजबूरी है। मां-बाप जिंदा है और तू उनके बिना जीना चाहता है, उनकी आज्ञा, आशीर्वाद के बिना जीना चाहता है इसी का नाम पशु है। कोमा में है, बीमार है, बेहोशी में है, कैसे भी है मा-ंबाप के साथ मैं रहूंगा। यदि मानव हो तो आज प्रतिज्ञा कर लो कि मेरे मा-ंबाप जब तक जिंदा है मैं कभी इनसे अलग होकर जीने की कामना भी नही करूंगा, इनकी आज्ञा के बिना मैं कभी अपनी आज्ञा को बड़ा नहीं मानूगा। जो अपने मां- बाप का 25 साल का प्यार ठुकरा दे, ऐसों से शादी मत करना, कल वे तुम्हें छोड़कर दूसरे के साथ चले जायेंगे, जो अपनी मां का न हुआ वह तेरा क्या होगा। और सुनो छोकरों ऐसी छोरी अपने घर में मत लाना, जो अपनी मां की नहीं हुई, जो पिता को रुलाकर तेरे पास आ रही है, वह तुम्हें क्या सुख देगी, कुंवारे रह जाना लेकिन ऐसी छोकरी की शादी मत करना। उससे शादी करो जिस लड़की ने नियम लिया है कभी मैं मां-बाप के विरुद्ध जिंदगी में कोई कार्य नहीं करूंगा, मेरी शादी पर मां-बाप को दुख नहीं, खुशी होना चाहिए, ऐसी बेटी लाओ तुम्हारे घर में लक्ष्मी बनकर स्वर्ग बना देगी, ऐसा बेटा तुम्हारी जिंदगी में परमेश्वर का रूप बनकर आएगा।</p>
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		<title>पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए श्रीफल भेंट किया :  साधु के आने-जाने का कोई ठिकाना नहीं होता, वह तो हवा के समान-  मुनि सुधासागर </title>
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		<pubDate>Tue, 21 Nov 2023 10:29:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में होने वाले पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में आगमन और चातुर्मास के लिए जैन समाजजनों ने आचार्य विद्यासागरजी महाराज के शिष्य मुनि पुंगव सुधा सागरजी महाराज को श्रीफल भेंट किया। बड़ोदिया से 108 सदस्यीय दल आगरा पहुंचा। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;. बड़ोदिया। नगर में होने वाले पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में आगमन और चातुर्मास [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000000;">नगर में होने वाले पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में आगमन और चातुर्मास के लिए जैन समाजजनों ने आचार्य विद्यासागरजी महाराज के शिष्य मुनि पुंगव सुधा सागरजी महाराज को श्रीफल भेंट किया। बड़ोदिया से 108 सदस्यीय दल आगरा पहुंचा। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;.</span></span></p>
<p>बड़ोदिया। नगर में होने वाले पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में आगमन और चातुर्मास के लिए जैन समाजजनों ने आचार्य विद्यासागरजी महाराज के शिष्य मुनि पुंगव सुधा सागरजी महाराज को श्रीफल भेंट किया। बड़ोदिया से 108 सदस्यीय दल आगरा पहुंचा, जहां मुनि सुधा सागरजी से भेंट कर बताया कि बड़ोदिया में सफेद पत्थर से जैन मंदिर बनाया गया है। मुकेश खोड़निया व आशीष तलाटी ने बताया कि वागड़ के जैन समाजजनों ने मुनिश्री के चरण पक्षालन कर खुशहाली की कामना की। केसरीमल खोड़निया व कांतिलाल खोड़निया ने बड़ोदिया में होने वाले पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में पधारने के लिए मुनि पुंगव सुधा सागरजी से आग्रह किया तो उन्होंने कहा कि दस दिन में 250 किमी तय कर चातुर्मासस्थल पहुंच सकते हैं तो ये 700 किमी की<br />
दूरी कोई मायने नहीं रखती है। 30 दिन में 700 किमी भी तय कर बड़ोदिया आ सकते हैं। बस, हमारे गुरु आचार्य विद्यासागरजी महाराज की जो आज्ञा आती है, उसके अनुसार हमारा विहार होगा। मुनि श्री ने कहा कि साधु के आने और जाने का कोई ठिकाना नहीं है। साधु हवा के समान है, हवा का कोई भरोसा नहीं, इसलिए न साधु को छोड़कर हताश हो और न साधु पर विश्वास करो। बस अपने संकल्पों में विश्वास रखो। वागड़ से गए जैन समाजजनों को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव सुधा सागरजी ने कहा कि ये वागड़ के वागड़िया हैं। बड़ोदिया वाले हैं। मैं वागड़ से पीठ करके आगरा की तरफ हूं लेकिन यह कहते हैं कि हम पीठ को ही मुख में बदलने की चेष्टा करते हैं। अभी मुनि की पीठ बड़ोदिया की ओर है। बड़ोदिया समेत वागड़वासी उस पीठ को सम्मुख में बदलने की चेष्ठा कर रहे हैं। बड़ोदियावासियों की पीठ को सम्मुख में बदलने की बड़ी भावना है। मुनि ने पूरे बड़ोदिया समाज को आशीर्वाद दिया। देश विदेश में प्रख्यात रहे मोटिवेशन प्रमुख उज्जवल पाटनी ने सुधा नाम के अंग्रेजी के पांच अक्षरों में ही जिंदगी का सार बताया। आगरा में राजेश तलाटी, सीमा तलाटी, आशीष तलाटी समेत 108 सदस्यों को गुरु पूजन का सौभाग्य मिला।</p>
<p><strong>ये भी रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस दौरान अमृतलाल खोड़निया, मगनलाल खोड़निया, मीठालाल खोड़निया, सोहनलाल दोसी, महिपाल खोड़निया, जयंतीलाल जैन, बसंतलाल जैन, सुरेश चंद्र तलाटी, रमेश चंद्र तलाटी, पं. विजय कुमार शास्त्री, सूर्यकरण खोड़निया, धनपाल खोड़णिया, सुशील खोड़निया आदि मौजूद रहे।</p>
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