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	<title>मुनि श्री साध्यसागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>मुनि श्री साध्यसागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि श्री साध्यसागर जी को श्रीफल भेंट करने होंगे रवाना : गुरु भक्तों की टोली बस से शनिवार को रवाना होकर चातुर्मास के लिए करेगी निवेदन </title>
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		<pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:42:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बीसपंथी मंदिर, मल्हारगंज से आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के आज्ञानुव्रती शिष्य मुनि श्री साध्यसागर जी को 2026 का चातुर्मास इंदौर में बीसपथी मंदिर में हो। श्रीफल समर्पित करने के लिए शनिवार को इंदौर से गुरु भक्तों की टोली सुबह 6 बजे बस से रवाना होगी। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। बीसपंथी मंदिर, मल्हारगंज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बीसपंथी मंदिर, मल्हारगंज से आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के आज्ञानुव्रती शिष्य मुनि श्री साध्यसागर जी को 2026 का चातुर्मास इंदौर में बीसपथी मंदिर में हो। श्रीफल समर्पित करने के लिए शनिवार को इंदौर से गुरु भक्तों की टोली सुबह 6 बजे बस से रवाना होगी। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> बीसपंथी मंदिर, मल्हारगंज से आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के आज्ञानुव्रती शिष्य मुनि श्री साध्यसागर जी को 2026 का चातुर्मास इंदौर में बीसपंथी मंदिर में हो। श्रीफल समर्पित करने के लिए शनिवार को इंदौर से गुरु भक्तों की टोली सुबह 6 बजे बस से रवाना होगी।</p>
<p>राजेश जैन दद्दू ने बताया कि भोपाल एवं सीहोर के मध्य जहां भी मुनिश्री विराजमान होंगे। वहां पहुंचकर चातुर्मास के लिए श्रीफल अर्पित किया जाएगा। परम गुरु भक्त धर्मेन्द्र पाटनी, राजेश पांड्या, अजयपाल टोंग्या, मनमोहन झांझरी, भरतकाला ,अजय रावका ने समाज से आह्वान करते हुए कहा कि अधिक से अधिक संख्या में गुरु भक्त श्रद्धालुगण इस पुण्य अवसर का लाभ लें।</p>
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		<title>आचार्यश्री विरागसागर जी को मुनिराजों ने प्रस्तुत की विनयांजलि: भक्ति भाव से आचार्यश्री का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया  </title>
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		<pubDate>Mon, 03 Nov 2025 11:39:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। पद विहार कर पधारे उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी ससंघ एवं यहां चातुर्मासरत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी एवं मुनि श्री साध्यसागर जी सान्निध्य में आचार्यश्री विराग सागर जी का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस सोमवार को पूर्ण भक्ति भाव से मनाया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। पद विहार कर पधारे उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी ससंघ एवं यहां चातुर्मासरत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी एवं मुनि श्री साध्यसागर जी सान्निध्य में आचार्यश्री विराग सागर जी का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस सोमवार को पूर्ण भक्ति भाव से मनाया गया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> तप, साधना एवं त्याग के लिए जाने वाले इस नगर में आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। नगर में पद विहार के पधारे उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी महाराज ससंघ एवं नगर में चातुर्मास रत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी एवं मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज के पावन सानिध्य में आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस सोमवार को पूर्ण भक्ति भाव एवं हर्षाेल्लास से मनाया गया। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर एवं आचार्यश्री शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में श्री जी का पंचामृत अभिषेक किया गया। जिसमें पूर्ण सुगंधित कलश करने का सौभाग्य सुधीरकुमार प्रशांतकुमार चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा करने करने का सौभाग्य श्रीकांत जटाले परिवार को प्राप्त हुआ। इस क्रम में उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी महाराज एवं युगल मुनिराज के सानिध्य में आचार्य छत्तीसी विधान रचाया गया। जिसमें उपाध्याय मुनि श्री द्वारा प्रत्येक अर्घ्य का विशेष महत्व बताया गया। कुल 36 अर्घ्य समर्पित किए गए। उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य खुशकवर बाई सुरेशचंद पांड्या अमर ज्योति बस परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p>मुनि श्री निर्वेद सागर जी महाराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विपिनकुमार संजयकुमार बदूद परिवार तथा मुनि श्री साध्य सागरजी महाराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विशाल वैभव सराफ परिवार को एवं मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विशाल कुमार बारिश कुमार बदूद परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर विराजमान मुनि श्री निर्वेद सागर जी, मुनि श्री साध्य सागर जी, मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी ने आचार्य श्री विरागसागर जी के प्रति अपनी विनयांजलि समर्पित की।</p>
<p><strong>मुनिराजों ने विनयांजलि में किया गुरु का गुणानुवाद </strong></p>
<p>उपाध्याय मुनि श्री ने अपने गुरु के प्रति विनयांजलि में कहा कि उन्होंने सभी मुनिराजों के साथ आनंद और वात्सल्य के साथ रहना सिखाया है। इस युग प्रतिक्रमण करवाने वाले आचार्य परमेष्टी थे तो वो आचार्य विराग सागर जी महाराज थे। जिन्होंने प्राचीन परंपराओं का उद्वहन पुनः किया है जिससे संघ इकट्ठा होता था। एक बात ध्यान रखना जो काम धन भी नहीं करता वो काम आचार्य श्री ने करके दिखाया। आप ने छोटे से छोटे और बड़े से बड़े दीक्षा लेने वाले उपकारियों पर उपकार किया। वास्तव में वो बुजुर्गाें के देवता कहलाते थे। आप ने कहा कि समाधि मरण कैसे किया जाता है, आचार्य पद कैसे छोड़ा जाता है, संघ व्यवस्थित कैसे किया जाता है, अगर किसी से सीखना हो तो ये आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज ने कर दिखाया। आचार्य भगवन के गुण भी अनंत है, आप के उपकार भी अनंत है। इस अवसर पर प्रशांत चौधरी, कमल केके ब्रह्मचारी पारस भैया, अर्पित भईया द्वारा सुमधुर भजन एवं भक्तिकर सभी को मंत्र मुक्त कर दिया। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
<p><strong>उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी किए केशलोच </strong></p>
<p>दिगंबर साधु समस्त परिग्रह से रहित होते हैं तथा अपने पास केवल एक मयूर पंख से बनी पिच्छी रखते हैं अतः बालों को हटाने के लिए वे उस्तरा आदि अपने पास नहीं रख सकते व ना ही इनका प्रयोग कर सकते और चूंकि साधु स्वावलंबी होते हैं और उनकी चर्या सिंह के समान होती है। इसलिए बाल हटाने के लिए किसी का सहारा भी नहीं लेते। वे अपने हाथों से बालों को नोंच कर उखाड़ते हैं। इस क्रिया को केशलोच कहते हैं। वैसे केशलोच परिषह सहन करने के लिए भी जरूरी होता है। दिगंबर मुनि महाव्रती होते हैं और 22 परिषह को सहज ही सहन करते हैं तथा 28 मूल गुणों का पालन करते हैं। जिसमंे हाथों से केशलोच करना एक आवश्यक क्रिया है और चूंकि केशलोंच करने से भी अनेक परजीवी छोटे जीवों की विराधना होती है। जिसके प्रायश्चित स्वरूप मुनि उस दिन निराहार रह कर उपवास भी रखते हैं। अतः दिगंबर मुनि अहिंसा की जीवंत छवि होते हैं जिनसे किसी भी जीव को किसी तरह का कोई भय नहीं रहता है। मुनि स्वयं भी अभय होते हैं और दूसरों को भी अभय ही प्रदान करते हैं।</p>
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		<title>चातुर्मास कलश वितरण निजानंद ज्ञानामृत वर्षायोग योग का समापन: मुनिद्वय के सान्निध्य में चातुर्मास निष्ठापन का कार्यक्रम हुआ  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Oct 2025 13:29:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में चातुर्मासरत मुनिद्वय मुनिश्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज के ज्ञान वर्धक निजानंद ज्ञानामृत वर्षायोग की सफल निष्ठापन क्रियाएं संपन्न कर चातुर्मास की समाप्ति पर कलश वितरित किए गए। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; सनावद। नगर में चातुर्मासरत मुनिद्वय मुनिश्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में चातुर्मासरत मुनिद्वय मुनिश्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज के ज्ञान वर्धक निजानंद ज्ञानामृत वर्षायोग की सफल निष्ठापन क्रियाएं संपन्न कर चातुर्मास की समाप्ति पर कलश वितरित किए गए। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> नगर में चातुर्मासरत मुनिद्वय मुनिश्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज के ज्ञान वर्धक निजानंद ज्ञानामृत वर्षायोग की सफल निष्ठापन क्रियाएं संपन्न कर चातुर्मास की समाप्ति पर कलश वितरित किए गए। नगर में पिछले 4 माह से निरंतर धर्म प्रभावना कर रहे मुनिद्वय तपस्या तपोनिधि मुनिश्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं वात्सल्य ऋषि मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज के ज्ञान वर्धक निजानंद ज्ञानामृत वर्षायोग योग की समाप्ति पर श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में स्थापित वर्षा योग मंगल कलशों का मंत्र अनुष्ठान कर पुण्यशाली कलश धारकों को कलश वितरित किए गए। इस अवसर पर मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज द्वारा 108 लौंग एवं कपूर से आहुतियां देकर मंत्र अनुष्ठान संपन्न करवाया।</p>
<p>जैसा कि ज्ञात है युगल मुनिराज के प्रथम कलश प्राप्त करने का सौभाग्य मुकेशकुमार प्रेमचंद जैन शुभम् पेप्सी परिवार एवं द्वितीय कलश पवन कुमार कातोरा परिवार एवं तृतीय कलश लोकेंद्र कुमार जैन परिवार एवं महोदधी साध्य सिद्धि कलश श्री पवनकुमार विनीश कुमार गोधा परिवार सनावद को प्राप्त हुआ। साथ ही 62 अन्य कलश पुण्यारजक परिवारों को मुनि श्री ने अपने हस्त कर कमलों से स्वास्तिक और तिलक कर सौंपे। इस अवसर सभी समाजजनों अपनी उपस्थिति दर्ज करवा कर पुण्य संचय किया।</p>
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