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	<title>मुनि श्री समत्व सागरजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>मुनि श्री समत्व सागरजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>कारीटोरन पंचकल्याणक के प्रमुख पात्र हुए चयनित : मुनि श्री समत्व सागरजी ससंघ के सानिध्य में हुआ भव्य वेदिका शिलान्यास </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 12:09:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[11 फिट उत्तुंग खड्गासन चौबीसी]]></category>
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					<description><![CDATA[शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन, ललितपुर (उत्तरप्रदेश) में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के आशीर्वाद से मुनि श्री समत्व सागर जी एवं मुनि श्री शील सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में 7 से 13 मार्च तक होने वाले श्री मज्जिनेंद्र सहसकूट 11 फिट उत्तुंग खड्गासन चौबीसी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन, ललितपुर (उत्तरप्रदेश) में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के आशीर्वाद से मुनि श्री समत्व सागर जी एवं मुनि श्री शील सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में 7 से 13 मार्च तक होने वाले श्री मज्जिनेंद्र सहसकूट 11 फिट उत्तुंग खड्गासन चौबीसी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव की वेदिका शिलान्यास रजनेशकुमार अवशेषकुमार ने किया। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन, ललितपुर (उत्तरप्रदेश) में 25 जनवरी को आचार्य श्री विराग सागर जी के पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के आशीर्वाद से मुनि श्री समत्व सागर जी एवं मुनि श्री शील सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में आगामी 7 से 13 मार्च तक होने वाले श्री मज्जिनेंद्र सहसकूट 11 फिट उत्तुंग खड्गासन चौबीसी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव की वेदिका शिलान्यास रजनेश कुमार अवशेष कुमार ने किया। प्रतिष्ठाचार्य पंडित महेश कुमार डीमापुर के निर्देशन में विधानाचार्य ऋषभ कुमार बड़ागांव ने धार्मिक विधि विधान से संपन्न कराया। बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया पुण्यांश ने मंच संचालन किया। मुनि श्री का पाद प्रक्षालन नाभि मरु देवी परिवार पंडित महेश कुमार डीमापुर ने किया।</p>
<p>मुनि श्री समत्व सागरजी ने बतलाया कि पंचकल्याणक में प्रमुख पात्र बनने का जो महत्व है वह वचन गम्य में नहीं है। अनुभव गम्य है, जैसे मीठा का स्वाद कहकर नहीं मीठा खाकर अनुभव किया जा सकता है। वैसे ही वह है पात्र बनकर अनुभव प्राप्त किया जा सकता है।</p>
<p><strong>प्रमुख पात्र चयन प्रक्रिया</strong></p>
<p>सौधर्म इन्द्र मुकेश कुमार-मीना जैन दमोह, कुबेर सवाई सेठ डॉ. विजयकुमार सुधा कारीटोरन, महायज्ञ नायक डॉ. श्रेयांश सुमन ककरवाहा, चक्रवर्ती डॉ. अंकुर-पायल मुंबई, कारीटोरन, राजा श्रेयांश पं माधव शास्त्री रश्मि शाहगढ़ को बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। स्मरण रहे पं महेश कुमार डीमापुर-सुखवती देवी को माता-पिता बनने का सौभाग्य पहले ही प्राप्त हो चुका है।</p>
<p><strong>यह रहे मौजूद </strong></p>
<p>इस अवसर पर मेला अध्यक्ष मुंन्ना लाल जेन अभिलाषा, अनिल जैन अंचल,अजित जैन खजुरिया, डॉ. विजय कुमार कारीटोरन, डॉ. श्रेयांशकुमार ककरवाहा, शिखरचंद भेलसी, अनंदीलाल लुहर्रा, पदम सेठ शाहगढ़ सीएमओ, पं माधव शास्त्री, राजाराम समर्रा, प्रेमचंद ककरवाहा, इंद्रकुमार ककरवाहा, सेठ विजय शाहगढ़, वरिष्ठ पत्रकार अक्षय अलया, मनोज जैन, अनंत सराफ ललितपुर, राजेश रागी बक्सवाहा, राजेश फणींद बड़ागांव प्रमुख रूप से उपस्थित थे।</p>
<p><strong>1635 वर्ष प्राचीन है क्षेत्र</strong></p>
<p>इसे बुंदेलखंड का सबसे प्राचीन जीवंत तीर्थ क्षेत्र कहा जा सकता है।</p>
<p>700 प्रतिमाओं कीप्राण प्रतिष्ठा होगी 11 फिट खड्गासन अदृभुत 26 प्रतिमाएं, उपरत्नों की 31 प्रतिमाएं, संगमरमर की 24 उत्तंग शिखर प्रतिमाएं सहित 700 प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होगी। इतना उत्तंग एवं विस्तृत जिनालय, इतना ऊंचा शिखर संभवतः अन्यत्र नहीं है इस तरह की संरचना बहुत कम स्थानों पर देखने को मिलती है इस निर्माण में शास्त्री एवं तकनीकी बिंदुओं पर भली भांति दृष्टिपात किया गया है। तीन-चार किलोमीटर दूर से ही नवनिर्मित शिखर की छटा देखते ही बनती है।</p>
<p><strong>ऐसी अद्भुत प्रतिमाएं संपूर्ण उत्तर भारत में तो हैं ही नहीं</strong></p>
<p>जहां प्राचीन जिनालय में विराजमान प्रतिमाएं हृदय में श्रद्धा भर देती हैं। जिससे हृदय में एक अद्भुत ऊर्जा का संचार होता है। नवीन जिनालय में खड़ी हुई 11 फिट की खड्गासन प्रतिमाएं बरबस ही चित्र का हरण कर लेती है। यह प्रतिमाएं आचार्य यति वृषभ स्वामी द्वारा रचित तिलोम पण्णति एवं आचार्य बसु बंधी स्वामी तथा उमा स्वामी द्वारा रचित श्राविकाचार्य में वर्णित प्रतिमाओं के स्वरूप के आधार पर बनाई गई हैं और ऐसी अद्भुत प्रतिमाएं संपूर्ण उत्तर भारत में तो हैं ही नहीं। दक्षिण भारत में भी ऐसी परिकल सहित प्रतिमाओं का मिलना असंभव जैसा है।</p>
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		<title>मुनिश्री समत्व सागरजी ने कहा प्राचीन क्षेत्र के संरक्षण से ही संस्कृति सुरक्षित: पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रमुख पात्रों का चयन 25 जनवरी को  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/munishri_samatva_sagarji_said_that_culture_can_only_be_preserved_through_the_protection_of_ancient_sites/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 Jan 2026 12:55:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[विकासखंड मडावरा अन्तर्गत शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी महाराज के आशीर्वाद एवं मुनि श्री समत्व सागरजी, मुनिश्री शीलसागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव की व्यवस्थाओं को क्षेत्रीय जैन समाज ने अंतिम रूप दिया। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। विकासखंड मडावरा अन्तर्गत शांतिनाथ दिगंबर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>विकासखंड मडावरा अन्तर्गत शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी महाराज के आशीर्वाद एवं मुनि श्री समत्व सागरजी, मुनिश्री शीलसागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव की व्यवस्थाओं को क्षेत्रीय जैन समाज ने अंतिम रूप दिया। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर</strong>। विकासखंड मडावरा अन्तर्गत शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी महाराज के आशीर्वाद एवं मुनि श्री समत्व सागरजी, मुनिश्री शीलसागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव की व्यवस्थाओं को क्षेत्रीय जैन समाज ने अंतिम रूप दिया। आगामी 25 जनवरी को पंचकल्याणक वेदिका शिलान्यास एवं प्रतिष्ठा महोत्सव के पात्रों का चयन मुनिसंघ के सानिध्य में होना प्रस्तावित है। मुनि श्री समत्व सागरजी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि अतिशय क्षेत्र पर पंचकल्याणक की महिमा अपने आप में अद्वितीय होती है। उन्होंने कहा प्राचीन क्षेत्र का संरक्षण जरूरी है, तभी हमारी संस्कृति सुरक्षित रहेगी। जहां श्री शांतिनाथ भगवान का सातिशय है। यहां के पंचकल्याणक तो अतिशयकारी होगे ही साथ ही इसमें सम्मलित होने वाले पात्र अपने आप में सौभाग्यशाली रहेंगे। मुनि श्री ने क्षेत्र की प्राचीनता के दर्शन कर प्राचीन क्षेत्र के संरक्षण के लिए समाज का आह्वान किया और कहा कि प्राचीन क्षेत्र हमारी समाज की धरोहर है। धर्मसभा का मंगलाचरण मुनिश्री शीलसागरजी महाराज ने प्रभु मक्ति चितवन से किया।</p>
<p><strong>स्वयंसेवी संस्थाएं आयोजन की भव्यता के लिए एकजुट हैं</strong></p>
<p>प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के अध्यक्ष मुन्नालाल जैन सैदपुर की अध्यक्षता एवं मुख्य सलाहकार इंजी अनिल जैन अंचल के मुख्य आतिथ्य में हुई बैठक में प्रतिष्ठा महोत्सव के निर्देशक पं. महेश जैन डीमापुर ने आगामी 7 से 13 मार्च तक होने वाले महामहोत्सव के संबंध में बताया कि 11 फिट की खडगासन चौबीसी की प्रतिष्ठा अतिशय क्षेत्र पर भव्यता के साथ होने जा रही है। जिसमें मुख्य प्रतिष्ठाचार्य पं. कमल कुमार कमलांकुर भोपाल रहेंगे। प्रतिष्ठा महोत्सव के सौभाग्यशाली पात्रों को लेकर क्षेत्रीय जैनसमाज में उत्साह है और स्वयंसेवी संस्थाएं आयोजन की भव्यता के लिए एकजुट हैं। महोत्सव के महामंत्री शिखरचंद जैन भेलसी ने बताया कि महोत्सव में देश के दूरांचलों से जहां श्रेष्ठीजनों ने अपनी स्वीकृतियां दी है। वहीं शासन प्रशासन के राजनेताओं के पहुंचने की संभावना है।</p>
<p><strong>इन्होंने विचार व्यक्त किए </strong></p>
<p>इस मौके पर स्वागत अध्यक्ष अजित जैन खजुरिया, शिव प्रसाद अमरमउ, माधव प्रसाद शास्त्री शाहगढ़, डॉ. श्रयांस जैन ककरवाहा, अक्षय अलया, मनोज जैन मीडिया, अशोक जैन कान्तिकारी, राकेश जैन केशरिया बडागांव, वीके जैन मढ़ावरा, डॉ. शिखरवंद जैन सिलौनिया, आनंदीलाल जैन लुहर्रा, देवेंद्र सर्राफ, भरत जैन धुवारा,‌ नरेंद्र सेठी, डॉ. विजय जैन सिंघई सुरेश कुमार जैन टीकमगढ़, मुकेश जैन सैदपुर आदि ने विचार व्यक्त किए।</p>
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