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	<title>मुनि श्री विवर्धन सागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>कूट के नाम से प्रसिद्ध भारत का एक मात्र तीर्थ सिद्धवरकूट-आचार्य विशुद्ध सागर जी: पं.राकेश जैन भिंड ने 7 प्रतिमा के व्रत अंगीकार किए  </title>
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		<pubDate>Mon, 21 Apr 2025 13:55:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने सोमवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए बद्ध चेतन, अबद्ध चेतन, सदभूत-असदभूत व्यवहारनय को समझाया। आचार्यश्री ने युवाओं को भी प्रेरणास्पद बातों से अभिभूत किया। दीक्षा कल्याणक भी मनाया गया। इस अवसर पर सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट में पं.राकेश जैन भिंड ने 7 प्रतिमा के व्रत अंगीकार किए। सनावद से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने सोमवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए बद्ध चेतन, अबद्ध चेतन, सदभूत-असदभूत व्यवहारनय को समझाया। आचार्यश्री ने युवाओं को भी प्रेरणास्पद बातों से अभिभूत किया। दीक्षा कल्याणक भी मनाया गया। इस अवसर पर सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट में पं.राकेश जैन भिंड ने 7 प्रतिमा के व्रत अंगीकार किए। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए राजेंद्र जैन महावीर की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> भारत का कण-कण पवित्र है। भारत भूमि ढाई द्वीप में ऐसा कोई स्थान नहीं है। जहाँ से मुनि मोक्ष न पधारे हों। आज विदेशों में जैन ग्रंथों की खोज से कई शोध किए जा रहे हैं। जीवत्व की दृष्टि से हम सब स्वजातीय हैं। पुद्गल, अजीव विजातीय हैं। द्रव्य-गुण-पर्याय के बाहर जगत में कुछ भी नहीं है। विश्व की रचना परमाणु से, परमाणु का वर्णन वस्तुत्व की दृष्टि से जैन ग्रंथों में हैं। सिद्धवरकूट सिद्ध क्षेत्र का कण-कण पवित्र है। यहाँ दो चक्री दस कामकुमार मुनिराज सहित साढ़े तीन करोड़ मुनिराजों ने मोक्ष प्राप्त किया है। कूट के नाम से प्रसिद्ध भारत का एकमात्र तीर्थ सिद्धवरकूट है। यह उद्बोधन आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के द्वितीय दिवस बद्ध चेतन, अबद्ध चेतन, सदभूत-असदभूत व्यवहारनय को समझाते हुए व्यक्त किए। आचार्य श्री ने कहा कि आज सिद्धवरकूट तीर्थ के निर्जन स्थानों का भ्रमण किया तो अहसास हुआ कि सिद्धवरकूट शांत शीतल स्थान है। यहाँ बाहर में भले ही तपन हो लेकिन, आत्मिक शीतलता का स्थान सिद्धवरकूट है। जहाँ अंतरआत्मा के दर्शन हो सकते हैं। गणधर मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज ससंघ, अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज, गणिनी आर्यिका विशिष्टश्री माताजी ससंघ उपस्थित रहे। मुनि श्री सौम्य सागरजी महाराज ,आर्यिका विविक्त श्री माता जी ने भी संबोधित किया।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-79509" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0035.jpg" alt="" width="1599" height="1066" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0035.jpg 1599w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0035-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0035-1024x683.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0035-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0035-1536x1024.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0035-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0035-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0035-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0035-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0035-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0035-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0035-1320x880.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1599px) 100vw, 1599px" />श्रद्धावान को पाषाण में भी भगवान दिखते हैं</strong></p>
<p>आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि शिल्पकार को पाषाण में मूर्ति दिखती है। वहीं श्रद्धावान को पाषाण में परमात्मा दिखते हैं। हमें कभी व्यक्ति के राग-द्वेष में नहीं पड़ना चाहिए। व्यवस्था मत बनाइये, व्यवस्थित रहना शुरू कीजिए। व्यवस्था अपने आप बन जाएगी। गाड़ी पर बैठने के लिए कभी गाड़ी पर मत बैठिए। मंजिल पर पहुंचने के लिए गाड़ी में बैठिए। युवाओं को मार्गदर्शन देते हुए आचार्य श्री ने कहा कि चेहरा देखकर कभी विवाह मत करना, गुण, धर्म को देखकर विवाह कीजिए। ध्यान रहे संतान नहीं होगी तो संत नहीं होंगे, संत नहीं होंगे तो अरिहंत नहीं होंगे, अरिहंत नहीं होंगे तो सिद्ध भगवान भी नहीं होंगे। श्रेष्ठ कार्य का कोई पंथ नहीं होता, श्रेष्ठ कार्य हर किसी का होता है। अपने गुरु गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज की शिक्षाओं को याद करते हुए कहा कि उन्होंने मुझे जितना सिखाया है। उसे में शब्दों में बता सकूं। मुझमें यह सामर्थ्य नहीं है। ध्यान रहे सज्जन असमर्थ हमेशा प्रशंसा करता है, दुर्जन असमर्थ हमेशा निंदा करता है।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-79508" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0036.jpg" alt="" width="1599" height="1066" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0036.jpg 1599w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0036-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0036-1024x683.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0036-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0036-1536x1024.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0036-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0036-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0036-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0036-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0036-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0036-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250421-WA0036-1320x880.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1599px) 100vw, 1599px" />सुव्रत सागर जी सहित पांच मुनिराजों ने किए कैशलोच</strong></p>
<p>आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के परमशिष्य मुनि श्री सुव्रत सागर जी, निसंग सागर जी, निग्रंथ सागर जी, निर्माेही सागर जी महाराज ने अपने उत्कृष्ट केशलोच किए। पांचों मुनियों ने सोमवार सुबह अपने हाथों से अपने मुख और सिर के बालों को हाथों से घास की भांति उखाड़ना प्रारंभ कर दिया। मुनि श्री सुव्रत सागर जी ने बताया कि सिद्ध भूमि पर अपने केशलोच करना हमारा सौभाग्य है। पांचों मुनिराजों ने उपवास भी किए।</p>
<p><strong>सिरिभूवलय की प्रतियां भेंट की</strong></p>
<p>जैन गणित का अद्भुत ग्रंथ सिरिभूवलय पर कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ इंदौर द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी ज्ञानपीठ अध्यक्ष अमित कासलीवाल, प्रबंधक अरविंद जैन आदि ने आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी को संस्थान व सिरिभूवलय योजना की जानकारी देते हुए उन्हें पुस्तक भेंट की व कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ इंदौर पधारने का आग्रह किया।</p>
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		<title>विस्तारवादी नीति से साधु धर्म का पालन नहीं होता-आचार्य विशुद्ध सागर: 80 त्यागी वृंद खरगोन की भूमि पर पधारे </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/sadhu_dharma_is_not_followed_by_expansionist_policy_acharya_vishuddha_sagar/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Apr 2025 13:14:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर का राधा कुंज सभागार, टैगोर पार्क कॉलोनी, पोस्ट ऑफिस चौराहा सभी जगह दिगंबर जैन संत, आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, एलक महाराज, क्षुल्लक महाराज,ब्रह्मचारी दीदी, भैया दिखाई दे रहे हैं।खरगोन नगर की इतिहास में पहली बार आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, ऐलक, क्षुल्लक महाराज, ब्रह्मचारी दीदी,भैया, प्रतिमा धारी श्रावक-श्राविका सहित लगभग 80 त्यागी वृंद खरगोन आए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर का राधा कुंज सभागार, टैगोर पार्क कॉलोनी, पोस्ट ऑफिस चौराहा सभी जगह दिगंबर जैन संत, आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, एलक महाराज, क्षुल्लक महाराज,ब्रह्मचारी दीदी, भैया दिखाई दे रहे हैं।खरगोन नगर की इतिहास में पहली बार आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, ऐलक, क्षुल्लक महाराज, ब्रह्मचारी दीदी,भैया, प्रतिमा धारी श्रावक-श्राविका सहित लगभग 80 त्यागी वृंद खरगोन आए हैं। <span style="color: #ff0000">खरगोन से पढ़िए दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> खरगोन।</strong> नगर का राधा कुंज सभागार, टैगोर पार्क कॉलोनी, पोस्ट ऑफिस चौराहा सभी जगह दिगंबर जैन संत, आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, एलक महाराज, क्षुल्लक महाराज,ब्रह्मचारी दीदी, भैया दिखाई दे रहे हैं। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में चल रही भगवान महावीर मंदिर वेदी शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव में मंगलवार प्रातः गणधर मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज ससंघ और गणिनी आर्यिका विशिष्ट श्री माताजी का आगमन हुआ। खरगोन नगर की इतिहास में पहली बार आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, ऐलक, क्षुल्लक महाराज, ब्रह्मचारी दीदी,भैया, प्रतिमा धारी श्रावक-श्राविका सहित लगभग 80 त्यागी वृंद खरगोन की भूमि पर पधारे। गणधर मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज आर्यिका माताजी की अगवानी धूमधाम से नगरवासियों ने की। जो विकल्प मुक्त व संकल्प से युक्त है, उसे संसार का कोई भी तूफान हिला नहीं सकता।</p>
<p>आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने अध्यात्म गंगा में समाहित कराते हुए आचार्य कुंदकुंद द्वारा लिखित समयसार ग्रंथ की प्राकृत गाथाओं के संदर्भ में कहा कि साधु समतावादी होता है, उसका सबके प्रति करुणा का भाव होता है। साम्राज्य परंपरा में साधु परंपरा नहीं है। राजा अपने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए कुछ भी करता है, लेकिन साधु अपनी साम्य समता भाव के कारण जाना जाता है। महापुरुष कभी भी व्यर्थ बकवास नहीं करता, सज्जन पुरुष सभी जीवो के कल्याण के लिए कार्य करता है, जो सिद्धांतों के विपरीत मान्यता रखता है वह दुखी रहता है।</p>
<p>जो व्यक्ति या साधु विकल्प से मुक्त और संकल्प से युक्त होता है। उसे संसार का कोई तूफान हिला नहीं सकता। हमेशा विवेकपूर्ण बोलना चाहिए। ध्यान रहे प्रज्ञाबल जिसके पास है बाहुबल उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता। भारत का प्रज्ञाबल मेघा प्रचंड है। भारत के इंजीनियर, डॉक्टर सभी को विश्व में पसंद किया जाता है, भारत का अध्यात्म वस्तु का स्वभाव है, भारत में साधु होते हैं इसलिए धर्म यहां सुरक्षित है।</p>
<p><strong>भौतिक वस्तुओं में सुख नहीं है: गणधर विवर्धन सागर</strong></p>
<p>गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के शिष्य गणधर मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज ने आचार्य विशुद्ध सागर जी के साथ हुए मिलन को सौभाग्यशाली बताया। उन्होंने कहा कि भौतिक वस्तुओं में सुख ढूंढने वाला कभी सुखी नहीं रह सकता है। सद कर्तव्यों का पालन करो, व्यसनों से दूर रहो, गुरु के चरणों के समीप रहो। दोनों संघों का आत्मीय मिलन देखकर श्रद्धालुओं ने हर्ष व्यक्त किया।</p>
<p><strong>सोलह स्वप्नों की प्रस्तुति ने मन मोहा</strong></p>
<p>सायंकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति महिला मंडल द्वारा दी गई। विभिन्न साज सज्जा के साथ भगवान महावीर के पांच नाम की नाटिका नृत्य की प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया। प्रातः काल अभिषेक, शांति धारा, मंडल विधान,पूजन प्रतिष्ठाचार्य पंडित धर्मचंद शास्त्री ने संपन्न कराया।</p>
<p><strong>1 लाख 25 हजार किमी पद विहार कर चुके हैं आचार्य विशुद्ध सागर जी </strong></p>
<p>मीडिया प्रभारी राजेंद्र जैन, महावीर आशीष जैन ने बताया कि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने अपने 35 वर्षों के साधु काल में सर्वाधिक पद विहार किया है। वे संपूर्ण भारतवर्ष में अभी तक 1 लाख 25 हजार किमी पद विहार कर चुके हैं। उल्लेखनीय है कि दिगंबर जैन साधु 24 घंटे में मात्र एक बार विधि पूर्वक आहार जल ग्रहण करते हैं। दिगंबर रहते हैं, पैदल पद विहार करते हैं ,किसी भी तरह के वाहनों का उपयोग नहीं करते हैं। भीषण गर्मी में भी पंखा कूलर आदि किसी भी प्रकार के भौतिक संसाधनों का उपयोग भी नहीं करते हैं। भीषण तापमान में भी पैदल पद विहार करना आम जनों को आश्चर्य में डालता है लेकिन, उनका तप, त्याग, तपस्या के बल पर यह सब संभव हो पता है। सायंकालीन आरती करने का सौभाग्यचंदा बडजात्या, मनीष रीना बड़जात्या ने और पाद प्रक्षालन चिंतामन जैन खंडवा, शास्त्र भेंट दयाचंद जैन खरगोन ने किया। आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन अरुण, तरुण, वरुण धनोते ने किया।</p>
<p><strong> बुधवार वेदी में विराजेंगे तीर्थंकर भगवान </strong></p>
<p>वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव संयोजक अनिल जैन, महामंत्री अरुण धनोते ,कोषाध्यक्ष जितेंद्र जैन ने बताया कि 80 वर्ष प्राचीन मंदिर को जीर्णाेद्धार कर नूतन मार्बल का मंदिर बनाया गया है। जिसमें मूल नायक भगवान महावीर की प्रतिमा के साथ नव प्रतिष्ठित शांतिनाथ भगवान, सुमति नाथ भगवान, चंद्रप्रभ भगवान, शीतलनाथ भगवान, पदमप्रभ भगवान की प्रतिमाएं नूतन जिन मंदिर में बुधवार प्रातः 9 बजे विराजमान की जाएगी।</p>
<p><strong>रथ यात्रा से मंदिर पहुंचेंगे  </strong></p>
<p>बुधवार प्रातः 7 बजे रथयात्रा राधा कुंज परिसर से महावीर मंदिर पोस्ट ऑफिस चौराहा पहुंचेगी। जहां नूतन वेदी में भगवान विराजमान होने के बाद आचार्य विशुद्ध सागर जी के मंगल प्रवचन होंगे। समाज अध्यक्ष विनोद जैन, विजय जैन, प्रदीप जैन, अरुण धनोते, जितेंद्र जैन, अनिल जैन, सुनील जैन ठेकेदार,अरुण जैन ठेकेदार, पंकज गोधा, राकेश जैन ने धर्म लाभ लेने की अपील की है।</p>
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		<title>स्वर्ण भद्रादि चार महामुनिराजों की निर्वाण स्थली पावागिरी सिद्ध क्षेत्र ऊन में अद्भुत नजारा : पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Mon, 07 Apr 2025 12:26:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पावागिरी सिद्ध क्षेत्र ऊन में एक अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब चर्या शिरोमणि, पट्टाचार्य आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य श्री की मंगल अगवानी करने के लिए गणाचार्य विराग सागर जी के मूल संघ के मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज एवं आर्यिका विशिष्ट मति माताजी ससंघ पहुंचे। पढ़िए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पावागिरी सिद्ध क्षेत्र ऊन में एक अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब चर्या शिरोमणि, पट्टाचार्य आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य श्री की मंगल अगवानी करने के लिए गणाचार्य विराग सागर जी के मूल संघ के मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज एवं आर्यिका विशिष्ट मति माताजी ससंघ पहुंचे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए दीपक प्रधान की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ऊन (पावागिरी सिद्ध क्षेत्र)।</strong> पावागिरी सिद्ध क्षेत्र ऊन में एक अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब चर्या शिरोमणि, पट्टाचार्य आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य श्री की मंगल अगवानी करने के लिए गणाचार्य विराग सागर जी के मूल संघ के मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज एवं आर्यिका विशिष्ट मति माताजी ससंघ पहुंचे। हजारों श्रद्धालुओं की साक्षी में गुरु-शिष्य मिलन का अद्भुत दृश्य सभी ने निहारा। इस दौरान आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन एवं चरण वंदना सभी महाराज और आर्यिका माताजी ने की।</p>
<p><strong>आचार्य श्री के साथ किया पद विहार</strong></p>
<p>क्षेत्र के प्रचार मंत्री आशीष जैन, पारस कासलीवाल, भीकन गांव ने बताया कि आचार्य संघ की मंगल आगवानी में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, भगवानपुरा विधायक केदार डाबर, जिला पंचायत सदस्य रेवाराम पाटीदार आदि सुबह से ही पहुंच गए थे। इन्होंने आचार्य श्री के साथ पद विहार भी किया। मंगल अगवानी के साथ ही घटयात्रा में महिलाएं मंगल कलश सिर पर धारण कर चल रही थीं। बड़वाह के बैंड द्वारा सुमधुर भजन प्रस्तुत किए जा रहे थे, जबकि पंजाब के बैंड द्वारा नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी गई, जिसे सभी ने सराहा।</p>
<p><strong>इन्हें मिला सौभाग्य</strong></p>
<p>पांडाल प्रांगण में संपूर्ण संघ के सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी धर्म चंद्र शास्त्री (नई दिल्ली) के निर्देशन में ध्वजारोहण हुआ। ध्वजारोहण करने का सौभाग्य भरत रितु जैन (जीरभार वाले), इंदौर को प्राप्त हुआ, जबकि मंडप उद्घाटन का सौभाग्य क्षेत्र के अध्यक्ष हेमचंद मीना झंझरी परिवार, इंदौर को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य भी भरत रितु भूपेंद्र जैन, इंदौर को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य चिंतामण जी, खंडवा को प्राप्त हुआ, और चित्र अनावरण शालिनी पंकज जटाले, बेड़ियां ने किया। दीप प्रज्वलन का सौभाग्य अमित जैन, जंबू जैन एवं गुर्जर समाज मंडली, लोनारा को प्राप्त हुआ। मुख्य घट कलश विवेक विनोद जैन, खरगोन एवं द्वितीय कलश मीना झंझरी, इंदौर ने स्थापित किया।</p>
<p><strong>17 चौकों में आहारचर्या</strong></p>
<p>मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज एवं आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने अपनी अमृतमयी वाणी से सबको लाभान्वित किया। संघ के 55 साधुओं की आहार चर्या परिसर में लगे 17 चौकों में पूर्ण हुई, और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी की आहार चर्या महेश्वर के चौके में पूरी हुई। महोत्सव पंडाल में दोपहर को सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा, मंडप प्रतिष्ठा के पश्चात विधान हुआ। शाम को महा ध्वजा की स्थापना के बाद आरती और शास्त्र प्रवचन के बाद निमाड़ महिला मंडल द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई।</p>
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		<title>बावनगजा सिद्ध क्षेत्र में आदिश्वर महा अर्चना विधान हुआ : भक्तामर विधान में निमाड़-मालवा के भक्त जन हुए शामिल </title>
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		<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 16:24:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री विवर्धन सागर जी और श्रमण श्री विश्वभद्र सागर जी महाराज के सानिध्य में आदिश्वर महा अर्चना भक्तामर विधान किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं। अभिषेक के बाद सहस्रनाम के पूजन के साथ 11 हजार श्रीफल समर्पित किए गए। बड़वानी से पढ़िए दीपक प्रधान की खबर&#8230; बड़वानी। बावनगजा सिद्ध क्षेत्र पर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री विवर्धन सागर जी और श्रमण श्री विश्वभद्र सागर जी महाराज के सानिध्य में आदिश्वर महा अर्चना भक्तामर विधान किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं। अभिषेक के बाद सहस्रनाम के पूजन के साथ 11 हजार श्रीफल समर्पित किए गए। <span style="color: #ff0000">बड़वानी से पढ़िए दीपक प्रधान की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> बावनगजा सिद्ध क्षेत्र पर विराजित आचार्यश्री विराग सागर जी के मूल संघ के मुनि श्री विवर्धन सागर जी और श्रमण श्री विश्वभद्र सागर जी महाराज के सानिध्य में आदिश्वर महा अर्चना भक्तामर विधान किया गया। इसमें बड़वानी और निमाड़,मालवा के अलावा पूरे देश से पधारे श्रावक और श्राविकाओं ने कमल जैन एंड पार्टी बड़वाह की मधुर धुन पर विधान संपन्न किया। ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष विनोद दोशी ने श्रावकों का आभार माना और अनुमोदना प्रकट की।</p>
<p><strong>11 हजार श्रीफल समर्पित किए</strong></p>
<p>इस अवसर पर सुबह बावनगजा के बड़े बाबा के चरणों में अभिषेक के बाद सहस्रनाम के पूजन के साथ 11 हजार श्रीफल समर्पित किए गए। इसके बाद आहार चर्या और सामयिक हुई। शाम को गुरु भक्ति प्रतिक्रमण हुआ। इस अवसर पर तीन संघ के लगभग 22 मुनि जिनमें एक आचार्य, आर्यिका, क्षुल्लक, क्षुल्लिका विराजमान हैं। यह जानकारी मनीष जैन ने दी।</p>
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		<title>औरंगाबाद बुलढाना से विहार कर आए मुनिसंघ का मंगल प्रवेशः बड़वानी विधायक ने अगवानी कर लिया आशीर्वाद </title>
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		<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 06:37:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़वानी में मुनि श्री विवर्धन सागर जी, मुनि श्री विश्वनायक सागर जी सहित 17 मुनिराज और आर्यिका संघ का मंगल प्रवेश हुआ। इसमें 10 मुनिराज, 2 क्षुल्लक, 5 आर्यिका माताजी हैं। बैंडबाजों के साथ ससंघ की अगवानी कर विधायक राजन मंडलोई ने आशीर्वाद लिया। जगह-जगह पाद प्रक्षालन भी हुआ। आरती उतारी गई। इस अवसर पर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बड़वानी में मुनि श्री विवर्धन सागर जी, मुनि श्री विश्वनायक सागर जी सहित 17 मुनिराज और आर्यिका संघ का मंगल प्रवेश हुआ। इसमें 10 मुनिराज, 2 क्षुल्लक, 5 आर्यिका माताजी हैं। बैंडबाजों के साथ ससंघ की अगवानी कर विधायक राजन मंडलोई ने आशीर्वाद लिया। जगह-जगह पाद प्रक्षालन भी हुआ। आरती उतारी गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाजजन मौजूद रहे। मुनिराजों ने धर्मसभा को संबोधित किया। <span style="color: #ff0000">बड़वानी से पढ़िए दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;       </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> सिलावद की ओर से शुक्रवार को सिद्ध नगर बड़वानी में आचार्य श्री विराग सागर जी के शिष्य मुनि श्री विवर्धन सागर जी एवं मुनि श्री विश्वनायक सागर जी सहित 17 मुनिराज और आर्यिका संघ का मंगल प्रवेश हुआ। इसमें 10 मुनिराज, 2 क्षुल्लक, 5 आर्यिका माताजी पधारी हैं। मुनि संघ की अगवानी बड़वानी विधायक राजन मंडलोई और समाज जन ने की। महाराज के पाद प्रक्षालन और श्रीफल भेंटकर विधायक मंडलोई ने आशीर्वाद प्राप्त किया। समाज के महिला और पुरुषों ने अपने अपने घरों पर मुनि संघ के पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी। श्रीफल चढ़ाकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। बैंडबाजे के साथ अंजड़ नाके से कारंजा चौराहा, मोटी माता मंदिर, महात्मा गांधी मार्ग, रणजीत चौक होते हुए जैन मंदिर पर शोभा यात्रा समाप्त हुई। मुनि संघ की आहारचर्या संपन्न हुई।</p>
<p><strong>हमें अष्ट मूल गुण का पालन करना चाहिए</strong></p>
<p>दोपहर को जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विश्वनायक सागर जी ने अपनी देशना में कहा कि जैन धर्म अनादिकाल से चला आ रहा है। अपने तीर्थ क्षेत्र, धर्म क्षेत्र को ऋषि मुनियों ने अपने उपदेशों और शास्त्र और आगम के माध्यम से हमारे जीवन तथा इस धर्म को सींचा है। बड़वानी वाले तो बड़े सौभाग्यशाली हैं। जिनको आचार्य आदिसागर जी, महावीर कीर्ति जी, विमल सागर जी, सन्मति सागर जी का समागम मिला और उनसे संस्कार मिले। उन महान आचार्यों ने अच्छे संस्कार को रोपित किया। जैन संस्कारों में रात्रि भोजन, जमीकंद, शूद्र जल का त्याग होना चाहिए और अष्ट मूल गुण का पालन होना चाहिए। ये जैन धर्म सबसे दुर्लभ है। जिसको पाने के लिए देव भी तरसते हैं।</p>
<p><strong>अहंकार को छोड़कर बड़े बने होते तो योनियों में नहीं भटकते</strong></p>
<p>मुनिश्री विवर्धन सागर जी ने बताया कि गुरु आचार्यश्री विराग सागर जी ने संयम का पथ दिखलाया और जीवन को सफल बनाने के लिए मोक्ष मार्ग की राह दिखलाई। मुनि श्री ने बड़वानी को परिभाषित करते हुए कहा कि बड़वानी कह रहा है हमंे भी बड़ा बनना है और हमें घर, समाज और देश में बड़े नहीं बनना बल्कि हमें तो अपने गुणों से बड़ा बनना है। हम अपने अहंकार को छोड़कर बड़े बने होते तो इतनी योनियों में नहीं भटकते और सिद्धालय में विराजित होते, यहां नहीं बैठे होते। जो छल कपट कर रहे हैं तो वो कब तक बड़ा बनेगा। आपका छल कपट किसी से भी छिप जाए लेकिन, कर्म बांध रहे हो और कर्म बंध तो निश्चित ही है और ये आप सब घर, परिवार, समाज, देश से छिपा सकते हो लेकिन, यह पाप कर्म निश्चित नियम से उदय में आएगा। .लौकिकता में बड़े बनने से कोई फायदा नहीं है। अपने भावों से बड़े बनना है। अपने अहंकार और अंदर की गलत भावना को छोड़ना होगा।</p>
<p><strong>संघ संचालकों का सम्मान किया</strong></p>
<p>सभा के प्रारंभ में मंगलाचरण बबीता काला ने किया। आचार्य श्री विराग सागर जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन समाज के वरिष्ठ जन ने किया। मुनि श्री का पाद प्रक्षालन युवा साथियों ने किए और शास्त्र भेंट महिला मंडल ने किया। इस अवसर पर मुनि संघ का औरंगाबाद, बुलढाना से पद विहार करवाकर साथ आ रहे संघ संचालकों का पुष्पहार पहनाकर तिलक लगाकर और अंग वस्त्र भेंट कर समाज के वरिष्ठों ने सम्मान किया। संचालन मनीष जैन ने किया। कार्यक्रम में समाज के युवा, बच्चे, महिला, पुरुष उपस्थित रहे। धर्मसभा के पश्चात मुनि संघ का विहार सिद्ध क्षेत्र बावनगजा के लिए हुआ। रात्रि विश्राम पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर हुआ।</p>
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