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	<title>मुनि श्री समता सागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>मुनि श्री समता सागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि श्री समता सागर संघ का सतना की ओर मंगल विहार : प्रभाषगिरी क्षेत्र पर समवसरण मंदिर का शिलान्यास संपन्न </title>
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		<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 06:43:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पावन प्रभाषगिरी पर्वत पर, जहां भगवान पदमप्रभु को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई और दिव्य समवसरण की रचना हुई थी, उस ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक स्थल पर क्षेत्र कमेटी द्वारा भव्य समवसरण मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया। मुनि श्री समतासागर महाराज, मुनि श्री पवित्रसागर महाराज, मुनि श्री पूज्यसागर महाराज, मुनि श्री अतुलसागर महाराज, ऐलक श्री निश्चयसागर, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पावन प्रभाषगिरी पर्वत पर, जहां भगवान पदमप्रभु को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई और दिव्य समवसरण की रचना हुई थी, उस ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक स्थल पर क्षेत्र कमेटी द्वारा भव्य समवसरण मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया। मुनि श्री समतासागर महाराज, मुनि श्री पवित्रसागर महाराज, मुनि श्री पूज्यसागर महाराज, मुनि श्री अतुलसागर महाराज, ऐलक श्री निश्चयसागर, ऐलक श्री निजानंदसागर एवं क्षुल्लक श्री संयमसागर जी ससंघ के सानिध्य में भव्य समवसरण मंदिर का शिलान्यास समारोह अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कौशाम्बी नगरी</strong>। पावन प्रभाषगिरी पर्वत पर, जहां भगवान पदमप्रभु को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई और दिव्य समवसरण की रचना हुई थी, उस ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक स्थल पर क्षेत्र कमेटी द्वारा भव्य समवसरण मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया। संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य एवं आचार्य समय सागर महाराज के आज्ञानुवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज, मुनि श्री पवित्रसागर महाराज, मुनि श्री पूज्यसागर महाराज, मुनि श्री अतुलसागर महाराज, ऐलक श्री निश्चयसागर, ऐलक श्री निजानंदसागर एवं क्षुल्लक श्री संयमसागर जी ससंघ के सानिध्य में भव्य समवसरण मंदिर का शिलान्यास समारोह अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।</p>
<p><strong>मुख्य शिला स्थापना का सौभाग्य</strong></p>
<p>मुख्य शिला स्थापना का सौभाग्य इलाहाबाद निवासी डॉ. प्रेमचंद्र जैन के सुपुत्र अनूप जैन एवं श्रीमती रेखा जैन, शेखर जैन एवं श्रीमती मृदुला जैन, अभिलाष जैन एवं श्रीमती अनिता जैन को प्राप्त हुआ। साथ ही समवसरण में विराजमान होने वाले चतुर्मुखी भगवान की दो प्रतिमाओं को विराजित करने का पुण्य अवसर भी इन्हीं परिवारों को प्राप्त हुआ। अन्य शिलाओं को स्थापित करने का सौभाग्य आमोद जैन, बंटी जैन (कानपुर) सहित अनेक दानदाताओं ने प्राप्त किया।</p>
<p><strong>विधि-विधान से संपन्न हुए धार्मिक अनुष्ठान</strong></p>
<p>इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी संजय भैया (मुरैना) एवं अनूप भैया (विदिशा) ने विधि-विधानपूर्वक सभी धार्मिक अनुष्ठानों को संपन्न कराया। कार्यक्रम में ब्र. दादा राजाराम जी (नन्ही देवरी), ब्र. रिंकू भैया, ब्र. सनत भैया, ब्र. सोनू भैया, ब्र. शैलेष भैया, ब्र. राकेश भैया सहित अनेक ब्रह्मचारी एवं गुरुभक्त उपस्थित रहे। साथ ही सौरभ जैन (सुल्तानगंज), सुमतचंद जैन (बीना), नीरज जैन, सौम्य जैन (बम्हौरी), वीरेन्द्र जैन (हरपालपुर), ब्र. बबीता दीदी, ब्र. शिमला दीदी, ब्र. प्रीति दीदी, ब्र. मौना दीदी, ब्र. सोमती दीदी, ब्र. वैशाली दीदी सहित अनेक श्रावक-श्राविकाओं की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ।</p>
<p><strong>विभिन्न क्षेत्रों से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़</strong></p>
<p>इस अवसर पर कटनी, कैमोर, बीना, जेसी नगर एवं आसपास के ग्रामों, चंपाहा, सराय किंम, कौशाम्बी, इलाहाबाद, बरगद, प्रतापगढ़, मजगंवा आदि से बड़ी संख्या में धर्मानुरागी बंधु उपस्थित होकर धर्म प्रभावना में सहभागी बने।</p>
<p><strong>मुनि संघ का सतना की ओर मंगल विहार</strong></p>
<p>मध्यान्ह में निर्यापक मुनि श्री समता सागर महाराज एवं मुनि श्री पवित्र सागर महाराज ससंघ ने सतना की ओर मंगल विहार प्रारंभ किया, जबकि मुनि श्री पूज्यसागर महाराज एवं मुनि श्री अतुलसागर महाराज अभी प्रभाषगिरी पर ही विराजमान हैं।</p>
<p><strong>दस माह की यात्रा बनी अविस्मरणीय</strong></p>
<p>लगभग दस माह तक निर्यापक श्रमण समतासागर महाराज के नेतृत्व में मुनि संघ तथा आर्यिका गुरुमतिमाता जी एवं आर्यिका दृणमतिमाता जी के कुशल संचालन में आर्यिका संघ ने पूज्य गुरुदेव के आशीर्वाद से इस विस्तृत यात्रा को सफलतापूर्वक संपन्न किया, जो क्षेत्रों के लिए एक अमिट स्मृति बन गई है।</p>
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		<title>मुनि संघ के स्वागत बाद हुई धर्मसभा : जैनों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मधुबन में साधु संतों का भव्य मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Mon, 19 May 2025 06:39:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जीवन में कोई तीर्थ हो पाए या न हो पाए, एक बार सम्मेदशिखर की बंदना कर लेना जरूरी है, उपरोक्त उद्गार निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज ने गुणायतन परिसर के आचार्य विद्यासागर सभागृह में अपने आगमन पर व्यक्त किए। प्रातःकाल सी. आर. पी. केंप से मुनिसंघ का भव्य मंगल प्रवेश प्रारंभ हुआ। पढ़िए राजकुमार [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जीवन में कोई तीर्थ हो पाए या न हो पाए, एक बार सम्मेदशिखर की बंदना कर लेना जरूरी है, उपरोक्त उद्गार निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज ने गुणायतन परिसर के आचार्य विद्यासागर सभागृह में अपने आगमन पर व्यक्त किए। प्रातःकाल सी. आर. पी. केंप से मुनिसंघ का भव्य मंगल प्रवेश प्रारंभ हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजकुमार जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मधुबन/कोडरमा।</strong> जीवन में कोई तीर्थ हो पाए या न हो पाए, एक बार सम्मेदशिखर की बंदना कर लेना जरूरी है, उपरोक्त उद्गार निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज ने गुणायतन परिसर के आचार्य विद्यासागर सभागृह में अपने आगमन पर व्यक्त किए। राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी और वीरेन्द्र जैन (मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, गुणायतन) ने बताया कि प्रातःकाल सी. आर. पी. केंप से मुनिसंघ का भव्य मंगल प्रवेश प्रारंभ हुआ। &#8220;सिद्धायतन&#8221; पर श्री सम्मेद शिखर में विराजमान संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के शिष्य मुनि श्री पूज्य सागर जी, मुनि श्री अतुल सागर जी, ज्येष्ठ आर्यिकारत्न गुरुमति माताजी, आर्यिकारत्न दृणमति माताजी सहित समस्त 42 माताजी एवं क्षेत्र पर विराजमान समस्त मुनिसंघ और आर्यिका संघ ने मुनि श्री को नमोस्तु कर त्रयवार परिक्रमा की।</p>
<p><strong>शोभायात्रा में उमड़े लोग</strong></p>
<p>इसके बाद शोभायात्रा जुलूस प्रारंभ हुआ, जिसमें शिखरजी जैन समाज और हजारीबाग, गिरीडीह, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र से आए श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ मुनि संघ की भव्य मंगल अगवानी की। इस अवसर पर शिखर जी महिला मंडल अपनी विशेष पोषाक में उपस्थित थीं, वहीं आदिवासी महिलाओं ने आदिवासी पोशाक में नृत्य करते हुए मुनिसंघ की भव्य मंगल अगवानी की। स्थान-स्थान पर श्रद्धालुओं ने रंगोली से चौक पूरा किया और मुनिसंघ का पाद प्रक्षालन कर मंगल आरती उतारी। शोभायात्रा कार्यक्रम स्थल गुणायतन परिसर में पहुंची और धर्मसभा में परिवर्तित हो गई।</p>
<p>मुनि श्री समतासागर महाराज की स्मृतियां</p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री समतासागर महाराज ने अपनी 42 वर्ष पुरानी स्मृतियों को ताजा करते हुए कहा कि इस सिद्धभूमि पर गुरुवर आचार्य श्री के साथ जनवरी 1983 में एक छोटे से साधक के रूप में उपस्थित हुआ था। 10 फरवरी को मेरी ऐलक दीक्षा गुरुवर के करकमलों से संपन्न हुई थी। ग्रीष्मकालीन बाचना के लिए आचार्य गुरुदेव ईसरी गए, जहां पर क्षु. सिद्धांत सागर महाराज की समाधि हुई और गुरुवर के साथ संघ का चातुर्मास हुआ। 25 सितंबर 1983 को पांच मुनि दीक्षा संपन्न हुई, जिसमें मुनि श्री सुधासागर, मुनि समतासागर, मुनि स्वभाव सागर, मुनि सरलसागर और मुनि समाधि सागर महाराज थे।</p>
<p><strong>श्री सम्मेद शिखर तीर्थ का महत्व</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि मैं &#8220;ईसरी&#8221; को श्री सम्मेद शिखर का अलग हिस्सा नहीं मानता। भगवान अजितनाथ और संभवनाथ स्वामी के समय का विस्तार यह क्षेत्र ईसरी तक फैला हुआ था, अतः यह भी सम्मेदशिखर जी का ही एक हिस्सा है। मुनि श्री ने उस समय की यादों को ताजा करते हुए कहा कि आज जो आर्यिका गुरुमति के रूप में आर्यिकाओं की प्रधान हैं, वह भी उस समय एक वहन के रूप में साधना कर रही थीं, जो आज विशाल आर्यिका संघ को साथ लेकर सभी को पुण्यार्जन करा रही हैं। मुनि श्री ने कहा कि सम्मेदशिखर यात्रा की भावना का श्रेय ऐलक श्री निश्चय सागर महाराज को भी है। उनके मन में इस यात्रा को करने का बहुत भाव था और जब हम लोग चंद्रगिरी में आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महाराज का स्मृति दिवस मना रहे थे, तो हमने यह भाव वहां उपस्थित सभी महाराज और आर्यिका संघ के सामने रखा। हम सभी ने श्री सम्मेदशिखर तीर्थवंदना का लक्ष्य रखा और छत्तीसगढ़ राज्य को लांघते हुए झारखंड में प्रवेश किया। प्रारंभ में प्रचंड गर्मी को देखते हुए लगा कि आगे तो बढ़ गए लेकिन मौसम का ख्याल नहीं रखा, लेकिन गुरुदेव का ऐसा आशीर्वाद था कि कोरवा जसपुर आते-आते मौसम भी अनुकूल हो गया। कभी धूप, कभी छांव, कभी आंधी, कभी तूफान का वातावरण मिला।</p>
<p><strong>गुरुदेव के आशीर्वाद का प्रभाव</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि सम्मेदशिखर में जब हमारा मंगलप्रवेश हुआ, तो वही शीतल वातावरण दिखाई दिया। यह सब गुरूदेव के आशीर्वाद का फल था। उन्होंने गुणायतन तीर्थ और मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज की प्रशंसा करते हुए कहा कि गुरुदेव के आशीर्वाद से हम सभी का मन कटनी चातुर्मास के उपरांत ही बन गया था, लेकिन उनके स्वास्थ्य प्रतिकूल होने से हम लोग जीवंत शिखर तीर्थ बंदना के लिए डोंगरगढ़ पहुंच गए थे। मुनि श्री ने कहा कि भले ही शिखर जी की बंदना देर से हुई, लेकिन जीवंत तीर्थ गुरुदेव बंदना का अवसर हमें मिल गया।</p>
<p><strong>साधुओं का स्वागत और आशीर्वाद</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि इस तीर्थ बंदना में कदम से कदम मिलाकर चलने वालों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि बाहर जंगलों में जो लोग विहार कराते हैं, उन्हें असीम पुण्य मिलता है। उन्होंने आहार-विहार में जिन परिवारों ने आकर चौका लगाया और आहार-विहार में सहयोग किया, उन सभी को ढेर सारे आशीर्वाद दिए।</p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री पवित्र सागर महाराज ने कहा, &#8220;वर्षों से विछड़े जब पंछी आपस में मिलते हैं, धरती, सूरज, चांद और सितारे भी सब अपने हो जाते हैं।&#8221; मुनि श्री पवित्र सागर महाराज ने कहा कि गुरु आज्ञा का पालन कैसे होता है, यह समतासागर जी से सीखा जा सकता है।</p>
<p><strong>गुणायतन में धर्म साधना का केंद्र</strong></p>
<p>आर्यिकारत्न गुरुमति माताजी ने कहा कि मुनि श्री के सानिध्य में श्री सम्मेदशिखर तीर्थवंदना का भाव चंद्रगिरी तीर्थ पर बना और गुरुदेव के आशीर्वाद से यह कठिन यात्रा सरलता से हो गई। उन्होंने कहा कि यह आत्मा अनंत गुणों का आयतन है और गुणायतन अपने नाम के अनुरूप धर्म साधना का केंद्र बन गया है।</p>
<p><strong>साधु संतों का स्वागत और सम्मान</strong></p>
<p>इस अवसर पर गुणायतन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद काला (कोलकाता) ने मुनिसंघ की भव्य मंगल अगवानी में आए समस्त अतिथियों का आभार व्यक्त किया, जबकि महामंत्री अशोक पांडया ने संचालन किया। इस अवसर पर गुणायतन के सी.ई.ओ. सुभाष जैन, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी वीरेन्द्र जैन, शेलेन्द्र जैन, कपूर चंद्र जैन (कोटा), सुरेंद्र कुमार जैन (सिद्धायतन) सहित समस्त पदाधिकारी एवं संघस्थ बाल ब्र. ब्र. अनूप भैया (विदिशा), रिंकू भैया (अशोक नगर), ब्र. शेलेष, ब्र. राजेश (तीर्थवंदना में सहयोगी), अन्ना भैया (पुसद), गोल्डी सिंघई (कटनी), प्रवक्ता अविनाश जैन (विदिशा), जम्बू सेठी (खातेगांव), सिलवानी, बम्हौरी, और साथ चल रहे समस्त वंधुओं का गुणायतन परिवार द्वारा अंगवस्त्र, तिलक और सम्मान पत्र के साथ सम्मान किया गया। दोपहर 2:30 बजे मुनिसंघ ने ऊपर पहाड़ पर जाने का निर्णय लिया और रात्रि विश्राम डाक बंगला पर कर 19 मई सोमवार को पहाड़ की बंदना की जाएगी।</p>
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		<title>समाज ने दीं विनयांजलि एवं शुभकामनाएं : मुनि श्री समता सागर और मुनि श्री सुधा सागर का दीक्षा दिवस आज  </title>
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		<pubDate>Fri, 20 Sep 2024 09:30:01 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[सागर]]></category>
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					<description><![CDATA[संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज के निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर जी महाराज जो कि सागर में चातुर्मास कर रहे है एवं मुनि श्री समता सागर जी महाराज जिनका चातुर्मास ब्रति नगरी पिंडरई में चल रहा है, आज दोनों वरिष्ठ मुनिराजों का दीक्षा दिवस है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; इंदौर। संत शिरोमणि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज के निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर जी महाराज जो कि सागर में चातुर्मास कर रहे है एवं मुनि श्री समता सागर जी महाराज जिनका चातुर्मास ब्रति नगरी पिंडरई में चल रहा है, आज दोनों वरिष्ठ मुनिराजों का दीक्षा दिवस है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज के निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर जी महाराज जो कि सागर में चातुर्मास कर रहे है एवं मुनि श्री समता सागर जी महाराज जिनका चातुर्मास ब्रति नगरी पिंडरई में चल रहा है, आज दोनों वरिष्ठ मुनिराजों का दीक्षा दिवस है। दोनों स्थानों पर 42 बां दीक्षा दिवस धूमधाम से एवं बड़े पैमाने पर मनाया जा रहा है। शंका समाधान में लाइव प्रश्नोत्तर के बीच मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने कहा कि दीक्षा दिवस तो हम लोगों के लिये &#8220;गुरु उपकार दिवस&#8221; है। निर्यापक श्रमण पूज्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज एवं निर्यापक श्रमण समता सागर जी महाराज के 42वें दीक्षा दिवस पर संघ की ओर से तथा अपनी ओर से विनयांजलि एवं शुभकामनाएं दीं।</p>
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