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	<title>मुनि श्री सुधासागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>मुनि श्री सुधासागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जीवन की सार्थकता समझो और अपनी शक्ति पहचानो : मुनि श्री सुधासागर जी ने अभिनंदनोदय तीर्थ में मुनि श्री ने कहा ऐसा करो कि दुनिया के काम आए </title>
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		<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 14:23:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र क्षेत्रपाल मंदिर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा हमें ऐसा करना है कि दुनिया के काम आए धर्म के काम आए और हम भगवान के चरणों में देने योग्य बने। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र क्षेत्रपाल मंदिर में धर्मसभा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र क्षेत्रपाल मंदिर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा हमें ऐसा करना है कि दुनिया के काम आए धर्म के काम आए और हम भगवान के चरणों में देने योग्य बने। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र क्षेत्रपाल मंदिर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा हमें ऐसा करना है कि दुनिया के काम आए धर्म के काम आए और हम भगवान के चरणों में देने योग्य बने जिससे सदैव देता रहूँ। कभी ऐसी नौवत न आए कि मुझे दुनिया की तो छोडो बाप की भी वसियत न लेना पडे। मुनि श्री ने कहा हम दुनिया की शक्ति समझते हैं अपनी नहीं। जीवन में वह कार्य नहीं करना जिसको करने से डर लगे जिसको धर्म और गुरु रोकते हैं। माता-पिता का अभिशाप कभी नहीं लेना। मुनि श्री ने कहा धर्म ही जीवन में श्रेष्ठ है इसको समझो और अपने जीवन में उतारो यह नर जन्म मिला है जिसको सार्थक करो इसी में कल्याण है। मुनि श्री ने कहा धर्म ही एक ऐसा सहारा है जहां व्यक्ति को अच्छे बुरे का ज्ञान रहता है और पापों से बचकर अपना कल्याण कर लेता है। मुनि श्री द्वारा इन दिनों जीवन को श्रेष्ठ कर्मों के माध्यम से आनंदपूर्वक व्यतीत करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।</p>
<p>धर्म सभा के शुभारम्भ में मुनि श्री सुधासागर महाराज का पाद प्रक्षालन समाजश्रेष्ठी विनोद कुमार देवेन्द्र कुमार कामरा परिवार द्वारा किया गया जबकि, आचार्य श्री के चित्र का अनावरण जैन पंचायत के पदाधिकारियों एवं श्रेष्ठीजनों ने किया। महिला मण्डल द्वारा संगीतमय मुनि श्री की पूजन हुई। जिसमें भक्तिपूर्वक अर्घ्य समर्पित किए गए। संचालन महामंत्री आकाश जैन एवी गैस ने किया।</p>
<p><strong> यागमण्डल विधान में अर्घ्य समर्पित किए</strong></p>
<p>इसके पूर्व आज प्रातःकाल महावीरपुरा निवासी रजतमयी चौबीसी और अभिनंदननाथ भगवान की विशाल रजतमयी प्रतिमा विराजमान करने के पुण्यार्जक विनोदकुमार देवेन्द्र कुमार सुनील कामरा परिवार के आवास से चौबीस तीर्थंकर भगवानों के विराजमान हेतु गोल्डस पालिशड सिंहासन छत्र भामंडल सहित की भव्य शोभायात्रा गाजे बाजे के साथ अभिनंदनोदय तीर्थ पहुंची। जिसमें भारी संख्या में श्रावक श्राविकाए सम्मलित हुए और विराजमान मुनि संघ से आशीर्वाद ग्रहण किया। मध्यान्ह में घटयात्रा ध्वजारोहण के उपरान्त श्री यागमण्डल विधान में अर्घ्य समर्पित किए गए। जैन पंचायत महामंत्री आकाश जैन के अनुसार आज 19 मार्च को मुनि श्री सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में प्रातःकाल अभिषेक शान्तिधारा के उपरान्त नित्यमह पूजन जिनवाणी पूजन गुरुपूजन विश्वशान्ति महायज्ञ और नवीन वेदिका पर जिनबिम्ब स्थापना की जाएगी।</p>
<p><strong>शंकाओं का समाधान किया</strong></p>
<p>सायंकाल जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम आलोक जैन शास्त्री के संयोजन में सम्पन्न हुआ जिसमें अनेकों श्रावकों ने अपनी शंकाओं का समाधान मुनि श्री सुधासागर महाराज द्वारा पाया। जिसमें उन्होने श्रावकों को धर्म से जुडने एवं समाजिक कार्यों में सक्रिय रहने की प्रेरणा दी। धर्मसभा में प्रमुख रूप से जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत जैन खजुरिया,सीए सौरभ जैन, मंदिर प्रबंधक मोदी पंकज जैन, अशोक दैलवारा, धार्मिक अयोजन संयोजक प्रतीक इमलिया, राकेश जैन रिंकू, श्रेष्ठी शीलचंद अनौरा, राजेन्द्र जैन थनवारा, अक्षय अलया मीडिया प्रभारी, नरेन्द्र जैन छोटे पहलवान, संजय रसिया, मनोज जैन बबीना, सौरभ जैन पीलू, रिंकू जैन पाय, प्रमुख रूप से मौजूद रहे।</p>
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		<title>तीर्थ चक्रवर्ती मुनिसंघ के सान्निध्य में देवोदय तीर्थ पंचकल्याणक महोत्सव के प्रमुख पात्र चयनित : धर्म ही सहारा, जिस पर संशय करना अहितकारी -मुनि सुधासागर </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 15:07:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र, क्षेत्रपाल मंदिर ललितपुर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए तीर्थचक्रवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि धर्म मार्ग ही सबसे श्रेयस्कर मार्ग है। धर्म पर संशय करना अत्यंत अहितकारी है। उन्होंने कहा कि धर्म ही मनुष्य का एकमात्र सहारा है, जो पतित को पावन बनने का मार्ग [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र, क्षेत्रपाल मंदिर ललितपुर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए तीर्थचक्रवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि धर्म मार्ग ही सबसे श्रेयस्कर मार्ग है। धर्म पर संशय करना अत्यंत अहितकारी है। उन्होंने कहा कि धर्म ही मनुष्य का एकमात्र सहारा है, जो पतित को पावन बनने का मार्ग दिखाता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र, क्षेत्रपाल मंदिर ललितपुर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए तीर्थचक्रवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि धर्म मार्ग ही सबसे श्रेयस्कर मार्ग है। धर्म पर संशय करना अत्यंत अहितकारी है। उन्होंने कहा कि धर्म ही मनुष्य का एकमात्र सहारा है, जो पतित को पावन बनने का मार्ग दिखाता है। धर्म के माध्यम से व्यक्ति को अच्छे और बुरे का ज्ञान होता है तथा वह पापों से बचकर अपने जीवन का कल्याण कर सकता है।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य के जीवन में प्रत्येक क्षण उतार-चढ़ाव और परिवर्तन होते रहते हैं, इसलिए हमें अपने कर्मों को सद्कार्यों से जोड़ना चाहिए। उन्होंने धर्म के मार्ग को कल्याणकारी और श्रेयस्कर बताते हुए कहा कि वास्तव में कोई भी वस्तु पूर्णतः अच्छी या बुरी नहीं होती। श्रावक जीवन में व्यक्ति कई बार पापों से नहीं बच पाता और भूलवश पापों में फँस जाता है, किंतु वास्तविक शांति धर्म में ही निहित है।</p>
<p>धर्मसभा के शुभारंभ में मुनि श्री सुधासागर महाराज का पादप्रक्षालन आशीष कुमार नितन जैन, गौसलपुर द्वारा किया गया। महिला मंडल द्वारा संगीतमय पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तिभाव से अर्घ समर्पित किए गए। इससे पूर्व प्रातःकाल प्रभु अभिषेक के उपरांत शांतिधारा संदीप सर्राफ (अलंकार ज्वैलर्स), निर्मल कुमार जैन एडवोकेट (कुम्हैंडी), डॉ. अक्षय टडैया तथा अशोक जैन (दैलवारा परिवार) द्वारा संपन्न की गई।</p>
<p>धर्मसभा का संचालन महामंत्री आकाश जैन (एवी गैस) ने किया। मुनि संघ के सान्निध्य में आगामी 28 मार्च से देवोदय तीर्थ में आयोजित होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रमुख पात्रों का चयन ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश के संयोजन में किया गया।</p>
<p>इस अवसर पर सुलोचना जैन एवं अखिलेश जैन गदयाना को भगवान के माता-पिता, संजीव जैन एवं राजीव जैन ‘लकी’ को सौधर्म इन्द्र तथा सुरेशचंद जैन एवं संजीव जैन (सीए) को महायज्ञनायक के रूप में चयनित किया गया।</p>
<p>इसके अतिरिक्त धनपति कुबेर के रूप में सुनीता जैन एवं अशोक जैन (जाखलौन), भरत चक्रवर्ती के रूप में मनीषा जैन एवं जितेंद्र जैन (मुच्छड़, लागौन), बाहुबली इन्द्र के रूप में विनीत जैन एवं सुधा जैन (वीके गंगचारी), राजा श्रेयांस के रूप में अनीता एवं अनिल जैन (अंचल), राजा सोम तथा ध्वजारोहणकर्ता के रूप में संदीप सम्यक सर्राफ (अलंकार ज्वैलर्स) का चयन किया गया।</p>
<p>विधिनायक के रूप में ज्योति जैन, राकेश एवं अंशुल जैन (वडकुल), ईशान इन्द्र के रूप में रूबी जैन एवं संजय मोदी, सानत इन्द्र के रूप में देवेंद्र सर्राफ एवं गुलशन जैन (निहारिका साड़ी), ब्राह्मेन्द्र के रूप में विजय कुमार एवं गौरव जैन ‘टोनू’ (चिगलौआ), लानत्व इन्द्र के रूप में कोमलचंद एवं शैलेन्द्र जैन ‘वीटू’, ब्रह्मोत्तर इन्द्र के रूप में पवन जैन एवं मयंक (इलेक्ट्रॉनिक), तथा शुक इन्द्र के रूप में सनत कुमार एवं चंद्रेश जैन (मंडी बामौरा परिवार) चयनित हुए। इसके अतिरिक्त अनेक श्रावकों ने भी इन्द्र-इन्द्राणी के रूप में महोत्सव में सम्मिलित होने की अपनी स्वीकृति प्रदान की। धर्मसभा में प्रमुख रूप से चंद्रोदय तीर्थ चांदखेड़ी के अध्यक्ष हुकुमचंद ‘काका’, भागचंद जैन (सांगानेर), जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत जैन (खजुरिया), मंदिर प्रबंधक पंकज जैन मोदी, अशोक दैलवारा, धार्मिक आयोजन संयोजक प्रतीक इमलिया, राकेश जैन ‘रिंक’, श्रेष्ठी शीलचंद अनौरा, राजेन्द्र जैन (धनवारा), मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, संजीव जैन (ममता स्पोर्ट), जिनेन्द्र जैन (डिस्को), संजीव जैन (सीए), गौरव जैन ‘टोनू’, नरेन्द्र जैन ‘छोटे पहलवान’, मुकेश सर्राफ, सतीश जैन ‘बंटी’, मनोज जैन (बबीना), अजय जैन (साइकिल), अभिषेक अनौरा, वीणा जैन, अनीता मोदी, सुषमा जैन, सुधा सिमरैया, ममता मोहनी, संगीता नायक सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। सायंकाल जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम आलोक जैन शास्त्री के संयोजन में आयोजित किया गया, जिसमें अनेक श्रावकों ने अपनी शंकाओं का समाधान निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज से प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने धर्म से जुड़ने और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहने की प्रेरणा दी। महामंत्री आकाश जैन के अनुसार 16 मार्च को प्रातः 8:30 बजे आगामी 8 अप्रैल से शांतोदय तीर्थ चांदपुर जहाजपुर में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पात्रों का चयन किया जाएगा।</p>
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		<title>महावीर की संस्कृति को जीवंत रखना भक्त की जिम्मेदारी : मुनिश्री सुधासागर जी ने किया प्रवेश शहर के प्रमुख मार्गों सजाई रंगोली </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/it_is_the_responsibility_of_a_devotee_to_keep_mahavirs_culture_alive/</link>
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		<pubDate>Sat, 14 Mar 2026 16:10:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सुधासागर जी ने कहा-भगवान महावीर की संस्कृति की जीवंत रखना प्रत्येक भक्त की जिम्मेदारी है। आज धर्म की नहीं वरन भगवान महावीर की संस्कृति की प्रभावना कर ललितपुर वासियों ने बता दिया कि बुंदेलखंड में आज भी संस्कार जीवन्त हैं। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। भगवान महावीर की संस्कृति की जीवंत रखना [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनि श्री सुधासागर जी ने कहा-भगवान महावीर की संस्कृति की जीवंत रखना प्रत्येक भक्त की जिम्मेदारी है। आज धर्म की नहीं वरन भगवान महावीर की संस्कृति की प्रभावना कर ललितपुर वासियों ने बता दिया कि बुंदेलखंड में आज भी संस्कार जीवन्त हैं। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span><del></p>
<hr />
<p></del></strong></p>
<p><strong>ललितपुर।</strong> भगवान महावीर की संस्कृति की जीवंत रखना प्रत्येक भक्त की जिम्मेदारी है। आज धर्म की नहीं वरन भगवान महावीर की संस्कृति की प्रभावना कर ललितपुर वासियों ने बता दिया कि बुंदेलखंड में आज भी संस्कार जीवन्त हैं। उन्होंने कहा कि धर्म व्यक्ति का निजी होता है, जिसको कोई भी नहीं छीन सकता। यह अंत समय तक उसके साथ रहता है और व्यक्ति के भविष्य को सुधारता है। उक्त उद्‌गार मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने अभिनंदनोदय तीर्थ में धर्मसभा में व्यक्त किए। धर्मसभा के पूर्व जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडया एवं पंचायत समिति ने मुनिसंघ को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद ग्रहण किया जबकि, मुनि श्री के पाद प्रक्षालन का पुण्यार्जन गुरुभक्त राजेन्द्र जैन, अंकित जैन थनवारा एवं संजीव जैन, राजीव चौधरी परिवार को मिला। मुनि श्री का पूजन महिला मंडल द्वारा भक्ति पूर्वक किया गया। प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश ने ललितपुरवासियों को गौरव के पल बताए। गुरुदेव आज भक्तों के बीच विराजित हैं। धर्मसमा का संचालन महामंत्री आकाश जैन एवी गैस ने किया।</p>
<p><strong>शोभायात्रा में युवाओं ने की भक्ति</strong></p>
<p>इसके पूर्व में शनिवार को सुबह मुनि श्री सुधासागर जी महाराज की अगवानी की गई। दिगम्बर जैन पंचायत समिति के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा गोविन्दसागर बांध हाईवे से प्रारम्भ हुई, जो नेहरू महाविद्यालय से गाजे बाजे के साथ निकली। लगभग 5 किमी लम्बे चल समारोह में ध्वज पताका लिए 51 अश्व, दो हाथी, ऊंट पर सवार श्रेष्ठजन ध्वज पताका लिए हुए थे। वहीं बाइक पर जय जयकार करते हुए नवयुवक आकर्षण का केन्द्र रहे। बुन्देली संस्कृति राईसेरा के साथ 20 डीजों के साथ थिरकते भजनों पर झूमते युवकों का उत्साह, शस्त्र प्रदर्शन करती जैन वीरांगनाओं द्वारा गुरुदेव की परिक्रमा की गई।</p>
<p><strong>इन्होंने किया पादप्रक्षालन</strong></p>
<p>यह भव्य शोभात्रा नेहरू महाविद्यालय से मवेशी बाजार, आजाद चौक, घंटाघर चौराहा होते हुए अभिनंदनोदय तीर्थ पहुंची। घंटाघर चौक पर विधायक सदर रामरतन कुशवाहा, पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, पूर्व विधायक रमेश कुशवाहा, पूर्व पालिका अध्यक्ष रमेश खटीक, नरेन्द्र कडंकी, लक्ष्मीनारायण विश्वकर्मा, दीपक राठौर, अनिल जैन डोगरा, राजेश चन्द्र, अजय जैन साइकिल समेत सैकडों भक्तों ने मुनिश्री का पादप्रक्षालन कर आरती उतारी।</p>
<p><strong>इन्होंने भी की अगवानी</strong></p>
<p>नगरपालिका अध्यक्ष सोनाली जैन समेत पालिका पार्षदों द्वारा गुरुदेव की घंटाघर चौक पर अगवानी हुई। पूर्व पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल, डॉ. राजकुमार जैन, ज्योति लोकेशरी, भूपेन्द्र जैन, सिद्धि समूह, अनिल जैन अंचल, भूपेन्द्र जैन सिद्धिसमूह सहित अनेक भक्तों ने मुनि श्री की अगुवाई की। मुनि श्री सुधासागर महाराज के प्रति ललितपुर में भक्तों की भक्ति और अगुवाई में सम्मलित होने के लिए दूरांचलों से भक्तों की अपार भीड रही। मुनि श्री सुधासागरजी महाराज को नगर में प्रथम आहारदान का पुण्यार्जन ब्रहमचारिणी सीमा दीदी परिवार को मिला।</p>
<p><strong>इस अवसर पर यह भी रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस मौके पर प्रमुख रूप से शीलचंद अनोरा, अखिलेश गदयाना, मुन्नालाल जैन अभिलाषा, जैन पंचायत के पदाधिकारी सनत जैन खजुरिया, सीए संजीव जैन, सतीश नजा, सीए सौरभ जैन, कैप्टन राजकुमार और अक्षय अलया मीडिया प्रभारी, संजीव जैन ममता स्पोर्ट, रविंद्र अलया, सन्मति सराफ, जिनेन्द्र जैन डिस्को, सुमित जैन खजुरिया, वीर चंद सराफ आदि प्रमुख रूम से मौजूद रहे जबकि, शोभायात्रा की व्यवस्थाओं में मंदिर प्रबंधक पूर्व पार्षद मोदी पंकज जैन, अशोक जैन देलवारा, संयोजक धार्मिक प्रतीक इमलिया, राकेश जैन रिंकू, संजय रसिया, मनोज बबीना, आनंद जैन भावनगर, जितेन्द्र जैन राजू आदि का विशेष योगदान रहा। जैन संत को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राजकीय अतिथि का दर्जा मिलने पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। मुनिश्री सुधासागर महाराज अभिनंनोदय तीर्थ में विराजमान है। जहां मुनि श्री के प्रातः 8 बजे से प्रवचन एवं सायंकाल 6बजे जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम होगा।</p>
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		<title>मुनि श्री सुधासागर जी की को नई पिच्छिका की भेंट : पिच्छिका परिवर्तन समारोह में उमड़े गुरु भक्त </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Dec 2025 12:51:35 +0000</pubDate>
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<p><strong>नगर में आयोजित जिनबिंब पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार को मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ससंघ का भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह बड़े उत्साह भक्ति के साथ संपन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">अशोक नगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर।</strong> नगर में आयोजित जिनबिंब पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार को मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ससंघ का भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह बड़े उत्साह भक्ति के साथ संपन्न हुआ। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि पिच्छिका देने-लेने वाले सौभाग्यशाली समाज बंधुओं ने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया। दद्दू ने कहा कि मुनिश्री की पुरानी पिच्छिका लेने का परम सौभाग्य अशोकनगर जैन समाज के भामाशाह, चक्रवर्ती कहे जाने वाले राकेश जैन एवं उनकी सहधर्मिणी व्रती श्राविका अनिता जैन को प्राप्त हुई। नाम की घोषणा होते ही उपस्थित जनसमूह में करतल ध्वनि गूंजने लगी। उपस्थित समाज ने राकेश अनिता जैन अमरोद परिवार के पुण्य की अनुमोदना की। राकेशजी गुरुदेव के मंगलमय चातुर्मास के प्रथम कलश स्थापक, चक्रवर्ती एवं माता-पिता बनने के सौभाग्यशाली हैं। राकेश अमरौद के ही द्वारा इस चातुर्मास का प्रथम कलश स्थापित किया गया था। इसके बाद अशोकनगर से दर्शनोदय तीर्थ दर्शन की 32 किमी की पदयात्रा के मुख्य चक्रवर्ती बनने का सौभाग्य प्राप्त किया था। यही नहीं उन्होंने वर्तमान में चल रहे जिनबिंब पंचकल्याणक महोत्सव में भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य अर्जन किया। इसके अलावा अशोकनगर एवं थूबोनजी तीर्थ क्षेत्र में मंदिर निर्माण में बड़ी राशि दान देकर उत्कृष्ट भूमिका निभाई।राकेश जी अशोकनगर के जमीन से जुड़े, सहज, सरल सोम्य व्यक्तित्व धनी, उद्योगपति राकेश अमरौद परिवार के पुण्य की कोटिश अनुमोदना।</p>
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		<title>बुंदेलखंड तीर्थ वंदना के साथ होगा एपीपीएस का राष्ट्रीय अधिवेशन : 16 को तीर्थ वंदना, 17 को होगा गोलाकोट में अधिवेशन </title>
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		<pubDate>Tue, 12 Aug 2025 12:17:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अविवाहित प्रतिभाएं प्रस्तुति समूह (एपीपीएस) का तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन 16-17 अगस्त को बुंदेलखंड तीर्थ वंदना के साथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र गोलाकोट में आयोजित होगा। पढ़िए मनोज जैन की खास रिपोर्ट… अविवाहित प्रतिभाएं प्रस्तुति समूह का तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन इस वर्ष धार्मिक और सामाजिक संगम का अद्भुत उदाहरण बनने जा रहा है। एपीपीएस के राष्ट्रीय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अविवाहित प्रतिभाएं प्रस्तुति समूह (एपीपीएस) का तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन 16-17 अगस्त को बुंदेलखंड तीर्थ वंदना के साथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र गोलाकोट में आयोजित होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन की खास रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>अविवाहित प्रतिभाएं प्रस्तुति समूह का तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन इस वर्ष धार्मिक और सामाजिक संगम का अद्भुत उदाहरण बनने जा रहा है। एपीपीएस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी मनोज जैन नायक ने बताया कि 16-17 अगस्त को यह आयोजन बुंदेलखंड तीर्थ वंदना के साथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र गोलाकोट (खनियांधाना) में होगा। इस अधिवेशन में संपूर्ण भारतवर्ष से 250 से अधिक क्षेत्रीय संयोजकों की उपस्थिति संभावित है, जिसमें पुरुषों के साथ महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया गया है। पहले दिन शनिवार 16 अगस्त को सभी प्रतिनिधि ललितपुर स्थित श्री क्षेत्रपाल जैन मंदिर में एकत्र होकर पूजन अर्चना करेंगे। इसके बाद बुंदेलखंड जैन तीर्थ यात्रा प्रारंभ होगी, जिसमें श्रीसैरोंनजी, चंदेरी, खंदारगिरी, थूवोनजी, अशोकनगर और पचराई जैसे ऐतिहासिक व आध्यात्मिक स्थलों के दर्शन होंगे। अशोकनगर में प्रतिनिधिगण चातुर्मासरत मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के दर्शन व आशीर्वाद प्राप्त करेंगे तथा ‘जिज्ञासा समाधान’ कार्यक्रम में भाग लेकर अपने प्रश्नों का समाधान पाएंगे। रात्रि विश्राम गोलाकोट में होगा।</p>
<p><strong>पूजन और विधान के बाद राष्ट्रीय अधिवेशन का होगा शुभारंभ </strong></p>
<p>दूसरे दिन रविवार 17 अगस्त की सुबह गोलाकोट में जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा, पूजन और विधान के बाद राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ होगा। इसमें अविवाहित युवाओं के सगाई संबंधों को प्रोत्साहित करने, अखिल भारतीय परिचय पुस्तिका के नए संस्करण के प्रकाशन और जैन परिचय एप के सुधार पर विस्तृत चर्चा होगी। सभी प्रतिनिधियों के आवास, भोजन, परिवहन आदि की संपूर्ण व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की गई हैं। समापन समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रतिनिधियों को सम्मानित किया जाएगा। आयोजन समिति ने प्रत्येक कार्य के लिए अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि किसी भी प्रतिनिधि को कोई असुविधा न हो।</p>
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		<title>जैन दर्शन है कि धर्म फैलाना ही नहीं, जगत कल्याण भी हो: सुभाषगंज में मुनि श्री सुधासागर जी के नित प्रवचन में धर्म प्रभावना  </title>
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		<pubDate>Sun, 20 Jul 2025 09:54:05 +0000</pubDate>
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<p><strong>अशोकनगर के सुभाषगंज जिनालय में मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के प्रवचन नित हो रहे हैं। शनिवार को उन्होंने धर्मसभा को संबोधित किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन, गुरु भक्त और श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> नगर के सुभाषगंज जिनालय में मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के प्रवचन नित हो रहे हैं। शनिवार को उन्होंने धर्मसभा को संबोधित किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन, गुरु भक्त और श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे। मुनिश्री ने प्रवचन में कहा कि प्रातः काल तो जिंदगी का हो लेकिन, शाम न हो, ऐसी जिंदगी जीने के लिए आचार्यों ने भगवानों ने दो मार्ग बताएं। पहला मार्ग बताया कि तुम अपने आप को इतना समर्थशाली बना लो कि तुम्हें किसी की जरूर ही न पड़े। यह मत सोचना कि हमारे जीवन में संकट ही न आए, संसार में हो तो संकट तो आएंगे ही, चलोगे तो रास्ते में कांटे मिलेंगे ही। संकट तो आएंगे लेकिन, एक मार्ग ऐसा है, जो संकट तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। कांटा तो लगेगा लेकिन, रास्ता रुकेगा नहीं।</p>
<p>जिसमें तुम्हें एक संकल्प करना पड़ेगा। मेरे जीवन में कितने भी संकट आ गए। मैं कभी मन वचन गए से उन संकटों को दूर करने का भाव नहीं करूंगा। दूसरा यदि थोड़ी बहुत जल्दी हो महान बनने की तो ये भावना करना संसार के जितने भी संकट है, वे सब मेरे ऊपर आवे, सारा जगत मेरा दुश्मन बन जाए। तीसरा यदि संकट नहीं आयेंगे तो मैं संकटों को बुलाऊंगा, मैं चलाकर ऐसे कार्य करूंगा।</p>
<p>जिससे संकट आवे। कभी-कभी व्यक्ति इतना पुण्य कर लेता है कि उसके अशुभकर्म का उदय नहीं आता। साधु संकट दूर करने के लिए नहीं बनता है, संकटों को निमंत्रण देने के लिए बनता है। व्रती बनने के पहले यह भाव कर लेना कि जैसे-जैसे मैं धर्मात्मा बनता जाऊंगा वैसे-वैसे मेरे जीवन में संकट आते जाएंगे।</p>
<p><strong>अहिंसा को खंडित नहीं किया जाएगा</strong></p>
<p>ऐसी कौन सी विचारधारा है जिस संप्रदाय में मांसाहार का सर्वथा निषेध किया गया हो, निंदा की हो, दुर्गति का पात्र बताया हो, अधर्मी कहा हो व्यापक रूप से, व्यक्ति विशेष या प्रांत विशेष से नहीं लेकिन, कही न कही मांसाहार की छूट मिली। जैसे ही मांसाहार की छूट मिली, वे धर्म सारे विश्व मे फैल गए लेकिन, जब महावीर स्वामी के सामने यह बात आई तो उन्होंने कहा कि चाहे तुम बालक हो, वृद्ध हो, बीमार हो, कैसी भी दशा में कहीं भी हो लेकिन, जो मूल सिद्धांत है। उन में परिवर्तन नहीं किया जा सकता चाहे भले ही धर्म मानने वाले समाप्त हो जाए तो हो जाए, अहिंसा को खंडित नहीं किया जाएगा। जैन दर्शन कहता है कि हमें धर्म फैलाना ही नहीं, हमें तो जगत का कल्याण करना है। हमारा उद्देश्य है कि कल्याण होना चाहिए। चाहे वह किसी भी को धर्म को, किसी भी भगवान को मानने वाला हो, किसी भी जाति में जन्म लिया हो लेकिन उसका कल्याण हो रहा है तो उसी का नाम जैनी है।</p>
<p>जो जैन धर्म की आचार संहिता का पालन करता है वह जैन है और जो पालन नहीं करता है, वह जैनेत्तर है। नियमों का पालन करो, ये जातिवाद तो नाश कर रहा है लेकिन आचार संहिता है, वह जीवन मे उतरना चाहिए, उसमें समझौता नहीं करना चाहिए। तुम जीवन में तुम क्या हो, वह बनें रहना लेकिन तुम्हारा आचार विचार ऐसा हो कि व्यक्ति सब कुछ भूल करके वह देखे कि में कौन से देश का हूँ, कौन से कुल का, धर्म का है, वह देखे कि यह मात्र ऐसा व्यक्तित्व है जिसकों हमारे जीवन से जुड़ना जरूरी है।</p>
<p><strong>धर्म बहुत व्यापक है महानुभाव</strong></p>
<p>क्या तुम धर्मात्मा हो? इसका छोटा सा प्रमाण पत्र देता हूँ। क्या किसी दुखी व्यक्ति को भूल सकते हो कि ये कौन है? क्या आप भूल सकते हो कि इसने मेरे अहित किया है? क्या भूल सकते हो कि इससे मेरा कोई संबंध नहीं है, यदि यह सब चीज भूल करके मात्र ये भाव आ जाए कि मुझे इसके दुख को दूर करना है क्योंकि, यह दुखी है जाओ तुम धर्मात्मा की कोटि में आ गए।</p>
<p>यदि यह भाव आ गया कि ये तो मेरा दुश्मन है इससे मुझे क्या लेना-देना, मरने दो न। इसने हमारे जीवन में कुछ किया ही नहीं, मैं क्यों करूं, समझ लेना तुम कितना भी बड़ा धर्म पाल लेना लेकिन कभी तुम धर्म का आनंद नहीं ले पाओगे, धर्म बहुत व्यापक है महानुभाव। जब उपकार करो तो यह मत सोचो कि किसके ऊपर उपकार हो रहा है? बस जगत के ऊपर उपकार हो रहा है।</p>
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		<title>जब धर्म पथ पर बढ़ो, तो दुख का स्वागत करो: मुनिश्री सुधासागर जी ने अशोकनगर में दी देशना  </title>
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		<pubDate>Sat, 12 Jul 2025 10:19:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जब-जब तुम धर्म करने आओ, यह तय मानो कि जीवन में कष्टों की बाढ़ आ जाएगी।यह उद्गार मुनि श्री सुधासागर जी ने अशोकनगर प्रवास के दौरान व्यक्त किए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन मौजूद रहे। अशोकनगर से पढ़िए राजीव सिंघई मोनू और शुभम जैन की यह खबर&#8230; अशोकनगर। जब-जब तुम धर्म करने आओ, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जब-जब तुम धर्म करने आओ, यह तय मानो कि जीवन में कष्टों की बाढ़ आ जाएगी।यह उद्गार मुनि श्री सुधासागर जी ने अशोकनगर प्रवास के दौरान व्यक्त किए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन मौजूद रहे। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए राजीव सिंघई मोनू और शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>अशोकनगर।</strong> जब-जब तुम धर्म करने आओ, यह तय मानो कि जीवन में कष्टों की बाढ़ आ जाएगी।यह उद्गार मुनि श्री सुधासागर जी ने अशोकनगर प्रवास के दौरान व्यक्त किए। मुनिश्री ने अपने प्रबोधन में कहा कि सुख यदि सतत मिले तो उसका मूल्य समाप्त हो जाएगा। जैसे रात के बिना प्रातः का सौंदर्य अधूरा है, वैसे ही दुःख के बिना जीवन की पूर्णता नहीं। मुनिश्री ने जीवन की कठोर सच्चाई को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा-जो गाली देता है, उसे निंदक नहीं, बल्कि हमारे धैर्य का परीक्षक मानो। निंदा अज्ञानी करेगा, लेकिन प्रशंसा ज्ञानी करेगा।</p>
<p><strong>राम नहीं बनते अगर दुख न सहते</strong></p>
<p>मुनिश्री ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि श्रीराम के जीवन में वनवास, वियोग और संघर्ष न आते तो वे पूज्य नहीं होते। दुःख ही उन्हें राम बना गया। उन्होंने कहा कि “सच्चा भक्त वही है, जो भगवान या गुरु के जीवन को अपने जीवन में ढाल ले। माता-पिता, भाई-बहन और जीवनसाथी के सुख-दुःख को स्वयं का मानने वाला ही सच्चा रिश्तेदार होता है।</p>
<p><strong>धर्म से सुख नहीं, सहनशीलता आती है</strong></p>
<p>मुनिश्री ने साफ शब्दों में कहा कि धर्म से सुख नहीं मिलता, दुख सहने की शक्ति मिलती है। तुम अच्छे साधु बनना चाहते हो तो पहले खुद को दुख झेलने के लिए तैयार करो। उन्होंने कहा कि साधु वह नहीं जो कष्टों से भागे, बल्कि वह है जो कष्टों को समता से झेले। प्रवचन में मुनिश्री ने समाज को एक नई सोच दी कि जब सुख मिले, तब प्रभु को कुछ लौटाओ। दुःख में तो सभी मंदिर आते हैं, लेकिन सुख में प्रभु के द्वार जाना, यह सच्ची श्रद्धा है। ऐसा जीवन बनाओ कि तुम्हारे स्पर्श, दर्शन, शब्द और स्मरण से लोगों का कष्ट मिटे। यही है साधुता। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे, जिन्होंने मुनिश्री के उद्बोधनों को श्रवण कर जीवन के नए दृष्टिकोण प्राप्त किए।</p>
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		<title>अशोकनगर में मुनि श्री सुधासागर जी की हुई भव्य अगवानी : भव्य अगवानी देखकर मुनि श्री हुए गदगद </title>
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		<pubDate>Thu, 10 Jul 2025 18:02:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गुरुवार को अशोकनगर में सुभाष गंज जैन मंदिर प्रांगण में मंगल अगवानी गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर हुई। धर्मसभा में मुनि श्री सुधा सागर महाराज जी ने कहा कि श्रवण संस्कृति व भारत की पवित्र और मंगलमयी संस्कृति विचारों का केन्द्र नहीं आचार का केंद्र है। अशोक नगर से पढ़िए, हरिहर सिंह चौहान की यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गुरुवार को अशोकनगर में सुभाष गंज जैन मंदिर प्रांगण में मंगल अगवानी गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर हुई। धर्मसभा में मुनि श्री सुधा सागर महाराज जी ने कहा कि श्रवण संस्कृति व भारत की पवित्र और मंगलमयी संस्कृति विचारों का केन्द्र नहीं आचार का केंद्र है। <span style="color: #ff0000">अशोक नगर से पढ़िए, हरिहर सिंह चौहान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>अशोकनगर।</strong> संत समाज व शासन-प्रशासन जब साथ होता है तो संगम की यह त्रिवेणी जब संस्कृति परंपरा और संस्कारों की और अग्रसर होती है। यहां तो देश के अखण्ड भारत की परिकल्पना है जो तभी साकार होती है। जब समाजजन इसी प्रकार एकता व भाईचारे का परिचय देते हैं। यह सिंह गर्जना जिन शासन के शेर मुनि श्री सुधा सागर जी ने कही। गुरुवार को महाराज जी ससंघ का अशोकनगर में भव्य अगवानी देखकर मन प्रफुल्लित हो गया। सागर जिले के ईशुरवारा गांव में जन्मे जयकुमार जैन ने आचार्य श्री विद्यासागर जी से 1983 में मुनि दीक्षा ग्रहण की थी। पूर्व नाम क्षुल्लक व ऐलक दीक्षा में परम सागर जी था। उसके बाद मुनि श्री सुधा सागर जी बने। आप की कठोर तप साधना के बल से आप ने बहुत सारे पंचकल्याणक मंदिरों के जीर्णोद्धार कार्य करवाए। सबसे खास जब जयपुर के सांगानेर में भू-गर्भ से दो बार यक्ष रक्षित रत्नमयी चैत्यालय निकलकर जैन समाज को चमत्कृत किया।</p>
<p>तभी से आप की पहचान जिन शासन के शेर के रूप में पहचानी जाने लगी। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक के रूप में भक्त उन्हें राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान के रूप में जानने लगे।</p>
<p><strong>धर्म श्रवण संस्कृति को महत्वपूर्ण स्थान देता है</strong></p>
<p>गुरुवार को अशोकनगर में सुभाष गंज जैन मंदिर प्रांगण में मंगल अगवानी गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर धर्मसभा में मुनि श्री सुधा सागर महाराज जी ने कहा कि श्रवण संस्कृति व भारत की पवित्र और मंगलमयी संस्कृति विचारों का केन्द्र नहीं आचार का केंद्र है। धर्म विचारों के साथ श्रवण संस्कृति को महत्वपूर्ण स्थान देता है। आचार का माहौल या आचरण के इस श्रवण संस्कृति में इस मंगल बेला भारत अब संस्कारो का रसपान कर रहा है। प्रथम दर्शन शगुन बहुत बड़ा होता है तभी तो आज हजारों जन समुदाय व भक्तों की इस भीड़ में शासन प्रशासन के अधिकारी भी नंगे पैर चल रहे थे। यह बहुत बड़ी बात है दिगंबर जैन समाज के लिए। दिगंबर जैन संत के दर्शन का शगुन कभी भी फेल नहीं होता, यह अच्छा शुभ अवसर है अशोक नगर के लिए। क्योंकि जगत कल्याण के भाव से प्रसार प्रचार करने को यह चातुर्मास में देखने को मिलेगा।</p>
<p><strong>जब देवता भी मुस्कराहट बिखरा रहे है</strong></p>
<p>गुरुवार व गुरु पूर्णिमा के शुभ दिन मंगल अगवानी यह भी तो शुभ संकेत है। आज तक ललितपुर की अगवानी सबसे ज्यादा प्रसिद्ध थी पर आज अशोक नगर ने तक्कर देकर अव्वल आ गए है। जो भी किया गया वह बहुत ही बढ़िया है। जब देवता भी मुस्कराहट बिखरा रहे हैं। आज यहां का वातावरण उत्साह व उमंगता के रूप में प्रवेश के समय हर एक घर के बहार कोई भी समाज के हो उन्होंने अपने अपने घरों के बाहर झाड़ू लगाई कहने लगे कि गुरुदेव आने वाले हैं। इतनी सकारात्मक सोच जब सिख धर्म मुसलमान व अन्य हिन्दु धर्म के अनुयायियों ने भी बढ़चढ़ कर इस नगर अगवानी में हिस्सा लिया। बिना किसी विकल्प के सब कार्य पूर्ण हो गए। इस नगर अगवानी में 33 जेसीबी मशीनों से पुष्प वर्षा और चांदी की 121 थालियों से पाद प्रक्षालन हुआ।</p>
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		<title>मुनि श्री सुधासागर जी का राघौगढ़ में मंगल प्रवेश:  समाजजनों के साथ राजनयिकों के लिए भी पुण्यकारी बना </title>
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		<pubDate>Sun, 29 Jun 2025 10:05:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री सुधासागरजी का पिछले दिनों राघौगढ़ में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। प्रदेश ही नहीं देश के विभिन्न राज्यों के मुनि भक्त यहां उनके दर्शन और पूजन के लिए पहुंचे हुए थे। दिगंबर जैन समाज ने यहां उनके मंगल प्रवेश पर बैंडबाजों, डीजे आदि के माध्यम से भव्यतम अगवानी की। इन सबके बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री सुधासागरजी का पिछले दिनों राघौगढ़ में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। प्रदेश ही नहीं देश के विभिन्न राज्यों के मुनि भक्त यहां उनके दर्शन और पूजन के लिए पहुंचे हुए थे। दिगंबर जैन समाज ने यहां उनके मंगल प्रवेश पर बैंडबाजों, डीजे आदि के माध्यम से भव्यतम अगवानी की। इन सबके बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह के पुत्र विधायक जयवर्द्धनसिंह भी उनकी अगवानी के लिए पहुंचे। <span style="color: #ff0000">राघौगढ़ से पढ़िए, श्रीफल साथी हरिहरसिंह चौहान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>राघौगढ़।</strong> मुनिश्री सुधासागरजी का पिछले दिनों राघौगढ़ में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। प्रदेश ही नहीं देश के विभिन्न राज्यों के मुनि भक्त यहां उनके दर्शन और पूजन के लिए पहुंचे हुए थे। दिगंबर जैन समाज ने यहां उनके मंगल प्रवेश पर बैंडबाजों, डीजे आदि के माध्यम से भव्यतम अगवानी की। महिलाओं ने उनकी अगवानी में रंगोली बनाई तो समाजजनों ने पाद प्रक्षालन कर मुनि चरणों की सेवा कर आशीर्वाद लिया। इन सबके बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह के पुत्र विधायक जयवर्द्धनसिंह भी उनकी अगवानी के लिए पहुंचे। जब मुनिश्री ने उनका हाथ थामकर आगे अपने पग बढ़ाए जो नमोस्तु, नमोस्तु नमोस्तु का जयघोष यहां की धरती को पावन कर गया। जब मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने विधायक सिंह के साथ चलकर कदम ताल की तो विधायक सिंह ने यह भावना प्रकट की।</p>
<p>मुनि श्री सुधा सागर जी का सहारा हैं।<br />
जब गुरु ने हाथ थामा हैं, हर सांस में णमोकार का मंगल जयकारा हैं।<br />
जब गुरु ने हाथ थामा हैं, बस मुनिश्री का ही सहारा हैं।<br />
अब जीवन के अंधियारे में सूर्य का उजाला हैं, गुरु ने हाथ थामा हैं।<br />
विधायक जयवर्द्धनसिंह ने कहा कि मुनिश्री सुधा सागर जी ने जीवन के मार्ग में मेरा हाथ थामकर जो सहारा दिया है, मैं उनके स्नेह, आशीर्वाद के लिए कृतज्ञ हूं। जैसे एक पिता अपने पुत्र का हाथ थामकर चलना सिखाता हैं, ठीक वैसे ही मुनिश्री आपने मेरा हाथ थामकर जीवन मार्ग पर चलने की शिक्षा दी हैं। धन्य भाग्य मेरे, धन्य भाग्य राघौगढ़ के, आपके चरण यहां पड़े। मेरा प्रणाम गुरुवर, नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु ।</p>
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		<title>भगवान और गुरु के सामने हम तो धूल बराबर : मुनि श्री सुधासागर जी ने प्रवचन से दिया दिव्य संदेश  </title>
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		<pubDate>Sat, 24 May 2025 17:10:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सुधासागर जी इन दिनों विहार के दौरान विश्राम के दौरान धर्मसभा को संबोधित कर रहे हैं। उनके दिव्य प्रवचनों से श्रावक-श्राविकाएं धर्म लाभ और पुण्य अर्जित कर रहे हैं। शनिवार को भी उन्होंने धर्म सभा संबोधित की। जबलपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई और शुभम पृथ्वीपुर की यह खबर&#8230; जबलपुर। मुनिश्री सुधासागर जी महाराज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनि श्री सुधासागर जी इन दिनों विहार के दौरान विश्राम के दौरान धर्मसभा को संबोधित कर रहे हैं। उनके दिव्य प्रवचनों से श्रावक-श्राविकाएं धर्म लाभ और पुण्य अर्जित कर रहे हैं। शनिवार को भी उन्होंने धर्म सभा संबोधित की। <span style="color: #ff0000">जबलपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई और शुभम पृथ्वीपुर की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जबलपुर।</strong> मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने शनिवार को धर्मसभा में कहा कि आप लोक व्यवहार में देखिए जितना व्यक्ति बड़ा बड़ा सेठ होता जाएगा, उसकी जिंदगी पराधीन होती जाएगी। कलेक्टर अपनी गाड़ी नहीं चला सकता। उसकी जिंदगी एक ड्राइवर के हाथ में होती है, चूक जाए तो जिंदगी बर्बाद हो सकती है। एक सेठानी की जिंदगी एक 10 हजार रुपये के रसोइए के हाथ में है, वह चाहे तो जहर खिला दे, यदि काश वो गरीब होती तो अपने लिए अपने पेट की रोटी अपने हाथ से बनाकर खा लेती, वो जिंदा रह जाती। बड़े आदमी के बेटे को मां के हाथ की रोटी नहीं मिलती, नौकर के हाथ की मिलती है और एक जिसकी मां गरीब है, उस बेटे को जिंदगी भर मां के दुलार की रोटी मिलती है, प्यार मिलता है, वो स्वाधीन है क्योंकि, गरीब है उसकी मां। आप राष्ट्रपति को देखिए स्वयं की सुरक्षा के लिए एक रायफल भी नहीं रख सकता। कहां अनमोल तुम्हारा गुरु और तुम दो कौड़ी के, उनके चरणों की धूल हो। भगवान और गुरु के सामने हम तो धूल बराबर हैं, यही अहोभाग्य है। जगत पूज्य आचार्य, उपाध्याय, साधु परमेष्ठी की जिंदगी तुम्हारे हाथ में है, उनकी चर्या, उनका रत्नत्रय का पालन तुम्हारे हाथ में है, आहार नहीं होगा तो वो जिंदा नहीं रह पाएंगे।</p>
<p><strong>अहंकार मत करो मुझे किसी की जरूरत नहीं</strong></p>
<p>संसार में क्या पता कब कौन सा जीव काम में आ जाए, मत समझो कि वह चूहा है, कभी जंगल के राजा को भी चूहा की जरूरत पड़ सकती है। अहंकार मत करो कि मुझे किसी की जरूरत नहीं है। एक हवा की जरूरत पड़ जाए, मत कहो कि ये पानी है, एक बूँद को तरस जाओ। मत कहो कि ये चींटी है, चींटी में भी बहुत बड़ी ताकत है, हाथी के भी प्राण ले लेती है, इसलिए धर्म ने आकर कहा कि तू मैत्रीपन, वात्सल्य मना, अनुकंपा व दया कर। सांप बिच्छू पर भी दया कर, वो भी कभी काम आएंगे। पारसनाथ ने नाग नागिन को बचाया था, उसी ने आकर पारसनाथ का उपसर्ग दूर किया था, इसलिए सबसे बना कर चलो क्योंकि तुम्हारी जिंदगी पराधीन है।</p>
<p><strong>आपको धर्म करने की जरूरत है</strong></p>
<p>जहां-जहां तुम्हे ये अनुभव में आ जाए कि ये गलत है लेकिन मुझे करना पड़ेगा, बस आपको धर्म करने की जरूरत है, आपको भगवान की, गुरु की, णमोकार मंत्र की, मंदिर की जरूरत है क्योंकि, आप सत्य को जानते हुए भी स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उसके लिए कोई धर्म की जरूरत नहीं है जो यह जानता है कि यह गलत है, मैं इसी समय छोड़ता हूँ। हिंसा करना सही है या गलत? यदि गलत है तो क्या छोड़ सकते हो, नहीं तो बस आपको जरूरत है मन्दिर की। यदि आप बिना हिंसा की अपनी जिंदगी जी लेंगे तो आपको कोई धर्म करने की, गुरु, मंदिर, किसी चीज की जरूरत नहीं।</p>
<p><strong>हमें जरूरत है सुरक्षा कवच की</strong></p>
<p>आप पाप मान रहे हैं, फिर भी नहीं छोड़ रहे हैं, अब आपको धर्म करने की जरूरत है, नहीं तो तुम बर्बाद हो जाओगे। अन्यथा ये पांचों पाप मिलकर वो दशा करेंगे जो चक्रव्यूह में अभिमन्यु की दशा हुई। इस संसार के चक्र में यदि तुम्हारे साथ देव-शास्त्र-गुरु नहीं है, तुम्हारे पास णमोकार मंत्र नहीं है, तुमने अभिषेक का गंधोदक नहीं लिया, तुमने पूजा पाठ नहीं की, भक्तामर नहीं पढ़ा तो ये आठों कर्म मिलकर ऐसी दशा करेंगे, जैसे अभिमन्यु की मौत हुई थी। तीर्थंकरो को कोई नहीं मार सकता इसलिए उन्हें कोई जरूरत नहीं है णमोकार मंत्र की लेकिन हमें और आपको कोई भी मार सकता है, इसलिए हमें जरूरत है सुरक्षा कवच की।</p>
<p><strong>इज्जत के साथ जी रहे हो मरण भी इज्जत से हो</strong></p>
<p>हर जैनी का जन्म इज्जत के साथ हुआ है, जिनके माँ बाप की इज्ज़त है, शान सौगात है, सारे महाजन है, कम से कम तुम्हारी जिंदगी तुम्हारे हाथ में आए तो इज्जत के साथ जीना, ऐसा कोई कार्य नहीं करना, जिससे तुम्हारी जिंदगी की बेज्जती हो जाये। ऐसे धंधे मत करो, ऐसे कार्य मत करो, जहाँ कुल की परंपरा व जाति के विपरीत जाना पड़े। इज्जत के साथ जी रहे हो तो मरण भी इज्जत के साथ हो। तुम भी पाप करना लेकिन ऐसा पाप मत करना कि गंधोदक लाइलाज हो जाये। णमोकार मंत्र, भक्तामर, शांतिधारा, गुरु का आशीर्वाद लाइलाज हो जाये। कोई तो कहने वाला रहें- मत मारो, इसने धर्म भी किया है।</p>
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