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	<title>मुनि श्री संधान सागरजी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि धर्म की कठिन साधना श्रावक धर्म की सरल राह है मोक्ष मार्ग : मुनि श्री प्रमाणसागरजी ने झारखंड में दी मंगल देशना </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Apr 2026 16:30:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहा है। रांची से पढ़िए, राज कुमार जैन अजमेरा और विजय जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;  रांची। झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहा है। <span style="color: #ff0000">रांची से पढ़िए, राज कुमार जैन अजमेरा और विजय जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> रांची।</strong> झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहा है। पांचवें दिवस केवल ज्ञान कल्याणक के अवसर पर समवसरण में गणधर पीठ से प्रवचन देते हुए मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि आत्मकल्याण और मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रत्येक मनुष्य को मुनि धर्म का पालन करने का प्रयास करना चाहिए, जो व्यक्ति मुनि धर्म का पालन करने में असमर्थ हैं, उनके लिए जैन धर्म में श्रावक धर्म की सुव्यवस्थित परंपरा का विधान किया गया है। मुनि श्री ने अपने उद्बोधन में बताया कि जैन मुनि 28 मूलगुणों का पालन करते हुए तेरह प्रकार के चारित्र को अंगीकार करते हैं। ये अट्ठाईस मूलगुण ही मुनिव्रत की आधारशिला हैं, जिनके बल पर मुनि कठोर साधना में स्थिर रहकर मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करते हैं तथा अपने चारित्र की दृढ़ता बनाए रखते हैं,उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के लिए मुनि व्रत धारण करना संभव नहीं है, इसलिए गृहस्थों के लिए श्रावक धर्म का मार्ग बताया गया है। श्रावक धर्म को तीन प्रमुख श्रेणियों—पाक्षिक, नैष्ठिक और साधक—में विभाजित किया गया है। पाक्षिक श्रावक वे होते हैं जो जिनमत में श्रद्धा रखते हुए कुलाचार का पालन करते हैं, देव-गुरु-धर्म की उपासना करते हैं तथा रात्रि भोजन का त्याग करते हैं। इसके बाद नैष्ठिक श्रावक अधिक निष्ठा के साथ धर्म का पालन करते हैं, जिनके जीवन में ग्यारह प्रतिमाओं का क्रमिक विकास होता है, जो आध्यात्मिक उन्नति की सीढ़ियाँ मानी जाती हैं। मुनि श्री ने कहा कि साधक श्रावक उच्च आध्यात्मिक स्तर पर पहुंचकर संसार, शरीर और भोगों से विरक्त हो जाते हैं तथा पंच गुरु की शरण स्वीकार करते हैं। वे क्रमशः व्रतों और गुणों में वृद्धि करते हुए अंततः संलेखना (समाधि मरण) के माध्यम से शांतिपूर्वक देह का त्याग करते हैं,मुनि श्री ने कहा कि श्रावक अपनी क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार पाक्षिक से नैष्ठिक और आगे साधक अवस्था की ओर अग्रसर हो सकता है,जीवन भर कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करते हुए अंत में संलेखना द्वारा देह का परित्याग करना ही जीवन का वास्तविक सार है।</p>
<p>जैन धर्म की यह महान परंपरा स्पष्ट करती है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर धर्म का पालन करते हुए आत्मशुद्धि के मार्ग पर अग्रसर होकर मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है।</p>
<p><strong>मुनि श्री संधान सागरजी महाराज ने किया उत्कृष्ट कैशलोंच</strong></p>
<p>आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी के शिष्य एवं मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के प्रभावक संघस्थ तपस्वी मुनि श्री संधान सागर महाराज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव के चतुर्थ दिवस तप कल्याणक के अवसर पर बिरसा मुंडा फन पार्क के प्राकृतिक वातावरण में अद्वितीय तप का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने सिर, दाढ़ी और मूंछों के केशों को स्वयं अपने हाथों से राख के सहारे उखाड़कर उत्कृष्ट कैशलोच किया। मुनिसंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि मुनि श्री प्रत्येक दो माह में इस प्रकार का कठोर कैशलोच करते हैं। इस अद्भुत तपस्या को देखने के लिए पंचकल्याणक स्थल पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। व्यस्त कार्यक्रम और भीड़भाड़ के बावजूद मुनि श्री प्रतिदिन अपर बाजार स्थित श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं रातू रोड स्थित बासुपूज्य जिनालय के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जो उनकी अटूट साधना और अनुशासन का प्रतीक है।</p>
<p><strong>कैवल्यज्ञान कल्याणक पर गूंजा शंखनाद </strong></p>
<p>पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवें दिवस कैवल्य ज्ञान कल्याणक की भव्य पूजा हुई। प्रातःकाल मुनि वृषभ सागर महाराज की आहार चर्या के पश्चात दिन में भगवान के कैवल्यज्ञान से संबंधित समस्त क्रियाएं मुनिसंघ द्वारा शंखध्वनि के साथ संपन्न कराई गईं। समवसरण सभा में गणधर परमेष्ठी के रूप में मुनि श्री प्रमाणसागर जी, मुनि श्री संधान सागर जी महाराज एवं भावी मुनि श्री समादर सागर जी महाराज सहित ब्रह्मचर्य धारण करने वाले साधकों एवं प्रतिष्ठाचार्यों ने मुनि श्री से धार्मिक शंकाओं को रखा जिसे मुनि श्री ने तत्क्षण गूढ़ प्रश्नों के उत्तर देकर सभी को संतुष्ट किया।</p>
<p><strong>6 अप्रैल को मोक्ष कल्याणक, फिर सम्मेदशिखर जी की ओर मंगलविहार</strong></p>
<p>महामहोत्सव के अंतिम दिवस 6 अप्रैल को प्रातः बेला में भगवान के मोक्ष कल्याणक की पूजा संपन्न होगी। इसके उपरांत मुनिसंघ का मंगलविहार पावन तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर जी की ओर प्रारंभ होगा। इस मंगलविहार में शामिल होने हेतु रांची ही नहीं, बल्कि देशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।</p>
<p><strong>सम्मेदशिखर में ऐतिहासिक जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव</strong></p>
<p>मुनिसंघ 15 अप्रैल को श्री सम्मेदशिखर जी में मंगल प्रवेश करेगा।16 एवं 17 अप्रैल को विभिन्न धार्मिक विधान एवं मांगलिक कार्यक्रम होंगे जबकि, 18 अप्रैल को गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज द्वारा पहली बार सम्मेदशिखर तीर्थराज पर जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान की जाएगी। इस भव्य अवसर पर झारखण्ड़,मध्यप्रदेश, पश्चिमबंगाल,महाराष्ट्र, गुजरात एवं राजस्थान सहित पूरे देश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था</strong></p>
<p>गुणायतन परिवार द्वारा 17, 18 और 19 अप्रैल को तीन दिवसीय विशेष व्यवस्था की गई है। जिसमें सभी श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं शुद्ध भोजन की उत्तम व्यवस्था रहेगी।गुणायतन परिवार के पदाधिकारियों ने देशभर के श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि इस ऐतिहासिक एवं दुर्लभ दीक्षा महोत्सव के साक्षी बनने हेतु अवश्य पधारें एवं पुण्यलाभ अर्जित करें।</p>
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		<title>भगवान महावीर के निर्वाण महोत्सव पर साधुओं का वार्षिक प्रतिक्रमण : विधिपूर्वक चार माह तक रुकने का जो संकल्प लिया था उस चातुर्मास का होगा निष्ठापन  </title>
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		<pubDate>Mon, 20 Oct 2025 12:49:58 +0000</pubDate>
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<p><strong>नगर में चातुर्मास कर रहे मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित अन्य साधुओं का सोमवार को चातुर्मास की अंतिम चतुर्दशी पर मौन के साथ उपवास रहा। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> भोपाल (अवधपुरी)</strong>। नगर में चातुर्मास कर रहे मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित क्षुल्लक श्री आदरसागरजी,क्षुल्लक श्री समादरसागर जी,क्षुल्लक श्री चिद्रूपसागर जी,क्षुल्लक श्री स्वभावसागर जी, क्षुल्लक श्री सुभगसागरजी महाराज का सोमवार को चातुर्मास की अंतिम चतुर्दशी पर मौन के साथ उपवास रहा। ज्ञातव्य रहे कार्तिक बदी त्रयोदशी को भगवान महावीर योग निरोध कर चुके थे एवं पावापुरी के सरोवर में कमल आसन पर कार्तिक अमावस्या को प्रातःकालीन बेला में निर्वाण पद की प्राप्ति हुई थी एवं संध्याकाल में उनके प्रथम गणधर गौतम स्वामी को केवल्य ज्ञान प्राप्त हो गया था। मुनि श्री ने कहा कि जैसे आप लोगों ने धूमधाम के साथ चार माह पूर्व चातुर्मास की स्थापना की थी। उसी उत्साह के साथ पूरी जैन समाज चातुर्मास निष्ठापन में भी भाग लें। आप सभी अपने-अपने जिनालयों में ऐसी व्यवस्था बना लें कि सभी 9 बजे तक अवधपुरी आ सके और भगवान महावीर का निर्वाण महोत्सव सामूहिक रूप से मना सकें।</p>
<p><strong>अवधपुरी में निर्वाण लाड़ू चढ़ाया जाएगा</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया वार्षिक प्रतिक्रमण के साथ आज चतुर्दशी को संघ का उपवास रहा। विद्याप्रमाण गुरुकुलम् एवं विद्यासागर इंस्टीट्यूट के समस्त पदाधिकारियों तथा चातुर्मास मंगल कलश के चक्रवर्ती एवं सभी नवरत्न परिवार ने भोपाल के सभी दिगंबर जैन मंदिर एवं पंचायत कमेटी के सभी सदस्यों से मंगलवार को प्रातःकाल भगवान महावीर का निर्वाण महोत्सव शुरू हो जाएगा एवं ठीक नौ बजे अवधपुरी में निर्वाण लाड़ू चढ़ाया जाएगा। आप सभी ने जैसा सहयोग चातुर्मास स्थापना पर दिया था। उसी अनुरूप सभी समाज बंधुओं के समक्ष विधिपूर्वक चार माह तक रुकने का जो संकल्प लिया था। उस संकल्प का विधिपूर्वक निष्ठापन कार्तिक अमावस्या को होगा।</p>
<p><strong>निर्वाण लाड़ू बनाते समय शुद्धता का ध्यान रखे</strong></p>
<p>मुनि श्री ने निर्वाण लाड़ू बनाते समय शुद्धता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आजकल श्रम बचाने के लिए बाजार का रेडीमेड लाड़ू आर्डर कर देते हैं। उन्होंने सभी मंदिर कमेटियों को निर्देशित किया कि अशुद्धि पूर्वक बना लाडू चढ़ाने योग्य नहीं होता और जो देर द्रव्य से बना लाडू है वह सिर्फ चढ़ाने के लिए ही काम में लें। आजकल मंदिर कमेटियां बूंदी के जो लाड़ू बनवा रही है, उनको भी इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।</p>
<p><strong>मनुष्य श्रमशील रहेगा तो जीवंतता और ताजगी बनी रहेगी</strong></p>
<p>मुनि श्री ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि प्रवचन या धर्मोपदेश भगवान की वाणी के अनुरुप होना चाहिए। धर्मोपदेश में आकर्षण लाना बुरी बात नहीं लेकिन, उस आकर्षण में उसकी मौलिकता खंडित नहीं होना चाहिए।</p>
<p>मुनि श्री ने वर्तमान समय में मशीनरी करण पर भावना व्यक्त करते हुए कहा कि मनुष्य जब तक श्रमशील रहेगा उसमें जीवंतता और ताजगी बनी रहेगी। आजकल घंटों का काम मिनटों में होने लगा है। लाखों का काम एक ही व्यक्ति कर रहा है। वह भी कुछ पलों में हालांकि यह जो चीजें है। वह समय गत बदलाव है। इस विषय पर कहने से कुछ नहीं होगा लेकिन, इस बात पर सभी का ध्यान आकर्षित होना चाहिए कि इससे मनुष्य श्रम शून्य होकर जड़ता को प्राप्त होगा।</p>
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		<title>मुनि श्री संधान सागरजी महाराज का कायोत्सर्ग मुद्रा में आत्मध्यान: 12 घंटे का संकल्प, खड़े-खड़े तप में लीन हैं मुनिश्री  </title>
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		<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 14:09:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का प्रत्येक सोमवार को मौन के साथ उपवास रहता है। इस दिवस वह धर्म ध्यान में लीन रहते हैं तथा पूरा समय अपने लिए ही रिजर्व रखते हैं एवं आम श्रद्धालुओं से नहीं मिलते। उन्हीं के संघस्थ मुनि श्री संधान सागरजी महाराज प्रति सोमवार को कुछ न कुछ ऐसा तप [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का प्रत्येक सोमवार को मौन के साथ उपवास रहता है। इस दिवस वह धर्म ध्यान में लीन रहते हैं तथा पूरा समय अपने लिए ही रिजर्व रखते हैं एवं आम श्रद्धालुओं से नहीं मिलते। उन्हीं के संघस्थ मुनि श्री संधान सागरजी महाराज प्रति सोमवार को कुछ न कुछ ऐसा तप करते हैं कि देखने वाले दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल (अवधपुरी)।</strong> मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का प्रत्येक सोमवार को मौन के साथ उपवास रहता है। इस दिवस वह धर्म ध्यान में लीन रहते हैं तथा पूरा समय अपने लिए ही रिजर्व रखते हैं एवं आम श्रद्धालुओं से नहीं मिलते। उन्हीं के संघस्थ मुनि श्री संधान सागरजी महाराज प्रति सोमवार को कुछ न कुछ ऐसा तप करते हैं कि देखने वाले दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। सोमवार को जब मुनि श्री आहार चर्या को निकले तो चारों ओर नमोस्तु-नमोस्तु के स्वर गूंजे लेकिन, यह क्या मुनि श्री ने सभी भक्त श्रद्धालुओं की ओर देखा। सभी विधि लिए खड़े थे किंतु आज उन्होंने जो विधि ली थी।</p>
<p>वह किसी के पास नहीं मिली बार-बार श्रद्धालुओं ने विधि बदलने की कोशिश भी की लेकिन, मुनि श्री तो शायद अलाप विधि का सोचकर ही निकले थे और उन्होंने तीन बार सभी की ओर देखा विधि नहीं मिलने पर वह मुस्कुराते हुए अपने कक्ष की ओर चल दिए तथा वहां जाकर खड़े होकर ध्यानस्थ हो गए एवं लगातार यूं ही 12 घंटे का संकल्प के साथ खड़े-खड़े तप कर रहे हैं। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया मुनि श्री प्रति सोमवार को कुछ न कुछ ऐसा अनोखा तप करते रहते हैं जिससे कर्मों की निर्जरा हो 48 घंटे निराहार पानी के त्याग के पश्चात उनकी अगली आहार चर्या मंगलवार को होगी। ऐसे तपस्वी साधक को सभी समाज वंधु नमन करते हैं।</p>
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