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	<title>मुनि श्री सुधासागरजी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>णमोदय तीर्थ के उदय के साथ मुंगावली को मिलेगी नई पहचान : अथाईखेड़ा गांव में बनेगा भव्य जिनालय  </title>
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		<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 11:43:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कष्ट दुःख असाता को भी समता भाव पूर्वक सहन करने से साता वेदनी कर्म का ही वंद होता है। ऐसा नहीं है कि आप दुख दारुणय कष्टों को समता भाव पूर्वक सहते जा रहे हैं फिर भी कष्ट ही आए समता से आगे चलकर साता का ही उदय आएगा। यह उद्गार मुनि श्री सुधासागरजी महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कष्ट दुःख असाता को भी समता भाव पूर्वक सहन करने से साता वेदनी कर्म का ही वंद होता है। ऐसा नहीं है कि आप दुख दारुणय कष्टों को समता भाव पूर्वक सहते जा रहे हैं फिर भी कष्ट ही आए समता से आगे चलकर साता का ही उदय आएगा। यह उद्गार मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। वे जिज्ञासा समाधान में बोल रहे थे। <span style="color: #ff0000">मुंगावली से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुंगावली।</strong> कष्ट दुःख असाता को भी समता भाव पूर्वक सहन करने से साता वेदनी कर्म का ही वंद होता है। ऐसा नहीं है कि आप दुख दारुणय कष्टों को समता भाव पूर्वक सहते जा रहे हैं फिर भी कष्ट ही आए समता से आगे चलकर साता का ही उदय आएगा। यह उद्गार मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। वे जिज्ञासा समाधान में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि दुःख का यदि हम दुःख ना माने तो सुख जरूर आएगा। ये प्रकृति का नियम है कि यदि कष्ट दुःख आने पर अपना आपा खो दे तो दुःख ही बढ़ेगा सुख नहीं मिल सकता। सुख पाने के लिए तो दुःख को भी हंसी-हंसी में झेलना ही होगा। फिर देखो सुख आपके पीछे पीछे दौड़ा आएगा। मुनिश्री ने कहा कि अब आपके नगर को एक नई पहचान मिलने जा रही है। अब लोग णमोदय तीर्थ के करने आएंगे। इससे मुंगावली को एक नई पहचान मिलेगी।</p>
<p><strong>मंदिर निर्माण में सहयोग करने का किया वादा</strong></p>
<p>इसके पहले जैन समाज अशोक नगर अध्यक्ष राकेश कांसल के साथ अथाईखेड़ा जैन समाज ने मुनिश्री सुधासागरजी से अथाईखेड़ा गांव में नए जिनालय के निर्माण का निवेदन किया। निर्मल जैन ने कहा कि हम वर्षाें से आपके आगमन का इंतजार कर रहे हैं। जिससे मंदिर का निर्माण हो। जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि अथाईखेड़ा वाले आज अशोक नगर की पूरी कमेटी को साथ लाए हैं। ये किशनगढ़ बिजोलिया आबा हर जगह गए। यहां खनियाधाना गोला कोट के बाद आस जगी कि आपके चरण इस ओर बढ़ सकते हैं और आज अथाईखेड़ा की उम्मीद जगी है। आपका मार्ग दर्शन और आशीर्वाद चाहिए। प्रदीप भैया भूमि का अवलोकन कर लें और भूमिका पूरी बन जाए। इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई सहित पूरी कमेटी ने अथाईखेड़ा मंदिर निर्माण में सहयोग का निवेदन किया।</p>
<p><strong>भू-दान के साथ मंदिर निर्माण का लिया संकल्प</strong></p>
<p>मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में नगर के श्रावक श्रेष्ठी निर्मलकुमार अथाईखेडा एवं उनकी जीवन संगनी ने दो बीघा ज़मीन के साथ मंदिर निर्माण के साथ प्रभु की विशाल प्रतिमा स्थापित करने की भावना रखी तो जैन समाज के पूर्व महामंत्री गिरीश अथाईखेडा ने कहा कि हम सब मिलकर भव्य जिनालय को आकार देने के लिए कृतसंकल्पबद्ध हो रहे हैं। आपके चरण चालीस वर्ष पूर्व पड़े। अब अथाईखेड़ा पधारें पर मंदिर निर्माण का संकल्प पूरा कराएं इस दौरान अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, शैलेंद्र श्रागर, पत्रकार अरविंद कचनार, सांसद प्रतिनिधि संजीव भारिल्य, विपिन सिंघई, शैलेंद्र दददा, हेमंत टडैया, मनीष सिंघई, रिंकेश कांसल, मुनेश विजयपुरा, मुन्ना बांझल, टिंकल जैन, पवन जैन अथाईखेड़ा उपस्थित थे।</p>
<p><strong>धर्मशाला के साथ विस्तार भू-भाग व संत शाला हो </strong></p>
<p>इस दौरान मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि जब भी कोई नवीन योजना बनती है तो भविष्य को भी ध्यान में रखकर कार्य करना चाहिए। मंदिर निर्माण वर्षाें में कभी हो पाते हैं। ये निर्मल गिरीश बहुत पुराना भक्त है। अथाईखेड़ा परिवार मंदिर निर्माण के साथ एक अच्छी धर्मशाला व संत निवास का भी निर्माण हो तो सभी आवश्यकताओं की धीरे धीरे पूर्ति हो जाएगी। बहुत दिनों से निवेदन चल रहा है ये कार्य भी जल्दी पूरा हो। मेरी भी भावना आपके साथ शामिल हो रही है। इस दौरान उन्होंने कहा कि स्वयं का आंकलन करते रहना चाहिए तब ही आपका पुरुषार्थ सफल होगा और सफलता भी मिलती चली जाएगी। हमारे मन वचन काय की चेष्टाओ से ही तो कर्मांे का आस्त्रव होता है। इनको रोकने का नाम ही संवर कहलाता है। सांसकारिक दशा में कर्मबंधता नहीं कर्मबंध किया जाता है। जब तक कषाय को नहीं रोकेंगे तो कर्म तो बंधते ही रहेंगे। कषाय को मंद करने के लिए बाहरी वातावरण को तो रोकना ही होगा। अंदर मन वचन काय की चेष्टाओं को भी शांत करना होगा।</p>
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		<title>सतोदय तीर्थ पंचकल्याणक में तीर्थंकर के जन्मोत्सव पर उमड़े श्रद्धालु : शोभायात्रा में रत्नों की बारिश और जयकार के घोष से वातावरण हुआ आनंदमय </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 16:34:40 +0000</pubDate>
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<p><strong>सतोदय तीर्थ सेरोन में मुनि श्री सुधासागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में बालक तीर्थकर के जन्म और भव्य जलूस में श्रद्धा और भक्ति का अद्वितीय दृश्य रहा जहां बालक तीर्थकर के जन्म पर भक्ति का अनूठा नजारा रहा। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> सतोदय तीर्थ सेरोन में मुनि श्री सुधासागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में बालक तीर्थकर के जन्म और भव्य जलूस में श्रद्धा और भक्ति का अद्वितीय दृश्य रहा जहां बालक तीर्थकर के जन्म पर भक्ति का अनूठा नजारा रहा। बालक तीर्थकर की भव्य शोभायात्रा में सौधर्म इन्द्र समेत प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रमुख पात्र विशेष वाहनों से पाण्डुकवन पहुंचे जहां 1008 कलशों से इन्द्रों ने जलाभिषेक किया। प्रातःकाल तीर्थंकर बालक के जन्मोत्सव पर शोभायात्रा अयोध्यानगरी से पांडुक शिला की ओर निकली। जिसमें सौधर्म इन्द्र सतीश जैन बजाज अपनी सची इन्द्राणी अनुपमा के साथ ऐरावत हाथी पर सवार होकर तीनलोक के नाथ तीर्थंकर बालक को आगे-आगे लेकर चल रहे थे। उनके पीछे धर्म ध्वजा लेकर धनकुबेर सिंघई मनोज जैन अपनी धर्मश्री सीमा जैन के साथ रत्न वर्षाते हुए हाथी पर सवार थे। दिव्यघोष और महिला मण्डल स्वयंसेवी संस्थाए जहां उत्साह में भक्ति में सराबोर थी। वहीं प्रतिष्ठा महोत्सव के महायज्ञनायक सुमन विमल जैन, ममता अमित जैन बल्ली डोंगरा भरत चक्रवर्ती, विजय जैन लागौन बाहुबलि, नीतेश जैन विलौआ जखौरा राजा सोम, देवेन्द्र कुमार मंजू जैन राजा श्रयांस, पवन जैन बाबा मार्वल ईशान इन्द्र, समता जैन आनंद जैन साइ‌किल सानत इन्द्र,ब्राहमेन्द्र रुवी जैन संजय मोदी, विधियज्ञनायक राजू जैन मडावरा महामण्डलेश्वर राजीव जैन पीहर साड़ी सहित प्रमुख पात्र विशेष वाहनों में प्रभु भक्ति के साथ जन्मोत्सव की शोभायात्रा में थे। पांडुकशिला पर तीर्थंकर चालक का जलाभिषेक सौधर्म इन्द्र सहित सभी इन्द्रों ने कर पुण्यार्जन किया। इसके पूर्व प्रतिष्ठाचार्य बालब्रहमचारी प्रदीप जैन सुयश के मार्गदर्शन में इन्द्रसभा हुई जिसमें तीर्थंकर बालक के जन्मोत्सव पर बधाईयां हुई। जिसमें उपस्थित जनसमुदाय भक्ति में झूम उठा।</p>
<p><strong>मुनि श्री के सम्मुख जिज्ञासा का समाधान पाया</strong></p>
<p>धर्मसभा में मुनि श्री सुधासागर महाराज ने पंचकल्याणक की महिमा बताई और कहा यह आत्मकल्याण का वह मौका है। जिसमें प्रभु के जन्म को पाकर नारी पर्याय जहां धन्य होती है। ऐसे धार्मिक अनुष्ठानों में हमेशा सम्मलित होकर जीवन में कुछ संकल्प लेने के लिए मुनि श्री से प्रेरित किया। सायंकाल जिज्ञासा समाधान में जहां श्रावकों द्वारा मुनि श्री के सम्मुख अपनी जिज्ञासा का समाधान पाया। वहीं इसके उपरान्त इन्द्रसभा में सौधर्म इंद्र द्वारा तांडव नृत्य, तीर्थंकर वालक का पालना झूला झुलाकर श्रावकों ने पुण्यार्जन किया। वहीं तीर्थंकर बालक की मनोहारी बालक्रीड़ा में नन्हें मुन्हे बच्चे सम्मलित हुए।</p>
<p><strong>महिला मण्डल, स्वयंसेवी संस्थाए सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही</strong></p>
<p>आयोजन की व्यवस्थाओं में सतोदय तीर्थ अध्यक्ष सतीश जैन बजाज, महामंत्री सिंघई मनोज जैन बबीना, विजय जैन लागौन, अजय जैन जखौरा, आनंद जैन साइकिल, संजय रसिया, नीतेश विलौआ, अमितेश जैन, अभय जैन ग्राफिक्स, अनंत सराफ, श्रयांस जैन गदयाना, राजेन्द्र जैन मिठया, पं. जयकुमार जैन, अभय जैन, प्रदीपजैन बरौदा, अवध किशोर जैन, प्रदीप जैन बरोदा, रवि जैन, अरूण जैन, सौरभ जैन पीलू के अतिरिक्त आचार्य विद्यासागर व्यायामशाला, वीर सेवा संघ, जैन मिलन मुख्य शाखा सुपा कलश महिला मण्डल सहित स्वयंसेवी संस्थाए सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही हैं।</p>
<p><strong>तपकल्याणक शनिवार को</strong></p>
<p>मीडिया प्रभारी अक्षय अलया के अनुसार सत्तोदय तीर्थ सेरोन में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान तप कल्याणक में प्रातःकाल प्रभु अभिषेक शान्तिधारा के उपरान्त जन्मकल्याणक पूजन मुनि श्री की दिव्यदेशना के बाद प्रातः 11-30 बजे इन्द्रसभा में बालक अदिकुमार का विवाह, राज्याभिषेक, मुकुटवद्ध राजाओं द्वारा भेंट समर्पण ब्राहमी सुन्दरी को शिक्षा दण्ड व्यवस्थाा नीलांजना नृत्य, युवराज आदिकुमार को वैराग्य भरत वाहुबलि को राज्य सौपना, दीक्षावन की ओर प्रस्थान दीक्षाविध अंकन्यास सायंकाल 6 बजे जिज्ञासा समाधान के बाद सत्येन्द्र शर्मा एण्ड पार्टी द्वारा सांस्कृतिक कार्यकम होगा।</p>
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		<title>सतोदय तीर्थ सेरोन पंचकल्याणक महा महोत्सव को लेकर अपार उत्साह : मूर्ति प्रतिष्ठा के पूर्व भक्ति, चयनित पात्रों के पुण्य की अनुमोदना की </title>
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		<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 11:05:51 +0000</pubDate>
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<p><strong>सतोदय तीर्थ तेरोन में मुनि श्री सुधासागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में आयोजित महा महोत्सव श्रीमजिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर उत्साह उमड़ रहा है। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर</strong>। सतोदय तीर्थ तेरोन में मुनि श्री सुधासागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में आयोजित महा महोत्सव श्रीमजिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर उत्साह उमड़ रहा है। अनेक स्थानों से प्रतिष्ठा के लिए मूर्तियों लेकर भक्तिपूर्वक श्रावक आयोजन स्थल पहुंच रहे हैं। वहीं चयनित पात्रों को सम्मानित कर उनके पुण्य की अनुमोदना श्रावकों द्वारा की जा रही है। आयोजन को लेकर सतोदय तीर्थ एवं दिगम्बर जैन पंचायत के पदाधिकारियों ने मुनिश्री का आशीर्वाद लिया। स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ इन दिनों आयोजन की तैयारियां अन्तिम चरण में चल रही हैं।</p>
<p><strong>आज के अनुसार विकास हो</strong></p>
<p>मध्यान्ह में सतोदय तीर्थ सेरोन पर आयोजन समिति के लिए मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा तीर्थक्षेत्र की सुरक्षा का दायित्व श्रावकों का है। जिसको सुरक्षित करने के लिए समय पर यदि ध्यान नहीं दिया तो हमारी संस्कृति भी सुरक्षित नहीं रहेगी। इसके लिए जरूरी है कि आज के अनुसार विकास हो और हर प्रकार की सुविधाए दर्शनार्थियों को मिले। जिससे श्रावक भक्ति पूर्वक प्रभु की आराधना कर सकें। उन्होंने समाज को प्रेरित किया अच्छी से बनाओ सकारात्मक सोचो और कुछ करो तभी समाज का विकास होगा।</p>
<p><strong>इन्होंने विचार व्यक्त किए</strong></p>
<p>इस मौके पर जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टड़या, महामंत्री आकाश जैन, सतोदय तीर्थे अध्यक्ष सतीश जैन बंटी, मुकेश जैन नेता, विजय जैन लागौन, अशोक जैन दैलवारा,संजय मोदी, सिद्धेश्वर जमोरिया, रवि जैन, अरविन्द जैन बरोदा, संजय रसिया, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, मनोज जैन, विमल जैन पीहर,आनंद जैन साइकिल, अजय जैन जखौरा,अमित जैन डोगरा, नीतेश जैन विलौआ ने अपने विचार व्यक्त किए।</p>
<p><strong>4 से 9 मार्च तक अतिभव्य पंचकल्याण महोत्सव</strong></p>
<p>प्रतिष्ठाचार्य बालबहमचारी प्रदीप जैन सुयश के अनुसार ललितपुर जिले में मुनि श्री सुधासागरजी महाराज के सानिध्य में सतोदय तीर्थ सेरोन में 4 से 9 मार्च तक अतिभव्य पंचकल्याण महोत्सव का शुभारंभ होना सुनिश्चित है। इस पुण्य के अवसर का श्रावक लाभ उठाए। संचालन महामंत्री सिघई मनोज जैन द्वारा किया गया।</p>
<p><strong>प्रतिष्ठा के पूर्व गाजे बाजे के साथ प्रतिमा रवाना</strong></p>
<p>आज सिविल लाइन चांदमारी पर भगवान शांतिनाथ की साढ़े सात फुट पदमासन प्रतिमा सतोदय तीर्थ सेरोन जी प्रतिष्ठा के पूर्व गाजे बाजे के साथ भक्ति के उपरांत रवाना किया। कार्यक्रम की संयोजना शिक्षक राजीव जैन संजीव जैन बजाज परिवार ने की। इस मौके पर प्रमुख रूप से ब्रह्मचारी अनुराग जैन अन्नू,पूर्व पार्षद मोदी पंकज जैन, विजय जैन कल्लू, संयोजक सनत जैन खजुरिया, आदेश जैन रोडा, शिक्षक पुष्पेन्द्र जैन, अकित जैन, सत्येन्द्र जैन गदयाना, अन्नू जैन, प्रफुल्ल जैन प्रमेन्द्र जैन आदि मौजूद रहे।</p>
<p><strong>गोद भराई का आयोजन</strong></p>
<p>जैन अटामंदिर में सतोदय तीर्थ पंचकल्याणक महोत्सव में भगवान के माता पिता की भूमिका निर्वाहन करने वाले श्रावक श्रेष्ठी मालती जैन महेन्द्र सर्राफ मनीषा ज्वैलर्स की गोद भराई का आयोजन हुआ। जिसमें महिला मण्डल की प्रमुख अनीता मोदी, उमा जैन सैदपुर, वीणा जैन, ममता मोहनी, संगीता नायक, साधना जैन, आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।</p>
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		<title>अहंकार में व्यक्ति विनाश को प्राप्त हो जाता है : विश्व शांति महायज्ञ के लिए निलांजन का किया जाएगा चयन </title>
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		<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 14:19:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इस संसार में रावण से बढ़कर कोई धनवान नहीं हुआ तो अहंकार भी उसका उतना ही भारी था लेकिन, जब सामने विश्वास से भरे श्री श्री राम आए तो रावण का भी अहंकार टिक ना सका। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि मुझे विश्वास है कि मेरे पति [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इस संसार में रावण से बढ़कर कोई धनवान नहीं हुआ तो अहंकार भी उसका उतना ही भारी था लेकिन, जब सामने विश्वास से भरे श्री श्री राम आए तो रावण का भी अहंकार टिक ना सका। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि मुझे विश्वास है कि मेरे पति एक दिन आएंगे और मुझे इस दुष्ट के बंधन से मुक्त कराएंगे। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> अहंकार और विश्वास में बहुत अंतर है। अहंकार में व्यक्ति ग़ाफ़िल होकर विनाश को प्राप्त हो जाता है। इस संसार में रावण से बढ़कर कोई धनवान नहीं हुआ तो अहंकार भी उसका उतना ही भारी था लेकिन, जब सामने विश्वास से भरे श्री श्री राम आए तो रावण का भी अहंकार टिक ना सका। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि मुझे विश्वास है कि मेरे पति एक दिन आएंगे और मुझे इस दुष्ट के बंधन से मुक्त कराएंगे। सती सीता के इसी विश्वास ने काम किया और श्री राम ने समुद्र को भी विश्वास के बल पर पुल बांध कर लंका विजय की।तो विश्वास बहुत बड़ी चीज है। इसे बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पृथ्वी पर हम भार है या सौभाग्य है। अपने आप की क्या कीमत है क्या? तुमनें महसूस किया कि मैं बहुत काम का हूं मेरे दिमाग ने ना जाने कितने लोगों की जिंदगी बचाई क्या ऐसा कोई काम किया कि जगत आपकी कीमत कर रहा है। परिवार में तुम्हारी क्या अहमियत है।</p>
<p>आपने ऐसा कोई काम किया कि परिवार के, आपके कुटुम्ब का मान सम्मान बढ़ता चला गया। तुम कहते हो तुम धर्मात्मा हो।तुम्हारे बिना धर्म विकलांग हो जाए क्योंकि, धर्म धर्मात्मा बिना चल नहीं सकता क्या? तुम धर्म के काम किया क्या? तुमने ऐसा धर्म किया कि धर्म आपके कारण धर्म आगे बढ़ ऐसा अंदर से भाव आना चाहिए। यदि आप ने अपनी अच्छाइयां पहचान लिया।</p>
<p><strong>’थोड़ी तुम्हारे प्रतिकूलता हुई कि तुम गुरु बदल लेते हो</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि आप ने गुरु महाराज को हजार नमोस्तु किया और आशीर्वाद नहीं मिला तो आप तपस्वी हो, गुरु ने आपको तपस्या रूप प्रायश्चित दे दिया। हमें मान लेना चाहिए फिर देखना एक दिन ऐसा भी आएगा कि तुम्हारे लिए सदा टाइम मिलता रहेगा। क्या समझ रखा है गुरु को, गुरु तुम्हारी प्रशंसा करेंगे। गुरु ने हमारे काम को सराहा। धर्म बहुत आगे कि बात है। थोड़ी तुम्हारे प्रति कूलता हुई कि तुम गुरु बदल लेते हो। लोग तुम्हारे से बोलने को तरसते है और गुरु बोले नहीं। यदि आप केमन में ये भाव आ गया कि गुरु कभी मेरा अहित नहीं कर सकते। गुरु तो मेरे परम उपकारी हैं तुरंत तुम्हारे मन में भाव आना चाहिए। गुरु तुम्हारे मन में भाव आए कि गुरु मेरे परम हितैषी है वे तुम्हारा बुरा विचार ही कर सकते। रानी लक्ष्मीबाई अपने बेटे को पीठ पर बांधे थी। जब लक्ष्मीबाई ने बेटे से पूछा कि बेटा तुझे ऐसा बेटा बनने के लिए दामोदर बनना पड़ेगा। ऐसा बनने के लिए श्री राम बनना पड़ेगा।</p>
<p><strong>एक साथ चार चार जिनालयों की होगी प्रतिष्ठा</strong></p>
<p>इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि वर्षों बाद नगर में हो रहे श्री मद्जिनेन्द्र पंच कल्याणक महामहोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ में शहर के सबसे प्राचीन गांव मंदिर के साथ ही गंज मंदिर पार्श्वनाथ मंदिर एवं श्री शांतिनाथ त्रिकाल चौबीस जिनालयों की प्रतिष्ठा मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के निर्देशन में होने जा रही है। इस महा महोत्सव निलांजन का चयन किया जाना है। इसके लिए आप अपने नाम हम तक पहुंचा दें। अंतिम निर्णय बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया जी का होगा। इस दौरान जैन अध्यक्ष राकेश कांसल उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींग ूमिल महामंत्री मनोज भैसरवास विपिन सिंघई अन्य प्रमुख जनों ने घटयात्रा कलशों का प्रदर्शन किया।</p>
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		<title>सफल व्यक्ति अपना लोहा मनवा लेता है: मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने सुभाष गंज मैदान में दिया दिव्य संबोधन  </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 13:31:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर को अयोध्या नगरी बनाने लिए अपने हृदय को पवित्र करना होगा। हमारे यहां प्रभु आएंगे। कार्यक्रम में पंच कल्याणक महोत्सव की पत्रिका का विमोचन किया गया। समन्वय ग्रुप घर-घर जाकर पंच कल्याणक के वस्त्र आभूषण दे रहा है। अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; अशोक नगर। हमारे लिए अपनी खुद की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर को अयोध्या नगरी बनाने लिए अपने हृदय को पवित्र करना होगा। हमारे यहां प्रभु आएंगे। कार्यक्रम में पंच कल्याणक महोत्सव की पत्रिका का विमोचन किया गया। समन्वय ग्रुप घर-घर जाकर पंच कल्याणक के वस्त्र आभूषण दे रहा है। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर।</strong> हमारे लिए अपनी खुद की अहमियत पहचान चाहिए। तुम अपनी दृष्टि में क्या हो जब तक व्यक्ति अपना स्वयं का मूल्यांकन नहीं करता। उसे अपनी अहमियत का एहसास ही नहीं होता। आपकी कोई कद्र नहीं होगी। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में धर्मसभा में मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दुनिया मेरी प्रतिभा का मूल्यांकन करें। दुनिया मेरी लायकी को समझे। दुनिया लायक को नालायक बनाने में लगी है किसी को नहीं पड़ी कि वह आपके लायकी का ढोल पीटे यहां तो लोग ना लगाने में लगे हैं लायक को भी नालायक बताते हुए नहीं चूकते तुम्हारे लिए अपनी लायकी दुनिया को बतानी होगी सफल भी वही होता है, जो अपना मूल्यांकन स्वयं कर लेता है और दुनिया से अपना लोहा मनवा लेता है। इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि हमें अपने नगर को अयोध्या नगरी बनाना है। हमें अपने आप को पवित्र पावन बनना है। तीन लोक के नाम हमेशा से ही परम पावन अयोध्या नगरी में जन्मते हैं। यहां की प्रजा का हृदय अत्यंत पावन होता है हमें भी इस धरती पर परम पिता परमेश्वर को बुलाना है। प्रभु आए तो उसके पहले हमारा नगर दुनिया की सर्वश्रेष्ठ भूमि अयोध्या जी बन जाए। इसके लिए हमें अभी से प्रयास करना होगा। हम अपने आप को जितना पवित्र और पावन बनाएं। उतना ही चमत्कार देखने को मिलेगा।</p>
<p><strong>मुख्य पत्रिका का विमोचन किया </strong></p>
<p>इस दौरान श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ एवं गजरथ महोत्सव की मुख्य पत्रिका का विमोचन जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी, संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई श्रेयांस घैला, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास, विपिन सिंघई समन्वय ग्रुप के साथियों ने किया। महोत्सव के वस्त्र आभूषण धोती दुपट्टा सहित अन्य आभूषण समन्वय ग्रुप के सभी सदस्यों घर-घर पहुंच कर देने का संकल्प लेकर मुनिश्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>ऊंची दुकान और फीके पकवान जैसी स्थिति से बचें</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि दुनिया मेरी जिंदगी का मूल्यांकन करें मैं बहुत मूल्यवान वस्तु हूं। जब में मूल्यवान कहता है तो ऐसा ना हो कि तुम्हें मूल्यांकन समझाकर तुम्हारे यहां कोई आए ही ना इसलिए आचार्य श्री कुंदकुंद स्वामी ने कहा कि जहां उन्होंने कहा था कि तू भगवान चैतन्य घन स्वरूप आत्मा हूं। ऐसा सुनकर लोगांे ने आपकी दुकान पर आना ही बंद कर दिया। अपनी वस्तु की कीमत घोषित करने के पहले जरा बाजार के भाव को देख तुम अपने आप को भगवान घोषित कर रहे हो। जरा अपने आप को देखो पहले भगवान का स्वरूप देखो, भगवान के लक्षण देखो, ऊंची दुकान और फीके पकवान जैसी स्थिति नहीं बनाना, हमारे पास राग द्वेष बहुत है। यदि तुम्हारे पास राग द्वेष की एक भी कड़िका है तो तुम अपने आप को प्रभु के समकक्ष नहीं हो सकते। मार्ग तो यही है यही से चल कर आप भगवान बन सकते हैं लेकिन, इसके लिए आपको आप को झोंकना होगा।</p>
<p><strong>’संसार में तुम्हें कोई छोड़ना नहीं चाहता’</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि संसार में तुम्हें कोई छोड़ना नहीं चाहता। आप अपने बेटे को थोड़ी सी छूट दे दी और यदि उसने छूट का फायदा उठाकर जो तुम्हारे लिए जो नहीं करना था। वह कर दिया। पिता का कर्त्तव्य है कि वह अपने बेटे को पतन की ओर ना धकेले। सही मार्ग तो है कि पिता बेटे को सही राह दिखायें कुछ बेटे ऐसे भी होते हैं, जिनकी पहचान बेटों से होती है। आज ये मंच पर बैठे हैं। ऐलक जी महाराज आपको देखकर कैसा लग रहा है। हम ख़ुद घर से भागकर आए आप ही बताइए भैया आपको कैसा लग रहा है। यही तो वह बात है कि दुनिया यहां दीवानी हो कर आती है और खुशी-खुशी जाती है।</p>
<p><strong>बढ़े तुम्हारी प्रसंशा करेंगे आपको प्रशंसा से दूर रहना है</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि बेटे तुम्हारी प्रसंशा करेंगे आपको प्रशंसा में नहीं पड़ना है। यदि आप अपनी प्रसंशा सुनकर छोटे आदमी थोड़ी प्रशंसा सुनकर भूलकर कूप्पा हो जाए तो समझ लेना। अब आपका विकास रुक गया। सारी दुनिया आपकी प्रशंसा करें तो फूल जाना। यदि बड़े आपकी प्रशंसा करें तो आप अपनी नजर नीची कर लेना एक विद्वान के चार बेटे थे सुंदर गुणवान सुशील थे लेकिन, तोतली बोली थी। उनके विवाह नहीं हो रहे थे। उनके पिता ने विवाह प्रस्ताव लेकर आने वालों के सामने मौन रहने को कहा लेकिन, प्रशंसा सुनकर वह बोल पड़े हम विफल क्यों होते है। उसमें सबसे बड़ी हम अपनी प्रशंसा सुनकर भूलकर मद मस्त नहीं होना है। अपने मन में प्रशंसा का भाव आता है यही से आपकी प्रगति रुक जाती है।</p>
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		<title>महान आत्माएं निंदा भी करते हैं तो बहुत संभलकर: मुनि श्री सुधासागरजी महाराज के सान्निध्य में नवीन वेदी पर हुई जगत कल्याण की कामना के लिए महाशांति धारा </title>
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		<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 13:54:29 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>महान आत्माएं निंदा करते हुए भी सुधारने का भाव रखता है क्योंकि, निंदा का उद्देश्य कभी किसी को नीचे गिरना नहीं होता वल्कि उसे पुनः अपने मार्ग में स्थित करना होता है और होना ही चाहिए। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में चल रहे स्नातक सम्मेलन में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> महान आत्माएं निंदा भी करते हैं तो भी बहुत संभालकर और बहुत अच्छी भाषा में करते हैं निंदा कोई बुरी चीज नहीं है महान आत्माएं निंदा करते हुए भी सुधारने का भाव रखता है क्योंकि, निंदा का उद्देश्य कभी किसी को नीचे गिरना नहीं होता वल्कि उसे पुनः अपने मार्ग में स्थित करना होता है और होना ही चाहिए। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में चल रहे स्नातक सम्मेलन में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यदि निंदा का उद्देश्य किसी को मार्ग से भटकाना मार्ग से ही बेदखल करना हो गया तो वह कभी सुधर नहीं पाएगा।</p>
<p>शुद्ध भाव नहीं शुद्ध भोजन करना अनिवार्य कहा गया है। इसमें भी देने वाला शुद्ध हो और जिस स्थान पर भोजन दिया जा रहा है। जहां बन रहा है, वह भी शुद्ध होने का उल्लेख किया गया। ये सब चीजें तो अनादि अनंत से चल आ रही है इसलिए तो कहा गया है जैसा खावें अन्य वैसा होवे मन। अन्न से मन को जोड़ा गया है। मन की शुद्धि के लिए भी भोजन की शुद्धि अनिवार्य है।</p>
<p><strong>नवीन वेदी पर भगवान विराजते ही हुईं महा शांतिधारा</strong></p>
<p>आचार्य श्री विद्यासागर भवन में नवीन भव्य वेदी पर मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के साथ एवं प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के कुशल निर्देशन में गंज मंदिर से भगवान का श्री विहार हुआ और प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के मंत्रोच्चार के बीच भगवान को नवीन वेदी पर विराजमान किया गया। इस दौरान आज जगत कल्याण की कामना के लिए महा शांतिधारा की गई। जिसका सौभाग्य रिषभ कुमार, सिद्धार्थ कुमार सोगानी, जैन समाज कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री विजय धुर्रा देवेंद्र कुमार, पवनकुमार धुर्रा, बावा मेडिकल परिवार के साथ अन्य प्रमुखजनों को मिला। इस दौरान सैकड़ों भक्तों ने भगवान के अभिषेक का सौभाग्य प्राप्त किया। इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई राजेंद्र अमन, मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारल्लिय, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार ऑडिटर संजय के टी थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन, टींगू मिल, महामंत्री मनोज भैसरवास सहित अन्य प्रमुख जन विशेष रूप से उपस्थित थे।</p>
<p><strong>खुले अधिवेशन में युवा मनीषियों रखेंगे अपने विचार</strong></p>
<p>इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि हम सब भारत वर्ष से पधारे युवा मनीषियों को सुन रहे हैं। इनके शोध परख लेखों को सुनकर सभी का मन गदगद हो रहा है। कल हम सब इन युवा मनीषियों को खुले अधिवेशन में सुन सकेंगे और इनके अंदर जो आने वाली चुनौतियां हैं। उनके समाधान का भाव है, उसे देखेंगे साथ ही श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी द्वारा सभी युवा विद्वानों और विदुषियों का बहुमान किया जाएगा। कई दौरान ये मनीषी अपने वर्षों तक किए गए गहन चिंतन मनन को मुनि पुंगव श्रीसुधासागर जी महाराज के सानिध्य में रखेंगे। ये गौरव भी हमारे नगर को मिलने जा रहा है।</p>
<p><strong>मन के भटकाव को रोकने के लिए ध्यान किया जाता है </strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि धर्म ध्यान के साथ ही आर्त ध्यान और रौद्र को भी ध्यान में लिया गया। वैसे आरत ध्यान, रोद्र ध्यान को अच्छा नहीं माना जा सकता। ज्ञान और ध्यान का प्रसंग है ज्ञान के साथ ध्यान किया जाता है तो वह परिणाम देता है। उन्होंने कहा कि धनको ही धनी नहीं कहा जा सकता। धनी धन के बिना भी हो सकता है। धन का नाम धनी ज्ञान के बिना ज्ञाता नहीं है। ध्यान चारित्र की पर्याय है ज्ञान नहीं है आनंद लेने वाला ज्ञान है या ज्ञानी छहडाला कार ने ज्ञानी के छिन माह विषय शब्द आया है। इस प्रकार ये आध्यात्मिक गुित्थयां कहलाती है। आध्यात्मिक एक पानक है सम्यक दर्शन ज्ञान चारित्र को ध्यान कहा गया है इसमें मात्र आनंद की अनुभूति होती है परम पूज्य आचार्य श्री कुंद कुंद स्वामी द्वारा विरचित श्री अष्टपाहुड जी ग्रान्थ मन के भटकाव को रोकने के लिए ध्यान किया जाता है योग जो हो रहें हैं वह मन को एकाग्र कराने का मार्ग है ध्यानाभाष है ध्यान अलग चीज नहीं है व्यक्ति को अनैतिकता से बचाने के लिए कोई कार्य करता है तो ठीक है।</p>
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