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	<title>मुनि श्री प्रशम सागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>मुनि श्री प्रशम सागर जी महाराज का यम संल्लेखना पूर्वक समाधिमरण : रत्नत्रय भवन से डोल यात्रा निकली, उमड़े श्रद्धालु और मुनि भक्त </title>
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		<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 20:04:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री प्रशम सागर जी महाराज का यम संल्लेखना पूर्वक समाधिमरण सोमवार को हुआ।मुनिश्री का दोपहर 2.50 बजे श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर के रत्नत्रय भवन में समाधिमरण हुआ। बैंडबाजों के जुलूस के साथ शाम 4.30 बजे बाद रत्नत्रय भवन से डोल यात्रा निकली। डोलयात्रा में धरियावद के साथ उदयपुर, भींडर, कूण, खूंता, मूंगाणा, पारसोला [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री प्रशम सागर जी महाराज का यम संल्लेखना पूर्वक समाधिमरण सोमवार को हुआ।मुनिश्री का दोपहर 2.50 बजे श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर के रत्नत्रय भवन में समाधिमरण हुआ। बैंडबाजों के जुलूस के साथ शाम 4.30 बजे बाद रत्नत्रय भवन से डोल यात्रा निकली। डोलयात्रा में धरियावद के साथ उदयपुर, भींडर, कूण, खूंता, मूंगाणा, पारसोला समेत देश-प्रदेश के बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। <span style="color: #ff0000">धरियावद से पढ़िए अशोक कुमार जेतावत की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद</strong>। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रशम सागर जी महाराज का यम संल्लेखना पूर्वक समाधिमरण सोमवार को हुआ। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज और मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज के णमोकार महामंत्र एवं धर्मोपदेश श्रवण के साथ मुनिश्री का दोपहर 2.50 बजे श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर के रत्नत्रय भवन में समाधिमरण हुआ। दिगंबर जैन नरसिंहपुरा समाज के गौरव मुनि श्री प्रशम सागर जी महाराज की पार्थिव देह को सुसज्जित काष्ट निर्मित विमान में विराजमान कर बैंडबाजों के जुलूस के साथ शाम 4.30 बजे बाद रत्नत्रय भवन से डोल यात्रा निकली। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी और मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज के मुनि-आर्यिका संघ सहित बड़ी संख्या में श्रावकों का सैलाब समाधिस्थ मुनि श्री के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने मुनिश्री को श्रीफल भेंटकर अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। जुलूस धरियावद नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए सुकली नदी के किनारे स्थित समाज के समाधि स्थल पर पहुंचा। डोलयात्रा में धरियावद के साथ उदयपुर, भींडर, कूण, खूंता, मूंगाणा, पारसोला समेत देश-प्रदेश के बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।</p>
<p><strong>विधिविधान से हुआ अंतिम संस्कार</strong></p>
<p>इसके पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज एवं मुनि श्री मुमुक्षु सागर जी महाराज ने समाधि स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। पंडित हंसमुख जैन के निर्देशन में पंडित भागचंद जैन, गजेंद्र पटवा, बाल ब्रह्मचारी गज्जू भैया, विकास भैया, नमन भैया एवं अन्य त्यागी व्रती भैया बहनों और विद्वानों की उपस्थिति में विधि-विधान पूर्वक मुनिश्री का अंतिम संस्कार किया गया।</p>
<p><strong>अंतिम संस्कार का लाभ गृहस्थ अवस्था के परिवारजनों ने लिया</strong></p>
<p>दिगंबर जैन समाज के अशोक कुमार जेतावत ने बताया कि मुनि श्री प्रशम सागर जी महाराज ने रविवार को चारों तरह के आहार त्यागकर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से यम संल्लेखना ग्रहण की थी। मुनि श्री का स्वास्थ्य बीते 4-5 दिनों से खराब चल रहा था। उनके अंतिम संस्कार की समस्त क्रियाओं का लाभ प्रशम सागर जी महाराज के गृहस्थ अवस्था के परिवारजन ने लिया। विमान को कंधा देने, भूमि शुद्धि, मुनि श्री की पंचामृत अभिषेक, पूजा और अग्नि संस्कार आदि समस्त विधि मुनि श्री की गृहस्थ अवस्था के पुत्र एवं पुत्र वधु देवेंद्र कुमार-मीनाक्षी, राजकुमार-संध्या, पौत्र ऋषिराज, नयन, पौत्री नीलम, अनुश्री, आयुषी अदिति एवं समस्त बोहरा परिवार के साथ ही पुत्री सीमा, रेखा एवं तिलक, दौहित्र सिद्धार्थ, रवि और पवित्र ने संपन्न की।</p>
<p><strong>मुनि श्री का जीवन परिचय-</strong></p>
<p>मुनि श्री श्री प्रशम सागर जी महाराज का गृहस्थ अवस्था का नाम चांदमल बोहरा था। उनका जन्म 6 दिसंबर 1937 में माता मैना सुंदर एवं पिता छगनलाल के घर भींडर (राजस्थान) में हुआ था। इनके भाई जमनालाल, शांतिलाल एवं एक बहन राजू बाई थी। चांदमल जी ने शैक्षणिक योग्यता प्राप्त कर राजकीय चिकित्सा सेवा में कंपाउंडर पद पर कार्यरत रहते हुए उदयपुर अस्पताल से सेवानिवृति ली। आपका विवाह अंबा बाई बोहरा से हुआ था। आपके दो पुत्र और तीन पुत्रियों के साथ ही दो पौत्र एवं चार पौत्रियां हैं। आप राजकीय सेवानिवृत्ति के बाद अध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर हुए और संयम धारण किया। 6 दिसंबर 2011 को तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर जी में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के सिद्ध हस्त कर कमलों से जैनेश्वरी दीक्षा धारण की और चांदमल बोहरा से मुनि श्री प्रशम सागर महाराज बन गए। तब से लेकर विगत 14 वर्षों तक संयम, तप, जप की कठोर साधना के साथ मुनि चर्या का पालन करते रहे।</p>
<p><strong>यह संयोग ही है</strong></p>
<p>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के शिष्य एवं जैन दरसिंहपुरा समाज के गौरव रहे मुनि श्री पद्मकीर्ति सागर जी महाराज की समाधि जहां 17 मई को हुई, वहीं मुनि श्री श्रेयस सागर जी महाराज की 17 अप्रैल और अब मुनि श्री प्रशम सागर जी महाराज का समाधिमरण 17 मार्च हुआ। तीनों मुनिराजों की समाधि 17 तारीख को हुई। यह एक संयोग है।</p>
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