<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Mon, 03 Nov 2025 11:39:48 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>आचार्यश्री विरागसागर जी को मुनिराजों ने प्रस्तुत की विनयांजलि: भक्ति भाव से आचार्यश्री का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/munirajas_presented_tribute_to_acharyashree_viragsagar_ji/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/munirajas_presented_tribute_to_acharyashree_viragsagar_ji/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Nov 2025 11:39:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[33 वां आचार्य पदारोहण दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[33rd Acharya Padrohan Day]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Chattisi Vidhan]]></category>
		<category><![CDATA[Acharyashree Shanti Sagar Vardhman Dishaana Saint Nilay]]></category>
		<category><![CDATA[Acharyashree Viragsagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sadhyasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Vishvasurya Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[panchamrit abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Sanawad]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Parshvanath Digambar Jain Big Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Upadhyay Muni Shri Vishrut Sagar Ji Sangh]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य छत्तीसी विधान]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री विरागसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय]]></category>
		<category><![CDATA[उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी ससंघ]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पंचामृत अभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री साध्यसागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सनावद]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=93598</guid>

					<description><![CDATA[ आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। पद विहार कर पधारे उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी ससंघ एवं यहां चातुर्मासरत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी एवं मुनि श्री साध्यसागर जी सान्निध्य में आचार्यश्री विराग सागर जी का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस सोमवार को पूर्ण भक्ति भाव से मनाया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। पद विहार कर पधारे उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी ससंघ एवं यहां चातुर्मासरत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी एवं मुनि श्री साध्यसागर जी सान्निध्य में आचार्यश्री विराग सागर जी का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस सोमवार को पूर्ण भक्ति भाव से मनाया गया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> तप, साधना एवं त्याग के लिए जाने वाले इस नगर में आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। नगर में पद विहार के पधारे उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी महाराज ससंघ एवं नगर में चातुर्मास रत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी एवं मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज के पावन सानिध्य में आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस सोमवार को पूर्ण भक्ति भाव एवं हर्षाेल्लास से मनाया गया। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर एवं आचार्यश्री शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में श्री जी का पंचामृत अभिषेक किया गया। जिसमें पूर्ण सुगंधित कलश करने का सौभाग्य सुधीरकुमार प्रशांतकुमार चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा करने करने का सौभाग्य श्रीकांत जटाले परिवार को प्राप्त हुआ। इस क्रम में उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी महाराज एवं युगल मुनिराज के सानिध्य में आचार्य छत्तीसी विधान रचाया गया। जिसमें उपाध्याय मुनि श्री द्वारा प्रत्येक अर्घ्य का विशेष महत्व बताया गया। कुल 36 अर्घ्य समर्पित किए गए। उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य खुशकवर बाई सुरेशचंद पांड्या अमर ज्योति बस परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p>मुनि श्री निर्वेद सागर जी महाराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विपिनकुमार संजयकुमार बदूद परिवार तथा मुनि श्री साध्य सागरजी महाराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विशाल वैभव सराफ परिवार को एवं मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विशाल कुमार बारिश कुमार बदूद परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर विराजमान मुनि श्री निर्वेद सागर जी, मुनि श्री साध्य सागर जी, मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी ने आचार्य श्री विरागसागर जी के प्रति अपनी विनयांजलि समर्पित की।</p>
<p><strong>मुनिराजों ने विनयांजलि में किया गुरु का गुणानुवाद </strong></p>
<p>उपाध्याय मुनि श्री ने अपने गुरु के प्रति विनयांजलि में कहा कि उन्होंने सभी मुनिराजों के साथ आनंद और वात्सल्य के साथ रहना सिखाया है। इस युग प्रतिक्रमण करवाने वाले आचार्य परमेष्टी थे तो वो आचार्य विराग सागर जी महाराज थे। जिन्होंने प्राचीन परंपराओं का उद्वहन पुनः किया है जिससे संघ इकट्ठा होता था। एक बात ध्यान रखना जो काम धन भी नहीं करता वो काम आचार्य श्री ने करके दिखाया। आप ने छोटे से छोटे और बड़े से बड़े दीक्षा लेने वाले उपकारियों पर उपकार किया। वास्तव में वो बुजुर्गाें के देवता कहलाते थे। आप ने कहा कि समाधि मरण कैसे किया जाता है, आचार्य पद कैसे छोड़ा जाता है, संघ व्यवस्थित कैसे किया जाता है, अगर किसी से सीखना हो तो ये आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज ने कर दिखाया। आचार्य भगवन के गुण भी अनंत है, आप के उपकार भी अनंत है। इस अवसर पर प्रशांत चौधरी, कमल केके ब्रह्मचारी पारस भैया, अर्पित भईया द्वारा सुमधुर भजन एवं भक्तिकर सभी को मंत्र मुक्त कर दिया। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
<p><strong>उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी किए केशलोच </strong></p>
<p>दिगंबर साधु समस्त परिग्रह से रहित होते हैं तथा अपने पास केवल एक मयूर पंख से बनी पिच्छी रखते हैं अतः बालों को हटाने के लिए वे उस्तरा आदि अपने पास नहीं रख सकते व ना ही इनका प्रयोग कर सकते और चूंकि साधु स्वावलंबी होते हैं और उनकी चर्या सिंह के समान होती है। इसलिए बाल हटाने के लिए किसी का सहारा भी नहीं लेते। वे अपने हाथों से बालों को नोंच कर उखाड़ते हैं। इस क्रिया को केशलोच कहते हैं। वैसे केशलोच परिषह सहन करने के लिए भी जरूरी होता है। दिगंबर मुनि महाव्रती होते हैं और 22 परिषह को सहज ही सहन करते हैं तथा 28 मूल गुणों का पालन करते हैं। जिसमंे हाथों से केशलोच करना एक आवश्यक क्रिया है और चूंकि केशलोंच करने से भी अनेक परजीवी छोटे जीवों की विराधना होती है। जिसके प्रायश्चित स्वरूप मुनि उस दिन निराहार रह कर उपवास भी रखते हैं। अतः दिगंबर मुनि अहिंसा की जीवंत छवि होते हैं जिनसे किसी भी जीव को किसी तरह का कोई भय नहीं रहता है। मुनि स्वयं भी अभय होते हैं और दूसरों को भी अभय ही प्रदान करते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/munirajas_presented_tribute_to_acharyashree_viragsagar_ji/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रिमझिम फुहारों के बीच युगल मुनिराजों का हुआ पिच्छी परिवर्तन : मुनि श्री ने कहा- पिच्छिका में वजन नहीं संकटों को दूर करने की क्षमता है  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/amid_the_drizzle_thepair_of_monks_changed_their_attire/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/amid_the_drizzle_thepair_of_monks_changed_their_attire/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Oct 2025 16:13:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sadhy Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Vishvasurya Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Pichhi Change]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Virag Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Vishuddha Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पिच्छी परिवर्तन]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[विराग सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[विशुद्ध सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=93018</guid>

					<description><![CDATA[पिच्छी के पंख बहुत मुलायम होते हैं। आप सभी अपने जीवन को मृदुतायुक्त बनाएं। संयम व दया का यह उपकरण उन्हीं को लेने और देने का सौभाग्य प्राप्त होता है, जो अपने जीवन में कुछ संकल्प और नियम लेते हैं। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; नावद। संयम का पाठ सिखाने वाला [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>पिच्छी के पंख बहुत मुलायम होते हैं। आप सभी अपने जीवन को मृदुतायुक्त बनाएं। संयम व दया का यह उपकरण उन्हीं को लेने और देने का सौभाग्य प्राप्त होता है, जो अपने जीवन में कुछ संकल्प और नियम लेते हैं। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नावद</strong>। संयम का पाठ सिखाने वाला पिच्छी परिवर्तन समारोह है। दिगंबर साधु वर्षा ऋतु के समय एक स्थान पर रहकर जहां आत्म साधना करते हैं। वहीं पर श्रावकों को भी आत्म साधना करने की प्रेरणा देते हैं। वर्षा योग हमारे जीवन में नई चेतना लाती है। दिगंबर साधु की पहचान पिच्छी कमंडल से होती है। पिच्छी के पंख बहुत मुलायम होते हैं। आप सभी अपने जीवन को मृदुतायुक्त बनाएं। संयम व दया का यह उपकरण उन्हीं को लेने और देने का सौभाग्य प्राप्त होता है, जो अपने जीवन में कुछ संकल्प और नियम लेते हैं। देव, शास्त्र, गुरु एवं संस्कृति के प्रति समर्पित होकर अपनी श्रद्धा और आस्था मजबूत बनाए रखें। यह उदगार नगर में चतुर्मासरत मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज  ने पिच्छी परिवर्तन समारोह के की धर्म सभा में व्यक्त किए। सन्मति काका ने बताया की  पिच्छी परिवर्तन समारोह के अवसर पर आरंभ में मंगलाचरण  प्रदीप पंचोलिया, संगीता पाटोदी द्वारा किया गया। इसी क्रम में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज, विराग सागर जी महाराज, विशुद्ध सागर जी महाराज के छाया चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन  ब्र.धर्मेन्द्र भैया, आष्टा, भोपाल, खरगोन, सिलवानी, बुरहानपुर, अब्दुलागंज, दाहोद, सीहोर,उज्जैन से पधारे अतिथियों ने किया। वही स्वागत गीत हितार्थ जैन, उत्कर्ष जैन, आराध्या जैन द्वारा प्रस्तुत किया गया एवं मंगलाचरण नृत्य  गवाक्षी जैन, प्रज्ञा धनोते, अंशिता जैन ने किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-93021" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251026-WA0025.jpg" alt="" width="1280" height="720" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251026-WA0025.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251026-WA0025-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251026-WA0025-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251026-WA0025-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251026-WA0025-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251026-WA0025-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251026-WA0025-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251026-WA0025-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251026-WA0025-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />सन्मति काका ने बताया की मुनि श्री विश्वसुर्य सागर जी महाराज  के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने सौभाग्य सत्येंद्रकुमार आशीषकुमार जैन सनावद परिवार को मिला। इसी क्रम में मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य अशोक कुमार परीन विभव पंचोलिया परिवार सनावद को प्राप्त हुआ।  साथ ही मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज द्वारा 4 माह की कठिन साधना से मंत्रित साधना महोदधी साध्य सिद्धि कलश पवन कुमार विनीश कुमार यश गोधा परिवार सनावद को प्रदान किया गया। अगली कड़ी में सभी आचार्यों को अर्घ्य समर्पित करने का सौभाग्य सभी समाजजनों को प्राप्त हुआ। मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी महाराज ने संक्षिप्त उद्बबोधन में कहा कि पिच्छिका में कोई वजन नहीं होता, लेकिन उसमें संकटों को दूर करने की क्षमता रहती है। यह संसार से विरक्ति पैदा करके जीवन का सार बताती है। उन्होंने सभी से इच्छाओं को त्याग कर संयम को अपनाने पर जोर दिया। अंत में मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छी पाने का सौभाग्य अनेक नियमों के पालन करने वाले पवन कुमार विनीश कुमार यश गोधा परिवार को प्राप्त हुआ। वही नई पिच्छी देने का सौभाग्य नगर में अनेक व्रतों का पालन करने वाले परिवार.को प्राप्त हुआ। मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छी पाने का सौभाग्य पवन कुमार मयंक कुमार धनोते परिवार को प्राप्त हुआ। नई पिच्छी देने का सौभाग्य अनेक व्रतों का पालन करने वाले परिवार को प्राप्त हुआ। संचालन प्रशांत जैन मोनू  ने किया एवं संगीतकार कमल जैन पार्टी बड़वाह ने अपनी मधुर भजनों से सभी को मंत्र मुक्त कर दिया।आभार मुनि सेवा समिति के अध्यक्ष मुकेश जैन ने माना। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/amid_the_drizzle_thepair_of_monks_changed_their_attire/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सनावद में सतत 12 घंटे भक्तामर पाठ कर की आराधना : मुनिश्री ने चमत्कारी प्रभावों से युक्त भक्तामर पाठ के लाभों से अवगत कराया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/worship_was_done_by_reciting_bhaktamar_for_12_hours_continuously_in_sanawad/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/worship_was_done_by_reciting_bhaktamar_for_12_hours_continuously_in_sanawad/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Oct 2025 11:22:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Mantung]]></category>
		<category><![CDATA[Bhaktamar Path]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Adinath]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sadhy Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Vishwasurya Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Sanawad]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[unbroken 12 hours]]></category>
		<category><![CDATA[अखंड 12 घंटे]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य मानतुंग]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[भक्तामर पाठ]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान आदिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सनावद]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=92207</guid>

					<description><![CDATA[धर्म ध्यान एवं त्याग की नगरी कहे जाने वाले नगर सनावद में चातुर्मासरत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज के सानिध्य में अखंड 12 घंटे का भक्तामर पाठ किया गया। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; सनावद। धर्म ध्यान एवं त्याग की नगरी कहे जाने वाले नगर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>धर्म ध्यान एवं त्याग की नगरी कहे जाने वाले नगर सनावद में चातुर्मासरत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज के सानिध्य में अखंड 12 घंटे का भक्तामर पाठ किया गया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> धर्म ध्यान एवं त्याग की नगरी कहे जाने वाले नगर सनावद में चातुर्मासरत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज के सानिध्य में अखंड 12 घंटे का भक्तामर पाठ किया गया। श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में आचार्य मानतुंग स्वामी द्वारा रचित अखंड 12 घंटे का भक्तामर पाठ के दौरान मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज ने प्रत्येक काव्य का अर्थ समझाते हुए वर्णन किया एवं बताया कि आध्यात्मिक और मानसिक शांति प्राप्त करना, रोगों से मुक्ति पाना, सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना और आर्थिक समृद्धि की दिशा में मार्गदर्शन प्राप्त करना है।</p>
<p>यह स्तोत्र आचार्य मानतुंग द्वारा रचित भगवान आदिनाथ की स्तुति है और इसमें 48 श्लोक हैं। जिनमें से प्रत्येक श्लोक में विशेष ऊर्जा और शक्ति होती है। इसके पाठ के करने से आत्म विश्वास में वृद्धि, साकारात्मक ऊर्जा, रोगों से मुक्ति, आर्थिक समृद्धि, आध्यामिक से सुरक्षा, आध्यात्मिक उन्नति एवं इसके चमत्कारी प्रभाव बताए गए हैं। रात्रि 8 बजे से प्रारंभ होकर सबेरे 8बजे तक हुए अखंड भक्तामर पाठ में मयंक धनोते, निमिष जैन, परिन जैन, विकास जैन, आशीष जैन, नितिन जैन, हेमंत काका, प्रतीक जैन, रजनीश जैन, कमलचंद जटाले, अभिजीत जैन, प्रशांत चौधरी, रिंकेश जैन, अनीश जैन, अभिषेक गोटू, अश्विनी चौधरी, प्रज्ञा धनोते, अंशुमा जैन, प्रियंका पंचोलिया, वर्षा जैन, सहित सभी समाजजनों ने अपनी अपनी सहभागिता दर्ज करवाई।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/worship_was_done_by_reciting_bhaktamar_for_12_hours_continuously_in_sanawad/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>10वें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ जी का मोक्ष कल्याणक मनाया: श्रद्धालुओं ने अभिषेक, शांतिधारा, निर्वाण पाठ कर निर्वाण लाडु चढाए </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/celebrated_the_salvation_of_the_10th_tirthankara_lord_shitalnath/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/celebrated_the_salvation_of_the_10th_tirthankara_lord_shitalnath/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 14:30:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[10th Tirthankara]]></category>
		<category><![CDATA[10वे तीर्थंकर]]></category>
		<category><![CDATA[Acharyashree Vardhaman Sagar]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Deshan Mati Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Khandelwal Temple Mahavir Jinalaya Mandir Jinalaya]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Sheetalnath Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Moksha Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sadhy Sagar Ji Maharaj श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Vishwasurya Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Parshvanath Big Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Namokar Dham]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Siddhachal Podanpuram]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Suparshvanath Temple]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्द्धमान सागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिका देशना मति माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[खंडेलवाल मंदिर महावीर जिनालय मंदर जिनालय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पार्श्वनाथ बड़ा जैन मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान शीतलनाथ जी]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[मोक्ष कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[श्री णमोकार धाम]]></category>
		<category><![CDATA[श्री सिद्धाचल पोदनपुरम]]></category>
		<category><![CDATA[सुपार्श्वनाथ मंदिर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=91457</guid>

					<description><![CDATA[नगर के सभी जिनालयों में धूमधाम से जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 श्री शीतलनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया गया। इस अवसर पर आचार्यश्री वर्द्धमान सागर के आशीर्वाद से आर्यिका देशना मति माताजी की प्रेरणा से निर्मित पंडित कॉलोनी स्थित श्री शांतिनाथ चैत्यालय में भक्तों ने सामूहिक पूजन कर लडडू चढ़ाया। सनावद [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर के सभी जिनालयों में धूमधाम से जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 श्री शीतलनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया गया। इस अवसर पर आचार्यश्री वर्द्धमान सागर के आशीर्वाद से आर्यिका देशना मति माताजी की प्रेरणा से निर्मित पंडित कॉलोनी स्थित श्री शांतिनाथ चैत्यालय में भक्तों ने सामूहिक पूजन कर लडडू चढ़ाया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> नगर के सभी जिनालयों में धूमधाम से जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 श्री शीतलनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया गया। इस अवसर पर आचार्यश्री वर्द्धमान सागर के आशीर्वाद से आर्यिका देशना मति माताजी की प्रेरणा से निर्मित पंडित कॉलोनी स्थित श्री शांतिनाथ चैत्यालय में भक्तों ने सामूहिक पूजन कर लडडू चढ़ाया। मंगलवार को प्रातः 7 बजे श्री जी का अभिषेक किया गया।</p>
<p>इसके बाद शांतिधारा हुई। नित्य नियम पूजन के बाद भगवान श्री शीतल नाथ का पूजन किया गया। साथ ही नगर के पार्श्वनाथ बड़ा जैन मंदिर, सुपार्श्वनाथ मंदिर, खंडेलवाल मंदिर महावीर जिनालय मंदर जिनालय, श्री णमोकार धाम एवं श्री सिद्धाचल पोदनपुरम में भी मोक्ष कल्याणक मनाया गया। सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट में भी भगवान के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण कांड का वाचन कर निर्वाण लाडू चढ़ाए गए एवं शांति पाठ किया गया। इस अवसर पर यात्रा पर परिवार के साथ यूपी नोएडा से आए नरेंद्र जैन ने भी निर्वाण पाठ के साथ निर्वाण लड्डू चढ़ाया। शांति पाठ के साथ सामूहिक पूजन हुआ। चैत्यालय में नितेश जैन, संजय चौधरी, अनिता चौधरी, पुष्पा लाठिया, विमल सेठी, शीतल लाठिया, सुमन जैन, सुधा जैन ने भगवान को लाडू चढ़ाए। इस पावन अवसर पर नगर में विराजमान मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में श्री 1008 सुपार्श्वनाथ स्वामी के दिव्य जिनालय विश्वशांति दायक अनंतकालीन सहस्त्र नाम महामंत्रों से शांतिधारा संतोष बाकलीवाल, नीलेश बाकलीवाल, नीलेश पाटोदी, कमलेश भूच, नरेश पाटनी सहित अनेक समाजजनों ने की।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/celebrated_the_salvation_of_the_10th_tirthankara_lord_shitalnath/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
